गणतंत्र दिन के शुभ अवसर पर मैं आप सब को हार्दिक बधाई और शुभ कामनाएं देता हूं. यह दिन आत्म निरीक्षण का है. हमने वर्षो पहले स्वराज्य पाया. अब समय आ गया है 'स्वराज्य' को 'सुराज्य' में परिवर्तित करने का. और गुजरात ठीक वही कर रहा है... और अपने सुराज्य-शासन के अच्छे रिकार्ड को और बहेतर बनाना ज़ारी रखता है... अपने गरीब और वंचित जनों तक पहुंचकर उनको सशक्त करके... और वृद्धि-विकास के साथ सहभागिता को निश्चित करके.

आकस्मिक रूप से आज ही के दिन विश्व उद्योग, व्यवसाय, वित्त एवं बुद्धिनिष्ठों के कप्तानों का जमावड़ा दावोस में वार्षिक वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम समिट के रूप में इसी माह के दिनांक 26 से 30 तक हो रहा है. भारत भी उस में अपना उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल केन्द्रीय मंत्रीमंडल के वरिष्ठ मंत्रियों के दल के नेतृत्व में भेज रहा है. दिलचस्प बात यह है कि भारत ने दावोस में इस वर्ष के सम्मेलन में देश को अभिव्यक्त करने का विषय चुना है इंडिया इन्क्लुज़िव (भारत सब को सम्मिलित करते हुए). और मैं पुनः इस बात से आश्चर्यचकित हूं कि गुजरात कैसे आवेश में आगे बढ़ रहा है और इन विचारों को कार्यान्वित कर रहा है जब कि दिल्ली अभी सोच रही है और बातें कर रही है.

2009 में वाइब्रन्ट गुजरात समिट में मैंने कहा था कि गुजरात अधिक समय तक वाइब्रन्ट गुजरात समिट्स के मंच को केवल अपने ही लाभ के लिए निवेश प्राप्त करने के उत्तोलक के रूप में इस्तमाल नहीं करेगा. हम गुजरात केन्द्रित अभिगम से आगे बढ़कर गुजरात-स्वीकृति अभिगम की ओर मुड़ेंगे. मैंने उल्लेख किया था कि जब दावोस विश्व अर्थनीति पर बौद्धिक विचार-विमर्श के लिए मंच प्रदान करता है तब वाइब्रन्ट गुजरात समिट 2011 देश के निवेश भूदृश्य को नई दिशा देगा. हम सचमुच इस उदात्त उद्देश्य को अभी अभी संपन्न वाइब्रन्ट गुजरात 2011 के दौरान बहुतांश और कई प्रकार से सिद्ध कर पाये हैं. किन्तु इस प्रकार की एक नई राहों की खोज की सिद्धि का आज मैं उल्लेख करना चाहूंगा और इसके लिए उपयुक्त अवसर है गणतंत्र दिवस, और वह है मिशन मंगलम द्वारा सब को साथ लेकर विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों और महिलाओं का सशक्तिकरण निश्चित करना.

मिशन मंगलम की प्रस्तुति 2010 में की गई गुजरात के स्वर्ण जयंति वर्ष के अवसर पर सब को साथ लेकर विकास निश्चित करने के लिए राज्य के प्रयासों और स्रोतों को एक साथ जोड़ने और उससे राज्य HDI को सुधारने के लिए. मिशन मंगलम का उद्देश्य है गरीबों को स्वाश्रयी सहायक दलों (सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स) उत्पादक दल, सहकारी मंडलियां आदि में संघटित करना, उनमें कौशल निर्माण करना, उनको छोटी वित्त-सहाय द्वारा सहायता देना और साथ साथ उनको सहनीय जीवन यापन के लिए सशक्त करना. गुजरात के अभिगम में नवप्रवर्तक जो था वह यह कि युक्तिपूर्ण नीति द्वारा सब संभावनाओं पर विचार करने के लिए सार्वजनिक-निजी-साझेदारी में कॉर्पोरेट क्षेत्र, बैंकों, व्यावसायिक संस्थाओं और राज्य सरकार के अलावा गरीबों के संघटनों को सुसंकलित किया गया था. और इस रुपांतरण को कार्यान्वित करने के लिए एक कंपनी बनाई गई थी गुजरात लाइवलीहूड प्रमोशन कंपनी (GLPC) के नाम से. इस मिशन-अभिगम के परिणाम स्वरूप, आज ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों से 25 लाख से अधिक महिलाओं के 200,000 सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स/सखीमंडल संगठित हैं.

वाइब्रन्ट गुजरात 2011 के दौरान राज्य सरकार ने देश के कुछ सब से बड़े कॉर्पोरेट गृहों को शामिल करने के लिए संभावना का अन्वेषण किया, उनको कॉर्पोरेट मूल्य शृंखला में एकत्रित करने के द्वारा SHGs प्रकल्पों को शामिल करने के साथ. परिकल्पना यह थी कि सहक्रियाओं का सृजन करना और उनसे सभी हिस्सेदारो को सानुपातिक लाभ ही लाभ दिलाना! फलस्वरुप हम देश के कुछ सब से बड़े औद्योगिक / व्यावसायिक समूहों से MoUs करने में कामयाब हुए, जिससे ऐसे प्रकल्पों का प्रारंभ होगा जो सामूहिक रुप से गरीबों को शामिल करके आनेवाले 3-5 वर्षों में लगभग 1.5 मिलियन लोगों को महत्त्वपूर्ण रोज़गारी द्वारा खुशहाली दे पाएगा. इसे साकार करने के लिए वित्तदाता और निवेशक मिलकर रू. 21,000 करोड़ से अधिक राशि देने को प्रतिबद्ध हुए हैं. कृषि, कृषि-प्रक्रिया, खाद्य-प्रक्रिया, सज्जा-परिधान, तैयार वस्त्र, हाथकरधा, हस्तकला और ग्रामीण परिवहन जैसे क्षेत्रों पर जनसुखाकारी गतिविधियों के लिए ध्यान केन्द्रित किया गया है. इन में से अधिक प्रोत्साहक क्या है इसका यहां उल्लेख करना उचित होगा जैसे कि राज्य के सर्वाधिक गरीब समुदायों नमक-कामगार (अगरिया), माछीमार (सागर-खेडु) और आदिवासियों के उत्थान के प्रकल्प.

जब देश के शेष हिस्से बेरोजगारी और कम-रोज़गारी जैसी समस्याओं से उलझ रहे हैं, तब गुजरात ने मिशन मंगलम द्वारा यह रास्ता दिखाया है कि कैसे सरकार की सामूहिक शक्ति और निजी क्षेत्र परस्पर लाभदायी उद्देश्यों के लिए हाथ मिलाकर काम कर सकते हैं. इस पहल द्वारा कॉर्पोरेट-भागीदार लाभ पा रहे हैं क्यों कि वे प्रवर्तमान व्यवसाय प्रक्रियाओं के साथ पिछड़े और अग्रिम अनुबंधन से मुनाफा कमाते हैं. गग्रामीण क्षेत्रों में SHGs और उद्यम साहसिक पर्याप्त अच्छा कमा रहे हैं क्यों कि सुखाकारी अवसर स्थानीय पैदा किये गये हैं और ग्रामीणों को काम के लिए स्थानांतरण नहीं करना पड़ता. योग्य अनुबंधन और सहक्रियात्मकता मिलकर इस पहल को पूर्ण-चुस्त और असरदार हस्तक्षेप बनाते हैं.

जब केन्द्र सरकार किसानों की आत्महत्या, ग्रामीण कर्ज-जाल, और रैग्युलैशन ऑफ एक्सप्लॉइटेटिव MFIs जैसे नाजुक मसलों की घुटने-टेक प्रतिक्रिया में हाथ-पांव मार रही है तब मिशन मंगलम वाइब्रन्ट गुजरात 2011 समिट के दौरान इस समस्या को क्रमबद्धता से, नियमित रूप से और प्रभावक ढंग से सुलझा सका है. राज्य सरकार बैंकों के साथ MoUs में प्रविष्ट हुई यह आश्वस्त करने के लिए राज्य के सभी SHGs लघुत्तम रू. 50,000/- के अल्प-ऋण के साथ जुड़ेंगे. यह आनेवाले 3-4 महिनों में SHGs / सखीमंडलों को रू. 1,000 करोड़ से 200.000 की प्रवाहिता ला देगी. इससे यह परियोजना 25 लाछ सदस्यों को सीधी सहायता पहुंचायेगी, जो 1 करोड़ से अधिक जनसंख्या को प्रभावित करेगी!!! जब यह अल्प-ऋण केश क्रेडिट सुविधा के रूप में आ रहा है, तब SHGs इसे सामाजिक खर्च में, कंटिजन्सी खर्च में, और सब से बड़ी बात तो यह होगी कि वे ब्याजखोरों से उंचे सुद पर लिए कर्जों के पंजे से छूटने में व्यय कर सकेंगे. जब यह धन कई सदस्यों में कई बार भ्रमणशील होगा तब इस अनुबंधन का परिणाम रू. 1,000 करोड़ से बढकर साल भर में रू. 5,000 करोड़ तक भी हो पायेगा. यह संभावना मिशन मंगलम की पहल को भारत में सब से बड़ा शासन चालित अल्प-ऋण हस्तक्षेप बनाता है.

पुनः एक बार, जब दिल्ली के सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान प्रज्ञाजीवी सोच रहे हैं और दावोस जाकर बातें करेंगें, तब गुजरात ने पहले ही इस दिशा में कदम उठा लिए हैं... कार्यक्रम कार्यान्वित कर दिया है निर्णयात्मकता से और प्रभावक ढंग से. इसमें कोई आश्चर्य न होगा कि कई लोग कहना पसंद करेंगे वाइब्रन्ट गुजरात समिट "कार्यान्वयन में दावोस."

जय जय गरवी गुजरात!

भवदीय,

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इटली और भारत: इंडो-मेडिटेरेनियन के लिए एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप
May 20, 2026

भारत और इटली के बीच संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी आई है और यह सौहार्दपूर्ण मित्रता से आगे बढ़कर स्वतंत्रता, लोकतंत्र और भविष्य को लेकर साझा विजन पर आधारित एक सच्ची स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में बदल गए हैं।

ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था गहरे बदलाव के दौर से गुजर रही है, इटली और भारत की साझेदारी उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर नियमित संवाद से आगे बढ़ रही है और अब एक नए तथा व्यापक आयाम हासिल कर रही है, जो हमारी आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों साल पुरानी सभ्यतागत समझ को साथ जोड़ती है। हमारा सहयोग इस साझा समझ को दर्शाता है कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात से तय होगी कि देश इनोवेशन, एनर्जी ट्रांजिशन के प्रबंधन और स्ट्रैटेजिक संप्रभुता को मजबूत करने में कितने सक्षम हैं। इसी उद्देश्य से हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा डाइवर्स बनाने का संकल्प लिया है, ताकि नए लक्ष्यों को हासिल किया जा सके और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का बेहतर उपयोग हो सके। हमारा लक्ष्य इटली की डिजाइन क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस और वर्ल्ड-क्लास सुपरकंप्यूटर्स, जो उसे एक इंडस्ट्रियल पावरहाउस बनाते हैं, को भारत की तेज आर्थिक ग्रोथ, इंजीनियरिंग टैलेंट, बड़े पैमाने की क्षमता, इनोवेशन और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न तथा 2 लाख स्टार्ट-अप वाले एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम के साथ जोड़कर मजबूत तालमेल बनाना है। यह केवल साधारण इंटीग्रेशन नहीं, बल्कि ऐसा साझा वैल्यू क्रिएशन है जिसमें दोनों देशों की औद्योगिक ताकतें एक-दूसरे को और मजबूत बनाती हैं।

यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों दिशाओं में ट्रेड और इनवेस्टमेंट बढ़ाने का रास्ता खोलता है। हमारा लक्ष्य 2029 तक इटली और भारत के बीच 20 बिलियन यूरो के ट्रेड टारगेट को हासिल करना और उससे आगे निकलना है। इसके लिए डिफेंस और एयरोस्पेस, क्लीन टेक्नोलॉजी, मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, केमिकल्स, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, एग्री-फूड, टूरिज्म समेत कई सेक्टर्स पर फोकस किया जाएगा।

“मेड इन इटली” हमेशा से पूरी वर्ल्ड में एक्सीलेंस का प्रतीक रहा है और आज इसकी स्वाभाविक साझेदारी “मेक इन इंडिया” पहल के हाई-क्वालिटी लक्ष्यों के साथ बन रही है। इस संदर्भ में भारत के लिए प्रोडक्शन को लेकर इटली की कंपनियों की बढ़ती रुचि और इटली में भारतीय इंडस्ट्री की बढ़ती मौजूदगी, जिनकी संख्या अब दोनों तरफ से 1,000 से ज्यादा हो चुकी है, एक सकारात्मक संकेत है जो हमारी सप्लाई चेन के इंटीग्रेशन को और मजबूत करेगा।

टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन हमारी साझेदारी के केंद्र में है। आने वाले दशकों को ऐसी टेक्नोलॉजिकल क्रांति आकार देगी जिसका दायरा बेहद व्यापक होगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में तेज प्रगति शामिल है। भारत का डायनामिक इनोवेशन इकोसिस्टम, हाई स्किल्ड प्रोफेशनल टैलेंट पूल और इटली की एडवांस्ड इंडस्ट्रियल क्षमताएं इन सेक्टर्स में हमारे सहयोग को स्वाभाविक और रणनीतिक बनाती हैं। हमारी यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स के बीच बढ़ती साझेदारी भी इसे मजबूत आधार देगी।

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही बड़ी संख्या में देशों, खासकर ग्लोबल साउथ में, अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब हमारे समाज और ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रही है। इटली और भारत लंबे समय से यह सुनिश्चित करने के लिए साथ काम कर रहे हैं कि AI डेवलपमेंट जिम्मेदारीपूर्ण और मानव-केंद्रित हो। इसी नजरिये से भारत और इटली AI को समावेशी विकास के एक मजबूत माध्यम के रूप में भी देखते हैं, खासकर ग्लोबल साउथ के लिए, जहां डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुलभ बहुभाषी टेक्नोलॉजी विभाजन बढ़ाने के बजाय उसे कम कर सकती हैं। टेक्नोलॉजी के केंद्र में इंसान को रखने वाले भारत के MANAV विजन और मानवीय परंपरा पर आधारित मानव-केंद्रित “एल्गोर-एथिक्स” को बढ़ावा देने में इटली की अग्रणी भूमिका के आधार पर हमारी साझेदारी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि AI सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बने। हमारा दृष्टिकोण भारत की डिजिटल क्षमता को इटली की एथिकल और इंडस्ट्रियल विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है, ताकि टेक्नोलॉजी मानव गरिमा की सेवा करे। सुरक्षित डिजिटल सहयोग, कैपेसिटी बिल्डिंग और मजबूत साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बेस्ट प्रैक्टिसेज को साझा करते हुए हमारा लक्ष्य ऐसा स्वतंत्र, भरोसेमंद और समान अवसर वाला डिजिटल स्पेस तैयार करना है, जिसमें हर देश AI को आकार देने और उससे लाभ उठाने में सक्षम हो। यही दृष्टिकोण इटली की G7 प्रेसीडेंसी और नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के निष्कर्षों के केंद्र में है। AI को इंसानों द्वारा इंसानों के लिए बनाए गए एक माध्यम के रूप में देखने का मतलब यह स्पष्ट करना है कि टेक्नोलॉजी न तो लोगों की जगह ले सकती है, न उनके मौलिक अधिकारों को कमजोर कर सकती है और न ही इसका इस्तेमाल जनमत को प्रभावित करने या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बदलने के लिए होना चाहिए। तेजी से जुड़ती दुनिया में स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा को लेकर हमारा दृष्टिकोण इसी चुनौती पर आधारित है।

हमारा सहयोग स्पेस सेक्टर तक भी फैला हुआ है। स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में भारत की प्रभावशाली प्रगति, साथ ही एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में इटली की उत्कृष्ट क्षमता, संयुक्त पहलों और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है।

सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी देशों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी बनी हुई हैं। इटली और भारत डिफेंस, सिक्योरिटी और स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में अपने सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। हमारा सहयोग महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क, ड्रग तस्करी, साइबर क्राइम और मानव तस्करी जैसे खतरों के खिलाफ मजबूती बढ़ाने में मदद करेगा।

एनर्जी हमारी साझेदारी का एक और प्रमुख स्तंभ है। डाइवर्सिफाइड एनर्जी सोर्सेज की ओर बढ़ रहे ग्लोबल ट्रांजिशन के लिए इनोवेशन, इनवेस्टमेंट और सहयोग की जरूरत है। भारत और इटली रिन्यूएबल एनर्जी से लेकर हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी तक, और स्मार्ट ग्रिड से लेकर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट हब बनने की भारत की पहल जहां अपार संभावनाएं प्रदान करती है, वहीं यह रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर में इटली की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और यूरोप के लिए एनर्जी गेटवे के रूप में उसकी रणनीतिक भूमिका के साथ पूरी तरह मेल खाती है। इस संदर्भ में भारत की अगुवाई वाली प्रमुख पहलों, इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस (GBA) में अन्य देशों के साथ हमारा सहयोग भी महत्वपूर्ण है।

फिजिकल, डिजिटल और मानवीय कनेक्टिविटी वह कड़ी है जो हमें एक साथ जोड़ती है। भारत और इटली दोनों ग्लोबल अर्थव्यवस्था के दो अहम केंद्रों, इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन, के मध्य स्थित हैं। इन क्षेत्रों को अलग-अलग दायरों के रूप में नहीं, बल्कि तेजी से एक-दूसरे से जुड़ते हुए क्षेत्रों के रूप में देखा जाना चाहिए।

दरअसल, हम उस उभरते हुए “इंडो-मेडिटेरेनियन” को देख रहे हैं, जो ट्रेड, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, डेटा और विचारों का एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर बनता जा रहा है, जो हिंद महासागर को यूरोप से जोड़ता है। इसी आपस में जुड़े हुए क्षेत्र में हमारे संबंध स्वाभाविक रूप से एक विशेष स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में विकसित हो रहे हैं, जो दो महाद्वीपों को जोड़ते हुए नई ग्लोबल डायनामिक्स को आकार दे रही है।

इसी संदर्भ में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर हमारे क्षेत्रों को मॉडर्न ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल नेटवर्क, एनर्जी सिस्टम और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए जोड़ने की एक दूरदर्शी पहल है। भारत और इटली इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

हम अपनी साझा चुनौतियों का समाधान दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी और दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में “धर्म” की अवधारणा उस जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती है, जो हमारे कार्यों का आधार बननी चाहिए, जबकि “वसुधैव कुटुम्बकम”, यानी “पूरी दुनिया एक परिवार है”, का सिद्धांत आज के आपस में जुड़े डिजिटल युग में गहराई से प्रतिध्वनित होता है। ऐसे मूल्य इटली की पुनर्जागरण काल से जुड़ी मानवतावादी परंपरा में भी स्वाभाविक रूप से दिखाई देते हैं, जो हर व्यक्ति की गरिमा और समाजों तथा लोगों को जोड़ने में संस्कृति की शक्ति को महत्व देती है।

इसलिए हमारा साझा विजन लोगों को केंद्र में रखकर मजबूत और भविष्योन्मुखी भारत-इटली साझेदारी की नींव रखना है।

(लेखक: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी)