प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी ‘हर घर तिरंगा’ पहल, जिसे 2022 में 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' के हिस्से के रूप में लॉन्च किया गया है, ने न केवल पूरे भारत में देशभक्ति और एकता को बढ़ावा दिया है, बल्कि जमीनी स्तर पर एक उल्लेखनीय परिवर्तन भी किया है। नागरिकों से अपने घरों, कार्यस्थलों और संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए एक राष्ट्रव्यापी आह्वान के रूप में शुरू हुआ यह अभियान एक शक्तिशाली आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है, जिसने एक नया महिला-नेतृत्व वाला उद्योग बनाकर हजारों महिलाओं को प्रेरित और सशक्त बनाया है।

‘हर घर तिरंगा’ अभियान का समन्वय करने वाले संस्कृति मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन ने देश भर की महिलाओं पर इस पहल के गहन प्रभाव को उजागर किया है। अभियान की सफलता को न केवल फहराए गए झंडों की संख्या से मापा जा सकता है, बल्कि महिलाओं, विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में महिलाओं के लिए बनाए गए आर्थिक अवसरों से भी मापा जा सकता है।

जब ‘हर घर तिरंगा अभियान’ की शुरुआत की गई थी, तब झंडों की मांग बहुत ज़्यादा थी और इस मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 7.5 करोड़ झंडे खरीदे और वितरित किए। हालाँकि, अधिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता की संभावना को पहचानते हुए, पीएम मोदी ने भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन की पहल की, जिससे स्वयं सहायता समूहों के लिए ध्वज उत्पादन में भाग लेने के दरवाज़े खुल गए।

अभियान के दूसरे वर्ष तक, इन स्वयं सहायता समूहों ने झंडे के उत्पादन का अधिकांश हिस्सा अपने हाथ में ले लिया था, जिससे केंद्र सरकार की खरीद घटकर सिर्फ़ 2.5 करोड़ झंडे रह गई। इस बदलाव का एक उल्लेखनीय उदाहरण उत्तर प्रदेश में देखा जा सकता है, जहाँ राज्य ने 2022 में सरकार से 4.5 करोड़ झंडे खरीदे, लेकिन 2023 में किसी की ज़रूरत नहीं पड़ी, यह सब उसके स्वयं सहायता समूहों की आत्मनिर्भरता की बदौलत संभव हुआ, जो इस पहल में इन समूहों की भागीदारी और जुड़ाव का स्पष्ट संकेत है।

2024 में, केंद्र द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले झंडों की मांग घटकर मात्र 20 लाख रह गई, और स्वयं सहायता समूह राष्ट्रीय झंडों के प्राथमिक उत्पादक बन गए। पूरे देश में, हर साल लगभग 25 करोड़ झंडों की जरूरत होती है - हर घर के लिए एक। बड़े विक्रेताओं पर निर्भरता से स्वयं सहायता समूहों के नेतृत्व में उत्पादन की ओर इस बदलाव ने न केवल जनभागीदारी की भावना को मजबूत किया है, बल्कि इन स्वयं सहायता समूहों को एक संपन्न उद्योग में बदल दिया है, जिससे महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया गया है।

‘हर घर तिरंगा’ पहल इस बात का एक शानदार उदाहरण है कि कैसे एक सरल लेकिन गहन विचार महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। जमीनी स्तर पर महिलाओं की शक्ति का उपयोग करके, इस अभियान ने न केवल राष्ट्रीय गौरव की भावना पैदा की है, बल्कि पूरे भारत में महिलाओं के लिए स्थायी आर्थिक अवसर भी पैदा किए हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘हर घर तिरंगा’ पहल लाखों लोगों के लिए आशा और सशक्तिकरण की किरण बन गई है।

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उस चहलकदमी में दिखा कार्यकर्ताओं के प्रति पीएम मोदी का गहरा सम्मान: नितिन नबीन जी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष
January 21, 2026

पटना में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान हुई एक ऐसी घटना ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नबीन जी पर गहरी छाप छोड़ी और नेतृत्व का एक शांत लेकिन बेहद प्रभावशाली सबक दिया।

देशभर से वरिष्ठ नेता एक बड़े कार्यक्रम के लिए पटना पहुँच रहे थे। नितिन नबीन जी उस टीम में शामिल थे, जिसकी जिम्मेदारी एयरपोर्ट पर नेताओं का स्वागत करने और तय प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें उनके वाहनों तक पहुँचाने की थी। जैसे-जैसे नेता आते गए, वे सामान्य प्रक्रिया के तहत सीधे अपनी गाड़ियों की ओर बढ़ते गए।

जब प्रधानमंत्री मोदी जी पहुँचे, तो उनका स्वागत किया गया और उनसे गाड़ी की ओर चलने का अनुरोध किया गया। लेकिन आगे बढ़ने से पहले वे रुक गए और पूछा कि क्या बाहर कार्यकर्ता खड़े हैं। जब उन्हें बताया गया कि वहाँ कई कार्यकर्ता इंतजार कर रहे हैं, तो उन्होंने तुरंत कहा कि वे पहले उनसे मिलना चाहेंगे।

प्रधानमंत्री जी ने गाड़ी में बैठने के बजाय पैदल चलना चुना। उनकी गाड़ी पीछे-पीछे चलती रही थी, वे स्वयं हर कार्यकर्ता से मिले, अपने हाथों से माला स्वीकार की, सम्मान में हाथ जोड़कर अभिवादन किया और वहाँ मौजूद प्रत्येक कार्यकर्ता का अभिवादन स्वीकार किया। सभी से मिलने के बाद ही वे अपनी गाड़ी में बैठे और वहाँ से रवाना हुए।

हालाँकि ये बहुत छोटा स्मरण है, लेकिन यह व्यवहार सभी के मन पर गहरी और स्थायी छाप छोड़ गया। प्रधानमंत्री जी आसानी से कार में बैठकर हाथ हिला सकते थे, लेकिन उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ चलना और व्यक्तिगत रूप से उनका सम्मान करना चुना। यह क्षण उनकी संवेदनशीलता और इस विश्वास को दर्शाता है कि प्रत्येक कार्यकर्ता, चाहे उसका पद कुछ भी हो, सम्मान का पात्र है।

नितिन नबीन जी बताते हैं कि इस घटना ने उन्हें नेतृत्व का सही अर्थ सिखाया। नरेन्द्र मोदी जी के लिए नेतृत्व की नींव विनम्रता, भावनात्मक जुड़ाव और जमीनी स्तर से लगातार संपर्क में निहित है। कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान और खुला संवाद केवल दिखावे के लिए नहीं हैं, बल्कि सभी कार्यकर्ताओं, नेताओं और पूरे संगठन के मूल मूल्य हैं।

यह सोच, जहाँ कार्यकर्ताओं के साथ सम्मान और अपनापन रखा जाता है, भाजपा की संगठनात्मक संस्कृति की पहचान है। यही परंपरा पार्टी की जड़ों को मजबूत करती है और आम लोगों को राष्ट्रीय जिम्मेदारियाँ को निभाने के लिए तैयार करती है।