आदरणीय अडवाणीजी, माननीय श्री श्रेणिकभाई, दिपकभाई, आज के कार्यक्रम के केन्द्र बिन्दु भाई श्री उत्कर्षभाई, मंच पर बिराजमान सारे श्रेष्ठी जन, बुजुर्गों, माताओं, भाईयों और बहनों..!
समाज-जीवन में प्रवाह कितनी तेज़ी से बदल रहे हैं इसका प्रतीक यानि इस प्रकार की प्रवृति। हम सब पाँच हजार साल से भी लम्बे समय से एक समाजिक शक्ति के रूप जिए, जिसका मूल कारण था हमारी परिवार व्यवस्था। सारे विश्व की जितनी भी समाज व्यवस्थाएँ हैं, उन सारी समाज व्यवस्थाओं में से यदि किसी भी व्यवस्था में कोई आंतरिक ऊर्जा है, जो स्वयं ही जीवन शक्ति है, जिसमें खुद ही ऊर्जा संचित करने की क्षमता है तो वह केवल भारत की बृहद् परिवार व्यवस्था है। लेकिन कालक्रम के साथ-साथ युग बदलते गए, गुलामी काल के १२०० साल में समाज-जीवन पर कई झटके लगे, समयानुकूल परिवर्तन के लिए हमें मौका नहीं मिल सका। सामाजिक नेतृत्व करने वालों की शक्ति बहुधा गुलामी से आजादी पाने के आंदोलनों में खर्च हो गई और इसी कारण १२०० सालों का समय ऐसा गुजरा जिसमें जो समयानुकूल परिवर्तन होने चाहिये थे वे नहीं हो सके। और परिणाम स्वरूप जिस तरह किसी पुरानी इमारत को समय समय पर नहीं संभाला जाए तो वह धीरे-धीरे क्षीण होती जाती है, उसी तरह से हमारी समाज व्यवस्था, परिवार व्यवस्था भी कमजोर होने लगी और फिर उससे बचने के लिए समाज ने जो नये-नये तरीके अपनाए उनमें से एक; धीरे-धीरे हम सब माइक्रो फॅमिली की ओर मुडे। और जब ऐसी परिस्थिति खड़ी होती है तब स्वाभाविक रूप से ही नई व्यवस्थाएँ विकसित करनी पड़ती हैं, नई व्यवस्थाओं को अनुमोदन देना पड़ता है और तभी हम समाज के किसी एक बड़े वर्ग को सँभाल सकते हैं। यह बात सही है कि हमारी स्थिति दुनिया के उन देशों जैसी नहीं है कि जहाँ सीनियर सिटिज़न होते ही समाज और देश पर बोज बन जाने की परिस्थिति होती है, हमारे यहाँ ऐसा नहीं है। इतना बड़ा गुजरात, छ: करोड नागरिक और आज मुश्किल से १७० वृद्धाश्रम चलते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि वृद्ध लोग नहीं हैं, लेकिन आज भी समाज व्यवस्था में एक ताकत है जो अभी भी परिवार और समाज खुद ही बनाए रखता है और इसी लिए ये जो हमारी मूलभूत शक्ति है, इस शक्ति को पोसने की बड़ी जागरूकता से व्यवस्था करते रहने की आवश्यकता सर्वदा रहने वाली है। समाज-जीवन में एक बहुत बड़ा जो संकट पैदा हुआ है, वह संकट है जनरेशन गॅप का। और इस जनरेशन गॅप के संकट का सबसे ज़्यादा शिकार बनते हैं या तो वृद्ध या फिर बच्चे। क्योंकि तीन पीढ़ियों का समकालीन जीवन होता है और इसमें संतुलन बनाये रखने की वर्तमान पीढ़ी की क्षमता यदि कम हो जाती है तो असंतुलन पैदा होता है जिसका नुकसान सबसे ज़्यादा बुज़ुर्गों को और दूसरे क्रम में बच्चों को होता है। और ऐसे समय पर समाज-जीवन में एक संकलित व्यवस्था विकसित करने के प्रयास आवश्यक होते हैं।
जिस तरह से हम सीनियर सिटिज़न के लिए चिंतित हैं, उसी तरह बच्चों की चिंता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जब परिवार संयुक्त थे, तब एक परिवार खुद ही एक यूनिवर्सिटी के समान था। बच्चे के विकास में बुजुर्गों का महत्वपूर्ण योगदान रहता था। दादी से एक बात सीखता था, दादाजी से दूसरी सीखता था... माँ से एक बात, चाचा से दूसरी, मामा से तीसरी... और एक तरह से, संयुक्त परिवार की वजह से बच्चे का विकास एक यूनिवर्सिटी के रूप में होता था। समय के साथ माइक्रो फॅमिली आने से आज के बच्चे को यह सौभाग्य नहीं मिलता है और छोटी उम्र में ही उसे कहीं और टटोलना पडता है। उन्हें कुछ अलग वातावरण में जीना पडता है। इस तरह की स्थिति पैदा हुई है। बच्चा एक आया के भरोसे रहता है। और इस वजह से, बच्चा जैसा देखता है उसी के आधार पर जीवन को गढ़ने की कोशिश करता है। आज अगर हम सौ बच्चों को खिलौने की दुकान में ले जाएँ और उन्हें अपनी पसंद का खिलौना चुनने को कहें तो आश्चर्यजनक रूप से १०० में से ६० से ६५ बच्चे खिलौने में पिस्तौल को चुनते हैं। यह एक बड़ी चौंकानेवाली बात है। यदि वह बच्चा वात्सल्य, स्नेह से वंचित रहे, उसे उचित वातावरण न मिले तो वह बच्चा कहाँ जाएगा..? और परिवार में बुज़ुर्ग पीढ़ी बच्चों के जीवन की संरचना में एक बहुत ही सार्थक भूमिका निभाती है। जब इतनी बड़ी समस्या खड़ी हुई है तब गुजरात ने एक छोटा सा प्रयास किया है। गुजरात दुनिया का पहला राज्य है जिसने ‘चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी’ की कल्पना की है। बदलते युग के साथ, माइक्रो फॅमिली की स्थिति में हम अपने हाथ खड़े करके यह नहीं कह सकते कि हो जाएगा भाई, देख लेंगे वे लोग... नहीं! दीर्घद्रष्टि के साथ हमें नई व्यवस्थाएँ विकसित करनी पडेंगी। और इसी के एक समाधान के रूप में इस चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी द्वारा ऐसे संशोधन करने के प्रयास होंगे कि बच्चों के सर्वांगी विकास के लिए, माइक्रो फॅमिली होने के बावजूद भी, ऐसी कौन सी व्यवस्था विकसित की जा सकती है ताकि समाज-जीवन को उजागर कर सके ऐसी पीढ़ी तैयार हो । गुजरात ने इस दिशा में काम प्रारंभ किया है।
गुजरात सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रवृत्तियाँ चलती रहती हैं। वृद्धाश्रम भी चलते ही हैं, वृद्धाश्रमों को सरकार के द्वारा बहुत सारी वित्तीय सहायता की जाती है। लेकिन अब हम एक नया एप्रोच ले रहे हैं, क्लस्टर एप्रोच। आज परित्यक्त महिलाओं के लिए एक जगह पर व्यवस्था है, अनाथ बच्चों के लिए दूसरी जगह पर है, वृद्ध लोगों के लिए कहीं तीसरी जगह पर व्यवस्था है... ऐसी सरकारी व्यवस्थाएँ जो बिखरी हुई हैं और खर्च भी अधिक होता है, लेकिन चल रही हैं। हम इन परित्यक्त महिलाओं, अनाथ बच्चों और वृद्धों को एक ही कॅम्पस में लाने की सोच रहे हैं। यदि एक फॅमिली लाइफ एन्वायरमेन्ट क्रिएट होगा तो संभव है कि इन टुकड़ों में चल रही व्यवस्थाएँ समाज-जीवन की ताकत बन सकती हैं, इस दिशा में प्रयास शुरू किया है। आने वाले दिनों में ‘बाल गोकुलम’ प्रकार के केन्द्रों को विकसित करने की कोशिश करने वाले हैं। मुझे उम्मीद है कि इस दिशा में प्रयास करने के परिणामस्वरूप समाज-जीवन को एक नई शक्ति मिलेगी।
यह बात सच है कि यदि गुजरात की कोई सबसे बड़ी पहचान है तो वह है उसकी सेवावृत्ति और प्रवृत्तियाँ । हमारे यहाँ चेरिटी वर्क बड़े पैमाने पर होता है। महाजनों द्वारा जो प्रवृत्तियाँ सालों से चल रही थीं; आप किसी भी गाँव में जाओ... गौशाला, तो महाजन ने बनाई हो, पाठशाला, तो महाजन ने बनाई हो, पानी की प्याऊ, तो महाजन ने बनाई हो, लाइब्रेरी, तो महाजन ने बनाई हो... सदियों से हमारी यह ताकत रही है। ये काम किसी सरकार ने नहीं किए हैं। सदियों से इस महाजन परंपरा के कारण... और महाजन परंपरा का मतलब ही यह है कि समाज में चेरिटी एक ऐक्टिविटी का नाम बन गया है और उसके कारण समाज-जीवन में वह एक बड़ी शक्ति रही है। मुझे याद है, भूकंप के बाद जब मैं कच्छ में काम कर रहा था, उस समय विदेशी लोग बड़ी संख्या में वहाँ काम करने आए थे। शाम को वे लोग अपने जो छोटे टेंट अपने साथ लाये थे, उसमें चले जाते थे। तो मुझे भी उत्सुकता होती थी कि चलो जरा उन लोगों से मिलूं, जानूँ कि उनके अनुभव क्या हैं, क्या कहते हैं..! तो वे विदेशी लोग एक बात का आश्चर्य व्यक्त करते थे। उनमें से कई ग्रुप सीधे तुर्की से आए थे, जहाँ आखरी भूकंप हुआ था। उन्होंने कहा कि साहब, हम जहाँ भी भूकंप के लिए गए हैं, वहाँ केवल तीन या चार एन.जी.ओ. होते हैं, या तो डबल्यु.एच.ओ. हो, या फिर रेडक्रॉस वाले हों... सिर्फ यही एन.जी.ओ. काम करते हों। यहाँ हमारे लिए आश्चर्य यह है कि हर गली-मोहल्ले में कोई न कोई एन.जी.ओ. काम कर रहे हैं। कोई रसोई घर चलाता है, कोई पट्टी बाँधने का काम करता है, कोई फिजियोथेरेपी का काम करता है..! उन लोगों के लिए आश्चर्य का विषय था। यह हमारे समाज-जीवन की शक्ति है और इस शक्ति का प्रतिबिंब ऐसी एक सुचारु संगठित व्यवस्था में यहाँ 'शांति निकेतन' में नजर आ रहा है।
मुझे विश्वास है कि यह शांति निकेतन नई ऊर्जा भरने का एक केंद्र बनेगा। मुझे यकीन है कि गुजरातभर में या देशभर में, जहाँ भी वृद्धाश्रम के लिए इस तरह की प्रवृत्ति चलती हों, उनके लिए एक मॉडल बनेगा। इन सीनियर सिटिज़नों के अनुभव और उनकी शक्ति समाज की आनेवाली पीढ़ी के लिए क्रिएटीव वर्क में कैसे काम आए, वे इसमें भागीदार कैसे बने, यह एक प्रकार से सीनियर सिटिज़नों के अनुभवों को प्रवृत्तिमय बनाने का केंद्र कैसे बने... और हम जितना इस दिशा में ज्यादा सोचेंगे, हम यह एक नया नज़राना देश की जनता के सामने रख सकेंगे। उत्कर्षभाई और उनके परिवार को, दीपकभाई और उनके परिवार को अनेक अनेक अभिनंदन देता हूँ।
UDF और LDF कट्टरपंथी ताकतों को बढ़ावा देकर और करप्शन में लिप्त होकर डबल नुकसान पहुंचा रहे हैं: पीएम मोदी
April 02, 2026
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जैसे सच्चा खिलाड़ी अहम मौके पर शिखर पर पहुंचता है, वैसे ही मतदान करीब आते ही कार्यकर्ताओं को अपनी मेहनत, पहुंच और प्रतिबद्धता बढ़ानी चाहिए: क्रिकेटर संजू सैमसन के करियर उदाहरण के साथ पीएम मोदी
कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों ने लगातार तुष्टीकरण को बढ़ावा दिया है और वोट-बैंक की राजनीति के लिए कट्टरपंथी तत्वों के साथ गठबंधन किया है: केरलम के लोगों से पीएम मोदी
केरलम के युवा बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री और रोजगार के मौकों की चाहत से प्रेरित होकर बदलाव चाहते हैं: पीएम मोदी
नमस्कारम।
केरल में, केरलम में चुनाव प्रचार बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ये स्पष्ट है कि इस बार केरलम सिर्फ नई सरकार ही नहीं, नई व्यवस्था के लिए मन बना चुका है। इसमें बीजेपी-एनडीए के पक्ष में एक वेव चल रही है। ‘मेरा बूथ सबसे मज़बूत’ के मंत्र के साथ आप सभी बूथ पर काम कर रहे हैं, बीजेपी को मज़बूत कर रहे हैं। मैं आप सभी के अनुभव जानने के लिए बहुत उत्सुक हूं। चलिए, बातचीत की शुरुआत करते हैं। सबसे पहले कौन बात करने वाले हैं?
अनीताजी- नमस्ते मोदी जी, मेरा नाम अनीता कुमारी आर है। मैं तिरुवनंतपुरम ज़िले में चिरयिनकीझु में काम करती हूं बीजेपी के लिए। मैं एक आशा वर्कर भी हूं। मैं पिछले 15 साल बीजेपी में काम करती हूं। 19 साल से आशा वर्कर भी है। मैं बीजेपी में काम करने के लिए बहुत गर्व करती हूं और मैं संगठन मंडल की महासचिव भी हूं।
पीएम- अनीता जी, राजनीति के जो जानकार हैं वो कह रहे हैं कि तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की जीत के बाद से पार्टी कार्यकर्ताओं और केरलम की जनता दोनों में बहुत जोश है। और मैं कुछ दिन पहले पालक्काड में एक सभा के लिए गया था। त्रिशूर में एक रोड शो भी किया था। मुझे हर जगह पर केरलम के लोगों का एक नया उत्साह, बीजेपी के प्रति एक अलग जोश दिखा है। इसे केरलम की पॉलिटिक्स में टर्निंग पॉइंट भी बताया जा रहा है। आपका ग्राउंड पर एक्सपीरियंस क्या है? आप क्या अनुभव कर रहे हैं?
अनीता जी- मोदी जी, मैं एक कोस्टल एरिया से आ रही हूं। पिछले सालों में ये एरिया में बीजेपी के लिए एक बूथ इंचार्ज को मिलना भी मुश्किल था। पर आज-कल उन्हीं लोगों, वो मछली पकड़ने वाले लोगों बहुत ज़्यादा नंबर में बीजेपी में आ रहे हैं। आजकल मैं उनके साथ काम करती हूं और मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले दिन में बीजेपी को ये कोस्टल एरिया में एक मज़बूत पार्टी हम सब मिलकर बनाएंगे।
पीएम- अनीता जी, आपने काफी अच्छी जानकारी दी है। आपका उत्साह भी आपके शब्दों में दिखाई दे रहा है। देखिए तिरुवनंतपुरम ने एक रास्ता दिखाया है। लेफ्ट और कांग्रेस वालों को लगता था कि कुछ भी हो, कितना ही बड़ा मिसरूल हो, मिसमैनेजमेंट हो, केरलम में बारी-बारी उनको ही मौका मिलेगा। तिरुवनंतपुरम ने उस परसेप्शन को तोड़ा है। इसलिए आप देखिए यूडीएफ और एलडीएफ एक-दूसरे से ज़्यादा इस बार बीजेपी को टारगेट कर रहे हैं।
सुहृत्तुक्कले,
मेरे कुछ सुझाव हैं जो आने वाले कुछ दिनों में काम आ सकते हैं। आज-कल क्रिकेट का सीजन चल रहा है और केरलम के लोगों के लिए इसमें भी एक सीखने की चीज़ है। जैसे हम अक्सर संजू सैमसन की परफॉर्मेंस में देखते हैं। संजू सैमसन को हमने वर्ल्ड कप में देखा कि जैसे-जैसे टूर्नामेंट में क्रंच सिचुएशन आती गई, नॉकआउट स्टेज आया, उनकी परफॉर्मेंस एकदम से पीक पर पहुंच गई। शुरू से लेकर लास्ट तक उनका फोकस, उनका कॉन्फिडेंस और उनकी इंटेंसिटी लगातार बढ़ती गई। यही एक सच्चे खिलाड़ी की पहचान होती है।
जब टीम को सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो, तब वो अपना बेस्ट करके दिखाए। इसलिए जब वोटिंग का दिन आए और अब जो जितने दिन बचे हैं, बहुत ज़्यादा दिन तो बचे नहीं हैं, हमारी सक्रियता और हमारा संपर्क हर घर तक और ज़्यादा मज़बूत होना चाहिए। पहले अगर 6 घंटे काम करते थे तो अब 9 घंटे करना चाहिए। पहले 9 घंटा काम करते थे तो 12 घंटा करना चाहिए। पहले अकेले करते थे तो अब पूरे परिवार को मैदान में उतारना चाहिए। घर के सब सदस्यों को काम में लगाना चाहिए।
देखिए आप बूथ में काम करने वाले कार्यकर्ता हैं और हमें बूथ को मज़बूत बनाना है। बूथ मज़बूत होगा तो विजय पक्का होगा। और इसके लिए तो मेरा आग्रह है आपको 9 अप्रैल से पहले अपने बूथ के हर परिवार के पास कम से कम तीन बार जाना है और घर में बैठकर एक-एक व्यक्ति से बात करना है। एक-एक मतदाता को भाजपा के लिए वोट कराने के लिए आपको उसे समझाना है। उन्हें बताइए कि बीते वर्षों में केरलम में सेंट्रल गवर्नमेंट की स्कीम्स पर, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के काम पर कैसे ये यूडीएफ-एलडीएफ वाले रुकावटें डालते गए। केरलम में ऐसी डबल इंजन सरकार चाहिए जो खुद भी काम करे और केंद्र के काम को भी आगे बढ़ाइए। अनीता जी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, आप जो भी क्षेत्र में काम करती है वहां पूरी तरह विजय प्राप्त कीजिए.. चलिए आगे चलते है अगले साथी कौन है।
विनीताजी- नमस्ते मोदी जी, मेरा नाम विनीता केके है। ज़िला वायनाड में मानंतवाडी में मैं रहती हूं। मैं वीबी जीरामजी में काम करती हूं और खेती भी करती हूं। आपके मैं 8 नंबर बूथ का अध्यक्ष हूं और आज आपके साथ बात करने में बहुत खुशी हुआ है।
पीएम- विनीता जी, मेरे लिए बहुत खुशी की बात है कि केरल के कोने में आपको काम करते देखना और आज आपसे बात करने का अवसर मिलना। आपसे मैं एक और बात जानना चाहता हूं। ये तो साफ-साफ नज़र आता है कि केरलम के लोग एलडीएफ और यूडीएफ की लूट से तंग आ चुके हैं। आप जब अपने बूथ पर लोगों से मिलते हैं तो वे बीजेपी से क्या एक्सपेक्ट करते हैं? क्या अपेक्षाएं हैं? वे केरलम में बीजेपी-एनडीए से कैसी सरकार की उम्मीद करते हैं?
विनीताजी- नमस्ते मोदी जी, जब हम घर-घर जाती हूं उस समय उधर के लोग कहते हैं कि हमारा केरल में मोदी जी जैसा एक सीएम चाहिए। मोदी मॉडल सत्ता चाहिए, सरकार चाहिए। केरल जो मुश्किलों में अब फंसी हुई है, इस मुश्किलों से बाहर आने के लिए हमें मोदी जी जैसा एक सीएम चाहिए और मोदी जी का सरकार जैसा सरकार चाहिए। केरल का लोग ये प्रतीक्षा में है।
पीएम- विनीता जी आप पब्लिक स्पीच देती हैं क्या? भाषण करती हैं क्या?
विनीताजी- थोड़ा-थोड़ा भाषण देती हूं और पिछले लोकल बॉडी इलेक्शन में कैंडिडेट भी थी। इसका एक्सपीरियंस है मेरे पास।
पीएम- विनीता जी आपको सुनकर के मैं सचमुच में बहुत मुझे आश्चर्य हुआ है कि आप अनुसूचित जनजाति समाज से और वो भी अत्यंत गरीब परिवार से और वो भी दैनिक मज़दूर के रूप में जीरामजी में काम करती हो और इतने बढ़िया तरीके से, इतने स्पष्ट शब्दों में आप शानदार बात करती हो। मुझे बहुत गर्व हुआ कि मेरी पार्टी में छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी इतने सामर्थ्यवान हैं। सबसे पहले तो मैं आगे बात करने से पहले आपको इस बात के लिए बहुत बधाई देता हूं।
पीएम- विनीता जी, आपने जो कहा मुझे बहुत सच लगता है क्योंकि मैं पिछले दिनों जब केरलम में आया और चुनाव रैलियों में जो मैंने वातावरण देखा, उससे मुझे साफ लगता है कि केरलम इस बार बीजेपी-एनडीए को अवसर देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। हमें केरलम की जनता के इस विश्वास को अब अटूट भरोसे में बदलना है।
मैं सभी केरलम के बूथ के कार्यकर्ताओं से आग्रह करना चाहूंगा और इसके लिए मैं आपसे कुछ बातें बताता रहता हूं जो आप अपने बूथ के मतदाताओं के बीच लेकर जा सकते हैं। आप अपने बूथ के लिए अगले 5 साल का रोडमैप बनाइए। बूथ के लोग जो परिवर्तन देखना चाहते हैं, इसमें उन अपेक्षाओं का ब्लूप्रिंट ही दिखाई देना चाहिए। बीजेपी-एनडीए सरकार उसके आधार पर आने वाले 5 वर्षों में इसके आधार पर काम करेगी। ये गारंटी मोदी की तरफ से आपको देनी है। आप लोगों को घर-घर जाकर के भरोसा दीजिए कि एक बार बीजेपी-एनडीए को ज़रूर वोट दें।
कांग्रेस और कम्युनिस्टों को आप सबने 75 साल दिए हैं। बीजेपी-एनडीए को 5 साल देकर देखिए। और बड़े विश्वास से बताइए, पूरे देश में हमें जहां-जहां मौका मिला है, हर राज्य में हमारे कार्यकर्ताओं ने वहां की अद्भुत सेवा की है। ये विश्वास के साथ बताइए। और विनीता जी, मैं तो चाहूंगा कि वहां के जो मीडिया वाले हैं वे आपकी और आपके सांसद की पब्लिक में डिबेट करवा दें। आप दोनों का आमने-सामने भाषण करवा दें। मैं पक्का मानता हूं, आप अपने सांसद से भी बहुत बढ़िया भाषण कर दोगी। चलिए आगे कौन साथी बात करेंगे।
श्रीकुमार- नमस्ते मोदी जी, मेरा नाम श्रीकुमार वी है। मैं 1998 से इंडियन आर्मी में काम किया। सिक्स मद्रास बसंतार यूनिट में था और 2016 में आर्मी से रिटायर होने के बाद अब बीजेपी में काम करता हूं। मैं मंडल सचिव हूं और पंदलम नगरपालिका म्युनिसिपैलिटी काउंसलर भी है।
पीएम- श्रीकुमार जी, आपने तो अपनी जवानी देश के लिए खपा दी है। एक सैनिक के नाते एक बहुत ही जज़्बे के साथ आपने देश के लिए जीवन जिया है। और मैंने देखा है कि जो पूर्व सैनिक हैं उनके दिल में देशभक्ति इतनी भरी रहती है कि वे हमेशा भाजपा को पसंद करते हैं। और आपने भाजपा के माध्यम से देश की सेवा जारी रखी है। इतना ही नहीं, आपको आपके वहां के लोगों ने भी सेवा करने का अवसर दिया, आपको चुन करके भेजा। मैं सबसे पहले तो आपको आपकी इस देशभक्तिपूर्ण प्रेरक यात्रा के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
श्रीकुमार वी, केरल में जो स्टेटस को रहा है इससे सबसे ज्यादा बेचैन हमारे युवा रहे हैं। उनको लगता है कि एलडीएफ को सत्ता मिले या यूडीएफ को, यूथ की मजबूरी माइग्रेशन ही है। इसलिए वे इफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने वाली बीजेपी को मौका देना चाहते हैं। केरलम के युवा आपसे ज़रूर प्रेरणा लेते हैं, आपसे खुलकर के बातें भी करते होंगे। केरलम के युवा आपसे क्या कहते हैं?
पीएम- श्रीकुमार वी जी से हमारी बातचीत कट हो गई है, दोबारा कनेक्ट हो जाएगा तो श्रीकुमार वी जी के पास आऊंगा, तब तक हम आगे चलते हैं। आइए अब कौन बात करेंगे, श्रीकुमार वी जी से बाद में बात करेंगे।
दिलीपजी- नमस्कार मोदी जी.. मेरा नाम दिलीप कुमार है। मैं जिला मल्लापुरम, कोंडोट्टी से हूं। मैं 46वां बूथ का कार्यकर्ता हूं, मैं पिछले 15 साल से बीजेपी में कार्य कर रहा हूं। मेरे साथ मेरे पिता जी और माता जी भी हैं। हम सब आपके भाषण सुन रहे हैं।
पीएम- दिलीप कुमार जी सबसे पहले तो अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहिएगा अच्छा मुझे बताइए केरल में जिस तरह कांग्रेस और कम्युनिस्ट करप्शन और कम्युनिज्म फैला रहा है उससे भी लोगों में बहुत गुस्सा है क्योंकि वो समाज को बांटने का काम करते हैं, एक-दूसरे से लड़ाई लड़ाने का काम करते हैं। यूडीएफ और एलडीएफ दोनों में कट्टरपंथियों के वोट के लिओ होड़ लगी हुई है। और आपको तो मालूम है आज-कल हम साफ देख रहे हैं कि वो गांधी जी वाली कांग्रेस बची नहीं है अब एक ऐसी कांग्रेस है जो माओवादी मुस्लिम लीगी कांग्रेस बन गई है। आप जब लोगों से मिलते होंगे तो आपसे भी लोग इसी प्रकार से बहुत सी बाते करते होंगे। मैं जरूर जानना चाहता हूं कि जमीन की हकीकतें क्या है।
दिलीपजी- मोदी जी आपने ठीक कहा। केरल में कम्युनिस्ट और कांग्रेस ऐसा काम करता है। इसका बहुत अच्छा उदाहरण है वेंगरा विधानसभा क्षेत्र से जो मुस्लिम लीग का कैंडिडेट है। इन्होंने कहा मज़हब है, मज़हब है, मज़हब है मेरे लिए पहला इश्यू। मैं इसके लिए काम करता है। जो मुस्लिम कम्युनिटी को पिछले 10 साल में जो नहीं मिला हम अगले 5 साल में हम मुस्लिम कम्युनिटी के लिए काम करेगा, सिर्फ उस कम्युनिटी के लिए काम करेगा ऐसा बोला। इसलिए ये दोनों यूडीएफ और एलडीएफ कट्टरपंथियों के पीछे हैं, उसके वोट के लिए सब कुछ करता है, इसके साथ गठबंधन करता है। मगर केरल का मलप्पुरम डिस्ट्रिक्ट का लोग आपकी तरह मोदी जी के जैसा एक सीएम चाहता है, ऐसा एक सरकार चाहता है।
पीएम- दिलीप जी आपने एक बहुत गंभीर विषय उठाया है। एलडीएफ और यूडीएफ करप्शन और कम्युनलिज्म तो फैला ही रहे हैं। ये केरलम का डबल नुकसान कर रहे हैं। एक तरफ ये वोट के लिए फंडामेंटलिस्ट ताकतों का इस्तेमाल कर रहे हैं और उनके एजेंडे से समाज को तोड़ने का ही काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ ये हमारी आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं। भगवान अयप्पा के भक्तों के साथ ये क्या कर रहे हैं? वहां जो गोल्ड है उसको लेकर एलडीएफ और यूडीएफ कैसे मिलकर बेईमानी कर रहे हैं? कोऑपरेटिव बैंकों में आपकी जमा पूंजी को कैसे बर्बाद कर रहे हैं? ये सब कुछ जनता देख रही है। और दिलीप जी आपने कहा कि मेरे जैसा मुख्यमंत्री। देखिए मेरे लिए तो आप ही मोदी हैं। केरलम का मेरा एक-एक कार्यकर्ता मेरे लिए तो मोदी है। और इसलिए केरलम की जनता हमारे कार्यकर्ताओं को जहां भी सेवा करने का मौका देती है, वो पूरे समर्पण भाव से सिर्फ और सिर्फ राज्य की जनता की सेवा के लिए अपने आप को खपा देते हैं।
सुहृत्तुक्कले,
मैं सभी बूथ के कार्यकर्ताओं से आज कुछ बातें जरूर कहूंगा आपको बूथ पर ये दोनों एलडीएफ और यूडीएफ उनके कम्युनल और करप्ट एजेंडे को घर-घर जाकर एक्सपोज करना है। घर में जाकर के बैठकर के एक-एक घटना लोगों को याद कराना है। और साथ-साथ कुछ काम और भी करना चाहिए। आपके बूथ में ऐसे हर काम जिसमें करप्शन के आरोप हैं उनको लोगों को बताइए.. हर किसी को बताइए.. ये पैसा आपका है आपके पैसे लूटे गए हैं। लोगों में इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए और ये जनता को लूटने वालों के लिए जनता में नफरत पैदा होनी चाहिए।
मैं सभी बूथ के कार्यकर्ताओं को ये भी कहना चाहूंगा कि आप जब लोगों के बीच जाएं तो बड़े विश्वास के साथ बताइए कि हमारी सबका साथ सबका विकास ये नीति की कितनी ताकत है। मैंने तो देखा है दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं से मिलता हूं तो वो भी भारत में आज जो सरकार सबका साथ सबका विकास की बात कर रही है उसको बहुत एप्रेसिएट करते हैं। हमें घर-घर इस बात को पहुंचाना चाहिए बीजेपी की जो वेलफेयर स्कीम है आंकड़ो के साथ और मोबाइल फोन पर वीडियो-वीडियो ले जाकर के डेटा सहित तर्क भी चाहिए और तथ्य भी चाहिए सबको समझानी चाहिए.. और इसलिए गरीबों के घर हो, मुफ्त राशन हो, मुफ्त इलाज हो, नल हो ऐसी हर स्कीम का फायदा हर जाति, हर वर्ग के लोगों को कैसे मिल रहा है ये आप घर-घर जाकर के बताइए।
पीएम- दिलीप जी आप से बात करके बहुत अच्छा लगा। मैं कल्पना कर सकता हूं कि ऐसे समाज को तोड़ने वाली ताकतों के बीच में आप किस प्रकार से देशभक्ति का विचार लेकर के काम कर रहे हैं। आप भी बधाई के पात्र हैं वहां के सभी कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं। चलिए आगे चलते हैं, हमारे अगले साथी कौन हैं।
मुरलीधरन जी- नमस्ते मोदी जी, मैं एक सेवाविमुक्त मरीन इंजीनियर हूं। मैं बीजेपी का 151 बूथ का कार्यकर्ता हूं। मैं त्रिशूर ज़िला में नाट्टिका में काम करता हूं बीजेपी में।
पीएम- मुरलीधरन जी, आप तो इंजीनियर रहे हैं, सेवानिवृत्त हैं और जीवन के अनुभव लेकर के आज केरल के लोगों की सेवा करने के लिए भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में अपना कार्य कर रहे हैं। ये सुनकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। आपके पास तो काफी अनुभव है। मुरलीधरन जी बताइए। मुझे बताया गया है कि कांग्रेस ने दिल्ली में हुई एआई समिट में जो शर्मनाक हरकत की और उसको जिस तरह जस्टिफाई किया जा रहा है खुद आके कपड़े फाड़ दे दुनिया के सामने नंगा नाच करे ऐसा सब देखने के बाद केरलम के लोग बहुत नाराज है ऐसी हरकतें करने वाले केरलम में टेक्नोलॉजी और टूरिज्म के पोटेंशियल को तो समझ ही नहीं सकते। इन विषयों को लेकर लोग आपसे जरूर बात करते होंगे अपना गुस्सा बताते होंगे अपने नए-नए विचार बताते होंगे। मैं आपसे सुनना चाहता हूं कि धरती पर से क्या आवाज आ रही है।
मुरलीधरन जी- केरल में ज़्यादा से ज़्यादा लोग ये जो घटना हुआ है इसके खिलाफ है। वो सोचते हैं कि हम एआई में आगे जाना चाहिए। हमें टूरिज्म, टेक्नोलॉजी और पेट्रोलियम में बहुत अधिक आगे जाना चाहिए। इसका विकास होना चाहिए। केरल को भी फायदा मिलना चाहिए। ये जो कांग्रेस वाले ने किया वो गलत काम है ऐसा सोचता है। पर कुछ लोग ये भी जस्टिफाई करता है राजनीति के कारण। ऐसा घटनाओं को भी जस्टिफाई करता है। मगर ज़्यादा से ज़्यादा लोग हमारे सरकार के साथ है। वो कहता है कि ये गलत काम किया है कांग्रेस वालों ने।
पीएम- मुरलीधरन जी आपने सही बताया। टैलेंट, टेक्नोलॉजी, ट्रेड और टूरिज्म ये विकसित केरलम के लिए बहुत बड़ी ताकत है, बहुत बड़े स्तंभ हैं। बीजेपी-एनडीए का फोकस इन्हीं सब बातों पर है। आधुनिक केरलम ये हमारा लक्ष्य है। विकसित केरलम ये हमारा लक्ष्य है। केरलम के टैलेंट को दुनिया भर में और बड़ी पहचान दिलाने के लिए हम नौजवानों को स्किल बना रहा है। इमर्जिंग सेक्टर्स को उनके लिए खोला जा रहा है।
सभी मेरे बूथ के कार्यकर्ता भाई-बहनों, हम एक तरफ देश को मज़बूत बना रहे हैं, देश की साख बढ़ा रहे हैं। वहीं कांग्रेस दुनिया में भारत की ऐसी इमेज बना रही है जिससे कि देश की बदनामी हो। आप देखिए दुनिया भर में ढेर सारे ऐसे देश हैं जहां केरलम के बच्चे काम कर रहे हैं। आजकल वेस्ट एशिया में युद्ध चल रहा है। वहां केरलम के भी हमारे लाखों परिवारजन वहां रहते हैं। लेकिन कांग्रेस वाले ऐसे स्टेटमेंट दे रहे हैं जिससे वहां के देश स्वाभाविक है नाराज़ होंगे, वहां के लोग नाराज़ होंगे। और उसके कारण केरलम के जो लोग वहां रहते हैं उनको कैसी मुसीबत आ सकती है, कितना बड़ा संकट आ सकता है। लेकिन ये अपनी राजनीति के कारण ऐसी गैर-जिम्मेवार बातें करते हैं। ये हमारे बच्चों का जीवन खतरे में डाल रहे हैं। ग्लोबल लेवल पर इंडिया की इमेज को भी नुकसान कर रहे हैं।
मुरलीधरन जी, आपने वहां भी देखा होगा कार्यकर्ता भी बताते होंगे। आप सबको भी सभी बूथ कार्यकर्ताओं को केरलम के लोगों को और भी कुछ बातें बतानी चाहिए। ये कांग्रेस पार्टी की स्टाइल क्या है। इनके शाही परिवार के लोग ये नामदार वहां आ जाते हैं। दो-चार झूठ फेंक देते हैं और बिना जिम्मेवारी भाग जाते हैं। इन्होंने हिमाचल में ऐसा किया। आज हिमाचल की सरकार ने हिमाचल को बर्बाद कर के रखा है। वे कर्नाटक में भी बड़ी-बड़ी बातें करके गए थे कर्नाटक को बर्बाद कर के रखा है। तेलंगाना की भी यही दशा है यानि ये झूठी बातें करना झूठे वादे करना और गप्पें फेंकते रहना और भाग जाना यही उनका तरीका है। और ये सारी जानकारियां उपलब्ध है आप लोगों को बताइए कि जहां-जहां इनके पैर पड़े हैं कैसा विनाश किया है अब ये केरलम के विनाश पर लगे हुए हैं।
साथियों,
मेरे लिए बहुत खुशी की बात है केरलम के ऐसे जुझारू, ऐसे निष्ठावान और एक प्रकार से मैं कहूंगा तपस्वी कार्यकर्ताओं से मुझे बात करने का मौका मिला है। मैं जानता हूं आप लोगों ने कितना सहन किया है। मैं जानता हूं आप लोगों ने कितना संघर्ष किया है और मेरे लिए खुशी की बात है कि आज आप अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत से जो प्रगति की है, अब विजय की राह पर चल पड़े हैं। मेरी तरफ से आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। आप सभी की बातों से मेरा विश्वास और मज़बूत हो गया है। केरलम इस बार नया इतिहास बनाने जा रहा है। हमें ये ध्यान रखना है, हमें हर बूथ जीतना है। हमें अपना बूथ जीतना है। सभी मेरे साथियों, आप अभी से देश में जहां भी केरलम के लोग हैं उनसे संपर्क कीजिए। उन्हें बताइए कि 9 अप्रैल को अगर उनका वोट केरलम में है तो वोट पड़ना चाहिए। और अगर उनका वोट केरलम में नहीं है तो वो अपने गांव में रिश्तेदारों को फोन करके आग्रह करके बताएं कि जहां-जहां उन्होंने गए हैं कितनी प्रगति देखी है।
केरलम की प्रगति के लिए वोट करने के लिए वो अपने परिवार को समझाए, अपने गांव वालों को समझाए, अपने दोस्तों को समझाए। और आपको हर परिवार में माताओं-बहनों के पास ज़रूर जाना है और माताओं को बहनों को कहना कि मोदी जी ने विशेष आग्रह किया है कि आप इस बार कमल के निशान पर वोट डालिए, एनडीए को बीजेपी को विजयी बनाइए और पहली बार केरलम में एनडीए-बीजेपी की सरकार बनाइए। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। शायद मैं परसों केरलम में आ रहा हूं तो फिर से एक बार आप सबके दर्शन करने का मौका मिल जाएगा। नमस्कारम।