आदरणीय अडवाणीजी, माननीय श्री श्रेणिकभाई, दिपकभाई, आज के कार्यक्रम के केन्द्र बिन्दु भाई श्री उत्कर्षभाई, मंच पर बिराजमान सारे श्रेष्ठी जन, बुजुर्गों, माताओं, भाईयों और बहनों..!
समाज-जीवन में प्रवाह कितनी तेज़ी से बदल रहे हैं इसका प्रतीक यानि इस प्रकार की प्रवृति। हम सब पाँच हजार साल से भी लम्बे समय से एक समाजिक शक्ति के रूप जिए, जिसका मूल कारण था हमारी परिवार व्यवस्था। सारे विश्व की जितनी भी समाज व्यवस्थाएँ हैं, उन सारी समाज व्यवस्थाओं में से यदि किसी भी व्यवस्था में कोई आंतरिक ऊर्जा है, जो स्वयं ही जीवन शक्ति है, जिसमें खुद ही ऊर्जा संचित करने की क्षमता है तो वह केवल भारत की बृहद् परिवार व्यवस्था है। लेकिन कालक्रम के साथ-साथ युग बदलते गए, गुलामी काल के १२०० साल में समाज-जीवन पर कई झटके लगे, समयानुकूल परिवर्तन के लिए हमें मौका नहीं मिल सका। सामाजिक नेतृत्व करने वालों की शक्ति बहुधा गुलामी से आजादी पाने के आंदोलनों में खर्च हो गई और इसी कारण १२०० सालों का समय ऐसा गुजरा जिसमें जो समयानुकूल परिवर्तन होने चाहिये थे वे नहीं हो सके। और परिणाम स्वरूप जिस तरह किसी पुरानी इमारत को समय समय पर नहीं संभाला जाए तो वह धीरे-धीरे क्षीण होती जाती है, उसी तरह से हमारी समाज व्यवस्था, परिवार व्यवस्था भी कमजोर होने लगी और फिर उससे बचने के लिए समाज ने जो नये-नये तरीके अपनाए उनमें से एक; धीरे-धीरे हम सब माइक्रो फॅमिली की ओर मुडे। और जब ऐसी परिस्थिति खड़ी होती है तब स्वाभाविक रूप से ही नई व्यवस्थाएँ विकसित करनी पड़ती हैं, नई व्यवस्थाओं को अनुमोदन देना पड़ता है और तभी हम समाज के किसी एक बड़े वर्ग को सँभाल सकते हैं। यह बात सही है कि हमारी स्थिति दुनिया के उन देशों जैसी नहीं है कि जहाँ सीनियर सिटिज़न होते ही समाज और देश पर बोज बन जाने की परिस्थिति होती है, हमारे यहाँ ऐसा नहीं है। इतना बड़ा गुजरात, छ: करोड नागरिक और आज मुश्किल से १७० वृद्धाश्रम चलते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि वृद्ध लोग नहीं हैं, लेकिन आज भी समाज व्यवस्था में एक ताकत है जो अभी भी परिवार और समाज खुद ही बनाए रखता है और इसी लिए ये जो हमारी मूलभूत शक्ति है, इस शक्ति को पोसने की बड़ी जागरूकता से व्यवस्था करते रहने की आवश्यकता सर्वदा रहने वाली है। समाज-जीवन में एक बहुत बड़ा जो संकट पैदा हुआ है, वह संकट है जनरेशन गॅप का। और इस जनरेशन गॅप के संकट का सबसे ज़्यादा शिकार बनते हैं या तो वृद्ध या फिर बच्चे। क्योंकि तीन पीढ़ियों का समकालीन जीवन होता है और इसमें संतुलन बनाये रखने की वर्तमान पीढ़ी की क्षमता यदि कम हो जाती है तो असंतुलन पैदा होता है जिसका नुकसान सबसे ज़्यादा बुज़ुर्गों को और दूसरे क्रम में बच्चों को होता है। और ऐसे समय पर समाज-जीवन में एक संकलित व्यवस्था विकसित करने के प्रयास आवश्यक होते हैं।
जिस तरह से हम सीनियर सिटिज़न के लिए चिंतित हैं, उसी तरह बच्चों की चिंता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जब परिवार संयुक्त थे, तब एक परिवार खुद ही एक यूनिवर्सिटी के समान था। बच्चे के विकास में बुजुर्गों का महत्वपूर्ण योगदान रहता था। दादी से एक बात सीखता था, दादाजी से दूसरी सीखता था... माँ से एक बात, चाचा से दूसरी, मामा से तीसरी... और एक तरह से, संयुक्त परिवार की वजह से बच्चे का विकास एक यूनिवर्सिटी के रूप में होता था। समय के साथ माइक्रो फॅमिली आने से आज के बच्चे को यह सौभाग्य नहीं मिलता है और छोटी उम्र में ही उसे कहीं और टटोलना पडता है। उन्हें कुछ अलग वातावरण में जीना पडता है। इस तरह की स्थिति पैदा हुई है। बच्चा एक आया के भरोसे रहता है। और इस वजह से, बच्चा जैसा देखता है उसी के आधार पर जीवन को गढ़ने की कोशिश करता है। आज अगर हम सौ बच्चों को खिलौने की दुकान में ले जाएँ और उन्हें अपनी पसंद का खिलौना चुनने को कहें तो आश्चर्यजनक रूप से १०० में से ६० से ६५ बच्चे खिलौने में पिस्तौल को चुनते हैं। यह एक बड़ी चौंकानेवाली बात है। यदि वह बच्चा वात्सल्य, स्नेह से वंचित रहे, उसे उचित वातावरण न मिले तो वह बच्चा कहाँ जाएगा..? और परिवार में बुज़ुर्ग पीढ़ी बच्चों के जीवन की संरचना में एक बहुत ही सार्थक भूमिका निभाती है। जब इतनी बड़ी समस्या खड़ी हुई है तब गुजरात ने एक छोटा सा प्रयास किया है। गुजरात दुनिया का पहला राज्य है जिसने ‘चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी’ की कल्पना की है। बदलते युग के साथ, माइक्रो फॅमिली की स्थिति में हम अपने हाथ खड़े करके यह नहीं कह सकते कि हो जाएगा भाई, देख लेंगे वे लोग... नहीं! दीर्घद्रष्टि के साथ हमें नई व्यवस्थाएँ विकसित करनी पडेंगी। और इसी के एक समाधान के रूप में इस चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी द्वारा ऐसे संशोधन करने के प्रयास होंगे कि बच्चों के सर्वांगी विकास के लिए, माइक्रो फॅमिली होने के बावजूद भी, ऐसी कौन सी व्यवस्था विकसित की जा सकती है ताकि समाज-जीवन को उजागर कर सके ऐसी पीढ़ी तैयार हो । गुजरात ने इस दिशा में काम प्रारंभ किया है।
गुजरात सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रवृत्तियाँ चलती रहती हैं। वृद्धाश्रम भी चलते ही हैं, वृद्धाश्रमों को सरकार के द्वारा बहुत सारी वित्तीय सहायता की जाती है। लेकिन अब हम एक नया एप्रोच ले रहे हैं, क्लस्टर एप्रोच। आज परित्यक्त महिलाओं के लिए एक जगह पर व्यवस्था है, अनाथ बच्चों के लिए दूसरी जगह पर है, वृद्ध लोगों के लिए कहीं तीसरी जगह पर व्यवस्था है... ऐसी सरकारी व्यवस्थाएँ जो बिखरी हुई हैं और खर्च भी अधिक होता है, लेकिन चल रही हैं। हम इन परित्यक्त महिलाओं, अनाथ बच्चों और वृद्धों को एक ही कॅम्पस में लाने की सोच रहे हैं। यदि एक फॅमिली लाइफ एन्वायरमेन्ट क्रिएट होगा तो संभव है कि इन टुकड़ों में चल रही व्यवस्थाएँ समाज-जीवन की ताकत बन सकती हैं, इस दिशा में प्रयास शुरू किया है। आने वाले दिनों में ‘बाल गोकुलम’ प्रकार के केन्द्रों को विकसित करने की कोशिश करने वाले हैं। मुझे उम्मीद है कि इस दिशा में प्रयास करने के परिणामस्वरूप समाज-जीवन को एक नई शक्ति मिलेगी।
यह बात सच है कि यदि गुजरात की कोई सबसे बड़ी पहचान है तो वह है उसकी सेवावृत्ति और प्रवृत्तियाँ । हमारे यहाँ चेरिटी वर्क बड़े पैमाने पर होता है। महाजनों द्वारा जो प्रवृत्तियाँ सालों से चल रही थीं; आप किसी भी गाँव में जाओ... गौशाला, तो महाजन ने बनाई हो, पाठशाला, तो महाजन ने बनाई हो, पानी की प्याऊ, तो महाजन ने बनाई हो, लाइब्रेरी, तो महाजन ने बनाई हो... सदियों से हमारी यह ताकत रही है। ये काम किसी सरकार ने नहीं किए हैं। सदियों से इस महाजन परंपरा के कारण... और महाजन परंपरा का मतलब ही यह है कि समाज में चेरिटी एक ऐक्टिविटी का नाम बन गया है और उसके कारण समाज-जीवन में वह एक बड़ी शक्ति रही है। मुझे याद है, भूकंप के बाद जब मैं कच्छ में काम कर रहा था, उस समय विदेशी लोग बड़ी संख्या में वहाँ काम करने आए थे। शाम को वे लोग अपने जो छोटे टेंट अपने साथ लाये थे, उसमें चले जाते थे। तो मुझे भी उत्सुकता होती थी कि चलो जरा उन लोगों से मिलूं, जानूँ कि उनके अनुभव क्या हैं, क्या कहते हैं..! तो वे विदेशी लोग एक बात का आश्चर्य व्यक्त करते थे। उनमें से कई ग्रुप सीधे तुर्की से आए थे, जहाँ आखरी भूकंप हुआ था। उन्होंने कहा कि साहब, हम जहाँ भी भूकंप के लिए गए हैं, वहाँ केवल तीन या चार एन.जी.ओ. होते हैं, या तो डबल्यु.एच.ओ. हो, या फिर रेडक्रॉस वाले हों... सिर्फ यही एन.जी.ओ. काम करते हों। यहाँ हमारे लिए आश्चर्य यह है कि हर गली-मोहल्ले में कोई न कोई एन.जी.ओ. काम कर रहे हैं। कोई रसोई घर चलाता है, कोई पट्टी बाँधने का काम करता है, कोई फिजियोथेरेपी का काम करता है..! उन लोगों के लिए आश्चर्य का विषय था। यह हमारे समाज-जीवन की शक्ति है और इस शक्ति का प्रतिबिंब ऐसी एक सुचारु संगठित व्यवस्था में यहाँ 'शांति निकेतन' में नजर आ रहा है।
मुझे विश्वास है कि यह शांति निकेतन नई ऊर्जा भरने का एक केंद्र बनेगा। मुझे यकीन है कि गुजरातभर में या देशभर में, जहाँ भी वृद्धाश्रम के लिए इस तरह की प्रवृत्ति चलती हों, उनके लिए एक मॉडल बनेगा। इन सीनियर सिटिज़नों के अनुभव और उनकी शक्ति समाज की आनेवाली पीढ़ी के लिए क्रिएटीव वर्क में कैसे काम आए, वे इसमें भागीदार कैसे बने, यह एक प्रकार से सीनियर सिटिज़नों के अनुभवों को प्रवृत्तिमय बनाने का केंद्र कैसे बने... और हम जितना इस दिशा में ज्यादा सोचेंगे, हम यह एक नया नज़राना देश की जनता के सामने रख सकेंगे। उत्कर्षभाई और उनके परिवार को, दीपकभाई और उनके परिवार को अनेक अनेक अभिनंदन देता हूँ।
कांग्रेस असम को फिर से अशांति और अराजकता में झोंकना चाहती है: गुवाहाटी में पीएम मोदी
February 14, 2026
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इस साल के बजट में नॉर्थ-ईस्ट को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया गया है: असम में पीएम मोदी
असम शांति, सुरक्षा और तेज विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा: पीएम मोदी
दस साल तक सत्ता से बाहर रहने के बाद निराश कांग्रेस, असम को फिर से अस्थिरता में धकेलना चाहती है: पीएम का विपक्ष पर तीखा प्रहार
कांग्रेस के 70 साल के राज में ब्रह्मपुत्र पर सिर्फ 3 पुल बने; पिछले 10 से 11 सालों में बीजेपी-एनडीए ने 5 बड़े पुल पूरे किए हैं: असम रैली में पीएम
होकोलुके नमोस्कार जोनाइशु….
की खोबोर आपुनलुकोर?…
भाले आसे?…
जॉय आई अहोम..
जॉय आई अहोम…
जॉय आई अहोम !
मैं असम भारतीय जनता पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का हृदय से बहुत-बहुत अभिवादन करता हूं अभिनंदन करता हूं। बड़ी-बड़ी आमसभाएं करने का तो बहुत अवसर मिलता है, जनता-जनार्दन का दर्शन करना उन्हें संबोधित करना, ये लगातार चलता रहता है। लेकिन असम के बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं का दर्शन करना, ये मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है। आज भारतीय जनता पार्टी जहां पहुंची है उसका श्रेय उसकी क्रेडिट अगर किसी को मिलती है तो वो सिर्फ और सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं को मिलती है। हमारा विश्वास संगठन में है। हम राष्ट्र जीवन में परिवर्तन का आधार संगठन की शक्ति मानते हैं और इसलिए इतनी बड़ी तादाद में जमीन की जड़ों से जुड़े हुए कार्यकर्ताओं का दर्शन करना ये अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है। साथियों हमलोग एक ही मंत्र लेकर जीए हैं। हमलोग एक मंत्र को साकार करने के लिए अपने आप को खपा रहे हैं। और वो मंत्र है भारत माता की जय.. दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से मेरे साथ बोलिए भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की... वंदे...वंदे ... वंदे...
यहां इस विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में आए हुए भाजपा के हरेक कार्यकर्ता का हृदय से मैं स्वागत करता हूं अभिनंदन करता हूं। भाजपा में रहते हुए आपने मां भारती की सेवा को...जनता की सेवा को अपना धर्म बनाया है। आप सभी भाजपा कार्यकर्ता ही भाजपा की प्राणवायु है ऑक्सीजन है। भाजपा का कार्यकर्ता...परिश्रम की पराकाष्ठा करता है, और उसके कारण भारतीय जनता पार्टी आगे बढ़ती है। साथियों मैं गर्व से कहता हूं अगर मेरा सबसे बड़ा क्वालिफिकेशन है, मेरी सबसे बड़ी गौरवपूर्ण जीवन की बात है वो यही है कि नरेंद्र मोदी भाजपा का कार्यकर्ता है। और एक भाजपा कार्यकर्ता के तौर पर...मैं असम के अपने सभी कार्यकर्ता और भाइयों और बहनों को और संगठन की शक्ति को सर झुकाकर का नमन करता हूं।
साथियों,
मैं मां आदिशक्ति मां कामाख्या को भी कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं। मां कामाख्या की असम पर, असम वासियों पर बहुत कृपा रही है। उनके आशीर्वाद से असम ने, राष्ट्ररक्षा और देश की स्वतंत्रता, देश की संस्कृति को आगे बढ़ाने वाली अनेक संतानें दी हैं। ऐसी ही एक महान संतान, कविन्द्र पुरकायस्थ जी को मैं आज प्रणाम करता हूं। उन्होंने अपना पूरा जीवन असम और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। इसी योगदान को नमन करते हुए...बीजेपी-NDA सरकार को उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने का सौभाग्य मिला है। वर्ष 2014 के बाद, नॉर्थ ईस्ट के सवा सौ से अधिक महान व्यक्तित्वों को पदम् पुरस्कार मिले हैं। सवा सौ से अधिक... ये दिखाता है कि असम की धरती का, नॉर्थ ईस्ट की धरती का सामर्थ्य कितना बड़ा है। नॉर्थ ईस्ट का यही सामर्थ्य अब विकसित भारत का बहुत बड़ा आधार है।
साथियों,
कुछ दिन पहले ही, देश का बजट आया है। बजट के बाद, असम का, नॉर्थ ईस्ट का मेरा ये पहला दौरा है। जिस नॉर्थ ईस्ट को कांग्रेस ने हमेशा नजरअंदाज किया...हम उस नॉर्थ ईस्ट की भक्ति भाव से सेवा कर रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए अष्टलक्ष्मी है। इस वर्ष का बजट... अष्टलक्ष्मी के लिए बीजेपी-NDA के विजन को और मजबूती देने वाला है। बजट में बहुत अधिक फोकस... नॉर्थ ईस्ट को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है। इस साल असम को टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में... लगभग पचास हज़ार करोड़ रुपए मिलने वाले हैं।
साथियों,
कांग्रेस सरकार के समय असम को कैसे पाई-पाई के लिए तरसा कर रखा जाता था... वो भी आपको याद रखना है। कांग्रेस के समय असम को टैक्स के हिस्से के रूप में सिर्फ 10 हजार करोड़ रुपए मिलते थे। अब भाजपा सरकार में असम को कांग्रेस सरकार के मुकाबले 5 गुना ज्यादा रुपए मिल रहे हैं। अगर मैं पिछले 11 वर्ष की बात करूं..तो असम को तमाम विकास परियोजनाओं के लिए....केंद्र सरकार से साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए से अधिक मिले हैं। ये आंकड़ा आपको याद रहेगा… मैं जो आंकड़ा बोल रहा हूं वो आपको याद रहेगा आपको… केंद्र सरकार से साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए से अधिक मिले हैं। कितने… कितने.. पीछे से आवाज आनी चाहिए कितने… आप मुझे बताइए...जो कांग्रेस, असम के विकास के लिए पैसे देने से भी बचती हो...वो कांग्रेस क्या असम का विकास कर सकती है? असम का विकास कर सकती है, असम का विकास कर सकती है। आपका भला कर सकती है। … यहां के युवाओं का भला कर सकती है… यहां के किसानों का भला कर सकती है? यहां के गांवों का भला कर सकती है?
साथियों,
इस साल के बजट में...नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूती देने का काम किया गया है। कनेक्टिविटी बढ़ती है, तो रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। इसलिए असम में हाइवे और अन्य रोड प्रोजेक्ट्स के लिए...करीब हज़ारों करोड़ रुपए देना तय हुआ है। बजट में जो घोषणा हुई है, उससे असम में टूरिज्म का भी विस्तार होगा। अभी आपने देखा होगा...परीक्षा पे चर्चा का कार्यक्रम गुवाहाटी में हुआ था। हमने ब्रह्मपुत्र नदी में क्रूज पर विद्यार्थियों से चर्चा की थी। आने वाले समय में ब्रह्मपुत्र पर ऐसे ही रिवर टूरिज्म को और बढ़ाया जाएगा। मैं ऐसे ही वहां नहीं गया था। मैं देश को बताना चाहता था कि टूरिज्म के लिए इससे बेहतर जगह नहीं है। आओ ये मेरा आसाम है, ये मेरी ब्रह्मपुत्र है, आइए.. इस बार के बजट में, इसके लिए भी व्यवस्था की गई है।
साथियों,
आज के दिन देश की नज़रें असम पर हैं... सबने देखा कि असम का, नॉर्थ ईस्ट का सामर्थ्य क्या है। थोड़ी देर पहले जब मैं वायुसेना के विमान से मोरान के हाईवे पर उतरा... रनवे पर नहीं, हाईवे पर विमान से उतरा, तो एक नया इतिहास बन गया। कभी नॉर्थ ईस्ट का नाम आते ही लोग सोचते थे… अरे यार छोड़ो.. टूटी फूटी सड़कें, कोई ठिकाना नहीं, निकलें तो पता नहीं कब पहुंचेंगे वो भी एक वक्त था, ये भी एक वक्त है। और आज यहां ऐसे हाईवे बनकर तैयार हो रहे हैं.. जहां सिर्फ गाड़ियां ही नहीं चलतीं… बल्कि हवाई जहाज भी लैंड करते हैं।
साथियों,
आप मुझे बता दीजिए आपके हाईवे पर विमान लैंड हो, ये आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ… गर्व हुआ कि नहीं हुआ… तो अब अपना मोबाइल निकालिए और अपना फ्लैश लाइट ऑन कीजिए आपको गर्व हुआ है ना....? मोबाइल फोन निकालिए और फ्लैश लाइट ऑन कीजिए सबके सब दूर-दूर तक ये गर्व का पल है ये असम का बदलता हुआ मिजाज है हाथ बढ़ाकर ऊपर कर के दिखाइए। आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ… गर्व से मन भर गया कि नहीं भर गया बोलिए भारत माता की…
साथियों,
असम का इतना विकास इसलिए हो रहा है... क्योंकि यहां आप सभी की मेहनत से बीजेपी सरकार बनी है... यहां के नागरिकों ने भाजपा पर भरोसा किया है। आपने मेरा बूथ-सबसे मजबूत … मेरा बूथ- सबसे मजबूत, मेरा बूथ- सबसे मजबूत, की भावना से बूथ बूथ जाकर, एक-एक परिवार को मिलकर, एक-एक मतदाता को मिलकर बीजेपी के हर समर्थक को अपने साथ जोड़ा उन्हें उनके वोट की ताकत का परिचय करवाया । और इस प्रयास से ही, असम में बीजेपी की सरकार बनी। असम के इसी आशीर्वाद के कारण, असम के नागरिकों के वोट के कारण.. यहां लाखों गरीबों के घर बने लाखों परिवारों में शौचालय की व्यवस्था हुई। पीने का साफ पानी उनके घर तक पहुंचा। आप मुझे बताइए… गरीबों को घर मिलता है तो पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है। गरीब के घर टॉयलेट बनता है तो पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है… गरीब के घर में पीने का पानी पहुंचता है तो पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है। इस पुण्य का हकदार कौन है…इस पुण्य का हकदार कौन है… इस पुण्य का हकदार कौन है… इस पुण्य का अधिकार भारतीय जनता पार्टी के बूथ का कार्यकर्ता है। गरीबों को आय़ुष्मान योजना का लाभ मिला, उन्हें सुरक्षा और आत्मविश्वास मिला... इसलिए... इस बार भी आपको ऐसे ही अपने बूथ पर एक-एक वोट पर ध्यान रखना है...रखोगे… अब और कुछ मत करो बस पूरी ताकत बूथ पर लगा दो.. आपका बूथ विजयी होगा...तो बीजेपी विजयी होगी कि नहीं होगी। आपको विजय पाना है तो कहां पाना है, बूथ में विजय पाना है।
साथियों,
आज देश को सिर्फ एक और इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप नहीं मिली है... ये इस बात का भी प्रमाण है कि नया भारत, अपनी सुरक्षा के लिए हर तरह से तैयार हो रहा है। आज का भारत ना सिर्फ अपनी सीमाओं को सशक्त कर रहा है, बल्कि देश के दुश्मनों को उनके घर में घुसकर जवाब भी देता है। साथियों, आज ही पुलवामा हमले की बरसी है। मैं इस हमले में जान गंवाने वाले मां भारती के वीर सपूतों को नमन करता हूं। इस आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह आतंकियों को सजा दी, वो पूरी दुनिया ने देखा है। और कुछ लोग तो आज भी कांप रहे हैं। अभी आपने भारत की ये शक्ति ऑपरेशन सिंदूर में भी देखी है। लेकिन साथियों, मैं आपसे जानना चाहता हूं... क्या कभी कांग्रेस से हम देशहित के लिए इतनी हिम्मत के साथ फैसले करने की ताकत थी क्या ? वो कर सकते थे क्या। वो ज्यादा से ज्यादा बयान दे सकते हैं। कुछ नहीं कर सकते। जो कांग्रेस भारत को राष्ट्र मानने से भी इनकार करती हो... जो सवाल करते हैं कि मां भारती क्या होती है, जो मां भारती के नाम तक से परहेज करती हो, जो मां भारती के प्रति जरा सा सम्मान तक नहीं दिखाते, वो कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती। इसलिए कांग्रेस ने कभी देश की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी। कांग्रेस की सरकारों के इसी नकारेपन से.... पूरा नॉर्थ ईस्ट, डर और असुरक्षा में जीता था। कांग्रेस ने हमेशा देश को खतरे में डा के रखा। कांग्रेस के समय में जब भी सेना के लिए हथियार खरीदे गए... उसका मतलब होता था- हजारों करोड़ का घोटाला।
साथियों,
आज देश अपनी सेनाओं को मजबूत कर रहा है... भारत अपनी सीमाओं पर शानदार हाईवे, शानदार टनल्स, ऊंचे-ऊंचे ब्रिज, आधुनिक एयरफील्ड्स... ये सब बना रहा है... देश की सुरक्षा बढ़ा रहा है... और इसलिए कांग्रेस बौखलाई हुई है। उनको यही हो रहा है कि मोदी सब कैसे कर लेता है उन बेचारों को नींद नहीं आती… नींद नहीं आती । और जब नींद नहीं आती दो दिन में कुछ भी बोलते रहते हैं। साथियों, आज की कांग्रेस हर उस विचार.. हर उस आतंकी को कंधे पर बिठाती है... जो देश का बुरा सोचता है। जो लोग देश के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देखते हैं... जो लोग, नॉर्थ ईस्ट को भारत से अलग करने के नारे लगाते हैं... वो कांग्रेस के लिए पूजनीय बन चुके हैं। आजादी के समय मुस्लिम लीग ने देश का बंटवारा कराया... अब आज की कांग्रेस... मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस बनकर फिर देश बांटने में जुट गई है। ये एमएमसी है- माओवादी मुस्लिमलीगी कांग्रेस इसलिए आपको कांग्रेस से सावधान रहना है... और असम की जनता को भी सावधान करना है।
साथियों,
यहां जो नौजवान हैं, जो अभी 20-25 वर्ष के हैं... उन्हें कांग्रेस का कुशासन शायद पता नहीं होगा… याद नहीं होगा... कांग्रेस की सरकारें चाहे असम में रही हों या फिर दिल्ली में... उन्होंने असम को अपने हाल पर छोड़ दिया था। आज जब मैं यहाँ ब्रह्मपुत्र के तट पर खड़ा हूं... तो इस महान नदी का ही उदाहरण देता हूं। असम के विकास में... असम के लोगों के जीवन को आसान बनाने में... ब्रह्मपुत्र की बहुत बड़ी भूमिका है। लेकिन कांग्रेस के सत्तर साल के शासन में ब्रह्मपुत्र को पार करना हमेशा बड़ी चुनौती रहा। आज़ादी के बाद से लेकर 2014 तक… और उनके तो प्रधानमंत्री यहां से चुनकर गए थे यानी लगभग सात दशक में कांग्रेस सरकारों ने ब्रह्मपुत्र पर सिर्फ़ तीन पुल बनवाए थे। इतने दशकों में कितने पुल… कितने… आप कल्पना कर सकते हैं कि इतनी विशाल नदी पर, असम की इतनी बड़ी जनसंख्या को जीवन देने वाली नदी पर, सिर्फ तीन पुल बने थे। क्या ऐसी हालत में असम का तेज विकास संभव था ?
मेरे कार्यकर्ता साथियों,
2014 में आपकी मेहनत का परिणाम था कि मुझे भारत सरकार में देश की सेवा का अवसर मिला। उसके 2-3 साल बाद, आप सभी भाजपा कार्यकर्ताओं ने यहां डबल इंजन सरकार बनाई। और इसका नतीजा क्या हुआ? बीते 10-11 वर्षों में... बीजेपी-NDA सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी पर 5 बड़े पुल पूरे कर लिए हैं। ये आंकड़े याद रहेंगे ना? कांग्रेस की 70 साल की सत्ता में, सिर्फ तीन पुल बने थे... लेकिन हमने सिर्फ 10 वर्षों में 5 पुल बनाए हैं... यानि कांग्रेस ने असम को सिर्फ समस्याएं दीं... जबकि बीजेपी ने असम को समाधान दिए हैं।
साथियों,
आज गुवाहाटी के दो हिस्सों को जोड़ने वाले शानदार पुल का भी लोकार्पण हो गया है। इस सेतु का नाम, प्राचीन कामरूप के महाप्रतापी सम्राट... कुमार भास्कर वर्मन जी के नाम पर रखा गया है। ये लोग होते तो अपने परिवार के नाम पर ही चढ़ा देते। यानि ये भास्कर सेतु, असम के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और असम के समृद्ध इतिहास का संगम है। ये इस बात का प्रमाण है... कि बीजेपी तेज़ विकास करती है, और विरासत को भी आगे बढ़ाती है।
साथियों,
इस नए सेतु के बनने से... गुवाहाटी देश का एक बड़ा ग्रोथ सेंटर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा... सिक्स लेन के इस ब्रिज से... नौजवान हो या बुजुर्ग... किसान हो या उद्यमी... सबको फायदा होगा। और मैं आपको एक और बात बता दूं... यहां अभी ऐसे कई सारे पुलों पर काम चल रहा है। जब ये सभी तैयार हो जाएंगे, तो असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को बहुत तेज गति मिलने वाली है।
भाइयों और बहनों,
कांग्रेस के दशकों के कुशासन की सबसे बड़ी वजह रही है- कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति...वोट बैंक पॉलिटिक्स। कांग्रेस ने असम को हमेशा वोट के चश्मे से ही देखा... कांग्रेस ने हर वो काम किया, जिससे तुष्टिकरण को बढ़ावा मिले… और हर वो काम रोका, जिससे असम का विकास हो। कांग्रेस के समय..केंद्र सरकार की योजनाओं को असम तक पहुंचने में भी बरसों लग जाते थे। लेकिन साथियों, बीजेपी ने असम के विकास को, नॉर्थ ईस्ट के विकास को...हमेशा प्राथमिकता दी है। बीते 11 वर्षों में देखिए... जब भी कोई नई शुरुआत देश में हुई, तो तुरंत उसका लाभ नॉर्थ ईस्ट को भी मिला। कोई भी विलंब के बिना मिला। देश में सेमी-हाईस्पीड वंदेभारत ट्रेनें लॉन्च हुई... तो असम और नॉर्थ ईस्ट भी इससे शुरुआत में ही कनेक्ट हो गया। अभी कुछ समय पहले देश की पहली स्लीपर वंदेभारत ट्रेन असम से ही शुरू हुई है। जब देश ने तय किया... कि अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से काम करना है। और असम इस सेक्टर में भी ग्रोथ इंजन बन रहा है... और वो दिन दूर नहीं जब असम की चाय की तरह ही... असम की चाय की तरह ही...असम में बनी चिप्स की भी पूरी दुनिया में चर्चा होगी। चाय से लेकर के चिप्स तक असम की विकास यात्रा दिखाई देती है।
साथियों,
असम का ये प्यार मैं कैसे भूल सकता हूं। लेकिन मैं असम से वादा करता हूं कि आपने जो मुझे प्यार दिया है, उसे ब्याज समेत लौटाउंगा और विकास करके लौटाउंगा। मैं आपको डिजिटल कनेक्टिविटी का भी उदाहरण दूंगा। आप देखिए... कांग्रेस के समय में 3G और 4G टेक्नोलॉजी आई.. .ये टूजी के घोटाले भी आए लेकिन नॉर्थ ईस्ट तक, असम तक उसे तेजी से पहुंचाने के लिए कांग्रेस ने मेहनत ही नहीं की... और जब भाजपा सरकार में 5G टेक्नॉलॉजी आई तो हमने क्या किया? हमने इस टेक्नॉलजी को पूरे असम में, पूरे नॉर्थ ईस्ट में... गांव गांव तक पहुंचाने के लिए काम किया। इस सैचुरेशन अप्रोच के कारण, आज गुवाहाटी के युवाओं को हाई-स्पीड इंटरनेट का लाभ मिल रहा है। और अब असम में NIC डेटा सेंटर की भी शुरुआत हुई है, ये डेटा सेंटर, यहां के नौजवानों को बहुत बड़ा लाभ देने वाला है।
साथियों,
एक और उदाहरण स्वास्थ्य सेवाओं का भी है। कांग्रेस ने दशकों तक AIIMS के विस्तार पर ध्यान नहीं दिया। जब अटल जी की सरकार बनी तो एम्स की संख्या बढ़ाई गई। इसके बावजूद हालत ये थी कि 2014 में देश में सिर्फ 6 एम्स थे। आपने 2014 में मोदी को देश की सेवा का अवसर दिया... और आज देश में एम्स की संख्या बढ़कर 20 से ज्यादा हो चुकी है। बीजेपी सरकार ने एम्स गुवाहाटी का भी निर्माण किया है। इसके अलावा असम में कई मेडिकल कॉलेज और कैंसर हॉस्पिटल भी खोले गए हैं। और कल ही, हमने पीएम राहत स्कीम को भी मंजूरी दी है... देश के किसी भी हिस्से में, अगर कोई भी व्यक्ति किसी दुर्घटना में घायल होता है... तो केंद्र की सरकार की ओर से, उसका डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में कराया जाएगा। एक्सीडेंट के बाद तुरंत मदद मिलने से जान बच जाती है।
साथियों,
यहां आए भाजपा कार्यकर्ताओं में बड़ी संख्या में मेरे युवा बेटे-बेटियों की है...आप याद रखिए...देश में जब मैनेजमेंट और उच्च शिक्षा की बात होती थी...तो असम और नॉर्थ ईस्ट के युवाओं के पास सिर्फ पलायन का ही विकल्प होता था। लेकिन आज देखिए...IIM पालसबारी का नया कैंपस शुरू हो चुका है। IIT गुवाहाटी का भी आधुनिकीकरण हो रहा है। इसके अलावा असम में IARI की भी स्थापना की गई है। ये संस्थान, असम में नए टेक्नॉलजी लीडर्स को तैयार करेगी।
साथियों,
आज केंद्र की बीजेपी-NDA सरकार...देश के छोटे-छोटे शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का जाल बिछा रही है। आज ही, मुझे गुवाहाटी में हंड्रेड, सौ इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाने का अवसर मिला है। इस वर्ष के बजट में भी पूर्वोदय स्कीम के तहत चार हज़ार इलेक्ट्रिक बसों की घोषणा की गई है। इससे आने वाले समय में बहुत बड़ी संख्या में असम को भी इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं।
साथियों,
कांग्रेस ने असम के साथ एक और बहुत बड़ा अन्याय किया है। कांग्रेस ने असम को अशांत रखा...हिंसा और अलगाव में रखा। आज़ादी के बाद से ही असम, बम-बंदूक, बंद-ब्लॉकेड और कर्फ्यू की चपेट में रहा। और इसकी गुनहगार कांग्रेस ही थी। मुझे याद है जब मैं यहां संगठन का काम करता था तो मैं वापस जाने का भी कार्यक्रम बना के आता था। लेकिन यहा मैं कार्यक्रम नहीं कर पाता था क्यों, क्योंकि कहीं ब्लॉकेड है, कहीं जा नहीं सकते, रास्ते बंद हैं। तो मुझे तो कभी -कभी तो तीन दिन के लिए आया था सात दिन तक वापस नहीं जा पाता था। काम ही नहीं कर पाता था, ये हालत करके रखी थी। लेकिन साथियों भाजपा-एनडीए सरकार, असम में शांति बहाली और तेज विकास का संकल्प लेकर चल रही है। इसलिए जो असम कभी बम धमाकों से गूंजता था...उसी असम में अब शांति की स्थापना हो रही है। जिस असम में हर साल औसतन एक हज़ार से ज़्यादा लोग हिंसा में मारे जाते थे...आज वहां हिंसा की घटनाएं बंद हो रही हैं। पहली बार असम में बोडो, कार्बी, आदिवासी, DNLA, उल्फा ऐसे हर सगंठन से जुड़े साथियों ने बंदूक छोड़कर...देश के संविधान का रास्ता चुना है...शांति और विकास की राह पकड़ी है। लेकिन मेरे कार्यकर्ता साथियों, आपको भूलना नहीं है...10 वर्ष सत्ता से बाहर रहने की वजह से कांग्रेस और ज्यादा जहरीली हो गई है। उनके टॉप लीडर से नीचे तक उनकी जुबान से जहर ही निकलता है। कांग्रेस असम को फिर से अशांति और अराजकता में झोंकना चाहती है। कांग्रेस...असम को घुसपैठियों के हवाले करना चाहती है। आप इनके दिल्ली के नेताओं को देखिए...यहां जो इनके नेता हैं, उनको देखिए...ये सब घुसपैठियों को बचाने में ही लगे हुए हैं। कांग्रेस, असम की असल पहचान को मिटाना चाहती है।
साथियों,
आने वाले पांच साल असम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान ऐसे अनेक प्रोजेक्ट पूरे होने वाले हैं...जो असम की ग्रोथ को नए पंख लगाएंगे...इसलिए यहां डबल इंजन की बीजेपी सरकार बहुत जरूरी है। इसलिए बीजेपी के हर कार्यकर्ता को याद रखना है... असम के तेज विकास के लिए... आको एबार, बीजेपी सोरकार। असम के युवाओं को रोजगार के लिए... आको एबार,बीजेपी सोरकार। असम की बेटियों को नए अवसरों के लिए... आको एबार,बीजेपी सोरकार। असम की पहचान बचाने के लिए... आको एबार, बीजेपी सोरकार।
साथियों,
आज यहां आप सब का ये जोश देखकर, असम की महाविजय का मेरा विश्वास और मजबूत हो गया है। मुझे पूरा भरोसा है, कि इस बार और बड़े बहुमत से…असम में हमारी सरकार की वापसी होने वाली है। लेकिन साथियों, याद रखिएगा... हमें सिर्फ चुनाव ही नहीं जीतना है, हमें निरंतर असम के लोगों का मन भी जीतना है...उनका दिल भी जीतना है। और इसके लिए असम के एक-एक भाजपा कार्यकर्ता को... एक एक पदाधिकारी को, सभी पदाधिकारी को पूरे परिश्रम से काम करना है। जब तक असम में वोटिंग का काम नहीं होता है। जब तक काउंटिंग नहीं होता है, जब तक भाजपा की नई सरकार की शपथ नहीं होती है तब तक, हमें हर दिन अपने क्षेत्र के हर घर में जाना है।.हर घर में, लोगों को मिलकर उनकी आकांक्षा अपेक्षा सुननी है। लोगों को अपने काम बताने हैं, उनके काम आना है। एक एक पन्ना प्रमुख, एक एक बूथ वर्कर को अगले 2 महीने खूब मेहनत करनी है। अगले 2 महीने एक एक घर में, एक-एक असमिया भाई बहन तक...अपनी सरकार के विजन को पहुंचाना है...
साथियों,
असम में तीसरी बार बीजेपी-एनडीए सरकार...असम के तीन गुना विकास का रास्ता बनाएगी। इसलिए हर एक कार्यकर्ता का एक ही मंत्र होना चाहिए- मेरा बूथ...मेरा बूथ... मेरा बूथ.. सबसे मजबूत...मोर बूथ.. मोर बूथ... मोर बूथ
साथियों,
आप मेरा एक और काम करेंगे...? पक्का करेंगे ?... ये सारी बातें याद रखेंगे? पूरी तरह लागू करेंगे ? एक-एक मतदाता तक पहुंचेंगे? उनको बताना मोदी जी आपके लिए ही जी रहे हैं... बताएंगे? बताएंगे? बोलिए भारत माता की... भारत माता की...भारत माता की... बहुत-बहुत धन्यवाद...