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प्रधानमंत्री ने वाहन स्क्रैप नीति का शुभारंभ किया
हमारा उद्देश्य एक व्यावहारिक चक्रीय अर्थव्यवस्था बनाना और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार रहते हुए सभी हितधारकों के लिए मूल्य-संवर्धन करना है: प्रधानमंत्री
देश में वाहनों के आधुनिकीकरण तथा सड़कों से अनुपयुक्त वाहनों को वैज्ञानिक तरीके से हटाने में वाहन स्क्रैप नीति बड़ी भूमिका निभाएगी: प्रधानमंत्री
21वीं सदी के भारत के लिए स्वच्छ, भीड़-भाड़ मुक्त और सुविधाजनक आवागमन का लक्ष्य, समय की मांग है: प्रधानमंत्री
यह नीति 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश लाएगी और हजारों नौकरियां पैदा होंगी: प्रधानमंत्री
नई स्क्रैप नीति, अपशिष्ट से धन-निर्माण की चक्रीय अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है: प्रधानमंत्री
पुराने वाहन के स्क्रैप प्रमाणपत्र वाले लोगों को नया वाहन खरीदने पर पंजीकरण के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा और रोड टैक्स में भी छूट मिलेगी: प्रधानमंत्री
हमारा प्रयास, वाहन निर्माण की मूल्य-श्रृंखला के संबंध में आयात पर निर्भरता कम करना है: प्रधानमंत्री
इथेनॉल, हाइड्रोजन ईंधन; विद्युत आधारित आवागमन; अनुसंधान एवं विकास और बुनियादी ढांचे में उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है: प्रधानमंत्री

नमस्कार !

केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी श्री नितिन गडकरी जी, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रुपाणी जी, ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े सभी stakeholders, सभी OEM Associations, मेटल और Scrapping Industry के सभी members, देवियों और सज्जनों !

75वें स्वतंत्रता दिवस से पहले आज का ये कार्यक्रम, आत्मनिर्भर भारत के बड़े लक्ष्यों को सिद्ध करने की दिशा में एक और अहम कदम है। आज देश National Automobile Scrappage Policy लॉन्च कर रहा है। ये Policy नए भारत की Mobility को, ऑटो सेक्टर को नई पहचान देने वाली है। देश में vehicle population के modernization को, unfit vehicles को एक scientific manner में सड़कों से हटाने में ये Policy बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी। देश के करीब-करीब हर नागरिक, हर इंडस्ट्री, हर क्षेत्र पर इससे सकारात्मक परिवर्तन आएगा ।

साथियों,

आप सभी जानते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए Mobility कितना बड़ा फैक्टर है। Mobility में आई आधुनिकता, travel और transportation का बोझ तो कम करती ही है, आर्थिक विकास के लिए भी मददगार साबित होती है। 21वीं सदी का भारत Clean, Congestion Free और Convenient Mobility का लक्ष्य लेकर चले, ये आज समय की मांग है। और इसलिए सरकार द्वारा आज का ये कदम उठाया गया है। और इसमें इंडस्ट्री के आप सभी दिग्गजों की, आप सभी stakeholders की बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

नई Scrapping Policy, Waste to Wealth- कचरे से कंचन के अभियान की, Circular Economy की एक अहम कड़ी है। ये Policy, देश के शहरों से प्रदूषण कम करने और पर्यावरण की सुरक्षा के साथ तेज़ विकास की हमारे कमिटमेंट को भी दर्शाती है। Reuse, Recycle और Recovery के सिद्धांत पर चलते हुए ये Policy ऑटो सेक्टर में, मेटल सेक्टर में देश की आत्मनिर्भरता को भी नई ऊर्जा देगी। इतनी ही नहीं, ये Policy, देश में 10 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का नया निवेश लाएगी और हज़ारों रोजगार का निर्माण करेगी।

साथियों,

आज जो प्रोग्राम हमने लॉन्च किया है, उसकी टाइमिंग अपने आप में बहुत विशेष है। हम आज़ादी के 75वें वर्ष में प्रवेश करने वाले हैं। यहां से देश के लिए अगले 25 वर्ष बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन आने वाले 25 साल में हमारे कामकाज के तरीके, हमारे रोज़मर्रा के जीवन हमारे व्यापार-कारोबार में अनेक - अनेक परिवर्तन होने वाले हैं, होंगे ही। जिस तरह Technology बदल रही है, हमारी lifestyle हो या फिर हमारी economy, दोनों में बहुत बदलाव होगा। इस परिवर्तन के बीच हमारे पर्यावरण, हमारी ज़मीन, हमारे संसाधन, हमारे raw material, इन सभी की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। Technology को ड्राइव करने वाले Rare earth metals जो आज ही Rare हैं, लेकिन जो Metal आज उपलब्ध हैं, वो भी कब Rare हो जाएंगे, ये कहना मुश्किल है। भविष्य में हम Technology और Innovation पर तो काम कर सकते हैं, लेकिन जो धरती माता से हमें संपदा मिलती है, वो हमारे हाथ में नहीं है।

इसलिए, आज एक तरफ भारत Deep Ocean Mission के माध्यम से नई संभावनाओं को तलाश रहा है, तो वहीं Circular Economy को भी प्रोत्साहित कर रहा है। कोशिश ये है कि विकास को हम sustainable बनाएं, environment friendly बनाएं। Climate change की चुनौतियां, हम आए दिन अनुभव कर रहे हैं। इसलिए, भारत को अपने हित में, अपने नागरिकों के हित में बड़े कदम उठाने ज़रूरी हैं। इसी सोच के साथ बीते सालों में एनर्जी सेक्टर में अभूतपूर्व काम हुआ है। सोलर और विंड पावर हो या फिर बायोफ्यूल, आज भारत दुनिया में अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है। Waste to Wealth का एक बहुत बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। इसको स्वच्छता से भी जोड़ा गया है और आत्मनिर्भरता से भी जोड़ा गया है। बल्कि आजकल तो हम सड़कों के निर्माण में Waste का बड़ी मात्रा में उपयोग कर रहे हैं। सरकारी बिल्डिंग, गरीबों के लिए घर के निर्माण में भी recycling को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

साथियों,

ऐसे ही अनेक प्रयासों में आज Automobile sector का नाम भी जुड़ गया है। इस पॉलिसी से सामान्य परिवारों को हर प्रकार से बहुत लाभ होगा। सबसे पहला लाभ तो ये होगा कि पुरानी गाड़ी को scrap करने पर एक सर्टिफिकेट मिलेगा। ये सर्टिफिकेट जिसके पास होगा उसे नई गाड़ी की खरीद पर रजिस्ट्रेशन के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा। इसके साथ ही उसे रोड टैक्स में भी कुछ छूट दी जाएगी। दूसरा लाभ ये होगा कि पुरानी गाड़ी की मैंटेनेंस कॉस्ट, रिपेयर कॉस्ट, fuel efficiency, इसमें भी बचत होगी। तीसरा लाभ सीधा जीवन से जुड़ा है। पुरानी गाड़ियों, पुरानी टेक्नॉलॉजी के कारण रोड एक्सीडेंट का खतरा बहुत अधिक रहता है, उससे मुक्ति मिलेगी। चौथा, इससे हमारे स्वास्थ्य पर प्रदूषण के कारण जो असर पड़ता है, उसमें भी कमी आएगी। और सबसे बड़ी बात ये है कि, इस Policy के तहत गाड़ी सिर्फ उसकी Age देखकर ही scrap नहीं की जाएगी। गाड़ियों का वैज्ञानिक तरीके से authorized automated testing centers पर फिटनेस टेस्ट होगा। अगर गाड़ी अनफिट होगी तो वैज्ञानिक तरीके से scrap किया जाएगा। इसके लिए देशभर में जो registered vehicle scrapping facilities बनाई जाएंगी वो technology driven हों, transparent हों, ये भी सुनिश्चित किया जाएगा।

साथियों,

Formal scrapping पर क्या लाभ होता है, गुजरात ने तो उसे साक्षात अनुभव किया है, और अभी नितिन जी ने भी इसका वर्णन किया है। गुजरात के अलंग को ship recycling hub के रूप में जाना जाता है। अलंग, दुनिया की ship recycling industry में अपनी हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ा रहा है। ship recycling के इस infrastructure ने यहां रोज़गार के हज़ारों नए अवसर तैयार किए हैं। इस पूरे क्षेत्र में infrastructure भी है और कुशल manpower भी है। ऐसे में जहाज़ों के बाद गाड़ियों की scrapping का भी ये बहुत बड़ा hub बन सकता है।

साथियों,

Scrapping Policy से पूरे देश में scrap से जुड़े सेक्टर को नई ऊर्जा मिलेगी, नई सुरक्षा मिलेगी। विशेष रूप से scrapping से जुड़े जो हमारे कामगार हैं, जो छोटे कारोबारी हैं, उनके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा। इससे कामगारों को सुरक्षित माहौल मिलेगा, संगठित क्षेत्र के दूसरे कर्मचारियों जैसे लाभ भी उनको मिल पाएंगे। इतना ही नहीं, scrap का काम करने वाले छोटे कारोबारी, authorized scrapping centres के लिए कलेक्शन एजेंट्स का काम भी कर सकते हैं।

साथियों,

इस प्रोग्राम से ऑटो और मेटल इंडस्ट्री को बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा। बीते साल ही हमें लगभग 23 हज़ार करोड़ रुपए का scrap steel इंपोर्ट करना पड़ा है। क्योंकि भारत में जो अभी तक scrapping होती है, वो प्रोडक्टिव नहीं है। एनर्जी रिकवरी ना के बराबर है, high-strength steel alloys की पूरी वैल्यू नहीं निकल पाती और जो कीमती मेटल हैं उनकी रिकवरी भी नहीं हो पाती। अब जब एक साइंटिफिक, टेक्नॉलॉजी आधारित scrapping होगी तो हम rare earth metals को भी रिकवर कर पाएंगे।

साथियों,

आत्मनिर्भर भारत को गति देने के लिए, भारत में इंडस्ट्री को Sustainable और Productive बनाने के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। हमारी ये पूरी कोशिश है कि ऑटो मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी वैल्यू चेन के लिए जितना संभव हो, उतना कम हमें इंपोर्ट पर निर्भर रहना पड़े। लेकिन इसमें इंडस्ट्री को भी थोड़े extra efforts की ज़रूरत है। आने वाले 25 साल के लिए आपके पास भी आत्मनिर्भर भारत का एक स्पष्ट रोडमैप होना चाहिए। देश अब clean, congestion free और convenient mobility की तरफ बढ़ रहा है। इसलिए, पुरानी approach और पुरानी practices को बदलना ही होगा। आज भारत, safety और quality के हिसाब से global standards अपने नागरिकों को देने के लिए प्रतिबद्ध है। BS-4 से BS-6 की तरफ सीधे Transition के पीछे यही सोच है।

साथियों,

देश में green और clean mobility के लिए सरकार Research से लेकर Infrastructure तक, हर स्तर पर व्यापक काम कर रही है। इथेनॉल हो, हाइड्रोजन फ्यूल हो या फिर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सरकार की इन प्राथमिकताओं के साथ इंडस्ट्री की सक्रिय भागीदारी बहुत ज़रूरी है। R&D से लेकर Infrastructure तक, इंडस्ट्री को अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। इसके लिए जो भी मदद आपको चाहिए, वो सरकार देने के लिए तैयार है। यहां से हमें अपनी partnership को नए लेवल पर ले जाना है। मुझे विश्वास है कि ये नया प्रोग्राम, देशवासियों में भी और ऑटो सेक्टर में भी एक नई ऊर्जा भरेगा, नई गति लाएगा, और नए विश्वास का संचार भी करेगा। आज के इस महत्वपूर्ण अवसर को, मैं नहीं मानता हूं कि उद्योग जगत के लोग जाने देंगे। मैं नहीं मानता हूं कि पुरानी गाड़ियों को ढ़ोने वाले लोग इस अवसर को जाने देंगे। ये अपने आप में एक बहुत बड़ा परिवर्तन का विश्वास लेकर के आई हुई ये व्यवस्था है। आज गुजरात में इस कार्यक्रम को लॉन्च किया गया है, पॉलिसी को लॉन्च किया गया है, और गुजरात का तो वैसे भी, और हमारे देश में भी Circular Economy शब्द अब नया आया होगा। लेकिन हम लोग तो जानते हैं। कि अगर कपड़े पुराने होते हैं तो हमारे घरों में दादी मां उसमे से ओढ़ने के लिए रज़ाई बना देती है। फिर रजाई भी पुरानी हो जाती है। तो उसको भी फाड़-फोड़ करके कचरा-पोता के लिए उसका उपयोग करते हैं। Recycling क्या कहते हैं, circular economy क्या कहते हैं। वो भारत के जीवन में नई-नई है। हमे बस वैज्ञानिक तरीके से इसको आगे बढ़ाना है, और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाएंगे तो मुझे विश्वास है कि कचरे में से कंचन बनाने के इस अभियान में हर कोई शरीक होगा और हम भी और नई – नई चीजें आविष्कार करने की दिशा में सफल होंगे। मैं फिर एक बार आप सबको बहुत – बहुत शुभकामनाएं देता हूं। बहुत – बहुत धन्यवाद।

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21st India – Russia Annual Summit
December 07, 2021
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President of the Russian Federation, H.E. Mr. Vladimir Putin, paid a working visit to New Delhi on 06 December 2021 for the 21st India – Russia Annual summit with Prime Minister Shri Narendra Modi.

2. President Putin was accompanied by a high level delegation. Bilateral talks between Prime Minister Modi and President Putin were held in a warm and friendly atmosphere. The two leaders expressed satisfaction at the sustained progress in the ‘Special and Privileged Strategic Partnership’ between both countries despite the challenges posed by the Covid pandemic. They welcomed the holding of the first meeting of the 2+2 Dialogue of Foreign and Defence Ministers and the meeting of the Inter-Governmental Commission on Military & Military-Technical Cooperation in New Delhi on 6 December 2021.

3. The leaders underscored the need for greater economic cooperation and in this context, emphasized on new drivers of growth for long term predictable and sustained economic cooperation. They appreciated the success story of mutual investments and looked forward to greater investments in each others’ countries. The role of connectivity through the International North-South Transport Corridor (INSTC) and the proposed Chennai - Vladivostok Eastern Maritime Corridor figured in the discussions. The two leaders looked forward to greater inter-regional cooperation between various regions of Russia, in particular with the Russian Far-East, with the States of India. They appreciated the ongoing bilateral cooperation in the fight against the Covid pandemic, including humanitarian assistance extended by both countries to each other in critical times of need.

4. The leaders discussed regional and global developments, including the post-pandemic global economic recovery, and the situation in Afghanistan. They agreed that both countries share common perspectives and concerns on Afghanistan and appreciated the bilateral roadmap charted out at the NSA level for consultation and cooperation on Afghanistan. They noted that both sides shared common positions on many international issues and agreed to further strengthen cooperation at multilateral fora, including at the UN Security Council. President Putin congratulated Prime Minister Modi for India’s ongoing non-permanent membership of the UN Security Council and successful Presidency of BRICS in 2021. Prime Minister Modi congratulated Russia for its ongoing chairmanship of the Arctic Council.

5. The Joint Statement titled India-Russia: Partnership for Peace, Progress and Prosperity aptly covers the state and prospects of bilateral ties. Coinciding with the visit, several Government-to-Government Agreements and MoUs, as well as those between commercial and other organizations of both countries, were signed in different sectors such as trade, energy, science & technology, intellectual property, outer space, geological exploration, cultural exchange, education, etc. This is a reflection of the multifaceted nature of our bilateral partnership.

6. President Putin extended an invitation to Prime Minister Modi to visit Russia for the 22nd India-Russia Annual Summit in 2022.