बिहार में भाग्य बदलने का जिम्मा मेरे नौजवानों का है: प्रधानमंत्री मोदी #परिवर्तनरैली
बिहार की जवानी बिहार को बदलने के लिए दीवानी हो गई है और इसी के साथ बिहार को बर्बाद करने वालों की रवानगी भी तय हो गई है: प्रधानमंत्री
बिहार में वो ताकत है कि अगर बिहार आगे बढ़ गया तो सारा हिन्दुस्तान आगे बढ़ जाएगा: प्रधानमंत्री मोदी #परिवर्तनरैली
बिहार में एनडीए सरकार बनी तो सबसे पहले हमारा काम होगा – बिहार के 4000 गांवों में बिजली पहुँचाना: प्रधानमंत्री #परिवर्तनरैली
गरीब को ताक़तवर बनाने, उनकी आर्थिक शक्ति बढ़ाने और उनके बेहतर जीवन के लिए हमने जन-धन, बीमा योजना और मुद्रा योजना की शुरुआत की: मोदी
बिहार में दो-तिहाई बहुमत के साथ एनडीए सरकार बनाईए और सारी दुनिया बिहार की ताक़त को मान लेगी और विकास के रास्ते खुल जाएंगे: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय

मंच पर विराजमान हमारे वरिष्ठ नेता डॉ. सी पी ठाकुर जी, औरंगाबाद के सांसद श्रीमान सुशील जी, रालोसपा के सह-प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण जी, एवं औरंगाबाद से विधान पार्षद राजेंद्र कुमार सिंह, भाजपा, औरंगाबाद के अध्यक्ष पुरुषोत्तम जी, लोजपा के श्री अनूप ठाकुर, रालोसपा के श्री अशोक मेहता, हम पार्टी के श्री अजय सिंह, और इस चुनाव में औरंगाबाद से भाजपा के उम्मीदवार श्री रामाधार सिंह, नवीननगर के उम्मीदवार गोपाल नारायण सिंह, कुटुम्बा से हम पार्टी के उम्मीदवार संतोष कुमार सुमन जी, ओबारा से लोजपा के उम्मीदवार चंद्रभूषण वर्मा जी, भाजपा के उम्मीदवार श्री मनोज शर्मा जी, रविगंज से लोजपा के उम्मीदवार श्री प्रमोद कुमार सिंह, गुरुवा से भाजपा के उम्मीदवार राजीव डांगी जी, शेरघाटी से हम पार्टी के उम्मीदवार श्री मुकेश कुमार; मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों और बहनों

मुझे औरंगाबाद आने का ये पहला सौभाग्य मिला है और इस ऐसी चमचमाती धूप में आप लोगों ने इतना ताप होने के बावजूद जो मुझे आशीर्वाद और प्यार दिया है, मैं आपको नमन करता हूँ। आपका आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है। मुझे दूर-दूर तक, जहाँ तक मेरी नज़र जाती है, लोग ही लोग नज़र आ रहे हैं। मैं नहीं मानता हूँ कि वहां तक मेरी आवाज़ पहुँच रही होगी जहाँ लोग खड़े हैं। चुनाव में रैलियां तो बहुत देखी हैं लेकिन यहाँ तो आंधी है। ये चुनाव 21वीं सदी में बिहार की जगह कहाँ होगी, न कि हिन्दुस्तान के नक़्शे पर बल्कि दुनिया के नक़्शे पर बिहार की जगह कहाँ होगी, इसके लिए यह चुनाव है।

कौन विधायक बने, न बने, किसकी सरकार बने, किसकी न बने, कौन पार्टी जीते, कौन न जीते, ये चुनाव इस बात के लिए नहीं है बल्कि इस बात के लिए है कि बिहार का भविष्य क्या होगा। ये चुनाव इस बात का है कि नौजवानों का भाग्य कौन बदलेगा, बिहार को विकास की नई ऊंचाईयों पर कौन ले जाएगा। इसलिए इस चुनाव में जब आप मतदान करें तो आप इस ‘महास्वार्थबंधन’ के इतिहास को पहले जान लें; ये लोग क्यों इकठ्ठा आए हैं। महास्वार्थबंधन बनाने वाले ये तीनों लोगों ने बिहार में कभी-न-कभी राज किया है। कांग्रेस ने 45 साल तक राज किया; लालू जी और नीतीश जी, बड़े भाई, छोटे भाई ने 25 साल राज किया और तीनों ने मिलाकर के 60 साल तक बिहार में राज किया। मुझे बताईये कि 60 साल कम समय है क्या? दुनिया में कुछ देश जो 30-40 साल पैदा हुआ, आज वे दुनिया में नंबर – 1 तक पहुँच गए और इन्होंने ने 60 साल सरकार चलाई लेकिन बिहार के नौजवान को रोजगार तक नहीं दे पाए।

बिहार ने दो-दो रेल मंत्री दिए। लालू जी और नीतीश जी, दोनों रेल मंत्री रहे अब मुझे बताईये कि अगर आपको कोलकाता जाना है तो टिकट मिलता है क्या? ट्रेन में जगह मिलती है क्या? जिन लोगों ने ऐसी सरकारें चलाई हो, ऐसे लोगों पर और भरोसा कर सकते हैं क्या? 16 को मतदान है। भारी संख्या में मतदान करें ताकि बिहार के भाग्य का रास्ता खुल जाए। आपका मिज़ाज ही परिवर्तन लाने वाला है इस बार बिहार में भाग्य बदलने का जिम्मा मेरे नौजवानों ने उठाया है। सारे बिहार का जवान एकजुट हो गया है कि अब बिहार को बर्बाद नहीं होने देना है।

आप मुझे बताईये कि ये जो सब लोग चुनाव लड़ रहे हैं, लालू जी हों, नीतीश जी हों, मैडम सोनिया जी हों, इन लोगों को अपने 60 वर्षों के काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? बिहार में इन्होंने क्या सब काम किये, ये बताना चाहिए कि नहीं? लेकिन पूरा चुनाव देख लीजिये, अभी तक इन तीनों ने बिहार के लिए क्या किया, इस पर एक शब्द भी बोलते नहीं हैं। इनका एक ही काम है – मोदी को गाली देना। सुबह-सुबह डिक्शनरी खोल के बैठ जाएंगे कि आज मोदी को कौन सी नई गाली देंगे। अब तो डिक्शनरी भी खाली हो गई है और उन्होंने फैक्ट्री खोल कर रखी है, नई-नई गालियां बनाने की फैक्ट्री और उस फैक्ट्री से रोज माल लेकर निकलते हैं और दिन-रात मोदी को गालियां देते हैं। क्या ये चुनाव है? चुनाव में काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? उनके पास कहने को कुछ बचा नहीं है। कोई भी सरकार जब चुनाव में जाती है तो उसका दायित्व बनता है कि वो जनता को अपने काम का हिसाब दे लेकिन ये अपना हिसाब नहीं दे रहे।

60 साल इन्होंने बर्बादी लाने का काम किया है। उद्योग-धंधे अगर नहीं आएंगे तो नौजवानों को रोजगार मिलेगा क्या? नौजवानों को रोजगार चाहिए और इनका पलायन बंद होना चाहिए। अभी कुछ दिन पहले मैं फ़रीदाबाद मेट्रो स्टेशन पर उद्घाटन के सिलसिले में गया था। मेट्रो में सफ़र के दौरान यात्री नमस्ते करने आते थे तो सभी यात्रियों से मैं उनके बारे में पूछता था और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मुझे जितने नौजवान मिले, उसमें एकाध कोई और हो तो हो, बाकि सारे नौजवान बिहार के थे। मैंने पूछा क्या कर रहे हो तो उन्होंने कहा कि नौकरी के लिए आया हूँ और किसी कारखाने में इंटरव्यू है तो वहीँ जा रहा हूँ। सारे लोग नौकरी की तलाश में थे और ज्यादातर नौजवान थे। वे मुझे कह रहे थे कि नौकरी के लिए आये तो हैं लेकिन चुनाव के समय जाने वाले हैं और इस सरकार को हटाने वाले हैं। पूरे देश में ये मिज़ाज है बिहारियों का।

अभी अमेरिका में भी मुझे बिहार के कुछ लोग मिले थे। उनसे मिलकर इतना गर्व हुआ कि मेरे देश के नागरिकों ने अमेरिका में आकर के ख़ुद को इतना आगे बढ़ाया है। ये सारे बिहार के थे। अगर बिहार के लोग अमेरिका और हिन्दुस्तान के किसी कोने में जाकर कमाल कर सकते हैं तो बिहार में क्यों नहीं कर पा रहे हैं। इसका कारण है कि बिहार में उन्हें अवसर नहीं मिल रहा है। बिहार की जवानी बिहार को बदलने के लिए दीवानी बन गई है और इसी के साथ बिहार को बर्बाद करने वालों की रवानगी भी तय हो गई है। आप मुझे बताएं कि बिहार के मुख्यमंत्री जी ने ये कहा था न कि वो हर घर में 24 घंटे बिजली पहुंचाएंगे? उन्होंने ये भी कहा था कि 2015 के चुनाव तक अगर हर घर बिजली नहीं पहुंचा पाया तो वोट मांगने नहीं आऊंगा; ऐसा कहा था? अब आप बताईये कि क्या हुआ? बिजली तो नहीं आई लेकिन वोट मांगने आये कि नहीं आये? धोखा किया न; वादे से मुकर गए न? क्या ऐसे लोगों पर भरोसा किया जा सकता है?

इसलिए मैं कहता हूँ कि अब बिहार ऐसी सरकार झेल नहीं सकता है जो बिहार को बर्बाद करने के लिए बने। मैं हैरान हूँ। हम जब जंगलराज को याद करते हैं तो लालू जी परेशान नहीं होते हैं लेकिन नीतीश जी परेशान हो जाते हैं। आपने ही तो लालू राज को जंगलराज कहा था और लालू जी के साथ बैठ गए। इसलिए अब आप जंगलराज बोलने से डरते हो और कोई अन्य बोले तो परेशान हो जाते हो। जंगलराज में कौन सा उद्योग चला – अपहरण का उद्योग। त्यौहार के समय लोग शाम में घर से बाहर निकलने से डरते थे; नई गाड़ी खरीदने के बाद डरते थे कि कहीं कोई उठा कर न ले जाए और अगर मांगने गए तो मार खाने का डर। अब आप बताएं कि बिहार को दुबारा उस स्थिति में लेकर जाना है क्या?

इसके आसार नजर आ रहे हैं। जनवरी से जुलाई तक बिहार में 4000 घटनाएं अपहरण की हुई हैं। अब आप मुझे बताईये कि क्या फिर से ये अपहरण के दिन आने देने हैं? कल रात की घटना लीजिये, एक पुलिस अफ़सर को गोलियों से भून दिया गया। उसका गुनाह सिर्फ़ इतना था कि वो कुछ लोगों को रोक कर पूछना चाहता था कि कौन हो और कहाँ जा रहे हो। सिर्फ़ इतनी बात पर उस पर गोलियां चलाई गई और वो भी पटना में, सरकार के सीने पर और एक पुलिस अफ़सर को। जहाँ एक पुलिस अफ़सर सुरक्षित नहीं है, वहां आम लोग सुरक्षित होंगे क्या? अभी तो उनके साथ बैठने का ये हाल है, चुनाव नतीजे आ गए और अगर आपने गलती कर दी तो सोचिए कि बिहार का क्या हाल होगा।

मैं आपसे कहने आया हूँ कि आप बिहार को बर्बाद होने से बचाईये। बिहार में वो ताकत है कि अगर बिहार आगे बढ़ गया तो सारा हिन्दुस्तान आगे बढ़ जाएगा लेकिन 60 साल तक बिहार की इस ताकत को दरकिनार किया गया। बिजली के क्षेत्र में हमने 24 घंटे बिजली देने का बीड़ा उठाया है। मैंने कहा है कि 2022 में जब भारत की आज़ादी के 75 साल होंगे, तब हम हिन्दुस्तान में 24 घंटे बिजली देने का काम पूरा कर देंगे। अकेले आपके औरंगाबाद जिले को बिजली के लिए 300 करोड़ रूपया देने का निर्णय कर लिया है। पूरे बिहार को 6000 करोड़ रूपया देने का निर्णय कर लिया है। जब मैं पूरे हिन्दुस्तान का अंदाज़ा लगा रहा था तो मैंने अफ़सरों को बुलाया और पूछा कि कितने गाँव हैं जहाँ बिजली नहीं है। उन्होंने हिसाब लगाया तो 18,000 गाँव ऐसे हैं जहाँ अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। फिर जब मैंने पूछा कि सबसे ज्यादा गाँव किस राज्य के हैं तो आपको ये जानकर हैरानी होगी कि बिहार के 4000 गाँव आज भी अँधेरे में हैं।

हमारी सरकार बनी तो सबसे पहले मेरा काम होगा – इन 4000 गांवों में बिजली पहुँचाना। ऐसा नहीं है कि पैसे नहीं हैं लेकिन उनके इरादे सही नहीं हैं। सरकार चलाना उनकी रुचि का विषय नहीं है और इसलिए वे 24 घंटे राजनीति करते रहते हैं। भूतकाल में पंचवर्षीय योजना के तहत भारत सरकार ने बिहार को बिजली के लिए करीब 8000 करोड़ रूपया देने का निर्णय किया लेकिन ये सरकार ऐसी थी कि उसमें से 1200-1300 करोड़ से ज्यादा ले नहीं पाई। अगर इनमें पैसे उठाकर काम करने की ताक़त नहीं है तो क्या ये आपका भला कर पाएंगे क्या? लेकिन अब बिहार के भाग्य को बदलने और जीवन में बदलाव लाने के उद्देश्य से मैं आपके पास आया हूँ।

आज मैं कोई भी हिसाब लगाता हूँ, जैसे सबसे ज्यादा शौचालय कहाँ बने हैं तो नाम आता है बिहार का। ये शौचालय अमीरों के घर में नहीं बने हैं बल्कि गरीबों के घर में बने हैं ताकि हमारी गरीब मां-बहनों को खुले में शौच के लिए न जाना पड़े। अब आप देखें कि ये गरीबों की बात करने वालों ने शौचालय क्यों नहीं बनाये? दिल्ली में हमारी सरकार बनाने के बाद हमने शौचालय बनाने का काम शुरू किया और पिछले एक साल में 95 लाख शौचालय बनाने का काम पूरा कर दिया है और आगे भी ये काम तेज़ गति से चल रहा है।

मुझे बताईये कि अमीरों का खाता होता है न लेकिन गरीब कभी बैंक में नहीं जा पता था। हमने जन-धन के माध्यम से ऐसा अभियान चलाया कि इस देश के हर गरीब परिवार का बैंक खाता खोल दिया गया और आज पहली बार गरीब को लगने लगा है कि वे साहूकारों के पास जाने की बजाय बैंक के पास जा सकते हैं। ब्याज के कारण मरने के बजाय वे सम्मान से जी सकते हैं।

हम मुद्रा योजना लेकर आए जिसके तहत जो छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाले लोग हैं, दूध बेचते हैं, सब्ज़ी बेचते हैं, पशुपालन करते हैं, धोबी का काम करते हैं, नाई का काम करते हैं, कपड़े बेचते हैं, अख़बार बेचते हैं, ऐसे लोगों को पैसों की बहुत जरुरत पड़ती है; घर में कोई बीमार हो जाए या मेहमान आ जाएं तो भी औरों से पैसे मांगने पड़ते हैं; उन्हें पैसे उपलब्ध कराये गए। इन्हें बैंकों से पैसा नहीं मिल पाता है। मुद्रा योजना से अकेले बिहार में 3 लाख लोगों को पैसे देने का काम पूरा कर दिया। पूरे हिन्दुस्तान में करीब-करीब 26 हज़ार करोड़ रूपया बैंकों से इन गरीबों को देने का काम हमने किया है। गरीब को ताक़तवर बनाना है, उनकी आर्थिक शक्ति बढ़ानी है।

हमने अभी बीमा योजना शुरू की; हर महीने में सिर्फ़ एक रूपया अर्थात 12 महीने में 12 रूपया कल जब मैं नवादा में था कि वहां एक मुस्लिम परिवार ने 12 रुपये वाली स्कीम ली थी और उसके परिवार में अचानक कुछ हो गया; महीना भर हुआ था और उसे 2 लाख रुपये का चेक आ गया। गरीब के लिए कैसे काम होता है, ये हमारी सरकार ने करके दिखाया है।

मेरा एक और सपना है जिसे पूरा करने के लिए बिहार में एक ऐसी सरकार चाहिए जो बिहार का भला करना चाहती है। मैं चाहता हूँ कि 2022 में सबके पास अपना एक घर हो। गरीबों को घर मिले, ये बहुत बड़ा बीड़ा हमने उठाया है घर में पानी का नल हो, नल में जल हो, बिजली हो, शौचालय हो और नजदीक में गरीब बच्चों के पढने के लिए अच्छी शिक्षा की व्यवस्था हो। इस काम को करने के लिए अगर राज्य सरकार ऐसी होगी कि हम केंद्र से बात नहीं करेंगे, हम उसे घुसने नहीं देंगे तो क्या ये संभव हो पाएगा?

मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप भाजपा और एनडीए के हमारे साथियों, राम विलास पासवान, जीतन राम मांझी, उपेन्द्र कुशवाहा को इस चुनाव में विजयी बनाईए और बिहार के भाग्य को बदलने का फ़ैसला कर लीजिए। बिहार में तीन-तीन पीढ़ी बर्बाद हो गई लेकिन अब इसे बर्बाद होने नहीं देना है। ये चुनाव है, एक तरफ जंगलराज और दूसरी तरफ विकासराज। सारी समस्याओं का समाधान विकास में ही रखा है इसलिए मैं कहता हूँ कि विकास के लिए वोट दीजिये दलित हों, पीड़ित हों, शोषित हों, वंचित हों, गरीब हो, इन सबका भला विकास से ही होगा। जवानों को रोजगार मिलेगा तो परिवारों की स्थिति अपने आप बदल जाएगी। इस काम को पूरा करने के लिए बिहार में दो-तिहाई बहुमत के साथ एनडीए की सरकार बनाईए।

आज पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान का डंका बज रहा है। अमेरिका, भूटान, रूस, चीन में भारत का गुणगान हो रहा है कि नहीं? ये मोदी के कारण नहीं बज रहा है बल्कि सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों के कारण बज रहा है। आपने ऐसा काम किया है जिस काम के कारण दुनिया में हिन्दुस्तान का डंका बज रहा है। आपने 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी है। इसके कारण दुनिया के किसी भी नेता से मिलता हूँ, उनसे हाथ मिलाता हूँ और गले लगाता हूँ तो उन्हें मोदी नहीं बल्कि सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानी दिखाई देते हैं। आज वे सब भारत का लोहा मानने लगे हैं। हिन्दुस्तान में बिहार का डंका बजाने, बिहार का जय-जयकार करने के लिए बिहार में भी आपको दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनानी पड़ेगी। ये सारी दुनिया बिहार की ताक़त को मान लेगी और विकास के रास्ते खुल जाएंगे और बिहार बदल जाएगा। यहाँ आया हुआ एक-एक व्यक्ति 50-50 लोगों को समझाएगा और उन्हें वोट डालने के लिए प्रेरित करेगा और एनडीए की सरकार बनाएगा। मेरे साथ मुट्ठी बंद करके बोलिये -

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

 

 

 

 

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संसद का सुचारु संचालन और देश को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प समय की जरूरत: पीएम मोदी
July 20, 2026
आशा है कि इस सत्र में सार्थक चर्चाएं होंगी जो भारत के विकास पथ को सुदृढ़ करेंगी: प्रधानमंत्री
हम यही प्रार्थना करते हैं कि मानसून जितना प्रोएक्टिव होगा, मानसून सत्र भी उतना ही अधिक प्रोडक्टिव बनेगा, जिससे देश के कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा: पीएम मोदी
पिछले एक महीने में देश ने राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और अंतरिक्ष स्तर पर कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनसे हर भारतीय का सीना गर्व से भर गया है: पीएम मोदी
पश्चिम एशिया में चुनौतियों के बावजूद, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। यह देश की मजबूती और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है: पीएम मोदी
संसद का सुचारु संचालन और देश को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प ही समय की जरूरत है: पीएम मोदी

स्वागत है भाई आप सबका।

मानसून का भी कुछ लाभ नजर आ रहा है और मानसून सत्र भी प्रारंभ हो रहा है। मानसून हो या मानसून सत्र, अगर दोनों प्रोएक्टिव हो, तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं, और दोनों प्रोडक्टिव होते हैं, तो देश का कल्याण होता है, जीव मात्र का कल्याण होता है। और इसलिए, हम यही प्रार्थना करते हैं कि मानसून भी प्रोएक्टिव रहे, मानसून सत्र भी प्रोडक्टिव रहे।

साथियों,

पिछले एक महीने में देश ने अनेक सिद्धियां प्राप्त की हैं और देशवासी गर्व से भर जाएं, इस प्रकार की सिद्धियों का सिलसिला चला है। चाहे राष्ट्रीय हो, अंतरराष्ट्रीय हो और अब तो अंतरिक्ष भी हो। एक प्रकार से भारत के लिए गर्व के पल रहे हैं। पिछले वर्ष मानसून सत्र के ठीक पहले भारतीय नागरिक ‘इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन’ पर पहुंचा था और परसों ही भारत का एक युवा स्टार्टअप, उसने बहुत बड़ी सिद्धि प्राप्त की है। विश्व के कम ही देश हैं, जहां इस प्रकार से प्राइवेट साहस हुए हैं और भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में नई उड़ान भरी है, बहुत बड़ी सफलता है। और ये जो स्काई रूट स्टार्टअप है, उसमें जो नौजवान काम कर रहे हैं, मुझे बताया गया, उनकी पूरी टीम की जो एवरेज एज है, वो सिर्फ 28 साल है। ऐसे नौजवानों ने यह काम करके दिखाया। मैं किसी 56 साल के नौजवान की बात नहीं कर रहा हूं, मैं देश के ये स्टार्टअप ने 28 के एवरेज वाले नौजवानों ने अंतरिक्ष में भारत का झंडा गाड़ दिया है। उनको तो बधाई है ही है, लेकिन ऐसी बातें जो हैं, जो भारत को आत्मविश्वास से भर देती है। विश्व में भारत का प्रोफाइल सर्वमान्य, सर्व-स्वीकृत बनता जाता है।

साथियों,

ये संयोग नहीं, ये एक संदेश है और बड़ा मजबूत संदेश है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षा अंतरिक्ष जितनी असीम है। इससे बड़ा संदेश देश के लिए कोई और प्रेरणा नहीं दे सकता है।

साथियों,

जो रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार होकर के आज देश चल पड़ा है, उसी का नतीजा है कि भारत के नौजवान इतना बड़ा साहस कर पाते हैं, और सफल भी हो रहे हैं।

साथियों,

पिछले दिनों राजस्थान में बहुत बड़ी ऑयल रिफाइनरी देश को समर्पित की गई। पिछले कुछ सप्ताह पहले, एक सेमीकंडक्टर प्लांट, यानी तीसरा, देश को समर्पित किया गया। अभी कुछ दिन पहले ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन और विश्व में बहुत कम देश ऐसे हैं कि जिनके पास ये सुविधा है। लेकिन भारत ने जो हाइड्रोजन ट्रेन देशवासियों को समर्पित की है, वो सबसे ताकतवर इंजन वाली है, और सबसे लंबी है। ये अपने आप में भारत के वैज्ञानिक, भारत के इंजीनियर्स, भारत के इनोवेटर्स, भारत के उद्यमी, भारत के श्रमिक, ये जो एक लक्ष्य लेकर के देश के लिए जी रहे हैं, देश के लिए काम कर रहे हैं, उसी का परिणाम है।

साथियों,

हम भली-भांति जानते हैं और पूरी दुनिया चिंतित भी है, लगातार कहीं न कहीं युद्ध की स्थितियां बनती रही है। पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण भारत जैसे देश जो एनर्जी के लिए औरों पर डिपेंडेंट है, उनके लिए ये पश्चिम एशिया का युद्ध एक बहुत ही बड़ा संकट का कारण रहा। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, फर्टिलाइजर, केमिकल्स, यानी हर विषय में अनेक बाधाएं, अनेक संकट आए। उसके बावजूद भी भारत 7.7 परसेंट के ग्रोथ से दुनिया की मेजर इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश बनके रहा। ये भारत के सामर्थ्य का परिचायक है। भारत किस प्रकार से उत्साह और उमंग के साथ नई ऊंचाइयों को पार करना चाहता है। उसकी इसमें एक झलक है और ऐसे में जब ये मानसून सत्र आरंभ हो रहा है, देश ने स्पीड पकड़ ली है और संसद का स्पिरिट उस स्पीड में नई ऊर्जा भर सकता है। सकारात्मक स्पिरिट राष्ट्र के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक होता है। हमारे सदन में बहुत अनुभवी सांसद भी है, दल उनका कोई भी हो, लेकिन उनके पास एक लंबा अनुभव है। ऐसे समय में उनके अनुभव की, उनके ज्ञान की संसद को भी जरूरत है, देश को भी जरूरत है। और इसके लिए संसद का चलना, सार्थक चर्चा होना, मिल जुलकर के देश को आगे ले जाने के संकल्प लेना, ये मैं समझता हूं कि बहुत ही समय की मांग है। एस्पिरेशन से भरे हुए देश के युवाओं की मांग है कि हम आगे बढ़े। आज समय की मांग है कि राष्ट्र निष्ठा से भरे हुए, राष्ट्रभक्ति के लिए जी रहे, आवाज को सदन में उचित मंच मिलता रहे, वे अपनी आवाज को बुलंद करें, देश को दिशा दे, और इसलिए मैं आशा करता हूं, और मुझे पक्का विश्वास है, जहां तथ्य होते हैं, जहां तर्क होते हैं, वहां तूफान के लिए जगह नहीं होती है। अगर तर्क मजबूत है, तथ्य मजबूत है, तो शांत चित्त से भी अपनी आवाज को बुलंद बनाया जा सकता है। मैं आशा करता हूं तर्क और तथ्य के साथ सदन की चर्चा को समृद्ध किया जाए। हर आवाज को अवसर मिले, हर विचार को सम्मान मिले, ये संसद की हमारी भूमिका है। मैं सभी सांसदों से बढ़-चढ़कर के इस सदन में हिस्सा लेने के लिए निमंत्रित करता हूं। आज सुबह स्पीकर महोदय जी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से देश के सांसदों का स्वागत करने के अपने भाव को व्यक्त किया है। मैं भी उसमें अपना स्वर मिलाता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कार।