दादी जानकी एक सच्ची कर्म योगी हैं जो 100 वर्ष की उम्र में भी समाज की सेवा कर रही हैं: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रह्म कुमारी संस्थान द्वारा सौर ऊर्जा सहित विभिन्न किये गए कार्यों की सराहना की
ब्रह्म कुमार और कुमारी ने पूरे विश्व में भारत की समृद्ध संस्कृति का संदेश प्रसारित किया है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ब्रह्माकुमारीज़परिवार के 80वीं वर्षगांठ समारोह के अवसर पर वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए आज समारोह को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ईश्वरीय विश्वविद्यालय केभारत और विदेश के प्रतिनिधियों का अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन एवं सांस्‍कृति उत्‍सव में स्‍वागत करते हुएप्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संस्‍थापक दादा लेखराज का अभिवंदन किया। उन्‍होंने दादी जनक जी, कोसच्‍ची कर्म योगी की संज्ञा देते हुए उनकी प्रशंसा की, जो 100 वर्ष  की आयु में भी समाज की सेवा में अनवरत रूप से कार्यरत हैं।

प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा सहित अनेक क्षेत्रों में ब्रह्माकुमारीज़ संस्‍था द्वारा किये गये कार्यों को सराहा। उन्‍होंने भ्रष्‍टाचार समाप्‍त करने के लिए डिजिटल लेन-देन के विस्‍तार का आह्वान किया। 

प्रधानमंत्री ने स्‍वच्‍छ भारत और एलईडीप्रकाश व्‍यवस्‍था जैसे उद्देश्‍यों पर भी अपने विचार रखें और इनके लाभों  के बारे में बताया। 

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।