मोदी-आबे: एक विशेष सौहार्द

Published By : Admin | July 8, 2022 | 16:05 IST

श्री शिंजो आबे का असामयिक निधन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए व्यक्तिगत क्षति है। ट्वीट्स की एक श्रृंखला में उन्होंने आबे के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।

पूर्व जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच एक खास रिश्ता था और वर्षों से दोनों से एक दूसरे के दोस्त थे।

2007 में जब श्री नरेन्द्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में, श्री शिंजो आबे से पहली बार जापान यात्रा के दौरान मिले थे। श्री आबे उस समय जापान के प्रधानमंत्री थे। तब स्पेशल जेस्चर दिखाते हुए श्री आबे ने श्री मोदी की मेजबानी की थी और विकास के कई पहलुओं पर उनके साथ चर्चा की थी। तब से दोनों नेता कई मौकों पर एक-दूसरे से मिल चुके हैं, जिसने न केवल दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत हुए बल्कि उनके बीच एक चिरस्थायी बंधन भी विकसित हुआ।

2012 में श्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जापान की चार दिवसीय यात्रा की। इस यात्रा के दौरान भी श्री मोदी ने शिंजो आबे से मुलाकात की, तब वो उस समय विपक्ष के नेता थे।

दोनों नेताओं के बीच संवाद जारी रहा और दोनों देशों के बीच संबंध गहरे हुए, जब 2014 में श्री मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार जापान में क्योटो का दौरा किया। भारत-जापान संबंधों की जीवंतता को प्रदर्शित करते हुए श्री आबे ने पीएम मोदी के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया। पीएम आबे ने इस बात पर भी खुशी जताई थी कि पीएम मोदी ने क्योटो की सांस्कृतिक विरासत का आनंद लिया। दोनों नेताओं ने एक साथ क्योटो के तोजी मंदिर के दर्शन किए थे।

दोनों नेताओं के बीच मैत्रीपूर्ण समीकरणों के एक और प्रतिबिंब में पीएम आबे ने 2014 में G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिस्बेन में पीएम मोदी के लिए एक विशेष रात्रिभोज की मेजबानी की। उन्होंने 2014 में जापान की अपनी पांच दिवसीय यात्रा के दौरान क्योटो के इंपीरियल गेस्ट हाउस में पीएम मोदी के लिए रात्रिभोज की मेजबानी भी की थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में वाराणसी में प्रतिष्ठित गंगा आरती के लिए पीएम आबे की मेजबानी करके इस गर्मजोशी और फ्रेंडली जेस्चर को आगे बढ़ाया। उन्होंने दशाश्वमेध घाट पर प्रार्थना की और गंगा आरती देखी।

एक संगोष्ठी में अपने विचार साझा करते हुए जापानी प्रधानमंत्री ने गंगा आरती समारोह को शानदार बताया था। पीएम आबे ने आगे कहा, "मां गांगा नदी के तट पर, जैसा कि मैंने खुद को संगीत और आग (flames) की लयबद्ध गति में खो जाने दिया, मैं एशिया के दोनों छोरों को जोड़ने वाले इतिहास की अथाह गहराई से चकाचौंध था। प्रधानमंत्री आबे ने स्वीकार किया कि वाराणसी ने उन्हें 'समासरा' की याद दिला दी, एक ऐसी शिक्षा जिसे जापानियों ने भी प्राचीन काल से महत्व दिया है।

2016 में जापान की एक और यात्रा के दौरान पीएम मोदी और पीएम आबे ने बुलेट ट्रेन की सवारी की। उन्होंने शिंकानसेन ट्रेन में सवार होकर टोक्यो से कोबे की यात्रा की।

सितंबर 2017 में जब पीएम आबे भारत आए थे। दोस्ती को आगे बढ़ाते हुए पीएम मोदी ने 2017 में अहमदाबाद हवाई अड्डे पर पीएम शिंजो आबे की अगवानी के लिए प्रोटोकॉल तोड़ा, जब वह 12वें भारत जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए पहुंचे। स्वागत समारोह के तुरंत बाद, पीएम आबे, उनकी पत्नी और पीएम मोदी ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए साबरमती आश्रम के लिए एक खुली छत वाली जीप में 8 किलोमीटर के रोड शो की शुरुआत की। बाद में उन्होंने सिदी सैय्यद की मस्जिद के साथ-साथ दांडी कुटीर का भी दौरा किया।

 

 

एक ऐतिहासिक क्षण आया, जब दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से अहमदाबाद और मुंबई के बीच भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना की आधारशिला रखी। पीएम मोदी ने परियोजना के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता के लिए पीएम आबे का आभार व्यक्त किया।

2018 में पीएम आबे ने सुरम्य यामानाशी प्रान्त में पीएम मोदी की मेजबानी की। इतना ही नहीं, उन्होंने यामानाशी में कावागुची झील के पास अपने निजी घर में पीएम मोदी की मेजबानी की थी।

दोनों नेताओं ने जापान में FANUC Corporation का भी दौरा किया, जो यामानाशी में दुनिया में औद्योगिक रोबोटों के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है। नेताओं ने रोबोटिक्स और ऑटोमेशन सुविधाओं का दौरा किया।

2019 में केवल चार महीनों की अवधि में वे ओसाका (G20 शिखर सम्मेलन के दौरान), व्लादिवोस्तोक (पूर्वी आर्थिक मंच के दौरान) और बैंकॉक (भारत-आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन ) में तीन बार मिले।

2020 के मध्य में जब बीमारी के कारण श्री आबे ने जापान के प्रधानमंत्री का पद छोड़ दिया, तो पीएम मोदी ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इस पर श्री आबे ने कहा था कि वह पीएम मोदी के जेस्चर से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने उनके "भावपूर्ण शब्दों" के लिए धन्यवाद दिया।

 

हाल ही में क्वाड समिट के लिए पीएम मोदी की जापान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने एक बार फिर पूर्व जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे से मुलाकात की, जहां उन्होंने भारत-जापान साझेदारी के व्यापक कैनवास के साथ-साथ सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

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मंत्रिमंडल ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में चार की वृद्धि को मंजूरी दी, जिससे संख्या 33 से बढ़कर 37 हो गई
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।