प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 1 दिसंबर, 2023 को दुबई में आयोजित सीओपी-28 के दौरान हुए ‘ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम’ पर हुए उच्च स्तरीय कार्यक्रम की यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान के साथ संयुक्त रूप से मेजबानी की। इस कार्यक्रम में स्वीडन के प्रधानमंत्री महामहिम श्री उल्फ क्रिस्टरसन, मोज़ाम्बिक के राष्ट्रपति महामहिम श्री फ़िलिप न्यूसी और यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष महामहिम श्री चार्ल्स मिशेल की भागीदारी देखी गई।

प्रधानमंत्री ने सभी देशों को इस पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

ग्रीन क्रेडिट पहल को जलवायु परिवर्तन की चुनौती के लिए एक प्रभावी प्रतिक्रिया के रूप में, पृथ्वी के हित से जुड़े स्वैच्छिक कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए एक तंत्र के रूप में तैयार किया गया है। यह प्राकृतिक पारिस्थितिकी प्रणालियों का जीर्णोद्धार करने और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए बंजर/ खराब भूमि और नदी जलग्रहण क्षेत्रों पर वृक्षारोपण के लिए ग्रीन क्रेडिट जारी करने की कल्पना करता है।

कार्यक्रम के दौरान एक वेब प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया, जो पर्यावरण-अनुकूल कार्यों को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों और सबसे अच्छे तौर तरीकों के संग्रह के रूप में काम करेगा (https://ggci-world.in/)

इस वैश्विक पहल का उद्देश्य ग्रीन क्रेडिट जैसे कार्यक्रमों/तंत्रों के माध्यम से पर्यावरण के लिहाज से सकारात्मक कार्यों की योजना, कार्यान्वयन और निगरानी में ज्ञान, अनुभवों और सर्वोत्तम तौर तरीकों के आदान-प्रदान के माध्यम से वैश्विक सहभागिता, सहयोग और साझेदारी को सुविधाजनक बनाना है।

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प्रधानमंत्री ने दुनिया की विविध संस्कृतियों के सम्मान पर जोर देते हुए एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया
June 29, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:

“देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः।

स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥" 

यह सुभाषितम दर्शाता है कि विश्व की विविध संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है और आपसी समझ तथा भाईचारा मजबूत होता है।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा:

दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है। इससे आपसी समझ और भाईचारा और मजबूत होता है।

देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः।

स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥