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आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता की बड़ी जिम्मेदारी भारतीय उद्योगों पर है: पीएम
भारत, विदेशी निवेश को लेकर पहले आशंकित रहा था, लेकिन आज देश हर तरह के निवेश का स्वागत कर रहा है: पीएम
आज देशवासियों का भरोसा भारत में निर्मित उत्पादों पर है: पीएम
हमारे उद्योगों पर देश के विश्वास का परिणाम यह है कि कारोबार में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) और जीवन जीने में आसानी (ईज ऑफ लिविंग) में सुधार हो रहा है, कंपनी अधिनियम में किए गए बदलाव इसकी पुष्टि करते हैं: पीएम
आज देश में एक ऐसी सरकार है, जो देशहित में सबसे बड़ा जोखिम उठाने को तैयार है, पिछली सरकारें राजनीतिक जोखिम लेने का साहस नहीं जुटा पाईं: पीएम
यह सरकार कठिन सुधार करने में सक्षम है; क्योंकि इसके लिए सरकारी सुधार, बाध्यता नहीं दृढ़ विश्वास के विषय है: पीएम
पूर्वप्रभावी कराधान को समाप्त करने से सरकार और उद्योग जगत के बीच आपसी विश्वास और मजबूत होगा: पीएम

नमस्कार जी, 

भारत की प्रगति को गति देने वाले, industry के सभी दिग्गजों को, CII के सभी सदस्यों को नमस्कार! केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे वरिष्ठ सहयोगीगण, CII के President श्री टीवी नरेन्द्रन जी, Industry के सभी लीडर्स, इस कार्यक्रम में उपस्थित अनेक देशों के राजनयिकगण, विभिन्न देशों में नियुक्त भारत के राजदूतगण, देवियों और सज्जनों! 

Global Pandemic के इस दौर में आज की ये बैठक बहुत अहम है। इतने बड़े संकट के बीच हम सरकार और भारत के उद्योग जगत की साझेदारी को मजबूत होते भी देख रहे हैं। Masks, PPE , ventilators से लेकर टीकाकरण तक, देश को जो भी ज़रूरत पड़ी, जब भी जरूरत पड़ी, इंडस्ट्री ने आगे बढ़कर हर संभव योगदान दिया है। Industry के आप सभी साथी, सभी संगठन भारत की growth story का बहुत बड़ा हिस्सा रहे हैं। आप सभी के प्रयासों से भारत की economy अब फिर गति पकड़ रही है। आज शायद ही कोई दिन ऐसा हो जब new opportunities को लेकर किसी न किसी CEO का statement न आता हो, या कोई report न आती हो। IT sector में record hiring को लेकर भी हमने रिपोर्ट्स देखी हैं। ये देश में digitization और demand की growth का ही परिणाम है। ऐसे में अब हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम इन नए अवसरों का उपयोग करते हुए, अपने लक्ष्यों की तरफ दोगुनी गति से बढ़ें।

साथियों,

CII की ये बैठक इस बार 75वें स्वतंत्रता दिवस के माहौल में, आज़ादी के अमृत महोत्सव के बीच हो रही है। ये बहुत बड़ा अवसर है, भारतीय उद्योग जगत के नए संकल्पों के लिए, नए लक्ष्यों के लिए। आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का बहुत बड़ा दायित्व, भारतीय उद्योगों पर है। और मैं आप लोगों से कहना चाहता हूं कि सरकार आपके साथ है, आपके हर प्रयास के साथ है। आज देश में विकास के प्रति जो वातावरण बना है, अपने सामर्थ्य के प्रति जो विश्वास बना है, भारतीय उद्योग जगत को उसका पूरा लाभ उठाना चाहिए। बीते वर्षों में भारत में जो बदलाव आए हैं, चाहे सरकार की सोच और अप्रोच में हो, सरकारी व्यवस्थाओं के काम करने के तरीके में हो, वो आप सब स्वंय अनुभव कर रहे हैं, देख रहे हैं, महसूस कर रहे हैं। आज का नया भारत, नई दुनिया के साथ चलने के लिए तैयार है, तत्पर है। जो भारत कभी विदेशी निवेश से आशंकित था, आज वो हर प्रकार के निवेश का स्वागत कर रहा है। जिस भारत की tax से जुड़ी नीतियों से कभी निवेशकों में निराशा फैल जाती थी, आज उसी भारत में दुनिया का सबसे competitive corporate tax है और faceless tax system भी।

जिस भारत में दस्तावेज़ों में, कागज़ों में, कानूनों में उलझाना ब्यूरोक्रेसी की पहचान माना जाता था, वहीं आज Ease of Doing business रैंक में बड़ी छलांग लगा रहा है। जहां सालों साल तक श्रमिकों को, उद्योगों को सैकड़ों कानूनों के जाल में उलझाए रखा गया, वहीं आज दर्जनों श्रम कानून 4 labour codes में समा चुके हैं। जहां कभी कृषि को सिर्फ गुज़ारे का माध्यम माना जाता था, वहीं अब कृषि में ऐतिहासिक reforms के ज़रिए भारतीय किसानों को देश-विदेश के market से सीधे जोड़ने का प्रयास हो रहा है। इन्हीं सब प्रयासों का नतीजा है कि आज भारत में Record FDI भी आ रहा है और FPI में भी नए record बन रहे हैं। आज देश का Forex reserve, ये भी all time high level पर पहुँचा हुआ है। 

साथियों,

नए भारत का thought process क्या है, उसका एक उदाहरण मैं आपको देना चाहता हूं। एक समय था जब हमें लगता था कि जो कुछ भी विदेशी है, वही बेहतर है। इस psychology का परिणाम क्या हुआ, ये आप जैसे industry के दिग्गज भलीभांति समझते हैं। हमारे अपने brand भी, जो हमने सालों की मेहनत के बाद खड़े किए थे, उनको विदेशी नामों से ही प्रचारित किया जाता था। आज स्थिति तेज़ी से बदल रही है। आज देशवासियों की भावना, भारत में बने प्रॉडक्ट्स के साथ है। कंपनी भारतीय हो, ये जरूरी नहीं, लेकिन आज हर भारतीय, भारत में बने प्रॉडक्ट्स को अपनाना चाहता है। यानि देश मन बना चुका है, अब उद्योग जगत को इस मन के मुताबिक अपनी नीति बनानी है, रणनीति बनानी है। आत्मनिर्भर भारत अभियान में आगे बढ़ते हुए ये आपको बहुत मदद करेगा। 

दूसरा एक फैक्टर है, जिस पर भी आपको ध्यान देना चाहिए। ये है, भारत वासियों का बढ़ता हुआ आत्मविश्वास। इस आत्मविश्वास को हम हर सेक्टर में देख रहे हैं। अभी हाल ही आपने ओलंपिक्स के मैदान में इसे अनुभव किया है। आज भारत के युवा जब मैदान में उतरते हैं, तो उनमें मन में वो हिचक नहीं होती। वो मेहनत करना चाहते हैं, वो रिस्क लेना चाहते हैं, वो नतीजे लाना चाहते हैं। Yes, We belong to this place- ये भाव आज हम अपने युवाओं में देख रहे हैं। इसी प्रकार का आत्मविश्वास आज भारत के Startups में है। आज unicorns नए भारत की पहचान भी बन रहे हैं। 7-8 साल पहले भारत में 3-4 unicorns रहे होंगे। आज भारत में करीब-करीब 60 unicorns हैं। इनमें से 21 unicorns तो बीते कुछ महीनों में ही बने हैं। और ये बात आपने भी नोट की होगी कि ये unicorns, अलग-अलग सेक्टर में आ रहे हैं। Health-tech, Social commerce, में unicorns का बनना ये संकेत दे रहा है कि भारत में हर स्तर पर कितना बदलाव हो रहा है। Business में risk लेने की प्रवृत्ति, अपने सामर्थ्य पर भरोसा करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। इतनी बड़ी महामारी में भी हमारे start-ups के ambitions बुलंदियों पर हैं। Investors की ओर से भी Indian start-ups के लिए record response देखने को मिला है।

Startups की record listing भारतीय कंपनियों और भारतीय मार्केट के लिए एक नए युग की शुरुआत है। ये इस बात का भी एक और सबूत है कि भारत के पास growth के असाधारण अवसर उपलब्ध हैं, tremendous scope उपलब्ध है।

साथियों,

Technology को लेकर आज देश में जो उत्साह है, वो सरकार को तेजी से reforms के लिए प्रेरित करता रहा है। जो reforms हमने किए हैं वो कोई आसान फैसले नहीं थे, कोई साधारण बदलाव नहीं थे। इन सारे reforms की मांग दशकों से की जा रही थी, इनकी जरूरत हर कोई बता रहा था। इस बारे में बातें तो खूब होती थीं, लेकिन फैसले नहीं लिए जाते थे क्योंकि ये मान लिया गया था कि ये बदलाव करना बहुत मुश्किल काम है। लेकिन आपने भी देखा है कि हमने वही फैसले कैसे पूरी दृढता के साथ लिए हैं यहां तक की Pandemic के दौरान भी reform की प्रक्रिया जारी रखी। और आप ये भी देख रहे हैं कि देश कैसे इन फैसलों के साथ खड़ा हुआ है। जैसे commercial coal mining की शुरुआत की गई है, Private sector participation को खुलकर बढ़ावा दिया जा रहा है, Defence sector में बड़े बड़े reforms की शुरुआत की गई है, Space और Atomic sector जैसे areas को private सेक्टर के लिए खोला गया है। आज non-strategic के साथ साथ strategic sector में भी private players को अवसर दिया जा रहा है, सरकार के नियंत्रण को कम किया जा रहा है। ये सब मुश्किल फैसले आज मुमकिन हो रहे हैं क्योंकि देश अपने प्राइवेट सेक्टर पर, आप सभी पर भरोसा करता है। जैसे जैसे इन areas में हमारी कंपनियाँ सक्रिय होंगी इनमें संभावनाओं का विस्तार होगा। हमारे युवाओं को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, innovations का एक नया दौर शुरू होगा।

साथियों,

हमारी industry पर देश के विश्वास का ही नतीजा है कि आज Ease of doing business बढ़ रहा है, और Ease of living में इजाफा हो रहा है। Companies act में किए गए बदलाव इसका बहुत बड़ा उदाहरण हैं। आज ऐसे कितने ही प्रावधानों को decriminalize किया जा रहा है जो कभी हमारे उद्यमियों के लिए सरदर्द से कम नहीं थे। इसी तरह, MSME sector को भी प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं जो उन्हें सीमित करने वाली मजबूरीयों से मुक्त करेंगे। State लेवल रिफॉर्म्स पर भी आज विशेष ध्यान दिया जा रहा है, राज्यों को भी भागीदार बनाया गया है और उन्हें additional spending facility दी जा रही है। Make In India के साथ साथ Employment और Exports को गति देने के लिए देश ने प्रभावी PLI schemes भी शुरू की हैं। ये सभी reforms आज इसलिए हो रहे हैं क्योंकि आज देश में जो सरकार है, वो reforms compulsion में नहीं कर रही है बल्कि reforms हमारे लिए conviction का विषय है। आज भी हमारी reforms की speed बनी हुई है। अभी Parliament के इसी session में ऐसे कई bills पास हुये हैं जो देश के इन प्रयासों को और गति देंगे। The Factoring Regulation Amendment Bill छोटे व्यापारों को credit हासिल करने में मदद करेगा। Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation Amendment Bill small depositors के अधिकारों की रक्षा करेगा। अभी हाल ही में, हमने अतीत की गलतियों को सुधारते हुये Retrospective) taxation को भी समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले की industry में जिस तरह से सराहना हो रही है, मुझे विश्वास है इससे industry और government के बीच विश्वास और मजबूत होगा। 

साथियों,

आज देश में वो सरकार है जो राष्ट्र हित में बड़े से बड़ा risk उठाने के लिए तैयार है। आपको याद होगा, GST तो इतने सालों तक अटका ही इसलिए क्योंकि जो पहले सरकार में वो political risk लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। हमने ना सिर्फ GST लागू किया बल्कि आज हम रिकॉर्ड GST कलेक्शन होते देख रहे हैं ऐसे कितने ही उदाहरण मैं आपको गिना सकता हूं, बता सकता हूं। आज आपके सामने एक सरकार है, जो हर बंदिश को दूर कर रही है, हर boundary को push कर रही है। आज एक सरकार है, जो आपसे पूछ रही है कि भारतीय उद्योग जगत की ताकत बढ़ाने के लिए बताइए अब और क्या करना है? 

साथियों,

हमारे पूर्वज कह गए हैं कि - नैकं चक्रं परिभ्रमति। यानि सिर्फ सिर्फ एक पहिए से गाड़ी नहीं चल सकती। सारे पहिए ठीक से चलने चाहिए। इसलिए, industry को भी रिस्क लेने की अपनी natural tendency को थोड़ा सा और बढ़ाना होगा। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए नए और मुश्किल रास्तों का चुनाव भी हमें करना ही होगा। Investment और रोजगार की गति को बढ़ाने के लिए industry से भी देश की बहुत उम्मीदें हैं। Public sector के footprints को rationalize और minimize करने के लिए भी नई PSE पॉलिसी के जरिए निर्णायक फैसले लिए जा रहे हैं। इसमें industry की तरफ से भी ज्यादा से ज्यादा उत्साह और ऊर्जा दिखनी चाहिए। 

National education policy के माध्यम से एक बहुत बड़ा कदम देश ने उठाया है। इसमें स्कूल, skill से लेकर research तक का एक नया ecosystem तैयार करने का भरपूर roadmap है। इसमें भी industry की एक सक्रिय भूमिका बहुत ज़रूरी है। विशेष रूप से research and development पर investment को लेकर हमें बहुत गंभीरता से काम करना है। आत्मनिर्भर भारत के लिए, R&D पर हमारा investment हमें कई गुणा बढ़ाना होगा और ये सिर्फ सरकारी प्रयासों से ही संभव नहीं है। इसमें industry की बहुत बड़ी भागीदारी की ज़रूरत है। हमारा लक्ष्य, brand India को मजबूत करने का है। हमारा लक्ष्य, देश को समृद्धि और सम्मान देने का है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें अपनी पार्टनरशिप को मज़बूत करना है। मैं आपकी हर समस्या के समाधान के लिए, आपके हर सुझाव के लिए हर वक्त उपलब्ध रहा हूं और आगे भी रहूंगा। मैं फिर एक बार इस आजादी के अमृत महोत्सव के कार्यकाल में आपको भी अनेक अमृत संकल्प करने के लिए प्रेरित करें और आप सब संकल्प के साथ, नई उर्जा के साथ आगे आएं। आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं ! धन्यवाद।

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प्रधानमंत्री 4 दिसंबर को देहरादून में लगभग 18,000 करोड़ रुपये की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे
December 01, 2021
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प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप यह परियोजनाएं उन क्षेत्रों तक सम्पर्क को बढ़ावा देने और पहुंच बढ़ाने के लिए हैं, जिन्हें कभी दुर्गम क्षेत्र माना जाता था
दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा यात्रा के समय को घटाकर 2.5 घंटे कर देगा; वन्यजीवों के लिए अवरोध रहित आवागमन के लिए यह एशिया का सबसे बड़ा एलीवेटेड वन्यजीव गलियारा होगा
उद्घाटन की जाने वाली सड़क परियोजनाओं से चारधाम सहित क्षेत्र में आसान संपर्क उपलब्ध होगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
लामबगड़ भूस्खलन शमन परियोजना गम्भीर भूस्खलन क्षेत्र में यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाएगी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 4 दिसंबर, 2021 को दोपहर बाद 1 बजे देहरादून का दौरा करेंगे और लगभग 18,000 करोड़ रुपये लागत की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण ध्यान सड़क के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए परियोजनाओं पर होगा, जो यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाएगा, और इस क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ाएगा। प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप यह परियोजनाएं उन क्षेत्रों में सम्पर्क को बढ़ावा देने के लिए है, जिन्हें किसी समय दुर्गम इलाका माना जाता था।

प्रधानमंत्री 11 विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इसमें दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा (ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जंक्शन से देहरादून तक) शामिल है, जिसे लगभग 8300 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। यह दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा के समय को छह घंटे से घटाकर लगभग 2.5 घंटे कर देगा। इसमें हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली, यमुनानगर, बागपत, मेरठ और बड़ौत से सम्पर्क के लिए सात प्रमुख इंटरचेंज होंगे। इसमें वन्यजीवों के लिए बिना रोक-टोक आवागमन के लिए एशिया का सबसे बड़ा वन्यजीव एलीवेटेड गलियारा (12 किलोमीटर) होगा। साथ ही, देहरादून में दत काली मंदिर के पास 340 मीटर लंबी सुरंग वन्यजीवों पर होने वाले प्रभाव को कम करने में मदद करेगी। इसके अलावा, गणेशपुर-देहरादून खंड में वाहनों को जंगली जानवरों से टक्कर से बचने के लिए जानवरों के लिए कई रास्ते बनाए गए हैं। दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे में 500 मीटर के अंतराल पर वर्षा जल संचयन और 400 से अधिक पानी के रिचार्ज प्वाइंट की व्यवस्था भी होगी।

दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से ग्रीनफील्ड संरेखण परियोजना, सहारनपुर के हलगोआ से हरिद्वार के भद्राबाद को जोड़ने वाली परियोजना का निर्माण 2000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया जाएगा। यह परियोजना दिल्ली से हरिद्वार तक निर्बाध सम्पर्क प्रदान करेगी और यात्रा के समय को भी कम करेगी। 1600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाली मनोहरपुर से कांगड़ी तक हरिद्वार रिंग रोड परियोजना, हरिद्वार शहर के लोगों को, विशेष रूप से भारी पर्यटक मौसम के दौरान यातायात के जाम से राहत प्रदान करेगी और कुमाऊं क्षेत्र के साथ सम्पर्क में भी सुधार करेगी।

लगभग 1700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली देहरादून-पोंटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) सड़क परियोजना, यात्रा के समय को कम करेगी और दोनों स्थानों के बीच निर्बाध संपर्क प्रदान करेगी। इससे अंतर्राज्यीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। नाजिमाबाद-कोटद्वार सड़क चौड़ी करने की परियोजना, यात्रा के समय को कम करेगी और लैंसडाउन से सम्पर्क में भी सुधार करेगी।

लक्ष्मण झूले के निकट गंगा नदी पर एक पुल भी बनाया जाएगा। विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मण झूले का निर्माण 1929 में किया गया था, लेकिन अब इसे कम भार वहन क्षमता के कारण बंद कर दिया गया है। बनने वाले पुल पर पैदल चलने वाले लोगों के लिए कांच के डेक का प्रावधान होगा, साथ ही हल्के वजन के वाहनों को भी पार करने की अनुमति होगी।

प्रधानमंत्री इस दौरे पर देहरादून में बच्चों की यात्रा के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाकर शहर को बाल हितैषी बनाने के लिए चाइल्ड फ्रेंडली सिटी प्रोजेक्ट, देहरादून की आधारशिला भी रखेंगे। देहरादून में 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जलापूर्ति, सड़क और जल निकासी व्यवस्था के विकास से संबंधित परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया जाएगा।

प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप स्मार्ट आध्यात्मिक कस्बों के विकास और पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे को उन्नत करने के लिए श्री बद्रीनाथ धाम और गंगोत्री-यमुनोत्री धाम में बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों की आधारशिला रखी जाएगी। इसके साथ ही हरिद्वार में 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से नया चिकित्सा महाविद्यालय भी बनाया जाएगा।

प्रधानमंत्री सात परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे, जिनमें क्षेत्र में गम्भीर भूस्खलन की समस्या से निपटने के लिए यात्रा को सुरक्षित बनाने पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। इन परियोजनाओं में लामबगड़ (जो बद्रीनाथ धाम के रास्ते में है) में भूस्खलन शमन परियोजना और एनएच-58 पर शकनिधर, श्रीनगर और देवप्रयाग में गम्भीर भूस्खलन समस्या का निवारण शामिल हैं। गम्भीर भूस्खलन क्षेत्र में लामबगड़ भूस्खलन शमन परियोजना में वर्षा से बचाने वाली दीवार और रॉकफॉल बाधाओं का निर्माण शामिल है। परियोजना का स्थान इसके सामरिक महत्व को और बढ़ाता है।

चारधाम सड़क संपर्क परियोजना के तहत देवप्रयाग से श्रीकोट तक और एनएच-58 पर ब्रह्मपुरी से कोडियाला तक सड़क चौड़ी करने की परियोजना का भी उद्घाटन किया जा रहा है।

1700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यमुना नदी पर निर्मित 120 मेगावाट की व्यासी जलविद्युत परियोजना का भी उद्घाटन देहरादून में हिमालय संस्कृति केंद्र के साथ किया जाएगा। हिमालयन संस्कृति केंद्र में एक राज्य स्तरीय संग्रहालय होगा, 800 सीट वाला कला सभागार, पुस्तकालय, सम्मेलन कक्ष, आदि जो लोगों को सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत की सराहना करने में मदद करेंगे।

प्रधानमंत्री देहरादून में अत्याधुनिक इत्र और सुगंध प्रयोगशाला (सुगंधित पौधों के लिए केंद्र) का भी उद्घाटन करेंगे। यहां किया गया शोध इत्र, साबुन, सैनिटाइजर, एयर फ्रेशनर, अगरबत्ती आदि सहित विभिन्न उत्पादों को बनाने के लिए उपयोगी साबित होगा और इससे क्षेत्र में संबंधित उद्योगों की स्थापना भी होगी। यह सुगंधित पौधों की अधिक उपज देने वाली उन्नत किस्मों के विकास पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।