मेरी लड़ाई गरीबी और भ्रष्टाचार के खिलाफ़ है: असम में प्रधानमंत्री मोदी
असम को बेरोजगारी और बिजली की कमी के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है: प्रधानमंत्री मोदी
असम के चाय बागान श्रमिकों ने भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया: प्रधानमंत्री
असम के लिए मेरा एजेंडा है - विकास, तीव्र विकास एवं सर्वांगीण विकास: प्रधानमंत्री मोदी 
प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न क़दमों का उल्लेख किया
पीएम मोदी ने किसानों के कल्याण वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज असम के तिनसुकिया, माजुली, बिहपुरिया और बोकाखाट में विभिन्न रैलियों को संबोधित किया। उनके संबोधन के कुछ अंश:

असम में एक ही आनंद है और वह है सर्बानंद।

हमारी सरकार के विकास के तीन एजेंडे हैं- विकास, तेज गति से विकास और चारों तरफ विकास। यदि हमें सारी समस्याओं से मुक्ति चाहिए तो उसके निदान के लिए एक ही जड़ी बूटी है और वह है - विकास, विकास और विकास।

हम सामान्य मानवीय जीवन में बदलाव लाने के कई सारे उपायों पर तेज गति से काम कर रहे हैं और इसका व्यापक असर भी देखने को मिल रहा है। हाँ, वैसे लोगों की परेशानियां जरूर बढ़ गई हैं जिनका मलाई खाना बंद हो गया है।

हमने सुना है कि कांग्रेस में पैसे खाने की आदत है, उनमें कहीं से कुछ भी मार लेने की आदत है लेकिन मुझे यह नहीं मालूम था कि कांग्रेस की सरकारें द्वीपों तक को भी खा जाती हैं।

बुजुर्गों को प्रणाम करना हमारा संस्कार है, उनसे लड़ाई करना नहीं। मेरी लड़ाई सीएम तरुण गोगोई जी से नहीं है, मेरी लड़ाई गरीबी और भ्रष्टाचार से है। हम सबको मिलकर असम की भलाई के लिए गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भाई-भतीजावाद और परिवारवाद से लड़ना है। असम का भाग्य बदलने के लिए हम सबको मिलकर, कंधे से कंधा मिलाकर काम करना जरूरी है। असम में परिवर्तन की आँधी चल रही है। इस बार असम की जनता ने राज्य में भाजपा गठबंधन की सरकार बनाने का मन बना लिया है।

आजादी के समय देश के जो सबसे पांच खुशहाल राज्य थे उनमें से एक असम भी था लेकिन अब असम की गिनती 5 सबसे गरीब राज्यों में होती है। अमीर राज्य को गरीब बनाने का पाप कांग्रेस ने किया है।

क्या कारण है कि भरपूर प्राकृतिक सम्पदा के बावजूद असम में गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ापन इतने चरम पर है, असम की इस बर्बादी का जिम्मेदार आखिर कौन है? असम में 15 साल से कांग्रेस की ही सरकार है, 10 वर्षों तक असम से ही प्रधानमंत्री रहे, फिर भी असम विकास के दौर में काफी पीछे है। असम के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई राशि को भी असम की गोगोई सरकार खर्च तक नहीं कर पाती। श्री गोगोई अपने 15 साले के कारनामों का हिसाब तो दे नहीं रहे, उलटे केंद्र सरकार से सवाल - जवाब कर रहे हैं। 

आजादी के 60 वर्षों बाद भी असम की लगभग आधी से अधिक आबादी अँधेरे में जीने को विवश है। असम के कई गाँव ऐसे हैं जहां बिजली आज तक नहीं पहुंची है। प्रति व्यक्ति बिजली उपभोग के मामले में असम का आंकड़ा देश के औसत के आधे से भी कम है।

आपने कांग्रेस को अच्छा करने की उम्मीद से 60 साल दिए, मैं आपसे बस पांच साल मांगने आया हूँ। आप हमें बस एक मौका दें, मैं आपके 60 साल के दर्द दूर कर दूंगा। मुझे आप लोगों को अन्याय से मुक्ति दिलानी है। एक बार असम के लोग राज्य में भाजपा की सरकार ले आएं, जो 60 साल में नहीं हुआ, हम 5 साल में करके दिखा देंगें।

नीतियों का जितना महत्त्व होता है, उसके कहीं अधिक महत्त्व नीयत का होता है। हिन्दुस्तान में जहां-जहां भी भाजपा सरकारें हैं, वहां तेज गति से प्रगति हो रही है, विकास के नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं लेकिन जिन-जिन प्रदेशों में भाजपा सत्ता में नहीं हैं, वहां विकास का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है। 

आपकी समस्याओं का हमें पता है, इसलिए हमने असम के विकास के लिए कई परियोजनाओं पर काम पहले ही शुरू कर दिया है। हमारा संकल्प जन-जन को दुखिया से सुखिया बनाना है। 

रेगिस्तान में पानी की किल्लत समझ में आती है लेकिन इतना पानी होने के बाद भी असम के लोग पानी को तरसते हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। 

हमारे चाय बागान में काम करने वाले लोगों ने चाय की चुस्की लेते-लेते हिंदुस्तान के लोगों में ऊर्जा भरने का काम किया है। असम की चाय उबाल-उबाल कर मैं लोगों में ऊर्जा भरा करता था। यही तो चाय है जिस चाय ने दुनिया भर में हिंदुस्तान के प्रति चाह पैदा कर दी है।

जब मैं चाय बेचता था, तब जो चाय लोगों को तरोताजा करती थी वह थी असम की चाय। यह असम का मुझ पर कर्ज है।

हमारी सरकार बनेगी तो असम में ऐसी खुशहाली छाएगी कि बच्चों को पढ़ाया जाएगा - ए फॉ़र असम। गरीबों को शिक्षा, नौजवानों को आमदनी और बुजुर्गों को दवाई मुहैया कराकर असम के हालात बदले जाएंगे।

असम हिन्दुस्तान में गाँव के विकास के लिए एक मॉडल स्टेट बन सकता है। हम 8-10 गाँवों के छोटे-छोटे समूह बनाकर वहां ररबन मिशन के माध्यम से विकास की नयी धारा बहाएंगे जहां सुविधाएं तो होंगीं शहर की, पर आत्मा गाँवों की होगी। 

हमने किसानों के कल्याण एवं उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए कई कार्य शुरू किये हैं. हमने किसानों के फसल नुकसान पर मिलनेवाले मुआवजे के पैमाने को 50% फसल नुकसान से घटाकर एक तिहाई कर दी। सुरक्षित फसल-समृद्ध किसान की दिशा में ठोस पहल करते हुए हम किसानों की भलाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लेकर आये जिसका उद्देश्य किसानों को मिनिमम प्रीमियम पर मैक्सिमम रिवार्ड देना है। पहले की फसल बीमा योजना तो किसानों के लिए थी ही नहीं, वह तो बैंकों द्वारा उनके लोन की उगाही के लिए थी। अब तो फसल की कटाई के 14 दिनों के अंदर भी यदि किसी कारण से फसल बर्बाद हो जाती है, तो भी किसानों को फसल बीमा का पूरा लाभ मिलेगा।

सरकार के लिए अपना-पराया नहीं होना चाहिए, उसका एक ही मकसद होना चाहिए - सबका एक सामान विकास। राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं होना चाहिए, इसका उद्देश्य समाज का कल्याण होना चाहिए लेकिन कांग्रेस की परिपाटी ही क्रिमिनल नेग्लिजेंस की रही है। वह राजनैतिक कारणों से कई इलाकों की उपेक्षा करती आई है।

यह कितना दुखद है कि कांग्रेस को घुसपैठिए तो अपने लगते हैं लेकिन असमिया अपने नहीं लगते। अगर इस देश में बीमारी की कोई जड़ है, मुसीबत का कोई कारण है तो वह कांग्रेस है, उसे न तो देश की चिंता है, न ही नौजवानों की चिंता है और न ही माँ-बहनों की इज्जत की चिंता है। असम की जनता ने इस बार यह तय कर लिया है वह अब तरुण गोगोई नहीं बोलेंगें, तरुण गो, गो बोलेंगें।

केंद्र सरकार यह प्रबंध कर रही है की असम को घुसपैठ की समस्या से निजात मिल सके और यदि असम में भाजपा गठबंधन की सरकार बनती है तो इस समस्या का पूर्ण निदान किया जाएगा, साथ ही घुसपैठियों को वापस भेजने का भी काम शुरू किया जाएगा।

आज महिलाओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार असम में हो रहा है, प्रसूति के समय सबसे ज्यादा माताओं और शिशुओं की मृत्यु असम में होती है, लेकिन इसकी कोई चिंता असम सरकार को है ही नहीं। असम को एक ऐसी सरकार चाहिए जो संवेदनशील हो, जो सामान्य मानवीय के सुखों की चिंता करे और असम को समस्याओं से मुक्ति दिलाये।

हमने इंद्रधनुष कार्यक्रम चलाया ताकि वैक्सीन से वंचित हर बच्चे का टीकाकरण हो जिससे कि उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके लेकिन असम में आने वाले कल को बचाने का इतना बड़ा अभियान असम सरकार की उदासीनता का शिकार हो गया।

मेरा एक सपना है कि 2022 में जब देश आजादी के 75 साल पूरे कर रहा होगा, इस देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के पास भी अपना छत हो। 

आजादी के बाद से अधिकतर ऐसी सरकारें बनी जिसमे जवाबदेही कम होती गई, हमारी सरकार का यह मत है कि जवाबदेही को जितनी प्राथमिकता दी जाएगी, परिणाम उतने ही अच्छे आएंगें।

हमने छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखते हुए जन सामान्य के जीवन में बदलाव लाने के लिए कई योजनाओं का सफल क्रियान्वयन किया जैसे हमने नीम कोटेड यूरिया की पहल कर यूरिया की कालाबाजारी पर काबू पाई। इसी तरह हमने इस बार के बजट में यह निर्णय लिया है कि अब छोटे-छोटे दुकानदार भी सातों दिन मॉल की तरह अपनी दुकानें खोल सकते हैं और देर रात तक चला सकते हैं, इससे लाखों लोगों के लिए रोजगार की संभावना भी बनती है। प्रधानमंत्री जन-धन अकाउंट के माध्यम से हम लगभग 20 करोड़ से अधिक परिवारों का बैंक खाता खोलने में सफल हुए। हमने गरीब युवाओं के स्वरोजगार के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का शुभारम्भ किया, इस योजना के तहत अब तक लगभग 3.33 लाख लोगों को करीब सवा लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बिना गारंटी के मिनिमम इंटरेस्ट रेट पर दी जा चुकी है। हमने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए सेल्फ अटेस्टेशन की शुरुआत की। छोटी नौकरियों में हमने भ्रष्टाचार ख़त्म करने के उद्देश्य से वर्ग-III और वर्ग-IV में इंटरव्यू को ख़त्म करने का फैसला किया। 

हमने गैस की सब्सिडी को सीधे लाभार्थियों के अकाउंट में सीधे डालना शुरू किया। इस योजना से लगभग तीन से चार करोड़ अवैध गैस कनेक्शन को ख़त्म करने में मदद मिली जिसके फलस्वरूप 15000 करोड़ रुपये से अधिक राशि की बचत हुई। पहले तो पता ही नहीं चलता था कि सिलिंडर कहाँ जाती है और सब्सिडी कहा जाती है। फिर हमने संपन्न लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील की, लगभग 85 लाख लोगों ने सब्सिडी छोड़कर एक अनोखी मिसाल कायम की। लगभग डेढ़ करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन देने का निर्णय लिया गया है।

दुनिया की बड़ी-बड़ी ताकतें इस आर्थिक मंदी के दौर में हिल गई हैं जबकि हिन्दुस्तान लगातार दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी हुई है और तमाम आर्थिक एजेंसियों ने इस बात को स्वीकार किया है। 

इस बार के विधान सभा चुनाव में सिर्फ सरकार बनाने के लिए बटन नहीं दबाना है बल्कि असम में विकास का एक नया युग आरम्भ करने के लिए बटन दबाना है।

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इस साल का केंद्रीय बजट आर्थिक विकास को टिकाऊ और सुदृढ़ बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दोहराता है: पीएम मोदी
March 03, 2026
इस वर्ष का केंद्रीय बजट आर्थिक विकास बरकरार रखने और मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को और पुष्ट करता है: प्रधानमंत्री
हमारी दिशा स्पष्ट है, हमारा संकल्प स्पष्ट है, अधिक निर्माण करें, अधिक उत्पादन करें, अधिक संपर्क स्थापित करें, अधिक निर्यात करें: प्रधानमंत्री
दुनिया विश्वसनीय और सामर्थ्यवान विनिर्माण साझेदारों की तलाश में है और आज भारत के पास इस भूमिका को ठोस तरीके से निभाने का अवसर है: प्रधानमंत्री
भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, हमारे लिए अवसरों के बहुत बड़े द्वार खुल गए हैं और ऐसी स्थिति में गुणवत्ता से कभी समझौता न करना हमारी जिम्मेदारी है: प्रधानमंत्री
कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज मिशन एक महत्वपूर्ण पहल है, स्थिरता को मुख्य व्यावसायिक रणनीति में जोड़ना आवश्यक होगा: प्रधानमंत्री
जो उद्योग समय रहते स्वच्छ प्रौद्योगिकी में निवेश करेंगे, वे आने वाले वर्षों में नए बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाने में सक्षम होंगे: प्रधानमंत्री
आज विश्व अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन हो रहा है, क्योंकि बाजार अब न केवल लागत बल्कि स्थिरता पर भी ध्यान दे रहे हैं: प्रधानमंत्र

नमस्कार !

गत् सप्ताह, बजट वेबिनार सीरीज के पहले वेबिनार का आयोजन हुआ, और मुझे ऐसा बताया गया कि वो बहुत सफल रहा, और बजट प्रावधानों के Implementation को लेकर हर किसी ने काफी उत्तम सुझाव दिए, सबकी सक्रिय भागीदारी का मैं स्वागत करता हूं और आज इस सीरीज के दूसरे वेबिनार का आयोजन हो रहा है। और मुझे बताया गया कि आज हजारों की तादाद में, ढेर सारे विषयों पर अनगिनत लोग अपने सुझाव देने वाले हैं। विषय के जो एक्सपर्ट्स हैं, वे भी हमसे जुड़ने वाले हैं। इतनी बड़ी तादाद में बजट पर चर्चा, ये अपने आप में एक बहुत सफल प्रयोग है। आप सब समय निकाल करके इस वेबिनार में जुड़े। मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं, आपका स्वागत करता हूं। इस वेबिनार की थीम देश की Economic Growth को निरंतर मजबूती देने से जुड़ी हुई है। आज जब भारत अपनी मजबूत economy से पूरे विश्व की उम्मीद बना हुआ है, आज जब ग्लोबल सप्लाई चैन re-shape हो रही है, तब अर्थव्यवस्था की तेज प्रगति विकसित भारत का भी बहुत बड़ा आधार है। हमारी दिशा स्पष्ट है, हमारा संकल्प स्पष्ट है, Build more, produce more, connect more और अब जरूरत है Export more, और निश्चित तौर पर इसमें आज आपके बीच जो मंथन होगा, इस मंथन से जो सुझाव निकलेंगे, उनकी बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

आप सब जानते हैं, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, हमारे MSME's, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, इतना ही नहीं, हमारे छोटे-बड़े शहर, ये अर्थव्यवस्था के पिलर्स के तौर पर दिखने में तो अलग-अलग लगते हैं, लेकिन वे सभी interconnected हैं। जैसे, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग नए अवसर तैयार करती है, और इससे निर्यात में बढ़ोतरी होती है। Competitive MSMEs से flexibility और इनोवेशन को बढ़ावा मिलता है। बेहतर लॉजिस्टिक्स से लागत कम होती है। Well-planned शहर investment और talent दोनों को अपनी ओर खींचते हैं। इन सभी पिलर्स को इस साल के बजट ने बहुत मजबूती दी है।

लेकिन साथियों,

कोई भी दिशा अपने आप परिणाम नहीं बन जाती, जमीन पर बदलाव तब आता है, जब industry, financial institutions, राज्य सरकारें, मिलकर उसे वास्तविकता बनाते हैं। मेरी अपेक्षा है, इस वेबिनार में आप सभी अपने मंथन में कुछ विषयों को जरूर प्राथमिकता दें, जैसे मैन्युफैक्चरिंग और प्रॉडक्शन, ये कैसे बढ़े, Cost structure को कैसे कंपटीटिव बनाया जा सकता है, निवेश का प्रवाह कैसे तेज हो, और विकास कैसे देश के कोने-कोने तक पहुंचे। इस दिशा में आपके सुझाव बहुत अहम साबित होंगे।

साथियों,

मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आज देश कोर इंडस्ट्रियल क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। और इस मार्ग में जो चुनौतियां हैं, उन्हें भी दूर किया जा रहा है। Dedicated Rare Earth Corridors, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग, ऐसे सेक्टर्स पर फोकस करके हम अपने ट्रेड इकोसिस्टम को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। बजट में बायोफार्मा शक्ति मिशन की घोषणा भी की गई है। इस मिशन का उद्देश्य है, भारत को biologics और next-generation थेरेपीज के क्षेत्र में ग्लोबल हब बनाना। हम Advanced Biopharma Research और मैन्युफैक्चरिंग में लीडरशिप की ओर बढ़ना चाहते हैं।

साथियों,

आज दुनिया विश्वसनीय और resilient manufacturing partners की तलाश में है। भारत के पास यह अवसर है कि वह इस भूमिका को मजबूती से निभाए। इसके लिए आप सभी स्टेकहोल्डर्स को बहुत आत्मविश्वास के साथ निवेश करना होगा, नई टेक्नोलॉजी अपनानी होगी और रिसर्च में जो कंजूसी करते हैं ना, वो जमाना चला गया, अब हमें रिसर्च में बड़ा इनवेस्टमेंट करना होगा, और ग्लोबल स्टैंडर्ड के अनुरूप क्वालिटी भी सुनिश्चित करनी होगी, और मैं बार-बार कहता हूं कि अब हमें आगे बढ़ने के जब अवसर आए हैं, तो हमारा एक ही मंत्र होना चाहिए, क्वालिटी-क्वालिटी-क्वालिटी।

साथियों,

भारत ने बहुत सारे देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। हमारे लिए अवसरों का, यानि अवसरों का बहुत बड़ा द्वार खुला है। ऐसे में हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम क्वालिटी पर कभी भी समझौता ना करें, अगर किसी एक चीज पर सबसे ज्यादा ताकत, बुद्धि, शक्ति, समझ लगानी है, तो हमें क्वालिटी पर बहुत ज्यादा जोर देना चाहिए। हमारे प्रोडक्ट्स की क्वालिटी ग्लोबल स्टैंडर्ड, इतना ही नहीं, उससे भी बेहतर हो। और इसके लिए हमें दूसरे देशों की जरूरतों को, वहां के लोगों की अपेक्षाओं को भी, उसका अध्ययन करना पड़ेगा, रिसर्च करनी पड़ेगी, उसे समझना होगा। हमें दूसरे देशों के लोगों की पसंद और उनके कंफर्ट को स्टडी करना, ये सबसे बड़ी आवश्यकता है, और रिसर्च करनी चाहिए। मान लीजिए कोई छोटा पुर्जा मांगता है, और वो बहुत बड़ा जहाज बना रहा है, लेकिन हम पुर्जे में चलो भेज दो, क्या है? तो कौन लेगा आपका पुर्जा? भले आपके लिए वह छोटा पुर्जा है, लेकिन उसकी एक बहुत बड़ी जो मैन्युफैक्चरिंग की यूनिट है, उसमें बहुत बड़ा महत्व रखता है। और इसलिए आज दुनिया में हमारे लिए क्वालिटी ही इस कंपिटिटिव वर्ल्ड के अंदर सुनहरा अवसर बना देती है। हमें उनके हिसाब से यूजर फ्रेंडली प्रोडक्ट बनाने होंगे। तभी हम उन अवसरों का लाभ उठा पाएंगे, और जो फ्री ट्रेड एग्रीमेंट तैयार हो चुका है, अब ये विकास का महामार्ग आपके लिए तैयार है। मैं उम्मीद करता हूं कि इस वेबिनार में इस विषय पर फोकस करते हुए भी आप सब जरूर चर्चा करेंगे।

साथियों,

हमने MSME classification में जो Reforms किए, उसका व्यापक प्रभाव दिख रहा है। इससे enterprises का ये डर खत्म हुआ है कि वो अपना विस्तार करेंगे, तो उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाले फायदे बंद हो जाएंगे। क्रेडिट तक MSME's की आसान पहुंच बनाने, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन को बढ़ावा देने और कपैसिटी बिल्डिंग की दिशा में लगातार प्रयास हुए हैं।

लेकिन साथियों,

इन प्रयासों का असर तभी दिखाई देगा, जब MSMEs ज्यादा से ज्यादा कंपटीशन में उतरेंगे, और विजयी होने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे। अब समय है कि MSMEs अपनी प्रोडक्टिविटी और बढ़ाएं, क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को ऊंचा करें, डिजिटल प्रोसेस और मजबूत वैल्यू चैन से जुड़ें। इस दिशा में, इस वेबिनार में आपके सुझाव बहुत अहम होंगे।

साथियों,

इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स हमारी growth strategy के कोर पिलर्स हैं। इस वर्ष के बजट में रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रस्ताव है। High-capacity transport systems का निर्माण, रेलवे, हाइवे, पोर्ट, एयरपोर्ट, वाटरवे के बीच बेहतर तालमेल, अलग-अलग फ्रेट कॉरिडोर और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी का विस्तार, ये सभी कदम खर्च कम करने और efficiency improve करने के लिए आवश्यक है। इसलिए, नए वाटरवेज, शिप रिपेयर फैसिलिटी और Regional Centres of Excellence हमारे लॉजिस्टिक इकोसिस्टम को मजबूत करेंगे। सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकास के ग्रोथ कनेक्टर बनने वाले हैं। लेकिन आप भी जानते हैं, इस इंफ्रास्ट्रक्चर का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब उद्योग और निवेशक अपनी रणनीतियों को इस विजन के अनुरूप में ढालेंगे। ये रणनीतियां क्या होगी, इस पर भी आपको विस्तार से चर्चा करनी चाहिए, और मुझे पूरा विश्वास है कि आप जरूर इन बातों पर ध्यान देंगे।

साथियों,

भारत की विकास यात्रा में अर्बनाइजेशन, शहरीकरण का भी बहुत अहम रोल है। भारत की future growth इस बात पर निर्भर करेगी कि हम अपने शहरों को कितना effectively plan और manage करते हैं। हमारे Tier-II और Tier-III शहर, नए growth anchors कैसे बनें, इसके लिए भी इस बजट वेबिनार में आपके सुझाव बहुत अहम होंगे।

साथियों,

आज दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन चल रहा है। बाजार अब केवल लागत नहीं देखते हैं, वे sustainability भी देखते हैं। इस दिशा में Carbon Capture, Utilisation and Storage Mission एक महत्वपूर्ण पहल है। अब sustainability उसको आपको core business strategy का हिस्सा बनाना ही होगा। जो उद्योग समय रहते क्लीन टेक्नोलॉजी में निवेश करेंगे, वे आने वाले वर्षों में नए-नए बाजारों तक बेहतर पहुंच बना पाएंगे। इस साल बजट ने नई दिशा दी है। मेरा आग्रह है कि उद्योग, निवेशक और विभिन्न संस्थान मिलकर इस पर आगे बढ़ें।

साथियों,

विकसित भारत का लक्ष्य collective ownership से ही हासिल किया जा सकता है। ये बजट वेबिनार भी सिर्फ discussion का प्लेटफॉर्म ना बने, सिर्फ अपने ज्ञान को हम बटोरते रहे, ऐसा नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें collective ownership दिखे, ये बहुत जरूरी है। बजट ने framework दिया है, अब आपको मिलकर momentum पैदा करना है। आपको हमारे प्रयासों में सहभागी बनना है। आपका हर सुझाव, हर अनुभव जमीन पर बेहतरीन नतीजें लाने की क्षमता रखता है। आपके सुझाव देश की प्रगति में माइलस्टोन बनें, इसी विश्वास के साथ आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कार !