प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्‍ली में सहायक सचिवों (2017 आईएएस) के समापन सत्र की अध्‍यक्षता की। अधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री के समक्ष प्रेजेंटेशन दिए गए। ये प्रेजेंटेशन अकांक्षी जिलों को बदलने से लेकर पारदर्शिता और त्‍वरित सेवा डिलिवरी से संबंधित विभिन्‍न शासन समाधानों से जुड़े थे।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को नए विचारों, नई अवधारणाओं और परिपेक्ष्‍यों के प्रति उत्‍तरदायी होने के लिए प्रोत्‍साहित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विभिन्‍न स्रोतों से फीडबैक लेना चाहिए, उनका विश्‍लेषण करना चाहिए और उन्‍हें शामिल करना चाहिए। उन्‍होंने अधिकारियों से कहा कि वे निरंतर सीखने और जानकारी प्राप्‍त करने की कोशिश करें।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों के लिए सेवा निष्‍ठा महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि यह निष्‍ठा तटस्‍थता लाएगी। उन्‍होंने लोक भागीदारी के महत्‍व पर बल देते हुए युवा अधिकारियों से सरकारी योजनाओं को कारगर तरीके से लागू करने के लिए सामूहिक प्रयास को प्रोत्‍साहित करने का आग्रह किया। उन्‍होंने अधिकारियों को सहायक सचिव के कार्यकाल के दौरान प्राप्‍त अनुभवों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों के प्रेजेंटेशन के लिए उनकी सराहना की और उनके भविष्‍य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्‍होंने कहा कि देश के लिए आपकी सफलता महत्‍वपूर्ण है। आपकी सफलता अनेक लोगों की जिंदगी बदल सकती है।

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पीएम नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत सुभाषितम साझा किया, पृथ्वी को बताया सभी जीवों की माँ
August 06, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि मानवता को पृथ्वी के साथ सद्भाव में रहना चाहिए, क्योंकि पृथ्वी समस्त जीवन का पालन-पोषण करने वाली माता है और जिस नैतिक व्यवस्था का वह पालन करती है उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-

विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्।

शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर अपने पोस्ट में लिखा:

विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्।

शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥