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मेरी लड़ाई गरीबी और भ्रष्टाचार के खिलाफ़ है: असम में प्रधानमंत्री मोदी
असम को बेरोजगारी और बिजली की कमी के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है: प्रधानमंत्री मोदी
असम के चाय बागान श्रमिकों ने भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया: प्रधानमंत्री
असम के लिए मेरा एजेंडा है - विकास, तीव्र विकास एवं सर्वांगीण विकास: प्रधानमंत्री मोदी 
प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न क़दमों का उल्लेख किया
पीएम मोदी ने किसानों के कल्याण वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज असम के तिनसुकिया, माजुली, बिहपुरिया और बोकाखाट में विभिन्न रैलियों को संबोधित किया। उनके संबोधन के कुछ अंश:

असम में एक ही आनंद है और वह है सर्बानंद।

हमारी सरकार के विकास के तीन एजेंडे हैं- विकास, तेज गति से विकास और चारों तरफ विकास। यदि हमें सारी समस्याओं से मुक्ति चाहिए तो उसके निदान के लिए एक ही जड़ी बूटी है और वह है - विकास, विकास और विकास।

हम सामान्य मानवीय जीवन में बदलाव लाने के कई सारे उपायों पर तेज गति से काम कर रहे हैं और इसका व्यापक असर भी देखने को मिल रहा है। हाँ, वैसे लोगों की परेशानियां जरूर बढ़ गई हैं जिनका मलाई खाना बंद हो गया है।

हमने सुना है कि कांग्रेस में पैसे खाने की आदत है, उनमें कहीं से कुछ भी मार लेने की आदत है लेकिन मुझे यह नहीं मालूम था कि कांग्रेस की सरकारें द्वीपों तक को भी खा जाती हैं।

बुजुर्गों को प्रणाम करना हमारा संस्कार है, उनसे लड़ाई करना नहीं। मेरी लड़ाई सीएम तरुण गोगोई जी से नहीं है, मेरी लड़ाई गरीबी और भ्रष्टाचार से है। हम सबको मिलकर असम की भलाई के लिए गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भाई-भतीजावाद और परिवारवाद से लड़ना है। असम का भाग्य बदलने के लिए हम सबको मिलकर, कंधे से कंधा मिलाकर काम करना जरूरी है। असम में परिवर्तन की आँधी चल रही है। इस बार असम की जनता ने राज्य में भाजपा गठबंधन की सरकार बनाने का मन बना लिया है।

आजादी के समय देश के जो सबसे पांच खुशहाल राज्य थे उनमें से एक असम भी था लेकिन अब असम की गिनती 5 सबसे गरीब राज्यों में होती है। अमीर राज्य को गरीब बनाने का पाप कांग्रेस ने किया है।

क्या कारण है कि भरपूर प्राकृतिक सम्पदा के बावजूद असम में गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ापन इतने चरम पर है, असम की इस बर्बादी का जिम्मेदार आखिर कौन है? असम में 15 साल से कांग्रेस की ही सरकार है, 10 वर्षों तक असम से ही प्रधानमंत्री रहे, फिर भी असम विकास के दौर में काफी पीछे है। असम के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई राशि को भी असम की गोगोई सरकार खर्च तक नहीं कर पाती। श्री गोगोई अपने 15 साले के कारनामों का हिसाब तो दे नहीं रहे, उलटे केंद्र सरकार से सवाल - जवाब कर रहे हैं। 

आजादी के 60 वर्षों बाद भी असम की लगभग आधी से अधिक आबादी अँधेरे में जीने को विवश है। असम के कई गाँव ऐसे हैं जहां बिजली आज तक नहीं पहुंची है। प्रति व्यक्ति बिजली उपभोग के मामले में असम का आंकड़ा देश के औसत के आधे से भी कम है।

आपने कांग्रेस को अच्छा करने की उम्मीद से 60 साल दिए, मैं आपसे बस पांच साल मांगने आया हूँ। आप हमें बस एक मौका दें, मैं आपके 60 साल के दर्द दूर कर दूंगा। मुझे आप लोगों को अन्याय से मुक्ति दिलानी है। एक बार असम के लोग राज्य में भाजपा की सरकार ले आएं, जो 60 साल में नहीं हुआ, हम 5 साल में करके दिखा देंगें।

नीतियों का जितना महत्त्व होता है, उसके कहीं अधिक महत्त्व नीयत का होता है। हिन्दुस्तान में जहां-जहां भी भाजपा सरकारें हैं, वहां तेज गति से प्रगति हो रही है, विकास के नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं लेकिन जिन-जिन प्रदेशों में भाजपा सत्ता में नहीं हैं, वहां विकास का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है। 

आपकी समस्याओं का हमें पता है, इसलिए हमने असम के विकास के लिए कई परियोजनाओं पर काम पहले ही शुरू कर दिया है। हमारा संकल्प जन-जन को दुखिया से सुखिया बनाना है। 

रेगिस्तान में पानी की किल्लत समझ में आती है लेकिन इतना पानी होने के बाद भी असम के लोग पानी को तरसते हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। 

हमारे चाय बागान में काम करने वाले लोगों ने चाय की चुस्की लेते-लेते हिंदुस्तान के लोगों में ऊर्जा भरने का काम किया है। असम की चाय उबाल-उबाल कर मैं लोगों में ऊर्जा भरा करता था। यही तो चाय है जिस चाय ने दुनिया भर में हिंदुस्तान के प्रति चाह पैदा कर दी है।

जब मैं चाय बेचता था, तब जो चाय लोगों को तरोताजा करती थी वह थी असम की चाय। यह असम का मुझ पर कर्ज है।

हमारी सरकार बनेगी तो असम में ऐसी खुशहाली छाएगी कि बच्चों को पढ़ाया जाएगा - ए फॉ़र असम। गरीबों को शिक्षा, नौजवानों को आमदनी और बुजुर्गों को दवाई मुहैया कराकर असम के हालात बदले जाएंगे।

असम हिन्दुस्तान में गाँव के विकास के लिए एक मॉडल स्टेट बन सकता है। हम 8-10 गाँवों के छोटे-छोटे समूह बनाकर वहां ररबन मिशन के माध्यम से विकास की नयी धारा बहाएंगे जहां सुविधाएं तो होंगीं शहर की, पर आत्मा गाँवों की होगी। 

हमने किसानों के कल्याण एवं उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए कई कार्य शुरू किये हैं. हमने किसानों के फसल नुकसान पर मिलनेवाले मुआवजे के पैमाने को 50% फसल नुकसान से घटाकर एक तिहाई कर दी। सुरक्षित फसल-समृद्ध किसान की दिशा में ठोस पहल करते हुए हम किसानों की भलाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लेकर आये जिसका उद्देश्य किसानों को मिनिमम प्रीमियम पर मैक्सिमम रिवार्ड देना है। पहले की फसल बीमा योजना तो किसानों के लिए थी ही नहीं, वह तो बैंकों द्वारा उनके लोन की उगाही के लिए थी। अब तो फसल की कटाई के 14 दिनों के अंदर भी यदि किसी कारण से फसल बर्बाद हो जाती है, तो भी किसानों को फसल बीमा का पूरा लाभ मिलेगा।

सरकार के लिए अपना-पराया नहीं होना चाहिए, उसका एक ही मकसद होना चाहिए - सबका एक सामान विकास। राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं होना चाहिए, इसका उद्देश्य समाज का कल्याण होना चाहिए लेकिन कांग्रेस की परिपाटी ही क्रिमिनल नेग्लिजेंस की रही है। वह राजनैतिक कारणों से कई इलाकों की उपेक्षा करती आई है।

यह कितना दुखद है कि कांग्रेस को घुसपैठिए तो अपने लगते हैं लेकिन असमिया अपने नहीं लगते। अगर इस देश में बीमारी की कोई जड़ है, मुसीबत का कोई कारण है तो वह कांग्रेस है, उसे न तो देश की चिंता है, न ही नौजवानों की चिंता है और न ही माँ-बहनों की इज्जत की चिंता है। असम की जनता ने इस बार यह तय कर लिया है वह अब तरुण गोगोई नहीं बोलेंगें, तरुण गो, गो बोलेंगें।

केंद्र सरकार यह प्रबंध कर रही है की असम को घुसपैठ की समस्या से निजात मिल सके और यदि असम में भाजपा गठबंधन की सरकार बनती है तो इस समस्या का पूर्ण निदान किया जाएगा, साथ ही घुसपैठियों को वापस भेजने का भी काम शुरू किया जाएगा।

आज महिलाओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार असम में हो रहा है, प्रसूति के समय सबसे ज्यादा माताओं और शिशुओं की मृत्यु असम में होती है, लेकिन इसकी कोई चिंता असम सरकार को है ही नहीं। असम को एक ऐसी सरकार चाहिए जो संवेदनशील हो, जो सामान्य मानवीय के सुखों की चिंता करे और असम को समस्याओं से मुक्ति दिलाये।

हमने इंद्रधनुष कार्यक्रम चलाया ताकि वैक्सीन से वंचित हर बच्चे का टीकाकरण हो जिससे कि उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके लेकिन असम में आने वाले कल को बचाने का इतना बड़ा अभियान असम सरकार की उदासीनता का शिकार हो गया।

मेरा एक सपना है कि 2022 में जब देश आजादी के 75 साल पूरे कर रहा होगा, इस देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के पास भी अपना छत हो। 

आजादी के बाद से अधिकतर ऐसी सरकारें बनी जिसमे जवाबदेही कम होती गई, हमारी सरकार का यह मत है कि जवाबदेही को जितनी प्राथमिकता दी जाएगी, परिणाम उतने ही अच्छे आएंगें।

हमने छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखते हुए जन सामान्य के जीवन में बदलाव लाने के लिए कई योजनाओं का सफल क्रियान्वयन किया जैसे हमने नीम कोटेड यूरिया की पहल कर यूरिया की कालाबाजारी पर काबू पाई। इसी तरह हमने इस बार के बजट में यह निर्णय लिया है कि अब छोटे-छोटे दुकानदार भी सातों दिन मॉल की तरह अपनी दुकानें खोल सकते हैं और देर रात तक चला सकते हैं, इससे लाखों लोगों के लिए रोजगार की संभावना भी बनती है। प्रधानमंत्री जन-धन अकाउंट के माध्यम से हम लगभग 20 करोड़ से अधिक परिवारों का बैंक खाता खोलने में सफल हुए। हमने गरीब युवाओं के स्वरोजगार के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का शुभारम्भ किया, इस योजना के तहत अब तक लगभग 3.33 लाख लोगों को करीब सवा लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बिना गारंटी के मिनिमम इंटरेस्ट रेट पर दी जा चुकी है। हमने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए सेल्फ अटेस्टेशन की शुरुआत की। छोटी नौकरियों में हमने भ्रष्टाचार ख़त्म करने के उद्देश्य से वर्ग-III और वर्ग-IV में इंटरव्यू को ख़त्म करने का फैसला किया। 

हमने गैस की सब्सिडी को सीधे लाभार्थियों के अकाउंट में सीधे डालना शुरू किया। इस योजना से लगभग तीन से चार करोड़ अवैध गैस कनेक्शन को ख़त्म करने में मदद मिली जिसके फलस्वरूप 15000 करोड़ रुपये से अधिक राशि की बचत हुई। पहले तो पता ही नहीं चलता था कि सिलिंडर कहाँ जाती है और सब्सिडी कहा जाती है। फिर हमने संपन्न लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील की, लगभग 85 लाख लोगों ने सब्सिडी छोड़कर एक अनोखी मिसाल कायम की। लगभग डेढ़ करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन देने का निर्णय लिया गया है।

दुनिया की बड़ी-बड़ी ताकतें इस आर्थिक मंदी के दौर में हिल गई हैं जबकि हिन्दुस्तान लगातार दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी हुई है और तमाम आर्थिक एजेंसियों ने इस बात को स्वीकार किया है। 

इस बार के विधान सभा चुनाव में सिर्फ सरकार बनाने के लिए बटन नहीं दबाना है बल्कि असम में विकास का एक नया युग आरम्भ करने के लिए बटन दबाना है।

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