दादी जानकी एक सच्ची कर्म योगी हैं जो 100 वर्ष की उम्र में भी समाज की सेवा कर रही हैं: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रह्म कुमारी संस्थान द्वारा सौर ऊर्जा सहित विभिन्न किये गए कार्यों की सराहना की
ब्रह्म कुमार और कुमारी ने पूरे विश्व में भारत की समृद्ध संस्कृति का संदेश प्रसारित किया है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ब्रह्माकुमारीज़परिवार के 80वीं वर्षगांठ समारोह के अवसर पर वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए आज समारोह को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ईश्वरीय विश्वविद्यालय केभारत और विदेश के प्रतिनिधियों का अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन एवं सांस्‍कृति उत्‍सव में स्‍वागत करते हुएप्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संस्‍थापक दादा लेखराज का अभिवंदन किया। उन्‍होंने दादी जनक जी, कोसच्‍ची कर्म योगी की संज्ञा देते हुए उनकी प्रशंसा की, जो 100 वर्ष  की आयु में भी समाज की सेवा में अनवरत रूप से कार्यरत हैं।

प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा सहित अनेक क्षेत्रों में ब्रह्माकुमारीज़ संस्‍था द्वारा किये गये कार्यों को सराहा। उन्‍होंने भ्रष्‍टाचार समाप्‍त करने के लिए डिजिटल लेन-देन के विस्‍तार का आह्वान किया। 

प्रधानमंत्री ने स्‍वच्‍छ भारत और एलईडीप्रकाश व्‍यवस्‍था जैसे उद्देश्‍यों पर भी अपने विचार रखें और इनके लाभों  के बारे में बताया। 

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प्रधानमंत्री आंतरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
April 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें उन्होंने आंतरिक ज्ञान को ब्रह्मांड का सच्चा सार बताते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की विरासत और संस्कृति ने हमेशा यह सिखाया है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही सदुपयोग ही किसी राष्ट्र की प्रगति के आधार हैं। उन्होंने बताया कि इसी मार्ग पर चलते हुए देश के युवा एक समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह ज्ञान, जो हमारे भीतर ही स्थित है और सामान्य ज्ञान से कहीं अधिक श्रेष्ठ है, महान और विद्वान व्यक्तियों द्वारा पूजनीय माना जाता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:

"हमारी विरासत और संस्कृति हमें यही सिखाती आई है कि सच्चा ज्ञान और उसका सदुपयोग ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है। इसी मार्ग पर चलकर आज हमारे देश के युवा समृद्ध और सशक्त भारत को गढ़ने में जुटे हैं।

अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्।

तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥"

जो ज्ञान हमारे भीतर स्थित है और जो सामान्य या बाहरी ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस समस्त संसार का असली सार है। श्रेष्ठ पुरूषों और ज्ञानियों द्वारा उसी आंतरिक ज्ञान की उपासना की जाती है।