भारत की सुरक्षा, हिफाजत एवं देश की रक्षा करने वालों की खुशहाली से सम्‍बन्धित अपने विजन के अनुरूप ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने अपना पदभार संभालने के बाद अपने प्रथम निर्णय के तहत राष्‍ट्रीय रक्षा कोष के अधीनस्‍थ ‘प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना’ में एक प्रमुख बदलाव को मंजूरी दी है।

प्रधानमंत्री ने निम्‍नलिखित बदलावों को मंजूरी दी है:

छात्रवृत्ति की दरें बालकों के लिए प्रति माह 2000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये और बालिकाओं के लिए प्रति माह 2250 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये कर दी गई हैं।
छात्रवृत्ति योजना के दायरे में अब ऐसे राज्‍य पुलिस कर्मियों के बच्‍चों को भी ला दिया गया है, जो आतंकी/नक्‍सल हमलों के दौरान शहीद हो गए हैं। राज्‍य पुलिस कर्मियों के बच्‍चों के लिए नई छात्रवृत्तियों का कोटा एक साल में 500 होगा। गृह मंत्रालय ही इस सम्‍बन्‍ध में प्रमुख मंत्रालय होगा।

पृष्‍ठभूमि

राष्‍ट्रीय रक्षा से जुड़े प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए नकदी या वस्‍तु के रूप में प्राप्‍त होने वाले स्‍वैच्छिक दान को संभाल कर रखने और उनके उपयोग के लिए वर्ष 1962 में राष्‍ट्रीय रक्षा कोष (एनडीएफ) बनाया गया था।

वर्तमान में इस कोष का उपयोग सशस्त्र बलों, अर्ध-सैन्‍य बलों और रेलवे सुरक्षा बल के सदस्‍यों तथा उनके आश्रितों के कल्‍याण के लिए किया जाता है। इस कोष का संचालन एक कार्यकारी समिति द्वारा किया जाता है। प्रधानमंत्री इस समिति के अध्‍यक्ष हैं और रक्षा, वित्‍त एवं गृह मंत्री इसके सदस्‍य हैं।

राष्‍ट्रीय रक्षा कोष के तहत ‘प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना (पीएमएसएस)’ नामक प्रमुख स्‍कीम कार्यान्वित की जा रही है, जिसका उद्देश्‍य सशस्त्र बलों, अर्ध-सैन्‍य बलों और रेलवे सुरक्षा बल के मृतक/पूर्व कर्मी की विधवाओं एवं बच्‍चों की तकनीकी और स्‍नातकोत्‍तर शिक्षा को बढ़ावा देना है। छात्रवृत्तियां तकनीकी संस्‍थानों (चिकित्सा, दंत चिकित्सा, पशु चिकित्सा, इंजीनियरिंग, एमबीए, एमसीए और एआईसीटीई/यूजीसी से समुचित अनुमोदन प्राप्‍त अन्य समतुल्‍य तकनीकी पेशा) में शिक्षा के लिए उपलब्‍ध हैं।

पीएमएसएस के तहत प्रत्‍येक वर्ष रक्षा मंत्रालय द्वारा नियंत्रित सशस्‍त्र बलों के 5500 बच्‍चों (वार्ड) के लिए, गृह मंत्रालय द्वारा नियंत्रित अर्ध-सैन्‍य बलों के 2000 बच्‍चों के लिए और रेल मंत्रालय द्वारा नियंत्रित बलों के 150 बच्‍चों के लिए नई छात्रवृत्तियां दी जाती हैं।

राष्‍ट्रीय रक्षा कोष में वेबसाइट ndf.gov.in के जरिये ऑनलाइन स्‍वैच्छिक दान को स्‍वीकार किया जाता है।

हमारे समाज को अधिक सुरक्षित बनाने वालों को सहायता देना:

प्रधानमंत्री ने देश के पुलिसकर्मियों द्वारा किये जाने वाले उल्‍लेखनीय योगदान के बारे में विस्‍तार से बताया। चाहे प्रचंड गर्मी हो या सर्दी अथवा भारी बारिश, हमारे पुलिसकर्मी पूरी तन्‍मयता के साथ अपने कर्तव्‍य का निर्वहन करते हैं। यहां तक कि प्रमुख उत्‍सवों के दौरान भी जब पूरा भारत इनका आनंद उठाता रहता है, तो भी हमारे पुलिसकर्मी पूरी ईमानदारी के साथ अपनी ड्यूटी निभाते रहते हैं।

एक राष्‍ट्र के रूप में यह हमारा कर्तव्‍य है कि हम न केवल उनका आभार व्‍यक्‍त करें, बल्कि कुछ ऐसे कदम भी उठायें जिससे कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की खुशहाली बढ़ सके। इसी भावना को ध्‍यान में रखते हुए प्रधामनंत्री ने यह निर्णय लिया है। छात्रवृत्ति की उपलब्धता होने से अब पुलिस परिवारों के ज्‍यादा से ज्‍यादा युवा अध्‍ययन करने और विभिन्‍न क्षेत्रों में आगे बढ़ने में सक्षम हो पायेंगे। इसका अनेक होनहार युवाओं के जेहन पर सशक्‍त प्रभाव पड़ेगा।

उल्‍लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में ही राष्‍ट्रीय पुलिस स्‍मारक का निर्माण किया गया था और राष्‍ट्र को समर्पित किया गया था। यह स्मारक हमारे पुलिसकर्मियों के साहस एवं बलिदान का साक्षी है और यह करोड़ों भारतीयों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।

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प्रधानमंत्री की सेशेल्स की राजकीय यात्रा
June 28, 2026

27 से 29 जून 2026 तक सेशेल्स की अपनी राजकीय यात्रा के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने आज माहे द्वीप के विक्टोरिया स्थित स्टेट हाउस में आधिकारिक वार्ता की।

वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता विकास, डिजिटल परिवर्तन, सतत् विकास, सामाजिक अवसंरचना, अक्षय ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में अवैध मत्स्यन, मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री डकैती जैसी चुनौतियों सहित क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों नेताओं ने भारत द्वारा घोषित विशेष आर्थिक पैकेज के अंतर्गत परियोजनाओं और पहलों के कार्यान्वयन में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की विकास प्राथमिकताओं के समर्थन तथा दोनों देशों के बीच घनिष्ठ और स्थायी साझेदारी को और गहरा करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

आधिकारिक वार्ता के उपरांत दोनों नेताओं ने भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक संयुक्त स्मारक लोगो जारी किया। इसके बाद क्षमता विकास, यूपीआई, स्वास्थ्य, कृषि, पोत परिवहन, अंतरिक्ष, प्रत्यर्पण तथा ऋण सहायता (लाइन ऑफ क्रेडिट) के क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों/समझौतों का आदान-प्रदान किया गया। ऋण सहायता (लाइन ऑफ क्रेडिट) की राशि 1,250 करोड़ रुपये है। समझौता ज्ञापनों/समझौतों की पूरी सूची यहाँ [link] देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, सेशेल्स की विकास आवश्यकताओं के समर्थन में खाद्य सुरक्षा, अवसंरचना, स्वास्थ्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा के क्षेत्रों में कई घोषणाएँ भी की गईं। इन घोषणाओं का विवरण यहाँ [link] देखा जा सकता है। सेशेल्स ने आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) में शामिल होने की भी घोषणा की।

दिन के बाद के हिस्‍से में प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा के विशेष अधिवेशन को संबोधित किया और ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। अपने संबोधन में उन्होंने भारत और सेशेल्स के बीच मित्रता के ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला तथा लोकतंत्र, विधि का शासन और जन-केंद्रित सुशासन जैसे साझा मूल्यों को रेखांकित किया, जो दोनों देशों का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि परस्पर विश्वास और घनिष्ठ सहयोग ने विकास सहयोग, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वास्थ्य तथा क्षमता विकास जैसे क्षेत्रों में विस्तृत एक मजबूत साझेदारी को आकार दिया है। प्रधानमंत्री ने दोनों लोकतंत्रों के बीच संसदीय आदान-प्रदान को और बढ़ाने का भी आह्वान किया। प्रधानमंत्री का पूरा संबोधन यहाँ [link] देखा जा सकता है।

सेशेल्स के विपक्ष के नेता महामहिम श्री बर्नार्ड जॉर्जेस ने भी प्रधानमंत्री से भेंट की। दोनों नेताओं ने भारत-सेशेल्स द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की और दोनों देशों के बीच विशेष मित्रता को और सुदृढ़ बनाने के प्रति अपना दृढ़ समर्थन व्यक्त किया।