साझा करें
 
Comments
प्रधानमंत्री ने वाहन स्क्रैप नीति का शुभारंभ किया
हमारा उद्देश्य एक व्यावहारिक चक्रीय अर्थव्यवस्था बनाना और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार रहते हुए सभी हितधारकों के लिए मूल्य-संवर्धन करना है: प्रधानमंत्री
देश में वाहनों के आधुनिकीकरण तथा सड़कों से अनुपयुक्त वाहनों को वैज्ञानिक तरीके से हटाने में वाहन स्क्रैप नीति बड़ी भूमिका निभाएगी: प्रधानमंत्री
21वीं सदी के भारत के लिए स्वच्छ, भीड़-भाड़ मुक्त और सुविधाजनक आवागमन का लक्ष्य, समय की मांग है: प्रधानमंत्री
यह नीति 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश लाएगी और हजारों नौकरियां पैदा होंगी: प्रधानमंत्री
नई स्क्रैप नीति, अपशिष्ट से धन-निर्माण की चक्रीय अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है: प्रधानमंत्री
पुराने वाहन के स्क्रैप प्रमाणपत्र वाले लोगों को नया वाहन खरीदने पर पंजीकरण के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा और रोड टैक्स में भी छूट मिलेगी: प्रधानमंत्री
हमारा प्रयास, वाहन निर्माण की मूल्य-श्रृंखला के संबंध में आयात पर निर्भरता कम करना है: प्रधानमंत्री
इथेनॉल, हाइड्रोजन ईंधन; विद्युत आधारित आवागमन; अनुसंधान एवं विकास और बुनियादी ढांचे में उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है: प्रधानमंत्री

नमस्कार !

केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी श्री नितिन गडकरी जी, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रुपाणी जी, ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े सभी stakeholders, सभी OEM Associations, मेटल और Scrapping Industry के सभी members, देवियों और सज्जनों !

75वें स्वतंत्रता दिवस से पहले आज का ये कार्यक्रम, आत्मनिर्भर भारत के बड़े लक्ष्यों को सिद्ध करने की दिशा में एक और अहम कदम है। आज देश National Automobile Scrappage Policy लॉन्च कर रहा है। ये Policy नए भारत की Mobility को, ऑटो सेक्टर को नई पहचान देने वाली है। देश में vehicle population के modernization को, unfit vehicles को एक scientific manner में सड़कों से हटाने में ये Policy बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी। देश के करीब-करीब हर नागरिक, हर इंडस्ट्री, हर क्षेत्र पर इससे सकारात्मक परिवर्तन आएगा ।

साथियों,

आप सभी जानते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए Mobility कितना बड़ा फैक्टर है। Mobility में आई आधुनिकता, travel और transportation का बोझ तो कम करती ही है, आर्थिक विकास के लिए भी मददगार साबित होती है। 21वीं सदी का भारत Clean, Congestion Free और Convenient Mobility का लक्ष्य लेकर चले, ये आज समय की मांग है। और इसलिए सरकार द्वारा आज का ये कदम उठाया गया है। और इसमें इंडस्ट्री के आप सभी दिग्गजों की, आप सभी stakeholders की बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

नई Scrapping Policy, Waste to Wealth- कचरे से कंचन के अभियान की, Circular Economy की एक अहम कड़ी है। ये Policy, देश के शहरों से प्रदूषण कम करने और पर्यावरण की सुरक्षा के साथ तेज़ विकास की हमारे कमिटमेंट को भी दर्शाती है। Reuse, Recycle और Recovery के सिद्धांत पर चलते हुए ये Policy ऑटो सेक्टर में, मेटल सेक्टर में देश की आत्मनिर्भरता को भी नई ऊर्जा देगी। इतनी ही नहीं, ये Policy, देश में 10 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का नया निवेश लाएगी और हज़ारों रोजगार का निर्माण करेगी।

साथियों,

आज जो प्रोग्राम हमने लॉन्च किया है, उसकी टाइमिंग अपने आप में बहुत विशेष है। हम आज़ादी के 75वें वर्ष में प्रवेश करने वाले हैं। यहां से देश के लिए अगले 25 वर्ष बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन आने वाले 25 साल में हमारे कामकाज के तरीके, हमारे रोज़मर्रा के जीवन हमारे व्यापार-कारोबार में अनेक - अनेक परिवर्तन होने वाले हैं, होंगे ही। जिस तरह Technology बदल रही है, हमारी lifestyle हो या फिर हमारी economy, दोनों में बहुत बदलाव होगा। इस परिवर्तन के बीच हमारे पर्यावरण, हमारी ज़मीन, हमारे संसाधन, हमारे raw material, इन सभी की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। Technology को ड्राइव करने वाले Rare earth metals जो आज ही Rare हैं, लेकिन जो Metal आज उपलब्ध हैं, वो भी कब Rare हो जाएंगे, ये कहना मुश्किल है। भविष्य में हम Technology और Innovation पर तो काम कर सकते हैं, लेकिन जो धरती माता से हमें संपदा मिलती है, वो हमारे हाथ में नहीं है।

इसलिए, आज एक तरफ भारत Deep Ocean Mission के माध्यम से नई संभावनाओं को तलाश रहा है, तो वहीं Circular Economy को भी प्रोत्साहित कर रहा है। कोशिश ये है कि विकास को हम sustainable बनाएं, environment friendly बनाएं। Climate change की चुनौतियां, हम आए दिन अनुभव कर रहे हैं। इसलिए, भारत को अपने हित में, अपने नागरिकों के हित में बड़े कदम उठाने ज़रूरी हैं। इसी सोच के साथ बीते सालों में एनर्जी सेक्टर में अभूतपूर्व काम हुआ है। सोलर और विंड पावर हो या फिर बायोफ्यूल, आज भारत दुनिया में अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है। Waste to Wealth का एक बहुत बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। इसको स्वच्छता से भी जोड़ा गया है और आत्मनिर्भरता से भी जोड़ा गया है। बल्कि आजकल तो हम सड़कों के निर्माण में Waste का बड़ी मात्रा में उपयोग कर रहे हैं। सरकारी बिल्डिंग, गरीबों के लिए घर के निर्माण में भी recycling को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

साथियों,

ऐसे ही अनेक प्रयासों में आज Automobile sector का नाम भी जुड़ गया है। इस पॉलिसी से सामान्य परिवारों को हर प्रकार से बहुत लाभ होगा। सबसे पहला लाभ तो ये होगा कि पुरानी गाड़ी को scrap करने पर एक सर्टिफिकेट मिलेगा। ये सर्टिफिकेट जिसके पास होगा उसे नई गाड़ी की खरीद पर रजिस्ट्रेशन के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा। इसके साथ ही उसे रोड टैक्स में भी कुछ छूट दी जाएगी। दूसरा लाभ ये होगा कि पुरानी गाड़ी की मैंटेनेंस कॉस्ट, रिपेयर कॉस्ट, fuel efficiency, इसमें भी बचत होगी। तीसरा लाभ सीधा जीवन से जुड़ा है। पुरानी गाड़ियों, पुरानी टेक्नॉलॉजी के कारण रोड एक्सीडेंट का खतरा बहुत अधिक रहता है, उससे मुक्ति मिलेगी। चौथा, इससे हमारे स्वास्थ्य पर प्रदूषण के कारण जो असर पड़ता है, उसमें भी कमी आएगी। और सबसे बड़ी बात ये है कि, इस Policy के तहत गाड़ी सिर्फ उसकी Age देखकर ही scrap नहीं की जाएगी। गाड़ियों का वैज्ञानिक तरीके से authorized automated testing centers पर फिटनेस टेस्ट होगा। अगर गाड़ी अनफिट होगी तो वैज्ञानिक तरीके से scrap किया जाएगा। इसके लिए देशभर में जो registered vehicle scrapping facilities बनाई जाएंगी वो technology driven हों, transparent हों, ये भी सुनिश्चित किया जाएगा।

साथियों,

Formal scrapping पर क्या लाभ होता है, गुजरात ने तो उसे साक्षात अनुभव किया है, और अभी नितिन जी ने भी इसका वर्णन किया है। गुजरात के अलंग को ship recycling hub के रूप में जाना जाता है। अलंग, दुनिया की ship recycling industry में अपनी हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ा रहा है। ship recycling के इस infrastructure ने यहां रोज़गार के हज़ारों नए अवसर तैयार किए हैं। इस पूरे क्षेत्र में infrastructure भी है और कुशल manpower भी है। ऐसे में जहाज़ों के बाद गाड़ियों की scrapping का भी ये बहुत बड़ा hub बन सकता है।

साथियों,

Scrapping Policy से पूरे देश में scrap से जुड़े सेक्टर को नई ऊर्जा मिलेगी, नई सुरक्षा मिलेगी। विशेष रूप से scrapping से जुड़े जो हमारे कामगार हैं, जो छोटे कारोबारी हैं, उनके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा। इससे कामगारों को सुरक्षित माहौल मिलेगा, संगठित क्षेत्र के दूसरे कर्मचारियों जैसे लाभ भी उनको मिल पाएंगे। इतना ही नहीं, scrap का काम करने वाले छोटे कारोबारी, authorized scrapping centres के लिए कलेक्शन एजेंट्स का काम भी कर सकते हैं।

साथियों,

इस प्रोग्राम से ऑटो और मेटल इंडस्ट्री को बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा। बीते साल ही हमें लगभग 23 हज़ार करोड़ रुपए का scrap steel इंपोर्ट करना पड़ा है। क्योंकि भारत में जो अभी तक scrapping होती है, वो प्रोडक्टिव नहीं है। एनर्जी रिकवरी ना के बराबर है, high-strength steel alloys की पूरी वैल्यू नहीं निकल पाती और जो कीमती मेटल हैं उनकी रिकवरी भी नहीं हो पाती। अब जब एक साइंटिफिक, टेक्नॉलॉजी आधारित scrapping होगी तो हम rare earth metals को भी रिकवर कर पाएंगे।

साथियों,

आत्मनिर्भर भारत को गति देने के लिए, भारत में इंडस्ट्री को Sustainable और Productive बनाने के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। हमारी ये पूरी कोशिश है कि ऑटो मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी वैल्यू चेन के लिए जितना संभव हो, उतना कम हमें इंपोर्ट पर निर्भर रहना पड़े। लेकिन इसमें इंडस्ट्री को भी थोड़े extra efforts की ज़रूरत है। आने वाले 25 साल के लिए आपके पास भी आत्मनिर्भर भारत का एक स्पष्ट रोडमैप होना चाहिए। देश अब clean, congestion free और convenient mobility की तरफ बढ़ रहा है। इसलिए, पुरानी approach और पुरानी practices को बदलना ही होगा। आज भारत, safety और quality के हिसाब से global standards अपने नागरिकों को देने के लिए प्रतिबद्ध है। BS-4 से BS-6 की तरफ सीधे Transition के पीछे यही सोच है।

साथियों,

देश में green और clean mobility के लिए सरकार Research से लेकर Infrastructure तक, हर स्तर पर व्यापक काम कर रही है। इथेनॉल हो, हाइड्रोजन फ्यूल हो या फिर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सरकार की इन प्राथमिकताओं के साथ इंडस्ट्री की सक्रिय भागीदारी बहुत ज़रूरी है। R&D से लेकर Infrastructure तक, इंडस्ट्री को अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। इसके लिए जो भी मदद आपको चाहिए, वो सरकार देने के लिए तैयार है। यहां से हमें अपनी partnership को नए लेवल पर ले जाना है। मुझे विश्वास है कि ये नया प्रोग्राम, देशवासियों में भी और ऑटो सेक्टर में भी एक नई ऊर्जा भरेगा, नई गति लाएगा, और नए विश्वास का संचार भी करेगा। आज के इस महत्वपूर्ण अवसर को, मैं नहीं मानता हूं कि उद्योग जगत के लोग जाने देंगे। मैं नहीं मानता हूं कि पुरानी गाड़ियों को ढ़ोने वाले लोग इस अवसर को जाने देंगे। ये अपने आप में एक बहुत बड़ा परिवर्तन का विश्वास लेकर के आई हुई ये व्यवस्था है। आज गुजरात में इस कार्यक्रम को लॉन्च किया गया है, पॉलिसी को लॉन्च किया गया है, और गुजरात का तो वैसे भी, और हमारे देश में भी Circular Economy शब्द अब नया आया होगा। लेकिन हम लोग तो जानते हैं। कि अगर कपड़े पुराने होते हैं तो हमारे घरों में दादी मां उसमे से ओढ़ने के लिए रज़ाई बना देती है। फिर रजाई भी पुरानी हो जाती है। तो उसको भी फाड़-फोड़ करके कचरा-पोता के लिए उसका उपयोग करते हैं। Recycling क्या कहते हैं, circular economy क्या कहते हैं। वो भारत के जीवन में नई-नई है। हमे बस वैज्ञानिक तरीके से इसको आगे बढ़ाना है, और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाएंगे तो मुझे विश्वास है कि कचरे में से कंचन बनाने के इस अभियान में हर कोई शरीक होगा और हम भी और नई – नई चीजें आविष्कार करने की दिशा में सफल होंगे। मैं फिर एक बार आप सबको बहुत – बहुत शुभकामनाएं देता हूं। बहुत – बहुत धन्यवाद।

Explore More
आज का भारत एक आकांक्षी समाज है: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज का भारत एक आकांक्षी समाज है: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी
The Bharat Budget: Why this budget marks the transition from India to Bharat

Media Coverage

The Bharat Budget: Why this budget marks the transition from India to Bharat
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s address at the Krishnaguru Eknaam Akhand Kirtan for World Peace
February 03, 2023
साझा करें
 
Comments
“Krishnaguru ji propagated ancient Indian traditions of knowledge, service and humanity”
“Eknaam Akhanda Kirtan is making the world familiar with the heritage and spiritual consciousness of the Northeast”
“There has been an ancient tradition of organizing such events on a period of 12 years”
“Priority for the deprived is key guiding force for us today”
“50 tourist destination will be developed through special campaign”
“Gamosa’s attraction and demand have increased in the country in last 8-9 years”
“In order to make the income of women a means of their empowerment, ‘Mahila Samman Saving Certificate’ scheme has also been started”
“The life force of the country's welfare schemes are social energy and public participation”
“Coarse grains have now been given a new identity - Shri Anna”

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय जयते परम कृष्णगुरु ईश्वर !.

कृष्णगुरू सेवाश्रम में जुटे आप सभी संतों-मनीषियों और भक्तों को मेरा सादर प्रणाम। कृष्णगुरू एकनाम अखंड कीर्तन का ये आयोजन पिछले एक महीने से चल रहा है। मुझे खुशी है कि ज्ञान, सेवा और मानवता की जिस प्राचीन भारतीय परंपरा को कृष्णगुरु जी ने आगे बढ़ाया, वो आज भी निरंतर गतिमान है। गुरूकृष्ण प्रेमानंद प्रभु जी और उनके सहयोग के आशीर्वाद से और कृष्णगुरू के भक्तों के प्रयास से इस आयोजन में वो दिव्यता साफ दिखाई दे रही है। मेरी इच्छा थी कि मैं इस अवसर पर असम आकर आप सबके साथ इस कार्यक्रम में शामिल होऊं! मैंने कृष्णगुरु जी की पावन तपोस्थली पर आने का पहले भी कई बार प्रयास किया है। लेकिन शायद मेरे प्रयासों में कोई कमी रह गई कि चाहकर के भी मैं अब तक वहां नहीं आ पाया। मेरी कामना है कि कृष्णगुरु का आशीर्वाद मुझे ये अवसर दे कि मैं आने वाले समय में वहाँ आकर आप सभी को नमन करूँ, आपके दर्शन करूं।

साथियों,

कृष्णगुरु जी ने विश्व शांति के लिए हर 12 वर्ष में 1 मास के अखंड नामजप और कीर्तन का अनुष्ठान शुरू किया था। हमारे देश में तो 12 वर्ष की अवधि पर इस तरह के आयोजनों की प्राचीन परंपरा रही है। और इन आयोजनों का मुख्य भाव रहा है- कर्तव्य I ये समारोह, व्यक्ति में, समाज में, कर्तव्य बोध को पुनर्जीवित करते थे। इन आयोजनों में पूरे देश के लोग एक साथ एकत्रित होते थे। पिछले 12 वर्षों में जो कुछ भी बीते समय में हुआ है, उसकी समीक्षा होती थी, वर्तमान का मूल्यांकन होता था, और भविष्य की रूपरेखा तय की जाती थी। हर 12 वर्ष पर कुम्भ की परंपरा भी इसका एक सशक्त उदाहरण रहा है। 2019 में ही असम के लोगों ने ब्रह्मपुत्र नदी में पुष्करम समारोह का सफल आयोजन किया था। अब फिर से ब्रह्मपुत्र नदी पर ये आयोजन 12वें साल में ही होगा। तमिलनाडु के कुंभकोणम में महामाहम पर्व भी 12 वर्ष में मनाया जाता है। भगवान बाहुबली का महा-मस्तकाभिषेक ये भी 12 साल पर ही होता है। ये भी संयोग है कि नीलगिरी की पहाड़ियों पर खिलने वाला नील कुरुंजी पुष्प भी हर 12 साल में ही उगता है। 12 वर्ष पर हो रहा कृष्णगुरु एकनाम अखंड कीर्तन भी ऐसी ही सशक्त परंपरा का सृजन कर रहा है। ये कीर्तन, पूर्वोत्तर की विरासत से, यहाँ की आध्यात्मिक चेतना से विश्व को परिचित करा रहा है। मैं आप सभी को इस आयोजन के लिए अनेकों-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ।

साथियों,

कृष्णगुरु जी की विलक्षण प्रतिभा, उनका आध्यात्मिक बोध, उनसे जुड़ी हैरान कर देने वाली घटनाएं, हम सभी को निरंतर प्रेरणा देती हैं। उन्होंने हमें सिखाया है कि कोई भी काम, कोई भी व्यक्ति ना छोटा होता है ना बड़ा होता है। बीते 8-9 वर्षों में देश ने इसी भावना से, सबके साथ से सबके विकास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया है। आज विकास की दौड़ में जो जितना पीछे है, देश के लिए वो उतनी ही पहली प्राथमिकता है। यानि जो वंचित है, उसे देश आज वरीयता दे रहा है, वंचितों को वरीयता। असम हो, हमारा नॉर्थ ईस्ट हो, वो भी दशकों तक विकास के कनेक्टिविटी से वंचित रहा था। आज देश असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को वरीयता दे रहा है, प्राथमिकता दे रहा है।

इस बार के बजट में भी देश के इन प्रयासों की, और हमारे भविष्य की मजबूत झलक दिखाई दी है। पूर्वोत्तर की इकॉनमी और प्रगति में पर्यटन की एक बड़ी भूमिका है। इस बार के बजट में पर्यटन से जुड़े अवसरों को बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को विशेष अभियान चलाकर विकसित किया जाएगा। इनके लिए आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा, वर्चुअल connectivity को बेहतर किया जाएगा, टूरिस्ट सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा। पूर्वोत्तर और असम को इन विकास कार्यों का बड़ा लाभ मिलेगा। वैसे आज इस आयोजन में जुटे आप सभी संतों-विद्वानों को मैं एक और जानकारी देना चाहता हूं। आप सबने भी गंगा विलास क्रूज़ के बारे में सुना होगा। गंगा विलास क्रूज़ दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज़ है। इस पर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी सफर कर रहे हैं। बनारस से बिहार में पटना, बक्सर, मुंगेर होते हुये ये क्रूज़ बंगाल में कोलकाता से आगे तक की यात्रा करते हुए बांग्लादेश पहुंच चुका है। कुछ समय बाद ये क्रूज असम पहुँचने वाला है। इसमें सवार पर्यटक इन जगहों को नदियों के जरिए विस्तार से जान रहे हैं, वहाँ की संस्कृति को जी रहे हैं। और हम तो जानते है भारत की सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी अहमियत, सबसे बड़ा मूल्यवान खजाना हमारे नदी, तटों पर ही है क्योंकि हमारी पूरी संस्कृति की विकास यात्रा नदी, तटों से जुड़ी हुई है। मुझे विश्वास है, असमिया संस्कृति और खूबसूरती भी गंगा विलास के जरिए दुनिया तक एक नए तरीके से पहुंचेगी।

साथियों,

कृष्णगुरु सेवाश्रम, विभिन्न संस्थाओं के जरिए पारंपरिक शिल्प और कौशल से जुड़े लोगों के कल्याण के लिए भी काम करता है। बीते वर्षों में पूर्वोत्तर के पारंपरिक कौशल को नई पहचान देकर ग्लोबल मार्केट में जोड़ने की दिशा में देश ने ऐतिहासिक काम किए हैं। आज असम की आर्ट, असम के लोगों के स्किल, यहाँ के बैम्बू प्रॉडक्ट्स के बारे में पूरे देश और दुनिया में लोग जान रहे हैं, उन्हें पसंद कर रहे हैं। आपको ये भी याद होगा कि पहले बैम्बू को पेड़ों की कैटेगरी में रखकर इसके काटने पर कानूनी रोक लग गई थी। हमने इस कानून को बदला, गुलामी के कालखंड का कानून था। बैम्बू को घास की कैटेगरी में रखकर पारंपरिक रोजगार के लिए सभी रास्ते खोल दिये। अब इस तरह के पारंपरिक कौशल विकास के लिए, इन प्रॉडक्ट्स की क्वालिटी और पहुँच बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। इस तरह के उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए बजट में हर राज्य में यूनिटी मॉल-एकता मॉल बनाने की भी घोषणा इस बजट में की गई है। यानी, असम के किसान, असम के कारीगर, असम के युवा जो प्रॉडक्ट्स बनाएँगे, यूनिटी मॉल-एकता मॉल में उनका विशेष डिस्प्ले होगा ताकि उसकी ज्यादा बिक्री हो सके। यही नहीं, दूसरे राज्यों की राजधानी या बड़े पर्यटन स्थलों में भी जो यूनिटी मॉल बनेंगे, उसमें भी असम के प्रॉडक्ट्स रखे जाएंगे। पर्यटक जब यूनिटी मॉल जाएंगे, तो असम के उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा।

साथियों,

जब असम के शिल्प की बात होती है तो यहाँ के ये 'गोमोशा' का भी ये ‘गोमोशा’ इसका भी ज़िक्र अपने आप हो जाता है। मुझे खुद 'गोमोशा' पहनना बहुत अच्छा लगता है। हर खूबसूरत गोमोशा के पीछे असम की महिलाओं, हमारी माताओं-बहनों की मेहनत होती है। बीते 8-9 वर्षों में देश में गोमोशा को लेकर आकर्षण बढ़ा है, तो उसकी मांग भी बढ़ी है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स सामने आए हैं। इन ग्रुप्स में हजारों-लाखों महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। अब ये ग्रुप्स और आगे बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था की ताकत बनेंगे। इसके लिए इस साल के बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं की आय उनके सशक्तिकरण का माध्यम बने, इसके लिए 'महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट' योजना भी शुरू की गई है। महिलाओं को सेविंग पर विशेष रूप से ज्यादा ब्याज का फायदा मिलेगा। साथ ही, पीएम आवास योजना का बजट भी बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है, ताकि हर परिवार को जो गरीब है, जिसके पास पक्का घर नहीं है, उसका पक्का घर मिल सके। ये घर भी अधिकांश महिलाओं के ही नाम पर बनाए जाते हैं। उसका मालिकी हक महिलाओं का होता है। इस बजट में ऐसे अनेक प्रावधान हैं, जिनसे असम, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों की महिलाओं को व्यापक लाभ होगा, उनके लिए नए अवसर बनेंगे।

साथियों,

कृष्णगुरू कहा करते थे- नित्य भक्ति के कार्यों में विश्वास के साथ अपनी आत्मा की सेवा करें। अपनी आत्मा की सेवा में, समाज की सेवा, समाज के विकास के इस मंत्र में बड़ी शक्ति समाई हुई है। मुझे खुशी है कि कृष्णगुरु सेवाश्रम समाज से जुड़े लगभग हर आयाम में इस मंत्र के साथ काम कर रहा है। आपके द्वारा चलाये जा रहे ये सेवायज्ञ देश की बड़ी ताकत बन रहे हैं। देश के विकास के लिए सरकार अनेकों योजनाएं चलाती है। लेकिन देश की कल्याणकारी योजनाओं की प्राणवायु, समाज की शक्ति और जन भागीदारी ही है। हमने देखा है कि कैसे देश ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और फिर जनभागीदारी ने उसे सफल बना दिया। डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता के पीछे भी सबसे बड़ी वजह जनभागीदारी ही है। देश को सशक्त करने वाली इस तरह की अनेकों योजनाओं को आगे बढ़ाने में कृष्णगुरु सेवाश्रम की भूमिका बहुत अहम है। जैसे कि सेवाश्रम महिलाओं और युवाओं के लिए कई सामाजिक कार्य करता है। आप बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ और पोषण जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने की भी ज़िम्मेदारी ले सकते हैं। 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' जैसे अभियानों से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने से सेवाश्रम की प्रेरणा बहुत अहम है। योग हो, आयुर्वेद हो, इनके प्रचार-प्रसार में आपकी और ज्यादा सहभागिता, समाज शक्ति को मजबूत करेगी।

साथियों,

आप जानते हैं कि हमारे यहां पारंपरिक तौर पर हाथ से, किसी औजार की मदद से काम करने वाले कारीगरों को, हुनरमंदों को विश्वकर्मा कहा जाता है। देश ने अब पहली बार इन पारंपरिक कारीगरों के कौशल को बढ़ाने का संकल्प लिया है। इनके लिए पीएम-विश्वकर्मा कौशल सम्मान यानि पीएम विकास योजना शुरू की जा रही है और इस बजट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। कृष्णगुरु सेवाश्रम, विश्वकर्मा साथियों में इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाकर भी उनका हित कर सकता है।

साथियों,

2023 में भारत की पहल पर पूरा विश्व मिलेट ईयर भी मना रहा है। मिलेट यानी, मोटे अनाजों को, जिसको हम आमतौर पर मोटा अनाज कहते है नाम अलग-अलग होते है लेकिन मोटा अनाज कहते हैं। मोटे अनाजों को अब एक नई पहचान दी गई है। ये पहचान है- श्री अन्न। यानि अन्न में जो सर्वश्रेष्ठ है, वो हुआ श्री अन्न। कृष्णगुरु सेवाश्रम और सभी धार्मिक संस्थाएं श्री-अन्न के प्रसार में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। आश्रम में जो प्रसाद बँटता है, मेरा आग्रह है कि वो प्रसाद श्री अन्न से बनाया जाए। ऐसे ही, आज़ादी के अमृत महोत्सव में हमारे स्वाधीनता सेनानियों के इतिहास को युवापीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अभियान चल रहा है। इस दिशा में सेवाश्रम प्रकाशन द्वारा, असम और पूर्वोत्तर के क्रांतिकारियों के बारे में बहुत कुछ किया जा सकता है। मुझे विश्वास है, 12 वर्षों बाद जब ये अखंड कीर्तन होगा, तो आपके और देश के इन साझा प्रयासों से हम और अधिक सशक्त भारत के दर्शन कर रहे होंगे। और इसी कामना के साथ सभी संतों को प्रणाम करता हूं, सभी पुण्य आत्माओं को प्रणाम करता हूं और आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!