लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम, हैदराबाद

11 अगस्त, 2013

मंच पर बिराजमान श्रीमान वैंकया गारू जी, श्री बंगारू लक्ष्मण गारू जी, श्री वी. रामाराव गारू जी, आंध्र प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्रीमान किशन रेड्डी गारू जी, सोदरा-सोदरी, मनोलारा, नमश्कारम्..!

भारत देशा.... (तेलुगू में भाषण) .....

... और आप लोग 17 सितंबर को हैदराबाद लिबरेशन डे मनाते हैं और मेरा सौभाग्य है कि उस दिन मुझे आपकी याद विशेष आती है क्योंकि 17 सितंबर मेरा जन्म दिन भी है..! मैं आंध्र प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं का हृदय से अभिनदंन करता हूँ कि उन्होंने इस पॉलिटिकल सभा का समाज सेवा के लिए उत्तम तरीके से उपयोग किया और मैं आंध्र प्रदेश के युवकों को भी अभिनंदन देता हूँ कि उन्होंने इस जनसभा में पाँच रूपया रजिस्ट्रेशन फीस देकर के उत्तराखंड के पीड़ितों के दर्द के साथ अपने आपको जोड़ने का उत्तम प्रयास किया है और इसलिए आंध्र प्रदेश भारतीय जनता पार्टी एवं आंध्र के नौजवानों को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ, बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ..!

भाइयों-बहनों, सार्वजनिक जीवन में ऐसी दिल को छू लेने वाली घटनाएं कभी-कभी मनुष्य जीवन के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाती है। एक सिख परिवार जो आंध्र में आकर के बसा, जिसका बेटा केनेडा में रहता है। उनकी अस्सी साल से बड़ी आयु की माँ इस कार्यक्रम में आना चाहती थीं। केनेडा से उसका बेटा ट्विटर पर लिखता है और आज मुझे इस कार्यक्रम में उस माँ के चरण छूने का अवसर मिला, उस माँ का आशीर्वाद पाने का अवसर मिला..! मित्रों, मैं हैरान हूँ..! एक बुजुर्ग स्वतंत्रता सेनानी, उन्होंने इस सभा में आने के लिए अपने परिवार के साथ सत्याग्रह किया, तीन दिन अन्न छोड़ दिया और कहा कि मुझे वहाँ ले जाने का प्रबंध करो और तब जा कर के उन्होंने अन्न लिया..! इनकी ये तपस्या, उनका ये आशीर्वाद, उनको भारत की कितनी चिंता है उसका प्रतिबिंब है..! मैं उन दोनों महानुभावों को अंत:करण पूर्वक नमन करता हूँ और ये घटना मेरे जीवन में सदा सर्वदा प्रेरणा देने वाली घटना रहेगी..! क्योंकि देश में जब राजनीति पर से भरोसा उठता चला गया है, राजनेताओं पर से भरोसा उठता चला गया है, दिल्ली की सल्तनत के एक के बाद एक कारनामों ने हिन्दुस्तान के सामान्य मानवी के दिल से एक भरोसा तोड़ा है..!

Navbharat Yuva Bheri at Hyderabad

भाइयों-बहनों, यहाँ इतने सारे नौजवान आए हैं, लेकिन जब मैं रास्ते से आ रहा था तो इससे भी डबल संख्या में नौजवान बाहर हैं, वे अंदर नहीं आ पाएं है..! मैं उन सभी नौजवानों की क्षमा मांगता हूँ और मैं उनको विश्वास दिलाता हूँ कि इस स्टेडियम में जगह हो या ना हो, लेकिन मेरे दिल में आपके लिए बहुत जगह है..! आप तो मुझे वहाँ पर लगे टी.वी. से देख रहे हैं, लेकिन मेरा इतना सौभाग्य नहीं है नौजवान मित्रों, मैं आपको यहाँ से देख नहीं पा रहा हूँ। लेकिन मैं विश्वास दिलाता हूँ कि मुझे जब भी मौका मिलेगा, मैं आंध्र में दोबारा आउँगा और जिन नौजवानों के दर्शन आज नहीं कर पाया हूँ, उनके दर्शन मैं दोबारा जरूर करूंगा, ये मैं उनको विश्वास दिलाता हूँ..!

भाइयों-बहनों, गत सप्ताह की जो घटनाएँ हैं, उन घटनाओं ने देश को झकझोर दिया है। भाइयों-बहनों, सवाल ये है कि हम किस पर भरोसा करें..? जब हमारे देश की सेना के पाँच जवानों के सिर काट लिए गए, तब भारत के प्रधानमंत्री ने कहा था कि ऐसी घटना अगर दोबारा होगी तो हम पाकिस्तान से हिसाब चुकता करेंगे..! मैं प्रधानमंत्री जी से पूछना चाहता हूँ, इसी हफ्ते हमारे देश की रक्षा करने वाले, माँ भारती के लिए जीने-मरने वाले हमारे देश के उन रणबांकुरों को पाकिस्तान की सेना ने भून दिया, उनको मौत के घाट उतार दिया..! दिल्ली की सल्तनत से हिन्दुस्तान पूछ रहा है, जब हमारे देश के जवानों के सिर काट लिए गए थे तब आपने वादा किया था कि आप ऐसी चीजों को सहन नहीं करेंगे, क्या कारण हुआ कि पाकिस्तान एक के बाद एक जुल्म करता चला जा रहा है और सवा सौ करोड़ का देश चुपचाप सारी चीजें झेल रहा है..?

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों एक के बाद एक जो घटनाएं घटी हैं। आप देखिए, किश्तवाड़ सुलग रहा है..! ना जाने कितने लोगों को मारा गया है, ना जाने कितने लोगों की दुकानें जलाई गई हैं, ना जाने कितने लोगों के घर जलाए गए हैं..! भाइयों-बहनों, कश्मीर घाटी में तीन दशक से जो खेल चल रहा है, क्या उसका रिहर्सल किश्तवाड़ में करने का नापाक इरादा तो नहीं है..? देश जानना चाहता है। आज भारतीय जनता पार्टी के विपक्ष के नेता श्रीमान अरूण जेटली जी किश्तवाड़ के पीड़ितों का हाल पूछने जाना चाहते थे, किश्तवाड़ का हाल देखना चाहते थे, लेकिन वहाँ की सरकार ने सत्य को छुपाने के लिए, इस जुल्म की कथा को छुपाने के लिए ये हिंसा के दौर पर चुप्पी रहे इसलिए अरूण जेटली जी को जम्मू के एयरपोर्ट पर डिटेन कर दिया गया..! भाइयों-बहनों, जम्मू के पहाड़ी क्षेत्र की इस घटना को छोटी घटना ना मानी जाए। जो संकट कश्मीर घाटी ने झेला उसकी शुरूआत करने के नापाक इरादे की इसमें बू आती है..! और इसलिए भाइयों-बहनों, सवाल किश्तवाड़ के नागरिकों का नहीं है, सवाल है कि भारत के शांतिप्रिय नागरिकों को सुख चैन की जिंदगी चाहिए, जुल्म से मुक्ति चाहिए और फिर एक बार देश का भरोसा टूट गया..!

ये दिल्ली की सल्तनत हमारे देश को सुरक्षा नहीं दे सकती है। भाइयों-बहनों, आपको जान कर के हैरानी होगी, वोट बैंक की राजनीति में डूबी हुई दिल्ली की सल्तनत हिन्दुस्तान की सुरक्षा को अनदेखा कर रही है। बांग्लादेश की सीमा पर हमारे जो जवान हैं, वे अगर किसी बंगलादेशी घुसपैठिये को रोकना चाहते हैं और अगर वो रूकता नहीं है तो भारत की सेना और बी.एस.एफ. के जवानों पर रोक लगाई गई है कि वे कोई भी शस्त्र का उपयोग नहीं करेंगे..! इतना ही नहीं, यहाँ तक कह दिया गया है कि अगर वो ज्यादा ताकतवर हैं, अगर घुसपैठिए का हमला तेज है तो बांग्लादेश की सीमा पर बैठे हुए बी.एस.एफ. के जवान झगड़ा करने के बजाए उनको अंदर आने की इजाजत दे दें..! भाइयों-बहनों, एक सार्वभौम सरकार का मुखिया, सवा सौ करोड़ के देश की सरकार हिन्दुस्तान के सामान्य मानवी को इस प्रकार के निर्णयों से सुरक्षा कैसे प्रदान कर सकती है..?

Navbharat Yuva Bheri at Hyderabad

भाइयों-बहनों, चाइना ने हमारी सीमा पर आ करके अड़ंगा लगाया, सारी दुनिया ने देखा, गुगल मैप पर सारे नागरिक देख पा रहे थे कि चाइना की मूवमेंट कैसी है, चाइना किस तरह हमारी धरती पर आ रहा है, किस तरह अपनी जगह बना रहा है..! और मैं हैरान हूँ, चाइना तो घुसपैठिया था, उसको तो अपनी धरती पर वापस जाना जरूरी था, लेकिन दिल्ली की सरकार ने ऐसा समझौता किया कि चाइना तो अपनी धरती पर वापिस गया, लेकिन हिन्दुतान की सेना को भी अपनी ही धरती पर से वापस लेने का दूर्भाग्यपूर्ण निर्णय किया..! इतना ही नहीं, बड़ी बयानबाजी करके भारत के विदेश मंत्री चाइना गए और चाइना में जा करके चाइना की इन हरकतों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए थी, लाल आंख करके चाइना को समझाना चाहिए था, उसकी बजाय हिन्दुस्तान के विदेशमंत्री ने चाइना में जा कर के बयान दिया कि ‘बिजिंग इतना बढ़िया शहर है कि मेरा तो यहाँ रहने का दिल कर जाता है’..! डूब मरो, डूब मरो... मेरे देश की सरकार चलाने वालों डूब मरो..! आपको शर्म आनी चाहिए। ये घाव पर नमक छिड़क रहे हैं आप लोग..! हिन्दुस्तान के सवा सौ करोड़ नागरिकों के मन पर लगी चोट पर आप एसिड छिड़क रहे हो..!

इतना ही नहीं, हमारे जवानों के जब सिर काट लिए गए थे और उसके बाद भारत के विदेश मंत्री जयपुर जा करके पाकिस्तान के मेहमानों को बिरयानी खिला रहे थे और कहते क्या हैं, ये प्रोटोकॉल है..! मैं देश के नौजवानों को पूछता हूँ, जो मेरे देश के जवानों के सिर काट ले क्या उनके साथ प्रोटोकॉल होता है..? क्या ये हिन्दुस्तान को उसके घाव पर नमक छिड़कने का काम है कि नहीं..?

भाइयों-बहनों, इटली के लोग आएं और केरल में हमारे मछुआरों को गोली मार दें। कोई गुनाह नहीं था उनका..! वो मछुआरे मछली पकड़ने गए थे, गरीब माँ के बेटे पेट भरना चाहते थे, मेहनत कर रहे थे..! इटली के जवान आए, आकर के मेरे देश के दो मछुआरों को गोली से भून दिया..! उनको अरेस्ट किया जाए और हिन्दुस्तान के अंदर कोई जेल में है तो उसको बेल नहीं मिलती है, लेकिन वो कौन लोगों का इन्फ्ल्यूऐंस था कि इटली के उन जवानों को बेल मिल गया..? वे इटली चले गए और जब वापिस आने की नौबत आई तो इटली सरकार ने आँख दिखाई और कहा कि सैनिक नहीं आएंगे..! ये तो भारत की सुप्रीम कोर्ट ने आँख दिखाई और इटली के हाई कमीश्नर को कह दिया गया कि तुम हिन्दुस्तान छोड़ नहीं सकते हो, तब जा कर के इटली को झुकना पड़ा और हिन्दुस्तान को वो सैनिक देने पड़े..!

भाइयों-बहनों, मैं इन घटनाओं को इसलिए सुना रहा हूँ कि दिल्ली में बैठी हुई सरकार किसी भी विषय पर गंभीर नहीं है, उनको इस देश की समस्याओं की चिंता नहीं है..! मेरे नौजवान मित्रों, आपको हिन्दुस्तान की चिंता हो रही है..? आपको हिन्दुस्तान की चिंता सता रही है..? मेरे नौजवान मित्रों, आपको हिन्दुस्तान की चिंता है, मुझे मेरे देश के नौजवानों की चिंता है..! मन में सवाल उठता है कि इस देश की युवा पीढ़ी का क्या होगा..? रोजी-रोटी पाने के लिए कहाँ जाएंगे..? मित्रों, कांग्रेस की सरकार महाराष्ट्र में भी है, कांग्रेस की सरकार आंध्र में भी है। और हमारे कांग्रेस के मित्रों को जरा बुरा लगेगा लेकिन कान खोल कर सुन लीजिए, आंध्र में भी आप कई वर्षों से राज कर रहे हैं, महाराष्ट्र में भी आप कई वर्षों से राज्य कर रहे हैं और हिन्दुस्तान में सबसे ज्यादा आत्महत्या की घटनाएं अगर कहीं होती हैं तो महाराष्ट्र और आंध्र में होती हैं, वहाँ के नौजवानों को आत्महत्या का रास्ता लेना पड़ता है..! भाइयों-बहनों, आज हमारे आंध्र के नौजवानों को पेट भरने के खातिर गल्फ कंट्रीज में जाना पड़ रहा है।

Navbharat Yuva Bheri at Hyderabad

ये कांग्रेस पार्टी की डिवाइड एंड रूल की ही तरकीबें रही हैं। 2004 में कांग्रेस पार्टी ने आंध्र के लोगों को तेलंगाना देने का वादा किया था। पूरे हिन्दुस्तान में किसी एक राज्य से सर्वाधिक एम.पी. अगर कांग्रेस को मिले हैं तो आंध्र से मिले हैं। दिल्ली में कांग्रेस की सरकार टिकी है तो आंध्र से मिले हुए एम.पी.ओं के कारण टिकी हुई है। उस आंध्र को कांग्रेस ने क्या दिया..? आपको वादा किया था, निभाया..? भाइयों-बहनों, छोटे राज्यों की रचना अटल बिहारी वाजपेयी ने भी की थी। छत्तीसगढ़ बना, तो मध्य प्रदेश भी मिठाई बांट रहा था और छत्तीसगढ़ भी मिठाई बांट रहा था। उत्तराखंड बना, तो उत्तर प्रदेश भी मिठाई बांट रहा था और उत्तराखंड भी मिठाई बांट रहा था। झारखंड बना, तो बिहार भी मिठाई बांट रहा था और झारखंड भी मिठाई बांट रहा था..! ये कांग्रेस के वो कौन से कारनामें हैं कि उसने भाई-भाई के बीच दरार पैदा कर दी है। एक भाई दूसरे भाई को मारने जाए, ये हालत पैदा करने का पाप कांग्रेस पार्टी ने किया है..! तेलंगाना के पक्ष में भारतीय जनता पार्टी पहले से है। विद्या सागर राव के चुनाव समय मैं खुद तेलंगाना में एक सभा करने आया था और मैंने सार्वजनिक सभा में कहा था कि अगर हमें सरकार बनाने का मौका मिलेगा तो सौ दिन के भीतर-भीतर हम तेलंगाना का निर्माण कर देंगे, ये हमने वादा किया था..! लेकिन हमने तब भी कहा था कि किसी भी कीमत पर सीमांध्र की अनदेखी नहीं की जा सकती। सीमांध्र का भी विकास सारे हिन्दुस्तान को गौरव हो ऐसा होना चाहिए। सीमांध्र के अंदर जो शहर आए हैं, वो शहर हैदराबाद से भी ज्यादा प्रगतिशील बने इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन दिल्ली की सरकार को ये करने की फुर्सत नहीं है। अगर उनको ये हैदराबाद को दोनों राज्यों की राजधानी बनानी थी और ये कहना था कि दस साल के बाद दूसरी राजधानी बनाएंगे, तो मैं दिल्ली की सरकार को पूछना चाहता हूँ कि ये काम दो 2004 में शुरू क्यों नहीं किया..? क्यों दूसरी राजधानी की तैयारी नहीं की..? आंध्र के लोगों को अन्याय करने का आपको अधिकार नहीं है..! और इसलिए भाइयों-बहनों, हमारे दिल में तेलंगाना का भी उतना ही महत्व है, सीमांध्र का भी उतना ही महत्व है..!

भाइयों और बहनों, मैं एक छोटा व्यक्ति हूँ लेकिन गुजरात की धरती से आया हूँ, महात्मा गांधी की भूमि से आया हूँ, सरदार पटेल की भूमि से आया हूँ..! मैं मेरे तेलंगाना और आंध्र के भाइयों से प्रार्थना करता हूँ। भाइयों-बहनों, कांग्रेस भले कितने ही खेल क्यों ना खेले, लेकिन आपके बीच टकराव नहीं होना चाहिए..! भाई-भाई के बीच, अपने भाई के प्रति नफरत नहीं होनी चाहिए..! मैं आंध्र के और तेलंगाना के भाइयों से पूछना चाहता हूँ, दर्द के साथ पूछना चाहता हूँ, पीड़ा के साथ पूछना चाहता हूँ, पिछले दिनों कुछ घटनाएं घटी हैं उससे पीड़ित हो कर के पूछना चाहता हूँ। मेरे भाइयों-बहनों, मेरी बात में अगर सच्चाई ना हो तो मेरी बात को ठुकरा देना, लेकिन मेरा सवाल आपके दिल को छू जाए तो मुझे कहना..! भाइयों-बहनों, हमारा रास्ता क्या है..? मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि आंध्र और तेलंगाना... क्या कभी किसी ने सोचा है कि माँ के दूध में भी दरार हो सकती है..? भाइयों-बहनों, माँ के दूध में दरार नहीं होनी चाहिए..! हम भाई हैं, हम साथी हैं..! मेरे गुजरात में, मेरे सूरत में चार लाख तेलगू भाषी भाई-बहन रहते हैं, मेरे अहमदाबाद में छह लाख तेलगू भाई-बहन रहते हैं। हम प्यार से जीते हैं, साथ-साथ जीते हैं, साथ-साथ मेहनत करते हैं, हर एक का पेट भरने का प्रयास करते हैं..! अगर हम गुजरात के लोग तेलगू भाषी लोगों के साथ प्यार से जी सकते हैं, तो तेलंगाना वाला भी आंध्र के साथ प्यार से जी सकता है और आंध्र वाला भी तेलंगाना के साथ प्यार से जी सकता है..!

भाइयों-बहनों, हम सबका लक्ष्य ये होना चाहिए कि आंध्र इतनी प्रगति करे, इतनी प्रगति करे कि गुजरात से भी आगे निकल जाए..! तेलंगाना इतनी प्रगति करे, इतनी प्रगति करे कि वो भी गुजरात से आगे निकल जाए..! हमें ये सपना देखना चाहिए..! और भाइयों-बहनों, विकास एक ही रास्ता है, विकास में ही समस्याओं का समाधान है, हमारी सारी मुसीबतों का समाधान विकास में है..! ये कांग्रेस पार्टी किसी भी हालत में विकास के मार्ग पर जाने को तैयार नहीं है क्योंकि उसको जवाब देना भारी पड़ जाता है..! यहाँ जो लोग मेरी आयु के बैठे हैं उन्होंने कभी, आज से चालीस साल पहले, कभी भी बाजार में घी की दुकान हो तो वहाँ पर ऐसा बोर्ड पढ़ा था, ‘शुद्घ घी की दुकान’, पढ़ा था..? आज से चालीस साल पहले ‘शुद्घ घी की दुकान’ ऐसा बोर्ड नहीं लगाना पड़ता था। घी की दुकान लिखा इसका मतलब कि वहाँ घी शुद्घ ही मिलता होगा। लेकिन आज बोर्ड लगाना पड़ता है, ‘शुद्घ घी की दुकान’, क्योंकि शुद्घ घी नहीं मिलता है..! भाइयों-बहनों, जब वाजपेयी जी की सरकार थी, तब इस देश में गरीब को कभी रोटी की चिंता नहीं थी, गरीब की थाली में रोटी पहुंचती थी और इसलिए कभी फूड सिक्योरिटी पर सोचना नहीं पड़ा था। ये कांग्रेस पार्टी ने गरीब की हालत इतनी खराब कर दी है कि आज जैसे ‘शुद्घ घी की दुकान’, वैसे उनको ‘फूड सिक्योरिटी बिल’ की बात करने की नौबत आई है..! जिन्होंने गरीब की थाली से रोटी छीन ली है उन्होंने पाप किया है..! मैं देश के अर्थशास्त्रियों को कहना चाहता हूँ। इन दिनों हमारे देश में एक शब्द चल रहा है, पिछले कुछ समय से, इन्क्लूसिव ग्रोथ..! ये शब्द पहले क्यों नहीं था..? दस-दस पंचवर्षीय योजनाएं पूरी हुई, ना कभी प्लानिंग कमीशन ने इन्क्लूसिव ग्रोथ शब्द का प्रयोग किया, ना दिल्ली में बैठी हुई किसी सरकार को करना पड़ा और ना ही राज्य में बैठी किसी सरकार को करना पड़ा..! आज क्यों करना पड़ा..? आज इसलिए करना पड़ा है क्योंकि कांग्रेस ने साठ साल तक इन्क्लूजिव कुछ भी नहीं किया है, सब कुछ एक्स्क्लूडेड किया है..! कई लोगों को उन्होंने विकास से वंचित रखा है, कई लोगों को उन्होंने गरीब रखा है और तब जा कर के आज उनके लिए ये नौबत आई है..!

भाइयों-बहनों, कांग्रेस पार्टी इस देश के लिए बोझ बन गई है। लेकिन आज मैं आंध्र में आया हूँ तब एन.टी.आर. को याद करना चाहता हूँ..! इस देश की एन.टी.आर. ने एक बहुत बड़ी सेवा की थी। ना सिर्फ आंध्र के सम्मान की सेवा की थी, ना सिर्फ आंध्र के गौरव के लिए लड़े थे, लेकिन एन.टी.आर. ने कांग्रेस विरोधी राजनीति को बल दिया था। ये एन.टी.आर. के प्रयास थे कि इस देश के अंदर दिल्ली में गैर कांग्रेसी सरकार बनाने का संभव हुआ था। मैं आंध्र में सभी राजनैतिक दलों से अनुरोध करता हूँ कि एन.टी.आर. को उत्तम से उत्तम श्रद्धांजलि क्या हो सकती है..? एन.टी.आर. को उत्तम से उत्तम श्रद्घांजलि कांग्रेस मुक्त भारत का निर्माण करके ही दे सकते हैं..! और जो लोग एन.टी.आर. की लेगसी का दावा करते हैं, उनका पहला कर्तव्य बनता है कि हिन्दुस्तान को कांग्रेस को मुक्त बनाने के लिए जो भी करना पड़े, वो करना चाहिए..! मुझे विश्वास है कि आंध्र के राजनैतिक दल आंध्र और तेलंगाना को बचाने के लिए, आंध्र और तेलंगाना के विकास के लिए कांग्रेस मुक्त भारत बनाने के प्रयासो में कोई कमी नहीं रहने देंगे। कांग्रेस विरोधी शक्तियाँ एक आएंगी और आंध्र की धरती पर से ये जुल्म, ये कुशासन, ये भ्रष्टाचार, ये परिवारवाद, इन सबका खात्मा संभव होगा..! और इसलिए मेरे भाइयों-बहनों, एन.टी.आर. का सपना पूरा करना तेलुगु देशम्, एन.टी.आर. की लेगसी जिसके पास है, उनका भी दायित्व बनता है..!

भाइयों-बहनों, मैं आपको कहना चाहता हूँ कि कोई चले या ना चले, कोई आज चले या कोई कल चले, कोई चलने से पहले सोचने में लगे, उसके बावजूद भी मैं कहता हूँ कि देश में कांग्रेस मुक्त भारत की हवा बन चुकी है, देश ने कांग्रेस मुक्त हिन्दुस्तान का सपना देख लिया है..! उस सपने को पूरा करने के लिए हिन्दुस्तान के नौजवान, हिन्दुस्तान के किसान, हिन्दुस्तान का गरीब आज कृत संकल्प हुआ है। भाइयों-बहनों, भ्रष्टाचार ने आज हमारे देश को तबाह कर दिया है। जल, थल, नभ... पूरे भूमंडल का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहाँ कांग्रेस के मित्रों ने भ्रष्टाचार करने के लिए अपने हाथ-पैर फैलाए ना हों..! कोई मुझे बताए, हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जी पूरे हिन्दुस्तान में घूमे, किस बात के लिए..? काला धन वापस लाने के लिए..! कोई हमें समझाए, विदेशों की बैंकों में जो काला धन पड़ा है, वो काला धन वापिस लाने में दिल्ली की सरकार को क्या परेशानी हो रही है..? हिन्दुस्तान के सार्वजनिक जीवन में आडवाणी जी जैसे एक वरिष्ठ व्यक्ति ने भारत की भलाई के लिए काला धन वापिस लाने की माँग की, लेकिन दिल्ली की सल्तनत ने किसकी भलाई के लिए इस माँग को भी ठुकरा दिया..? तब सवाल उठता है कि काला धन किसका है..? ये अरबो-खरबों का काला धन किसका है जो विदेशी बैंकों में पड़ा हुआ है..?

भाइयों-बहनों, आज भारतीय जनता पार्टी और एन.डी.ए. की सरकारों ने देश में सुशासन की मिसाल दिखाई है। यहाँ कितने सारे नौजवान हैं..! सारे विश्व में स्किल डेवलपमेंट का माहात्म्य प्राथमिकता बन गया है, लेकिन आपके आंध्र में स्किल डेवलपमेंट की दिशा में नामोनिशान नहीं है। मैं आंध्र के कांग्रेस के नेताओं से कहना चाहता हूँ कि अगर आपको गुजरात से नफरत है तो गुजरात का नाम मत लो, लेकिन आपके पड़ौस में तमिलनाड़ में डॉ. जयललिता जी की सरकार ने स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में जो काम किया है, जरा उससे तो कुछ सीखो और आंध्र के नौजवानों की भलाई के लिए कुछ तो करो..! आज भी भाइयों-बहनों, दिल्ली की सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि गरीब की थाली में रोटी कैसे पहुंचाए..! मैं दिल्ली की सरकार को कहना चाहता हूँ, कांग्रेस के नेताओं को कहना चाहता हूँ, गरीब की थाली में रोटी पहुंचाने का रास्ता हमारे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी ने दिखाया है। उन्होंने जिस प्रकार से पी.डी.एस. सिस्टम को आधुनिक बनाया है, और भारत की सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सराहा है, लेकिन किसी भी कांग्रेसी सरकार को गरीबों का भला हो उसके लिए ना कुछ सीखने की इच्छा है, ना कुछ समझने की इच्छा है और ना कुछ करने की इच्छा है..! इतना ही नहीं, बेटियों का सम्मान कैसे हो, परिवार में कन्या का गौरव कैसे हो, माँ-बाप को बेटी बोझ ना लगे उसके लिए एक सामाजिक आंदोलन कैसे खड़ा हो..! मैं कांग्रेस के मित्रों को कहता हूँ कि जाइए और मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के हमारे शिवराज सिंह चौहान को देखिए, उन्होंने ‘लाडली लक्ष्मी योजना’ करके पूरे मध्य प्रदेश की बेटियों के जीवन को गौरव दिया है, सम्मानित किया है, उन्हें जीने के लिए हक दिया है, पढ़ने के लिए व्यवस्था की है..! क्या हमारे देश की बेटियों को शिक्षा नहीं मिलनी चाहिए..? दिल्ली की सरकार, साठ-साठ साल बीत चुके हैं मित्रों, एक ही परिवार ने दशकों तक राज किया है लेकिन सामान्य मानवी की भलाई के लिए कुछ भी करने में ये सफल नहीं हुए हैं..!

भाइयों-बहनों, मैंने भारत के प्रधान मंत्री को एक बार कहा था। मैंने कहा, आंध्र के पास 900 किलोमीटर से बड़ा समुद्री तट है, गुजरात के पास 1600 किलोमीटर का समुद्री तट है, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, केरल, तमिलनाडु, उड़िसा, पश्चिम बंगाल, इन प्रदेशों को समुद्र तट का सौभाग्य मिला है। मैं भारत सरकार को कहता रहा कि इन समुद्र तट पर जो राज्य बसे हैं, उनकी एक सेपरेट मीटिंग बुलाई जाए, दो दिन उनसे चर्चा की जाए कि समुद्र तट के राज्यों की कठिनाइयाँ क्या हैं, ग्लोबल इकॉनामी के जमाने में इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट के युग में हमारे तटवर्ती क्षेत्रों का विकास कैसे करें ताकि भारत का रूपया टूटता हुआ बच जाए..! आप देखिए, हिन्दुस्तान जब आजाद हुआ तब एक डॉलर की कीमत थी एक रूपया..! भाइयों-बहनों और नौजवानों, चीज को समझिए, जब हिन्दुस्तान आजाद हुआ तब एक रूपया बराबर एक डॉलर हुआ करता था, आज भारत के वित्त मंत्री की उम्र इज इक्वल टू वन डॉलर..! एक डॉलर कभी पैसठ रूपया, कभी चौसठ रूपया... आप कल्पना कर सकते हो कि क्या होता होगा देश का..!

एक जमाना था जब पूरा विश्व हिन्दुस्तान की धरती पर पढ़ने के लिए आता था। दुनिया के देशों के नौजवान भारत में आकर के शिक्षा-दीक्षा लेते थे। मित्रों, भारत सरकार के आंकड़े बोल रहे हैं कि आज अकेले पिछले एक वर्ष में हिन्दुस्तान से जो नौजवान विदेशों में पढ़ाई करने के लिए गए उनकी फीस भरने में एक लाख बीस हजार करोड़ रूपया हिन्दुस्तान के खजाने से खाली हुआ..! क्योंकि उनको चाहिए वैसी पढ़ाई यहाँ नहीं मिल रही थी। वो तो गए, हमारा बुद्घि धन तो गया, साथ-साथ हमारा लक्ष्मी धन भी गया..! क्या दिल्ली की सरकार हिन्दुस्तान में हमारे नौजवानों को अच्छी शिक्षा मिले, उन्हें भटकना ना पड़े, ये व्यवस्था नहीं कर सकती है..? नहीं कर रही है..! भाइयों-बहनों, आज गाँव में डॉक्टर नहीं है, गाँव के गरीब आदमी को दवाई चाहिए तो दवाई की व्यवस्था नहीं है..! ये दिल्ली की सरकार को कितने साल हो गए, हमारे देश की जनता की आवश्कता के अनुसार डॉक्टर तैयार हो, डॉक्टरों को तैयार करने के लिए मेडिकल कॉलेजेस हों, क्या ये नहीं हो सकता है..? मित्रों, आंध्र और गुजरात दो राज्य ऐसे हैं जो दवाई के उत्पादन के क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम कर रहे हैं। दवाईयों का तो उत्पादन हो रहा है लेकिन दवाई लिखने वाले डॉक्टर नहीं हैं तो गरीब की बीमारी कहाँ से जाएगी..? भाइयों-बहनों, ऐसी-ऐसी समस्याएं... खाने को रोटी नहीं, पहनने को कपड़ा नहीं, रहने को घर नही, पढ़ने का शिक्षा नहीं, बीमार को दवाई नहीं... ये सारी अमानतें कांग्रेस से जुड़ी हुई हैं। ये कांग्रेस की दी हुई विरासत है..!

भाइयों-बहनों, हिन्दुस्तान के आने वाले कल की चिंता करनी है, हिन्दुस्तान के भाग्य को बदलना है तो हमें विकास का रास्ता अपनाना पड़ेगा..! और मैं कहने आया हूँ कि विकास के रास्ते के बिना हम सामान्य मानवी का भला नहीं कर सकते..! पीड़ित, शोषित, दलित, आदिवासी, मछुआरे, इन सबका कल्याण कौन करेगा..? क्या हुआ कि कांग्रेस पार्टी ने इनके कल्याण की दिशा में कुछ नहीं किया..? उनको तो चुनाव आते हैं तब तिजोरी खाली करो और वोट पाने के रास्ते खोजो, उसके सिवाय कोई रास्ता सूझता नहीं है। और इसलिए भाइयों-बहनों, आज मैं आपसे अनुरोध करने आया हूँ, मैं हैदराबाद की धरती से पूरे हिन्दुस्तान को प्रार्थना करने आया हूँ कि इस देश के हर नागरिक को हिन्दुस्तान की चिंता है, देश का हर नागरिक चिंतित है, नौजवान चिंतित है, अगर उनको हम भरोसा नहीं देंगे, अगर उनको हम विश्वास नहीं देंगे, तो हम जो डेमोग्राफिक डिविडेंड की बात करते हैं, जो हमारी 65% जनसंख्या 35 से नीचे की है, उसके पास शक्ति है, सपने हैं, सामर्थ्य है लेकिन उसके पास काम नहीं है, अगर हम हमारे देश के नौजवानों को रोजगार नहीं देंगे तो इस देश की हालत क्या होगी इसका आप अंदाजा कर सकते हैं..!

भाइयों-बहनों, मैं आज जब हैदराबाद की धरती पर आया हूँ तो मेरे मन में सरकार की कल्पना क्या है वो भी आज मैं बताना चाहता हूँ। भाइयों-बहनों, मेरा स्पष्ट मत है कि सरकार का एक ही मजहब होता है और वो मजहब होता है, इंडिया फर्स्ट..! सरकार का एक ही धर्मग्रंथ होता है और वो धर्मग्रंथ है, भारत का संविधान..! सरकार की एक ही भक्ति होती है और वो भक्ति है, भारत भक्ति..! सरकार की एक ही शक्ति होती है और वो शक्ति है, कोटी-कोटी जनशक्ति..! सरकार की पूजा होती है सवा सौ करोड़ बंधु भगिनी की भलाई, सवा सौ करोड़ देशवासियों की भलाई और सरकार की कार्यशैली होती है, ‘सबका साथ, सबका विकास’..! इस मंत्र को लेकर के हमें आने वाले दिनों में हिन्दुस्तान के भाग्य को बदलने के लिए भारत को कांग्रेस से मुक्त कराने का प्रयास करना है..!

मैं एक चीज आपसे बुलावाना चाहता हूँ। बोलेंगे..? पूरी ताकत से बोलेंगे..? दोनों हाथ ऊपर करके बोलेंगे..? मैं जो बोलूं वो आपको बोलना है। मैं बोलता हूँ फिर बोलिए,

यस, वी कैन... यस, वी कैन..! यस, वी विल डू... यस, वी विल डू..!

मेरे साथ बोलिए, जय तेलंगाना...! जय सीमांध्र..!

भारत माता की जय..! भारत माता की जय..!

वंदे मातरम्..! वंदे मातरम्..! वंदे मातरम्..!

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नमस्ते !
की ओरा New Zealand!

हम भारत के लोग सुनते आए थे, 20 साल के बाद। लेकिन आज चालीस साल बाद कोई भारतीय पीएम न्यूज़ीलैंड की धरती पर आया है। ये मेरा सौभाग्य है। मैं न्यूजीलैंड के सभी निवासियों के लिए, आप सभी लोगों के लिए, 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

साथियों,

ये प्रधानमंत्री के रूप में भले ही मेरा पहला न्यूज़ीलैंड दौरा है। लेकिन 25-30 साल पहले, जब मैं किसी सरकार में भी हिस्सा नहीं था, सार्वजनिक जीवन में मुझे कोई जानता नहीं था, तब भी मुझे यहां न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। और उस समय, मुझे किसी ने गिफ्ट में तीन चीजें दी थीं जो मैं वापस इंडिया लेकर के गया था। एक, यह मफ़लर। एक कैप, और एक दस्ताना। क्योंकि ठंड का मौसम था।

और उसमें से एक चीज़ मैं अभी यहां इस कार्यक्रम में भी लेकर आया हूं। यह मफ़लर जो आप देख रहे हैं, यह 25-30 साल पहले मुझे न्यूजीलैंड के एक साथी ने दिया था। इतने साल में मैंने कई बार इसका उपयोग किया, और आज भी इसे बहुत संभाल कर के रखा है। जैसे आपके प्यार को संभाल के रखता हूं।

इस बार जब मेरा यहां आने का कार्यक्रम बना, तो मैं विशेष तौर पर इसे अपने साथ लेकर के आया क्योंकि खबर थी कि ठंड ज्यादा है।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज़ भी हैं और एक कमिटमेंट भी है। इस रिश्ते को न्यूज़ीलैंड की एक सुंदर परंपरा अच्छे से डिफाइन करती है। यहाँ सदियों से एक शब्द लोगों को जोड़ता आया है - वाका। वाका सिर्फ़ एक नाव का नाम नहीं है, वाका हमारी शेयर्ड जर्नी की प्रतीक है। और आज भारत-न्यूजीलैंड की यही वाका एक नई यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है।

हमारे सामने अवसरों से भरा खुला समुद्र है, हवाएँ हमारे साथ हैं, समंदर की विशाल लहरें हमारे साथ हैं, इच्छाशक्ति का नीला आसमान हमारे साथ है, पाने को काफी कुछ है, और मैं जानता हूं, हम सफल होंगे।

साथियों,

मुझे इस यात्रा की सफलता पर पूरा भरोसा है, जानते हैं क्यों? मोदी नहीं, क्योंकि इसके असली नाविक आप सभी हैं। ऑकलैंड से वेलिंगटन तक, क्राइस्टचर्च से क्वीन्सटाउन तक, न्यूज़ीलैंड के कोने-कोने में फैला भारतीय समुदाय इस शेयर्ड जर्नी का एक नाविक है।

साथियों,

आगे बढ़ने से पहले, मैं अपने मित्र, प्राइम मिनिस्टर क्रिस्टोफर लक्सन, न्यूज़ीलैंड सरकार के सभी साथियों और यहां लेबर पार्टी के मंबर्स का अभिनंदन करूंगा।

ये दिखाता है कि भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्ते को कितना बड़ा बाइ-पार्टिसन सपोर्ट है। इससे ये भी पता चलता है कीवी इंडियन कम्यूनिटी की अचीवमेंट्स आपका कंट्रीब्यूशन कितना बड़ा है। आप यहां आए किवी इंडियन कम्यूनिटी के इस उत्सव का हिस्सा बने इससे ये सेलिब्रेशन और वाइब्रेंट हो गया है।

आपने जिस गर्मजोशी से जिस स्नेह और उत्साह से, आप ने हम सभी का स्वागत किया है मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

वैसे एक्सीलेंसी, किवी इंडियन कम्यूनिटी में भी सुपरहिट हैं। भारत के इंडिपेंडेंस डे पर आपने क्रिस हिपकिंस के साथ मिलकर दमादम मस्त कलंदर गाने पर जो डांस किया वो काफी वायरल हुआ। आपके वो मूव, Kiwi Indians के दिलों में छप गए हैं।

साथियों,

न्यूज़ीलैंड वाकई एक अद्भुत देश है। यहां पीस है, प्रॉसपैरिटी है, नेचर है, कल्चर है, और न्यूज़ीलैंड की असली ताकत, यहां के स्थानीय लोग हैं। न्यूज़ीलैंड के लोगों ने दिखाया है कि कोई देश जब एक जूनून, एक जज्बे के साथ आगे बढ़ता है, तो वो दुनिया को इंस्पायर करता है।

यहां जो किवी इंडियन कम्यूनिटी है, आप सभी को भी न्यूज़ीलैंड के दिलदार लोगों ने बहुत प्रेम से अपनाया है, अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। उन्होंने आपके टैलेंट, आपके विजन पर ट्रस्ट किया है। और आज देखिए, न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी हो, यहां की सोसायटी हो, किवी इंडियन्स नए-नए रंग भर रहे हैं।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां निखिल रविशंकर Air New Zealand के CEO बन सकते हैं। जहां आनंद सत्यानंद गवर्नर जनरल बन सकते हैं जहां क्रिकेट टीम में रचिन रविंद्र, ईश सोढी और एजाज़ पटेल जैसे टैलेंट को अवसर मिल सकता है।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां की सड़कों में भी भारतीय शहरों को सम्मान दिया गया है। कहीं खंडाला है। कहीं बॉम्बे हिल्स हैं। कहीं कोरोमंडल है।

कलकत्ता स्ट्रीट, दिल्ली क्रिसेंट, अमृतसर स्ट्रीट, ऐसे कितने ही नाम हैं। यहां रहते-रहते आप भी पूरे के पूरे Kiwi हो गए हैं। जैसे मुझे बताया गया है कि किसी भी विषय पर बात शुरू कीजिए थोड़ी ही देर में बात मौसम पर पहुँच जाती है!

साथियों,

मैं न्यूज़ीलैंड की लीडरशिप से जब भी मिला हूं, वो आप सभी की बहुत प्रशंसा करते हैं। प्रशंसा आपकी होती है, और माथा मेरा ऊंचा होता है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कि भारत, हज़ारों वर्षों पुरानी सभ्यता है जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में हर दौर में भारत ने खुद को ट्रांसफॉर्म किया है और इसका कारण है, हमारी सीखने की ललक।

भारत सबसे सीखता है हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं जनकल्याण की भावना मायने रखती है और इसलिए हमने न्यूज़ीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।

न्यूज़ीलैंड, दुनिया का वो देश है जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का राइट दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूज़ीलैंड की सोसायटी में वीमेन, बहुत बड़े पैमाने में कंट्रीब्यूट कर रही हैं। भारत भी आज Women Led Development के मंत्र के साथ महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है।

साथियों,

रूरल इकॉनॉमी, कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है ये न्यूज़ीलैंड ने करके दिखाया है। न्यूज़ीलैंड की ताकत, एग्रीकल्चर के इर्द-गिर्द बनाया गया एक एफिशियंट इकोसिस्टम है। ट्रेसेबिलिटी हो, फूड सेफ्टी हो, कंप्लायंस सिस्टम हो ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे, छोटे किसानों वाले बड़े एग्रीकल्चर नेशन के लिए बहुत बड़ी सीख है।

न्यूज़ीलैंड ने ज़ेस्प्री मॉडल से दिखाया है कि छोटे किसान भी बाज़ार के एक बड़े ब्रैंड बन सकते हैं। न्यूज़ीलैंड की क्लाइमेट-स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग टेक्नॉलॉजी में भी हमारे लिए सीखने को बहुत कुछ है।

साथियों,

यहां के मानुका हनी को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां हनी ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा हेल्थ एंड वेलनेस से जुड़ा है वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी हनी का बहुत बड़ा महत्व है। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि भारत में भी हम बी-कीपिंग को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में हनी प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई है।

और आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो हनी आता है, वो गोल्ड क्या, डायमंड बनता जा रहा है। मैं समझता हूं, न्यूजीलैंड से हम हनी प्रोडक्शन और बढ़ाने के बारे में भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

इस साल इंडिया–न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशन्स के सौ साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी। उस टूर में मेजर ध्यानचंद के शानदार परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हुई थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का भी दिल जीत लिया था।

साथियों,

कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं, तो ये कोलैब का जमाना है। न्यूज़ीलैंड और भारत स्पोर्ट्स में भी बहुत ही शानदार कोलैब कर सकते हैं। जैसे एक उदाहरण रग्बी का है। मुझे अभी-अभी बताया गया है कि कुछ देर पहले ही ऑल ब्लैक ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए, इसमें न्यूज़ीलैंड इसमें हमारी बहुत help कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में “न्यूज़ीलैंड रग्बी” और “रग्बी इंडिया” के coaching program को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।

साथियों,

आज यहां आने से पहले, मैं यहाँ न्यूज़ीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप event में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन्स ने नए ideas ने वाकई मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि हम स्पोर्ट्स टेक में साथ मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं।

भारत और न्यूज़ीलैंड का फ्यूचर, आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण, स्पेस सेक्टर भी है। भारत का चंद्रयान जब मून के साउथ पोल पर लैंड किया, पूरा न्यूजीलैंड नाच रहा था उस दिन। और उस दिन हम सबको गर्व हुआ।

अब आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। आपको गर्व दिलाने में इस सक्सेस में न्यूजीलैंड की टेक्नॉलजी का भी योगदान रहा है। न्यूजीलैंड की स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया है। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं।

साथियों,

स्पेस सेक्टर ये बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी, एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती हैं। यही हमारे ट्रेड अग्रीमेंट की भी स्पिरिट है। ये ट्रेड अग्रीमेंट विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा। और भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों के बिजनेस को नए अवसर देगा।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच एक और बहुत बड़ी सम्मानता है। ये समानता, हमारे इंडिजनेस कल्चर की है, इंडिजनेस कल्चर को सेलिब्रेट करने, उसको संरक्षण देने की है। और आज मैं माओरी समाज को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं।

मैंने हाका को केवल एक performance के रूप में ही नहीं देखा। मैंने हाका में, एक समाज की आत्मा देखी है। उसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है, और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एहसास है।

साथियों,

माओरी संस्कृति में एक बहुत सुंदर शब्द है- मना-कितांगा। इसका मतलब है, सम्मान देना, अपनापन देना, और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं 'अतिथि देवो भवः।'

शब्द अलग हैं, परिवेश अलग हैं, पहनावा अलग हैं, भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है।

ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है—फानो यानि परिवार। इसमें कई पीढ़ियाँ होती हैं। रिश्ते होते हैं। पूरा समुदाय होता है। भारत भी, परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता, हमारे लिए फैमिली, एक इंस्टीट्यूशन है।

साथियों,

माओरी परंपरा का एक और सुंदर विचार है— काईत्या कितांगा। ये हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं हैं। हम उसके संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है— 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।' पृथ्वी हमारी माता है। इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए, एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं।

साथियों,

मैं जानता हूं, हजारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी आपके दिल के किसी न किसी कोने में, दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही रहता है, हिंदुस्तान बसता ही है। सही है कि नहीं है? शरीर यहां होगा, मन? और इसीलिए, आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नज़र रखते हैं।

और जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर के देखते हैं, तो बहुत सी चीज़ें देखने की छूट जाती हैं। लेकिन घर में टी.वी. पर बैठकर के जब देखते हैं, तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसा ही, आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। और यही बात हमें सबसे खास बनाती है।

भारतीय देश से बाहर जिस देश में रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में मदद करते हैं, और अपने देश के विकास की भी जानकारी रखते हैं।

साथियों,

हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।

साथियों,

वैश्विक चुनौतियों के बीच, आज भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है वो अभूतपूर्व है। मैं आपके सामने देश की उपलब्धियों का भारत के सामर्थ्य का एक गुलदस्ता प्रस्तुत करुंगा। यह गुलदस्ता मैं आपके लिए लेकर के आया हूँ। और मैं पक्का मानता हूँ इस गुलदस्ते में आपकी पसंद का कोई न कोई फूल ज़रूर होगा, जो आपको सुंदर भी लगेगा और गर्व से भर भी देगा।

तो आप तैयार हैं? गुलदस्ता पेश करूँ? अब आपको ढूँढना है आपका फूल कहाँ है उसमें, या तो सारे के सारे फूल आपके हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया की fastest growing major economy है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा Vaccine Producer है। भारत Mobile Data Consumption में दुनिया के अग्रणी देशों में है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Mobile Manufacturer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Telecom Market है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Wheat Producer है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा Milk Producer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Fish Producer है।

साथियों,

इतना ही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Automobile Market है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है। भारत बहुत जल्द दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Renewable Energy Producer बनने जा रहा है। Solar Energy Capacity में भी भारत दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो चुका है।

साथियों,

आज का भारत, दुनिया को विकास के नए मॉडल भी दे रहा है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Digital Identity Platform का सफल संचालन कर रहा है। आज भारत में UPI के माध्यम से हर महीने अरबों Digital Transactions हो रहे हैं। भारत के Digital Public Infrastructure में आज दुनिया के दर्जनों देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। Drone Technology और Space Economy में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

ये उस नए भारत की तस्वीर हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे भारत न्यूजीलैंड की तरह की इकॉलॉजी और इकॉनॉमी दोनों में बैलेंस बनाकर चल रहा है।

साथियों,

भारत की इस ग्रोथ का एक और पहलू भी है, ये पहलू हमारी विरासत है, हमारी हैरिटेज है। भारत, जितना महत्व अपनी इकॉनॉमी और इकॉलॉजी को देता है, उतना ही फोकस, अपनी हैरिटेज पर भी करता है।

साथियों,

भारत कैसे काम करता है, इसका उदाहरण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप हैं। जब अफगानिस्तान में संकट आया, तो हम गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे मान के साथ भारत लेकर आए।

साथियों,

हमारे महान सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, साहस, समानता और करुणा का संदेश दिया है। दुनिया के हर हिस्से में गुरुद्वारे, सेवा के सेंटर हैं। कोई भूखा आए, उसे भोजन मिलता है। कोई संकट में हो, उसे सहारा मिलता है।

इसी माहौल में सिख कम्युनिटी के कुछ भाइयों और बहनों ने हमें बताया था कि श्री हरमंदिर साहिब में सेवा के लिए FCRA से जुड़ी कुछ परेशानियां आ रही हैं। हमने उस समस्या का तुरंत समाधान किया।

साथियों,

आप सभी श्री हेमकुंड साहिब जी के बारे में भी जानते हैं। हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर है। साल का लंबा समय बर्फ की चोटियों से घिरा रहता है। वहाँ अगर कोई दर्शन करने के लिए जाना चाहे तो बड़ा कठिन मार्ग है, बहुत कम लोग जा पाते हैं। खास करके हमारे सिख भाई-बहन वहाँ यात्रा के लिए जाते हैं।

वहाँ दर्शन के लिए जाने में, खास करके हमारे बुज़ुर्गों को, हमारे सिख भाई-बहनों को सहूलियत हो, इसलिए सरकार हेमकुंड साहिब तक रोपवे भी बनवा रही है।

साथियों,

हमारी ही सरकार ने साहिबजादों के शौर्य और बलिदान की अमर स्मृति में प्रति वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाना प्रारंभ किया है। आज यह दिवस पूरे देश के लिए, प्रेरणा का पर्व बन चुका है। आज केरलम से लेकर असम तक का बच्चा भी चारो साहिबजादों और माता गुजरी के बलिदान के बारे में जानने लगा है।

‘वीर बाल दिवस’ ने भारत के अनगिनत बच्चों के मन में युवाओं के हृदय में अटूट साहस का संचार किया है।

साथियों,

मैं आपसे पवित्र जोड़े साहब की भी बात करूंगा। मेरी सरकार में मेरे एक साथी हैं, श्रीमान हरदीप पुरी जी। पुरी परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेवादार थे। हरदीप पुरी जी ने मुझे यह बताया था की उनके परिवार ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के “जोड़े साहब” 300 साल से संजो के रखे हैं।

बंटवारे के समय पुरी साहब के पूर्वज इन्हें सुरक्षित दिल्ली ले आए थे। पवित्र “जोड़े साहब” को उनका परिवार सिख संगत को सौंपना चाहता था जिससे की ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनके दर्शन कर सकें।

फिर हमने एक समिति बनाई, जो सिख परंपराओं को जानते हैं, जानकारों की हमने advice ली और हमने निर्णय लिया कि इन पवित्र जोड़े साहब को वहां ले जाया जाए जहां श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पहली बार पावन भूमि पर आए, जहां उनका जन्म हुआ, यानी हमारे श्री पटना साहिब।

मुझे बहुत खुशी है कि अब यह पवित्र जोड़े साहब पटना साहिब की पावन भूमि पर है और यह मेरा सौभाग्य है कि उस पवित्र अवसर का मुझे साक्षी बनने का, वहां मौजूद रहने का सौभाग्य मिला था। मैं आपसे भी आग्रह करूंगा कि जब भी भारत जाएं, पटना साहिब में उनके दर्शन जरूर करें।

साथियों,

आज मैं यहां से बहुत सारा विश्वास, बहुत सारा प्यार, और बहुत सारी स्मृतियां लेकर जा रहा हूं। और मैं आपसे ये भी कहूंगा, इस बार भारतीय पीएम को न्यूज़ीलैंड आने में 40 साल लगे हैं, लेकिन अब इतना लंबा इंतज़ार आपको नहीं करना पड़ेगा। अब 40 साल नहीं लगेंगे, ये मोदी की गारंटी है।

और मोदी की गारंटी मतलब, गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

मैं आपसे एक आग्रह भी करना चाहता हूं। हमने कुछ समय पहले, हमारी इंडियन डायस्पोरा के बच्चों के लिए एक नया प्रयोग किया है। हमारे बच्चे भारत को समझें और भारत की विविधता की बात दुनिया तक पहुँचे, इसके लिए हमने भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। अभी इसका कर्टेन रेजर ही हुआ है, और हमारे साथियों ने इसमें ही जिस एनर्जी से पार्टिसिपेट किया है, मैं वही देखकर बहुत प्रभावित हूं।

अब हम इस इवेंट के सिक्स्थ एडिशन को और हाईटेक बना रहे हैं। बहुत सारे इवेंट्स इस बार ऐप के माध्यम से होने वाले हैं। मेरा आग्रह है कि यहाँ जितने भी युवा साथी हैं, वो इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। भारत को जाने और भारत की विरासत को न्यूजीलैंड के लोगों से जोड़ें।

साथियों,

मैं एक शानदार फ्यूचर सामने देख रहा हूं, जिसमें विकसित भारत की रोशनी भी है, और न्यूज़ीलैंड की प्रॉसपैरिटी भी है। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्राइम मिनिस्टर लक्सन और उनकी टीम का आभार! न्यूज़ीलैंड की जनता का धन्यवाद!

एक बार फिर मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय! वंदे मातरम्!

थैंक यू !
की ओरा !