जांबुघोड़ा : वनवासियों की वतन वंदना समारोह
अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजाने वाले पांच शहीद वनवासियों को श्रद्घांजलि का गरिमामय समारोह .
वनवासी शहीदों के साथ भेदभाव पर मुख्यमंत्री ने जताया आक्रोश
मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पंचमहाल जिले के जांबुघोड़ा में अंग्रेजी हुकूमत के जुल्मों के खिलाफ सशस्त्र संग्राम करते हुए शहीद हुए नायका आदिवासियों को भावभीनी श्रद्घांजलि दी। श्री मोदी ने इन शहीदों की स्मृति में वडेक की प्राथमिक स्कूल को वीर शहीद जोरिया परमेश्वर और दांडियापुरा प्राथमिक स्कूल को रुपसिंह नायका का नाम देने की घोषणा की।पंचमहाल के सुदुरवर्ती वनवासी क्षेत्र जांबुघोड़ा में आयोजित वनवासियों की वतन वंदना समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने पंचमहाल की वनवासी भूमि पर 1912-13 में वनवासी संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में मानगढ़ की पहाड़ी पर आदिवासियों द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ छेड़ी गई जंग और बाद में मानगढ़ में अंग्रजों द्वारा आदिवासियों के नरसंहार की याद दिलाते हुए कहा कि आगामी जुलाई महीने में राज्य का वन महोत्सव मानगढ़ की पहाड़ी पर आयोजित कर वनवासियों की शौर्य गाथा को चिरंजीवी बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आजादी के सशस्त्र संग्राम में आदिवासी समाज की शूरवीरता के इतिहास को वर्तमान गुजरात सरकार ने काल की गति से उजागर किया है। गौरतलब है कि, 1868 में जांबुघोड़ा, वडेक और दांडियापुरा के सुदुरवती इलाकों में नायका आदिवासी समाज पर अंग्रजों के जुल्म के खिलाफ नायका संत जोरिया परमेश्वर और रुपसिंह नायक के नेतृत्व में आदिवासियों ने बिरतानिया हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र जंग छेड़ी थी। अपने शौर्य से आदिवासी समाज ने अंग्रेजों की चूलें हिला दी थीं। अंग्रेजों के खिलाफ जंग में पकड़े गए जोरिया परमेश्वर सहित पांच नायकाओं को जांबुघोड़ा के किले में ही फांसी की सजा दी गई, जबकि 23 अन्य को उम्र कैद सहित कुल 58 नायका आदिवासियों को अंग्रेजों ने सलाखों के पीछे भेज दिया। 16 अप्रैल, 1868 को ये पांच वीर भारत माता का जयघोष करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। लेकिन आजादी के बाद आदिवासियों की यह शौर्य गाथा को भुला दिया गया। 16 अप्रैल की पूर्व संध्या पर आज मुख्यमंत्री ने 144 वर्ष बाद शहीदों के इतिहास को देश और दुनिया के समक्ष पेश करने के लिए जांबुघोड़ा में नायका वनवासियों के शहीदों की वंदना की।
उन्होंने जांबुघोड़ा में शहीद स्मारक का निर्माण करने, प्रतिवर्ष स्मरणांजलि कार्यक्रम आयोजित करने तथा नई पीढ़ी में इन शहीदों की स्मृति बनाए रखने के आयोजन की घोषणा की। श्री मोदी ने पांचों वनवासी नायका शहीदों जोरिया परमेश्वर, रुपसिंह नायक, गलालिया नायक, रावजिडो नायक और बाबरिया गलमा नायक की शहादत को सलाम करते हुए इनके पराक्रम को भारतमाता की वतनभक्ति की अविस्मरणीय वीरगाथा बताया। उन्होंने कहा कि आजादी की जंग के इतिहास में ऐसी अनेक वतन परस्ती की शौर्यगाथाएं अब भी अछूती रह गई हैं।
उन्होंने कहा कि शहीदों की इस स्मरणांजलि में वनबंधुओं के साथ सरकार भी उतनी ही संवेदना से भागीदार बनी है। पेज 2 पर जारी... वनवासी शहीदों के... पेज 2 अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाते हुए वीरगति को प्राप्त इन देशभक्तों को कैसे भुला दिया गया? यह सवाल उठाते हुए श्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद सभी सरकारें यह इतिहास भूल गईं, उसका प्रायश्चित यह सरकार कर रही है। शहीदों के साथ भेदभाव और उनके बलिदान को भुला देने की साजिश पर उन्होंने आक्रोश और पीड़ा व्यक्त की। श्री मोदी ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ जंग में गुजरात कहीं पीछे नहीं रहा और पंचमहाल सहित अन्य इलाकों के आदिवासियों ने भी अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लिया। मानगढ़ की पहाड़ी पर अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेडऩे वाले गोविंद गुरु, रामा हीरजी, मोतीराव तेजावत और अमरसिंह गामित जैसे अनेक आदिवासियों की स्मृति को भी चिरंजीव बनाने का संकल्प उन्होंने व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधीजी के अहिंसक सत्याग्रह आंदोलन के साथ आजादी के लिए सशस्त्र आंदोलन का बिगुल बजाने वाले श्यामजी कृष्ण वर्मा की अस्थियां 73 वर्ष विदेशी धरती पर रहने के बाद वे उसे स्वदेश लेकर आए। इसके बावजूद दिल्ली में बैठी सरकार बेफिक्र बैठी है। आजादी की लड़ाई में एक ही परिवार के योगदान का गुणगान करने वाले लोगों की आंखें खोल दे ऐसे अनेक क्रांतिकारियों की स्मृति में कच्छ के मांडवी में श्यामजी कृष्ण वर्मा शहीद स्मारक का निर्माण भी इस सरकार ने किया है। इस अवसर पर जांबुघोड़ा में 8.75 करोड़ के तीन विकास कार्यों का शिलान्यास मुख्यमंत्री ने किया। जिसमें जांबुघोड़ा में हाईलेवल पुल का नवनिर्माण, तहसील पंचायत के नये भवन का निर्माण और भूमिगत गटर योजना के विकास कामों का समावेश होता है।
इस मौके पर सांसद रामसिंह राठवा, मार्ग एवं मकान राज्य मंत्री जयद्रथसिंह परमार, जिला कलक्टर श्रीमती मनीषा चंद्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में पंचमहाल के सह जिला प्रभारी मंत्री जितेन्द्रभाई सुखडिय़ा, आदिजाति कल्याण राज्य मंत्री जशवंतसिंह भाभोर, जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मिकाबेन, विधायक अरविंदसिंह चौहान, फतेसिंह चौहान, अभेसिंह तड़वी, जेठाभाई भरवाड़, पूर्व विधायक वेचातभाई बारिया, उदेसिंह बारिया, तहसील पंचायत अध्यक्ष, पदाधिकारी, सांस्कृतिक प्रवृत्ति विभाग के सचिव भाग्येश झा, शहीदों के परिजन तथा विशाल संख्या में वनवासी समुदाय मौजूद था।


