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 मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कृषि महोत्सव में आए किसानों के साथ सांध्य वार्तालाप में कहा कि कृषि महोत्सव कल्पवृक्ष बन गया है। उन्होंने कहा कि धन के अभाव में किसानों को मुसीबत में नहीं पड़ने दिया जाएगा।

     खेती के लिए चिंता करनेवाले कर्मयोगियों, किसानों और पशुपालकों ने गुजरात में तपती गर्मी में भी सुख की अनुभुति करवाई है, इसका उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष पशु स्वास्थ्य मेले के अभियान को जोड़कर मूक पशुओं की भी चिंता की गई है। कृषि क्षेत्र में कितनी नई उपलब्धियां हासिल की गई है, इसकी झांकी कृषि महोत्सव ने करवाई है।

गुजरात में 27 लाख किसान खातेदार सहकारी बैंकिंग में से कृषि ऋण प्राप्त करते हैं और 8211 सहकारी ऋण मंडलियों द्वारा आज कुल 8000 करोड़ का कृषि ऋण मिलता है जिससे किसान को आर्थिक हौसला मिला है। लम्बी अवधि के कृषि ऋण में डेढ़ गुणा वृद्धि हुई है।

भारत सरकार ने सहकारी बैंकों द्वारा कृषिलक्ष्यी ऋण के ब्याज में कोई राहत नहीं दी है मगर इस सरकार ने सहकारी बैंकों को सात प्रतिशत पर अगर वह कृषि ऋण दे तो ब्याज में 2 प्रतिशत राहत देकर 150 करोड़ रुपए दिए हैं। भारत सरकार ने गुजरात के सहकारी बैंकों के खातेदारों के साथ अन्याय किया है लेकिन गुजरात सरकार ने किसानों को सहकारी बैंकों से लोन लेने पर ब्याज में 2 प्रतिशत की राहत दी है। इसके साथ ही कृषि से जुड़े आर्थिक प्रवत्तियां करनेवाले 16000 से ज्यादा सखीमंडलों को 20 करोड़ की ब्याज राहत पांच प्रतिशत के हिसाब से दी है। रत्न कलाकार प्रवृत्ति करनेवाले किसानों को तीन प्रतिशत के ब्याज की छूट दी है क्योंकि उन्होंने सौराराष्ट्र में खेती को सहारा देने का संकल्प रखा था।

गुजरात की सात जिला सहकारी बैंक़ों के लायसेंस रद्द करने का फरमान रिजर्व बैंक ने दिया था तब इस सरकार ने ही 84 करोड़ चुकाकर इन बैंकों को जीवनदान दिया था। इतना ही नहीं, पंचमहाल जिला केन्द्रिय सहकारी बैंक को पुनर्जीवित करने के लिए समय पर सहायता करने की हिन्दुस्तान की यह पहली घटना है। इससे ढाई लाख आदिवासी किसानों को सहकारी बैंक लोन का फायदा मिलना शुरु हुआ है। फार्मर्स क्लब बनाया गया है, 5700 जितनी कृषि ऋण मंडलियों को रिवाइवल पेकेज देकर किसानों को लाभ दिया गया है। 50000 जितने नये सभासदों, दलितों- आदिवासियों के समुदाय से सहकारी मंडलियों के खातेदारों का समूह बनाया जा रहा है।

गुजरात सरकार ने 8000 सहकारी ऋण मंडलियों के रिवाइवल पेकेज के लिए 628 करोड­ का कोष दिया लेकिन केन्द्र सरकार से 260 करोड़ में से एक पैसा भी नहीं मिला। किसानों को बाजार व्यवस्था मिले, इसके लिए 291 एपीएमसी सहित 400 बाजर यार्डों की आधुनिक सुविधा के लिए 125 करोड़ खर्च किए हैं। भारत सरकार के पास गुजरात के लिए भाव नेटवर्क़ नहीं है लेकिन गुजरात ने समग्र खेत उत्पन्न बाजार व्यवस्था को ई-गवर्नेंस के साथ जोड़्ने का संकल्प किया है। गुजरात की खेत उत्पन्न बाजार समितियों द्वार 3000 लाख क्विंटल माल की आवक-जावक से 22000 करोड़ की आय किसानों को दी है। किसान कल्पवृक्ष योजना भी बाजार व्यवस्था सुदृढ़ बनाने के लिए शुरु की गई है।

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