प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कल यानी 01 सितंबर, 2018 को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) का शुभारंभ करेंगे।

आईपीपीबी को आम आदमी के लिए एक सुगम, किफायती और भरोसेमंद बैंक के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि केन्द्र सरकार के वित्तीय समावेश उद्देश्यों को तेजी से पूरा करने में मदद मिल सके। देश के हर कोने में फैले डाक विभाग के 3,00,000 से अधिक डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों के विशाल नेटवर्क से इसे काफी लाभ मिलेगा। इसलिए आईपीपीबी भारत में लोगों तक बैंकों की पहुंच बढ़ाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाएगा।

आईपीपीबी का शुभारंभ तेजी से विकास की ओर बढ़ते भारत का लाभ देश के दूरस्थ कोनों में सुलभ कराने संबंधी केन्द्र सरकार के प्रयासों को मजबूती देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

शुभारंभ के दिन, आईपीपीबी की देश भर में 650 शाखाएं और 3250 एक्सेस प्‍वाइंट (पहुंच केन्द्र/कार्यकलाप केन्द्र) होंगे, जहां समानांतर रूप से शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

देश भर में सभी 1.55 लाख डाकघर 31 दिसंबर, 2018 तक आईपीपीबी प्रणाली से जुड़ जाएंगे। .

आईपीपीबी बचत और चालू खातों, धन हस्तांतरण, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, बिल और उपयोगिता भुगतान और उद्यम एवं वाणिज्यिक भुगतान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इन सुविधाओं एवं इससे जुड़ी अन्य संबंधित सेवाओं को बैंक के अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी प्‍लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए बहु-विकल्प माध्यमों (काउंटर सेवाएं, माइक्रो-एटीएम, मोबाइल बैंकिंग एप, एसएमएस और आईवीआर) के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा।

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प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं के समर्पण और प्रयासों की सराहना करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 04, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के युवाओं के प्रयासों और समर्पण की सराहना करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है:

"न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते ।

तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति ॥"

श्री मोदी ने कहा है कि निरंतर प्रयास और समर्पण से हमारी प्रतिभा निखरती है और उसमें सुधार होता है, और हमारे युवा इन्हीं गुणों को अपनाकर भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर किए गए पोस्ट में लिखा है:

निरंतर प्रयास और साधना से हमारी प्रतिभा और निखरती है। आज हमारे युवा इन्हीं गुणों को आत्मसात कर दुनियाभर में देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते ।

तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति ॥