हमें रक्तपात और डर फैलाने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ संयुक्त रूप से ठोस कार्रवाई करनी होगी: प्रधानमंत्री
अफगानिस्तान और हमारे आस-पास के क्षेत्रों में आतंकवाद के खिलाफ चुप्पी साधने और किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने की वजह से आतंकियों और उनके आकाओं का मनोबल बढ़ेगा: प्रधानमंत्री
हम सबको अफगानिस्तान और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच मजबूत सकारात्मक संबंध स्थापित करने के दिशा में काम करना चाहिए: प्रधानमंत्री
भारत की ओर से हमारे बहादुर अफगानी भाइयों और बहनों के प्रति हमारा समर्पण मजबूत और अटूट है: प्रधानमंत्री मोदी
अफगानिस्तान और उसके लोगों की भलाई के लिए हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं: नरेंद्र मोदी
हम अफगानिस्तान को भारत के साथ एयर कनेक्टिविटी के माध्यम से भी जोड़ना चाहते हैं: प्रधानमंत्री

इस्लामिक गणराज्य अफगानिस्तान के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. मोहम्मद अशरफ गनी, इस्लामिक गणराज्य अफगानिस्तान के माननीय विदेश मंत्री सलाहूद्दीन रब्बानी, मेरे सहयोगी मंत्री अरुण जेटली जी, कई देशों से आए विदेश मंत्री, प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों, गणमान्य जनों,
नमस्कार। सत श्री अकाल।

अफगानिस्तान पर छठा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल प्रोसेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने का मुझे सम्मान प्राप्त हुआ।

मेरे लिए यह खुशी की बात इसलिए है क्योंकि मेरे साझेदार और दोस्त अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के साथ मुझे इस सम्मेलन का संयुक्त रूप से उद्घाटन का अवसर मिला।

अपने निमंत्रण को स्वीकार करने और इस सम्मेलन की शोभा बढ़ाने की खातिर मैं महामहिम गनी का शुक्रगुजार हूं। मेरे लिए यह भी एक बड़े सम्मान की बात है कि मुझे अमृतसर में आप सभी का स्वागत करने का अवसर प्राप्त हुआ, जहां सादगी और सुंदरता व्याप्त है, जहां सिखों का पवित्र गुरुद्वारा स्वर्ण मंदिर स्थित है।

यह सिख गुरुओं का वह स्थान है, जो उनके ध्यान और साधना से पवित्र बना है। यह शांति और मानवता का प्रतीक है जो सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला हुआ है। इस शहर की सड़कें और पार्क सिखों की महान वीरता और बलिदान की कहानियों को बयां करते हैं।

यह वह शहर है जिसके चरित्र को देशभक्ति और इसके निवासियों के उदार परोपकार, उद्यम, रचनात्मकता और कड़ी मेहनत द्वारा आकार दिया गया है। अफगानिस्तान के साथ गर्मजोशी और स्नेह के एक पुराने और दृढ़ संबंध को संजोकर रखने वाला शहर है अमृतसर।

15वीं सदी में अफगान के काबुल में अपने धर्म का उपदेश देने वालों में सिखों के पहले गुरु बाबा गुरु नानक देव जी के शिष्य भी शामिल रहे हैं।
आज भी, अफगान मूल के एक सूफी संत हजरत शेख का पंजाब में दरगाह है, जहां सभी धर्मों के लोग जाते हैं। इनमें अफगानिस्तान के आगंतुक भी शामिल हैं।

हमारे क्षेत्र के माध्यम से व्यापार, लोग और उनके विचारों का प्रवाह अक्सर अमृतसर से होकर गुजरता है, जहां से एशिया का सबसे पुराना ग्रांड ट्रंक रोड होकर जाता है। अमृतसर उस संपर्क को बहाल करता है जो अफगानिस्तान के चुनौतीपूर्ण समग्र विकास, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

गणमान्य जनों,

इस सदी की शुरुआत के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय बड़े पैमाने पर अफगानिस्तान में जुड़ा हुआ है।

दुनिया भर की प्रमुख शक्तियां, क्षेत्रीय देश और संबंधित राष्ट्र राजनीतिक, सामाजिक, सैन्य, आर्थिक और विकासात्मक समर्थन के कई कार्यक्रमों के माध्यम से अफगानिस्तान का सहयोग कर रहे हैं।

आज फिर से हमारी यह जुटान शांति और अफगानिस्तान में राजनीतिक स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता को जाहिर करता है। हमारे ये शब्द और कार्य अपने समय के एक महत्वपूर्ण अधूरे मिशन को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। और, अफगानिस्तान में मदद करने के लिए निम्नलिखित प्रतिबद्धताएं हैं-

* अपनी सामाजिक, राजनीतिक और संस्थागत ढांचे का निर्माण और मजबूत करना ।
* क्षेत्र और नागरिकों को बाहरी खतरों से सुरक्षित रखना ।
* आर्थिक और विकास गतिविधियों को प्रेरणा देना ।
* और यह अपने लोगों के लिए एक स्थिर और समृद्ध भविष्य का निर्माण करना ।
वास्तव में, इस सम्मेलन की जो मंशा है ‘समृद्धि की प्राप्ति के लिए चुनौतियों की पहचान’, उपयुक्त है। हमें चुनौतियों की व्यापकता पर संदेह नहीं है। लेकिन हम समान रूप से सफल होने के लिए इसे निर्धारित करेंगे।

हमने कड़ी मेहनत के जरिय जो हासिल किया है, वह उसी का परिणाम है। लेकिन वह मिश्रित है और उसकी सफलता महत्वपूर्ण है। लेकिन इसके बावजूद अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
समय की मांग है कि हम अपने जमीन पर खड़े हों। हमने पिछले पंद्रह वर्षों में जो हासिल किया है उसकी सुरक्षा करनी होगी और आगे बढ़ना होगा।

क्योंकि यह सिर्फ अफगानिस्तान के भविष्य के विकास, लोकतंत्र, बहुलवाद की दृष्टि से निवेश नहीं किया गया है बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए किया गया है।

हमें और क्या कुछ करना है यह हमारी तत्परता के साथ प्रतिबिंबित होता है। क्या हमें अफगानिस्तान की इसलिए अनदेखी करनी चाहिए कि उसके नागरिक खुद शांति स्थापित करें और विकास करें? इन सभी सवालों के जवाब मौजूद हैं। प्रश्न का उत्तर दिए जाने की जरूरत है ताकि कार्यवाही की जा सके। और, इसके लिए अफगानिस्तान और उसके लोगों को सबसे पहले रखना होगा।

इसके लिए, पहला, यह एक अफगान के नेतृत्व वाली, अफगान के स्वामित्व वाली और अफगान नियंत्रित प्रक्रिया की कुंजी होगी। यही स्थायी समाधान की गारंटी है। दूसरा, हमें आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करने के लिए हमें सामुहिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी, जो आतंक और डर फैलाता है।

आतंकवाद और बाहर से प्रेरित अस्थिरता अफगानिस्तान की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए गंभीरतम खतरा में से एक है। आतंकवादी हिंसा का बढ़ता दायरा हमारे पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है। अफगानिस्तान में शांति की आवाज के लिए सिर्फ समर्थन पर्याप्त नहीं है।

एक दृढ़ कार्रवाई का समर्थन किया जाना चाहिए। यह समर्थन सिर्फ आतंकवाद की ताकतों के खिलाफ ही नहीं होना चाहिए बल्कि यह ऐसे लोगों के खिलाफ भी होना चाहिए, जो आतंकी ताकतों का समर्थन करते हैं, जो उन्हें आश्रय देते हैं, जो उन्हें प्रशिक्षण मुहैया कराते हैं और जो उन्हें वित्तीय मदद देते हैं।

अफगानिस्तान और हमारे क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ निष्क्रियता केवल आतंकवादियों और उनके आकाओं को प्रोत्साहित करेगी। तीसरा, अफगानिस्तान के विकास के लिए सामग्री सहायता को लेकर हमारे द्विपक्षीय और क्षेत्रीय प्रतिबद्धताओं एवं मानवीय जरूरतों को जारी रखना और आगे बढ़ाना चाहिए।

अफगानिस्तान को अपने बुनियादी ढांचे और संस्थागत क्षमता विकास के लिए हमें सहकारी प्रयासों का योगदान देना चाहिए।
चौथा, हमें अफगानिस्तान और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच मजबूत एवं सकारात्मक संबंधों का निर्माण करने के लिए सभी काम करने चाहिए।

अफगानिस्तान हमारे कनेक्टिविटी नेटवर्क के केंद्र में होना चाहिए न की केवल परिधीय होना चाहिए। हम अपनी तरफ से, दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच संपर्क को मजबूत बनाने के लिए अफगानिस्तान को एक केंद्र के रूप में देखते हैं। हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि अफगानिस्तान से अधिकतम जुड़ाव इसलिए है कि वह व्यापार, पूंजी और बाजार की क्षेत्रीय धमनी है जो अपने आर्थिक विकास और प्रगति का आश्वासन देता है। राष्ट्रपति गनी और मैं इस क्षेत्र में अन्य सहयोगियों के साथ व्यापार और परिवहन संबंधों को मजबूत बनाने की प्राथमिकता के आधार पर यहां जुटे हैं।

गणमान्य जनों,

भारत की तरफ से, अपने बहादुर अफगान भाइयों और बहनों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता निरपेक्ष और अटूट है। अफगानिस्तान और वहां के लोगों के कल्याण की बात हमारे दिल और दिमाग के करीब है।

छोटी-बड़ी परियोजनाओं में हमारी भागीदारी के सफल रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो अफगानिस्तान में खुद बोलते हैं। हमारे सहयोग के सिद्धांत हमेशा जन केंद्रित होते हैं।

हमारे संयुक्त प्रयास का उद्देश्य निम्मनिलिखित हैं-

* हमारा उद्देश्य अफगानिस्तान के युवाओं को शिक्षित करना है, जो अपने कौशल से परिपूर्ण हों।
* हमार मकसद स्वास्थ्य देखभाल और कृषि में सुधार पर केंद्रित है।
* निर्माण के बुनियादी ढांचे और संस्थाओं का निर्माण।
* हम अफगानिस्तान के व्यापारियों और छोटे व्यवसायियों को भारत में अपार वाणिज्यिक और आर्थिक अवसरों के साथ संबंध जोड़ने की अनुमति देते हैं।
और, हमारे संपर्क और इस तरह के प्रयासों का लाभ अफगानिस्तान के हर कोने को मिलता है। हेरात का भारत-अफगानिस्तान मैत्री बांध, जिसे सलमा बांध भी कहा जाता है, का उद्घाटन कुछ ही दिन पहले किया गया है। यह बांध वहां लोगों के लिए आर्थिक गतिविधि को पुनर्जीवित करेगा।

काबुल में संसद भवन निर्माण अफगानिस्तान के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए हमारी मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। जरांज-डेलाराम राजमार्ग और चाबहार पर भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग, दक्षिण एशिया और उससे इतर मजबूत आर्थिक विकास के केन्द्रों के साथ अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में सक्षम होगा।

हम एक हवाई परिवहन गलियारे के माध्यम से भारत और अफगानिस्तान को जोड़ने की योजना तैयार कर रहे हैं।

राष्ट्रपति गनी और मैंने अपने द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त उपायों पर चर्चा की है। हम अतिरिक्त एक बिलियन अमेरिकी डॉलर के उपयोग से अफगानिस्तान में क्षमता और क्षमता निर्माण के लिए भारत द्वारा निर्धारित योजनाओं को विकसित करने की दिशा में प्रगति कर रहे हैं।

इससे जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों का विस्तार होगा। भारत की इन प्रतिबद्धताओं के अतिरिक्त, हम अफगानिस्तान के विकास के लिए अन्य समान विचारधारा वाले सहयोगियों के साथ काम करने के लिए रास्ते खोले हुए हैं।

हम इस साल जुलाई में नाटो के वॉरसॉ शिखर सम्मेलन एवं अक्टूबर में ब्रसेल्स और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को देखकर खुश हैं । अफगानिस्तान की और बड़े पैमाने पर सहायता के लिए हमारे प्रयासों का समर्पण जारी रहेगा।

इस दिशा में, हमने परियोजनाओं पर काम करके कई सबक सीखें और सर्वोत्तम प्रथाओं एवं हमारे साझा अनुभव आकर्षित करते हैं।

गणमान्य जनों,

हर दिन गुजरते हुए याद करते हैं कि अफगानिस्तान के सफल राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक बदलाव को प्राप्त करने में हम मदद कर रहे हैं। साथ ही एक और अधिक शांतिपूर्ण क्षेत्र एवं दुनिया निर्मित करने में हम भी अपने आप को मदद कर रहे हैं।

मुझे उम्मीद है कि आपके विचार विमर्श में, रचनात्मक उत्पादन और कार्रवाई के लिए रास्ते की तलाश में आगे यह मुद्दे शामिल होंगेः

* संघर्ष की जगह में सहयोग को बढ़ावा देने में,
* आतंकवाद की जगह सुरक्षा और जरूरत की जगह विकास ।

अफगानिस्तान को शांति का एक भूगोल बनाने के लिए फिर से हमें अपने आप को समर्पित करना होगा। एक ऐसी जगह, जहां शांति हो, समृद्धि और प्रगति हो और जहां लोकतंत्र एवं बहुलता की जीत हो।

शुक्रिया

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योग सबको जोड़ता है और एकता का संदेश देता है: कोलकाता में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर पीएम मोदी
June 21, 2026
Yoga connects us all and brings us together: PM
When yoga becomes a way of life, it becomes the foundation of human unity: PM
Yoga helps us tune our bodies to be flexible; It keeps our energy levels high: PM
Yoga teaches us the art of living a balanced life: PM
Yoga shows the path from mental well-being to physical well-being: PM

मंच पर विराजमान राज्यपाल श्री आर एन रवि जी, ऊर्जावान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जी, केंद्र में मेरे सहयोगी प्रतापराव जाधव जी, अन्य सभी महानुभाव, यहां कोलकाता में जुटे सभी प्रतिभागी, देश-विदेश में योग से जुड़ रहे सभी साथी, और मेरे प्यारे देशवासियों! 

21 जून का ये दिन, पृथ्वी के कुछ भूभाग पर साल में सबसे लंबी अवधि का दिन होता है। और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कारण 21 जून का ये दिन विश्व के सबसे बड़े सामूहिक उत्सव का दिन भी बन गया है। विश्व के अलग-अलग हिस्सों से योग की एक से एक अद्भुत तस्वीरें आ रहीं हैं। भारत में हिमालय से लेकर हिन्द महासागर तक, पूर्वोत्तर और पूरब में बंगाल से लेकर पश्चिम में सौराष्ट्र तक, पूरा देश योग की ऊर्जा से चैतन्य से भरा हुआ नज़र आ रहा है। पूरा देश, पूरा विश्व एक दूसरे से जुड़ा हुआ नज़र आ रहा है और यही तो योग की ताकत है। योग सबको जोड़ता है, योग सबको साथ लाता है। मैं इस अवसर पर पूरे विश्व को, संपूर्ण मानव समुदाय को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। 

साथियों,

आज योग दिवस पर मैं खासकर के पूरे बंगाल में, कोलकाता में, यहां बने स्वच्छता के योग के लिए भी कोलकाता वासियों की सराहना करूंगा। ये अद्भुत पहल है- स्वच्छता से स्वागत पहल के लिए जिस तरह यहां लगातार श्रम किया गया है, नागरिक कर्तव्य निभाया गया है, वो सभी देशवासियों के लिए आज एक बहुत बड़ी प्रेरणा बन गया है।

साथियों,

योग दिवस के अवसर पर आज बंगाल में होना बहुत ही विशेष है। बंगाल की ये पवित्र भूमि, जहां भगवान रामकृष्ण परमहंस जैसे सिद्ध संतों ने अवतार लिया, जहां से निकलकर स्वामी विवेकानंद ने पूरे विश्व को योग से परिचय कराया, जहां महर्षि अरविंद जैसे महान योगी ने जन्म लिया, लाहिड़ी महाशय जैसे महान योगियों ने जहां योग परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, आज उसी धरती पर सामूहिक योग का अनुभव, एक अलग आध्यात्मिक अनुभूति दे रहा है। इसी बंगाल की धरती पर जन्मे गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का मानना था कि मनुष्य की पहचान अलग-अलग रहने में नहीं, बल्कि अपने आसपास की दुनिया से जुड़ने में है। यही जुड़ाव योग का मूल भाव है। महर्षि अरविंद भी कहते थे- हमारा पूरा जीवन योग है, चाहे हमें इसका बोध हो या ना हो। योग जब स्वभाव में आता है तो वो मानवीय एकता का आधार बन जाता है।

साथियों,

योग केवल शारीरिक श्रम का साधन नहीं है। योग किसी एक आयु वर्ग के लिए सीमित भी नहीं है। भारत में हम जानते हैं और देखते आए हैं, योग मानव के जीवन का चेतना के साथ, ऊर्जा के साथ एक प्रकाश भी है। इसीलिए, इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम रखी गई है- Yoga for Healthy Ageing है। उम्र बढ़ने पर भी हम स्वस्थ रह सकते हैं, हम ऊर्जावान और सक्रिय रह सकते हैं, योग हमें इसके लिए मार्ग दिखाता है। Friends, When we speak of "Yoga for Healthy Aging," It means that we can work to ensure that age does not reduce human potential. Yoga can help human life to aspire for constant growth. Our target must be to be more flexible at 40 than we were at 20. Our target must be to be more energetic at 50 than we were at 30. Our target must be to be more resistant to lifestyle diseases at 70 than we were at 50. This is where Yoga can help us. It helps us tune our bodies to be flexible. It keeps our energy levels high, it also helps us maintain a calm stress-free life and helps keep lifestyle diseases away. Moreover, with regular practice, Yoga teaches us to remain lifelong learners of our own bodies and minds. The more we know about ourselves, the better we can manage ourselves. That is why, Yoga for Healthy Aging. This theme must be seen as one for people of all ages, not just for the elderly.

साथियों,

गीता में भगवान कृष्ण ने योग के विषय में कहा है-

युक्त आहार विहारस्य, युक्त चेष्टस्य कर्मसु।

युक्त स्वप्न अव-बोधस्य, योगो भवति दुःखहा॥

अर्थात्, संतुलित आहार विहार से, संतुलित क्रियाओं और कर्मों से संतुलित नींद और जागने से, योग दुःखों का नाश करने वाला हो जाता है। ये संतुलन ही योग का आधार है। यही संतुलन हमारे जीवन का आधार भी है। लेकिन ज्यादातर लोग आज इस आधुनिक समय में जीवन के असंतुलन से ही जूझ रहे हैं, बहुत मशक्कत करनी पड़ रही है उनको, योग हमें जीवन को balanced way में जीने की कला सिखाता है। योग हमें do’s और don’ts सिखाता है। और जब हम हमारे शरीर को सही ढंग से चलाना सीख लेते हैं, तो स्वास्थ्य हमारा स्वभाव बन जाता है।

साथियों,

योग केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर ही फोकस नहीं करता, योग मानसिक स्वास्थ्य से शारीरिक स्वास्थ्य का मार्ग दिखाता है। इसीलिए, योग के विषय में “युक्त चेष्टस्य कर्मसु” कहा गया है। यानी, हमें क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, इसका बोध! ये बोध हमारे जीवन में शांति का स्रोत तो बनता ही है, इससे विश्व शांति का मार्ग भी खुलता है। इसीलिए, योग आज केवल हमारी पर्सनल लाइफ़-स्टाइल के लिए जरूरी नहीं है इतना ही नहीं है, योग दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए एक आवश्यकता भी है।

साथियों,

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर करोड़ों लोग योग से जुड़ते हैं। लेकिन आज का ये दिन हमें अपने साझा संकल्प को फिर दोहराने का अवसर देता है। आइए, हम संकल्प लें, योग को केवल एक दिवस तक सीमित नहीं रखेंगे, योग को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखेंगे। हम योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएंगे। अपने परिवार का हिस्सा बनाएंगे। अपनी आने वाली पीढ़ियों का हिस्सा बनाएंगे।

साथियों,

इसी दिशा में, इस वर्ष "योग 365" की पहल को भी आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत 100 दिन के ऑनलाइन योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें अभूतपूर्व जनभागीदारी देखी गई है। 130 देशों के 30 लाख से अधिक लोगों ने इसमें भाग लिया है।

साथियों,

जब समाज स्वस्थ होगा, तब राष्ट्र भी अधिक सक्षम, अधिक समृद्ध और आत्मविश्वासी बनेगा। मैं आप सबके लिए कामना करता हूं, "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।" इसी के साथ आप सभी को एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!