क्रम संख्या

सहमति पत्र/समझौते का शीर्षक

विवरण

1

भू-सर्वेक्षण और खोज के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन

इस समझौते के तहत आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए मिनरल एक्सप्लोरेशन में भारत-इजरायल सहयोग बढ़ेगा, इसमें डेटा साझा करने, निवेश और संसाधनों के सही विकास पर जोर दिया जाएगा।

2

राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) के विकास हेतु सहयोग

यह समझौता प्रदर्शनियों, शोध और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के जरिए दोनों देशों की साझा समुद्री विरासत को बढ़ावा देगा। इसका मुख्य उद्देश्य लोथल (गुजरात) में बन रहे समुद्री परिसर को विकसित करना और लोगों को इतिहास से जोड़ना है।

3

वर्ष 2026-2029 की अवधि के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम

यह कार्यक्रम संगीत, नाटक, कला और नृत्य के क्षेत्र में त्योहारों और कार्यशालाओं के माध्यम से दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा। इसके तहत कलाकारों और विशेषज्ञों के दौरों से आपसी समझ को बढ़ावा मिलेगा।

4

यूपीआई के कार्यान्वयन पर एनपीसीआई इंटरनेशनल (एनआईपीएल) और एमएएसएवी, इज़राइल के बीच समझौता ज्ञापन

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के माध्यम से भारत और इजराइल के बीच क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस को सक्षम बनाना है।

5

कृषि के लिए भारत-इजराइल नवाचार केंद्र (आईआईएनसीए) की स्थापना हेतु आईसीएआर और माशाव के बीच समझौता ज्ञापन

यह समझौता ज्ञापन, अगली पीढ़ी की कृषि प्रौद्योगिकियों—जैसे कि खेती की टेक्नोलॉजी, उपग्रह-आधारित सिंचाई, एडवांस्ड मशीनरी और इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट—को विकसित करने के साथ-साथ जर्मप्लाज्म एक्सचेंज, डेमोंस्ट्रेशन, कटाई के बाद के समाधानों और क्षमता निर्माण में सहायता प्रदान करने के लिए आईसीएआर में एक संयुक्त नवाचार केंद्र स्थापित करता है।

6

होराइजन स्कैनिंग के क्षेत्र में सहयोग के अभिप्राय की घोषणा

यह घोषणा पत्र (डीओआई) भारत और इजराइल के बीच आधुनिक होराइजन स्कैनिंग (भविष्य की तकनीक को पहचानने) में साथ काम करने का एक संकल्प है। इसका मकसद मिलकर रिसर्च करना, ट्रेनिंग देना और एआई टूल्स का इस्तेमाल करके भविष्य की चुनौतियों, खतरों और नई तकनीकों की बेहतर योजना बनाना है।

7

मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन

यह समझौता, मछली पालन और जलकृषि के क्षेत्र में भारत और इजराइल के बीच सहयोग को बढ़ाता है। इसमें आधुनिक सिस्टम, बीमारियों के प्रबंधन, मैरीकल्चर और सीवीड जैसी नई तकनीकों पर जोर दिया गया है। इसे रिसर्च, व्यापार, ट्रेनिंग और एक्सीलेंस सेंटर बनाकर पूरा किया जाएगा।

8

इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (आईएफएससीए) और इज़राइल सिक्योरिटीज अथॉरिटी (आईएसए) के बीच आपसी सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन

दोनों संस्थाओं का लक्ष्य वित्तीय सेवाओं में एक-दूसरे का साथ देना है। इसके लिए वे जानकारी साझा करेंगे, काम करने के सबसे अच्छे तरीके सीखेंगे और फिनटेक व रेगुलेटरी तकनीक में मिलकर काम करेंगे। साथ ही, वे इस क्षेत्र में होने वाले नए बदलावों की जानकारी भी बांटेंगे ताकि नई खोजों को बढ़ावा देने वाला एक बेहतर माहौल तैयार हो सके।

9

वाणिज्य और सेवा क्षेत्र में लेबर मोबिलिटी के कार्यान्वयन पर प्रोटोकॉल

यह प्रोटोकॉल (नियम) भारतीय श्रमिकों के लिए इजराइल में नौकरी पाने का एक सुरक्षित रास्ता खोलता है। इसके तहत रिटेल,  क्लीनिंग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, फूड प्रोसेसिंग, होटल इंडस्ट्री (हॉस्पिटैलिटी) और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में काम करने के अवसर मिलेंगे।

10

विनिर्माण क्षेत्र में लेबर मोबिलिटी के कार्यान्वयन पर प्रोटोकॉल

इसके तहत अलग-अलग तरह की फैक्ट्रियों (विनिर्माण उद्योगों) में भर्ती की जाएगी, जिनमें कपड़ा, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, लकड़ी और कागज, प्लास्टिक, रबर और अन्य औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।

11

रेस्तरां क्षेत्र में लेबर मोबिलिटी के कार्यान्वयन पर प्रोटोकॉल

इसके तहत रेस्तरां, कैफे और खाने-पीने की चीजें तैयार करने और बेचने वाले अन्य व्यवसायों में भर्ती की जाएगी।

12

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा देने में सहयोग पर समझौता ज्ञापन

यह सहयोग मानव को केंद्र में रखने वाली एआई-आधारित शिक्षा विकसित करने पर केंद्रित है। इसमें पढ़ाने के नए तरीके, शिक्षकों का विकास, एआई के नियम, सभी तक एआई की समान पहुँच और साझा रिसर्च शामिल हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को डेटा और एआई की जानकारी देकर भविष्य के लिए एक समावेशी शिक्षा प्रणाली तैयार करना है।

13

इजराइली इंस्टीट्यूट ऑफ कमर्शियल आर्बिट्रेशन (आईआईसीए) और इंडियन काउंसिल ऑफ आर्बिट्रेशन (आईसीए) के बीच सहयोग पर समझौता

यह समझौता आर्बिट्रेशन और मीडिएशन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देता है। इसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के साथ जानकारी और काम करने के बेहतरीन तरीके साझा करेंगे और मिलकर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाएंगे ताकि दोनों देशों में विशेषज्ञों की एक्सपर्टीज को और मजबूत किया जा सके।

14

चौथे भारत-इज़राइल सीईओ फोरम की रिपोर्ट की प्रस्तुति

चौथा सीईओ फोरम नवंबर 2025 में इजराइल में आयोजित किया गया था और इसकी एक संयुक्त रिपोर्ट दोनों देशों की सरकारों को सौंपी गई। यह रिपोर्ट सुझाव देती है कि सरकारी नीतियों को उद्योगों के नए रुझानों के साथ कैसे जोड़ा जाए। साथ ही, यह सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच तालमेल बढ़ाने और आर्थिक फैसले लेने में मदद करने के लिए जरूरी सलाह देती है।

15

नालंदा विश्वविद्यालय और यरुशलम के हिब्रू विश्वविद्यालय (एचयूजेआई) के बीच समझौता ज्ञापन

यह समझौता ज्ञापन दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शिक्षकों और छात्रों के आदान-प्रदान के लिए एक रूपरेखा तैयार करता है। इसके तहत बौद्ध अध्ययन, पुरातत्व, गणित और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे विभिन्न विषयों में साथ मिलकर काम किया जाएगा।

16

भारत में भारत-इजराइल साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना पर आशय पत्र

यह आशय पत्र भारत में एक संयुक्त साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए है। यह केंद्र साइबर सुरक्षा के बेहतरीन तरीकों, नई तकनीकों और डिजिटल सुरक्षा की मजबूती का प्रदर्शन करेगा। साथ ही, यह सरकार, इंडस्ट्री और शिक्षण संस्थानों के बीच तालमेल बढ़ाकर मिलकर काम करने का एक मंच बनेगा।

17

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में सहयोग पर समझौता ज्ञापन

यह समझौता ज्ञापन एआई के विकास और इसे इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाने पर जोर देता है। यह एथिकल एआई, नागरिक क्षेत्रों में इसके उपयोग, अकादमिक रिसर्च और सरकारी-निजी भागीदारी को बढ़ावा देता है, ताकि भविष्य में सतत और स्थायी विकास सुनिश्चित किया जा सके।

 

मुख्य घोषणाएँ

संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाना
विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर संयुक्त समिति (जेसीएम) को मंत्री स्तर पर उन्नत करना
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के नेतृत्व में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग की पहल
वित्तीय संवाद (फाइनेंशियल डायलॉग)
टेक-गेटवे पहल
कृषि अनुसंधान में 20 संयुक्त फेलोशिप
संयुक्त अनुसंधान के लिए दोनों पक्षों के योगदान में वृद्धि
अगले 5 वर्षों में 50,000 भारतीय श्रमिकों तक का कोटा
भारत-इजराइल शैक्षणिक सहयोग मंच
भारत-इजराइल संसदीय मैत्री समूह

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प्रधानमंत्री ने PRAGATI की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की
May 27, 2026
प्रधानमंत्री ने रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्रों से जुड़ी सात अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की
समीक्षा में शामिल कुल 30,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली परियोजनाएं 9 राज्यों में फैली हुई हैं
प्रधानमंत्री ने केन-बेतवा लिंक परियोजना और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की भी समीक्षा की
प्रधानमंत्री ने कहा-केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को दूसरे राज्यों के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करना चाहिए, ताकि वे राज्यों के बीच पानी से जुड़े मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझा सकें
प्रधानमंत्री ने राज्यों से ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा, जिसमें अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और गोबरधन संयंत्र शामिल हैं
प्रधानमंत्री ने शहरी इलाकों में मिशन-मोड पर रूफटॉप सोलर कवरेज बढ़ाने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री की सलाह पर अमल करते हुए, राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसकी शुरुआत स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा से हुई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को सहज रूप से एकीकृत करके 'सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज सुबह 'सेवा तीर्थ' में प्रगति (PRAGATI) की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। प्रगति एक आईसीटी-सक्षम, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म है।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने कुल लगभग ₹30,000 करोड़ की लागत वाली रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्रों से जुड़े सात महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं। आर्थिक विकास और जन कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समय-सीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और मुद्दों के समय पर समाधान पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए की गई। प्रधानमंत्री ने 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' और 'स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0' की भी समीक्षा की।

बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर को अपनाने की गति तेज करने की जरूरत पर जोर दिया, जिसमें शहरों, आवासीय समूहों और सार्वजनिक संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजली की लागत कम करने, ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने और घरों व समुदायों के स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में चलाया जाना चाहिए।

सड़क और बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए, इस बात पर जोर दिया गया कि वधावन बंदरगाह को 'बंदरगाह-आधारित, बहु-माध्यम विकास' के एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां एक भविष्य के लिए तैयार लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से परिवहन के हर प्रमुख माध्यम को इस तरह से जोड़ा जाए। इस परियोजना को केवल एक बंदरगाह के रूप में नहीं, बल्कि एक 'राष्ट्रीय प्रवेश द्वार' के रूप में देखा जाना चाहिए, जो तटीय नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्गों, समर्पित माल ढुलाई गलियारों, हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी, राजमार्गों और हवाई अड्डों से जुड़ा हो।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया और इस बात को रेखांकित किया कि इस मिशन को केवल बुनियादी ढांचा तैयार करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नियमित निगरानी, ​​नागरिकों की भागीदारी और विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल के माध्यम से इसके ठोस परिणाम भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने राज्यों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित बुनियादी ढांचे, जिसमें अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और 'गोबर-धन' (GOBARdhan) संयंत्र शामिल हैं, के निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा।

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना को अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श के रूप में काम करना चाहिए, ताकि वे भी आपसी सहयोग, समय पर मंज़ूरी, प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और 'मिशन-मोड' में काम करके राज्यों के बीच जल-संबंधी विवादों को सुलझा सकें। राज्यों को ऐसे ही अन्य अवसरों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जहां नदी जोड़ो, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और कुशल सिंचाई जैसे कार्यों को एक एकीकृत तरीके से अपनाया जा सके, ताकि भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सार्वजनिक परियोजनाओं को लागू करने में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि नागरिकों को जरूरी सुविधाओं और विकास के लाभों तक समय पर पहुंचने से भी वंचित होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर देरी का लोगों के जीवन, क्षेत्रीय विकास और सार्वजनिक संसाधनों पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को लंबित मुद्दों को सुलझाने, रुकावटों को दूर करने और काम को तेजी से पूरा करने के लिए ज्यादा सक्रिय और समय-सीमा के भीतर काम करने का तरीका अपनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि नहर नेटवर्क का नए तरीकों से इस्तेमाल करने के तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए, जिसमें साफ बिजली बनाने के लिए नहरों के किनारे और उनके ऊपर सोलर पैनल लगाना भी शामिल है। इससे जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने, वाष्पीकरण से होने वाले नुकसान को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा बनाने और जल बुनियादी ढांचे से अतिरिक्त आर्थिक लाभ पैदा करने में मदद मिलेगी।

बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसार, राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की एक प्रणाली भी शुरू कर दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्य और जिला स्तरों पर नियमित निगरानी, ​​कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों का त्वरित समाधान और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस पहल के एक हिस्से के रूप में, सबसे पहले राज्य स्तर पर समीक्षा के लिए 'स्वच्छ भारत मिशन' को चुना गया है।