थाईलैंड की यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य का मूल पाठ इस प्रकार से है।

“मैं 3 नवंबर को 16वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और 4 नवंबर को 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एवं राष्ट्रों के बीच वार्तालाप हेतु तीसरे क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए बैंकॉक की यात्रा करूंगा।

यात्रा के दौरान, मैं बैंकॉक में उपस्थित अन्य वैश्विक नेताओं के साथ संबंधित शिखर बैठकों के अलावा द्विपक्षीय वार्तालाप भी करूंगा।

आसियान से संबंधित शिखर सम्मेलन हमारी राजनयिक नीति के अभिन्न अंग हैं और हमारी एक्ट-ईस्ट पॉलिसी का एक महत्वपूर्ण तत्व है।

आसियान के साथ हमारी साझेदारी संपर्क, क्षमता निर्माण, वाणिज्य और संस्कृति के प्रमुख स्तंभों के माध्यम से परिपुष्ट है। हमने जनवरी 2018 में नई दिल्ली में एक विशेष स्मारक शिखर सम्मेलन के दौरान आसियान के साथ अपनी वार्ता भागीदारी की 25वीं वर्षगांठ मनाई थी, इस दौरान हमारे गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी दस आसियान देशों के नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में सम्मानित किया गया था।

मैं आसियान भागीदारों के साथ अपनी सहयोगी गतिविधियों के अलावा आसियान एवं आसियान के नेतृत्व वाले तंत्र को मजबूत करने (समुद्र, भूमि, वायु, डिजिटल और लोगों से लोगों) संपर्क बढ़ाने एवं आर्थिक भागीदारी को और मजबूत करने तथा समुद्री सहयोग का विस्तार करने से संबंधित योजनाओं की भी समीक्षा करूंगा।

आज पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) क्षेत्रीय सहयोग संरचना का एक प्रमुख घटक है। यह नेताओं के नेतृत्व वाले अग्रणी बुनियादी ढांचे के रूप में आसियान पर केंद्रित है और इसमें क्षेत्र के प्रमुख देशों के सदस्य अथवा इससे जुड़े महत्वपूर्ण हित शामिल हैं। हम ईएएस के एजेंडे में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों और अपने वर्तमान कार्यक्रम एवं परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करेंगे। मैं अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी ध्यान केंद्रित करूंगा इस विषय में ईएएस के दौरान आसियान भागीदारों और अन्य लोगों के साथ हमारी मजबूत समाभिरूपता को देखते हुए मुझे प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है।

आरसीईपी शिखर सम्मेलन के दौरान हम आरसीईपी वार्ता में प्रगति की समीक्षा करेंगे। हम इस शिखर सम्मेलन के दौरान माल, सेवाओं और निवेशों में भारत की चिंताओं और व्यापार हितों सहित सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।

आसियान के अध्यक्ष के रूप में थाईलैंड के प्रधानमंत्री द्वारा निरंतरता पर 4 नवंबर को आयोजित एक विशेष लीडर्स भोज कार्यक्रम में मैं भाग लूंगा।

मैं 2 नवंबर को थाईलैंड में भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित एक स्वागत समारोह में भी सहभागी बनूंगा। थाईलैंड में भारतीय मूल के लोगों और प्रवासी भारतीयों ने थाईलैंड के साथ भारत के घनिष्ट संबंधों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।"

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विश्व वन्यजीव दिवस पर प्रधानमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, संस्कृत में सुभाषितम् साझा किया
March 03, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि विश्व वन्यजीव दिवस हमारी पृथ्वी को समृद्ध बनाने वाली और हमारे पारिस्थितिक तंत्र को कायम रखने वाली अद्भुत जीव विविधता का उत्सव मनाने का दिन है। उन्होंने कहा कि यह वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले सभी लोगों को सम्मानित करने और उनके संरक्षण, टिकाऊ प्रथाओं और प्राकृतिक निवास की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का दिन है ताकि वन्यजीव फलते-फूलते रहें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि भारत में विश्व के कुछ सबसे अद्भुत वन्य प्राणियों का निवास है और उनका पालन-पोषण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत में बाघों की विश्व की 70% से अधिक और साथ ही एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी आबादी पायी जाती है तथा एशियाई हाथियों की अधिकतम संख्या भी यहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत विश्व का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां जंगल के राजा एशियाई शेरों की संख्या बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि सरकार ने वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अनेक प्रयास किए हैं। इनमें अन्य देशों के साथ सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने के लिए एक अद्वितीय मंच के रूप में अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की स्थापना शामिल है। इसके अतिरिक्त, अन्य प्रयासों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, घड़ियाल और स्लॉथ बियर के संरक्षण के उद्देश्य से की गई पहल के साथ-साथ चीतों का स्थानांतरण भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने भारत के सांस्कृतिक लोकाचार पर बल देते हुए कहा कि हमारे शास्त्र सभी जीवित प्राणियों के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ उनके प्रति संवेदनशीलता को प्रेरित करते हैं। उन्होंने इस अवसर पर संस्कृत का नीतिपरक श्लोक साझा किया जिसमें कहा गया है-

"निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्। तस्माद् व्याघ्रो वनं रक्षेद् वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥"

उक्त सुभाषितम् का संदेश यह है कि जंगलों के बिना बाघ विलुप्त हो जाते हैं और बाघों के बिना जंगल नष्ट हो जाते हैं। इसलिए, बाघ जंगल की रक्षा करते हैं और जंगल बाघ की रक्षा करते हैं जो प्रकृति में परस्पर गहरी निर्भरता को रेखांकित करता है।

श्री मोदी ने X पर अपने कई पोस्टों की श्रृंखला में कहा-

विश्व वन्यजीव दिवस हमारी पृथ्वी को समृद्ध बनाने और हमारे पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने वाली अद्भुत जीव विविधता का उत्सव मनाने का दिन है। यह वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में काम करने वाले सभी लोगों को सम्मानित करने का दिन है। हम संरक्षण, टिकाऊ प्रथाओं और आवासों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं ताकि हमारे वन्यजीव फलते-फूलते रहें।

हमें इस बात पर गर्व है कि भारत में विश्व के कुछ सबसे अद्भुत वन्य प्राणी पाए जाते हैं। विश्व में 70% से अधिक बाघों का निवास हमारे यहां है। हमारे यहां एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी आबादी और एशियाई हाथियों की अधिकतम संख्या भी है। भारत विश्व का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां वनराज एशियाई शेर फल-फूल रहे हैं।

एनडीए सरकार ने वन्यजीव संरक्षण के लिए कई प्रयास किए हैं। इनमें अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की स्थापना शामिल है जो अन्य देशों के साथ सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने के लिए एक अद्वितीय मंच है। अन्य प्रयासों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, घड़ियाल, स्लॉथ बियर की सुरक्षा और चीतों का स्थानांतरण शामिल हैं।

"आज विश्व वन्यजीव दिवस है। हमारे शास्त्रों में सभी जीवों के कल्याण की कामना की गई है। उनसे हमें प्राणियों के संरक्षण के साथ-साथ उनके प्रति संवेदनशील होने की प्रेरणा भी मिलती है। उसका एक उदाहरण यह है...

निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्।

तस्माद् व्याघ्रो वनं रक्षेद् वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥”