प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि देशवासियों के संघर्षों और उनकी कुर्बानियों को याद करते हुये 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जायेगा।

अपने कई ट्वीटों में प्रधानमंत्री ने कहा हैः

“विभाजन की पीड़ा को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वहशी नफरत और हिंसा के कारण हमारी लाखों बहनें और भाई दर-बदर हो गये और तमाम लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। अपने लोगों के संघर्षों और कुर्बानियों को याद करते हुये 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जायेगा।

#PartitionHorrorsRemembranceDay हमें यह याद दिलाता रहेगा कि सामाजिक भेदभाव और वैमन्यस्य को मिटाने की तथाएकता, सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की जरूरत है।

देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है।

#PartitionHorrorsRemembranceDayका यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी।"

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पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बातचीत
June 30, 2026
राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने प्रधानमंत्री को पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों से अवगत कराया
प्रधानमंत्री ने बनी सहमति का स्वागत किया और स्थायी शांति एवं स्थिरता के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता को दोहराया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज ईरान के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. मसूद पेज़ेशकियान के साथ टेलीफोन पर वार्ता की।

राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने प्रधानमंत्री को पश्चिम एशिया के हाल के घटनाक्रमों और आगे की संभावनाओं के बारे में अवगत कराया।

प्रधानमंत्री ने बनी सहमति का स्वागत किया और भारत के इस सैद्धांतिक दृष्टिकोण को दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने तथा समुद्री आवाजाही एवं वाणिज्य की स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने तथा समुद्री आवाजाही एवं आर्थिक गतिविधियों की स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।