1.भारत और कोरिया गणराज्य एक खुले, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा विजन रखने वाले विशेष रणनीतिक साझेदार हैं।

2. हमारी विशेष रणनीतिक साझेदारी का मुख्य आधार एक दीर्घकालिक और विश्वसनीय आर्थिक तथा ऊर्जा संसाधन साझेदारी है, जो खुले बाजारों और नियम-आधारित व्यापार के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है, और जो हमारी समृद्धि तथा आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करती है। इस समय, इन साझा सिद्धांतों की पुनः पुष्टि करना और वर्तमान परिस्थितियों का उद्योगों एवं बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना इस समय अत्यंत आवश्यक है।

3. हम भारत-कोरिया गणराज्य व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते(सीईपीए) तथा संबंधित द्विपक्षीय ढांचों के माध्यम से ऊर्जा संसाधन व्यापार और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। भारत, कोरिया गणराज्य को नैफ्था तथा अन्य पेट्रोलियम फीडस्टॉक का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जबकि कोरिया गणराज्य भारत को पेट्रोलियम उत्पादों और लुब्रिकेंट बेस ऑयल का एक अग्रणी आपूर्तिकर्ता है।

4. हम ऊर्जा संसाधन आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने को प्रतिबद्ध हैं, जिसमें क्षेत्रीय सहयोग को बेहतर बनाना, ऊर्जा बदलाव की गति तेज करना तथा ऊर्जा संसाधनों के लिए खुले व्यापार व्यवस्थाओं का समर्थन करना शामिल है। हमने एक प्रमुख एलएनजी उपभोक्ता के रूप में बाजार की स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ाने तथा खरीदारों के दृष्टिकोण को बेहतर रूप से दर्शाने के लिए आपसी सहयोग को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता को भी स्वीकार किया है।

5. हम ऊर्जा व्यापार को सुदृढ़ बनाने के अपने साझा प्रतिबद्धता को स्वीकार करते हैं। हम यह भी मानते हैं कि जहाज निर्माण सहित सुदृढ़ समुद्री बुनियादी ढांचा दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल ऊर्जा संसाधनों के परिवहन में सहायता प्रदान करने हेतु एक मजबूत और विविधीकृत जहाज निर्माण तंत्र के महत्व को स्वीकार करते हैं।

6. इस परिप्रेक्ष्य में, भारत और कोरिया गणराज्य निम्नलिखित प्रयास करते हैं:


-एक-दूसरे को ऊर्जा संसाधनों की स्थिर, सुरक्षित और विश्वसनीय आपूर्ति बनाए रखना, जिसमें दोनों देशों द्वारा नैफ्था और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में मुक्त व्यापार बनाए रखने के प्रयास, तथा संपूर्ण ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में सहयोग करना शामिल है।

- एलएनजी उपभोग करने वाले देशों के बीच अधिक घनिष्ठ सहयोग की संभावनाएं तलाशना।

- जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करना- जिसमें भारत में शिपयार्ड की स्थापना, शिपयार्ड का आधुनिकीकरण, मानव संसाधन विकास तथा प्रौद्योगिकी शामिल है, लेकिन यह यहीं तक सीमित नहीं है।

7. भारत और कोरिया गणराज्य क्षेत्रीय साझेदारों से आह्वान करते हैं कि वे वैश्विक ऊर्जा संसाधन आपूर्ति श्रृंखलाओं को खुला बनाए रखने में सहयोग करें, जिससे हमारे लोगों की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India’s health coverage expands rapidly, insurance reaches nearly half the population: Govt

Media Coverage

India’s health coverage expands rapidly, insurance reaches nearly half the population: Govt
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
प्रधानमंत्री ने आदि शंकराचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित की
April 21, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारत के महानतम आध्यात्मिक गुरुओं में से एके आदि शंकराचार्य को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा है कि उनके गंभीरतापूर्ण उपदेश, विचार और अद्वैत वेदांत का दर्शन विश्व स्तर पर अनगिनत लोगों का मार्गदर्शन करते आ रहे हैं। आध्यात्मिक चिंतन को पुनर्जीवित करने और देश भर में आध्यात्मिक केंद्र स्थापित करने के उनके प्रयास प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। श्री मोदी ने यह भी कहा कि "उनका ज्ञान हमारे मार्ग को प्रकाशित करता रहेगा और सत्य, करुणा तथा सामूहिक कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।"

प्रधानमंत्री ने एक्स पर किए गए पोस्ट में लिखा है:

भारत के महानतम आध्यात्मिक गुरुओं में से एक आदि शंकराचार्य की जयंती के पावन अवसर पर मैं उनको श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं। उनके गंभीरतापूर्ण उपदेश, विचार और अद्वैत वेदांत का दर्शन विश्व भर में अनगिनत लोगों का मार्गदर्शन करते आ रहे हैं। उन्होंने सद्भावना, अनुशासन और सभी के अस्तित्व की एकात्मकता पर बल दिया। आध्यात्मिक चिंतन को पुनर्जीवित करने और देश भर में आध्यात्मिक केंद्र स्थापित करने के उनके प्रयास प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं। उनका ज्ञान हमारे मार्ग को प्रकाशित करता रहेगा और सत्य, करुणा तथा सामूहिक कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करेगा।