भारत और कंबोडिया के बीच संबंध ऐतिहासिक: प्रधानमंत्री मोदी 
भारत और कंबोडिया ने आर्थिक, सामाजिक विकास, क्षमता निर्माण, संस्कृति, पर्यटन और व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई 
भारत और कंबोडिया के बीच विश्व के सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक ‘अंकोरवाट’ के संरक्षण संबंधी सांस्कृतिक समझौते का भी आदान-प्रदान किया गया 
कंबोडिया के साथ स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार भारत की प्राथमिकता: पीएम मोदी

Your Excellency कम्बोडिया साम्राज्य के प्रधान मंत्री हुन सेन,


शिष्टमंडल के सम्मानीय सदस्य,


माननीय अतिथिगणमीडिया के मित्रों,


देवियों और सज्जनों,

नमस्कार।

प्रधान मंत्री हुन सेन का एक बार फिर स्वागत करते हुए मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है। उनकी यह state visit 10 वर्ष के अंतराल के बाद हो रही है।

यद्यपि प्रधान मंत्री जी आप स्वयं भारत से भली-भांति परिचित हैं, और भारत आपसे। मुझे विश्वास है कि इस यात्रा के दौरान आपको भारत की आर्थिक प्रगति और सामाजिक परिवर्तनों को नज़दीक से देखने का अच्छा अवसर मिला है।


दो दिन पहले हमने ASEAN INDIA Comemorative Summit के दौरान ASEAN-भारत सहयोग पर विस्तार से चर्चा की। भारत और 10 ASEAN देशों के नेताओं ने महत्वपूर्ण निर्णय लिये ताकि भारत और ASEAN का सहयोग आने वाले वर्षों में नई ऊँचाईयों को छुये।

इस सम्बन्ध में प्रधान मंत्री हुन सेन ने मेरे निमन्त्रण को स्वीकार कर Summit में उपस्थित होकर हमारा सम्मान बढ़ाया है।

यही नहीं, उन्होने summit के दौरान विचार-विमर्श और उसके निर्णयों में बहुमूल्य योगदान दिया। इसके लिए मैं उन्हें हृदय से धन्यवाद देता हूँ।

Friends,

भारत कंबोडिया के पुरातन काल के ऐतिहासिक सम्बन्ध पिछली शताब्दि के उत्तरार्ध में और भी प्रगाढ़ हुए जब कंबोडिया के राजनीतिक परिवर्तनों के दौरान भारत अपने पुराने मित्र और उसके नागरिकों के साथ-साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा।

प्रधान मंत्री हुन सेन और मैं इस बात पर सहमत हैं कि समसामयिक आवश्यकताओं के अनुसार आज हमें अपने सम्बन्धों को हर क्षेत्र में और भी गहरा बनाने की ज़रुरत है।

भारत-कंबोडिया के साथ अपनी साझेदारी को आर्थिक, सामाजिक विकास, capacity building, संस्कृति, व्यापार, tourism और सामान्य लोगों के बीच सम्बन्ध जैसे सभी क्षेत्रों में बढ़ाने को तैयार ही नहीं प्रतिबद्ध है।

हमारे सांस्कृतिक सम्बन्धों में हमारी साझा विरासत का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। 12वीं शताब्दी में बनाये गये ऐतिहासिक अंकोरवाट मंदिर का restoration इस सहयोग का उदाहरण है।

भारत को प्रसन्नता है कि कंबोडिया में इस सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समवर्धन के लिए हम योगदान कर सके। हमारी भाषाएं भी पाली और संस्कृत के स्रोतों से निकलीं हैं। यह हर्ष का विषय है कि हमारे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की जड़ें बहुत गहरी हैं। इसलिये आपसी Tourism को बढ़ावा देने के लिए संभावनायें हैं।

Friends,

भारत के लिए यह खुशी की बात है कि हमारा मित्र देश कंबोडिया तेज़ी से आर्थिक प्रगति कर रहा है और पिछले दो दशक में सालाना 7 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से वृद्धि करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। क्योंकि हमारे मूल्य और संस्कृति मिलती जुलती है, इसलिए हमारे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने में एक स्वाभाविक synergy हो सकती है।

कंबोडिया की liberal economic policies और ASEAN Economic Community की स्थापना कंबोडिया में भारतीय निवेश के लिए एक अच्छा अवसर प्रदान करतीं है।

खासतौर पर स्वास्थ्य, औषधी, information technology, कृषि, automobile और auto पुर्जे, textile, इत्यादि क्षेत्रों में। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में हमारे द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि होगी और भारत से और भी अधिक निवेशक तथा व्यापारी कंबोडिया में लाभप्रद उपस्थिति बना सकेंगे।

Friends,

Development co-operation भारत कंबोडिया के संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंबोडिया के सामाजिक, आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण साथी के तौर पर भारत की प्रतिबद्धता हमेशा ही रही है, और आगे भी रहेगी।

हमने कंबोडिया सरकार की ज़रुरतों के मुताबिक projects के लिए कई और line of credit प्रस्तावित की हैं। खासतौर पर स्वास्थ्य, connectivity, digital connectivity के क्षेत्रों में।

हर साल भारत कंबोडिया में 5 quick impact project क्रियान्वित कर रहा है। इन projects की संख्या सालाना 5 सेबढ़ाकर 10 करने का निर्णय हमने लिया है। पांच सौ करोड़ रुपये का project development fund हमने स्थापित किया है।

इस fund का इस्तेमाल भारत के उद्योग और business का विस्तार करने के लिए और supply chain को cost effective बनाने के लिए किया जा सकता है। हम कंबोडिया में एक Centre of Excellence in IT and IT enabled service की स्थापना कर रहे हैं।

भारत पांच दशक से भी अधिक पुराने Indian Technology & Economic Cooperation Programme में कंबोडिया का सक्रिय साथी है। एक हज़ार चार सौ से भी अधिक कंबोडिया के नागरिकों ने इस programme के द्वारा capacity building की training हासिल की है।

हम भविष्य में भी यह कार्यक्रम जारी रखेंगे और कंबोडिया की जरुरतों के मुताबिक इसका विस्तार के लिए हम तैयार हैं।

Friends,

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हमारे दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग है और अनेक क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर हमारे विश्वसनीय सम्बन्ध हैं। मौजूदा synergy को और भी बढ़ाते हुए भारत और कंबोडिया एक दूसरे का अंतर्राष्ट्रीय मंच पर समर्थन प्रदान करते रहेंगे।

अंत में, मैं प्रधान मंत्री हुन सेन को भारत के अभिन्न मित्र और सम्मानीय अतिथि के रुप में उनकी इस भारत यात्रा के लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि उनका भारत में प्रवास सुखद और यादगार रहेगा।

मैं यह भी आशवासन देता हूँ कि भारत आने वाले समय में कंबोडिया के साथ और भी घनिष्ठ सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है ताकि कंबोडिया और उसके नागरिकों के साथ हमारे गहरे और परम्परागत गहरे संबंध और भी मज़बूत हो सके। 

धन्यवाद।

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प्रधानमंत्री ने शहादत दिवस पर चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित की: जीवन शिक्षाओं को उजागर करने वाला एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया
February 27, 2026

Prime Minister Shri Narendra Modi, offered his respectful tributes to the legendary revolutionary, Chandra Shekhar Azad, the brave son of Mother India on his martyrdom day .

The Prime Minister stated that Azad sacrificed his everything to free Mother India from the shackles of slavery, and for this, he will always be remembered.

Reflecting on the legacy of the immortal revolutionary, the Prime Minister remarked that the life of Chandra Shekhar Azad demonstrates that the resolution to stand firm against injustice is the essence of true prowess. Shri Modi, added that the saga of his sacrifice for the motherland will continue to inspire every generation of the country.

Prime Minister Shared on X;

“भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, जिसके लिए वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।”

“अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का जीवन बताता है कि अन्याय के खिलाफ अडिग रहने का संकल्प ही सच्चा पराक्रम है। मातृभूमि के लिए उनके बलिदान की गाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।

न हि शौर्यात्परं किञ्चित् त्रिषु लोकेषु विद्यते।

शूरः सर्वं पालयति सर्वं शूरे प्रतिष्ठितम् ।।”

"There is no element more transcendent than bravery in the three worlds. Valor is the fundamental force that nourishes and protects the animate and inanimate world. All worldly dignity, prosperity and duty exist solely in the valor of the valiant."