जन सेवा ही प्रभु सेवा: प्रधानमंत्री मोदी
हम केदारनाथ में जैसा काम कर रहे हैं, हम यह दिखाना चाहते हैं कि 'आदर्श तीर्थ क्षेत्र' कैसा होना चाहिए: पीएम मोदी
हम केदारनाथ में गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं। यह आधुनिक होगा और इसमें पारंपरिक लोकाचार को भी संरक्षित किया जाएगा: पीएम मोदी 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज केदारनाथ का दौरा किया| उन्होंने केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और पांच आधारभूत संरचना और विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी| इन परियोजनाओं में मंदाकिनी नदी के किनारे दीवार और घाट का विकास, सरस्वती नदी के किनारे दीवार और घाट का विकास, केदारनाथ मंदिर तक सीधे पहुँचने के लिए मेन एप्रोच का निर्माण, शंकराचार्य कुटीर एवं शंकराचार्य संग्रहालय का विकास, केदारनाथ के पुरोहितों के लिए घरों का निर्माण शामिल हैं | प्रधानमंत्री को केदारपुरी के पुनर्निर्माण परियोजना के बारे में भी जानकारी दी गयी | 

केदारनाथ में एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह दीवाली के अगले दिन वहाँ पहुंचकर बहुत प्रसन्न हैं| उन्होंने बताया कि आज के दिन गुजरात में नव वर्ष की शुरुआत होती है, इस मौके पर उन्होंने पूरे विश्व के लोगों को शुभकामनाएं दीं|

यह बताते हुए कि जन सेवा ही प्रभु सेवा है, प्रधानमंत्री ने 2022 तक विकसित भारत का सपना पूरा करने के लिए स्वयं को पूरी तरह समर्पित करने का संकल्प लिया| 2022 में भारत की आजादी के 75 साल पूरे होंगे | 2013 की प्राकृतिक आपदा को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने वह सब कुछ किया जो वह कर सकते थे, साथ ही उन्होंने इलाके के पुनर्निर्माण के लिए गुजरात से मदद का भी प्रस्ताव दिया| 

प्रधानमंत्री ने कहा कि केदारनाथ में होने वाले कार्यों के जरिये कोई भी यह समझ सकता है कि एक आदर्श तीर्थ स्थल कैसा होना चाहिए...चाहे वह श्रद्धालुओं के लिए सुविधा की बात हो या पुरोहितों के कल्याण की बात हो| उन्होंने बताया कि केदारनाथ में पूरी होने वाली परियोजनाएं उच्च गुणवत्ता की होंगी...वे आधुनिक तो होंगी पर साथ ही साथ वे पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित करेंगी और पर्यावरण को हानि न हो यह सुनिश्चित करेंगी|

श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हिमालय आध्यात्म, रोमांच पर्यटन और प्रकृति प्रेमी के लिए काफी कुछ दे सकता है| उन्होंने सभी को हिमालय आने के लिए आमंत्रित किया | इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल डा. के के पॉल और मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत भी उपस्थित रहे|

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए शुभ विचारों, वाणी और कर्मों को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया
July 24, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें इस बात पर बल दिया गया कि विचार, वाणी और कर्म में निरंतर अभ्यास किस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और जीवन की दिशा को आकार देता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी एक पोस्ट में लिखा:

"कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते।

तदेवापहरत्येनं तस्मात् कल्याणमाचरेत्॥"

मनुष्य अपने कर्मों, विचारों और वाणी के माध्यम से निरंतर जिसका अभ्यास करता है, अंततः वही उसके व्यक्तित्व को आकार देता है और उसे उसी दिशा में ले जाता है, इसलिए, व्यक्ति को अपने विचारों और संवाद में सदैव केवल कल्याणकारी विषयों को ही स्थान देना चाहिए।