हमें रक्तपात और डर फैलाने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ संयुक्त रूप से ठोस कार्रवाई करनी होगी: प्रधानमंत्री
अफगानिस्तान और हमारे आस-पास के क्षेत्रों में आतंकवाद के खिलाफ चुप्पी साधने और किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने की वजह से आतंकियों और उनके आकाओं का मनोबल बढ़ेगा: प्रधानमंत्री
हम सबको अफगानिस्तान और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच मजबूत सकारात्मक संबंध स्थापित करने के दिशा में काम करना चाहिए: प्रधानमंत्री
भारत की ओर से हमारे बहादुर अफगानी भाइयों और बहनों के प्रति हमारा समर्पण मजबूत और अटूट है: प्रधानमंत्री मोदी
अफगानिस्तान और उसके लोगों की भलाई के लिए हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं: नरेंद्र मोदी
हम अफगानिस्तान को भारत के साथ एयर कनेक्टिविटी के माध्यम से भी जोड़ना चाहते हैं: प्रधानमंत्री

इस्लामिक गणराज्य अफगानिस्तान के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. मोहम्मद अशरफ गनी, इस्लामिक गणराज्य अफगानिस्तान के माननीय विदेश मंत्री सलाहूद्दीन रब्बानी, मेरे सहयोगी मंत्री अरुण जेटली जी, कई देशों से आए विदेश मंत्री, प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों, गणमान्य जनों,
नमस्कार। सत श्री अकाल।

अफगानिस्तान पर छठा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल प्रोसेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने का मुझे सम्मान प्राप्त हुआ।

मेरे लिए यह खुशी की बात इसलिए है क्योंकि मेरे साझेदार और दोस्त अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के साथ मुझे इस सम्मेलन का संयुक्त रूप से उद्घाटन का अवसर मिला।

अपने निमंत्रण को स्वीकार करने और इस सम्मेलन की शोभा बढ़ाने की खातिर मैं महामहिम गनी का शुक्रगुजार हूं। मेरे लिए यह भी एक बड़े सम्मान की बात है कि मुझे अमृतसर में आप सभी का स्वागत करने का अवसर प्राप्त हुआ, जहां सादगी और सुंदरता व्याप्त है, जहां सिखों का पवित्र गुरुद्वारा स्वर्ण मंदिर स्थित है।

यह सिख गुरुओं का वह स्थान है, जो उनके ध्यान और साधना से पवित्र बना है। यह शांति और मानवता का प्रतीक है जो सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला हुआ है। इस शहर की सड़कें और पार्क सिखों की महान वीरता और बलिदान की कहानियों को बयां करते हैं।

यह वह शहर है जिसके चरित्र को देशभक्ति और इसके निवासियों के उदार परोपकार, उद्यम, रचनात्मकता और कड़ी मेहनत द्वारा आकार दिया गया है। अफगानिस्तान के साथ गर्मजोशी और स्नेह के एक पुराने और दृढ़ संबंध को संजोकर रखने वाला शहर है अमृतसर।

15वीं सदी में अफगान के काबुल में अपने धर्म का उपदेश देने वालों में सिखों के पहले गुरु बाबा गुरु नानक देव जी के शिष्य भी शामिल रहे हैं।
आज भी, अफगान मूल के एक सूफी संत हजरत शेख का पंजाब में दरगाह है, जहां सभी धर्मों के लोग जाते हैं। इनमें अफगानिस्तान के आगंतुक भी शामिल हैं।

हमारे क्षेत्र के माध्यम से व्यापार, लोग और उनके विचारों का प्रवाह अक्सर अमृतसर से होकर गुजरता है, जहां से एशिया का सबसे पुराना ग्रांड ट्रंक रोड होकर जाता है। अमृतसर उस संपर्क को बहाल करता है जो अफगानिस्तान के चुनौतीपूर्ण समग्र विकास, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

गणमान्य जनों,

इस सदी की शुरुआत के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय बड़े पैमाने पर अफगानिस्तान में जुड़ा हुआ है।

दुनिया भर की प्रमुख शक्तियां, क्षेत्रीय देश और संबंधित राष्ट्र राजनीतिक, सामाजिक, सैन्य, आर्थिक और विकासात्मक समर्थन के कई कार्यक्रमों के माध्यम से अफगानिस्तान का सहयोग कर रहे हैं।

आज फिर से हमारी यह जुटान शांति और अफगानिस्तान में राजनीतिक स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता को जाहिर करता है। हमारे ये शब्द और कार्य अपने समय के एक महत्वपूर्ण अधूरे मिशन को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। और, अफगानिस्तान में मदद करने के लिए निम्नलिखित प्रतिबद्धताएं हैं-

* अपनी सामाजिक, राजनीतिक और संस्थागत ढांचे का निर्माण और मजबूत करना ।
* क्षेत्र और नागरिकों को बाहरी खतरों से सुरक्षित रखना ।
* आर्थिक और विकास गतिविधियों को प्रेरणा देना ।
* और यह अपने लोगों के लिए एक स्थिर और समृद्ध भविष्य का निर्माण करना ।
वास्तव में, इस सम्मेलन की जो मंशा है ‘समृद्धि की प्राप्ति के लिए चुनौतियों की पहचान’, उपयुक्त है। हमें चुनौतियों की व्यापकता पर संदेह नहीं है। लेकिन हम समान रूप से सफल होने के लिए इसे निर्धारित करेंगे।

हमने कड़ी मेहनत के जरिय जो हासिल किया है, वह उसी का परिणाम है। लेकिन वह मिश्रित है और उसकी सफलता महत्वपूर्ण है। लेकिन इसके बावजूद अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
समय की मांग है कि हम अपने जमीन पर खड़े हों। हमने पिछले पंद्रह वर्षों में जो हासिल किया है उसकी सुरक्षा करनी होगी और आगे बढ़ना होगा।

क्योंकि यह सिर्फ अफगानिस्तान के भविष्य के विकास, लोकतंत्र, बहुलवाद की दृष्टि से निवेश नहीं किया गया है बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए किया गया है।

हमें और क्या कुछ करना है यह हमारी तत्परता के साथ प्रतिबिंबित होता है। क्या हमें अफगानिस्तान की इसलिए अनदेखी करनी चाहिए कि उसके नागरिक खुद शांति स्थापित करें और विकास करें? इन सभी सवालों के जवाब मौजूद हैं। प्रश्न का उत्तर दिए जाने की जरूरत है ताकि कार्यवाही की जा सके। और, इसके लिए अफगानिस्तान और उसके लोगों को सबसे पहले रखना होगा।

इसके लिए, पहला, यह एक अफगान के नेतृत्व वाली, अफगान के स्वामित्व वाली और अफगान नियंत्रित प्रक्रिया की कुंजी होगी। यही स्थायी समाधान की गारंटी है। दूसरा, हमें आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करने के लिए हमें सामुहिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी, जो आतंक और डर फैलाता है।

आतंकवाद और बाहर से प्रेरित अस्थिरता अफगानिस्तान की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए गंभीरतम खतरा में से एक है। आतंकवादी हिंसा का बढ़ता दायरा हमारे पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है। अफगानिस्तान में शांति की आवाज के लिए सिर्फ समर्थन पर्याप्त नहीं है।

एक दृढ़ कार्रवाई का समर्थन किया जाना चाहिए। यह समर्थन सिर्फ आतंकवाद की ताकतों के खिलाफ ही नहीं होना चाहिए बल्कि यह ऐसे लोगों के खिलाफ भी होना चाहिए, जो आतंकी ताकतों का समर्थन करते हैं, जो उन्हें आश्रय देते हैं, जो उन्हें प्रशिक्षण मुहैया कराते हैं और जो उन्हें वित्तीय मदद देते हैं।

अफगानिस्तान और हमारे क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ निष्क्रियता केवल आतंकवादियों और उनके आकाओं को प्रोत्साहित करेगी। तीसरा, अफगानिस्तान के विकास के लिए सामग्री सहायता को लेकर हमारे द्विपक्षीय और क्षेत्रीय प्रतिबद्धताओं एवं मानवीय जरूरतों को जारी रखना और आगे बढ़ाना चाहिए।

अफगानिस्तान को अपने बुनियादी ढांचे और संस्थागत क्षमता विकास के लिए हमें सहकारी प्रयासों का योगदान देना चाहिए।
चौथा, हमें अफगानिस्तान और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच मजबूत एवं सकारात्मक संबंधों का निर्माण करने के लिए सभी काम करने चाहिए।

अफगानिस्तान हमारे कनेक्टिविटी नेटवर्क के केंद्र में होना चाहिए न की केवल परिधीय होना चाहिए। हम अपनी तरफ से, दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच संपर्क को मजबूत बनाने के लिए अफगानिस्तान को एक केंद्र के रूप में देखते हैं। हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि अफगानिस्तान से अधिकतम जुड़ाव इसलिए है कि वह व्यापार, पूंजी और बाजार की क्षेत्रीय धमनी है जो अपने आर्थिक विकास और प्रगति का आश्वासन देता है। राष्ट्रपति गनी और मैं इस क्षेत्र में अन्य सहयोगियों के साथ व्यापार और परिवहन संबंधों को मजबूत बनाने की प्राथमिकता के आधार पर यहां जुटे हैं।

गणमान्य जनों,

भारत की तरफ से, अपने बहादुर अफगान भाइयों और बहनों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता निरपेक्ष और अटूट है। अफगानिस्तान और वहां के लोगों के कल्याण की बात हमारे दिल और दिमाग के करीब है।

छोटी-बड़ी परियोजनाओं में हमारी भागीदारी के सफल रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो अफगानिस्तान में खुद बोलते हैं। हमारे सहयोग के सिद्धांत हमेशा जन केंद्रित होते हैं।

हमारे संयुक्त प्रयास का उद्देश्य निम्मनिलिखित हैं-

* हमारा उद्देश्य अफगानिस्तान के युवाओं को शिक्षित करना है, जो अपने कौशल से परिपूर्ण हों।
* हमार मकसद स्वास्थ्य देखभाल और कृषि में सुधार पर केंद्रित है।
* निर्माण के बुनियादी ढांचे और संस्थाओं का निर्माण।
* हम अफगानिस्तान के व्यापारियों और छोटे व्यवसायियों को भारत में अपार वाणिज्यिक और आर्थिक अवसरों के साथ संबंध जोड़ने की अनुमति देते हैं।
और, हमारे संपर्क और इस तरह के प्रयासों का लाभ अफगानिस्तान के हर कोने को मिलता है। हेरात का भारत-अफगानिस्तान मैत्री बांध, जिसे सलमा बांध भी कहा जाता है, का उद्घाटन कुछ ही दिन पहले किया गया है। यह बांध वहां लोगों के लिए आर्थिक गतिविधि को पुनर्जीवित करेगा।

काबुल में संसद भवन निर्माण अफगानिस्तान के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए हमारी मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। जरांज-डेलाराम राजमार्ग और चाबहार पर भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग, दक्षिण एशिया और उससे इतर मजबूत आर्थिक विकास के केन्द्रों के साथ अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में सक्षम होगा।

हम एक हवाई परिवहन गलियारे के माध्यम से भारत और अफगानिस्तान को जोड़ने की योजना तैयार कर रहे हैं।

राष्ट्रपति गनी और मैंने अपने द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त उपायों पर चर्चा की है। हम अतिरिक्त एक बिलियन अमेरिकी डॉलर के उपयोग से अफगानिस्तान में क्षमता और क्षमता निर्माण के लिए भारत द्वारा निर्धारित योजनाओं को विकसित करने की दिशा में प्रगति कर रहे हैं।

इससे जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों का विस्तार होगा। भारत की इन प्रतिबद्धताओं के अतिरिक्त, हम अफगानिस्तान के विकास के लिए अन्य समान विचारधारा वाले सहयोगियों के साथ काम करने के लिए रास्ते खोले हुए हैं।

हम इस साल जुलाई में नाटो के वॉरसॉ शिखर सम्मेलन एवं अक्टूबर में ब्रसेल्स और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को देखकर खुश हैं । अफगानिस्तान की और बड़े पैमाने पर सहायता के लिए हमारे प्रयासों का समर्पण जारी रहेगा।

इस दिशा में, हमने परियोजनाओं पर काम करके कई सबक सीखें और सर्वोत्तम प्रथाओं एवं हमारे साझा अनुभव आकर्षित करते हैं।

गणमान्य जनों,

हर दिन गुजरते हुए याद करते हैं कि अफगानिस्तान के सफल राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक बदलाव को प्राप्त करने में हम मदद कर रहे हैं। साथ ही एक और अधिक शांतिपूर्ण क्षेत्र एवं दुनिया निर्मित करने में हम भी अपने आप को मदद कर रहे हैं।

मुझे उम्मीद है कि आपके विचार विमर्श में, रचनात्मक उत्पादन और कार्रवाई के लिए रास्ते की तलाश में आगे यह मुद्दे शामिल होंगेः

* संघर्ष की जगह में सहयोग को बढ़ावा देने में,
* आतंकवाद की जगह सुरक्षा और जरूरत की जगह विकास ।

अफगानिस्तान को शांति का एक भूगोल बनाने के लिए फिर से हमें अपने आप को समर्पित करना होगा। एक ऐसी जगह, जहां शांति हो, समृद्धि और प्रगति हो और जहां लोकतंत्र एवं बहुलता की जीत हो।

शुक्रिया

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प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की
June 11, 2026
विकसित भारत की परिकल्पना प्रत्येक राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 70 करोड़ युवाओं को देश की संपत्ति बताया और राज्यों से इस जनसांख्यिकीय लाभांश को विकास लाभांश में बदलने का आग्रह किया
प्रधानमंत्री ने राज्यों को युवाओं और एमएसएमई के लिए अवसर पैदा करने तथा उन देशों से सक्रिय रूप से निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जिनके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं
राज्यों को एक ज़िला एक उत्पाद को मजबूत करना चाहिए और रक्षा विनिर्माण में अवसरों का लाभ उठाना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और लोगों को भविष्य के लिए तैयार कौशल से सुसज्जित किया जाना चाहिए
प्रधानमंत्री ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री मोदी ने अल नीनो से उत्पन्न चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया
मुख्यमंत्री/उप राज्यपाल/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को कार्यालय में 12 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी
राज्यों ने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और भारत की क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की
सभी राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने बैठक में भाग लिया; पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें भाग लिया
बैठक का विषय : विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस वर्ष बैठक का विषय विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास था। इसमें 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहला अवसर था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भारत की विकास गाथा दुनिया को प्रेरित करती रहती है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के प्रति राष्ट्र के संकल्प को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और लागू करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने सहकारी संघवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के युवा इसकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं, जिसमें लगभग 70 करोड़ भारतीय 25 वर्ष से कम आयु के हैं। इसे जनसांख्यिकीय लाभांश बताते हुए उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इसे शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण की पहल के माध्यम से विकास लाभांश में बदलने पर ध्यान केंद्रित करें जो युवाओं को भविष्य के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार करे।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में कई देशों के साथ हुए भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए राज्यों को युवाओं और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए अवसर पैदा करने और हितधारकों को इन समझौतों से होने वाले फायदों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने के लिए तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राज्यों से सक्रिय रूप से सहयोगी देशों से निवेश आकर्षित करने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व वाले विकास पर बल देते हुए, राज्यों से लखपति दीदी की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और नारी शक्ति के लिए सुरक्षित तथा संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से एक ज़िला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल पर ध्यान केंद्रित करने और इसके आसपास निर्यात के अनुकूल रणनीतियों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने रक्षा विनिर्माण का एक उभरते क्षेत्र के रूप में उल्लेख किया जहां भारत एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। श्री मोदी ने राज्यों को इसके विकास से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीतियां तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रधानमंत्री ने निवारक उपायों, जागरूकता अभियानों और प्रभावी शासन के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने अल नीनो की स्थिति से उत्पन्न चिंताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती की प्रथाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चालू खरीफ सीजन के दौरान किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ कृषि में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने जिला स्तर पर प्रगति का मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री मोदी ने विशेष रूप से आकांक्षी जिला मानकों के माध्यम से सुझाव दिया कि इसी तरह कृषि के क्षेत्र में 100 जिलों की पहचान की जानी चाहिए ताकि सकारात्मक परिणाम लाए जा सकें। उन्होंने राज्यों से इस प्रयास में आगे आने का आग्रह किया ताकि महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के माध्यम से एक अभूतपूर्व परिवर्तन हासिल किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत@2047 की परिकल्पना साकार करने के लिए एक निगरानी ढांचे और लक्षित 100-दिवसीय तथा पांच-वर्षीय लक्ष्यों की आवश्यकता पर बल दिया।

निवेश आकर्षित करने के लिए सुशासन, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने राज्यों से ब्रांडिंग, कारोबार करने में आसानी और डेटा केंद्रों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। श्री मोदी ने भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कौशल से लोगों को सुसज्जित करने के लिए अधिक प्रयासों का आह्वान किया।

मुख्यमंत्रियों/उपराज्यपालों/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके कार्यालय में 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और ऊर्जा आवश्यकताओं के संबंध में भारत की क्षमता को मजबूत करने और इसकी विकास गति को बनाए रखने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चा रचनात्मक रही और यह राज्यों की आकांक्षाओं, आशाओं, अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं तथा चुनौतियों को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने बैठक में भाग लेने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भरोसा जताया कि सहयोग, नवाचार और विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता के माध्यम से भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत की ओर अपनी यात्रा को गति दे सकता है।