प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोलकाता से खुलना के बीच ट्रेन को हरी झंडी दिखाई
10 करोड़ डॉलर की लागत से हुए इस रेल नेटवर्क के निर्माण से भारत और बांग्लादेश के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी, बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने आज दोनों देशों के बीच संयुक्‍त रूप से कनेक्‍टिविटी  परियोजनाओं की श्रृंखला का उद्घाटन किया। 

इनमें द्वितीय भैरब और टिटास रेलवे पुल, कोलकाता में चितपुर के अन्‍तर्राष्‍ट्रीय रेल यात्री टर्मिनल भी शामिल हैं। उन्‍होंने कोलकाता और खुलना के बीच बंधन एक्‍सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रेल के परिचालन की शुरूआत की।   

विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज भी नई दिल्‍ली से इस कार्यक्रम में शामिल हुईं। 

इस अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ इस प्रकार है : - 

“इस प्रसारण से जुड़े सभी लोगों को, और विशेषकर बांग्लादेश में रहने वाले सभी भाइयों और बहनों को नमस्कार।


कुछ दिन पहले दोनों देशों में दीपावली, दुर्गा पूजा और काली पूजा के महोत्सव मनाए गए। 

मैं दोनों देशवासियों को इस festival season की शुभकामनाएं देता हूँ।


मुझे प्रसन्नता है कि video conference के माध्यम से आपसे एक बार फ़िर मिलने का अवसर मिला।

आपके स्वास्थ्य के लिए हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

मेरा शुरू से ही मानना रहा है कि पड़ोसी देशों के leaders के साथ सही मायने में पड़ौसियों जैसे संबंध होने चाहिए।

जब मन किया तो बात होनी चाहिए, visits होने चाहिए।

इस सबमें हमें protocol के बंधन में नहीं रहना चाहिए।

कुछ समय पहले हमने South Asia Satellite के launch के समय इसी प्रकार video conference की थी।

पिछले वर्ष हमने मिल कर Petrapole ICP का उद्घाटन भी इसी प्रकार किया था।

और मुझे प्रसन्नता है कि आज हमारी connectivity को मज़बूत करने वाले महत्वपूर्ण projects का उद्घाटन हमने video conference के माध्यम से किया।

Connectivity का सबसे महत्वपूर्ण आयाम है हमारी people-to-people connectivity.

और आज international passenger terminus के उद्घाटन से कोलकाता-ढाका मैत्री express और आज शुरू हुई कोलकाता-खुलना बंधन express के यात्रियों को काफी सुविधा होगी।

इससे उन्हें न सिर्फ़ customs और immigration में आसानी होगी, बल्कि उनकी यात्रा के समय में भी 3 घंटे की बचत होगी।

मैत्री और बंधन, इन दोनों rail सुविधाओं के नाम भी हमारे shared vision के अनुरूप हैं।

जब भी हम connectivity की बात करते हैं, तो मुझे हमेशा आपके pre-1965 connectivity बहाल करने के vision का ख़याल आता है।

मुझे बहुत ख़ुशी है कि हम इस दिशा में क़दम-दर-क़दम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

आज हमने दो rail पुलों का भी उद्घाटन किया है। लगभग 100 million dollars की लागत से बने ये पुल बांग्लादेश के rail network को मजबूत करने में सहायक होंगे।

बांग्लादेश के विकास कार्यों में विश्वस्त साझेदार होना भारत के लिए गर्व का विषय है।

मुझे प्रसन्नता है कि हमारे 8 billion dollars के concessional (कनसे-शनल) finance के commitment के अंतर्गत projects पर अच्छी प्रगति हो रही है।

Development और Connectivity दोनों एक साथ जुड़े हुए हैं, और हम दोनों देशों के बीच जो सदियों पुराने एतिहासिक links हैं, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के लोगों के बीच, उन्हें मजबूत करने की दिशा में आज हमने कुछ और क़दम उठाए हैं।

मुझे पूरा विश्वास है कि जैसे-जैसे हम अपने संबंध बढ़ाएंगे और लोगों के बीच रिश्ते मज़बूत करेंगे, वैसे वैसे हम विकास और समृद्धि के नए आसमान भी छूएंगे।

इस काम में सहयोग के लिए मैं प्रधानमंत्री शेख हसीना जी का, और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी का हृदय से आभार प्रकट करता हूं।

धन्यवाद।  

 

 

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प्रधानमंत्री ने करुणा और संतोष का महत्व बताने वाला संस्कृत सुभाषितम साझा किया
August 24, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि करुणा आत्म-सम्मान लाती है और संतोष सच्ची खुशी लाता है। यह भावना समाज में सहयोग और सद्भाव के बंधन को और मजबूत करती है।

श्री मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः।
उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥”

यह सुभाषितम् बताता है कि आत्म-सम्मान दूसरों पर दया या करुणा दिखाने से प्राप्त होता है। जीवन में अपने भाग्य पर संतुष्ट रहने से लालच पर काबू पाया जाता है। व्यक्ति को परिश्रम और उद्यमिता से आलस्य, सशंयात्‍मक तर्क और अनिर्णय पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से सच्ची खुशी मिलती है। इसी भाव से समाज में सहयोग और सद्भाव की डोर और सशक्त होती है।

कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः।
उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥”