भारत विश्व में निवेश के सबसे अनूकुल गंतव्यों में से एक, निवेशक ग्रोथ और आर्थिक स्थिरता चाहते हैं: प्रधानमंत्री मोदी
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है जो वैश्विक स्‍तर पर भी विकास को नई गति प्रदान कर रहा है: पीएम मोदी
विश्व का विश्वास भारत की अर्थव्यवस्था में बढ़ रहा है: प्रधानमंत्री
विदेशी निवेशक भारत को बेहद कम जोखिम वाली राजनीतिक अर्थव्यवस्था के रूप में मानते हैं: प्रधानमंत्री मोदी
सरकार ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, हमने व्यवसाय करने के लिए नियमों और विनियमों को सरल बनाया है और साहसिक सुधार लागू किए हैं: पीएम मोदी
हमने निवेशकों को एक कुशल, पारदर्शी, भरोसेमंद और उनकी उम्मीदों के मुताबिक माहौल प्रदान किया है: प्रधानमंत्री
हमने एफडीआई व्‍यवस्‍था को उदार बना दिया है, आज ज्‍यादातर क्षेत्रों में स्‍वत: या ऑटोमैटिक रूट के जरिए मंजूरी दी जाती है: प्रधानमंत्री मोदी
जीएसटी हमारे देश में सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक, यह ‘एक राष्‍ट्र-एक कर’ के सिद्धांत पर काम करता है: पीएम मोदी
भारत पिछले 3 वर्षों के दौरान विश्‍व बैंक की ‘कारोबार में सुगमता’ रिपोर्ट 2018 में 42 पायदान ऊपर चढ़कर शीर्ष 100 पायदान में शामिल हो गया है: प्रधानमंत्री
कृषि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की जीवन रेखा है, हम गोदामों (वेयरहाउस) एवं शीत भंडारण श्रृंखला, खाद्य प्रसंस्‍करण, फसल बीमा और संबद्ध गतिविधियों में निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं: प्रधानमंत्री मोदी
एक ‘नया भारत’ उभर रहा है, यह एक ऐसा भारत है जो सभी के लिए आर्थिक अवसर, ज्ञान अर्थव्‍यवस्‍था, समग्र विकास और अत्‍याधुनिक, सुदृढ़ एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे के स्‍तम्‍भों पर टिका हुआ है: पीएम मोदी

एशियन इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर इन्‍वेस्‍टमेंट बैंक के प्रेसीडेंट

मंच पर उपस्थित अन्‍य गणमान्‍य हस्तियां

भारत और विदेश के प्रतिष्ठित प्रतिनिधिगण

देवियों और सज्‍जनों,

मैं एशियन इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर इन्‍वेस्‍टमेंट बैंक की तीसरी वार्षिक बैठक के लिए मुम्‍बई में यहां उपस्थित होकर अत्‍यंत प्रसन्‍न हूं। बैंक और इसके सदस्‍यों के साथ अपनी सहभागिता बढ़ाने का यह अवसर पाकर हमें काफी खुशी हो रही है।

एशियन इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर इन्‍वेस्‍टमेंट बैंक (एआईआईबी) ने जनवरी 2016 में वित्त पोषण से संबंधित अपना परिचालन शुरू किया था। तीन वर्षों से भी कम अवधि में इसके कुल मिलाकर 87 सदस्‍य हो गए हैं और इस बैंक का प्रतिबद्ध पूंजीगत स्‍टॉक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को छू गया है। इस बैंक द्वारा एशिया में अहम भूमिका निभाना तय है।

मित्रों,

एशियन इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर इन्‍वेस्‍टमेंट बैंक एशियाई देशों के सहयोगात्‍मक प्रयासों से ही अस्तित्‍व में आया है, जो हमारे लोगों के लिए बेहतर कल सुनिश्चित करेगा। विकासशील देशों के रूप में हमारी चुनौतियां एक जैसी हैं। इनमें से एक चुनौती बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के लिए आवश्‍यक संसाधनों का इंतजाम करना है। मैं इस बात से काफी प्रसन्‍न हूं कि इस वर्ष की बैठक की थीम ‘बुनियादी ढांचे के लिए वित्त जुटाना: नवाचार एवं सहयोग’ है। एआईआईबी द्वारा टिकाऊ बुनियादी ढांचे में निवेश करने से अरबों लोगों के जीवन में सकारात्‍मक बदलाव आने की उम्‍मीद की जाती सकती है।

एशिया में अब भी शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य सेवा, वित्तीय सेवाओं और औपचारिक रोजगार अवसरों तक लोगों की पहुंच में व्‍यापक विषमताएं हैं।

एआईआईबी जैसे संस्‍थानों के जरिए क्षेत्रीय बहुपक्षवाद आवश्‍यक संसाधन जुटाने में मदद करने में उल्‍लेखनीय भूमिका निभा सकता है।

ऊर्जा एवं विद्युत, परिवहन, दूरसंचार, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, कृषि विकास, जलापूर्ति‍ एवं स्‍वच्‍छता, पर्यावरण संरक्षण, शहरी विकास एवं लॉजिस्‍ट‍िक्‍स जैसे क्षेत्रों (सेक्‍टर) के लिए दीर्घकालिक फंड या वित्त की जरूरत है। इस तरह के वित्त पर ब्‍याज दरें किफायती एवं उचित होनी चाहिए।

एआईआईबी ने अल्‍प अवधि में ही 4 अरब अमेरिकी डॉलर से भी अधिक राशि के कुल वित्त पोषण के साथ एक दर्जन देशों में 25 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह एक अच्‍छी शुरुआत है।

100 अरब डॉलर की प्रतिबद्ध पूंजी और सदस्‍य देशों में बुनियादी ढांचे की अत्‍यधिक जरूरत को ध्‍यान में रखते हुए मैं इस अवसर पर एआईआईबी से 4 अरब डॉलर के वित्त पोषण को वर्ष 2020 तक बढ़ाकर 40 अरब डॉलर और वर्ष 2025 तक बढ़ाकर 100 अरब डॉलर के स्‍तर पर पहुंचाने का आह्वान करता हूं।

इसके लिए सरल प्रोसेसिंग और त्‍वरित मंजूरी की आवश्‍यकता होगी। इसके लिए उच्‍च गुणवत्ता वाली परियोजनाओं और बेहतरीन परियोजना प्रस्‍तावों की भी आवश्‍यकता पड़ेगी।

मेरा यह मानना है कि भारत और एआईआईबी दोनों ही आर्थिक विकास को और ज्‍यादा समावेशी एवं टिकाऊ बनाने के लिए अत्‍यंत प्रतिबद्ध हैं। भारत में हम बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के वित्त पोषण के लिए अनूठे पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डेट फंड और इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर इन्‍वेस्‍टमेंट ट्रस्‍ट को अपना रहे हैं। भारत बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में निवेश के लिए मौजूदा (ब्राउनफील्‍ड) परिसम्‍पत्ति‍यों को एक अलग परिसम्‍पत्ति वर्ग के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रहा है। भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण एवं वन मंजूरियों के चरण को पार कर चुकी इस तरह की परिसम्‍पत्ति‍यां अपेक्षाकृत जोखिम मुक्‍त होती हैं। अत: इस तरह की परिसम्‍पत्ति‍यों के लिए पेंशन, बीमा और सॉवरेन वेल्‍थ फंडों की ओर से संस्‍थागत निवेश आने की प्रबल संभावना है।

एक अन्‍य पहल राष्‍ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना फंड के रूप में की गई है। इसका लक्ष्‍य घरेलू एवं अंतर्राष्‍ट्रीय दोनों ही स्रोतों से बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में निवेश जुटाना है। एआईआईबी द्वारा निवेश के लिए 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता जताने से इस फंड को काफी बढ़ावा मिला है।

देवियों और सज्‍जनों,

भारत दुनिया की सर्वाधिक निवेशक अनुकूल अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक है। निवेशक विकास और वृहद आर्थिक स्थिरता की उम्‍मीद कर रहे हैं। वे अपने निवेश का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक स्थिरता और एक सहायक नियामक व्‍यवस्‍था चाहते हैं। परिचालन के व्‍यापक स्‍तर और उच्‍च मूल्‍यवर्धन की दृष्टि से कोई भी निवेशक विशाल घरेलू बाजार, कौशल कामगारों की उपलब्‍धता और बेहतर भौतिक बुनियादी ढांचे से भी आकर्षित होता है। इन सभी पैमानों पर भारत अच्‍छी स्थिति‍ में हैं और इसने काफी अच्‍छा प्रदर्शन किया है। मैं आपके साथ अपने कुछ अनुभवों और उपलब्धियों को साझा करना चाहता हूं।

भारत वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में एक चमकीले देश के रूप में उभर कर सामने आया है, जो वैश्विक स्‍तर पर भी विकास को नई गति प्रदान कर रहा है। 2.8 लाख करोड़ (ट्रिलियन) अमेरिकी डॉलर के आकार के साथ भारत दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है। भारत क्रय क्षमता समतुल्‍यता (पीपीपी) की दृष्टि से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है। वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर 7.7 प्रतिशत रही है। वित्त वर्ष 2018-19 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

स्थिर कीमतों, मजबूत बाह्य क्षेत्र और नियंत्रित राजकोषीय स्थिति की बदौलत भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के बुनियादी तत्‍व अत्‍यंत मजबूत हैं। कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद महंगाई दर निर्धारित दायरे में ही हैं। सरकार राजकोषीय सुदृढ़ता के मार्ग पर चलने के लिए दृढ़तापूर्वक प्रतिबद्ध है। जीडीपी (सकल घरेलू उत्‍पाद) के प्रतिशत के रूप में सरकारी ऋण बोझ निरंतर कम होता जा रही है। लंबे इंतजार के बाद भारत अपनी रेटिंग को बेहतर कराने में कामयाब रहा है।

बाह्य क्षेत्र अब भी काफी मजबूत है। 400 अरब अमेरिकी डॉलर से भी अधिक का हमारा विदेशी मुद्रा भंडार हमें पर्याप्‍त संरक्षण प्रदान करता है। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में वैश्विक विश्‍वास बढ़ता जा रहा है। कुल एफडीआई प्रवाह में सतत रूप से वृद्धि हुई है। पिछले चार वर्षों में 222 अरब अमेरिकी डॉलर से भी ज्‍यादा का प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्‍त हुआ है। अंकटाड की विश्‍व निवेश रिपोर्ट के अनुसार भारत अब भी विश्‍व के शीर्ष एफडीआई गंतव्‍यों में से एक है।

देवियों और सज्‍जनों,

एक विदेशी निवेशक के दृष्टिकोण से भारत को अत्‍यंत कम जोखिम वाली राजनीतिक अर्थव्‍यवस्‍था माना जाता है। सरकार ने निवेश बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। हमने कारोबारियों के लिए नियमों एवं नियमनों को सरल बना दिया है और साहसिक सुधारों को लागू किया है। हमने निवेशक को एक ऐसा माहौल प्रदान किया है जो प्रभावशाली, पारदर्शी, विश्‍वसनीय और अपेक्षित है।

हमने एफडीआई व्‍यवस्‍था को उदार बना दिया है। आज ज्‍यादातर क्षेत्रों (सेक्‍टर) में स्‍वत: या आटोमैटिक रूट के जरिए मंजूरी दी जाती है।

वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) हमारे देश द्वारा लागू किए गए सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण प्रणालीगत सुधारों में से एक है। यह ‘एक राष्‍ट्र-एक कर’ के सिद्धांत पर काम करता है। इसके फलस्‍वरूप टैक्‍स पर टैक्‍स लगाने की गुंजाइश कम हो गई है, पारदर्शिता बढ़ गई है और लॉजिस्टिक्‍स दक्षता भी बढ़ गई है। इन सभी की बदौलत निवेशक के लिए भारत में बिजनेस करना आसान हो गया है।

इनके साथ-साथ अन्‍य बदलावों की ओर भी वैश्विक बिरादरी का ध्‍यान गया है। भारत पिछले तीन वर्षों के दौरान विश्‍व बैंक की ‘कारोबार में सुगमता’ रिपोर्ट 2018 में 42 पायदान ऊपर चढ़कर शीर्ष 100 पायदान में शामिल हो गया है।

भारतीय बाजार के विशाल आकार एवं विकास में अपार संभावनाएं हैं। पिछले 10 वर्षों में भारत की प्रति व्‍यक्ति आय दोगुनी हो गई है। भारत में 300 मिलियन से भी अधिक मध्‍यमवर्गीय उपभोक्‍ता हैं। अगले 10 वर्षों में यह संख्‍या दोगुनी हो जाने की आशंका है। भारत में आवश्‍यकताओं के विशाल आकार एवं स्‍तर की बदौलत निवेशकों को अतिरि‍क्‍त लाभ होने की पूरी संभावनाएं हैं। उदाहरण के लिए, भारत के आवास कार्यक्रम के तहत शहरी क्षेत्रों में 10 मिलियन मकान बनाने का लक्ष्‍य रखा गया है। यह संख्‍या अनेक देशों की मकान संबंधी कुल आवश्‍यकता से भी अधिक है। अत: यदि भारत में नए मकानों के निर्माण में नई प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की कोशिश की गई तो इसके अतिरिक्‍त फायदे होंगे।

व्‍यापक स्‍तर का एक और उदाहरण भारत का नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम है। हमने वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता वृद्धि सुनिश्चित करने का लक्ष्‍य रखा है। इसमें से सौर ऊर्जा क्षमता 100 गीगावाट की होगी और हम इन लक्ष्‍यों को पार कर लेने की दिशा में पूरी तरह से अग्रसर हैं। हमने वर्ष 2017 के दौरान पारंपरिक ऊर्जा की तुलना में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में ज्‍यादा क्षमता हासिल की है। हम एक अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन के रूप में सौर ऊर्जा को मुख्‍य धारा में लाने के लिए भी आपसी सहयोग के साथ अथक प्रयास कर रहे हैं। इस गठबंधन का संस्थापना सम्‍मेलन इस वर्ष के आरंभ में नई दिल्‍ली में आयोजित किया गया। इस गठबंधन ने वर्ष 2030 तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश के जरिए 1000 गीगावाट की सौर ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्‍य रखा है।

भारत ई-मोबिलिटी पर भी काम कर रहा है। हमारे समक्ष विशेषकर भंडारण के मामले में जो चुनौ‍ती है वह प्रौद्योगिकी से जुड़ी हुई है। हम इस वर्ष एक वैश्विक मोबिलिटी सम्‍मेलन की मेजबानी करेंगे। मुझे उम्‍मीद है कि इससे हमें आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

मित्रों,

भारत में हम सभी स्‍तरों पर कनेक्टिविटी बढ़ा रहे हैं। भारतमाला योजना का उद्देश्‍य राष्‍ट्रीय गलियारों (कॉरि‍डोर) और राजमार्गों का निर्माण कर सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। सागरमाला परियोजना का उद्देश्‍य बंदरगाह कनेक्टिविटी बढ़ाना, बंदरगाहों का आधुनिकीकरण करना और बंदरगाह से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देना है। देश में रेलवे नेटवर्क की भीड़-भाड़ में कमी करने के लिए समर्पित (डेडीकेटेड) माल गलियारों को विकसित किया जा रहा है। जल मार्ग विकास परियोजना से अंतर्देशीय जल परिवहन के जरिए आंतरिक व्‍यापार के उद्देश्‍य से राष्‍ट्रीय जल मार्गों पर नौवहन की क्षमता बढ़ जाएगी। हमारी ‘उड़ान’ योजना क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास के साथ-साथ बेहतर हवाई कनेक्‍ट‍िविटी सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है। मेरा मानना है कि एक ऐसा भी क्षेत्र है जिसका अब तक दोहन नहीं हो पाया है और इस ओर ध्‍यान देने की जरूरत है। इसके तहत परिवहन एवं माल ढुलाई के लिए भारत की लंबी तटीय रेखा के उपयोग की संभावनाओं पर गौर किया जा सकता है।

जब हम बुनियादी ढांचे की पारंपरिक अवधारणा की चर्चा करते हैं तो मुझे निश्चित रूप से कुछ ऐसी आधुनिक बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का उल्‍लेख करना चाहिए जिन पर भारत काम कर रहा है। ‘भारत नेट’ का लक्ष्‍य देश में अंतिम छोर तक इंटरनेट कनेक्टिविटी सुलभ कराना है। भारत में 460 मिलियन से भी अधिक इंटरनेट यूजर्स हैं और 1.2 अरब मोबाइल फोन का उपयोग किया जा रहा है। हम डिजिटल भुगतान के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। हमारे यूपीआई अथवा यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस सिस्‍टम के साथ-साथ भीम एप तथा रुपे कार्ड भी भारत में डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था की वास्‍तविक संभावनाओं को दर्शा रहे हैं। उमंग एप के जरिए 100 से भी अधिक जनोपयोगी सेवाएं देश के नागरिकों को उनके मोबाइल फोन के जरिए उपलब्‍ध कराई गई हैं। हमारे डिजिटल इंडिया मिशन का लक्ष्‍य गांवों और शहरों में डिजिटल खाई को पाटना है।

कृषि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की जीवन रेखा है। हम गोदामों (वेयरहाउस) एवं शीत भंडारण श्रृंखला, खाद्य प्रसंस्‍करण, फसल बीमा और संबद्ध गतिविधियों में निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं। हम बेहतर उत्‍पादकता के साथ जल का इष्‍टतम उपयोग करने के लिए सूक्ष्म-सिंचाई को बढ़ावा दे रहे हैं। मैं यह चाहता हूं कि एआईआईबी इस क्षेत्र में संभावित निवेश अवसरों पर गौर करे और हमारे साथ सहयोग करे।

हमारा लक्ष्‍य वर्ष 2022 तक प्रत्‍येक गरीब और बेघर परिवार को शौचालय, जल एवं बिजली की सुविधाओं से युक्‍त मकान मुहैया कराना है। हम बेहतर अपशिष्‍ट प्रबंधन के लिए विभिन्‍न रणनीतियों पर भी गौर कर रहे हैं।

हमने हाल ही में राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य संरक्षण मिशन ‘आयुष्‍मान भारत’ का शुभारंभ किया है। इसके तहत 100 मिलियन से भी अधिक गरीब एवं कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष 7,000 डॉलर से भी अधिक राशि का बीमा कवर मिलेगा। इसके फलस्‍वरूप स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं का विस्‍तारीकरण होगा जिससे बड़ी संख्‍या में रोजगारों का सृजन होगा। इससे उच्‍च गुणवत्ता वाली दवाओं, उपभोग्य वस्‍तुओं और अन्य चिकित्सा प्रौद्योगिकी उपकरणों के उत्‍पादन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा कॉल सेंटरों, अनुसंधान एवं आकलन और आईईसी से जुड़े कार्यों जैसी सहायक गतिविधियों के लिए भी रोजगार सृजित किए जाएंगे। इससे समूचे स्‍वास्‍थ्‍य सेवा उद्योग को काफी बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, सरकार द्वारा लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य सेवा संबंधी लाभ मुहैया कराने का आश्‍वासन देने के परिणामस्‍वरूप विभिन्‍न परिवार अब अपनी बचत का बेहतर उपयोग उपभोग और निवेश में कर सकते हैं। गरीब परिवारों के पास अब खर्च योग्‍य आमदनी ज्‍यादा होने के फलस्‍वरूप देश में विभिन्‍न वस्‍तुओं एवं सेवाओं की मांग भी बढ़ जाएगी। मुझे निवेशकों के लिए इसमें ऐसी अपार संभावनाएं नजर आ रही हैं जिनका दोहन अब तक नहीं हो पाया है।

मित्रों,

आर्थिक पुनरुत्थान की भारतीय गाथा एशिया के कई अन्य हिस्सों में हुई उल्‍लेखनीय प्रगति को काफी करीब से प्रतिबिंबित करती है। अब यह महाद्वीप खुद वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का केन्‍द्र बन गया है। यह विश्‍व का मुख्‍य विकास इंजन बन गया है। वास्‍तव में, हम अब एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं जिसे कई लोगों ने ‘एशियाई शताब्‍दी‘ करार दिया है।

एक ‘नया भारत’ उभर रहा है। यह एक ऐसा भारत है जो सभी के लिए आर्थिक अवसर, ज्ञान अर्थव्‍यवस्‍था, समग्र विकास और अत्‍याधुनिक, सुदृढ़ एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे के स्‍तम्‍भों पर टिका हुआ है। हम एआईआईबी सहित अपने अन्‍य विकास साझेदारों के साथ अपनी सहभागिता निरंतर जारी रहने को लेकर आशान्वित हैं।

अंत में, मुझे आशा है कि इस फोरम में होने वाली चर्चाएं सभी के लिए उपयोगी और लाभदायक साबित होंगी।

धन्‍यवाद।

 

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आपने सिर्फ पदकों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि पूरी पीढ़ी को तैयार किया: CWG चैंपियंस से पीएम मोदी
August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।