साझा करें
 
Comments
लोकतंत्र की हमारी परिभाषा को केवल चुनाव और सरकारों तक सीमित नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र ‘जन भागीदारी’ से मजबूत होता है: प्रधानमंत्री 
जन भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाता है: प्रधानमंत्री मोदी 
महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम को ‘जन आंदोलन’ में परिवर्तित कर दिया: प्रधानमंत्री मोदी 
मैं भारत की विकास यात्रा को ‘जन आंदोलन’ बनाना चाहता हूँ; प्रत्येक को अहसास होना चाहिए कि वह भारत की प्रगति के लिए काम कर रहा है: पीएम मोदी 
‘स्वच्छ भारत’  एक जन आंदोलन में बदल गया है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 
‘मनतंत्र’ और ‘मनीतंत्र’ लोकतंत्र के लिए ख़तरा: प्रधानमंत्री मोदी  
अपने आप को निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों तक सीमित कर देना हमारे विकास को सीमित कर देगा। पर्सनल सेक्टर विशेष बल का स्रोत: प्रधानमंत्री 
लघु उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है और इससे देश भर में कई लोगों को रोजगार मिल रहा है: प्रधानमंत्री 
हमारी सरकार ने लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ‘मुद्रा बैंक योजना’ शुरू की है: प्रधानमंत्री मोदी

श्री संजय गुप्‍ता जी, श्री प्रशांत मिश्रा जी, उपस्थित सभी गणमान्‍य महानुभाव जागरण परिवार के सभी स्‍वज़न...

हमारे यहां कहा जाता है कि राष्ट्रयाम जाग्रयाम वयम: eternal vigilance is the price of liberty और आप तो स्‍वयं दैनिक जागरण कर रहे हैं। कभी-कभी यह भी लगता है कि, कि क्‍या लोग 24 घंटे में सो जाते हैं, कि फिर 24 घंटे के बाद जगाना पड़ता है। लेकिन लोकतंत्र की सबसे पहली अनिवार्यता है और वो है जागरूकता और उस जागरूकता के लिए हर प्रकार के प्रयास निरन्‍तर आवश्‍यक होते हैं। अब जितनी मात्रा में जागरूकता बढ़ती है, उतनी मात्रा में समस्‍याओं के समाधान के रास्‍ते अधिक स्‍पष्‍ट और निखरते हैं, जन भागीदारी सहज बनती है और जहां जन-भागीदारी का तत्व बढ़ता है, उतनी ही लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍थाएं मजबूत होती हैं, विकास की यात्रा को गति आती है और लक्ष्‍य प्राप्ति निश्चित हो जाती है।

उस अर्थ में लोकतंत्र की यह पहली आवश्‍यकता है निरन्तर जागरण| जाने अनजाने में यह क्‍यों न हो लेकिन हमारे देश में लोकतंत्र का एक सीमित अर्थ रहा और वो रहा, चुनाव, मतदान और सरकार की पसंद| ऐसा लगने लगा मतदाताओं को कि चुनाव आया है तो अगले पांच साल के लिए किसी को कॉन्‍ट्रेक्‍ट देना है, जो हमारी समस्‍याओं का समाधान कर देगा और अगर पांच साल में वो कॉन्‍ट्रेक्‍ट में fail हो गया तो दूसरे को ले आएंगे। यह सबसे बड़ी हमारे सामने चुनौती भी है और कमी भी । लोकतंत्र अगर मतदान तक सीमित रह जाता है, सरकार के चयन तक सीमित रह जाता है, तो वो लोकतंत्र पंगु हो जाता है।

लोकतंत्र सामर्थ्‍यवान तब बनता है, जब जन-भागीदारी बढ़ती है और इसलिए जन-भागीदारी को हम जितना बढायें| अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। अगर हम हमारे देश के आजादी के आंदोलन की ओर देखें- ऐसा नहीं है कि इस देश में आजादी के लिए मरने वालों की कोई कमी रही। देश जब से गुलाम हुआ तब से कोई दशक ऐसा नहीं गया होगा कि जहां देश के लिए मर मिटने वालों ने इतिहास में अपना नाम अंकित न किया हो। लेकिन होता क्‍या था , वे आते थे, उनका एक जब्‍बा होता था और वो मर मिट जाते थे। फिर कुछ साल बाद स्थिरता आ जाती थी फिर कोई पैदा हो जाता था। फिर निकल पड़ता था। फिर उसकी आदत हो जाती थी। आजादी के आंदोलन के लिए मरने वालों का तांता अविरत था, निरंतर था। लेकिन गांधी जी ने जो बहुत बड़ा बदलाव लाया वो यह था कि उन्‍होंने इस आजादी की ललक को जन आंदोलन में परिवर्तित कर दिया। उन्‍होंने सामान्‍य मानविकी को , आजादी के आंदोलन का सिपाही बना दिया था।

एक आध वीर शहीद तैयार होता था, तो अंग्रेजों के लिए निपटना बड़ा सरल था। लेकिन यह जो एक जन भावना का प्रबल, आक्रोश प्रकट होने लगा, अंग्रेजों के लिए उसको समझना भी मुश्किल था | उसको हैंडल कैसे करना है यह भी मुश्किल था और महात्‍मा गांधी ने इसको इतना सरल बना दिया था कि देश को आजादी चाहिए न , अच्‍छा तुम ऐसा करो तकली ले करके, रूई ले करके, धागा बनाना शुरू कर दो, देश को आजादी आ जाएगी। किसी को कहते थे कि आपको आजादी का सिपाही बनना है तो अगर तुम्‍हारे गांव में निरक्षर है उनको शिक्षा देने का काम करो, आजादी आ जाएगी। किसी को कहते थे तुम झाडू लगाओ, आजादी आ जाएगी।

उन्‍होंने हर सामाजिक काम को स्वयं से जो भी अलग होता था उसको उन्‍होंने राष्‍ट्र की आवश्‍यकता के साथ जोड़ दिया और जन-आंदोलन में परिवर्तित कर दिया। सिर्फ सत्‍याग्रह ही जन-आंदोलन नहीं था। समाज सुधार का कोई भी काम एक प्रकार से आजादी के आंदोलन का एक हिस्‍सा बना दिया गया था और उसका परिणाम यह आया कि देश के हर कोने में हर समय कुछ न कुछ चलता था। कोई कल्‍पना कर सकता है ? अगर आज बहुत बड़ा मैनेजमेंट expert होगा कोई बहुत बड़ा आंदोलन शास्‍त्र का जानकार होगा। उसको कहा जाए कि भाई एक मुटठी भर नमक उठाने से कोई सल्‍तनत चली जा सकती है यह thesis बना कर दो हमको, मैं नहीं मान सकता हूं कि कोई कल्‍पना कर सकता है कि एक मुटठी भर नमक की बात एक सल्‍तनत को नीचे गिराने का एक कारण बन सकती है। यह क्‍यों हुआ , यह इसलिए हुआ कि उन्‍होंने आजादी के आंदोलन को जन-जन का आंदोलन बना दिया था।

आजादी के बाद अगर देश ने अपनी विकास यात्रा का मॉडल गांधी से प्रेरणा ले करके जन भागीदारी वाली विकास यात्रा, जन आंदोलन वाली विकास यात्रा, उसको अगर तवज्जो दी होती तो आज जो बन गया है सब कुछ सरकार करेगी| कभी-कभी तो अनुभव ऐसा आता है कि किसी गांव में गड्ढ़ा हो, रोड पर और वो पांच सौ रूपये के खर्च से वो गड्ढ़ा भरा जा सकता हो लेकिन गांव का पंचायत का प्रधान गांव के दो चार और मुखिया किराये पर जीप खरीदेंगे लेंगे , सात सौ रूपया जीप का किराया देंगे और state headquarter पर जाएंगे और memorendum देंगे कि हमारे गांव में गड्ढ़ा है उस गड्ढे को भरने के लिए कुछ करो। यह स्थिति बन चुकी है| सबकुछ सरकार करेगी।

गांधी जी का model था- सारी सबकुछ जनता करेगी। आजादी के बाद जन-भागीदारी से अगर विकास यात्रा का मॉडल बनाया गया होता तो शायद हम सरकार के भरोसे जिस गति से चले हैं अगर जनता के भरोसे चलते तो उसकी गति हजारों गुना तेज होती | उसका व्‍याप, उसकी गहराई अकल्पित होती और इसलिए आज समय की मांग है कि हम भारत की विकास यात्रा को development को , एक जन-आंदोलन बनाएं।

समाज के हर व्‍यक्ति को लगना चाहिए कि मैं अगर स्‍कूल में टीचर हूं। मैं क्‍लास में पूरा समय जब पढ़ाता हूं, अच्‍छे से पढ़ाता हूं, मतलब कि मैं मेरे देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए काम कर रहा हूं। मैं अगर रेलवे का कर्मचारी हूं और मेरे पास जिम्‍मा है रेल समय पर चले। मैं इस काम को ठीक से करता हूं| रेल समय पर चलती है। मतलब मैं देश की बहुत बड़ी सेवा कर रहा हूं। मैं देश को आगे ले जाने की जिम्‍मेदारी निभा रहा हूं। हम अपने कर्तव्य को अपने काम को , राष्‍ट्र को आगे ले जाने का दायित्‍व मैं निभा रहा हूं। इस प्रकार से अगर हम जोड़ते हैं तो आप देखिए हर चीज का अपना एक संतोष मिलता है।

इन दिनों स्‍वच्‍छ भारत अभियान किस प्रकार से जन आंदोलन का रूप ले रहा है। वैसे यह काम ऐसा है कि किसी भी सरकार और राजनेता के लिए इसको छूना मतलब सबसे बड़ा संकट मोल लेने वाला विषय है, क्‍योंकि कितना ही करने के बाद दैनिक जागरण के फ्रंट पेज पर तस्‍वीर छप सकती है कि मोदी बातें बड़ी-बड़ी करता है, लेकिन यहां कूड़े-कचरे का ढेर पड़ा हुआ है। यह संभव है, लेकिन क्‍या इस देश में माहौल बनाने की आवश्‍यकता नहीं है। और अनुभव यह आया कि आज देश का सामान्‍य वर्ग, यहां जो बैठे हैं आपके परिवार में अगर पोता होगा तो पोता भी आपको कहता होगा कि दादा यह मत करो मोदी जी ने मना किया है। यह जन-आंदोलन का रूप है जो स्थितियों को बदलने का कारण बनता है। 

हमारे देश में वो एक समय था जब लाल बहादुर शास्‍त्री जी कुछ कहें तो देश उठ खड़ा होता था, मानता था। लेकिन धीरे-धीरे वो स्थिति करीब-करीब नहीं है| ठीक है आप लोगों को तो मजा आ रहा है। नेता बन गए हो, आपको क्‍या गंवाना है यह स्थिति आ चुकी थी। लेकिन अगर ईमानदारी से समाज की चेतना को स्‍पष्‍ट किया जाए तो बदलाव आता है। अगर हम यह कहें कि भई आप गरीब के लिए अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दो, छोड़ना बहुत मुश्किल काम होता है। लेकिन यह देश आज मैं बड़े संतोष के साथ कहता हूं 52 लाख लोग ऐसे आए, जिन्‍होंने सामने से हो करके अपनी गैस सब्सिडी surrender कर दी।

यह जन-मन कैसे बदल रहा है उसका यह उदाहरण है। और सामने से सरकार ने भी कहा कि आप जो गैस सिलेंडर की सब्सिडी छोड़ोगे, वो हम उस गरीब परिवार को देंगे, जिसके घर में लकड़ी का चूल्‍हा जलता है, धुंआ होता है और बच्‍चे बीमार होते हैं, मां बीमार होती है, उसको मुक्ति दिलाने के लिए करेंगे और अब तक 52 लाख लोगों ने छोड़ा| 46 लाख लोगों को, 46 लाख गरीबों को already आवंटित कर दिया गया है। इतना ही नहीं जिसने छोड़ा उसको बता दिया गया कि उन्‍होंने मुंबई में यह छोड़ा लेकिन राजस्‍थान के जोधपुर के उस गांव के अंदर उस व्‍यक्ति को यह दे दिया गया है। इतनी transparency के साथ। जिसने छोड़ा....इसमें पैसे का विषय नहीं है।

समाज के प्रति एक भाव जगाने का प्रयास किस प्रकार से परिणाम लाता है। हम अंग्रेजों के जमाने में जो कानून बने , उसके साथ पले-बढ़े हैं। यह सही है कि हम गुलाम थे, अंग्रेज हम पर भरोसा क्यों करेगा। कोई कारण ही नहीं था और उस समय जो कानून बने वो जनता के प्रति अविश्‍वास को मुख्‍य मानकर बनाए गए। हर चीज में जनता पर अविश्‍वास पहली बेस लाइन थी। क्‍या आजादी के बाद हमारे कानूनों में वो बदलाव नहीं आना चाहिए जिसमें हम जनता पर सबसे ज्‍यादा भरोसा करें।

कोई कारण नहीं है कि सरकार में जो पहुंच गए...मैं elected representatives नहीं कह रहा हूं, सारे system पर, मुलाज़िम होगा clerk होगा। जो इस व्‍यवस्‍था में आ गए – वे ईमानदार है, लेकिन जो व्‍यवस्‍था के बाहर है वे याचक है। यह खाई लोकतंत्र में मंजूर नहीं हो सकती। लोकतंत्र में खाई रहनी नहीं चाहिए। अब यह छोटा सा उदाहरण मैं बताता हूं - हम लोगों को सरकार में कोई आवेदन करना है तो अपने जो सर्टिफिकेट होते थे, वो उसके साथ जोड़ने पड़ते थे, attest करने पड़ते थे। हमारा क्‍या था कानून, कि आपको किसी Gazetted officer के पास जा करके ठप्‍पा मरवाना पड़ेगा। उसे certify करवाना पड़ेगा, तब जाएगा। अब वो कौन Gazetted officer हैं जो verify करता हैं, अच्‍छा देख रहा हूं... आपका चेहरा ठीक है, कौन करता है, कोई नहीं करता। वो भी समय के आभाव में थोपता जाता है। उनके घर के बाहर जो लड़का बैठता है वो देता है । हमने आ करके कहा कि भई भरोसा करो न लोगों पर , हमने कहा यह कोई requirement नहीं है xerox का जमाना है, तुम xerox करके डाल दो जब फाइनल verification की जरूरत होगी, तब original देख लिया जाएगा। और आज वह चला गया विषय | चीजें छोटी है, लेकिन यह उस बात का प्रतिबिम्‍ब करती है कि हमारी सोच किस दिशा में है। हमारी पहली सोच यह है कि जनसामान्‍य पर भरोसा करो। उन पर विश्‍वास करो, उनके सामर्थ्‍य को स्‍वीकार करो। अगर हम जनसामान्‍य के स्‍वार्थ को स्‍वीकार करते हैं तो वो सच्‍चे अर्थ में लोकतंत्र लोकशक्ति में परिवर्तित होता है।

हमारे देश में लोकतंत्र के सामने दो खतरे भी है। एक खतरा है मनतंत्र का, दूसरा खतरा है मनीतंत्र का। आपने देखा होगा इन दिनों जरा ज्‍यादा देखने को मिलता है , मेरी मर्ज़ी , मेरा मन करता है, मैं ऐसा करूंगा। क्‍या देश ऐसे चलता है क्‍या? मनतंत्र से देश नहीं चलता है , जनतंत्र से देश चलता है। आपके मन में आपके विचार कुछ भी हो, लेकिन इससे व्‍यवस्‍थाएं नहीं चलती है। अगर सितार में एक तार ज्‍यादा खींचा होता है तो भी सुर नहीं आता है और एक तार ढीला होता है तो भी सुर नहीं आता है। सितार के सभी तार सामान रूप से उसकी खिंचाई होती है, तब जा करके आता है और इसलिए मनतंत्र से लोकतंत्र नहीं चलता है... मनतंत्र से जनतंत्र नहीं चलता है। जनतंत्र की पहली शर्त होती है मेरे मन में जो भी है जन व्‍यवस्‍था के साथ मुझे उसे जोड़ना पड़ता है। मुझे assimilate करना पड़ता है, मुझे अपने आप को dilute करना पड़े तो dilute करना पड़ता है। और अगर मुझमें रूतबा है तो मेरे विचारों से convince कर करके उसे बढ़ाते-बढ़ाते लोगों को साथ ले करके चलना होता है। हम इस तरीके से नहीं चल सकते |

दूसरा का चिंता विषय होता है - मनीतंत्र। भारत जैसे गरीब देश में मनीतंत्र लोकतंत्र पर बहुत बड़ा कुठाराघात कर सकता है। हम उससे लोकतंत्र को कैसे बचाएं। उस पर हमारा कितना बल होगा। मैं समझता हूं कि उसके आधार पर हम प्रयास करते हैं।

हम देखते हैं कि पत्रकारिता, भारत में अगर हम पत्रकारिता की तरफ नजर करें तो एक मिशन मोड में हमारे यहाँ पत्रकारिता चली| Journalism, अखबार सब पत्रिकाएं एक कालखंड था जहां पत्र-पत्रिका की मूल भूमिका रही समाज सुधार की। उन्‍होंने समाज में जो बुराइयां थी उन पर प्रहार किए। अपनी कलम का पूरा भरपूर उपयोग किया। अब राजा राममोहन राय देख लीजिए या गुजरात की ओर वीर नर्मद को देख लीजिए .. कितने सालों पहले, शताब्‍दी पहले वे अपनी ताकत का उपयोग समाज की बुराइयों पर कर रहे थे।

दसूरा एक कालखंड आया जिसमें हमारी पत्रकारिता ने आजादी के आंदोलन को एक बहुत बड़ा बल दिया। लोकमान्‍य तिलक , महात्‍मा गांधी , अरबिंदो घोष , सुभाष चंद्र बोस , लाला लाजपत राय , सब, उन्‍होंने कलम हाथ में उठाई। अखबार निकाले। और उन्‍होंने अखबार के माध्‍यम से आजादी के आंदोलन को चेतना दी और हम कभी-कभी सोचें तो हमारे देश में इलाहबाद में एक स्‍वराज नाम का अखबार था। आजादी के आंदोलन का वह अख़बार था। और हर अखबार के बाद जब editorial निकलता था , editorial छपता था और editorial लिखने वाला संपादक जेल जाता था। कितना जुल्‍म होता था। तो स्‍वराज अखबार ने एक दिन advertisement निकाली। उसने कहा, हमें संपादकों की जरूरत है। तनख्‍वाह में दो सूखी रोटी, एक गिलास ठंडा पानी और editorial छपने के बाद जेल में निवास। यह ताकत देखिए जरा। यह ताकत देखिए। इलाहाबाद से निकलता हुआ स्‍वराज अखबार ने अपनी लड़ाई नहीं छोड़ी थी | उसके सारे संपादकों की जेल निश्चित थी, जेल जाते थे, संपदाकीय लिखते थे और लड़ाई लड़ते थे। हिन्‍दुस्‍तान के गणमान्‍य लोगों का उसके साथ नाता रहा।

कुछ मात्रा में तीसरा काम जो रहा वो मिशन मोड पर चला है और वो है अन्‍याय के खिलाफ आवाज़ उठाना। चाहे समाज सुधार की बात हो, चाहे स्‍वतंत्रता आंदोलन हो, चाहे अन्‍याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की बात हो हमारे देश की पत्र-पत्रिकाओं ने हर समय अपने कालखंड में कोई न कोई सकारात्‍मक भूमिका निभाई है। यह मिशन मोड, यह हमारे लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी जड़ी-बूटी है। उसको कोई चोट न पहुंचे, उसको कोई आंच न आ जाए। बाहर से भी नहीं, अंदर से भी नहीं। इतनी सजगता हमारी होनी चाहिए |

मैं समझता हूं - आजादी के आंदोलन में अब देखिए कनाडा से ग़दर अखबार निकलता था, लाला हरदयाल जी द्वारा और तीन भाषा में उस समय निकलता था- उर्दू, गुरूमुखी और गुजराती। कनाडा से वो आजादी की जंग की लड़ाई लड़ते थे। मैडम कामा, श्याम जी कृष्‍ण वर्मा.. ये लोग थे जो लंदन से पत्रकारिता के द्वारा भारत की आजादी की चेतना को जगाए रखते थे। उसके लिए प्रयास करते थे। और उस समय भीम जी खैराज वर्मा करके थे ...उन को सिंगापुर में पत्रकारिता के लिए फांसी की सजा दी गई। वह भारत की आजादी के लिए लड़ रहे थे। मेरा कहने का तात्पर्य यह है कि यह कंधे से कंधे मिला करके चलने वाली व्‍यवस्‍था है। दैनिक जागरण के माध्‍यम से इसमें जो भी योगदान दिया जा रहा है, वो योगदान राष्ट्रयाम जाग्रयाम वयम: उस मंत्र को साकार करने के लिए अविरत रूप से काम आएगा।

मैं कभी कभी कहता हूं minimum government maximum governance ...हमारे देश में एक कालखंड ऐसा था कि सरकारों को इस बात पर गर्व होता था कि हमने कितने कानून बनाए हैं। मैंने दूसरी दिशा में सोचा है | मेरा इरादा यह है कि जब मैं पांच साल मेरा कार्यकाल पूरा होगा यह, तब तक मैं रोज एक कानून खत्‍म कर सकता हूं क्या , यह इरादा है मेरा। अभी मैने काफी identify किए हैं। सैकड़ों की तादाद में already कर दिए हैं। राज्‍यों को भी मैंने आग्रह किया है। लोकतंत्र की ताकत इसमें है कि उसको कानूनों के चंगुल में जनसामान्‍य को सरकार पर dependent नहीं बनाना चाहिए।

Minimum government का मेरा मतलब यही है कि सामान्‍य मानव को डगर-डगर सरकार के भरोसे जो रहना पड़ता है, वो कम होते जाना चाहिए। और हमारे यहां तो महाभारत के अंदर से चर्चा है| अब उस ऊंचाईयों को हम पार कर पाएंगे मैं नहीं सकता इस वक्‍त, लेकिन महाभारत में शांति पर्व में इसकी चर्चा है | इसमें कहा गया है - न राजा न च राज्यवासी न च दण्डो न दंडिका सर्वे प्रजा धर्मानेव् रक्षन्ति स्मः परस्पर:... न राज्‍य होगा न राजा होगा, न दंड होगा, न दंडिका होगी अगर जनसामान्‍य अपने कर्तव्‍यों का पालन करेगा तो अपने आप कानून की व्‍यवस्‍था बनी रहेगी, यह सोच महाभारत में उस जमाने में थी ।

और हमारे यहां मूलत: लोकतंत्र के सिद्धांतों में माना गया है ‘वादे-वादे जायते तत्‍व गोधा’ यह हमारे यहां माना गया है कि जितने भिन्‍न-भिन्‍न विचारों का मंथन होता रहता है उतनी लोकतांत्रिक ताकत मजबूत होती है। यह हमारे यहां मूलभूत चिंतन रहा है। इसलिए जब हम लोकतंत्र की बात करते हैं तो हम उन मूलभूत बातों को ले करके कैसे चलें उस पर हमारा बल रहना चाहिए।

आर्थिक विकास की दृष्‍टि से हमारे देश में दो क्षेत्रों की चर्चा हमेशा चली है और सारी आर्थिक नींव उन्‍हीं दो चीजों के आस-पास चलाई गई है। एक private sector, दूसरा public sector अगर हमें विकास को जन आंदोलन बनाना है तो private sector public sector की सीमा में रहना हमारी गति को कम करता है और इसलिए मैंने एक विषय जोड़ा है उसमें - public sector, private sector and personal sector .

यह जो personal sector है यह अपने आप में एक बहुत बड़ी ताकत है। हम में से बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि हमारे देश की economy को कौन drive करता है। कभी-कभी लगता है कि यह जो 12-15 बहुत बड़े-बड़े कोरपोरेट हाऊस हैं, अरबों-खरबों रुपये की बातें आती हैं। जी नहीं, देश की economy को या देश में सबसे ज्‍यादा रोजगार देने का काम यदि कहीं हुआ है तो हमारे छोटे-छोटे लोगों का है। कोई कपड़े का व्‍यापार करता होगा छोटा-मोटा, कोई पान की दुकान पर ठेका ले करके बैठा होगा। कोई भेलपुरी-पानीपुरी का ठेका चलाता होगा, कोई धोबी होगा, कोई नाई होगा, कोई साइकिल किराये पर देने वाला होगा, कोई ऑटो रिक्‍शा वाला, यह छोटे-छोटे लोगों का कारोबार का नेटवर्क हिंदुस्तान में बहुत बड़ा है। यह जो bulk है वो एक प्रकार के middle class लेवल पर नहीं आया है। लेकिन गरीबी में नहीं है | अभी उसका मीडिल क्‍लास में जाना बाकी है, लेकिन है अपने पैरों पर खड़ा । personal sector को बहुत ताकत देता है। क्‍या ऐसी हमारी व्‍यवस्‍था न हो जो हमारे इस personal sector को हम empower करे। कानूनी दिक्‍कतों से उसको मुक्ति दिलाए। आर्थिक प्रबंधन में उसकी मदद करें। ज्‍यादातर यह लोग वह हैं बेचारों को साहूकारों के पास पैसे ले करके काम करना पड़ता है, तो अपनी income का काफी पैसा फिर सरकार के पास चला जाता है, उसी चंगुल में वो फंस जाता है।

आज वे लोग ऐसे हैं जो ज्‍यादातर करीब 70% लोग इसमें से scheduled caste, scheduled tribe और OBC हैं। गरीब हैं, पिछड़े तबके से हैं। अब वे लोग देश में करीब-करीब 12-14 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। इतनी ताकत हैं इन लोगों में । हर कोई एक को रोजगार देता है, कोई दो को देता है, कोई part-time देता हैं। लेकिन 12 से 14 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। अगर उनको थोड़ा बल दिया जाए, थोड़ी मदद दी जाए उनको थोड़ा आधुनिक करने का प्रयास किया जाए तो इनकी ताकत हैं कि 15-20 करोड़ लोगों को रोजगार देने का सामर्थ्‍य है। और इसके लिए हमने एक प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को बल दिया है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को ऐसे आगे बढ़ाया है कि कोई गारंटी की जरूरत नहीं लोगों से। वह बैंक में जायें और बैंक की जिम्‍मेदारी रहेगी उनकी मदद करना। 10 हजार, 15 हजार, 25 हजार, 50 हजार, ज्‍यादा रकम उनको चाहिए नहीं...बहुत कम रकम से वह काम कर लेते हैं अपना| अभी तो इस योजना का हो -हल्‍ला इतना शुरू नहीं हुआ है, ऐसे ही silently काम हो रहा है। लेकिन अब तक करीब 62 लाख परिवारों को करीब-करीब 42000 करोड़ रूपये उन तक पहुंचा दिए गए। और यह वो लोग हैं जो साहस भी करने को तैयार हैं और अनुभव आया है कि 99% लोग समय से पहले अपने पैसे वापस दे रहे हैं। कोई नोटिस नहीं देना पड़ रहा|

यानी हम personal sector को कितना बल दे। personal sector का एक और आज हमने पहलू उठाया है जिस प्रकार से समाज का यह तबका है जो अभी मध्‍यम वर्ग में पहुंचा नहीं है, गरीबी में रहता नहीं है ऐसी अवस्‍था है उसकी कि वो सबसे ज्‍यादा कठिन होती है | लेकिन एक और वर्ग है जो highly intellectual है -जो भारत का youth power है । उसके पास कल्‍पकता है, नया करने की ताकत है और वो देश को आधुनिक बनाने में बहुत बड़ा contribute कर सकता है। वो globally कम्‍पीट कर सकता है।

जैसे एक तबके को हमें मजबूत करना है वैसा दूसरा तबका है यह हमारी युवा शक्ति जिसमें यह विशेषताएं हैं। और इसके लिए हमने मिशन मोड पर काम लिया है। start-up India stand-up India. जब मैं start-up India की बात करता हूं तो उसमें भी मैंने दो पहलू पकड़े हैं।

हमने बैंकों को कहा कि समाज के अति सामाजिक दृष्टि से जो पीछे वर्ग के लोग हैं क्‍या एक बैंक एक की उंगली पकड़ सकती है क्‍या। एक बैंक की ब्रांच एक व्‍यक्ति को और एक महिला को बल दे सकती है | एक देश में सवा लाख ब्रांच। एक महिला को और एक गरीब को उनका अगर हाथ पकड़ ले उसको नये सिरे से ताकत दे तो ढाई लाख नये Entrepreneurs खड़े करने की हमारी ताकत है । वो छोटा काम दिया है लेकिन cumulative effect बहुत बड़ा होगा और दूसरी तरफ जो innovation करते हैं जो ग्‍लोबल competition में अपने आप को खड़ा कर सकते हैं और आज जब ग्‍लोबल मार्केट है तो प्रगति का सबसे बड़ा आधार है innovation. जो देश innovation में पीछे रह जाएगा वो आने वाले दिनों में इस दौड़ से बाहर निकल जाएगा और इसलिए innovation को अगर बल देना है तो start-up India stand-up India का मोड चलाया है। ऐसे लोगों को आर्थिक मदद मिले। उनको एक नई पॉलिसी ले करके हम आ रहे हैं। और मुझे विश्‍वास है कि भारत के नौजवानों की जो ताकत है, तो वो ताकत एक बहुत बड़ा बदलाव है।

इन सारी चीजों में आपने देखा होगा कि हम empowerment पर बल दे रहे हैं। कानूनी सरलीकरण भी हो, इससे भी empowerment होता है, आर्थिक व्‍यवस्‍थाएं सुविधाएं हो, उससे भी empowerment होता है।

Global economy के सम्बन्ध में कहां टिक सकता है? उसके लिए क्‍या सपोर्ट सिस्‍टम होना चाहिए, उस पर बल देना। यह चीजें हैं जिसके कारण आज हमारे देश में हमने काम को सुविधाजनक बनाया। जैसा मैंने शुरू में कहा था, आपको हैरानी होगी।

पार्लियामेंट चलती है कि नहीं चलती। अब डिबेट आप लोगों की कठिनाई है, आपके विषय, आपका व्यापार तो है ही है लेकिन इस बार पार्लियामेंट नहीं चलने से एक बात की तरफ ध्‍यान नहीं जा रहा| एक ऐसा कानून लटका पड़ा है और आज सुनने में आपको भी लगेगा कि भाई यह काम नहीं होना चाहिए क्‍या। हम एक कानून लाए हैं, जिसमें गरीब व्‍यक्ति जो नौकरी करता है उसके बोनस के सम्बन्ध में | अभी अगर उसकी monthly सात हजार रुपया से कम income है तो बोनस का हकदार होता है और 3500 रुपये तक उसको बोनस मिलता है। हम कानून में बदलाव लाए minimum 7000 की बजाए 21000 कर दिया जाए। monthly अगर उसकी income 21000 minimum है तो वो बोनस का हकदार बनना चाहिए जो अभी 7000 है और तीसरा 3500 बोनस की बात है उसे 7000 कर दिया जाए। यह सीधा सीधा गरीब के हित का काम है कि नहीं है ? लेकिन आज मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि पार्लियामेंट चल नहीं रही है, गरीब का हक रूका पड़ा है।

लेकिन चर्चा क्‍या होती है GST और parliament. अरे भई GST का जो होगा, सब मिलकरके जो भारत का भाग्‍य तय होगा वो होगा। लेकिन गरीबों का क्‍या? सामान्‍य मानविकी का क्‍या? और इसलिए हम संसद चलाने के लिए, इनके लिए , कह रहे हैं। लोकतंत्र में संसद से बड़ी कौन सी जगह होती है जहां पर वाद-विवाद, संवाद, विरोध सब हो सकता है। लेकिन हम उस institution को ही नकार देंगे तो फिर तो लोकतंत्र पर सवालिया निशान होगा और इसलिए मैं आज जब दैनिक जागरण में जिन विषयों का मूल ले करके आप चले हैं उस पर बात कर रहा हूं तो लोकतंत्र का मंदिर हमारी संसद है, उसकी गरिमा और सामान्‍य मानव के हितों के काम को फटाफट निर्णय करते हुए आगे बढ़ाना। यह देश के लिए बहुत आवश्यक है। उसको हम कैसे गति दें, केसे बल दें और उसको हम कैसे परिणामकारी बनायें ? बाकी तो मैं सरकार की विकास यात्रा के कई मुद्दे कह सकता हूं लेकिन मैं आज उसको छोड़ रहा हूं यही काफी हो गया ।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

प्रधानमंत्री मोदी के साथ परीक्षा पे चर्चा
Explore More
'चलता है' नहीं बल्कि बदला है, बदल रहा है, बदल सकता है... हम इस विश्वास और संकल्प के साथ आगे बढ़ें: पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

'चलता है' नहीं बल्कि बदला है, बदल रहा है, बदल सकता है... हम इस विश्वास और संकल्प के साथ आगे बढ़ें: पीएम मोदी
Nothing is further from the truth than the claim that Centre dropped ball on Covid preparedness

Media Coverage

Nothing is further from the truth than the claim that Centre dropped ball on Covid preparedness
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
साझा करें
 
Comments
इस समय हमें, डॉक्टर, एक्सपर्ट और वैज्ञानिक जो सलाह दे रहे हैं, उसे अत्यंत महत्व देना होगा : प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने टीके से संबंधित अफवाहों पर विश्वास न करने का आग्रह किया।
1 मई से 18 साल से अधिक उम्र वालों के लिए वैक्सीन उपलब्ध होने वाली है : प्रधानमंत्री मोदी
डॉक्टर, नर्सिंग स्टॉफ, लैब तकनीशियन, एम्बुलेंस ड्राइवर भगवान की तरह हैं : प्रधानमंत्री मोदी
कई युवा शहरों में आगे आए हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं : प्रधानमंत्री मोदी
वैक्सीन हम सब को लगवाना है और पूरी सावधानी भी रखनी है। ‘दवाई भी- कड़ाई भी’: प्रधानमंत्री मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | आज आपसे ‘मन की बात’, एक ऐसे समय कर रहा हूँ जब कोरोना, हम सभी के धैर्य, हम सभी के दुःख बर्दाश्त करने की सीमा की परीक्षा ले रहा है | बहुत से अपने, हमें, असमय, छोड़ कर चले गए हैं | कोरोना की पहली वेव का सफलतापूर्वक मुकाबला करने के बाद देश हौंसले से भरा हुआ था, आत्मविश्वास से भरा हुआ था, लेकिन इस तूफ़ान ने देश को झकझोर दिया है |

साथियो, बीते दिनों इस संकट से निपटने के लिए, मेरी, अलग-अलग sectors के expert के साथ, विशेषज्ञों के साथ लम्बी चर्चा हुई है | हमारी farma- industry के लोग हों, vaccine manufacturers हों oxygen के production से जुड़े लोग हों या फिर medical field के जानकार, उन्होंने, अपने महत्वपूर्ण सुझाव सरकार को दिए हैं | इस समय, हमें इस लड़ाई को जीतने के लिए, experts और वैज्ञानिक सलाह को प्राथमिकता देनी है | राज्य सरकार के प्रयत्नों को आगे बढ़ाने में भारत सरकार पूरी शक्ति से जुटी हुई है | राज्य सरकारें भी अपना दायित्व निभाने की पूरी कोशिश कर रही हैं |

साथियो, कोरोना के खिलाफ इस समय बहुत बड़ी लड़ाई देश के डॉक्टर और health workers लड़ रहे हैं | पिछले एक साल में उन्हें इस बीमारी को लेकर हर तरह के अनुभव भी हुए हैं | हमारे साथ, इस समय, मुम्बई से प्रसिद्द डॉक्टर शशांक जोशी जी जुड़ रहे हैं |

डॉक्टर शशांक जी को कोरोना के इलाज और इससे जुड़ी research का बहुत जमीनी अनुभव है, वो, Indian College of Physicians के Dean भी रह चुके हैं | आइए बात करते हैं डॉक्टर शशांक से :-

मोदी जी - नमस्कार डॉ० शशांक जी

डॉ० शशांक – नमस्कार सर |

मोदी जी - अभी कुछ दिन पहले ही आपसे बात करने का अवसर मिला था | आपके विचारों की स्पष्टता मुझे बहुत अच्छी लगी थी | मुझे लगा देश के सभी नागरिको को आपके विचार जानने चाहिए | जो बातें सुनने में आती उसकी को मैं एक सवाल के रूप में आपके सामने प्रस्तुत हूँ | डॉ० शशांक – आप लोग इस समय दिन रात जीवन रक्षा के काम में लगे हुए हैं, सबसे पहले तो मैं चाहूँगा कि आप second wave के बारे में लोगों को बताएं | medically ये कैसे अलग है और क्या-क्या सावधानी जरूरी है |

डॉ० शशांक – धन्यवाद सर, ये जो दूसरी बाढ़ (wave) आई है | ये तेजी से आई है, तो जितनी पहली बाढ़ (wave) थी उससे ये virus ज्यादा तेज चल रहा है, लेकिन अच्छी बात ये है कि उससे ज्यादा रफ़्तार से recovery भी है और मृत्यु दर काफी कम हैं | इसमें दो- तीन फर्क है, पहली तो ये युवाओं में और बच्चो में भी थोड़ा दिखाई दे रहा है | उसके जो लक्षण है, पहले जैसे लक्षण थे साँस चढ़ना, सूखा खाँसी आना, बुखार आना ये तो सब है ही और उसके साथ थोड़ा गंध जाना, स्वाद चला जाना ये भी है | और लोग थोड़े भयभीत हुए हैं | भयभीत होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है | 80-90 प्रतिशत लोगों में इसमें कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, ये mutation-Mutation जो बोलते हैं, घबराने की बात नहीं है | ये mutation होते रहते हैं जैसे हम कपड़े बदलते हैं वैसे virus भी अपना रंग बदल रहा है और इसलिए बिलकुल डरने की बात नहीं है और ये wave को हम पार कर देंगे | wave आती जाती है, और ये virus आते जाते रहता है तो यही अलग-अलग लक्षण है और medically हमको सतर्क रहना चाहिए | एक 14 से 21 दिन का ये covid का time table है इसमें वैद्य (डॉक्टर) की सलाह लेना चाहिये |

मोदी जी - डॉ० शशांक मेरे लिए भी आपने जो analysis बताया, बड़ा interesting है, मुझे कई चिट्ठियाँ मिली हैं, जिसमें treatment के बारे में भी लोगों की बहुत सी आशंकाए हैं, कुछ दवाओं की मांग बहुत ज्यादा है, इसलिए मैं चाहता हूँ कि covid के treatment के बारे में भी आप लोगों को जरुर बताएँ |

डॉ० शशांक – हां सर, clinical treatment लोग बहुत देरी से चालू करते हैं और अपने आप बीमारी से दब जायेंगी, ये भरोसे पर रहते हैं, और, मोबाईल पर आने वाली बातों पर भरोसा रखते हैं, और, अगर सरकारी दी गयी सूचना का पालन करें तो ये कठनाई का सामना नहीं आता है | तो covid में clinic treatment protocol है उसमें तीन प्रकार की तीव्रता है हल्का या mild covid, मध्यम या moderate covid और तीव्र covid जो severe covid बोलते हैं, इसके लिए है | तो जो हल्का covid है उसके लिए तो हम oxygen का monitoring करते हैं, pulse का monitoring करते है, बुखार का monitoring करते हैं, बुखार बढ़ जाता है तो कभी-कभी Paracetamol जैसी दवाई का इस्तेमाल करते हैं और अपने डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिये जो moderate covid होता है, मध्यम covid होता है या तीव्र covid होता है तो वैद्य के अपने डॉक्टर के साथ सम्पर्क करना बहुत जरूरी है | सही और सस्ती दवाईया available है | इसमें steroids जो है, ये, जान बचा सकती है, जो inhalers दे सकते हैं, tablet हम और दे सकते हैं हम, और, उसके साथ ही प्राण-वायु जो oxygen है वो देना पड़ता है और इसके लिए छोटे-छोटे इलाज़ है लेकिन अक्सर क्या हो रहा है कि एक नई experimental दवाई है, जिसका नाम है Remdesivir. ये दवाई से एक चीज़ जरुर होती है कि अस्पताल में दो–तीन दिन कम रहना पड़ता है और clinical recovery में थोड़ी सी उसकी aid होती है | ये भी दवाई कब काम करती है, जब, पहले 9-10 दिन में दी जाती है और ये पाँच ही दिन देनी पड़ती है, तो ये लोग जो दौड़ रहे हैं Remdesivir के पीछे ये बिलकुल दौड़ना नहीं चाहिए | ये दवाई का थोडा काम है, जिनको oxygen लगता है, प्राण वायु oxygen लगता है, जो अस्पताल में भर्ती होते हैं और डॉक्टर जब बताते हैं तभी लेना चाहिए | तो ये बहुत जरूरी है सब लोगों को समझना | हम प्राणायाम करेंगे, हमारे शरीर के जो lungs हैं उसको थोड़ा expand करेंगें और जो हमारी खून पतला करने वाली जो injection आती है जिसको हम heparin बोलते हैं | ये छोटी-छोटी दवाईया देंगे तो 98% लोग ठीक हो जाते हैं तो positive रहना बहुत जरूरी है | treatment protocol वैद्य की सलाह से लेना बहुत जरूरी है | और ये जो महंगी-महंगी दवाई है, उसके पीछे दौड़ने की कोई जरूरत नहीं है sir, अपने पास अच्छे इलाज चालू है प्राण-वायु oxygen है, ventilator की भी सुविधा है, सब-कुछ है सर, और, कभी-कभी ये दवाई यदि मिल जाती है तो योग्य लोगो में ही देनी चाहिए तो इसके लिए बहुत भ्रम फैला हुआ है और इसलिए ये स्पष्टीकरण देना चाहता हूँ sir कि अपने पास world की सबसे Best treatment available है आप देखेंगे कि भारत में सबसे अच्छा recovery rate है | आप यदि compare करेंगे यूरोप के लिए, अमेरिका वही से हमारे यहाँ के treatment protocol से मरीज ठीक हो रहे है सर |

मोदी जी - डॉ० शशांक आपका बहुत बहुत धन्यवाद | डॉक्टर शशांक ने जो जानकारियाँ हमें दीं, वो बहुत जरुरी हैं और हम सबके काम आएँगी |

साथियो, मैं आप सबसे आग्रह करता हूँ, आपको अगर कोई भी जानकारी चाहिए हो, कोई और आशंका हो, तो सही source से ही जानकारी लें | आपके जो family doctor हों, आस-पास के जो डॉक्टर्स हों, आप उनसे फ़ोन से संपर्क करके सलाह लीजिये | मैं देख रहा हूँ कि हमारे बहुत से डॉक्टर खुद भी ये जिम्मेदारी उठा रहे हैं | कई Doctors social media के जरिए लोगों को जानकारी दे रहे हैं | फ़ोन पर, whatsapp पर भी counseling कर रहे हैं | कई हॉस्पिटल की वेबसाइटें हैं, जहां जानकारियाँ भी उपलब्ध हैं, और वहां आप डॉक्टर्स से, परामर्श भी ले सकते हैं | ये बहुत सराहनीय है |

मेरे साथ श्रीनगर से डॉक्टर नावीद नजीर शाह जुड़ रहे हैं | डॉक्टर नावीद श्रीनगर के एक Government medical College में प्रोफेसर हैं | नावीद जी अपनी देखरेख में अनेकों कोरोना patients को ठीक कर चुके हैं और रमजान के इस पवित्र माह में डॉ नावीद अपना कार्य भी निभा रहे हैं, और, उन्होंने हमसे बातचीत के लिए समय भी निकाला है | आइये उन्हीं से बात करते हैं |

मोदी जी – नावीद जी नमस्कार |

डॉ० नावीद – नमस्कार सर |
डॉक्टर नावीद ‘मन की बात’ के हमारे श्रोताओं ने इस मुश्किल समय में panic management का सवाल उठाया है | आप अपने अनुभव से उन्हें क्या जवाब देंगें ?

डॉ० नावीद- देखिए जब कोरोना शुरू हुआ तो कश्मीर में जो सबसे पहला hospital designate हुआ As Covid hospital वो हमारा city hospital था | जो medical college के under में आता है तो उस टाइम एक खौफ़ का माहौल था | लोगो में तो था ही वो समझते थे शायद covid का infection अगर किसी को हो जाता है तो death sentence माना जायेगा ये, और ऐसे में हमारे हस्पताल में डॉक्टर साहिबान या para-medical staff काम करते थे, उनमें भी एक खौफ़ का माहौल था कि हम इन patient को कैसे face करेंगे हमें infection होने का ख़तरा तो नहीं है | लेकिन जो टाइम गुजरा हमने भी देखा कि अगर पूरी तरीके से हम जो protective gear पहने एतिहादी तदवीर जो है, उन पर अमल करें तो हम भी safe रह सकते हैं और हमारा जो बाकी staff है वो भी safe रह सकता है और आगे-आगे हम देखते गये मरीज या कुछ लोग बीमार थे जो asymptomatic, जिनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे | हमने देखा करीब करीब 90-95% से ज्यादा जो मरीज हैं वो without in medication भी ठीक हो जाते हैं तो वक्त जैसे गुजरता गया लोगों में जो कोरोना का एक डर था वो बहुत कम हो गया | आज की बात जो ये second wave जो इस टाइम हमारी आयी है इस कोरोना में इस टाइम भी हमें panic होने की जरूरत नहीं है | इस मौके पर भी जो protective measures है, जो SOPs है अगर उन पर हम अमल करेंगें जैसे मास्क पहनना, hand sanitizer का use करना, उसके अलावा physical distance maintain करना या social gathering avoid करे तो हम अपना रोजमर्रा का काम भी बखूबी निभा सकते हैं और इस बीमारी से protection भी पा सकते हैं |

मोदी जी - डॉ० नावीद vaccine को लेकर भी लोगो के कई सारे सवाल है, जैसे कि vaccine से कितनी सुरक्षा मिलेगी, vaccine के बाद कितना आश्वस्त रह सकते हैं ? आप कुछ बात इसमें बतायें श्रोताओं को बहुत लाभ होगा |

डॉ० नावीद – जब हम कोरोना का infection सामने आया तब से आज तक हमारे पास covid 19 के लिए कोई effective treatment available नहीं है, तो हम इस बीमारी को fight, दो ही चीजों से कर सकते हैं एक तो protective major और हम पहले से ही कह रहे थे कि अगर कोई effective vaccine हमारे पास आए तो वो हमें इस बीमारी से निजाद दिला सकता है और हमारे मुल्क में दो vaccine इस टाइम available है, Covaxin and Covishield है जो यहीं पर बना हुआ vaccine है | और companies भी जो अपनी trials की है तो उसमे भी देखा गया है कि इसकी efficacy जो है वो 60% से ज्यादा है, और अगर हम, जम्मू कश्मीर की बात करें तो हमारी UT में अभी तक 15 से 16 लाख तक लोगों ने अभी ये vaccine लगाया है | हां social media में काफी इसके जो misconception या myths हैं, इसमें आये थे कि ये-ये side effect हैं, अभी तक हमारे जो भी यहाँ पर vaccine लगे हैं कोई side effect उनमें नहीं पाया गया है | सिर्फ, जो, आम हर किसी vaccine के साथ, associated होता है, किसी को बुखार आना, पूरे बदन में दर्द या local site जहाँ पर injection लगता है वहा पर pain होना ऐसे ही side effects हमने हर मरीज में देखे हैं जो कोई gross हमने कोई adverse effect हमने नहीं देखा है | और हां दूसरी बात लोगो में ये भी आशंका थी कि कुछ लोग after vaccination यानि vaccine टीकाकरण के बाद positive हो गये इसमें companies से ही guidelines है कि उसमें अगर किसी को टीका लगा है | उसके बाद उसमें infection हो सकता है वो positive हो सकता है | लेकिन जो बीमारी की severity है, यानि बीमारी की सिद्दत्त जो है, उन मरीज में, उतनी नहीं होगी यानि की वो positive हो सकते हैं लेकिन जो बीमारी है वो एक जानलेवा बीमारी उनमें साबित नहीं हो सकती, इसलिए जो भी ये misconception हैं vaccine के बारे में वो हमें दिमाग से निकालने चाहिए और जिस-जिस की बारी आयी क्योंकि 1 मई से हमारे पूरे मुल्क में जो भी 18 साल से ज्यादा की उम्र है उनको vaccine लगाने का कार्यक्रम शुरू होगा तो लोगों से अपील यही करेंगे आप आए vaccine लगवाए और अपने आप को भी protect करें और overall हमारी society और हमारी community इससे protect हो जायगी Covid 19 के infection से |

मोदी जी - डॉ० नावीद आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, और आपको रमजान के पवित्र महीने की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ |

डॉ० नावीद – बहुत-बहुत शुक्रिया |

मोदी जी : साथियो, कोरोना के इस संकट काल में Vaccine की अहमियत सभी को पता चल रही है, इसलिए, मेरा आग्रह है कि Vaccine को लेकर किसी भी अफ़वाह में न आयें | आप सभी को मालूम भी होगा कि भारत सरकार की तरफ से सभी राज्य सरकारों को free vaccine भेजी गई है जिसका लाभ 45 साल की उम्र के ऊपर के लोग ले सकते हैं | अब तो 1 मई से देश में 18 साल के ऊपर के हर व्यक्ति के लिए Vaccine उपलब्ध होने वाली है | अब देश का Corporate Sector, कम्पनियाँ भी अपने कर्मचारियों को Vaccine लगाने के अभियान में भागीदारी निभा पायेगी | मुझे ये भी कहना है कि भारत सरकार की तरफ से मुफ़्त Vaccine का जो कार्यक्रम अभी चल रहा है, वो, आगे भी चलता रहेगा | मेरा राज्यों से भी आग्रह है, कि, वो भारत सरकार के इस मुफ़्त Vaccine अभियान का लाभ अपने राज्य के ज्यादा-से-ज्यादा लोगों तक पहुँचाएँ |

साथियो, हम सब जानते हैं कि बीमारी में हमारे लिए अपनी, अपने परिवार की देखभाल करना, मानसिक तौर पर कितना मुश्किल होता है, लेकिन, हमारे अस्पतालों के Nursing Staff को तो, यही काम, लगातार, कितने ही मरीजों के लिए एक साथ करना होता है| ये सेवा-भाव हमारे समाज की बहुत बड़ी ताकत है | Nursing Staff द्वारा की जा रही सेवा, और परिश्रम के बारे में, सबसे अच्छे से तो कोई Nurse ही बता सकती है | इसलिए मैंने रायपुर के डॉक्टर बी.आर. अम्बेडकर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में अपनी सेवाएँ दे रहीं sister भावना ध्रुव जी को ‘मन की बात’ में आमंत्रित किया है, वो, अनेकों कोरोना मरीजों की देखभाल कर रही हैं | आइये ! उन्हीं से बात करते हैं –

मोदी जी:- नमस्कार भावना जी !

भावना:- आदरणीय प्रधानमंत्री जी, नमस्कार !

मोदी जी:- भावना जी...

भावना:- Yes sir

मोदी जी:- ‘मन की बात’ सुनने वालों को आप जरुर ये बताइए कि आपके परिवार में इतनी सारी जिम्मेवारियाँ इतने सारे यानी multitask और उसके बाद भी आप कोरोना के मरीजों के साथ काम कर रही हैं | कोरोना के मरीजों के साथ आपका जो अनुभव रहा, वो जरुर देशवासी सुनना चाहेंगे क्योंकि sister जो होती है, nurses जो होती हैं patient के सबसे निकट होती हैं और सबसे लम्बे समय तक होती हैं तो वो हर चीज़ को बड़ी बारीकी से समझ सकती हैं जी बताइए |

भावना:- जी सर, मेरा total experience COVID में सर, 2 month का है सर | हम 14 days duty करते हैं और 14 days के बाद हमें rest दिया जाता है | फिर 2 महीने बाद हमारी ये COVID duties repeat होता है सर | जब सबसे पहले मेरी COVID duty लगी तो सबसे पहले मैं अपने family members को ये COVID duty की बात share करी | ये मई की बात है और मैं, ये, जैसे ही मैंने share किया सब के सब डर गए, घबरा गए मुझसे, कहने लगे कि बेटा ठीक से काम करना, एक emotional situation था सर | बीच में जब, मेरी बेटी मुझसे पूछी, mumma आप COVID duty जा रहे हो तो उस समय बहुत ही ज्यादा मेरे लिए emotional moment था, लेकिन, जब मैं COVID patient के पास गयी तो मैं एक जिम्मेदारी घर में छोड़ कर गई और जब मैं COVID patient से मिली सर, तो वो उनसे और ज्यादा घबराये हुए थे, COVID के नाम से सारे patient इतना डरे हुए थे सर, कि, उनको समझ में ही नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है, हम आगे क्या करेंगे | हम उनके डर को दूर करने के लिए उनसे बहुत अच्छे से healthy environment दिए सर उन्हें | हमें जब ये COVID duty करने को कहा गया तो सर सबसे पहले हमको PPE Kit पहनने के लिए कहा गया सर, जो कि बहुत ही कठिन है, PPE Kit को पहन करके duty करना | सर ये बहुत tough था हमारे लिए, मैंने 2 month की duty में हर जगह 14-14 दिन duty की ward में, ICU में, Isolation में सर |

मोदी:- यानी कुल मिला कर तो आप एक साल से इसी काम को कर रही हैं |

भावना:- Yes sir, वहाँ जाने से पहले मुझे नहीं पता था कि मेरे colleagues कौन है | हम एक team member की तरह काम किये सर, उनका जो भी problem थे, उनको share किये, हम जाने patient के बारे में और उनका stigma दूर किये सर, कई लोग ऐसे थे सर कि जो COVID के नाम से ही डरते थे | वो सारे symptoms उनमें आते थे जब हम history लेते थे उनसे, लेकिन वो डर के कारण, वो अपना टेस्ट नहीं करवा पाते थे, तो हम उनको समझाते थे, और सर, जब severity बढ़ जाती थी तब उनका lungs already infected हो चुका रहता था तब उनको ICU की जरुरत रहती थी तब वो आते थे और साथ में उनकी पूरी family आती थी | तो ऐसा 1-2 case हमनें देखा सर और ऐसा भी नहीं कि हर एक age group के साथ काम किया सर हमने | जिसमें छोटे बच्चे थे, महिला, पुरुष, बुजुर्ग, सारे तरह के patient थे सर | उन सबसे हमने बात करी तो सब ने कहा कि हम डर की वजह से नहीं आ पाए, सबका यही हमें answer मिला सर | तो हम उनको समझाए सर, कि, डर कुछ नहीं होता है आप हमारा साथ दीजिये हम आपका साथ देंगे बस आप जो भी protocols है उसे follow कीजिये बस हम इतना उनसे कर पाए सर |

मोदी जी:- भावना जी, मुझे बहुत अच्छा लगा आपसे बात कर करके, आपने काफी अच्छी जानकारियाँ दी हैं | अपने स्वयं के अनुभव से दी हैं, तो जरुर देशवासियों को, इससे एक, positivity का message जाएगा | आपका बहुत-बहुत धन्यवाद भावना जी !

भावना:- Thank you so much sir... Thank you so much... जय हिन्द सर |

मोदी जी:- जय हिन्द !

भावना जी और Nursing Staff के आप जैसे हजारों-लाखों भाई-बहन बखूबी अपना कर्त्तव्य निभा रहे हैं | ये हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है | आप अपने स्वास्थ्य पर भी खूब ध्यान दीजिये | अपने परिवार का भी ध्यान रखिये |
साथियो, हमारे साथ, इस समय बेंगलुरु से Sister सुरेखा जी भी जुड़ी हुई हैं | सुरेखा जी K.C. General Hospital में Senior Nursing Officer हैं | आइये ! उनके अनुभव भी जानते हैं –

मोदी जी:- नमस्ते सुरेखा जी !

सुरेखा:- I am really proud and honoured sir to speak to Prime Minister of our country.

Modi ji:-Surekha ji, you along with all fellow nurses and hospital staff are doing excellent work. India is thankful to you all. What is your message for the citizens in this fight against COVID-19.

Surekha:- Yes sir... Being a responsible citizen I would really like to tell something like please be humble to your neighbors and early testing and proper tracking help us to reduce the mortality rate and moreover please if you find any symptoms isolate yourself and consult nearby doctors and get treated as early as possible. So, community need to know awareness about this disease and be positive, don’t be panic and don’t be stressed out. It worsens the condition of the patient. We are thankful to our Government proud to have a vaccine also and I am already vaccinated with my own experience I wanted to tell the citizens of India, no vaccine provides 100% protection immediately. It takes time to build immunity. Please don’t be scared to get vaccinated. Please vaccinate yourself; there is a minimal side effects and I want to deliver the message like, stay at home, stay healthy, avoid contact with the people who are sick and avoid touching the nose, eyes and mouth unnecessarily. Please practice physically distancing, wear mask properly, wash your hands regularly and home remedies you can practice in the house. Please drink Ayurvedic Kadha (आयुर्वेदिक काढ़ा), take steam inhalation and mouth gargling everyday and breathing exercise also you can do it. And one more thing last and not the least please have a sympathy towards frontline workers and professionals. We need your support and co-operation. We will fight together. We will get through with the pandemic. This is what my message to the people sir.

Modi ji:- Thank you Surekha ji.

Surekha:- Thank you sir.

सुरेखा जी, वाकई, आप बहुत कठिन समय में मोर्चा संभाले हुए हैं | आप अपना ध्यान रखिये ! आपके परिवार को भी मेरी बहुत-बहुत शुभकामनायें हैं | मैं, देश के लोगों से भी आग्रह करूँगा कि जैसा भावना जी, सुरेखा जी ने, अपने अनुभव से बताया है | कोरोना से लड़ने के लिए Positive Spirit बहुत ज्यादा जरुरी है और देशवासियों को इसे बनाए रखना है |

साथियो, Doctors और Nursing Staff के साथ-साथ इस समय Lab-Technicians और Ambulance Drivers जैसे Frontline Workers भी भगवान की तरह ही काम कर रहे हैं | जब कोई Ambulance किसी मरीज तक पहुँचती हैं तो उन्हें Ambulance Driver देवदूत जैसा ही लगता है | इन सबकी सेवाओं के बारे में, इनके अनुभव के बारे में, देश को जरुर जानना चाहिए | मेरे साथ अभी ऐसे ही एक सज्जन हैं – श्रीमान प्रेम वर्मा जी, जो कि एक Ambulance Driver हैं, जैसा कि इनके नाम से ही पता चलता है | प्रेम वर्मा जी अपने काम को, अपने कर्तव्य को, पूरे प्रेम और लगन से करते हैं | आइये ! उनसे बात करते हैं –

मोदी जी – नमस्ते प्रेम जी |

प्रेम जी – नमस्ते सर जी |

मोदी जी – भाई ! प्रेम |

प्रेम जी – हाँ जी सर |

मोदी जी – आप अपने कार्य के बारे में |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – जरा विस्तार से बताइये | आपका जो अनुभव है, वो भी बताइये |

प्रेम जी – मैं CATS Ambulance में driver की post पर हूँ और जैसे ही Control हमें एक tab पर call देता है | 102 से जो call आती है हम move करते हैं patient के पास | हम patient को जाते हैं, उनके पास, तो दो साल से हम continue कर रहे हैं ये काम | अपना kit पहन कर, अपने gloves, mask पहन कर patient को, जहाँ वो drop करने के लिए कहते हैं, जो भी hospital में, हम जल्दी से जल्दी उनको drop करते हैं |

मोदी जी – आपको तो vaccine की दोनों dose लग गई होंगी |
प्रेम जी – बिल्कुल सर |

मोदी जी – तो दूसरे लोगों को vaccine लगवायें | इसके लिए आपका क्या सन्देश है ?

प्रेम जी – सर बिल्कुल | सभी को ये dose लगवाना चाहिए और अच्छी ही है family के लिए भी | अब मुझे मेरी mummy कहती हैं ये नौकरी छोड़ दो | मैंने बोला, मम्मी, अगर मैं भी नौकरी छोड़ कर बैठ जाऊंगा तो सब और patient को कैसे कौन छोड़ने जाएगा ? क्योंकि सब इस कोरोना काल में सब भाग रहे हैं | सब नौकरी छोड़-छोड़ कर जा रहे हैं | mummy भी मुझे बोलती हैं कि बेटा वो नौकरी छोड़ दे | मैंने बोला नहीं mummy मैं नौकरी नहीं छोडूंगा |

मोदी जी – प्रेम जी माँ को दुखी मत करना | माँ को समझाना |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – लेकिन ये जो आपने माँ वाली बात बताई न

प्रेम जी – हाँ जी |

मोदी जी – ये बहुत ही छूने वाली है |

प्रेम जी – हाँ जी |

मोदी जी – आपकी माता जी को भी |

प्रेम जी – हाँ जी |

मोदी जी – मेरा प्रणाम कहियेगा |

प्रेम जी – बिलकुल

मोदी जी – हाँ

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – और प्रेम जी मैं आपके माध्यम से

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – ये ambulance चलाने वाले हमारे driver भी

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – कितना बड़ा risk लेकर के काम कर रहे हैं |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – और हर एक की माँ क्या सोचती है ?

प्रेम जी – बिलकुल सर

मोदी जी – ये बात जब श्रोताओं तक पहुचेगी

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – मैं जरुर मानता हूँ कि उनको भी दिल को छू जाएगी |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – प्रेम जी बहुत-बहुत धन्यवाद | आप एक प्रकार से प्रेम की गंगा बहा रहे हैं |

प्रेम जी – धन्यवाद सर जी

मोदी जी – धन्यवाद भैया

प्रेम जी – धन्यवाद |

साथियो, प्रेम वर्मा जी और इन जैसे हजारों लोग, आज अपना जीवन दाव पर लगाकर, लोगों की सेवा कर रहे हैं | कोरोना के खिलाफ़ इस लड़ाई में जितने भी जीवन बच रहे हैं उसमें Ambulance Drivers का भी बहुत बड़ा योगदान है | प्रेम जी आपको और देशभर में आपके सभी साथियों को मैं बहुत-बहुत साधुवाद देता हूँ | आप समय पर पहुँचते रहिये, जीवन बचाते रहिये |

मेरे प्यारे देशवासियो, ये सही है कि, कोरोना से बहुत लोग संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन, कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या भी उतनी ही ज्यादा है | गुरुग्राम की प्रीती चतुर्वेदी जी ने भी हाल ही में कोरोना को हराया है| प्रीती जी ‘मन की बात’ में हमारे साथ जुड़ रही हैं| उनके अनुभव हम सब के काफ़ी काम आयेंगें |

मोदी जी – प्रीति जी नमस्ते

प्रीति – नमस्ते सर | कैसे है आप ?

मोदी जी – मैं ठीक हूँ जी | सबसे पहले तो मैं आपकी covid-19 से

प्रीति – जी

मोदी जी – सफलतापूर्वक लड़ने के लिए

प्रीति – जी

मोदी जी – सराहना करूँगा

प्रीति – Thank you so much sir

मोदी जी – मेरी कामना है आपका स्वास्थ्य और तेजी से बेहतर हो |

प्रीति – जी शुक्रिया सर

मोदी जी – प्रीति जी

प्रीति –हाँ जी सर

मोदी जी – ये सिर्फ आपके पूरे wave में आप ही का नंबर लगा है कि परिवार के और सदस्य भी इसमें फंस गए है |

प्रीति – नहीं-नहीं सर मैं अकेली ही हुई थी |

मोदी जी – चलिये भगवान की कृपा रही | अच्छा मैं चाहूँगा

प्रीति – हाँजी सर |

मोदी जी – कि आप अपने इस पीड़ा की अवस्था के कुछ अनुभव अगर सांझा करें तो शायद जो श्रोता है उनको भी ऐसे समय कैसे अपने आप को संभालना चाहिए इसका मार्गदर्शन मिलेगा |

प्रीति – जी सर, जरूर | सर initially stage में मेरे को बहुत ज्यादा lethargy, मतलब बहुत सुस्ती-सुस्ती आया और उसके बाद ना मेरे गले में थोड़ी सी खराश होने लगी | तो उसके बाद ना मेरा थोड़ा सा मुझे लगा कि ये symptoms है तो मैंने test कराने के लिए test कराया | दूसरे दिन report आते ही जैसे ही मुझे positive हुआ, मैंने अपने आप को quarantine कर लिया | एक Room में isolate करके doctors के साथ consult करा, मैंने, उनसे | उनकी medication start कर दी |

मोदी जी – तो आपका परिवार बच गया आपके quick action के कारण |

प्रीति – जी सर | वो बाकी सबका भी बाद में कराया था | बाकी सब negative थे | मैं ही positive थी | उससे पहले मैंने अपने आप को isolate कर लिया था एक room के अन्दर | अपनी जरुरत का सारा सामान रख कर उसको मैं अपने आप अन्दर कमरे में बंद हो गई थी | और उसके साथ-साथ मैंने फिर doctor के साथ medication start कर दी | सर मैंने medication के साथ-साथ ना मैंने, योगा, आयुर्वेदिक, और, मैं ये सब start किया और साथ में ना, मैंने, काढ़ा भी लेना शुरू कर दिया था | Immunity boost करने के लिए और सर मैं दिन में मतलब जब भी अपना भोजन लेती थी उसमे मैंने healthy food जो कि protein rich diet थी, वो लिया मैंने | मैंने बहुत सारा fluid लिया मैंने steam लिया gargle किया और hot water लिया | मैंने दिन भर में इन सब चीज़ों को ही अपने जीवन में लेती आई daily | और सर इन दिनों में ना, सबसे बड़ी बात में बोलना चाहूंगी घबराना तो बिलकुल नहीं है | बहुत mentally strong करना है जिसके लिए मुझे योगा ने बहुत ज्यादा, breathing exercise करती थी अच्छा लगता था उसको करने से मुझे |

मोदी जी – हाँ | अच्छा प्रीति जी जब अब आपका process पूरा हो गया | आप संकट से बाहर निकल आई |

प्रीति – हाँ जी

मोदी जी – अब आपका test भी negative आ गया है |

प्रीति – हाँ जी सर

मोदी जी – तो फिर आप अपने स्वास्थ्य के लिए इसकी देखभाल के लिए अभी क्या कर रही हैं ?

प्रीति – सर मैंने एक तो योग बंद नहीं किया है |

मोदी जी – हाँ

प्रीति – ठीक है मैंने काढ़ा अभी भी ले रही हूँ और अपनी immunity boost रखने के लिए मैं अच्छा healthy food खा रही हूँ अभी |

मोदी जी – हाँ

प्रीति – जो कि मैं बहुत अपने आप को neglect कर लेती थी उस पर बहुत ध्यान दे रही हूँ मैं |

मोदी जी – धन्यवाद प्रीति जी |

प्रीति – Thank you so much sir. 

मोदी जी - आपने जो जानकारी दी मुझे लगता है ये बहुत सारे लोगों के काम आयेगी | आप स्वस्थ रहें, आपके परिवार के लोग स्वस्थ रहें, मेरी आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें |

मेरे प्यारे देशवासियो, जैसे आज हमारे Medical Field के लोग, Frontline Workers दिन-रात सेवा कार्यों में लगे हैं | वैसे ही समाज के अन्य लोग भी, इस समय, पीछे नहीं हैं | देश एक बार फिर एकजुट होकर कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई लड़ रहा है | इन दिनों मैं देख रहा हूँ कोई Quarantine में रह रहे परिवारों के लिए दवा पहुँचा रहा है, कोई, सब्जियाँ, दूध, फल आदि पहुँचा रहा है | कोई Ambulance की मुफ़्त सेवाएँ मरीजों को दे रहा है | देश के अलग-अलग कोने में इस चुनौतीपूर्ण समय में भी स्वयं सेवी संगठन आगे आकर दूसरों की मदद के लिए जो भी कर सकते हैं वो करने का प्रयास कर रहे हैं | इस बार, गाँवों में भी नई जागरूकता देखी जा रही है | कोविड नियमों का सख्ती से पालन करते हुए लोग अपने गाँव की कोरोना से रक्षा कर रहे हैं, जो लोग, बाहर से आ रहे हैं उनके लिए सही व्यवस्थायें भी बनाई जा रही हैं | शहरों में भी कई नौजवान सामने आये हैं, जो अपने क्षेत्र में, कोरोना के case न बढ़े, इसके लिए, स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं, यानि एक तरफ देश, दिन-रात अस्पतालों, Ventilators और दवाईयों के लिए काम कर रहा है, तो दूसरी ओर, देशवासी भी, जी-जान से कोरोना की चुनौती का मुकाबला कर रहें हैं | ये भावना हमें कितनी ताकत देती है, कितना विश्वास देती है | ये जो भी प्रयास हो रहे हैं, समाज की बहुत बड़ी सेवा है | ये समाज की शक्ति बढ़ाते हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो, आज ‘मन की बात’ की पूरी चर्चा को हमने कोरोना महामारी पर ही रखा, क्योंकि, आज, हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, इस बीमारी को हराना | आज भगवान महावीर जयंती भी है | इस अवसर पर मैं सभी देशवासियों को शुभकामनायें देता हूँ | भगवान महावीर के सन्देश, हमें, तप और आत्म संयम की प्रेरणा देते हैं | अभी रमजान का पवित्र महीना भी चल रहा है | आगे बुद्ध पूर्णिमा भी है | गुरु तेगबहादुर जी का 400वाँ प्रकाश पर्व भी है | एक महत्वपूर्ण दिन पोचिशे बोइशाक - टैगोर जयंती का है | ये सभी हमें प्रेरणा देते हैं अपने कर्तव्यों को निभाने की | एक नागरिक के तौर पर हम अपने जीवन में जितनी कुशलता से अपने कर्तव्यों को निभायेंगे | संकट से मुक्त होकर भविष्य के रास्ते पर उतनी ही तेजी से आगे बढ़ेंगे | इसी कामना के साथ मैं आप सभी से एक बार फिर आग्रह करता हूँ कि Vaccine हम सब को लगवाना है और पूरी सावधानी भी रखनी है | ‘दवाई भी - कड़ाई भी’ | इस मंत्र को कभी भी नहीं भूलना है | हम जल्द ही साथ मिलकर इस आपदा से बाहर आयेंगे | इसी विश्वास के साथ आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद | नमस्कार |