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"Republic Day celebrations- flag hoisting ceremony in Himatnagar, Sabarkantha District"
"Gujarat Governor Dr. Kamla and Shri Narendra Modi join Republic Day celebrations in Himatnagar"
"Tableaus by various Gujarat government departments showcase the diversity and development in Gujarat"
"School children perform Surya Namaskar at Republic Day celebrations"
"Sabarkantha District: 65th Republic-Day Celebration: State Mahotsav"
"Thousands of citizens applauded parades and Tableaus showcasing development yatra of Gujarat"

 

साबरकांठा जिला : ६५वां गणतंत्र पर्व : राज्य महोत्सव

राज्यपाल ने राष्ट्रगीत की गौरवशाली धुन और हेलिकॉप्टर में पुष्पवर्षा के बीच फहराया तिरंगा

लोकप्रिय मुख्यमंत्री ने गणतंत्र दिवस पर गुजरातियों का किया अभिवादन

स्वाभिमानी साबरकांठा ने 65 वें गणतंत्र पर्व के राज्योत्सव को शानदार रूप से मनाया

हजारों लोगों ने गणवेशधारी दलों की अनुशासनबद्ध मार्चपास्ट और राज्य की विकासयात्रा की झांकियों का तालियों की गड़गड़ाहट से किया स्वागत

राज्यपाल डॉ. श्रीमती कमला जी ने साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर में 65 वें गणतंत्र दिवस की मंगल वेला पर पुलिस बैंड द्वारा राष्ट्रगीत की गौरवशाली धुन की सुरावलियों और भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा के बीच देशभक्ति के माहौल में तिरंगा फहराया। गणतंत्र दिवस के इस मुख्य समारोह का नजारा देखने राष्ट्रप्रेम से सराबोर हजारों की तादाद में नागरिक उमड़ पड़े। राज्यपाल के साथ राज्य के मुख्यमंत्री ने उन्नत भारत के गौरव राष्ट्रध्वज को सलामी दी। राज्यपाल डॉ. श्रीमती कमलाजी और मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता सेनानियों से मुलाकात कर उन्हें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी और शॉल ओढ़ाकर उनको सम्मानित किया।

हिम्मतनगर में इस पर्व के समारोह को निहारने के लिए लोकोत्सव की असीमता की प्रतिति इसी बात से हुई कि सुबह से ही जनसैलाब यहां उमड़ पड़ा था और सभी ने अंत तक कार्यक्रमों को निहारा।

यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य के जिला केन्द्रों पर राष्ट्रीय पर्व मनाकर जनशक्ति को इसमें सहभागी बनाने की श्री मोदी की अनोखी पहल के चलते यहां गणतंत्र दिवस का राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया।

स्थानीय शालाओं के विद्यार्थी समूहों ने आत्मा की चेतना के शारीरिक बल के साथ भारतीय योग परम्परा के करतब प्रस्तुत किए। सरकारी विभागों और निगमों द्वारा 41 जितने टेब्लोज पेश किए गए।

पुलिस बैंड की जोश पैदा करने वाली सुरावलियों के बीच हुए मार्चपास्ट गणवेशधारी समूहों ने जब प्रस्तुत किया तो सभी नागरिकों ने हर्षनाद से उनका स्वागत किया। श्वानदल और पुलिस की महिला और पुरुष मोटरसाइकिल सवारों ने रोमांचकारी करतब पेश किए। एरॉबिक्स ने सभी का मन मोह लिया।

परेड में शानदार प्रदर्शन के लिए एसआरपी ग्रुप 2 महिला प्लाटून प्रथम, अहमदाबाद शहर गैर हथियारधारी पुलिस द्वितीय और सागर तटरक्षक बल तृतीय स्थान पर विजेता घोषित किए गए।

इसी प्रकार मोटरसाइकिल पर हैरतअंगेज करतब करने वाली महिला पुलिस मित्तल बारोट को ट्रॉफी प्रदान की। जबकी टेब्लो विभाग में आदिजाति टेब्लो को प्रथम, वन विभाग के

टेब्लो के द्वितीय और रक्षाशक्ति युनिवर्सिटी अहमदाबाद को तृतीय पुरस्कार विजेता घोषित किया गया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।

इस अवसर पर जिला पंचायत प्रमुख हेमलता बेन पटेल, सांसद डॉ. महेन्द्र सिंह चौहान, मुख्य सचिव डॉ. वरेश सिन्हा, राज्य पुलिस प्रमुख पीसी ठाकुर, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एस.के. नन्दा, सांस्कृतिक सचिव भाग्येश झा, प्रभारी सचिव श्रीमती जयंती रवि, अरावली जिले के प्रभारी सचिव डॉ. वी. थिरुपुगल सहित राज्य प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारी, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी तथा नागरिक उपस्थित थे।

गणतंत्र दिवस पर विभिन्न रंगारंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

शाला के विद्यार्थियों द्वारा सूर्य नमस्कार और योग निदर्शन

गणतंत्र दिवस पर्व के राज्य स्तरीय समारोह के अंतर्गत हिम्मतनगर में आयोजित ध्वजवन्दन कार्यक्रम में कई रंगारंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इसमें शाला के विद्यार्थियों द्वारा सूर्य नमस्कार और योग निदर्शन प्रस्तुत किया गया।

कांकणोल ग्राउंड में विभिन्न युवा कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, आदिवासी नृत्य सहित गुजरात की अस्मिता को उजागर करते सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए। तालियों की गड़गड़ाहट से नागरिकों ने सभी को सराहा।

इस अवसर पर राज्यपाल डॉ. श्रीमती कमलाजी, मुख्यमंत्री श्री मोदी, मुख्य सचिव डॉ. वरेश सिन्हा, पुलिस प्रमुख पीसी. ठाकुर, प्रभारी सचिव श्रीमती जयंती रवि, सांस्कृतिक विभाग के सचिव भाग्येश झा, अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नागरिक भारी संख्या में उपस्थित रहे।

Grand Republic Day celebrations in Himatnagar

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दैनिक अग्रदूत ने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा : पीएम मोदी
July 06, 2022
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“Well-informed, better-informed society should be the goal for all of us, let us all work together for this”
“Agradoot has always kept the national interest paramount”
“Central and state governments are working together to reduce the difficulties of people of Assam during floods”
“Indian language journalism has played a key role in Indian tradition, culture, freedom struggle and the development journey”
“People's movements protected the cultural heritage and Assamese pride, now Assam is writing a new development story with the help of public participation”
“How can intellectual space remain limited among a few people who know a particular language”

असम के ऊर्जावान मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा शर्मा जी, मंत्री श्री अतुल बोरा जी, केशब महंता जी, पिजूष हजारिका जी, गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन कमिटी के अध्यक्ष डॉ दयानंद पाठक जी, अग्रदूत के चीफ एडिटर और कलम के साथ इतने लंबे समय तक जिन्‍होंने तपस्‍या की है, साधना की है, ऐसे कनकसेन डेका जी, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों,

असमिया भाषा में नॉर्थ ईस्ट की सशक्त आवाज़, दैनिक अग्रदूत, से जुड़े सभी साथियों, पत्रकारों, कर्मचारियों और पाठकों को 50 वर्ष - पांच दशक की इस स्‍वर्णिम यात्रा के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। आने वाले समय में अग्रदूत नई ऊँचाइयो को छुये, भाई प्रांजल और युवा टीम को मैं इसके लिए शुभकामनाएं देता हूँ।

इस समारोह के लिए श्रीमंत शंकरदेव का कला क्षेत्र का चुनाव भी अपने आप में अद्भुत संयोग है। श्रीमंत शंकरदेव जी ने असमिया काव्य और रचनाओं के माध्यम से एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को सशक्त किया था। उन्हीं मूल्यों को दैनिक अग्रदूत ने भी अपनी पत्रकारिता से समृद्ध किया है। देश में सद्भाव की, एकता की, अलख को जलाए रखने में आपके अखबार ने पत्रकारिता के माध्यम से बड़ी भूमिका निभाई है।

डेका जी के मार्गदर्शन में दैनिक अग्रदूत ने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। इमरजेंसी के दौरान भी जब लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला हुआ, तब भी दैनिक अग्रदूत और डेका जी ने पत्रकारीय मूल्यों से समझौता नहीं किया। उन्होंने न सिर्फ असम में भारतीयता से ओत-प्रोत पत्रकारिता को सशक्त किया, बल्कि मूल्य आधारित पत्रकारिता के लिए एक नयी पीढ़ी भी तैयार की।

आज़ादी के 75वें वर्ष में दैनिक अग्रदूत का स्वर्ण जयंती समारोह सिर्फ एक पड़ाव पर पहुंचना नहीं है, बल्कि ये आज़ादी के अमृतकाल में पत्रकारिता के लिए, राष्ट्रीय कर्तव्यों के लिए प्रेरणा भी है।

साथियों,

बीते कुछ दिनों से असम बाढ़ के रूप में बड़ी चुनौती और कठिनाइयों का सामना भी कर रहा है। असम के अनेक जिलों में सामान्य जीवन बहुत अधिक प्रभावित हुआ है। हिमंता जी और उनकी टीम राहत और बचाव के लिए दिनरात मेहनत कर रही है। मेरी भी समय-समय पर इसको लेकर वहां अनेक लोगों से बातचीत होती रहती है। मुख्‍यमंत्री जी से बातचीत होती रहती है। मैं आज असम के लोगों को, अग्रदूत के पाठकों को ये भरोसा दिलाता हूं केंद्र और राज्य सरकार मिलकर, उनकी मुश्किलें कम करने में जुटी हुई हैं।

साथियों,

भारत की परंपरा, संस्कृति, आज़ादी की लड़ाई और विकास यात्रा में भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता की भूमिका अग्रणी रही है। असम तो पत्रकारिता के मामले में बहुत जागृत क्षेत्र रहा है। आज से करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले ही असमिया में पत्रकारिता शुरू हो चुकी थी और जो समय के साथ समृद्ध होती रही। असम ने ऐसे अनेक पत्रकार, ऐसे अनेक संपादक देश को दिए हैं, जिन्होंने भाषाई पत्रकारिता को नए आयाम दिए हैं। आज भी ये पत्रकारिता सामान्य जन को सरकार और सरोकार से जोड़ने में बहुत बड़ी सेवा कर रही है।

साथियों,

दैनिक अग्रदूत के पिछले 50 वर्षों की यात्रा असम में हुए बदलाव की कहानी सुनाती है। जन आंदोलनों ने इस बदलाव को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है। जन आंदोलनों ने असम की सांस्कृतिक विरासत और असमिया गौरव की रक्षा की। और अब जन भागीदारी की बदौलत असम विकास की नई गाथा लिख रहा है।

साथियों,

भारत के इस समाज में डेम्रोक्रेसी इसलिए निहित है क्योंकि इसमें विमर्श से, विचार से, हर मतभेद को दूर करने का रास्ता है। जब संवाद होता है, तब समाधान निकलता है। संवाद से ही संभावनाओं का विस्तार होता है| इसलिए भारतीय लोकतंत्र में ज्ञान के प्रवाह के साथ ही सूचना का प्रवाह भी अविरल बहा और निरंतर बह रहा है। अग्रदूत भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।

साथियों,

आज की दुनिया में हम कहीं भी रहें, हमारी मातृभाषा में निकलने वाला अखबार हमें घर से जुड़े होने का एहसास कराता है। आप भी जानते हैं कि असमिया भाषा में छपने वाला दैनिक अग्रदूत सप्ताह में दो बार छपता था। वहां से शुरू हुआ इसका सफर पहले दैनिक अखबार बनने तक पहुंचा और अब ये ई-पेपर के रूप में ऑनलाइन भी मौजूद है। दुनिया के किसी भी कोने में रहकर भी आप असम की ख़बरों से जुड़े रह सकते हैं, असम से जुड़े रह सकते हैं।

इस अखबार की विकास यात्रा में हमारे देश के बदलाव और डिजिटल विकास की झलक दिखती है। डिजिटल इंडिया आज लोकल कनेक्ट का मजबूत माध्यम बन चुका है। आज जो व्यक्ति ऑनलाइन अख़बार पढ़ता है, वो ऑनलाइन पेमेंट भी करना जानता है। दैनिक अग्रदूत और हमारा मीडिया असम और देश के इस बदलाव का साक्षी रहे हैं।

साथियों,

आज़ादी के 75 वर्ष जब हम पूरा कर रहे हैं, तब एक प्रश्न हमें ज़रूर पूछना चाहिए। Intellectual space किसी विशेष भाषा को जानने वाले कुछ लोगों तक ही सीमित क्यों रहना चाहिए? ये सवाल सिर्फ इमोशन का नहीं है, बल्कि scientific logic का भी है। आप ज़रा सोचिए, बीती 3 औद्योगिक क्रांतियों में भारत रिसर्च एंड डेवलपमेंट में पीछे क्यों रहा? जबकि भारत के पास knowledge की, जानने-समझने की, नया सोचने नया करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

इसका एक बड़ा कारण ये है कि हमारी ये संपदा भारतीय भाषाओं में थी। गुलामी के लंबे कालखंड में भारतीय भाषाओं के विस्तार को रोका गया, और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, रिसर्च को इक्का-दुक्का भाषाओं तक सीमित कर दिया गया। भारत के बहुत बड़े वर्ग का उन भाषाओं तक, उस ज्ञान तक access ही नहीं था। यानि Intellect का, expertise का दायरा निरंतर सिकुड़ता गया। जिससे invention और innovation का pool भी limited हो गया।

21वीं सदी में जब दुनिया चौथी औद्योगिक क्रांति की तरफ बढ़ रही है, तब भारत के पास दुनिया को lead करने का बहुत बड़ा अवसर है। ये अवसर हमारी डेटा पॉवर के कारण है, digital inclusion के कारण है। कोई भी भारतीय best information, best knowledge, best skill और best opportunity से सिर्फ भाषा के कारण वंचित ना रहे, ये हमारा प्रयास है।

इसलिए हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं में पढ़ाई को प्रोत्साहन दिया। मातृभाषा में पढ़ाई करने वाले ये छात्र कल चाहे जिस प्रोफेशन में जाएं, उन्हें अपने क्षेत्र की जरूरतों और अपने लोगों की आकांक्षाओं की समझ रहेगी। इसके साथ ही अब हमारा प्रयास है कि भारतीय भाषाओं में दुनिया का बेहतरीन कंटेंट उपलब्ध हो। इसके लिए national language translation mission पर हम काम कर रहे हैं।

प्रयास ये है कि इंटरनेट, जो कि knowledge का, information का बहुत बड़ा भंडार है, उसे हर भारतीय अपनी भाषा में प्रयोग कर सके। दो दिन पहले ही इसके लिए भाषीनी प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है। ये भारतीय भाषाओं का Unified Language Interface है, हर भारतीय को इंटरनेट से आसानी से कनेक्ट करने का प्रयास है। ताकि वो जानकारी के, ज्ञान के इस आधुनिक स्रोत से, सरकार से, सरकारी सुविधाओं से आसानी से अपनी भाषा से जुड़ सके, संवाद कर सके।

इंटरनेट को करोड़ों-करोड़ भारतीयों को अपनी भाषा में उपलब्ध कराना सामाजिक और आर्थिक, हर पहलू से महत्वपूर्ण है। सबसे बड़ी बात ये एक भारत, श्रेष्ठ भारत को मज़बूत करने, देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़ने, घूमने-फिरने और कल्चर को समझने में ये बहुत बड़ी मदद करेगा।

साथियों,

असम सहित पूरा नॉर्थ ईस्ट तो टूरिस्ट, कल्चर और बायोडायवर्सिटी के लिहाज़ से बहुत समृद्ध है। फिर भी अभी तक ये पूरा क्षेत्र उतना explore नहीं हुआ है, जितना होना चाहिए। असम के पास भाषा, गीत-संगीत के रूप में जो समृद्ध विरासत है, उसे देश और दुनिया तक पहुंचना चाहिए। पिछले 8 वर्षों से असम और पूरे नॉर्थ ईस्ट को आधुनिक कनेक्टिविटी के हिसाब से जोड़ने का अभूतपूर्व प्रयास चल रहा है। इससे असम की, नॉर्थ ईस्ट की, भारत की ग्रोथ में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अब भाषाओं के लिहाज़ से भी ये क्षेत्र डिजिटली कनेक्ट होगा तो असम की संस्कृति, जनजातीय परंपरा और टूरिज्म को बहुत लाभ होगा।

साथियों,

इसलिए मेरा अग्रदूत जैसे देश के हर भाषाई पत्रकारिता करने वाले संस्थानों से विशेष निवेदन रहेगा कि डिजिटल इंडिया के ऐसे हर प्रयास से अपने पाठकों को जागरूक करें। भारत के tech future को समृद्ध और सशक्त बनाने के लिए सबका प्रयास चाहिए। स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियान में हमारे मीडिया ने जो सकारात्मक भूमिका निभाई है, उसकी पूरे देश और दुनिया में आज भी सराहना होती है। इसी तरह, अमृत महोत्सव में देश के संकल्पों में भी आप भागीदार बनके इसको एक दिशा दीजिए, नई ऊर्जा दीजिए।

असम में जल-संरक्षण और इसके महत्व से आप भलीभांति परिचित हैं। इसी दिशा में देश इस समय अमृत सरोवर अभियान को आगे बढ़ा रहा है। देश हर जिले में 75 अमृत सरोवरों के लिए काम कर रहा है। इसमें पूरा विश्‍वास है कि अग्रदूत के माध्‍यम से असम का कोई नागरिक ऐसा नहीं होगा जो इससे जुड़ा नहीं होगा, सबका प्रयास नई गति दे सकता है।

इसी तरह, आज़ादी की लड़ाई में असम के स्थानीय लोगों का, हमारे आदिवासी समाज का इतना बड़ा योगदान रहा है। एक मीडिया संस्थान के रूप में इस गौरवशाली अतीत को जन जन तक पहुंचाने में आप बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। मुझे यकीन है, अग्रदूत समाज के इन सकारात्मक प्रयासों को ऊर्जा देने का अपना कर्तव्‍य जो पिछले 50 साल से निभा रहा है, आने वाले भी अनेक दशकों तक निभाएगा, ऐसा मुझे पूरा विश्‍वास है। असम के लोगों और असम की संस्कृति के विकास में वो लीडर के तौर पर काम करता रहेगा।

Well informed, better informed society ही हम सभी का ध्येय हो, हम सभी मिलकर इसके लिए काम करें, इसी सदिच्छा के साथ एक बार फिर आपको स्वर्णिम सफर की बधाई और बेहतर भविष्य की अनेक-अनेक शुभकामनाएं!