प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर कोरिया गणराज्य (आरओके) के राष्ट्रपति महामहिम ली जे म्यंग ने 19 से 21 अप्रैल, 2026 तक भारत का राजकीय दौरा किया, जो किसी कोरियाई राष्ट्रपति द्वारा पदभार ग्रहण करने के बाद भारत का सबसे शीघ्र किया गया दौरा है। राष्ट्रपति ली जे म्यंग के साथ मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा कोरियाई कंपनियों के प्रमुख मुख्य कार्यकारी अधिकारियों सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी था।
2. दोनों नेताओं ने 20 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली में एक मैत्रीपूर्ण, फलदायी और दूरदर्शी द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने अपने-अपने देशों की सरकारों की इस प्रतिबद्धता को रेखांकित किया कि वे बहुआयामी क्षेत्रों में ठोस तरीके से मिलकर कार्य करेंगे, जिससे अपने-अपने नागरिकों के लिए स्थायी समृद्धि, शांति और प्रगति सुनिश्चित की जा सके तथा एक अशांत और तीव्र गति से बदलती दुनिया में परस्पर सार्थक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने आगामी पाँच वर्षों (2026–2030) में भारत–आरओके विशेष सामरिक साझेदारी के कार्यान्वयन तथा उसमें और सामग्री जोड़ने हेतु निम्नलिखित संयुक्त रणनीतिक विज़न की घोषणा की।
3. भारत और कोरिया गणराज्य (आरओके), एशिया के दो सशक्त और लचीले लोकतंत्र तथा विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाएँ, अपने लोगों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों और पारस्परिक सद्भाव से जुड़े हुए हैं। दोनों देश लोकतांत्रिक और सभ्यतागत मूल्य साझा करते हैं तथा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर उनके हित समान हैं। भारत अपनी “एक्ट ईस्ट” नीति में आरओके को एक अपरिहार्य साझेदार के रूप में देखता है। इसी प्रकार, आरओके भारत को अपनी व्यावहारिक कूटनीति का एक केंद्रीय स्तंभ मानता है और न्यू सदर्न पॉलिसी की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने तथा विकसित करने में उसे महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। भारत और आरओके यह भी स्वीकार करते हैं कि उनकी साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान के माध्यम से राजनीतिक बुनियादों को सुदृढ़ करना
4. जून 2025 में कनानास्किस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन तथा नवंबर 2025 में जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई अपनी दो पूर्व बैठकों की सकारात्मक भावना को स्मरण करते हुए, दोनों नेताओं ने भारत–आरओके विशेष सामरिक साझेदारी की पूर्ण क्षमता को साकार करने तथा भविष्य में इस सहयोग को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए प्रत्येक वर्ष, दोनों देशों में से किसी एक में या अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के अवसर पर, नेता-स्तरीय बैठकों का आयोजन करने पर सहमति व्यक्त की।
5. उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान की आवृत्ति पर संतोष व्यक्त करते हुए, जिसने द्विपक्षीय सहयोग को नई गति प्रदान की है, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय राजनीतिक आदान-प्रदान तथा मंत्रिस्तरीय संवाद को और सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की। इस उद्देश्य से नेताओं ने निर्णय लिया कि भारत–आरओके संयुक्त आयोग की बैठक, जिसका नेतृत्व विदेश मंत्री करेंगे, वित्त मंत्रियों की बैठक तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रियों की संयुक्त समिति की बैठक इस वर्ष आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, यह भी सहमति हुई कि भारत के रक्षा मंत्री मई 2026 में आरओके का दौरा करेंगे, जहाँ कोरियाई युद्ध में भारत की भागीदारी की स्मृति में निर्मित किए जा रहे युद्ध स्मारक का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया जाएगा। दोनों नेताओं ने यह भी सहमति व्यक्त की कि दोनों देशों के उद्योग मंत्रियों के लिए एक नए संवाद तंत्र के रूप में भारत–आरओके औद्योगिक सहयोग समिति की स्थापना की जाएगी और इसकी पहली बैठक भी इसी वर्ष आयोजित की जाएगी।
6. जनवरी 2026 में आरओके के उपाध्यक्ष के भारत दौरे का संज्ञान लेते हुए, दोनों नेताओं ने भारत की संसद और आरओके की नेशनल असेंबली के अध्यक्षों तथा सदस्यों के बीच नियमित आदान-प्रदान का समर्थन किया। उन्होंने दोनों देशों में भारत–आरओके संसदीय मैत्री समूहों की स्थापना पर संतोष व्यक्त किया।
7. भारत और आरओके के भावी प्रबुद्ध विचारकों को और निकट लाने के लिए, दोनों नेताओं ने इस वर्ष से दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों द्वारा आरंभ किए जा रहे कार्यक्रमों और पहलों का स्वागत किया, जिनके माध्यम से युवा विधायकों, राजनयिकों, प्रतिष्ठित व्यक्तियों, मीडिया प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच पारस्परिक यात्राएँ संभव होंगी, आपसी समझ को गहरा किया जाएगा तथा समान चुनौतियों और अवसरों पर सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
8. दोनों नेताओं ने संतुलित क्षेत्रीय विकास, गतिशीलता और पुनरुत्थान को बढ़ावा देने के लिए अपने-अपने देशों के राज्यों और प्रांतों के बीच अधिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया। दोनों नेताओं ने बुसान–मुंबई, इंचियोन–कोलकाता तथा उल्सान–चेन्नई सहित सिस्टर-सिटी और फ्रेंडशिप-सिटी संबंधों का भी उल्लेख किया।
अधिक रणनीतिक विश्वास के माध्यम से गहन समझ का विकास
9. दोनों नेताओं ने विधि के शासन पर आधारित एक स्वतंत्र, मुक्त, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपने देशों के विज़न में समानता को स्वीकार किया। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आरओके के हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओआई) में शामिल होने का स्वागत किया।
10. उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उभरते रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों पर नियमित परामर्श के महत्व को रेखांकित किया। फरवरी 2026 में दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच हुए भारत–आरओके विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद के पश्चात, दोनों पक्ष पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर रक्षा उद्योग सहयोग पर संयुक्त समिति की बैठक तथा उपमंत्री स्तर पर प्रथम रक्षा एवं विदेश मामलों की 2+2 वार्ता आयोजित करने का लक्ष्य रखेंगे।
11. दोनों नेताओं ने भारत–आरओके आर्थिक सुरक्षा संवाद के शुभारंभ का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य पारस्परिक रणनीतिक विश्वास के आधार पर आपूर्ति शृंखलाओं में लचीलापन बढ़ाना, बाजार विविधीकरण को प्रोत्साहित करना तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाना है।
12. दोनों नेताओं ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों, जिसमें सीमा-पार आतंकवाद भी शामिल है, की स्पष्ट और कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने, आतंकवादी वित्तपोषण के स्रोतों और उनके अंतरराष्ट्रीय अपराध से संबंधों को खत्म करने तथा आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और इसके अपराधियों, साजिशकर्ताओं तथा वित्तपोषकों को बिना किसी और विलंब के न्याय के कटघरे में लाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति ली को यह भी बताया कि ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसे राष्ट्रपति ली ने गंभीर चिंता के साथ संज्ञान में लिया।
औद्योगिक गतिशीलता के माध्यम से परस्पर लाभ सृजन
13. दोनों नेताओं ने भारत–आरओके औद्योगिक सहयोग समिति पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपन्न होने का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करना, व्यापार और निवेश का विस्तार करना तथा उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों के द्वार खोलना है। इसमें ऑटोमोबाइल, जहाज निर्माण, रसायन, सेमीकंडक्टर, दूरसंचार उपकरण, डिस्प्ले और द्वितीयक बैटरियों जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा; साथ ही रणनीतिक संसाधनों, महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के लिए आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करने, हरित हाइड्रोजन और उसके व्युत्पन्नों के व्यापार, परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजनाओं तथा विदेशों में संसाधन विकास परियोजनाओं में सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
14. भारत के ‘मैरीटाइम अमृत काल’ विज़न ने एक अग्रणी जहाज निर्माण और समुद्री राष्ट्र आरओके के साथ दीर्घकालिक एवं रणनीतिक द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसर सृजित किए हैं। दोनों पक्षों ने जहाज निर्माण, शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स पर साझेदारी के लिए एक व्यापक ढांचा अपनाया तथा इसके शीघ्र क्रियान्वयन की आशा व्यक्त की। दोनों नेताओं ने भारत में शिपयार्ड विकास, शिपयार्ड स्थापना हेतु आवश्यक महत्वपूर्ण अवसंरचना, बंदरगाह संचालन तथा शिपिंग एवं समुद्री लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में भारतीय और कोरियाई व्यवसायों के बीच संपन्न और प्रस्तावित बी2बी सहयोगों का स्वागत किया और उन्हें समर्थन दिया। उन्होंने मुंबई में कोरिया मरीन इक्विपमेंट एसोसिएशन (कोमिया) के कार्यालय के उद्घाटन का भी स्वागत किया, जो इस प्रकार का पहला कार्यालय है और समुद्री उद्योग को समर्थन देने के लिए सहायक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में योगदान देगा।
15. दोनों नेताओं ने 20 अप्रैल, 2026 को आयोजित भारत–आरओके बिजनेस फोरम के सफल आयोजन का भी संज्ञान लिया। सतत् व्यावसायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए, दोनों पक्षों ने औद्योगिक सहयोग समिति तथा उसकी कार्य समूह बैठकों के अवसर पर प्रमुख उद्योग संघों के बीच नियमित संवाद आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने भारतीय और कोरियाई व्यवसायों द्वारा निवेश और बी2बी सहयोग के लिए की गई घोषणाओं का स्वागत किया।
16. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के बाजारों में कोरियाई और भारतीय कंपनियों द्वारा और अधिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक अनुकूल व्यावसायिक वातावरण विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।
17. दोनों नेताओं ने लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपन्न होने का स्वागत किया। उन्होंने संबंधित विभागों/मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे दोनों देशों के एसएमई के बीच सहयोग का विस्तार करने के उपाय खोजें, जिसमें एमओयू के दायरे के अंतर्गत गतिविधियाँ शामिल हों, जिससे लघु एवं मध्यम उद्यमों को एक-दूसरे के बाजारों से सुगमता से जुड़ने तथा उनसे लाभ उठाने में सहायता मिल सके।
18. इस्पात उद्योग में सुदृढ़ वृद्धि का लाभ उठाने वाली एक प्रमुख अर्थव्यवस्था, भारत और हरित इस्पात निर्माण में प्रौद्योगिकी अग्रणी, आरओके के बीच सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों नेताओं ने भारत–आरओके वार्षिक इस्पात संवाद की स्थापना पर सहमति व्यक्त की, जो व्यापारिक अवसरों को बढ़ाने, आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने तथा इस्पात क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगा। उन्होंने ओडिशा में 6 एमएमटी क्षमता वाले एकीकृत इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए पोस्को और जेएसडब्ल्यू के बीच समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर का भी स्वागत किया।
व्यापार, वित्त और विकास पर केंद्रित साझेदारियों को उत्प्रेरित करना
19. भारत–आरओके द्विपक्षीय व्यापार की पूर्ण क्षमता का दोहन करने के महत्व पर बल देते हुए तथा डिजिटल व्यापार, आपूर्ति शृंखला सहयोग और हरित अर्थव्यवस्था सहित व्यापार के नए क्षेत्रों में परस्पर लाभकारी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए, दोनों नेताओं ने सीईपीए उन्नयन वार्ताओं को पुनः आरंभ करने और उन्हें शीघ्र निष्कर्ष तक पहुँचाने के निर्णय का स्वागत किया।
20. भारत की फिनटेक क्रांति, जिसे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस और नियामकीय नवाचारों द्वारा दर्शाया गया है, ने सीमा-पार सहयोग के अनेक अवसर उत्पन्न किए हैं। दोनों नेताओं ने भारत के नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और कोरिया फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशंस एंड क्लियरिंग्स इंस्टीट्यूट (केएफटीसी) के बीच, दोनों देशों की डिजिटल भुगतान प्रणालियों के चरणबद्ध एकीकरण हेतु हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) का स्वागत किया, जिससे अंतःपरिचालनीयता बढ़ेगी और आर्थिक तथा जन-से-जन संबंध सुदृढ़ होंगे। उन्होंने भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसिस सेंटर्स अथॉरिटी (आईएफएससीए) और आरओके के फाइनेंशियल सर्विसेज कमीशन (एफएससी) / फाइनेंशियल सुपरवाइजरी सर्विस (एफएसएस) के बीच सीमा-पार वित्तीय उत्पादों के विकास और पर्यवेक्षण हेतु सहयोग एवं परामर्श के लिए हस्ताक्षरित एमओयू का भी स्वागत किया।
21. दोनों नेताओं ने बैंकिंग, पूंजी बाज़ार और फिनटेक सहित वित्तीय क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु दोनों देशों की वित्तीय प्राधिकरणों और संस्थानों की भागीदारी के साथ आयोजित ‘आरओके–इंडिया फाइनेंशियल को-ऑपरेशन फोरम’ के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त किया।
22. आरओके की वित्तीय संस्थाएँ भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उनका निवेश अवसंरचना, विनिर्माण तथा उभरते वित्तीय बाजार पर केंद्रित है। इस संदर्भ में, दोनों नेताओं ने कोरिया इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के भारत में सफल संचालन का उल्लेख किया और कोरिया डेवलपमेंट बैंक की भारत में कार्यालय खोलने में रुचि का स्वागत किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आरओके की नेशनल पेंशन सर्विस को भी भारत में अपना कार्यालय खोलने की संभावनाएं तलाशने के लिए आमंत्रित किया।
23. भारत और आरओके के बीच विकास साझेदारी की संभावनाओं को स्वीकार करते हुए, दोनों नेताओं ने भारत में कुशल औद्योगिक मानव संसाधनों के क्षमता-विकास हेतु विकास सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर कार्य जारी रखने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें कोइका (केओआईसीए) द्वारा कार्यान्वित वर्तमान परियोजनाएँ भी शामिल हैं। दोनों पक्षों ने यह भी सहमति व्यक्त की कि दोनों देशों के बीच प्रभावी विकास सहयोग सुनिश्चित करने के लिए साथ मिलकर कार्य किया जाएगा।
उभरते उद्योगों में साझेदारियों के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों से सुरक्षित विकास
24. भारत और आरओके, दो ऐसे देश जिनकी डिजिटल क्षमताएँ सशक्त और परस्पर पूरक हैं, विश्व के भविष्य को परिभाषित करने वाले उद्योगों और प्रौद्योगिकियों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। दोनों नेताओं ने एआई, डेटा गवर्नेंस और डिजिटल व्यवसायों पर केंद्रित भारत–कोरिया डिजिटल ब्रिज के लिए एक रूपरेखा के शुभारंभ का स्वागत किया, साथ ही डिजिटल नवाचार और सहयोग को समर्थन देने में सेमीकंडक्टर सहित सक्षमकारी प्रौद्योगिकियों की भूमिका को भी स्वीकार किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति ली को भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की प्रगति से अवगत कराया और कोरियाई व्यवसायों को सरकारी प्रोत्साहनों तथा बढ़ते बाजार का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। दोनों नेताओं ने “एआई फॉर ऑल” और “मानव” के सिद्धांतों से प्रेरित एआई विकास के लिए एक-दूसरे के विज़न की सराहना की, जो नवाचार के साथ-साथ सुलभता और समावेशिता को भी बढ़ावा देते हैं। उन्होंने अनुसंधान और प्रतिभा विकास सहित एआई के विभिन्न क्षेत्रों में भारत–कोरिया साझेदारी को और गहरा करने की इच्छा व्यक्त की।
25. दोनों नेताओं ने ‘रक्षा उद्योग सहयोग के रोडमैप’ पर 2020 के समझौता ज्ञापन (एमओयू) को पुनः सक्रिय कर भारत–आरओके सहयोग के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने के9-वज्र हॉवित्ज़र के सफल संयुक्त उपक्रम पर संतोष व्यक्त किया, जिसकी दूसरी खेप का उत्पादन जारी है। उन्होंने स्व-चालित वायु रक्षा गन-मिसाइल प्रणालियों जैसे भविष्यगत रक्षा प्रौद्योगिकियों/प्लेटफॉर्म तथा पारस्परिक रुचि के अन्य क्षेत्रों में इस मॉडल को दोहराने के लिए चल रहे प्रयासों का भी स्वागत किया।
26. दोनों देशों में रक्षा उद्योग में हो रहे नवाचारों को ध्यान में रखते हुए, दोनों नेताओं ने व्यवसायों, इनक्यूबेटरों, निवेशकों, रक्षा स्टार्ट-अप्स और विश्वविद्यालयों को जोड़ने के लिए ‘कोरिया–भारत रक्षा त्वरक’ (काइंड-एक्स) नवाचार मंच शुरू करने का निर्णय लिया।
27. अंतरिक्ष को दोनों देशों में राष्ट्रीय विकास का एक उभरता हुआ महत्वपूर्ण क्षेत्र मानते हुए, दोनों नेताओं ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और कोरिया एयरोस्पेस प्रशासन (कासा) के बीच राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी स्तर पर सहयोग के अवसर तलाशने हेतु एक संयुक्त कार्य समूह के गठन की पहल का स्वागत किया। उन्होंने 20 अप्रैल, 2026 को बेंगलुरु में इन-स्पेस के सहयोग से आयोजित भारत–आरओके “स्पेस डे” के आयोजन का भी स्वागत किया, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स, उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। दोनों नेताओं ने अपने-अपने पक्षों को एक-दूसरे की उपग्रह नेविगेशन प्रणालियों के लिए परस्पर समर्थन के अवसर तलाशने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
धरती माता के लिए एकजुट होना
28. वैश्विक ऊर्जा और संसाधन बाजार में वर्तमान उथल-पुथल के परिप्रेक्ष्य में, दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि हाइड्रोकार्बन और प्रमुख खनिजों के बड़े आयातकों के रूप में भारत और आरओके को ऊर्जा के कुशल उपयोग, खनिजों के निष्कर्षण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण तथा पर्यावरणीय रूप से सतत् तरीके से वैकल्पिक ऊर्जा और सामग्रियों के सह-विकास की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। नेताओं ने महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सुरक्षित, सुदृढ़ और नवाचार-प्रेरित आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण के महत्व को भी रेखांकित किया। इस उद्देश्य से, दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण खनिजों की संपूर्ण मूल्य शृंखला में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों के मानचित्रण और अन्वेषण हेतु दोनों देशों के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संगठनों के बीच संपर्कों को सुदृढ़ करना शामिल है। उन्होंने परिपत्र अर्थव्यवस्था पहलों के अंतर्गत ई-कचरे और खनन अपशिष्ट (माइन टेलिंग्स) जैसे अपारंपरिक स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति में सहयोग का भी समर्थन किया।
29. इसके अतिरिक्त, जहाँ राष्ट्रपति ली ने भारत की पैक्स सिलिका पहल में शामिल होने का स्वागत किया, वहीं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने फोरम ऑन रिसोर्स जियोस्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट (फोर्ज) के अध्यक्ष के रूप में कोरिया गणराज्य के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने आपूर्ति व्यवधान या बाजार अस्थिरता की स्थिति में, बाजार परिस्थितियों और वाणिज्यिक विचारों के अनुरूप, नैफ्था जैसी महत्वपूर्ण सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सहयोग को सुदृढ़ करने की संभावनाओं का अन्वेषण करने पर भी सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण सामग्रियों के द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार के अवसरों का भी अन्वेषण करने पर सहमति व्यक्त की।
30. भारत और आरओके जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों से निपटने में एक सकारात्मक और सक्रिय एजेंडा के माध्यम से साझेदार हैं, जो उनके आर्थिक कल्याण को भी बढ़ावा देता है। इस संदर्भ में, दोनों नेताओं ने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत एक समझौता ज्ञापन (एमओसी) संपन्न किए जाने का स्वागत किया, जो निवेश-आधारित शमन परियोजनाओं के लिए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण स्थापित करता है, उनके अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों की प्राप्ति को आगे बढ़ाता है तथा जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में उनकी सामरिक साझेदारी को और सुदृढ़ करता है।
31. पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी राष्ट्रों के रूप में, भारत और आरओके ने जलवायु और पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग हेतु एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के माध्यम से संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। दोनों नेताओं ने आरओके के अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) में सदस्य के रूप में शामिल होने तथा भारत के ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट (जीजीजीआई) में सदस्य के रूप में शामिल होने का स्वागत किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आरओके को ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया।
32. मानवता के भविष्य को प्रभावित करने वाली वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत–आरओके के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए, दोनों नेताओं ने स्थायित्व के क्षेत्र में सहयोग पर एक संयुक्त वक्तव्य को अपनाने का स्वागत किया, साथ ही जलवायु परिवर्तन, आर्कटिक और समुद्री सहयोग सहित वैश्विक विषयों पर दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच एक संवाद की शुरुआत का भी स्वागत किया।
मृदु शक्ति (सॉफ्ट पावर) के प्रभाव को और अधिक सशक्त बनाना
33. भारत और आरओके की समृद्ध एवं साझा सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, दोनों नेताओं ने दोनों देशों के संस्थानों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ करने का समर्थन किया। उन्होंने 2026–2030 की अवधि के लिए सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम (सीईपी) के विस्तार का स्वागत किया तथा संबंधित एजेंसियों को इसे सही तरीके से क्रियान्वित करने हेतु उपयुक्त योजनाएँ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने वर्ष 2028–29 को सांस्कृतिक गतिविधियों की श्रृंखला के माध्यम से भारत–आरओके मैत्री वर्ष के रूप में मनाने का भी निर्णय लिया।
34. दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों (सीसीआई) पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने फिल्म क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की, जिसमें सह-निर्माण (को-प्रोडक्शन), प्रशिक्षण आदान-प्रदान तथा एनीमेशन और विज़ुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) जैसे क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी साझाकरण शामिल है।
35. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मृदु शक्ति के प्रसार के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली गतिविधियों को समर्थन देने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें आरओके में भारत दिवस तथा भारत में कोरिया दिवस का आयोजन शामिल है।
36. दोनों देशों की साझा बौद्ध विरासत को स्मरण करते हुए तथा भारत और आरओके के बीच ऐतिहासिक एवं सभ्यतागत संबंधों को और गहरा करने के उद्देश्य के अनुरूप, दोनों नेताओं ने भारत द्वारा आरओके को 200 कलाकृतियों के दान का स्वागत किया तथा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए गिम्हे के प्रयासों का भी स्वागत किया।
37. दोनों नेताओं ने खेल के क्षेत्र में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य विशेषज्ञों एवं कर्मियों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण, प्रतिभा विकास और खेल विज्ञान से संबंधित कार्यक्रमों एवं ज्ञान के आदान-प्रदान तथा भारत और आरओके के खेल प्राधिकरणों एवं अन्य खेल निकायों के बीच सहयोग जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित और सुगम बनाना है।
जन-से-जन संबंध
38. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय साझेदारी के एक आधारस्तंभ के रूप में शैक्षिक सहयोग को और सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। उन्होंने विश्वविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों के बीच विस्तृत सूचना साझाकरण, साथ ही संकाय एवं छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रमों तथा संयुक्त शैक्षणिक पहलों—विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और एसटीईएम के क्षेत्रों में—के माध्यम से सहयोग का स्वागत किया।
39. भाषाई और सांस्कृतिक समझ के महत्व को स्वीकार करते हुए, दोनों नेताओं ने शैक्षणिक पाठ्यक्रम, डिजिटल उपकरणों, शिक्षक प्रशिक्षण और संबंधित संस्थागत ढाँचों के माध्यम से भारत में कोरियाई भाषा तथा आरओके में भारतीय भाषाओं, विशेष रूप से हिंदी, के शिक्षण और अध्ययन को समर्थन दिया। उन्होंने जनवरी 2026 में भारत में पहले कोरिया शिक्षा केंद्र के शुभारंभ का स्वागत किया।
40. दोनों पक्षों ने संयुक्त अनुसंधान, क्रेडिट ट्रांसफर तथा छात्रों के आदान-प्रदान के माध्यम से विश्वविद्यालय-स्तरीय शैक्षणिक सहयोग, विशेष रूप से भारत के तेईस भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और आरओके में केएनयू10 कंसोर्टियम में भाग लेने वाले दस कोरियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के बीच, को बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।
41. दोनों नेताओं ने भारतीय विद्यार्थियों के लिए ग्लोबल कोरिया स्कॉलरशिप (जीकेएस) की व्यवस्था का स्वागत किया तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की अटल बिहारी वाजपेयी सामान्य छात्रवृत्ति और आईसीसीआर लता मंगेशकर कला एवं संस्कृति छात्रवृत्ति योजना तथा आयुष छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से कोरियाई विद्यार्थियों के लिए परस्पर छात्रवृत्ति के प्रस्ताव का भी स्वागत किया। द्विपक्षीय शैक्षिक संबंधों को और गहरा करने के लिए, दोनों नेताओं ने अपने-अपने कार्यक्रमों के अंतर्गत एक-दूसरे के देशों के नागरिकों के लिए छात्रवृत्ति स्लॉट बढ़ाकर इन योजनाओं के विस्तार का लक्ष्य निर्धारित किया।
42. भारत और आरओके मानव संसाधन के क्षेत्र में मजबूत पूरकता साझा करते हैं। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय क्षमताओं का लाभ उठाने तथा अपने-अपने वैज्ञानिक संस्थानों और मानव पूंजी के बीच संबंधों को सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। इस संदर्भ में, उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर अगली संयुक्त समिति के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देने के निर्णय का स्वागत किया।
43. दोनों पक्षों ने जन-से-जन आदान-प्रदान को और अधिक प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वीज़ा और आव्रजन संबंधी प्रक्रियाओं को अधिक दक्ष बनाने के उपाय तलाशने पर सहमति व्यक्त की। नेताओं ने भारत और आरओके के बीच वायु संपर्क को सुदृढ़ करने का भी समर्थन किया, जिससे लोगों और वस्तुओं के अधिक सक्रिय आदान-प्रदान को बढ़ावा मिल सके।
44. एक-दूसरे के देशों में निवास करने वाले कोरियाई और भारतीय समुदायों के योगदान का सम्मान करते हुए, दोनों नेताओं ने उनके कल्याण और अपने-अपने समाजों में सक्रिय भागीदारी के समर्थन के प्रति अपनी वचनबद्धता की पुनः पुष्टि की, जिससे दोनों देशों के हित में और अधिक प्रगति सुनिश्चित की जा सके।
वैश्विक हित के लिए साझेदारी
45. दोनों देशों के वैश्विक अप्रसार प्रयासों में योगदान और प्रतिबद्धता को स्वीकार करते हुए, दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय अप्रसार व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए मिलकर कार्य जारी रखने का संकल्प लिया।
46. दोनों पक्षों ने नियम-आधारित, खुली, निष्पक्ष, न्यायसंगत, पारदर्शी, समावेशी और गैर-भेदभावपूर्ण बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की, जिसके केंद्र में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) है। उन्होंने बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा डब्ल्यूटीओ के कार्यकरण को बेहतर बनाने के लिए रचनात्मक रूप से जुड़ाव के महत्व को रेखांकित किया। भारत और आरओके ने बहुपक्षीय मंचों, जिनमें जी20 भी शामिल है, में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, विशेष रूप से वर्ष 2028 में समूह की आरओके की अध्यक्षता को ध्यान में रखते हुए।
47. दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के आधार पर, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) में परिलक्षित, नौवहन और उड़ान की स्वतंत्रता तथा अवरोध-रहित वैध व्यापार के सम्मान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। दोनों नेताओं ने सभी पक्षों से यह आग्रह किया कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त सिद्धांतों, जिनमें यूएनसीएलओएस शामिल है, के अनुरूप विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से करें।
48. दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों का पालन करने का आह्वान किया, जिसमें संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना तथा नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तनाव को कम करने और मूलभूत मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाया जाना चाहिए।
49. दोनों नेताओं ने कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण तथा स्थायी शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। भारत ने सक्रिय तनाव-शमन और विश्वास-निर्माण उपायों के माध्यम से अंतर-कोरियाई वार्ता को पुनः प्रारंभ करने के आरओके के प्रयासों का समर्थन किया, जिसका उद्देश्य अंतर-कोरियाई आदान-प्रदान के विस्तार, संबंधों के सामान्यीकरण तथा चरणबद्ध रूप से परमाणु निरस्त्रीकरण के माध्यम से कोरियाई प्रायद्वीप पर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और साझा विकास को प्राप्त करना है। दोनों नेताओं ने यह भी संकल्प लिया कि वे, विशेष रूप से आतंकवादियों और गैर-राज्यीय तत्वों तक इनके प्रसार को रोकने के लिए, सामूहिक विनाश के हथियारों तथा उनकी प्रक्षेपण प्रणालियों के प्रसार को रोकेंगे।
50. दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप यूक्रेन में न्यायसंगत और स्थायी शांति के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने संवाद और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में शत्रुता की समाप्ति के महत्व पर बल दिया।
51. दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया, जिसमें सुरक्षा परिषद का विस्तार शामिल है, जिससे इसे अधिक लोकतांत्रिक, जवाबदेह, सहभागी और वर्तमान विश्व का प्रतिनिधिक बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, दोनों नेताओं ने समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने हेतु संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की दिशा में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।
52. दोनों नेताओं ने अपनी द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत–कोरिया गणराज्य विशेष सामरिक साझेदारी की व्यापक समीक्षा पर संतोष व्यक्त किया। वर्ष 2025 में इस साझेदारी के 10 वर्ष पूर्ण होने तथा गहन सहयोग का एक दशक होने का उल्लेख करते हुए, उन्होंने आने वाले वर्षों में इस साझेदारी को और सुदृढ़ करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।


