लोकतंत्र की हमारी परिभाषा को केवल चुनाव और सरकारों तक सीमित नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र ‘जन भागीदारी’ से मजबूत होता है: प्रधानमंत्री 
जन भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाता है: प्रधानमंत्री मोदी 
महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम को ‘जन आंदोलन’ में परिवर्तित कर दिया: प्रधानमंत्री मोदी 
मैं भारत की विकास यात्रा को ‘जन आंदोलन’ बनाना चाहता हूँ; प्रत्येक को अहसास होना चाहिए कि वह भारत की प्रगति के लिए काम कर रहा है: पीएम मोदी 
‘स्वच्छ भारत’  एक जन आंदोलन में बदल गया है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 
‘मनतंत्र’ और ‘मनीतंत्र’ लोकतंत्र के लिए ख़तरा: प्रधानमंत्री मोदी  
अपने आप को निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों तक सीमित कर देना हमारे विकास को सीमित कर देगा। पर्सनल सेक्टर विशेष बल का स्रोत: प्रधानमंत्री 
लघु उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है और इससे देश भर में कई लोगों को रोजगार मिल रहा है: प्रधानमंत्री 
हमारी सरकार ने लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ‘मुद्रा बैंक योजना’ शुरू की है: प्रधानमंत्री मोदी

श्री संजय गुप्‍ता जी, श्री प्रशांत मिश्रा जी, उपस्थित सभी गणमान्‍य महानुभाव जागरण परिवार के सभी स्‍वज़न...

हमारे यहां कहा जाता है कि राष्ट्रयाम जाग्रयाम वयम: eternal vigilance is the price of liberty और आप तो स्‍वयं दैनिक जागरण कर रहे हैं। कभी-कभी यह भी लगता है कि, कि क्‍या लोग 24 घंटे में सो जाते हैं, कि फिर 24 घंटे के बाद जगाना पड़ता है। लेकिन लोकतंत्र की सबसे पहली अनिवार्यता है और वो है जागरूकता और उस जागरूकता के लिए हर प्रकार के प्रयास निरन्‍तर आवश्‍यक होते हैं। अब जितनी मात्रा में जागरूकता बढ़ती है, उतनी मात्रा में समस्‍याओं के समाधान के रास्‍ते अधिक स्‍पष्‍ट और निखरते हैं, जन भागीदारी सहज बनती है और जहां जन-भागीदारी का तत्व बढ़ता है, उतनी ही लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍थाएं मजबूत होती हैं, विकास की यात्रा को गति आती है और लक्ष्‍य प्राप्ति निश्चित हो जाती है।

उस अर्थ में लोकतंत्र की यह पहली आवश्‍यकता है निरन्तर जागरण| जाने अनजाने में यह क्‍यों न हो लेकिन हमारे देश में लोकतंत्र का एक सीमित अर्थ रहा और वो रहा, चुनाव, मतदान और सरकार की पसंद| ऐसा लगने लगा मतदाताओं को कि चुनाव आया है तो अगले पांच साल के लिए किसी को कॉन्‍ट्रेक्‍ट देना है, जो हमारी समस्‍याओं का समाधान कर देगा और अगर पांच साल में वो कॉन्‍ट्रेक्‍ट में fail हो गया तो दूसरे को ले आएंगे। यह सबसे बड़ी हमारे सामने चुनौती भी है और कमी भी । लोकतंत्र अगर मतदान तक सीमित रह जाता है, सरकार के चयन तक सीमित रह जाता है, तो वो लोकतंत्र पंगु हो जाता है।

लोकतंत्र सामर्थ्‍यवान तब बनता है, जब जन-भागीदारी बढ़ती है और इसलिए जन-भागीदारी को हम जितना बढायें| अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। अगर हम हमारे देश के आजादी के आंदोलन की ओर देखें- ऐसा नहीं है कि इस देश में आजादी के लिए मरने वालों की कोई कमी रही। देश जब से गुलाम हुआ तब से कोई दशक ऐसा नहीं गया होगा कि जहां देश के लिए मर मिटने वालों ने इतिहास में अपना नाम अंकित न किया हो। लेकिन होता क्‍या था , वे आते थे, उनका एक जब्‍बा होता था और वो मर मिट जाते थे। फिर कुछ साल बाद स्थिरता आ जाती थी फिर कोई पैदा हो जाता था। फिर निकल पड़ता था। फिर उसकी आदत हो जाती थी। आजादी के आंदोलन के लिए मरने वालों का तांता अविरत था, निरंतर था। लेकिन गांधी जी ने जो बहुत बड़ा बदलाव लाया वो यह था कि उन्‍होंने इस आजादी की ललक को जन आंदोलन में परिवर्तित कर दिया। उन्‍होंने सामान्‍य मानविकी को , आजादी के आंदोलन का सिपाही बना दिया था।

एक आध वीर शहीद तैयार होता था, तो अंग्रेजों के लिए निपटना बड़ा सरल था। लेकिन यह जो एक जन भावना का प्रबल, आक्रोश प्रकट होने लगा, अंग्रेजों के लिए उसको समझना भी मुश्किल था | उसको हैंडल कैसे करना है यह भी मुश्किल था और महात्‍मा गांधी ने इसको इतना सरल बना दिया था कि देश को आजादी चाहिए न , अच्‍छा तुम ऐसा करो तकली ले करके, रूई ले करके, धागा बनाना शुरू कर दो, देश को आजादी आ जाएगी। किसी को कहते थे कि आपको आजादी का सिपाही बनना है तो अगर तुम्‍हारे गांव में निरक्षर है उनको शिक्षा देने का काम करो, आजादी आ जाएगी। किसी को कहते थे तुम झाडू लगाओ, आजादी आ जाएगी।

उन्‍होंने हर सामाजिक काम को स्वयं से जो भी अलग होता था उसको उन्‍होंने राष्‍ट्र की आवश्‍यकता के साथ जोड़ दिया और जन-आंदोलन में परिवर्तित कर दिया। सिर्फ सत्‍याग्रह ही जन-आंदोलन नहीं था। समाज सुधार का कोई भी काम एक प्रकार से आजादी के आंदोलन का एक हिस्‍सा बना दिया गया था और उसका परिणाम यह आया कि देश के हर कोने में हर समय कुछ न कुछ चलता था। कोई कल्‍पना कर सकता है ? अगर आज बहुत बड़ा मैनेजमेंट expert होगा कोई बहुत बड़ा आंदोलन शास्‍त्र का जानकार होगा। उसको कहा जाए कि भाई एक मुटठी भर नमक उठाने से कोई सल्‍तनत चली जा सकती है यह thesis बना कर दो हमको, मैं नहीं मान सकता हूं कि कोई कल्‍पना कर सकता है कि एक मुटठी भर नमक की बात एक सल्‍तनत को नीचे गिराने का एक कारण बन सकती है। यह क्‍यों हुआ , यह इसलिए हुआ कि उन्‍होंने आजादी के आंदोलन को जन-जन का आंदोलन बना दिया था।

आजादी के बाद अगर देश ने अपनी विकास यात्रा का मॉडल गांधी से प्रेरणा ले करके जन भागीदारी वाली विकास यात्रा, जन आंदोलन वाली विकास यात्रा, उसको अगर तवज्जो दी होती तो आज जो बन गया है सब कुछ सरकार करेगी| कभी-कभी तो अनुभव ऐसा आता है कि किसी गांव में गड्ढ़ा हो, रोड पर और वो पांच सौ रूपये के खर्च से वो गड्ढ़ा भरा जा सकता हो लेकिन गांव का पंचायत का प्रधान गांव के दो चार और मुखिया किराये पर जीप खरीदेंगे लेंगे , सात सौ रूपया जीप का किराया देंगे और state headquarter पर जाएंगे और memorendum देंगे कि हमारे गांव में गड्ढ़ा है उस गड्ढे को भरने के लिए कुछ करो। यह स्थिति बन चुकी है| सबकुछ सरकार करेगी।

गांधी जी का model था- सारी सबकुछ जनता करेगी। आजादी के बाद जन-भागीदारी से अगर विकास यात्रा का मॉडल बनाया गया होता तो शायद हम सरकार के भरोसे जिस गति से चले हैं अगर जनता के भरोसे चलते तो उसकी गति हजारों गुना तेज होती | उसका व्‍याप, उसकी गहराई अकल्पित होती और इसलिए आज समय की मांग है कि हम भारत की विकास यात्रा को development को , एक जन-आंदोलन बनाएं।

समाज के हर व्‍यक्ति को लगना चाहिए कि मैं अगर स्‍कूल में टीचर हूं। मैं क्‍लास में पूरा समय जब पढ़ाता हूं, अच्‍छे से पढ़ाता हूं, मतलब कि मैं मेरे देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए काम कर रहा हूं। मैं अगर रेलवे का कर्मचारी हूं और मेरे पास जिम्‍मा है रेल समय पर चले। मैं इस काम को ठीक से करता हूं| रेल समय पर चलती है। मतलब मैं देश की बहुत बड़ी सेवा कर रहा हूं। मैं देश को आगे ले जाने की जिम्‍मेदारी निभा रहा हूं। हम अपने कर्तव्य को अपने काम को , राष्‍ट्र को आगे ले जाने का दायित्‍व मैं निभा रहा हूं। इस प्रकार से अगर हम जोड़ते हैं तो आप देखिए हर चीज का अपना एक संतोष मिलता है।

इन दिनों स्‍वच्‍छ भारत अभियान किस प्रकार से जन आंदोलन का रूप ले रहा है। वैसे यह काम ऐसा है कि किसी भी सरकार और राजनेता के लिए इसको छूना मतलब सबसे बड़ा संकट मोल लेने वाला विषय है, क्‍योंकि कितना ही करने के बाद दैनिक जागरण के फ्रंट पेज पर तस्‍वीर छप सकती है कि मोदी बातें बड़ी-बड़ी करता है, लेकिन यहां कूड़े-कचरे का ढेर पड़ा हुआ है। यह संभव है, लेकिन क्‍या इस देश में माहौल बनाने की आवश्‍यकता नहीं है। और अनुभव यह आया कि आज देश का सामान्‍य वर्ग, यहां जो बैठे हैं आपके परिवार में अगर पोता होगा तो पोता भी आपको कहता होगा कि दादा यह मत करो मोदी जी ने मना किया है। यह जन-आंदोलन का रूप है जो स्थितियों को बदलने का कारण बनता है। 

हमारे देश में वो एक समय था जब लाल बहादुर शास्‍त्री जी कुछ कहें तो देश उठ खड़ा होता था, मानता था। लेकिन धीरे-धीरे वो स्थिति करीब-करीब नहीं है| ठीक है आप लोगों को तो मजा आ रहा है। नेता बन गए हो, आपको क्‍या गंवाना है यह स्थिति आ चुकी थी। लेकिन अगर ईमानदारी से समाज की चेतना को स्‍पष्‍ट किया जाए तो बदलाव आता है। अगर हम यह कहें कि भई आप गरीब के लिए अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दो, छोड़ना बहुत मुश्किल काम होता है। लेकिन यह देश आज मैं बड़े संतोष के साथ कहता हूं 52 लाख लोग ऐसे आए, जिन्‍होंने सामने से हो करके अपनी गैस सब्सिडी surrender कर दी।

यह जन-मन कैसे बदल रहा है उसका यह उदाहरण है। और सामने से सरकार ने भी कहा कि आप जो गैस सिलेंडर की सब्सिडी छोड़ोगे, वो हम उस गरीब परिवार को देंगे, जिसके घर में लकड़ी का चूल्‍हा जलता है, धुंआ होता है और बच्‍चे बीमार होते हैं, मां बीमार होती है, उसको मुक्ति दिलाने के लिए करेंगे और अब तक 52 लाख लोगों ने छोड़ा| 46 लाख लोगों को, 46 लाख गरीबों को already आवंटित कर दिया गया है। इतना ही नहीं जिसने छोड़ा उसको बता दिया गया कि उन्‍होंने मुंबई में यह छोड़ा लेकिन राजस्‍थान के जोधपुर के उस गांव के अंदर उस व्‍यक्ति को यह दे दिया गया है। इतनी transparency के साथ। जिसने छोड़ा....इसमें पैसे का विषय नहीं है।

समाज के प्रति एक भाव जगाने का प्रयास किस प्रकार से परिणाम लाता है। हम अंग्रेजों के जमाने में जो कानून बने , उसके साथ पले-बढ़े हैं। यह सही है कि हम गुलाम थे, अंग्रेज हम पर भरोसा क्यों करेगा। कोई कारण ही नहीं था और उस समय जो कानून बने वो जनता के प्रति अविश्‍वास को मुख्‍य मानकर बनाए गए। हर चीज में जनता पर अविश्‍वास पहली बेस लाइन थी। क्‍या आजादी के बाद हमारे कानूनों में वो बदलाव नहीं आना चाहिए जिसमें हम जनता पर सबसे ज्‍यादा भरोसा करें।

कोई कारण नहीं है कि सरकार में जो पहुंच गए...मैं elected representatives नहीं कह रहा हूं, सारे system पर, मुलाज़िम होगा clerk होगा। जो इस व्‍यवस्‍था में आ गए – वे ईमानदार है, लेकिन जो व्‍यवस्‍था के बाहर है वे याचक है। यह खाई लोकतंत्र में मंजूर नहीं हो सकती। लोकतंत्र में खाई रहनी नहीं चाहिए। अब यह छोटा सा उदाहरण मैं बताता हूं - हम लोगों को सरकार में कोई आवेदन करना है तो अपने जो सर्टिफिकेट होते थे, वो उसके साथ जोड़ने पड़ते थे, attest करने पड़ते थे। हमारा क्‍या था कानून, कि आपको किसी Gazetted officer के पास जा करके ठप्‍पा मरवाना पड़ेगा। उसे certify करवाना पड़ेगा, तब जाएगा। अब वो कौन Gazetted officer हैं जो verify करता हैं, अच्‍छा देख रहा हूं... आपका चेहरा ठीक है, कौन करता है, कोई नहीं करता। वो भी समय के आभाव में थोपता जाता है। उनके घर के बाहर जो लड़का बैठता है वो देता है । हमने आ करके कहा कि भई भरोसा करो न लोगों पर , हमने कहा यह कोई requirement नहीं है xerox का जमाना है, तुम xerox करके डाल दो जब फाइनल verification की जरूरत होगी, तब original देख लिया जाएगा। और आज वह चला गया विषय | चीजें छोटी है, लेकिन यह उस बात का प्रतिबिम्‍ब करती है कि हमारी सोच किस दिशा में है। हमारी पहली सोच यह है कि जनसामान्‍य पर भरोसा करो। उन पर विश्‍वास करो, उनके सामर्थ्‍य को स्‍वीकार करो। अगर हम जनसामान्‍य के स्‍वार्थ को स्‍वीकार करते हैं तो वो सच्‍चे अर्थ में लोकतंत्र लोकशक्ति में परिवर्तित होता है।

हमारे देश में लोकतंत्र के सामने दो खतरे भी है। एक खतरा है मनतंत्र का, दूसरा खतरा है मनीतंत्र का। आपने देखा होगा इन दिनों जरा ज्‍यादा देखने को मिलता है , मेरी मर्ज़ी , मेरा मन करता है, मैं ऐसा करूंगा। क्‍या देश ऐसे चलता है क्‍या? मनतंत्र से देश नहीं चलता है , जनतंत्र से देश चलता है। आपके मन में आपके विचार कुछ भी हो, लेकिन इससे व्‍यवस्‍थाएं नहीं चलती है। अगर सितार में एक तार ज्‍यादा खींचा होता है तो भी सुर नहीं आता है और एक तार ढीला होता है तो भी सुर नहीं आता है। सितार के सभी तार सामान रूप से उसकी खिंचाई होती है, तब जा करके आता है और इसलिए मनतंत्र से लोकतंत्र नहीं चलता है... मनतंत्र से जनतंत्र नहीं चलता है। जनतंत्र की पहली शर्त होती है मेरे मन में जो भी है जन व्‍यवस्‍था के साथ मुझे उसे जोड़ना पड़ता है। मुझे assimilate करना पड़ता है, मुझे अपने आप को dilute करना पड़े तो dilute करना पड़ता है। और अगर मुझमें रूतबा है तो मेरे विचारों से convince कर करके उसे बढ़ाते-बढ़ाते लोगों को साथ ले करके चलना होता है। हम इस तरीके से नहीं चल सकते |

दूसरा का चिंता विषय होता है - मनीतंत्र। भारत जैसे गरीब देश में मनीतंत्र लोकतंत्र पर बहुत बड़ा कुठाराघात कर सकता है। हम उससे लोकतंत्र को कैसे बचाएं। उस पर हमारा कितना बल होगा। मैं समझता हूं कि उसके आधार पर हम प्रयास करते हैं।

हम देखते हैं कि पत्रकारिता, भारत में अगर हम पत्रकारिता की तरफ नजर करें तो एक मिशन मोड में हमारे यहाँ पत्रकारिता चली| Journalism, अखबार सब पत्रिकाएं एक कालखंड था जहां पत्र-पत्रिका की मूल भूमिका रही समाज सुधार की। उन्‍होंने समाज में जो बुराइयां थी उन पर प्रहार किए। अपनी कलम का पूरा भरपूर उपयोग किया। अब राजा राममोहन राय देख लीजिए या गुजरात की ओर वीर नर्मद को देख लीजिए .. कितने सालों पहले, शताब्‍दी पहले वे अपनी ताकत का उपयोग समाज की बुराइयों पर कर रहे थे।

दसूरा एक कालखंड आया जिसमें हमारी पत्रकारिता ने आजादी के आंदोलन को एक बहुत बड़ा बल दिया। लोकमान्‍य तिलक , महात्‍मा गांधी , अरबिंदो घोष , सुभाष चंद्र बोस , लाला लाजपत राय , सब, उन्‍होंने कलम हाथ में उठाई। अखबार निकाले। और उन्‍होंने अखबार के माध्‍यम से आजादी के आंदोलन को चेतना दी और हम कभी-कभी सोचें तो हमारे देश में इलाहबाद में एक स्‍वराज नाम का अखबार था। आजादी के आंदोलन का वह अख़बार था। और हर अखबार के बाद जब editorial निकलता था , editorial छपता था और editorial लिखने वाला संपादक जेल जाता था। कितना जुल्‍म होता था। तो स्‍वराज अखबार ने एक दिन advertisement निकाली। उसने कहा, हमें संपादकों की जरूरत है। तनख्‍वाह में दो सूखी रोटी, एक गिलास ठंडा पानी और editorial छपने के बाद जेल में निवास। यह ताकत देखिए जरा। यह ताकत देखिए। इलाहाबाद से निकलता हुआ स्‍वराज अखबार ने अपनी लड़ाई नहीं छोड़ी थी | उसके सारे संपादकों की जेल निश्चित थी, जेल जाते थे, संपदाकीय लिखते थे और लड़ाई लड़ते थे। हिन्‍दुस्‍तान के गणमान्‍य लोगों का उसके साथ नाता रहा।

कुछ मात्रा में तीसरा काम जो रहा वो मिशन मोड पर चला है और वो है अन्‍याय के खिलाफ आवाज़ उठाना। चाहे समाज सुधार की बात हो, चाहे स्‍वतंत्रता आंदोलन हो, चाहे अन्‍याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की बात हो हमारे देश की पत्र-पत्रिकाओं ने हर समय अपने कालखंड में कोई न कोई सकारात्‍मक भूमिका निभाई है। यह मिशन मोड, यह हमारे लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी जड़ी-बूटी है। उसको कोई चोट न पहुंचे, उसको कोई आंच न आ जाए। बाहर से भी नहीं, अंदर से भी नहीं। इतनी सजगता हमारी होनी चाहिए |

मैं समझता हूं - आजादी के आंदोलन में अब देखिए कनाडा से ग़दर अखबार निकलता था, लाला हरदयाल जी द्वारा और तीन भाषा में उस समय निकलता था- उर्दू, गुरूमुखी और गुजराती। कनाडा से वो आजादी की जंग की लड़ाई लड़ते थे। मैडम कामा, श्याम जी कृष्‍ण वर्मा.. ये लोग थे जो लंदन से पत्रकारिता के द्वारा भारत की आजादी की चेतना को जगाए रखते थे। उसके लिए प्रयास करते थे। और उस समय भीम जी खैराज वर्मा करके थे ...उन को सिंगापुर में पत्रकारिता के लिए फांसी की सजा दी गई। वह भारत की आजादी के लिए लड़ रहे थे। मेरा कहने का तात्पर्य यह है कि यह कंधे से कंधे मिला करके चलने वाली व्‍यवस्‍था है। दैनिक जागरण के माध्‍यम से इसमें जो भी योगदान दिया जा रहा है, वो योगदान राष्ट्रयाम जाग्रयाम वयम: उस मंत्र को साकार करने के लिए अविरत रूप से काम आएगा।

मैं कभी कभी कहता हूं minimum government maximum governance ...हमारे देश में एक कालखंड ऐसा था कि सरकारों को इस बात पर गर्व होता था कि हमने कितने कानून बनाए हैं। मैंने दूसरी दिशा में सोचा है | मेरा इरादा यह है कि जब मैं पांच साल मेरा कार्यकाल पूरा होगा यह, तब तक मैं रोज एक कानून खत्‍म कर सकता हूं क्या , यह इरादा है मेरा। अभी मैने काफी identify किए हैं। सैकड़ों की तादाद में already कर दिए हैं। राज्‍यों को भी मैंने आग्रह किया है। लोकतंत्र की ताकत इसमें है कि उसको कानूनों के चंगुल में जनसामान्‍य को सरकार पर dependent नहीं बनाना चाहिए।

Minimum government का मेरा मतलब यही है कि सामान्‍य मानव को डगर-डगर सरकार के भरोसे जो रहना पड़ता है, वो कम होते जाना चाहिए। और हमारे यहां तो महाभारत के अंदर से चर्चा है| अब उस ऊंचाईयों को हम पार कर पाएंगे मैं नहीं सकता इस वक्‍त, लेकिन महाभारत में शांति पर्व में इसकी चर्चा है | इसमें कहा गया है - न राजा न च राज्यवासी न च दण्डो न दंडिका सर्वे प्रजा धर्मानेव् रक्षन्ति स्मः परस्पर:... न राज्‍य होगा न राजा होगा, न दंड होगा, न दंडिका होगी अगर जनसामान्‍य अपने कर्तव्‍यों का पालन करेगा तो अपने आप कानून की व्‍यवस्‍था बनी रहेगी, यह सोच महाभारत में उस जमाने में थी ।

और हमारे यहां मूलत: लोकतंत्र के सिद्धांतों में माना गया है ‘वादे-वादे जायते तत्‍व गोधा’ यह हमारे यहां माना गया है कि जितने भिन्‍न-भिन्‍न विचारों का मंथन होता रहता है उतनी लोकतांत्रिक ताकत मजबूत होती है। यह हमारे यहां मूलभूत चिंतन रहा है। इसलिए जब हम लोकतंत्र की बात करते हैं तो हम उन मूलभूत बातों को ले करके कैसे चलें उस पर हमारा बल रहना चाहिए।

आर्थिक विकास की दृष्‍टि से हमारे देश में दो क्षेत्रों की चर्चा हमेशा चली है और सारी आर्थिक नींव उन्‍हीं दो चीजों के आस-पास चलाई गई है। एक private sector, दूसरा public sector अगर हमें विकास को जन आंदोलन बनाना है तो private sector public sector की सीमा में रहना हमारी गति को कम करता है और इसलिए मैंने एक विषय जोड़ा है उसमें - public sector, private sector and personal sector .

यह जो personal sector है यह अपने आप में एक बहुत बड़ी ताकत है। हम में से बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि हमारे देश की economy को कौन drive करता है। कभी-कभी लगता है कि यह जो 12-15 बहुत बड़े-बड़े कोरपोरेट हाऊस हैं, अरबों-खरबों रुपये की बातें आती हैं। जी नहीं, देश की economy को या देश में सबसे ज्‍यादा रोजगार देने का काम यदि कहीं हुआ है तो हमारे छोटे-छोटे लोगों का है। कोई कपड़े का व्‍यापार करता होगा छोटा-मोटा, कोई पान की दुकान पर ठेका ले करके बैठा होगा। कोई भेलपुरी-पानीपुरी का ठेका चलाता होगा, कोई धोबी होगा, कोई नाई होगा, कोई साइकिल किराये पर देने वाला होगा, कोई ऑटो रिक्‍शा वाला, यह छोटे-छोटे लोगों का कारोबार का नेटवर्क हिंदुस्तान में बहुत बड़ा है। यह जो bulk है वो एक प्रकार के middle class लेवल पर नहीं आया है। लेकिन गरीबी में नहीं है | अभी उसका मीडिल क्‍लास में जाना बाकी है, लेकिन है अपने पैरों पर खड़ा । personal sector को बहुत ताकत देता है। क्‍या ऐसी हमारी व्‍यवस्‍था न हो जो हमारे इस personal sector को हम empower करे। कानूनी दिक्‍कतों से उसको मुक्ति दिलाए। आर्थिक प्रबंधन में उसकी मदद करें। ज्‍यादातर यह लोग वह हैं बेचारों को साहूकारों के पास पैसे ले करके काम करना पड़ता है, तो अपनी income का काफी पैसा फिर सरकार के पास चला जाता है, उसी चंगुल में वो फंस जाता है।

आज वे लोग ऐसे हैं जो ज्‍यादातर करीब 70% लोग इसमें से scheduled caste, scheduled tribe और OBC हैं। गरीब हैं, पिछड़े तबके से हैं। अब वे लोग देश में करीब-करीब 12-14 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। इतनी ताकत हैं इन लोगों में । हर कोई एक को रोजगार देता है, कोई दो को देता है, कोई part-time देता हैं। लेकिन 12 से 14 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। अगर उनको थोड़ा बल दिया जाए, थोड़ी मदद दी जाए उनको थोड़ा आधुनिक करने का प्रयास किया जाए तो इनकी ताकत हैं कि 15-20 करोड़ लोगों को रोजगार देने का सामर्थ्‍य है। और इसके लिए हमने एक प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को बल दिया है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को ऐसे आगे बढ़ाया है कि कोई गारंटी की जरूरत नहीं लोगों से। वह बैंक में जायें और बैंक की जिम्‍मेदारी रहेगी उनकी मदद करना। 10 हजार, 15 हजार, 25 हजार, 50 हजार, ज्‍यादा रकम उनको चाहिए नहीं...बहुत कम रकम से वह काम कर लेते हैं अपना| अभी तो इस योजना का हो -हल्‍ला इतना शुरू नहीं हुआ है, ऐसे ही silently काम हो रहा है। लेकिन अब तक करीब 62 लाख परिवारों को करीब-करीब 42000 करोड़ रूपये उन तक पहुंचा दिए गए। और यह वो लोग हैं जो साहस भी करने को तैयार हैं और अनुभव आया है कि 99% लोग समय से पहले अपने पैसे वापस दे रहे हैं। कोई नोटिस नहीं देना पड़ रहा|

यानी हम personal sector को कितना बल दे। personal sector का एक और आज हमने पहलू उठाया है जिस प्रकार से समाज का यह तबका है जो अभी मध्‍यम वर्ग में पहुंचा नहीं है, गरीबी में रहता नहीं है ऐसी अवस्‍था है उसकी कि वो सबसे ज्‍यादा कठिन होती है | लेकिन एक और वर्ग है जो highly intellectual है -जो भारत का youth power है । उसके पास कल्‍पकता है, नया करने की ताकत है और वो देश को आधुनिक बनाने में बहुत बड़ा contribute कर सकता है। वो globally कम्‍पीट कर सकता है।

जैसे एक तबके को हमें मजबूत करना है वैसा दूसरा तबका है यह हमारी युवा शक्ति जिसमें यह विशेषताएं हैं। और इसके लिए हमने मिशन मोड पर काम लिया है। start-up India stand-up India. जब मैं start-up India की बात करता हूं तो उसमें भी मैंने दो पहलू पकड़े हैं।

हमने बैंकों को कहा कि समाज के अति सामाजिक दृष्टि से जो पीछे वर्ग के लोग हैं क्‍या एक बैंक एक की उंगली पकड़ सकती है क्‍या। एक बैंक की ब्रांच एक व्‍यक्ति को और एक महिला को बल दे सकती है | एक देश में सवा लाख ब्रांच। एक महिला को और एक गरीब को उनका अगर हाथ पकड़ ले उसको नये सिरे से ताकत दे तो ढाई लाख नये Entrepreneurs खड़े करने की हमारी ताकत है । वो छोटा काम दिया है लेकिन cumulative effect बहुत बड़ा होगा और दूसरी तरफ जो innovation करते हैं जो ग्‍लोबल competition में अपने आप को खड़ा कर सकते हैं और आज जब ग्‍लोबल मार्केट है तो प्रगति का सबसे बड़ा आधार है innovation. जो देश innovation में पीछे रह जाएगा वो आने वाले दिनों में इस दौड़ से बाहर निकल जाएगा और इसलिए innovation को अगर बल देना है तो start-up India stand-up India का मोड चलाया है। ऐसे लोगों को आर्थिक मदद मिले। उनको एक नई पॉलिसी ले करके हम आ रहे हैं। और मुझे विश्‍वास है कि भारत के नौजवानों की जो ताकत है, तो वो ताकत एक बहुत बड़ा बदलाव है।

इन सारी चीजों में आपने देखा होगा कि हम empowerment पर बल दे रहे हैं। कानूनी सरलीकरण भी हो, इससे भी empowerment होता है, आर्थिक व्‍यवस्‍थाएं सुविधाएं हो, उससे भी empowerment होता है।

Global economy के सम्बन्ध में कहां टिक सकता है? उसके लिए क्‍या सपोर्ट सिस्‍टम होना चाहिए, उस पर बल देना। यह चीजें हैं जिसके कारण आज हमारे देश में हमने काम को सुविधाजनक बनाया। जैसा मैंने शुरू में कहा था, आपको हैरानी होगी।

पार्लियामेंट चलती है कि नहीं चलती। अब डिबेट आप लोगों की कठिनाई है, आपके विषय, आपका व्यापार तो है ही है लेकिन इस बार पार्लियामेंट नहीं चलने से एक बात की तरफ ध्‍यान नहीं जा रहा| एक ऐसा कानून लटका पड़ा है और आज सुनने में आपको भी लगेगा कि भाई यह काम नहीं होना चाहिए क्‍या। हम एक कानून लाए हैं, जिसमें गरीब व्‍यक्ति जो नौकरी करता है उसके बोनस के सम्बन्ध में | अभी अगर उसकी monthly सात हजार रुपया से कम income है तो बोनस का हकदार होता है और 3500 रुपये तक उसको बोनस मिलता है। हम कानून में बदलाव लाए minimum 7000 की बजाए 21000 कर दिया जाए। monthly अगर उसकी income 21000 minimum है तो वो बोनस का हकदार बनना चाहिए जो अभी 7000 है और तीसरा 3500 बोनस की बात है उसे 7000 कर दिया जाए। यह सीधा सीधा गरीब के हित का काम है कि नहीं है ? लेकिन आज मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि पार्लियामेंट चल नहीं रही है, गरीब का हक रूका पड़ा है।

लेकिन चर्चा क्‍या होती है GST और parliament. अरे भई GST का जो होगा, सब मिलकरके जो भारत का भाग्‍य तय होगा वो होगा। लेकिन गरीबों का क्‍या? सामान्‍य मानविकी का क्‍या? और इसलिए हम संसद चलाने के लिए, इनके लिए , कह रहे हैं। लोकतंत्र में संसद से बड़ी कौन सी जगह होती है जहां पर वाद-विवाद, संवाद, विरोध सब हो सकता है। लेकिन हम उस institution को ही नकार देंगे तो फिर तो लोकतंत्र पर सवालिया निशान होगा और इसलिए मैं आज जब दैनिक जागरण में जिन विषयों का मूल ले करके आप चले हैं उस पर बात कर रहा हूं तो लोकतंत्र का मंदिर हमारी संसद है, उसकी गरिमा और सामान्‍य मानव के हितों के काम को फटाफट निर्णय करते हुए आगे बढ़ाना। यह देश के लिए बहुत आवश्यक है। उसको हम कैसे गति दें, केसे बल दें और उसको हम कैसे परिणामकारी बनायें ? बाकी तो मैं सरकार की विकास यात्रा के कई मुद्दे कह सकता हूं लेकिन मैं आज उसको छोड़ रहा हूं यही काफी हो गया ।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India’s pharmaceutical sector records transformative growth over 12 years, strengthening affordable healthcare and self-reliance

Media Coverage

India’s pharmaceutical sector records transformative growth over 12 years, strengthening affordable healthcare and self-reliance
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
विकसित भारत का रास्ता भी युवाओं के सपनों, कौशल और सामर्थ्य से होकर गुजरता है: VBRY प्रोग्राम में पीएम मोदी
June 19, 2026
PM Viksit Bharat Rozgar Yojana is about empowering first-time employees and building a bridge between youth and industry: PM
The aspirations, skills and potential of our youth shape the path to a Viksit Bharat: PM
India's youth will be at the forefront of driving global growth, innovation and entrepreneurship in the years to come: PM
India is set to lead from the front: PM
In the 21st century, opportunities will belong to nations that nurture skilled talent, foster innovation and uphold the highest standards of quality: PM
To compete globally, we must meet the highest quality standards: PM

मंत्रिमंडल के मेरे साथी श्री मनसुख मांडविया जी, बहन शोभा जी, देश के विभिन्न हिस्सों के अलग-अलग कार्यक्रमों में जुड़े, टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए सभी महानुभाव, और जैसा अभी मंच संचालक बता रहे थे कि, 200 स्थान पर करीब दो लाख लोग अभी इस कार्यक्रम में हमारे साथ जुड़े हुए हैं, मैं उन सबका भी दूर से ही सही, लेकिन दिल से आप सबको मेरी शुभकामनाएं देता हूं। उद्योग जगत से भी जुड़े हुए बहुत सारे महानुभाव मैं आज देख रहा हूं यहां पर, और युवा साथियों का उत्साह तो ध्यान में आता ही आता है, इतनी बड़ी तादाद में।

आज यहां इस कार्यक्रम से जुड़े युवा साथियों में मुझे भारत के उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर दिखाई दे रही है। मैं अब से कुछ ही घंटे पहले ही फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा से लौटा हूं। जी-7 में विकसित देशों के दिग्गज नेताओं से मिला हूं। दुनिया आज, भारत की युवा शक्ति की चर्चा कर रही है। भारत की टैलेंट, स्किल और पोटेंशियल की चर्चा सब जगह हो रही है। दुनिया भारत के युवाओं की क्षमता को भलीभाँति पहचानने लगी है। और ऐेसे समय में, हमारी कोशिश है कि भारत का हर युवा अपनी क्षमता को अवसर में बदल सके, और इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का आरंभ हुआ। यह रोजगार योजना सामान्य तौर पर सोचे जानी वाली रोजगार योजना से बहुत आगे बढ़कर, पहली नौकरी पाने वाली युवा के सपनों को शक्ति देने वाली योजना है। ये युवा और उद्योगों के बीच एक मजबूत सेतू बनाने वाली योजना है।

साथियों,

आमतौर पर योजनाएं या तो कर्मचारी के लिए बनती हैं या तो फिर उद्योगों के लिए बनती हैं, लेकिन ये एक योजना ऐसी है, इस योजना में भारत के सामर्थ्यवान मेरे युवा, समृद्ध युवा, भविष्य की ओर और उद्योग विकास की ओर, और इन दोनों को साथ लेकर चलती है। जो युवा अपनी पहली नौकरी शुरू करता है, सरकार उसके साथ खड़ी होती है, और इसलिए उद्योगकार को भी लगता है कि अकेला मेरा नहीं आया है, इसके पीछे पूरी सरकार आई है। और इसके कारण ऐसे युवकों की तरफ देखने का उस उद्योगकार का भी नजरिया बदल जाता है। और जो संस्थान नए रोजगार का सृजन करता है, सरकार उनका भी उत्साह बढ़ाती है। हमारे यहां पहले कुछ नियम व्यवस्था ऐसी थी कि लोगों को बड़े होने में थोड़ा डर लगता था, कि यार बड़ा हो जाऊंगा, तो मैं ये-ये बंधनों में फंस जाऊंगा, तो उसको लगता था छोटा ही रहना अच्छा है। और कभी बड़े होने की संभावना हो, उसको लगता नहीं ऐसा करो एक दूसरा छोटा और कर दो। आज वो सोच बदली है। हर किसी को बड़ा बनने का हौसला मिलना चाहिए, उसकी उम्मीदों को पंख मिलने चाहिए, और ये उद्योग को भी जरूरत होती है। और इस योजना से वो द्वार भी खुला है, और यही इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता है। अभी कुछ देर पहले, मैं कुछ लाभार्थी नौजवानों के साथ बैठा था, उनके अनुभव मैं सुन रहा था, उसमें कुछ लोग वो थे जिनको पहली बार नौकरी मिली है और कुछ लोग वो थे, जिन्होंने इस योजना के तहत अपने यहां कुछ लोगों को काम दिया है। मैं वाकई कहता हूं, इतना कान्फिडेंस था उन बच्चों में, और ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने दुनिया जीत ली है। उनके सपने, उनका विश्वास, ये सचमुच में हमारी बहुत बड़ी पूंजी है।

साथियों,

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के सहयोग से अब तक करीब 70 लाख जॉब सृजित हुई हैं। करीब 70 लाख, first time employees को। Social Security का कवच भी मिला है। करीब 20 लाख युवा अपनी पहली नौकरी के छह महीने पूरे भी कर चुके हैं। और आज इन्हीं में से करीब 10 लाख युवा साथियों को अपनी पहली नौकरी में छह महीना पूरा करने पर, इस योजना के तहत उसके लाभार्थी होने के नाते इंसेंटिव भी मिल चुका है। दो हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खाते में पहुंची है। ये राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं है, ये उनके परिश्रम का सम्मान है। ये उनके उज्ज्वल भविष्य पर देश के विश्वास की अभिव्यक्ति है।

साथियों,

मुझे उतनी ही खुशी उन संस्थानों के लिए भी है, जिन्होंने हमारे इन नौजवानों को अवसर दिए हैं, उनके अंदर छिपे हुए सामर्थ्य को पहचाना, और इसलिए ये अवसर देने वाले भी उतने ही अभिनंदन के अधिकारी हैं। इन्हीं संस्थानों ने बीते महीनों में लाखों नौकरियों का सृजन किया है। और अभी मनसुख भाई जो आंकड़े बताते थे, मैं आशा करता हूं कि मीडिया के लोग इन आंकड़ों पर ध्यान करेंगे, देश के लोगों में खुशी की लहर छा जाएगी कि इतना बड़ा काम हो रहा है, ये आंकड़े और अनुभव यही बताता है कि जब सरकार, युवा और उद्योग एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो रोजगार निर्माण की गति कई गुना बढ़ जाती है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना इसी नए भारत की पहचान है। एक ऐसा भारत, जहां युवा को अवसर मिले। उद्योग को प्रोत्साहन मिले। और रोजगार निर्माण एक राष्ट्रीय अभियान बन जाए।

साथियों,

भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। इसलिए विकसित भारत का रास्ता भी, युवाओं के सपनों, उनके कौशल और उनके सामर्थ्य से होकर ही आगे जाता है। हमारा प्रयास है कि देश का हर युवा अपनी क्षमता के अनुसार जितना आगे बढ़ सकता है बढ़े। जिसके पास हुनर है, उसे अवसर मिले। जिसके पास आइडिया है, उसे इनोवेशन के लिए मंच मिले। और जो अपने दम पर कुछ करना चाहता है, उसे पूरा सहयोग मिले। मेरा स्पष्ट मानना है, भारत जैसे युवा देश में अवसरों के स्रोत जितने अधिक होंगे, युवाओं के सपनों को उतनी ही अधिक उड़ान मिलेगी। इसी सोच के साथ बीते 12 वर्षों में रोजगार के हर रास्ते को मजबूत किया गया है। Infrastructure से लेकर Innovation तक, Manufacturing से लेकर Digital Economy तक, स्पेस से लेकर Start-ups तक, हर क्षेत्र में नए अवसर तैयार किए गए हैं। मेक इन इंडिया अभियान, वोकल फॉर लोकल, लोकल को ग्लोबल ले जाने का अभियान, मिशन मैन्यूफैक्चरिंग, ये सभी योजनाएं देश में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर बना रही हैं। आज गाड़ियों से लेकर मेट्रो कोच, ट्रेन के डिब्बे और डिफेंस के साजो सामान तक, अनेक सेक्टर में निर्यात तेज़ी से बढ़ रहा है, एक्सपोर्ट बढ़ रहा है। ये तभी हो पा रहा है, क्योंकि भारत में मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ रहा है, फैक्ट्रियां बढ़ रही हैं। और इनमें काम करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है।

साथियों,

बीते 12 वर्ष में भारत सरकार की जो नीतियां रही हैं, जो निर्णय लिए गए हैं, उन्होंने देश में निरंतर रोजगार के नए सेक्टर्स बनाए हैं। आज इंफ्रास्ट्रक्चर पर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश, लाखों युवाओं का आधार बन रहा है। मुद्रा योजना के तहत 33 लाख करोड़ रूपये से अधिक की सहायता ने करोड़ों-करोड़ युवाओं को अपना काम शुरू करने का अवसर दिया है। 10 करोड़ से अधिक महिलाएं Self Help Groups से जुड़ी हैं और 3 करोड़ से अधिक लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा जैसी पहलों ने छोटे उद्यमियों, रेहड़ी-पटरी वालों और पारंपरिक कारीगरों को नई टेक्नोलॉजी दी है, नई आर्थिक सहायता दी है और नई ताकत से भर दिया है। मैं अभी जिन नौजवानों से बात कर रहा था, उसमें एक नौजवान आईटीआई से निकलकर के ड्रोन बनाने में लगे हैं तो बड़े उमंग से बता रहे थे वो, मैं भी आपको ड्रोन सेक्टर का ही एक उदाहरण दूंगा। दवाइयों की सप्लाई हो या पेस्टिसाइड का छिड़काव, स्वामित्व योजना में ड्रोन से मैपिंग हो, या फिर रक्षा क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग, ड्रोन्स का उपयोग देश में लगातार बढ़ रहा है। और ड्रोन्स का ये बढ़ता हुआ उपयोग, युवाओं को नई नौकरियां दे रहा है। वो नौजवान तो आईटीआई करके निकला है, लेकिन वो कह रहा था, कि वीडियो ड्रोन का मत देखो, खुद ड्रोन बनाना शुरू करो, बना लोगे। इतने कान्फिडेंस से बोल रहा था। हमारी सरकार ने स्पेस सेक्टर को खोलने का जो निर्णय लिया, उसका भी बड़ा लाभ युवाओं को मिला है।

साथियों,

पिछले दशक में Digital Economy ने भी अवसरों की एक नई दुनिया बनाई है। Gig Economy हो, Platform Economy हो, Content Creation हो, या Technology Services, रोजगार के नए क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं। आज जिन अवसरों की कल्पना भी मुश्किल थी, वे करोड़ों युवाओं की आय का माध्यम बन चुके हैं। यही बदलाव Startup Ecosystem में भी दिखाई देता है। एक समय देश में लगभग 500 Startups हुआ करते थे। आज 2 लाख से अधिक Registered Startups, और वो भी देश के हर जिले में आपको Startups नजर आएंगे। ये आंकड़े विश्वास देते हैं कि भारत का युवा, आने वाले वर्षों में, दुनिया की Growth, Innovation और Entrepreneurship का नेतृत्व करेगा।

साथियों,

आज दुनिया में हर कोई भारत के भविष्य को लेकर बहुत उत्साहित है। हर कोई भारत की युवाशक्ति के सामर्थ्य को लेकर के बहुत आश्वस्त है। आपने भी देखा होगा, फ्रांस में "भारत इनोवेट्स" का इतना बड़ा कार्यक्रम हुआ। AI, Space, Green Energy, Biotechnology, ऐसे कई क्षेत्रों में, भारत के Startups और Global Investors, यानी मैं देख रहा था वो एक नई ताकत के रूप में उभर रहे हैं, वो एक साथ काम करने के लिए आगे आ रहे हैं। आज भारत दुनिया के साथ नए Trade Agreements कर रहा है। ऐसे समझौते, जो भारत के उद्योगों के लिए नए बाजार खोल रहे हैं। ऐसे समझौते, जो भारत के Professionals के लिए नई संभावनाएं बना रहे हैं। पिछले महीनों में भी यूरोप के अनेक देशों के साथ महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। ये समझौते भी देश में लाखों की संख्या में नए रोजगार बनाने का माध्यम बन रहे हैं।

साथियों,

दुनिया भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो रही है। और भारत भविष्य की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है। दुनिया Future Technologies की ओर आगे बढ़ रही है। और भारत अपने युवाओं को Future Ready बनाने में जुटा है। और यही भारत के युवाओं के लिए सबसे बड़ा अवसर है। और हमें इस अवसर का पूरा लाभ उठाना है।

साथियों,

बीते 12 वर्षों में भारत के रोजगार परिदृश्य में एक और बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। अक्सर इसकी चर्चा कम होती है, लेकिन विकसित भारत की यात्रा में इसका महत्व बहुत बड़ा है। ये परिवर्तन है, रोजगार के साथ सुरक्षा और सम्मान को जोड़ने का। हमारी सोच Secure Employment की है। हमारी सोच Social Security for Every Worker की है। इसलिए आज Technology के माध्यम से EPFO की व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा गया है। Pension व्यवस्था को भी सरल और सुलभ बनाया गया है। लाखों नए कर्मियों को Health Insurance और सस्ते उपचार की व्यवस्था से भी जोड़ा गया है।

साथियों,

हमने श्रम सुधारों को भी इसी दृष्टि से आगे बढ़ाया है। नए Labour Codes का उद्देश्य, कामगारों को अधिक सुरक्षा, अधिक पारदर्शिता और अधिक अधिकार देना है। Appointment Letter को कानूनी मान्यता देना हो, Fixed Term Employees को समान सुविधाएं सुनिश्चित करना हो, या फिर Minimum Wage के दायरे का विस्तार करना हो, हर प्रयास का उद्देश्य यही है कि श्रमिक का सम्मान और सुरक्षा दोनों मजबूत हों।

साथियों,

हमारी नारीशक्ति भी आज हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही है। इसलिए महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और अधिक अवसरों वाला वातावरण तैयार किया जा रहा है। Night Shift से जुड़े पुराने प्रतिबंधों में बदलाव हो, Work From Home की सुविधा हो, या सुरक्षित कार्यस्थल की व्यवस्था, हम महिलाओं की भागीदारी को और अधिक मजबूत कर रहे हैं।

साथियों,

आज यहां बड़ी संख्या में, मेरे उद्योग जगत के साथी भी उपस्थित हैं। आप सब से भी मेरा एक आग्रह है। 21वीं सदी में अवसर उन्हीं देशों के पास जाएंगे, जिनके पास Skilled Talent होगा। जिनके पास Innovation होगा। जिनके पास Quality होगी। और आज भारत के पास इन तीनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अभूतपूर्व क्षमता है। और इसलिए मैं भारत के उद्योग जगत से भी कहना चाहता हूं, आज जो अवसर हमारे सामने हैं, उन्हें हमें पूरी शक्ति से अपनाना होगा। हमें नए बाजारों तक पहुंचना होगा। हमें नए उत्पाद बनाने होंगे। हमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। क्योंकि आज दुनिया भारत के लिए दरवाजे खोल रही है। पहले खिड़की भी खोलना नसीब नहीं था दोस्तों, आज दरवाजे खुल रहे हैं। भारत ने करीब 40 देशों के साथ जो फ्री ट्रेड अग्रीमेंट्स किए हैं, हमें इसका भी पूरा-पूरा लाभ उठाना चाहिए। ये अग्रीमेंट्स नए बाजार बना रहे हैं, नए मार्केट्स को उपलब्ध करा रहे हैं, दुनिया में मेक इन इंडिया ब्रांड्स के लिए नए अवसर पैदा हो ही रहे हैं, और इसलिए हमें इन अवसरों को गंवाना नहीं है दोस्तों।

साथियों,

जब लक्ष्य बड़े होते हैं, तो उपलब्धियां भी तो बड़ी होती हैं। जब सोच वैश्विक होती है, तो सफलताएं भी, सीमाएं भी अपने आप विस्तृत हो ही जाती हैं। और इसीलिए Training, Mentorship और Internship अब वैकल्पिक नहीं हैं वो। ये 21वीं सदी की आवश्यकता हैं। भारत के उद्योग जगत को अपने लिए Skilled Workforce को भी तैयार करना ही करना है, और भविष्य के लिए नए अवसर भी तैयार करने हैं। क्योंकि विकसित भारत का रास्ता केवल निवेश से नहीं बनेगा, वह टेलेंट, स्किल और इनोवेशन की शक्ति से बनने वाला है। और इस पूरी यात्रा की सबसे बड़ी कसौटी एक ही है, और मैं उद्योग जगत के साथियों को बार-बार कह रहा हूं, इन सारी परिस्थितियों का फायदा लेने की एक सबसे बड़ी सफल जड़ी बूटी एक ही है और वो जड़ी बूटी है Quality। शिक्षा की Quality। Skill की Quality। Service की Quality। Product की Quality। ईवन Packaging की Quality, दुनिया में टिकना है, तो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मानकों पर खरा उतरना ही होगा। दुनिया में आगे बढ़ना है, तो उत्कृष्टता को अपनी पहचान बनाना होगा। आज दुनिया भारत से बहुत अपेक्षाएं रखती है। लेकिन मुझे विश्वास है, भारत का युवा उन अपेक्षाओं को पूरा ही नहीं करेगा, बल्कि उनसे भी आगे निकलकर के दुनिया को दिखा देगा, और डंके की चोट पर दिखाएगा। और यही विकसित भारत की शक्ति है। और यही मेरे नौजवान साथियों की, मेरे युवाओं की, उनके सामर्थ्य की युवाशक्ति की पहचान है, यही उनका सामर्थ्य है।

साथियों,

सपने वहीं बड़े होते हैं, जहां वो साकार होते हैं। एक सपने का पूरा होना, उससे बड़े सपने का रास्ता खोलता है। और यही आज भारत में हो रहा है। मैं भारत के युवाओं की अधीरता समझता हूं, और मैं युवाशक्ति से एक ही बात कहूंगा, आपके सपने ही, मैं फिर कहता हूं मेरे नौजवान साथियों, आपके सपने ही मोदी का संकल्प है! कामयाबी की तरफ बढ़ता आपका हर कदम, ये मेरी भी प्रेरणा है। और हां, असफल होने पर भी आपको हताश होने की कोई जरूरत नहीं। हर असफलता में हमें कुछ न कुछ तो सीखने को मिलता ही मिलता है। और मैं तो खेल जगत के लोगों को हमेशा ही कहता हूं, जो खेल के मैदान में उतरते हैं ना, कोई हारता नहीं है, एक जीतता है तो दूसरा सीखता है, हारता कोई नहीं है। युवा मन की एक ही कसौटी है, जो असफलताओं से निरंतर नया सीखने का आदि हो, जो सपनों को सिद्ध करे और हर सिद्धि के बाद नए सपनों को जन्म दे। मुझे भारत की युवाशक्ति पर विश्वास है, मुझे भारत की उद्यमिता पर भरोसा है, इसी भरोसे के साथ एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, और विकसित भारत 2047, जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा, हिन्दुस्तान विकसित होकर रहेगा। ये हम सबका सपना भी है, हम सबका संकल्प भी है। और मैं मानता हूं दोस्तों मेरे नौजवान साथी हम अपनी आंखों से खुद देखेंगे, विकसित भारत खुद देखेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।