1. 2017 के मध्य में गुजरात, राजस्थान, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर में बाढ़ के कारण जान-माल और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ। जैसे ही बाढ़ की खबर आई, प्रधानमंत्री की निगरानी में केंद्रीय एजेंसियों और सरकारी विभागों ने राहत कार्य शुरू कर दिए।      
  1. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ उच्च स्तरीय बैठक की और केंद्र से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
  1. जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने गुजरात में आए भीषण भूकंप के बाद इससे प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पुनर्वास का कार्य किया और राज्य में आपदा प्रबंधन को मजबूत किया। 2001 में आए भूकंप में गुजरात का भुज शहर बुरी तरह से प्रभावित हुआ था जिसके बाद तत्कालीन नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की देख-रेख में भुज को पुनर्जीवित किया गया। उनके कामकाज की शैली का नमूना उस वक्त देखने को मिला जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उत्तराखंड में बाढ़ प्रभावित केदार घाटी पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया।   
  1. एक मुख्यमंत्री के रूप में आपदा से संबंधित स्थितियों के बखूबी प्रबंधन के अनुभव से देश के विभिन्न हिस्सों में आई प्राकृतिक आपदाओं को संभालने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को काफी मदद मिली है। 2014 में जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ से राज्य में काफी तबाही हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की स्थिति का जायजा लिया। बाढ़ को ‘राष्ट्रीय स्तर की आपदा’ घोषित करते हुए उन्होंने बाढ़ राहत और क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए 1000 करोड़ रुपये जारी किए। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सेना की तैनाती की गई जिससे कई लोगों की जान बच सकी।.                 
 
  1. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदाओं के दौरान हमेशा सक्रिय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावित राज्यों में आपदा से जल्द से जल्द उबरने के लिए संबधित व्यवस्था की है। 2015 में जब चेन्नई में भारी बाढ़ आई, उस समय भी प्रधानमंत्री ने खुद ही राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की। सड़क मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट जाने के बाद नौसेना के आईएनएस ऐरावत को चिकित्सा उपकरणों, दवाइयों और डॉक्टरों के दल के साथ चेन्नई तट पर भेजा गया।        
  1. 2015 में नेपाल में आए भीषण भूकंप के समय भी भारत मदद के लिए सबसे पहले आगे आया और वहां के लोगों के लिए राहत एवं बचाव सामग्री उपलब्ध कराई और अपना पड़ोसी धर्म निभाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आपदा कूटनीति’ के तहत भारतीय उपमहाद्वीप में भारत की पहचान एक विश्वसनीय नेतृत्व के रूप में बनाई। भारी मात्रा में राहत सामग्री के साथ एनडीआरएफ की टीमों को पड़ोसी देश में भेजा गया। नेपाल में अपने साहसी प्रयासों के लिए पूरे विश्व ने भारत की सराहना की और अपने नागरिकों को बचाने में इजराइल की सहायता करने एवं राहत सामग्री लेकर भेजे गए विमान को भारत की जमीं पर उतरने देने के लिए इस्राइल के प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री मोदी के कूटनीतिक प्रयासों ने विभिन्न राष्ट्रों के साथ पारस्परिक सहयोग बढ़ाने का काम किया है ताकि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं जैसी समस्याओं का समाधान मिल सके।     
  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न आपदाओं के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में संचार सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इसरो का उपग्रह लॉन्च किया। यह अपने पड़ोसी देशों के लिए भारत का अनूठा उपहार था जिसकी 7 सार्क देशों के प्रमुखों ने सराहना की थी। 

  1. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से जूझ रहे ग्रह के विकास के लिए आपदा की तैयारियां और इसका प्रभाव करना आवश्यक है। हर आपदा तेज़ी से हो रहे शहरीकरण की प्रक्रिया में हुई गलतियों को उजागर करती है। अब जब आपदा जोखिम कम करने के लिए सेंडाइ फ्रेमवर्क उपलब्ध है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा के जोखिम कम करने के लिए विश्व स्तरीय मानकों के अनुसार भारत के शहरी नियोजन को एकीकृत किया है।         
  1. शासन के सभी स्तरों पर आपदा के जोखिम से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक योजना लंबे समय से भारत के इनफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप से गायब रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए भारत की पहली राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) शुरू की। एनडीएमपी सेंडाई फ्रेमवर्क की तर्ज पर काम करता है और आपदा प्रबंधन एवं विकास प्रक्रिया के सभी स्तरों को चिह्नित करता है।          
  1. नवंबर 2016 में नई दिल्ली में आपदा जोखिम को घटाने के विषय पर आधारित एशियाई मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंडाइ फ्रेमवर्क के 10 सूत्री एजेंडे को लागू करने की रूपरेखा पेश की जिसके तहत आपदा प्रबंधन में महिला बलों की संख्या में बढ़ोतरी और आपदा स्थिति से निपटने और उसे रोकने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया है।   
     
  1. तेजी से विकास कर रहे भारत को आपदा प्रबंधन और पारिस्थितिकीय स्थायी शहरी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में काफी काम करना है। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बार-बार होने के बीच संबंध एक वैश्विक मुद्दा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत की है ताकि उसके अनुकुल परिणामों को प्राप्त करने के लिए आपदा के खतरे को घटाने हेतु सेंडाई फ्रेमवर्क के लिए एक सही एजेंडा बनाया जा सके। देश से लेकर विश्व पटल पर, भारत अपनी विकास यात्रा में आपदा प्रबंधन व इसके लिए तैयारी, इसका प्रभाव कम करने, राहत और पुनर्वास के लिए बहुमुखी योजना तैयार कर रहा है


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