आपदाओं की स्थिति में भी सीआईएसएफ का योगदान हमेशा से सराहनीय रहा है, केरल में आई भीषण बाढ़ में आपने राहत, बचाव के काम में दिन रात एक करके हजारों लोगों का जीवन बचाने में मदद की: प्रधानमंत्री मोदी
गर्मी हो, सर्दी हो, बरसात हो, आप अपने मोर्चे पर बिना विचलित हुए खड़े रहते हैं, देश के लिए होली, दीवाली और ईद होती है, तमाम त्योहार होते हैं, लेकिन आप सभी के लिए अपनी ड्यूटी ही त्योहार बन जाती है: पीएम मोदी
देश में ही नहीं विदेश में भी जब मानवता संकट में आई है तब सीआईएसएफ ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में इंदिरापुरम स्थित केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 50वें संस्थापना दिवस समारोह में भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने सीआईएसएफ जवानों के परेड का अवलोकन किया। उन्होंने विशिष्ट एवं प्रतिभाशाली सेवाओं के लिए सेवा पदक प्रदान किया। उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित किए एवं आगन्तुक पुस्तिका में हस्ताक्षर किए।

प्रधानमंत्री ने सीआईएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए उनकी स्वर्ण जयंती पर बलों को बधाई दी। उन्होंने देश के महत्वपूर्ण संस्थानों की हिफाजत और सुरक्षा में सीआईएसएफ की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि नवीन भारत के लिए निर्मित आधुनिक अवसंरचना की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ के सुरक्षित हाथों में है।

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से सुरक्षा जवानों के साथ सहयोग करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वीआईपी संस्कृति सुरक्षा ढ़ांचे में बाधा उत्पन्न करती है इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि नागरिक सुरक्षा जवानों के साथ सहयोग करें। प्रधानमंत्री ने सीआईएसएफ की भूमिका एवं कार्यों को लेकर आम लोगों में जागरुकता उत्पन्न करने के लिए सीआईएसएफ के कार्यों को प्रदर्शित करते हुए हवाई अड्डों एवं मेट्रो में डिजिटल संग्रहालय आरंभ करने का सुझाव दिया।

प्रधानमंत्री ने देश के अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सीआईएसएफ की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बल आपदा अनुक्रिया, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं कई अन्य प्रकार के कार्यकलापों में भी संलग्न है। इस परिप्रेक्ष्य में प्रधानमंत्री ने केरल में आई बाढ़ एवं नेपाल तथा हैती भूकंपों के दौरान सीआईएसएफ के आपदा राहत अभियानों की भी चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अपने सुरक्षाबलों की हिफाजत सुनिश्चित करने की दिशा में प्रतिबद्ध है। इस संदर्भ में उन्होंने बलों को आधुनिक बनाने तथा उनके कल्याण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।

यह उदगार व्यक्त करते हुए कि ड्यूटी सशस्त्र बलों के लिए उत्सव है, प्रधानमंत्री ने कहा कि सीआईएसएफ की भूमिका आतंकवाद द्वारा उत्पन्न चुनौतियों से बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आतंकवाद के उन्मूलन की दिशा में प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बलों द्वारा प्रदर्शित बहादुरी एवं उनके बलिदानों को समर्पित है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक एवं राष्ट्रीय पुलिस स्मारक जैसे स्मारक चिन्ह नागरिकों में सुरक्षा बलों के योगदान के संबंध में जागरुकता उत्पन्न करेंगे। उन्होंने अपने बल में कई महिला सैनिकों को शामिल करने के सीआईएसएफ के प्रयासों की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे भारत आगे बढ़ रहा है, सीआईएसएफ की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां भी इसी के अनुरूप बढ़ेंगी।

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की
June 23, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।

प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी को एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता बताया, जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का अटूट विश्वास, सार्वजनिक जीवन में साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी दृढता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में अंकित है।

डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की निस्वार्थ सेवा में समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के गहन विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने संस्कृत में रचित सुभाषितम भी साझा किया:

“न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।”

परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”

सुभाषितम् में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमरत्व कर्मों, धन-दौलत या वंश से नहीं, बल्कि त्याग और महान आदर्शों के प्रति पूर्ण समर्पण से प्राप्त होता है। वे महान आत्माएं जो राष्ट्र, समाज और सत्य के लिए अपने स्वार्थों का त्याग कर देते हैं, समय की सीमाओं को पार करते हुए जनमानस में अमर हो जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर, मैं उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। सार्वजनिक जीवन में उनका अटूट विश्वास, साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। डॉ. मुखर्जी का बलिदान हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित है। हम उनके द्वारा संजोए गए और अपनी अंतिम सांस तक सेवा किए गए मूल्यों के मार्गदर्शन में एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी दृढता की पुष्टि करते हैं।”

“निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र और समाज की सेवा में आजीवन समर्पित रहे देश की महान विभूति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को उनके बलिदान दिवस पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उनके प्रखर विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।

परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”