"MyGov’s Creative Corner enables various ministries to seek creative inputs issues relating to their departments"
"Finance Ministry invites designs for logo and name, tag line for their initiative to provide inclusive financial services to the people"
"Deadline of submission is 7th August"
"Winning entry would be awarded a cash prize of Rs. 50,000"
"Evaluation criteria a blend of selection committee and other MyGov users, who are empowered to choose which design they appreciated best"
"MyGov a raging hit among citizens, record participation witnessed since launch"

26 जुलाई, 2014 को भारत के प्रधानमंत्री ने MyGov नामक वेबपोर्टल का शुभारंभ किया, जो भारत के लोगों को सुशासन की दिशा में उनके विचारों और सुझावों को साझा करने में सक्षम बनाकर एक मंच प्रदान करता है। इसके शुभारंभ के बाद से ही MyGov को देश भर से एक अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिल रही है। पंजीकरण एक उच्च रिकॉर्ड तक पहुँच गया है और भारत के नागरिक इस मंच के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में योगदान कर रहे हैं।

MyGov के सारे नवीन पहलुओं के अलावा इसकी एक विशेषता यह है कि इसका एक रचनात्मक कोने के रूप में भी उपयोग किया जा रहा है, जहाँ विभिन्न मंत्रालय उनके विभागों से संबंधित लोगो, कैप्शन आदि के लिए नागरिकों से रचनात्मक आदान प्राप्त कर सकते हैं।

इसी रचनात्मक कोने द्वारा वित्त मंत्रालय नेभारत के नागरिकोंऔर विशेष रूप से गरीब से गरीब व्यक्ति को समावेशी वित्तीय सेवाएं प्रदान करने के लिए मंत्रालय द्वारा शुरू किए जाने वाले कार्यक्रम के लिएएक लोगो, नाम और टैगलाइन की तलाश का एक कार्य साझा किया है। इसे भेजने की अंतिम तिथि 7 अगस्त 2014 है और विजेता प्रविष्टि को 50,000 रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

Creative Corner Screenshot

रचनात्मक कोने के बारे में  

MyGov के रचनात्मक कोने में उन तकनीकी मानकों की सूची भी स्पष्ट रूप से डाली गई है, एक प्रविष्टि डालते समय जिसका पालन करने की आवश्यकता है।

मूल्यांकन मापदंड एक चयन समिति और MyGov उपयोगकर्ताओं का एक अभिनव मिश्रण है, जो अपनी पसंद के डिजाइन को चयनित कर सकते हैं। यह सामान्य रूप से सार्वजनिक कार्य में जन भागीदारी को सुनिश्चित करने के मंच के रूप में सामने आता है।

व्यापक वित्तीय समावेश के बारे में अधिक जानकारी

व्यापक वित्तीय समावेशन देश के सभी परिवारों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने से संबंधित है, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में महिलाओं, छोटे और सीमांत किसानों और मजदूरों, सहित समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान देगी।

https://mygov.nic.in/task/towards-inclusive-financial-services/show

व्यापक वित्तीय समावेश के तहत विकास के दायरे से बाहर रह रहे वर्गों का समावेशन 14 अगस्त, 2018 तक निम्नलिखित दो चरणों में प्राप्त किया जाना प्रस्तावित है: 

प्रथम चरण (15 अगस्त 2014 – 15 अगस्त 2015) –

बैंकिंग सुविधाओं तक सबकी पहुँच

5000 रुपये की (एक वर्ष का संचालन संतोषजनक पूरा होने के बाद) ओवरड्राफ्ट सुविधा के साथ प्राथमिक बैंकिंग खातों प्रदान करना। साथ ही 1 लाख रुपये के दुर्घटना बीमा कवर के साथ और RuPay डेबिट कार्ड प्रदान करना।

वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम

ओवरड्राफ्ट खातों में चूक की भरपाईके लिए ऋण गारंटी कोष की स्थापना

द्वितीय चरण (15 अगस्त 2015 – 15 अगस्त 2018) –

माइक्रो बीमा

स्वाबलंबन जैसी असंगठित क्षेत्र की पेंशन योजनाएँ

द्वितीय चरण की कुछ गतिविधियाँ प्रथम चरण में शुरू की जाएँगीं

इसके अलावा, इस चरण मेंपहाड़ी आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में परिवारों को भी कवरेज प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, इस चरण में परिवारों में बचे हुए वयस्कों और छात्रों के कवरेज पर ध्यान दिया जाएगा।

ज्यादा जानकारी के लिए क्लिक करें- https://financialservices.gov.in/detailsFIPs.pdf

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 10-11 जनवरी को गुजरात के सोमनाथ की यात्रा पर रहेंगे और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेंगे
January 09, 2026
प्रधानमंत्री शौर्य यात्रा में भाग लेंगे
इस यात्रा में 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकाली जाएगी, यह वीरता और बलिदान का प्रतीक है
यह कार्यक्रम सोमनाथ मंदिर पर प्रथम आक्रमण के बाद से अटूट भावना और सभ्यतागत निरंतरता के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है
प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और उत्सव के लिए उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है
प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे
प्रधानमंत्री मोदी सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र के जाप में भी भाग लेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 10-11 जनवरी 2026 को गुजरात के सोमनाथ की यात्रा पर रहेंगे। श्री मोदी इस दौरान सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री 10 जनवरी को शाम लगभग 8 बजे ओंकार मंत्र का जाप करेंगे और उसके बाद सोमनाथ मंदिर में ड्रोन शो का अवलोकन करेंगे।

प्रधानमंत्री 11 जनवरी को सुबह लगभग 9:45 बजे शौर्य यात्रा में भाग लेंगे। यह एक औपचारिक शोभा यात्रा है जो सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित की जाती है। शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकलेगा, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक होगा। इसके बाद, लगभग 10:15 बजे प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे। प्रधानमंत्री लगभग 11 बजे सोमनाथ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे और एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, 8 जनवरी को शुरू हुआ। यह पर्व 11 जनवरी 2026 तक चलेगा। सोमनाथ में आयोजित किया जा रहा यह पर्व भारत के उन असंख्य नागरिकों की स्मृति में मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया और जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करते रहेंगे।

यह कार्यक्रम 1026 ईस्वी में महमूद गजनी के सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण की 1,000वीं वर्षगांठ की स्मृति में आयोजित किया गया है। सदियों से इसे नष्ट करने के कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद, सोमनाथ मंदिर आज भी सुगमता, आस्था और राष्ट्रीय गौरव के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में मौजूद है। इसका श्रेय इसे इसके प्राचीन वैभव में पुनर्स्थापित करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों को जाता है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद, मंदिर के जीर्णोद्धार का प्रयास किया गया। इस पुनरुद्धार यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक 1951 का है, जब जीर्णोद्धार किए गए सोमनाथ मंदिर को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में श्रद्धालुओं के लिए औपचारिक रूप से खोला गया। वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का विशेष महत्व बढ़ गया है।

इस समारोह में देश भर से सैकड़ों संत भाग लेंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर के भीतर 72 घंटे तक लगातार 'ओम' का जाप किया जाएगा।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में प्रधानमंत्री की भागीदारी भारत की सभ्यता की चिरस्थायी भावना का प्रदर्शन करती है और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहन देने की उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।