भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर, फिनलैंड गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. अलेक्जेंडर स्टब्ब, 4-7 मार्च 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा पर हैं। राष्ट्रपति के रूप में, यह राष्ट्रपति स्टब्ब की पहली भारत यात्रा है और वे नई दिल्ली और मुंबई का भी दौरा कर रहे हैं। उनके साथ फिनलैंड की जलवायु और पर्यावरण मंत्री सुश्री सारि मुल्टाला, फिनलैंड के रोजगार मंत्री श्री मटियास मार्टिनेन और अधिकारियों व व्यापारिक नेताओं का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल है। प्रधानमंत्री मोदी ने 5 मार्च 2026 को नई दिल्ली में 11वें रायसीना संवाद का उद्घाटन किया, जिसमें राष्ट्रपति स्टब्ब ने मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन भाषण दिया। राष्ट्रपति स्टब्ब की यात्रा फिनलैंड गणराज्य के प्रधानमंत्री महामहिम श्री पेटेरी ऑर्पो के फरवरी 2026 में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरे के बाद हो रही है।

5 मार्च 2026 को, भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति स्टब्ब का राष्ट्रपति भवन में गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति स्टब्ब ने द्विपक्षीय बैठक के दौरान व्यापक चर्चा की और संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा पर आये राष्ट्रपति के सम्मान में एक भोज का भी आयोजन किया।

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत को एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की सफलतापूर्वक मेजबानी के लिए बधाई दी। दोनों नेताओं ने इस विचार को साझा किया कि एआई के सुरक्षित, भरोसेमंद और समावेशी विकास की दिशा में काम करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राजनेताओं ने भारत और फिनलैंड के बीच गहरी और स्थायी मित्रता की पुष्टि की, जो आपसी सम्मान, लोकतंत्र और कानून के शासन के साथ-साथ वैश्विक शांति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति कटिबद्धता पर भी आधारित है।

भारत के प्रधानमंत्री और फिनलैंड के राष्ट्रपति ने नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसके केंद्र में संयुक्त राष्ट्र हो।

राजनेताओं ने सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रयासों को दोगुना करने तथा जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता क्षय की चुनौतियों के खिलाफ वैश्विक सहयोग के महत्व पर जोर दिया।

27 जनवरी 2026 को भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते का स्वागत करते हुए, राजनेताओं ने दोनों पक्षों के लिए व्यापार और निवेश के व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी अवसरों को स्वीकार किया, जिसमें भारत-फिनलैंड द्विपक्षीय संबंध भी शामिल हैं।

16 मार्च 2021 को भारत-फिनलैंड वर्चुअल शिखर सम्मेलन तथा 2018 और 2022 के दो संस्करणों के भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान स्टॉकहोम और कोपेनहेगन में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक, साथ ही फरवरी 2026 में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुई बैठक से प्राप्त गति के आधार पर, नेताओं ने दोनों राष्ट्रों के बीच सहयोग को बढ़ाने और गहरा करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया। इसी भावना में, नेताओं ने भारत-फिनलैंड संबंधों को डिजिटलीकरण और सतत विकास से जुड़ी एक रणनीतिक साझेदारी के रूप में उन्नत करने पर सहमति व्यक्त की, जो आपसी हितों और लाभों पर आधारित हो।

व्यापार और निवेश

भारत के प्रधानमंत्री और फ़िनलैंड के राष्ट्रपति ने व्यापार समुदाय से अनुरोध किया कि वे भारत-ईयू एफटीए से पैदा हुए विशाल अवसरों का उपयोग करें। इस संदर्भ में, नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि उद्देश्य 2030 तक भारत और फ़िनलैंड के बीच वर्तमान व्यापार को दोगुना करना होना चाहिए।

दोनों नेताओं ने संबंधित व्यापारिक समुदायों के बीच जीवंत बातचीत को रेखांकित किया, जो फिनलैंड के राष्ट्रपति के साथ भारत आये बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल तथा फरवरी में नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान फिनलैंड के प्रधानमंत्री के साथ आयी कंपनियों की आपसी बातचीत से परिलक्षित होती है। दोनों नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि 7 मार्च को मुंबई में होने वाले भारत-फिनलैंड व्यापार शिखर सम्मेलन और सीईओ की बातचीत से व्यापार, प्रौद्योगिकी सहयोग और निवेश संबंधों को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करने में मदद मिलेगी।

नेताओं ने बढ़ते स्टार्टअप सहयोग का स्वागत किया, जो हेलसिंकी में स्लश में अभिनव भारतीय स्टार्टअप और नई दिल्ली में स्टार्टअप महाकुंभ में फिनलैंड के स्टार्टअप की सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ भारत-फिनलैंड स्टार्टअप कॉरिडोर जैसी पहलों से प्रकट होता है।

डिजिटलीकरण

सामाजिक और आर्थिक समावेशी विकास के एक प्रमुख संचालक के रूप में डिजिटलीकरण की परिवर्तनकारी शक्ति को मान्यता देते हुए, नेताओं ने डिजिटल रूपांतरण, जिसमें नई और उभरती तकनीकें जैसे 5जी, 6जी, उच्च-प्रदर्शन और क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता शामिल हैं, की पहचान प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में की, जहां आपसी विश्वास और लाभ पर आधारित सहयोग को मजबूत किया जा सकता है। नेताओं ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में भारत के अनुभव, जैसे कि एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली, का उल्लेख किया और इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।

इस पृष्ठभूमि में, नेताओं ने संबंधित मंत्रालयों से डिजिटलीकरण पर एक पार-अनुभागीय संयुक्त कार्य समूह स्थापित करने का अनुरोध किया, ताकि प्राथमिकताओं को परिभाषित किया जा सके और डिजिटल बदलाव को आगे बढ़ाने वाले ठोस और महत्वपूर्ण कार्यों पर काम किया जा सके।

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने फिनलैंड के आर एंड डी और तकनीकी नवाचार इकोसिस्टम में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों के सकारात्मक प्रभाव पर ज़ोर दिया, जो डिजिटल बदलाव और स्थायित्व के माध्यम से सभी के लाभ के लिए सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान दे रहे हैं।

नेताओं ने भारतीय और फिनलैंड की कंपनियों और अनुसंधान संगठनों की संयुक्त पहलों के लिए आरडीआई वित्त पोषण प्रदान करने के लिए भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और बिजनेस फिनलैंड द्वारा किए गए संयुक्त आह्वान का उल्लेख किया, जिनका विशेष ध्यान सेमीकंडक्टर, 6जी और ऊर्जा प्रणालियों पर है। उन्होंने भारत 6जी अलायंस और फिनलैंड के ओलू विश्वविद्यालय के बीच सहयोग की रूपरेखा पर भी ध्यान दिया और 6जी पर द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के सभी प्रयासों का स्वागत किया।

इसके अलावा, नेताओं ने भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और बिज़नेस फिनलैंड के बीच आरडीआई सहयोग की संभावनाओं की आगे तलाश करने के लिए किए गए कार्य का स्वागत किया, जिसमें विशेष रूप से एआई पर ध्यान केंद्रित किया गया था और साथ ही भारतीय उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र और फिनलैंड के विज्ञान सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र के बीच उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग के संबंध में हुई चर्चाओं का भी उल्लेख किया।

उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, नेताओं ने सहयोग के एक उभरते हुए क्षेत्र के रूप में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को रेखांकित किया, जिसमें भविष्य के लिए काफी संभावनाएँ हैं। नेताओं ने भारतीय और फ़िनलैंड की कंपनियों के बीच निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी का भी उल्लेख किया।

सतत विकास

सतत विकास के बारे में दोनों नेताओं ने विशेष रूप से कम कार्बन की ओर बदलाव, ऊर्जा दक्षता, जैव-ईंधन, स्मार्ट ग्रिड्स और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा समाधान को आगे बढ़ाने की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। इसके अलावा, उन्होंने चक्रीय अर्थव्यवस्था, सतत जल प्रबंधन और मौसम विज्ञान में सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस उद्देश्य के लिए, नेताओं ने सतत विकास पर एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना का स्वागत किया, जो दोनों देशों के संबंधित लोगों को एक साथ लाकर सतत विकास-संबंधी मुद्दों पर सहयोग को बढ़ाएगा।

इसके अलावा, नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने के महत्व पर जोर दिया, जिसमें कई प्रमुख सहयोग क्षेत्रों को शामिल किया गया है जो सतत विकास में योगदान देते हैं, जैसे जैव-ईंधन और अपशिष्ट-से-ऊर्जा समाधान, विद्युत् भंडारण और लचीली आर ई ऊर्जा प्रणालियाँ, हरित हाइड्रोजन, साथ ही पवन, सौर और छोटे जल-विद्युत् संयंत्र।

उन्होंने पर्यावरण सहयोग पर समझौता ज्ञापन के नवीनीकरण और उद्योग परिवर्तन के लिए नेतृत्व समूह (लीडआईटी) के तहत सहयोग को स्वीकार किया तथा पक्षकारों को चक्रीय अर्थव्यवस्था, जलवायु कार्रवाई और सतत विकास में गहन सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

दोनो पक्षों ने स्वीकार किया गया कि स्मार्ट ऊर्जा समाधानों, जिसमें उन्नत मीटर अवसंरचना (एएमआई) और अन्य डिजिटल ग्रिड तकनीक शामिल हैं, की तेज तैनाती ने दक्षता में वृद्धि की है जबकि इसने महत्वपूर्ण बिजली अवसंरचना के लिए साइबर सुरक्षा जोखिम भी बढ़ाए हैं। उन्होंने सहनीय, भरोसेमंद और स्थायी स्मार्ट ग्रिड प्रणाली को बढ़ावा देने में भविष्य के सहयोग के क्षेत्रों का पता लगाने पर सहमति व्यक्त की।

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने 2026 के उत्तरार्ध में अगला विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच आयोजित करने के लिए भारत की सराहना की, यह फ़िनलैंड की पहल है जो चक्रीय अर्थव्यवस्था समाधानों को बढ़ावा देने और नई सहयोगी पहलों की खोज में प्रमुख विशेषज्ञता को एक साथ लाने का मंच प्रदान करती है।

भारत के प्रधानमंत्री ने इंडो-नॉर्डिक वॉटर फोरम के ढांचे में भारतीय, फिनिश और अन्य नॉर्डिक हितधारकों को एक साथ लाने में फिनलैंड की सक्रिय भूमिका को स्वीकार किया, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था समाधानों के लिए जल संसाधन प्रबंधन और अपशिष्ट जल प्रबंधन में नई सहयोगी पहल और सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देता है।

मौसम विज्ञान सहयोग के संदर्भ में, नेताओं ने फ़िनलैंड के मौसम विज्ञान संस्थान (एफएमआई) और भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के बीच एरोसोल निगरानी और वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान के लिए वर्तमान में जारी सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने एफएमआई और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटीएम) के बीच एक वर्चुअल अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का स्वागत किया, साथ ही एफएमआई-आईआईटीएम अनुसंधान सहयोग के तहत बहुपक्षीय परियोजनाओं का भी उल्लेख किया, जिनका कुल मूल्य 11 मिलियन यूरो से अधिक है।

नेताओं ने भारतीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और फिनलैंड के राष्ट्रीय भूमि सर्वेक्षण तथा फिनिश पर्यावरण संस्थान, शहरों और कंपनियों के बीच भूमि और संपत्ति की जानकारी के एकीकृत जीआईएस आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म, लैंड स्टैक, के अनुभवों के आदान-प्रदान पर भी ध्यान दिया।

नेताओं ने आधिकारिक सांख्यिकी के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने पर समझौता पत्र पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो आधिकारिक सांख्यिकी के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं, कार्यप्रणालियों और तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।

आवागमन, शिक्षा और लोगों के आपसी संपर्क

भारत के प्रधानमंत्री और फ़िनलैंड के राष्ट्रपति ने सभी क्षेत्रों में लोगों के आपसी संपर्क के महत्व को मान्यता दी, जिनमें कुशल श्रमिक, विशेषज्ञ और युवा पेशेवर, शोधकर्ता और छात्र, व्यवसायी और शिक्षा-जगत के गणमान्य व्यक्ति शामिल हैं, जिससे आर्थिक समृद्धि का पोषण होता है, समृद्ध सामाजिक ताने-बाने में योगदान मिलता है और आपसी समझ बढ़ती है।

इस संदर्भ में, नेताओं ने प्रवासन और आवागमन साझेदारी पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हुए हस्ताक्षर की सराहना की, जो आने वाले वर्षों में सुचारू, व्यवस्थित और परस्पर लाभकारी गतिशीलता के लिए रूपरेखा स्थापित करता है। दोनों पक्षों ने व्यापक और समन्वित तरीके से एमओयू के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की, जो भारत और फ़िनलैंड दोनों की समृद्धि और आर्थिक विकास के लिए लाभकारी हो। नेताओं ने दिनों विदेश मंत्रालयों के बीच संपर्कों को भी स्वीकृति दी और राजनयिक मामलों पर द्विपक्षीय संवाद स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार किया।

नेताओं ने शिक्षा में सहयोग पर उच्च स्तरीय संवाद (31 जनवरी 2024) द्वारा अनुमोदित संयुक्त वक्तव्य को भी रेखांकित किया और संबंधित पक्षों को खासकर माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और छात्र आवागमन के सहमति प्राप्त क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए साझा एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त प्रयासों में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस संदर्भ में, उन्होंने भारत में फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली के प्रति बढ़ती रुचि, शिक्षक प्रशिक्षण में बढ़ता सहयोग, तथा प्रारंभिक बाल्यकाल शिक्षा संस्थान और स्कूल, जिनकी स्थापना फिनिश मॉडल के अनुसार की जा रही है, का उल्लेख किया और इन्हें हितधारकों की साझा इच्छा और शिक्षा पर सहयोग को विकसित करते रहने की प्रतिबद्धता के ठोस उदाहरण के रूप में रेखांकित किया।

इसके अलावा, नेताओं ने द्विपक्षीय ऑडियोविज़ुअल सह-उत्पादन समझौते पर चर्चा को भी रेखांकित किया, जो फिल्म और गेमिंग उद्योगों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक ठोस ढांचा प्रदान करेगा।

भारत-ईयू संबंध

दोनों नेताओं ने 27 जनवरी 2026 को भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में अनुमोदित नए संयुक्त भारत-ईयू व्यापक रणनीतिक एजेंडा का स्वागत किया, जो साझा मूल्यों और सिद्धांतों, आपसी विश्वास, एक-दूसरे से मेल खाने वाले हितों और साझा राजनीतिक इच्छा पर आधारित है। उन्होंने सहमति व्यक्त की कि भारत और ईयू स्थिर, पूर्वानुमेय और विश्वास योग्य साझेदार बन सकते हैं और बहुआयामी व गहरे दीर्घकालिक संबंध बना सकते हैं, जिसमें दोनों पक्षों के लिए कई सकारात्मक परिणाम होंगे।

नेताओं ने रेखांकित किया कि मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारत-ईयू संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाता है। दोनों नेताओं ने उल्लेख किया कि बाजार पहुंच बढ़ाने और व्यापार बाधाओं को हटाने के स्पष्ट आर्थिक लाभों के अतिरिक्त, एफटीए महत्वपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं में विविधता लाने और नए बाजार खोलने के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा और सहनीयता का समर्थन कर सकता है।

व्यापार, प्रौद्योगिकी और आर्थिक सुरक्षा के प्रमुख मुद्दों को संबोधित करने के एक मंच के रूप में, नेताओं ने भारत-ईयू प्रौद्योगिकी साझेदारी के आधारशिला के रूप में भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद के काम को और बढ़ावा देने के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।

भारत के प्रधानमंत्री और फ़िनलैंड के राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हुए हस्ताक्षर, भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी में एक और महत्वपूर्ण आयाम जोड़ते हैं, जो समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, साइबर और हाइब्रिड खतरे, अंतरिक्ष, साथ ही आतंकवाद-रोधी जैसे साझा क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करेगा।

नेताओं ने आवागमन पर सहयोग के व्यापक ढांचे पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हुए हस्ताक्षर और भारत में पायलट कार्यक्रम के तौर पर यूरोपीय संघ कानूनी प्रवेश की शुरुआत की सराहना की।

बहुपक्षीय सहयोग

नेताओं ने यूएन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को स्वीकार किया। इस संदर्भ में, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समग्र सुधार के महत्व पर जोर दिया ताकि इसे अधिक कार्यकुशल, प्रतिनिधिमूलक, समावेशी और समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने वाले के रूप में सक्षम बनाया जा सके। फिनलैंड के राष्ट्रपति ने एक सुधार किये गये यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता के पक्ष में फिनलैंड के समर्थन को दोहराया।

नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों के भीतर सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया ताकि बहुपक्षीयता की रक्षा की जा सके और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखा जा सके, जिसमें परस्पर उम्मीदवारी और नामांकन का समर्थन शामिल हैं।

दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों में अपने रचनात्मक सहयोग को जारी रखने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें शांति और सुरक्षा, मानवाधिकार, सतत विकास के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता शामिल हैं।

नेताओं ने यूएनसीएलओएस समेत अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध भारत-प्रशांत को बढ़ावा देने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। इस संदर्भ में, भारत ने फिनलैंड के भारत-प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने आर्कटिक मामलों पर सहयोग और संवाद को और मजबूत करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें संयुक्त शोध पहलों, शैक्षिक आदान-प्रदान और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग भी शामिल है। उन्होंने पहले भारत–फिनलैंड आर्कटिक संवाद 'हिमालय और आर्कटिक पारिस्थितिक तंत्र: सतत भविष्य के लिए भारत–फिनलैंड साझेदारी', जो जनवरी 2026 में रोवानीमी, फिनलैंड में आयोजित हुआ था, का उल्लेख किया, जिसने सांसदों, सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों को आर्कटिक मामलों पर सहयोग को गहरा करने की रणनीतियों और तरीकों पर विचार करने के लिए एक साझा मंच प्रदान किया। दोनों नेताओं ने आर्कटिक परिषद् काउंसिल की संरचनाओं के अंतर्गत और भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के व्यापक ढांचे के भीतर सहयोग को आगे बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद और हिंसक अतिवाद के सभी रूपों और प्रकटों, जिसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है, की स्पष्ट और जोरदार निंदा की। उन्होंने व्यापक और स्थायी तरीके से और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए निर्णायक और संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हिंसक कट्टरपंथ और अतिवाद का मुकाबला करने, आतंकवाद के वित्तपोषण से लड़ने, अंतरराष्ट्रीय रूप से सहमत धन-शोधन रोधी मानकों को बढ़ावा देने, आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रयोग को रोकने और आतंकवादी भर्ती से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ मंचों समेत आतंक के वित्त पोषण स्रोतों को बाधित करने के लिए सक्रिय कदम उठाते रहने की अपनी मजबूत प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि की। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम, जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले और 10 नवम्बर 2025 को नई दिल्ली के लाल किला के पास हुई आतंकवादी घटना की कठोरतम शब्दों में निंदा की।

दोनों नेताओं ने यूक्रेन में संवाद और कूटनीति के माध्यम से एक व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति व्यक्त की, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों, जिसमें स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता शामिल हैं, पर आधारित हो।

निष्कर्ष

डिजिटलीकरण और सतत विकास में भारत-फ़िनलैंड रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए, नेताओं ने डिजिटलीकरण और सतत विकास पर संबंधित कार्य समूहों से कहा कि वे एक भविष्य-केंद्रित और ठोस कार्य योजना विकसित करें, जिसमें प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और संबंधित कार्यविधि की परिभाषा शामिल हो, और फ़िनलैंड गणराज्य के विदेश मंत्रालय और भारत गणराज्य के विदेश मंत्रालय को प्रगति की रिपोर्ट दें।

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने अपनी राजकीय यात्रा के दौरान उत्कृष्ट व्यवस्था के लिए भारत के प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया और दोनों नेताओं ने खुले और रचनात्मक संवाद और आगे बढ़ते और विकसित होते सहयोग की सराहना की। उन्होंने आपसी सम्मान और सहयोग की साझा भावना के ठोस आधार पर अपने संवाद को जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। राष्ट्रपति स्टब्ब ने प्रधानमंत्री मोदी को फिनलैंड आने का निमंत्रण दिया, और प्रधानमंत्री मोदी ने इस निमंत्रण को स्वीकार किया।

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प्रधानमंत्री ने जल सुरक्षा पर नेशनल डिपार्टमेंटल समिट के समापन सत्र की अध्यक्षता की
September 02, 2026
यह टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप आयोजित शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला सम्मेलन
प्रधानमंत्री ने ठोस और समयबद्ध नतीजों पर अमल करने के लिए लगातार समीक्षा और फॉलो-अप की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया
जन भागीदार पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए जल उत्सव को बढ़ावा देने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण की तकनीकों को अधिक से अधिक अपनाने और दुनिया भर के बेहतरीन तौर-तरीकों से सीखने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी इस्तेमाल के जरिए पानी से जुड़े डेटा का बेहतर प्रबंधन करने की अपील की
प्रधानमंत्री ने पानी से जुड़े मुद्दों पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों की भागीदारी वाले राज्यों के बीच व्यवस्थित अध्ययन-दौरों का सुझाव दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पानी पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। यह शिखर सम्मेलन टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने, सहकारी संघवाद को गहरा करने और केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर सहयोग के ज़रिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री की सोच के अनुरुप विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला सम्मेलन है। इसमें भारत की जल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित चर्चा के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एक साथ एक मंच पर थे।

प्रधानमंत्री ने दो दिनों तक चली गहन चर्चा की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि शिखर सम्मेलन से निकले कार्यान्वयन योग्य और समय-सीमा वाले कार्य बिंदुओं की समीक्षा और सीखने की निरंतर प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक बार की गतिविधि बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने इसकी समीक्षा व फॉलो अप की निरंतर प्रक्रिया का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों, जैसे आबादी का बढ़ना और भविष्य में पानी की ज़रूरतों के बारे में शहरी स्थानीय निकायों को जागरूक करने पर ज़ोर दिया और उनके लिए भी ऐसे ही चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने पानी बचाने वाली तकनीकों को ज़्यादा अपनाने की बात कही। उन्होंने भारतीय निर्माताओं और संबंधित लोगों को असरदार समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद करने के लिए खास प्रदर्शनियों और कार्यशालाएं, जिनमें दुनिया भर के बेहतरीन तरीकों की जानकारी भी शामिल हो, आयोजित करने का सुझाव भी दिया।

जन भागीदारी पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने लोगों में ज़्यादा जागरूकता लाने के लिए "जल उत्सव" को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने गाद निकालने के काम को एक नियमित कार्यक्रम बनाने और इसके लिए साफ नियम और मानक संचालन प्रक्रिया बनाने को कहा। बांध की सुरक्षा के मामले में, उन्होंने हर मॉनसून से पहले पूरी तैयारी रखने, तय सावधानियों का पालन करने और स्कूली छात्रों में जागरूकता पैदा करने पर ज़ोर दिया, जिसमें शिक्षा के पाठ्यक्रम में इसे सही ढंग से शामिल करना भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में भी जल प्रबंधन और शासन के बारे में जानकारी और क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के बीच व्यवस्थित अंतर-राज्यीय अध्ययन-दौरे आयोजित किए जाएं, ताकि व्यावहारिक सीख मिल सके और सफल उपायों को दूसरी जगहों पर भी अपनाया जा सके।

प्रधानमंत्री ने मज़बूत जल डेटा गवर्नेंस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिसमें जल-क्षेत्र से जुड़े डेटा को एक साथ लाया जाए, उसे व्यवस्थित रूप से प्रबंधित किया जाए और उसका विश्लेषण तथा प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए। उन्होंने एक समान प्रारूप के माध्यम से डेटा एकत्र करने और विश्लेषण करने के लिए एआई के उपयोग की भी सिफारिश की। उन्होंने कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपचारित पानी के उचित उपयोग के ज़रिए पानी की कमी की समस्या से निपटने के लिए पहले से तैयारी और एकीकृत योजना बनाने पर भी ज़ोर दिया।

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने अनुभव का ज़िक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सही योजना, पक्के इरादे, ज़रूरी संसाधन तथा काबिल अधिकारियों को लगाकर पानी की कमी की समस्या को एक अवसर में बदला जा सकता है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने सम्मेलन के चार मुख्य नतीजों पर ज़ोर दिया: पानी से जुड़ी ढ़ांचागत परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करना, जल संरक्षण को लोगों के एक लगातार चलने वाले आंदोलन के तौर पर मज़बूत करना, पीने योग्य पानी के स्रोतों की लंबे समय तक उपलब्धता सुनिश्चित करना और गांवों में पीने के पानी की योजनाओं के असरदार संचालन और रखरखाव को संस्थागत रूप देना।