प्रिय मित्रो,
पिछले दिनों मेरे भाषणों और लेखो पर आधारित पुस्तक "सामाजिक समरसता" का लोकार्पण हुआ.
पुस्तक के दलित लेखक और मेरे परम मित्र किशोर मकवाना का अत्यंत पीड़ा से भरा पत्र आज मिला.
एक दलित की पीड़ा को इस blog के माध्यम से आप तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा हूँ.
श्री किशोर मकवाणा का अक्षरशः पत्र...
सादर प्रणाम...
यह पत्र आपको एक सच्चई से रूबरू कराने के लिए लिख रहा हुं | मेरा जन्म दलित समाज में हुआ है, दलित-पीडित-वंजित परिवार-समुदायों की समाज में सदियों सें कैसी दुःखदायक स्थिति है उनके प्रत्यक्ष सनुभवों से मेरी जिन्दगी भरी पडी है| यही वजह है हि पीडित-वंचित मनुष्य के दुःख दर्द को जब किसी कि संवेदना का स्पर्श मिलता है तब, उसके प्रति आत्मीयता का स्वतः ही प्रादुर्भाव होता है|
मेरा सौभाग्य है कि संघर्षो के बीच ओर उसे पार कर, मुझे विचार-लेखन के व्यवसाय का अवसर मिला|
पिछले ढाई दशक से गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विचार ओर व्यवहार को अत्यंत बारिकी से देखता आया हूं| अंतःकरण में पवित्र भावना के साथ वे साथ वे पीडितों की सेवा में जुटे हुए हैं| उनके जीवनकार्य का केंद्र बिंदु हमेशा ही समाज की कतार में खडा अंतिम व्यक्ति रहा है| गुजरात के दलित बंधु आर्थिक रूप सें सक्षम हो, शोषण से मुकत हो, समग्र गुजरात समरस-एकरस बने इसके लिए श्री नरेन्द्र मोदी पूरे मनोयोग से एक अर्थ में डॉ. बाबा साहब अंबेडकर के स्वप्न को साकार कर रहे हैं| उनके विचार एवं व्यवहार में लेश मात्र का अंतर मुझे नजर नहीं आया तब लगा कि समाज के प्रति कर्तव्यभाव एवं ममत्वभाव को व्यकत करने वाले उनके लेखों एवं भाषाणों को लोगो के समक्ष रखना चाहिए| इसी विचार सें सामाजिक समरसता किताब का सृजन हुआ| हालांकि यह मेरी पहली किताब नहीं है, इससें पहले बिरसा मुंडा, संत रविदास, समर नहीं समरसता, राष्ट्रभक्त डॉं.बाबासाहब अंबेडकर, स्वामी विवेकानंद आदि विषयों पर मेरी काफी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है|
मेरे लिए यह गौरव की बात थी कि सामाजिक समरसता नामक मेरी १४वी पुस्तक लोगों के बीचा आने वाली थी| २६ अप्रैल २०१० की शाम ६.३० बजे आयोजित समारोह में गुजरात के क्रांतिकारी संत पू. स्वामी सच्चिदानंद, मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं सुप्रसिध्द कवि-लेखक खरी सुरेश दलाल उपस्थित थे| यह मेरे लिए आनंद का अवसर था|
समग्र लोकार्पण समारोह अत्यंत गरिमामय रहा| मेरे पत्रकार मित्रो ने दूसरे दिन अखबारों एवं मीडिया मे अत्यंत उत्साह से इस पुस्तक विमोचन के समाचार को बेहतरीन तरीके से स्थान दिया| मुझ जैसे दलित लेखक-सृजक के लिए यह जीवन की चिरस्मरणीय एवं सर्वाधिक यशस्वी घटना थी|लेकिन एक दलित के आनंद के एस अवसर को कलंकित करने और विकृत रंग से रंगने का कांग्रेस ने हीन प्रयास लिया| श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने और विकृत रंग से रंगने का कांग्रेस ने हीन प्रयास किया|श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने समग्र भाषण में कहीं, किसी भी स्वरूप में दलित समाज को लेकर कोई भी घटिया बात नहीं कही है| मोदी ने जो कहा ही नहीं ऍसी बात उनके मुंह में रख कांग्रेस को ने विकृत एवं मनगढंत बयानबाजी की| कांग्रेसी नेताओं ने सामाजिक समरसता के भावपूर्ण प्रसंग को कोरे झुठ के जरिए कलंकित करने का प्रयास किया|
हदय में पवित्र भाव सें दलित समाज की उन्नति के लिए कर्तव्यरत श्री नरेन्द्र मोदी के संबंध में कांग्रेस के विकृत एवं झुठे बयान से न सिर्फ मुझे बल्कि पूरे दलित समाज को गहरी ठेस पहुंची है|श्री नरेन्द्र मोदी के इस पूरे भाषण की वीडियो-डीवीडी एवं वेबसइट पर ट्रांन्सस्क्रिप्ट आज भी उपलब्ध है| मेरी दलित बंधुओं से नम्र विनती है कि इसें देख लिया जाना चाहिए, जिससे कि आप सत्य से वाकिफ हो सकें|
हिन्दुस्तान के अग्रणी अंग्रेजी दैनिक हिन्दू मे संपादक श्री एन. राम की टिप्प्णी का यहां उल्लेख कर रहा हूं| उन्होने कांग्रेसियों की ढोगी दलित भक्ति एवं विकृति का पर्दाफाश किया है| हिन्दु ने लिखा है कि सामाजिक समरसता पुस्तक विमोचन के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भाषण में सरासर झुठ जोडकर कांग्रेस स्वयं की इज्जत ही उछाल रही है| श्री मोदी ने दलितों के खिलाफ एक शब्द का उच्चारण तक नहीं किया है और मीडिया रिपोर्टो में भी एसी किसी बात का उल्लेख नहीं है| श्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ एसे आधारहीन और जानबूझकर झुठ फैलाने से कांग्रेस दलितों की हिमायती नहीं बन सकती| कांग्रेस तो देश के लिए खतरनाक वोट बैंक की राजनीति करती है और उनसे कभी दलितों के हितों की परवाह की ही नही है, सिर्फ और सिर्फ दलितों का तथा समाज के वंचित वर्ग का उपयोग करके सत्ता सें चिपकी रहना चाहती है | चुनाव के समय खासकर अपने सत्ता स्वार्थ के लिए दलितों को उसने साधन बना दिया है|
हालांकि जिस कांग्रेस ने बाबा साहब आंबेडकर को जीवनबर अपमानित किया, दलितों को हमेशा मूर्ख बनाकर उनका वोट बैंक के रूप में उपयोग किया है, उससे दूसरी कोई अपेक्षा नहीं रखी जा सकती| डॉ. बाबा साहब जातिविहीन-एकरस समाज चाहते थे लेकिन कांग्रेस उसके स्थापना काल से ही विभिन्न जातियों के बीच वैमनस्य के बीज बोती आई है|
डॉ.बाबा साहब आंबेडकर द्वारा लिखित कांग्रेस ने अस्पूश्यों के लिए क्या किया पुस्तक पढने योग्य है| इस पुस्तक में अनेक वास्तविकताएं तथा घटनाएं वर्णित करके कांग्रेस के दलित विरोधी असली चेहरे को डॉं.बाबा साहब ने बेनकाब किया है| अहमदाबाद जिले के काविठा गांव में अस्पृश्य बालको के शाला प्रवेश के मामलें में गांव के लोगों ने अस्पृश्यों का बहिष्कार किया| उस वक्त स्वयं बाबा साहब ने काविठा गांव आकर दखल दिया था लेकिन कांग्रेस ने गांव के लोगों को समझाने के बजाय अस्पृश्यों को ही गांव छोडकर चले जाने की सलाह दें डाली थी| डॉ.बाबा साहब मुंबई से अहमदाबाद आए तब कालूपुर रेलवे स्टेशन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लहराकर उनको अपमानित किया था|
कदम्-कदम पर डॉ.बाबा साहब पर मानसिक अत्याचार करने वाले तथा दलितों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने वाली कांग्रेस जैसी राजनैतिक पार्टी द्वारा हमारे दलित, वंचित,शोषित, पीडित समाज की पीडा दूर करने की बात सच्चाई सें परे है| इस पराई पीडा को सम्झने वाले श्री नरेन्द्रभाई मोदी जैसें समरस समाज के श्रेयस्कर चिंतक के खिलाफ सरासर झुठ दलितों के नाम पर कांग्रेस फैला रही है| ऐसे में कांग्रेस की इस रीति-नीति के खिलाफ दलितों का आक्रिश स्वाभाविक रूप सें पैदा होगा| यहां एक और बात की तरफ आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हुं| गुजरात विरोधी पिछलें आठ वर्षो सें गुजरात और श्री नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने का एक भी मौका हाथ सें जाने नहीं देते| ऐसे समय में देश, गुजरात और समाज में वैमनस्य पैदा करने वाले तत्वो को पहचान लेना चाहिए|
अपना स्वार्थ सिध्ध करने के लिए कांग्रेस किस सीमा तक जा सकती है, यह बताने के लिए ही मैं इस पत्र द्वारा अपनी बात आप तक पहुंचा रहा हुं| मेरी इस भावना में आप सब भी सहभागी बनेंगे, यही अपेक्षा है|
किशोर मकवाणा संपादक "सामाजिक समरसता" संपादक "नमस्कार"







