स्वामी विवेकानंद ने भाईचारे पर जोर दिया, उनका मानना था कि हमारी भलाई भारत के विकास में है: प्रधानमंत्री मोदी
कुछ लोग राष्ट्र को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं और देश के युवा ऐसे तत्वों को उचित जवाब दे रहे हैं, हमारे युवा कभी गुमराह नहीं हो सकते: पीएम मोदी
भारत ऐसे कई संतों की भूमि रही है, जिन्होंने समाज सेवा की और समाज सुधार के लिए काम किया: प्रधानमंत्री
'सेवा भाव' हमारी संस्कृति का एक हिस्सा, देश भर में कई व्यक्ति और संगठन निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा कर रहे हैं: प्रधानमंत्री मोदी

आप सभी को विवेकानंद जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

आज बेलगावी का ये विहंगम दृष्यये भव्य तस्वीर देखकर लग रहा है कि सभी विवेकानंदमय हो गए हैं। आज यहां सर्व धर्म सभा का भी आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए भी आपको मंगलकामनाएं।

इस समय जो उत्साह मैं देख पा रहा हूंउसने सभी के मन-मस्तिष्कमन मंदिर को एकरूप कर दिया हैएकीकृत कर दिया है। “सहस्र-सहस्र विवेक आह्वान” के साथ आज यहां एक विश्व रिकॉर्ड बन रहा है।

ये सभी कुछ पूजनीय श्री सिद्धलिंग महाराजश्री यल्लालिंग प्रभुजी और श्री सिद्ध रमेश्वर महास्वामी जी के आशीर्वाद से ही हो रहा है। उनके आशीर्वाद की ऊर्जा इस समय आप सभी के चेहरे पर दिखाई दे रही है।

वो ऊर्जावो आशीर्वाद मैं भी महसूस कर रहा हूं। भाइयों और बहनोंबेलगावी आना मेरे लिए हमेशा से बहुत सुखद अनुभव रहा है। यहां एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भव्य तस्वीर दिखाई देती है।

बहुत थोड़ी सी जगह में पाँच अलग-अलग भाषाओं का प्रवाह देखने को देश के अन्य हिस्सों में कम ही मिलता है। मैं आप सभी के साथ ही बेलगावी की भूमि को भी प्रणाम करता हूं।

बेलगावी कित्तूर की रानी चेन्नमा की भूमि हैअंग्रेजों से लोहा लेने वाले महान योद्धा संगोली रयन्ना की भूमि है। स्वामी विवेकानंद जी ने भी बेलगावी में दस दिनों तक प्रवास किया था।

वो मैसूर के मशहूर महल में भी रुके थे। मैसूर से ही आगे बढ़ते हुए वो केरल और तमिलनाडु गए थे जहां पर कन्याकुमारी में उन्हें एक नई प्रेरणा प्राप्त हुई। उसी प्रेरणा से वो शिकागो गए और पूरी दुनिया को मोह लिया था।

इस वर्ष स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो में दिए गए संबोधन के 125 वर्ष हो रहे हैं।

जब उस संबोधन के सौ वर्ष हुए थे तो मैं विशेषतौर पर शिकागो गया था।  उस बात को भी पच्चीस साल बीत गए हैं। उनकी बातों केउनके संबोधन के इतने बरस बीत जाने के बाद भी हमें हर रोजहर मोड़ पर,

हर समस्या का निदान खोजते हुए लगता है – अरेस्वामी विवेकानंद जी ने ऐसा कहा था !!! कितना ठीक कहा था !!! हमें विवेकानंद जी को याद करने की जरूरत नहीं होतीवे सदैव मन में उपस्थित रहते हैं।

एक भारतीय को कैसा होना चाहिएइस बारे में विवेकानंद जी ने बहुत ही शक्तिशाली मंत्र दिया था। ये थास्वदेश मंत्र। इसकी हर पंक्ति में शक्ति और प्रेरणा भरी है।

उन्होंने कहा था-

 भारततुम मत भूलना तुम्हारा जीवन अपने व्यक्तिगत सुख के लिए नहीं है।  वीरगर्व से बोलो कि मैं भारतवासी हूं और प्रत्येक भारतवासी मेरा भाई है। गर्व से पुकार कर कहो कि हर भारतवासी मेरा भाई हैभारतवासी मेरे प्राण हैं। भारत की मिट्टी मेरा स्वर्ग है। भारत के कल्याण में मेरा कल्याण है।

ऐसे थे विवेकानंद। भारत से एकाकार विवेकानंद। भारत से एकरूप विवेकानंद। भारत के सुख-दुख में अपना सुख दुख मानने वाले विवेकानंद। वो हर बुराई से लड़े।

विदेश में भारत को सपेरों और नटों का देश बताने वाले कुटिल प्रोपेगैण्डा को उन्होंने ध्वस्त किया। दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई। उनमें ज्ञान-विज्ञानभाषासामाजिक सुधारआधुनिक जगत के बढ़ते कदमों के साथ कदम मिलाकर चलने का साहस था।

उनमें समाज में व्याप्त विकृतियोंछुआछूतभेदभावपाखण्ड को खण्ड-खण्ड करने का योद्धा-भाव था। इसी भाव ने विवेकानंद को योद्धा सन्यासी बनाया।

स्वामी विवेकानंद ने कोलम्बो से अल्मोड़ा की यात्रा में जाति के भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की।

उन्होंने लोगों को दो टूक कहा कि –

ज्ञान और दर्शन में दुनिया में तुम्हारे जैसा कोई महान नहीं होगापर व्यवहार में ऐसी निष्कृष्टता भी कोई नहीं करता होगा। धिक्कार हैतुम्हारे ऐसे व्यवहार पर !!!“

सौ-सवा सौ साल पहले उन्होंने जो कहा थावो शायद इतनी बेबाकी से आज भी कोई कहने का साहस  दिखा सके।  साथियोंहमें ये माहौल बदलना होगाये मानसिकता बदलनी होगी।

विवेकानंद को मानना है तो भीतर से जाति का द्वेषजाति भेद का जहर कालकर बाहर करना होगाखत्म करना होगा।

श्री सिद्धलिंग महाराज जी की प्रेरणा से आपके मठ ने भी तो बीते दशकों में जाति के हर तरह के भेदभाव को खत्म करने के लिए काम किया है।

बिना किसी की जाति की परवाह किएकिसी की जाति पूछे समाज के उपेक्षित और कमजोर वर्गों को आपके द्वारा आवश्यक सहायता दी जाती रही है।

आपके मठ से जुड़े लोगों द्वारा गांव-गांव जाकर बाढ़ राहत का काम किया जाता है,

गरीबों को मुफ्त दवाइयां बांटी जाती हैंफ्री मेडिकल कैंप लगाए जाते हैंलोगों को भोजन दिया जाता हैकपड़े दिए जाते हैंतो क्या उसका आधार जाति होती हैनहीं।

बहुत मुश्किल सेदशकों तक किए गए लोगों के प्रयास से देश जाति के बंधन से मुक्त होने की तरफ बढ़ रहा है। लेकिन आप जैसे लाखों-करोड़ों लोगों की इस मेहनत पर कुछ समाज विरोधी लोगों ने अपनी नजरें टिका दी हैं। ये लोग फिर से देश को जाति के नाम पर बांटने का षड़यंत्र कर रहे हैं।

ऐसे लोगों को आज की युवा पीढ़ी द्वारा जवाब दिया जा रहा है। भारत का नौजवान कुछ मुट्ठी भर लोगों के बहकावे में नहीं आने वाला। देश में जातिवादकुरीतियांअंध विश्वास

खत्म करने का संकल्प लेने वाले ऐसे नौजवानन्यू इंडिया के सपने को साकार करने के लिए संकल्प लेने वाले ऐसे नौजवान ही विवेकानंद हैं। वो भारत के नए विक्रमी-पराक्रमीविकासमान चेहरे का प्रतीक हैं।

ऐसा हर नौजवान जो राष्ट्र निर्माण में Pro-Active होकर अपनी ड्यूटी निभा रहा हैन्यू इंडिया के संकल्प को सिद्ध करने के लिए काम कर रहा हैविवेकानंद है। किसी खेत मेंकिसी कारखाने मेंकिसी स्कूल मेंकिसी कॉलेज मेंगली-मोहल्ले-नुक्कड़ में देश की सेवा में जुटा हर व्यक्ति विवेकानंद है।

जो इस समय स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ा रहा हैगांव-गांव जाकर लोगों को डिजिटल सारक्षता प्रदान कर रहा हैवो विवेकानंद है। जो दलित-पीड़ित-शोषित वंचित के लिए काम कर रहा हैवो विवेकानंद है। जो अपनी energy कोअपने ideas कोअपने innovations को समाज के हित में लगा रहा हैवो विवेकानंद है।

साथियोंपिछले वर्ष एक कार्यक्रम हुआ थास्मार्ट इंडिया हैकाथॉन। इस कार्यक्रम में 40 हजार से ज्यादा युवादेश की लगभग 600 समस्याओं के डिजिटल समाधान के लिए जुटे थे। ये भी मेरे लिए विवेकानंद ही हैं। लाखों-करोड़ों साधारण से लोगभारत की मिट्टी की सुगंध लिए न्यू इंडिया के निर्माताहमारे नए युग के विवेकानंद हैं। इन्हें मैं प्रणाम करता हूंइस कार्यक्रम में मौजूद हर विवेकानंद कोदेश में मौजूद हर विवेकानंद को मैं नमन करता हूं।

भाइयों और बहनोंहजारों साल का इतिहास समेटे हुए हमारे देश में समय के साथ परिवर्तन आते रहे हैं। व्यक्ति में परिवर्तनसमाज में परिवर्तन। लेकिन समय के साथ ही कुछ बुराइयां भी समाज में शामिल होती रही हैं।

ये हमारे समाज की विशेषता है कि जब भी ऐसी बुराइयां आई हैंतो सुधार का काम समाज के बीच में ही किसी ने शुरू किया है। ऐसे महान समाज सुधारकों ने हमेशा जनसेवा को केंद्र में रखा। अपने मन-वचन-कर्म से उन्होंने समाज को शिक्षा तो दी हीलोगों की सेवा को प्राथमिकता भी दी। देश के सामान्य मानवी को उसकी आसान भाषा में समझाया।

ये एक तरह का जनआंदोलन था जिसका विस्तार सैकड़ो वर्षों के कालखंड में नजर आया।

ये आंदोलन दक्षिण में मध्वाचार्यनिम्बार्काचार्यवल्लभचार्यरामानुजाचार्य,

पश्चिम में मीराबाईएकनाथतुकारामरामदासनरसी मेहताउत्तर में रामानंदकबीरदासगोस्वामी तुलसीदाससूरदासगुरु नानकदेवसंत रैदासपूर्व में चैतन्य महाप्रभुऔर शंकर देव जैसे संतों के विचारों से सशक्त हुआ।

ये भी हमारे देश की अद्भुत शक्ति है कि इन्हें कभी धार्मिक आंदोलन से जोड़कर नहीं देखा गया। हमारे यहां हमेशा ज्ञानभक्ति और कर्मतीनों का संतुलन स्वीकार किया गया।

ज्ञान में ये संतइस मूलभूत प्रश्न के उत्तर को खोजते थे कि आखिर मैं कौन हूं।

भक्तिसमर्पण का दूसरा नाम था और कर्म पूरी तरह से सेवा भाव पर आधारित था। ऐसे अनेक संतोंमहापुरुषों का ही प्रभाव था कि देश तमाम विपत्तियों को सहते हुए आगे बढ़ पाया। उस कालखंड मेंदेश के हर क्षेत्रहर इलाकेहर दिशा में मंदिरों-मठों से बाहर निकलकर हमारे संतों ने एक सामाजिक चेतना जगाने का प्रयास किया।

हम गर्व के साथ कह सकते हैं हिंदुस्तान के पास ऐसी महान परंपरा हैऐसे महान संत-मुनि रहे हैंजिन्होंने अपनी तपस्याअपने ज्ञान का उपयोग राष्ट्र का निर्माण करने के लिए किया है।

इसी कड़ी में स्वामी दयानंद सरस्वतीराजा राम मोहन रायज्योतिबा फुलेमहात्मा गांधीबाबा साहेब अम्बेडकरबाबा आम्टेपांडुरंग शास्त्री आठवलेविनोबा भावेजैसे अनगिनत महापुरुष हुए। इन्होंने सेवा को केंद्र में रखा और सामाजिक सुधार भी किया।

इन्होंने देश के लिएसमाज के लिए जो संकल्प लियाउसे सिद्ध करके दिखाया।

साथियोंआपके मठ ने भी त्याग की परंपरा को अपनाया हैसेवा की परंपरा को अपनाया है। आपके मठ को विरक्त मठ के नाम से जाना जाता है। विरक्त यानि हर तरह के सांसारिक मोह से मुक्त। अलग-अलग राज्यों में फैले आपके 360 से ज्यादा मठ जब अन्नदान की प्रथा पर चलते हैंगरीब और भूखे लोगों को भोजन कराते हैंतो निश्चित तौर पर धरती मां कीमानवता की सर्वोत्तम सेवा होती है।

शिव भावे जीव सेवा का ये उत्तम उदाहरण है। हमारे तो देश का इतिहास रहा है सेवा का,

सेवा भाव का। हर कुछ दूरी पर गरीबों के लिए भोजन और रहने की व्यवस्था हमारी परंपरा रही है। ये व्यवस्था साधु-संतो के आशीर्वाद से सामान्य समाज के लोग करते थे। आज भी अनेक शहरों-गांवों में ये व्यवस्था जीवित हैफल-फूल रही है।

भाइयों और बहनोंभारत ने हमेशा पूरे विश्व को मानवतालोकतंत्रसुशासनअहिंसा का संदेश दिया है। जब दुनिया के बड़े-बड़े देशों नेपश्चिम के बड़े-बड़े जानकारों ने लोकतंत्र कोएक नए दृष्टिकोण के तौर पर देखना शुरू कियाउससे सदियों पहले भारत ने इन मूल्यों को ना सिर्फ आत्मसात कियाबल्कि अपनी प्रशासनिक पद्धति में शामिल भी किया।

भगवान बसवेश्वर ने बारहवीं शताब्दी में दुनिया को लोकतंत्र कासमानता का विचार दिया था। उन्होंने अनुभव मंडप नाम की एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जिसमें हर तरह के लोगगरीब-दलित-पीड़ित-वंचितअपने विचार रख सकते थे। यहां सब बराबर थे।

2015 में जब मैं ब्रिटेन गया थातो वहां भगवान बसवेश्वर की मूर्ति का लोकार्पण करने का सौभाग्य भी मुझे मिला था।

मुझे ध्यान है उस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री मैग्ना कार्टा का जिक्र कर रहे थे।

लेकिन मैग्ना कार्टा से भी बहुत पहले बसेश्वर ने हमें एक तरह से पहली संसद से परिचय करा दिया था।

भगवान बसवेश्वर का ‘वचन’ था कि-

जब विचारों का आदान-प्रदान ना होजब तर्क के साथ बहस ना होतब अनुभव गोष्ठी भी प्रासंगिक नहीं रह जाती और जहां ऐसा होता हैवहां ईश्वर का वास भी नहीं होता

यानि उन्होंने विचारों के इस मंथन को ईश्वर की तरह शक्तिशाली और ईश्वर की तरह ही आवश्यक बताया था। अनुभव मंडप में महिलाओं को भी खुलकर बोलने की स्वतंत्रता थी।

समाज के हर वर्ग से आई महिलाएं अपने विचार व्यक्त करती थीं। कई महिलाएं ऐसी भी होती थीं जिनसे अपेक्षा नहीं की जाती थी कि वो उस समय के तथाकथित सभ्य समाज के बीच भी आएंवैसी महिलाएं भी आकर अनुभव मंडप में अपनी बात रखती थीं।

महिला सशक्तिकरण को लेकर उस दौर में ये बहुत बड़ा प्रयास था। मैंने पिछले वर्ष ही भगवान बसवेश्वर के वचनों के 23 भाषाओं में हुए अनुवाद का लोकार्पण किया था।

मुझे आशा है कि ये भगवान बसवेश्वर के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहे होंगे।

इस अवसर पर मैं पूर्व उप राष्ट्रपति श्री बीडीजत्ती को भी नमन करता हूं और बासवा समिति में उनके योगदान का स्मरण करता हूं। श्री अरविंद जत्ती का भी मैं विशेष उल्लेख करना चाहूंगा।

साथियोंमुझे बताया गया है कि पूजनीय श्री सिद्ध रमेश्वर महास्वामी जी द्वारा अनुभव मंडप को फिर से प्रारंभ करने का संकल्प लिया गया था। वो इसे यहां के मठ में स्थापित करना चाहते थे।

ये बहुत प्रसन्नता की बात है कि उनका ये स्वप्न श्री मुरुघा राजेंद्र महास्वामी के नेतृत्व में साकार हो रहा है। इस अनुभव मंडप से देश में समानता के अधिकार का संदेश प्रसारित होगा। सर्व जन सुखिनो भवंतु के मंत्र पर चलते हुएसभी के सुख की कामना के साथ हो रहे इस आयोजन के लिए मैं आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों, 2022 में हमारा देश स्वतंत्रता के 75वें वर्ष का पर्व मनाएगा। ये पर्व क्या हम देश की आंतरिक कमजोरियों के साथ मनाएंगेनहीं। हम सभी ने संकल्प लिया है न्यू इंडिया बनाने का। इस संकल्प में आपका योगदानसंकल्प से सिद्धि की इस यात्रा को और सुगम कर देगा। क्या शिक्षा के क्षेत्र मेंबेटियों को पढ़ाने के क्षेत्र मेंयुवाओं में कौशल विकास के क्षेत्र मेंस्वास्थ्य के क्षेत्र मेंस्वच्छता के क्षेत्र मेंडिजिटल साक्षरता के क्षेत्र में,

सौर ऊर्जा के प्रसार के लिएक्या आपके द्वारा भी कोई संकल्प लिया जा सकता है?

मुझे पता है कि आप इस तरह के क्षेत्रों में पहले से काम कर रहे हैं। लेकिन क्या आंकड़ों में लक्ष्य तय करके कोई संकल्प लिया जा सकता है। जैसे क्या ये संकल्प लिया जा सकता है कि अगले दो वर्ष में 2 हजार, 5 हजार गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराने में मदद की जाएगी। क्या ये संकल्प लिया जा सकता है कि अगले दो वर्ष में आपके चुने हुए

हजार गांवों मेंहर घर में LED बल्ब होगा।

साथियोंसरकार इन सभी सेक्टरों में कार्य कर रही है लेकिन लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने मेंलोगों को प्रेरित करने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका है। मेरा विश्वास है कि आप जब कदम बढ़ाएंगेतो लाखों विवेकानंद की शक्ति आपके संकल्पों को सिद्ध करेगी।

अभी बेलगावी में दस हजार विवेकानंद जुटे हैंतब लाखों विवेकानंद जुटेंगे। आपके कार्य सिद्ध होंगे तो हमारी सामाजिक व्यवस्था को भी और मजबूती मिलेगी। एक भारत-

श्रेष्ठ भारत कासामर्थ्यवान भारत का स्वामी विवेकानंद का सपना पूरा होगा।

इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। एक बार फिर मैं मंच पर उपस्थित सभी संतों को प्रणाम करता हूं। आप सभी को राष्ट्रीय युवा दिवस और सर्व धर्म सभा की पुनबहुत-बहुत शुभकामनाएं।

 

बहुत-बहुत धन्यवाद !!!

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Prime Minister’s visit to Indonesia, Australia and New Zealand
July 03, 2026

At the invitation of the President of the Republic of Indonesia, H.E. Mr. Prabowo Subianto, Prime Minister Shri Narendra Modi will pay a visit to Indonesia from 6-8 July, 2026. This will be Prime Minister’s fourth visit to Indonesia and his first bilateral visit since the elevation of India-Indonesia ties to the level of Comprehensive Strategic Partnership in May 2018. During the visit, Prime Minister will hold bilateral discussions with President Prabowo and review the progress made in the partnership. In Jakarta, Prime Minister will address a large gathering of the Indian Diaspora. India and Indonesia share historical and warm people-to-people ties. In keeping with these special bonds, Prime Minister will visit the Prambanan Temple complex at Yogyakarta, a prominent UNESCO world heritage site in Indonesia.

From Indonesia, at the invitation of the Prime Minister of Australia, the Honourable Anthony Albanese MP, Prime Minister will travel to Melbourne from 8-10 July, 2026. In Melbourne, Prime Minister will hold bilateral discussions with Prime Minister Albanese. He will also call on the Governor General of Australia, the Honourable Ms Sam Mostyn AC. During his visit, Prime Minister will also participate in the India-Australia CEOs Forum, where he will address a gathering of top business leaders from both countries. Prime Minister will also address a large gathering of the Indian Diaspora, who constitute a strong pillar of the India-Australia relationship.

From Melbourne, at the invitation of the Prime Minister of New Zealand, Rt Honourable Christopher Luxon, Prime Minister will travel to Auckland for a state visit from 10-11 July, 2026. This will be the first state visit of an Indian Prime Minister to New Zealand in four decades. In Auckland, Prime Minister will hold bilateral discussions with Prime Minister Luxon and review the entire gamut of the bilateral relationship, which has seen significant progress in the last two years, especially in the areas of trade and commerce and defence. While in Auckland, Prime Minister will also interact with prominent business and sports personalities. In a reflection of the strong people-to-people ties that exist between India and New Zealand, Prime Minister will address a large gathering of the Indian Diaspora during the visit.