प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें इस बात पर बल दिया गया कि विचार, वाणी और कर्म में निरंतर अभ्यास किस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और जीवन की दिशा को आकार देता है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी एक पोस्ट में लिखा:
"कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते।
तदेवापहरत्येनं तस्मात् कल्याणमाचरेत्॥"
मनुष्य अपने कर्मों, विचारों और वाणी के माध्यम से निरंतर जिसका अभ्यास करता है, अंततः वही उसके व्यक्तित्व को आकार देता है और उसे उसी दिशा में ले जाता है, इसलिए, व्यक्ति को अपने विचारों और संवाद में सदैव केवल कल्याणकारी विषयों को ही स्थान देना चाहिए।
कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते।
— Narendra Modi (@narendramodi) July 24, 2026
तदेवापहरत्येनं तस्मात्कल्याणमाचरेत्॥ pic.twitter.com/0MyI0fXlu2


