सरकार गरीब के लिए होती है, गरीबों का जीवन बदलने और उनके कल्याण के लिए होती है: प्रधानमंत्री #परिवर्तनरैली
हिन्दुस्तान का छोटे-से-छोटा नागरिक भी हमसे अपेक्षा कर सकता है और उन अपेक्षाओं को पूरा करना हमारा कर्तव्य: प्रधानमंत्री #परिवर्तनरैली
हमारे देश में वोट तो गरीबों के नाम पर मांगे गए लेकिन सरकार गरीबों के कल्याण के लिए नहीं चलाई गई: मोदी
जद(यू)-राजद-कांग्रेस, महागठबंधन नहीं, ‘महास्वार्थबंधन’ है: प्रधानमंत्री मोदी #परिवर्तनरैली
“सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” – इसी धरती के संतान और राष्ट्रकवि दिनकर के इस मंत्र ने हिन्दुस्तान के नौजवान को खड़ा कर दिया: मोदी
लोकनायक जयप्रकाश नारायण, राष्ट्रकवि दिनकर, श्री बाबू जैसे महापुरुष संपूर्ण राष्ट्र के लिए प्रेरणास्त्रोत: परिवर्तन रैली में प्रधानमंत्री
आगामी बिहार चुनाव जंगलराज और विकासराज के बीच की लड़ाई है; ये चुनाव विकास के रास्ते रोकने वाले लोगों को रोकने का चुनाव है: प्रधानमंत्री
बेगूसराय में औद्योगिक विकास का एक बहुत बड़ा केंद्र बनने की क्षमता: प्रधानमंत्री #परिवर्तनरैली
जातिवाद, संप्रदायवाद और वोट बैंक की राजनीति बिहार की बदहाली का कारण: प्रधानमंत्री मोदी #परिवर्तनरैली
जिस दिन बिहार बदलेगा, हिन्दुस्तान दुनिया में नंबर एक पर पहुँच जाएगा; ये ताकत है बिहार की: परिवर्तन रैली में प्रधानमंत्री मोदी

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय,

मंच पर विराजमान केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे वरिष्ठ साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री श्री रजनीश जी, बिहार विधानसभा पक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, हमारे वरिष्ठ नेता डॉ. सी पी ठाकुर जी, बेगूसराय के जनप्रिय सांसद डॉ. भोला सिंह जी, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सांसद श्रीमान राम कुमार शर्मा जी, बेगूसराय भाजपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान जयराम दास जी, लोजपा के बेगूसराय जिलाध्यक्ष संजय पासवान जी, हम पार्टी के जिलाध्यक्ष श्रीमान मोहम्मद हसन जी, रालोसपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान राजीव कुमार जी, लोजपा के चेरिया बरियारपुर के उम्मीदवार श्री अनिल कुमार चौधरी जी, लोजपा के बछवाड़ा के उम्मीदवार श्री अरविंद कुमार सिंह, भाजपा से तेघड़ा विधानसभा के उम्मीदवार राम लखन सिंह, भाजपा से मटिहानी विधानसभा के उम्मीदवार सर्वेश कुमार, लोजपा के उम्मीदवार साहेबपुर कमाल से मोहम्मद असलम जी, बेगूसराय से भाजपा के उम्मीदवार सुरेन्द्र मेहता जी, भाजपा से बिकरी विधानसभा के उम्मीदवार श्री रामानंद राम जी, लोजपा के उम्मीदवार मिथलेश जी निशांत, इन सभी मेरे साथियों के साथ आप सभी जोर से बोलें - भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

भाईयों-बहनों, किसी प्रदेश में राज्य स्तर की रैली करनी हो, पूरे राज्य से लोगों को बुलाया गया हो, और अगर ऐसी रैली हो जाए तो लोग मानेंगे कि ऐतिहासिक रैली हुई है। एक जिले में इतना बड़ा जमघट, मैं जहाँ देख रहा हूँ माथे ही माथे नज़र आ रहे हैं; ये रैली नहीं, रैला है। 60 साल तक बिहार को तबाह करने वाले ये तीन लोग मिल गए हैं, ये इनको बहाकर फेंक देंगे। मैं लोकसभा के चुनाव में यहाँ आ नहीं पाया था और हमारे भोला बाबू ये शिकायत कर रहे थे, आज मैंने उनकी शिकायत दूर कर दी और ये हमारी ज़िम्मेवारी है कि हिन्दुस्तान का छोटे-से-छोटा नागरिक भी हमसे अपेक्षा कर सकता है और उन अपेक्षाओं को पूरा करने का हमें प्रयास करना चाहिए। चुनावी राजनीति हमने भी देखी है। चुनाव में जनता-जनार्दन के दिल में उठते सवालिया निशानों को भी देखा है लेकिन मैंने जब से चुनाव प्रचार के लिए बिहार आना शुरू किया है, मैंने ऐसा पहले कभी चुनाव नहीं देखा जैसा मैं आज बिहार में देख रहा हूँ। मैं अनुभव कर रहा हूँ कि आज बिहार के नागरिकों के मन में चुनाव के नतीजे क्या होंगे, कैसे होंगे, इस पर कोई सवालिया निशान ही नहीं है। बिहार की जनता ने मान लिया है और ठान लिया है कि भाजपा के नेतृत्व में राजग (एनडीए) की सरकार बन कर रहेगी और बिहार विकासवाद के रास्ते पर चल पड़ेगा, ये मैं साफ़-साफ़ देख रहा हूँ।

आप बताएं, आखिर सरकार किसके लिए होती है? अमीरों को कभी सरकार की जरुरत पड़ती है क्या? अमीरों को कभी सरकार की जरुरत नहीं पड़ती है। अगर अमीर बीमार हो जाए तो डॉक्टर उसके घर के बाहर कतार लगाकर खड़े हो जाएंगे लेकिन अगर एक गरीब बीमार हो जाए तो उस बीमार के लिए सरकार के अलावा कोई सहारा नहीं होता है। किसी अमीर का बेटा अगर पढ़ना चाहता है तो उसे दुनिया के अच्छे-से-अच्छे टीचर मिल जाएंगे, अच्छे-से-अच्छे स्कूल मिल जाएंगे लेकिन अगर किसी गरीब के बच्चे को पढ़ना हो तो सरकारी शिक्षक और सरकारी स्कूल पर ही भरोसा करना पड़ता है। किसी अमीर को कहीं जाना है तो हवाई जहाज उसका इंतज़ार करता है लेकिन किसी गरीब को अपनी सब्जी, दूध आदि भी बेचने दूसरे गाँव जाना है तो उसे सरकारी बस का ही इंतज़ार करना पड़ता है। अगर बस नहीं आई तो उसका जाना रूक जाएगा।

सरकार गरीब के लिए होती है, गरीबों का जीवन बदलने और उनके कल्याण के लिए होती है लेकिन हमारे देश में चुनाव तो गरीबों के नाम पर लड़े गए लेकिन सरकार गरीबों के लिए नहीं चलाई गई। हमारे देश में वोट तो गरीबों के नाम पर मांगे गए लेकिन सरकार गरीबों के कल्याण के लिए नहीं चलाई गई। अगर इस देश में गरीबों के लिए कुछ हुआ होता; आज़ादी के इतने सालों बाद तक जितनी सरकारें आईं, अगर वो सभी सरकारें गरीबों को ध्यान में रखकर कुछ काम करती तो न मेरे देश में गरीबों की संख्या बढ़ती, न देश में गरीबी एवं भुखमरी रहती और न मेरे देश में बीमारी एवं अशिक्षा बढ़ती।

इस चुनाव में उन सभी लोगों से आग्रह करता हूँ कि आप सब वोट देने से पहले अपने दिल पर हाथ रखकर एक बार पूछ लीजिए कि ये जो ‘महास्वार्थबंधन’ बना हुआ है; ये महागठबंधन नहीं, ‘महास्वार्थबंधन’ है। इस ‘महास्वार्थबंधन’ के तीन पार्टनर हैं जो मिलकर के बिहार को फिर से एक बार हड़प करना चाहते हैं। ये तीन कौन लोग हैं, ये तीन कौन दल हैं, बिहार की जनता याद रखे।

एक कांग्रेस पार्टी है जिसने 35 साल तक बिहार में राज किया है। मुझे बताईये, जिस कांग्रेस ने 35 साल राज किया, उसने इतने वर्षों में कुछ भला किया है? बिहार का विकास किया है क्या? बिहार का नौजवान का भला किया है? उन्हें रोजगार दिलाया है? बिहार से गुंडागर्दी समाप्त की है? जो 35 साल में कुछ नहीं कर पाए, वो आज कुछ कर पाएंगे क्या? उनपर भरोसा कर सकते हैं क्या? उनसे कोई आशा कर सकते हैं क्या? दूसरे हैं – जंगलराज के प्रतीक। लोकनायक जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया के नाम से गरीबों के गीत गाते-गाते वो 15 साल तक बिहार के सिंहासन पर बैठे। 15 साल में क्या-क्या खाया, बिहार की जनता भली-भांति जानती है। कोई मुझे बताये कि 15 साल में कहीं सड़क का नामो-निशान रहने दिया? स्कूलें चलने दीं? शिक्षकों की भर्ती की? डॉक्टर बिहार छोड़कर भागे कि नहीं? नौजवानों को पलायन करना पड़ा कि नहीं? मां-बेटियों का सम्मान बचा था? क्या जिन्होंने 15 साल तक आपको ऐसी सरकार दी आप क्या उनपर फिर से भरोसा कर सकते हो? वो आपका भला कर सकते हैं? इसके बाद अगले 10 साल जो जंगलराज को हटाने का नाम लेकर के आये थे, वो फिर से जंगलराज लाने के लिए आपके सामने बातें कर रहे हैं, उनकी बातों पर भरोसा किया जा सकता है क्या? 35 साल कांग्रेस और 25 साल ये बड़ा भाई और छोटा भाई अपना कारोबार चलाते रहे।

इन बड़ा भाई - छोटा भाई का रिश्ता तो देखो; बड़ा भाई छोटे भाई को कभी हत्यारा कहता है तो कभी तोता कहता है। 60 साल तक जिन्होंने बिहार में सरकारें चलाई हैं, गरीबों के नाम पर राजनीति की है लेकिन इन्होंने बिहार को दिन-रात बर्बाद करने का ही काम किया है। भाईयों-बहनों, ऐसी सरकारों को फिर से कभी आने देना चाहिए क्या?

आज 8 अक्टूबर है और आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण का स्वर्गवास हुआ था। आज उनकी पुण्यतिथि पर आप सबसे आग्रह करता हूँ कि पल भर के लिए उस महापुरुष, बिहार के सपूत और हिन्दुस्तान के गौरव को याद कीजिये और दिनकर जी के उस बात को हिन्दुस्तान के कोने-कोने में पहुंचा दीजिए। “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” – इसी धरती के संतान और राष्ट्रकवि दिनकर के इस मंत्र ने हिन्दुस्तान के नौजवान को खड़ा कर दिया। आजादी के आंदोलन में वंदे मातरम् की गूँज जैसे एक देश को नई ताकत देती थी, वैसे देश में भ्रष्टाचार की मुक्ति के लिए, कुशासन से मुक्ति के लिए राष्ट्रकवि दिनकर की यह कविता, ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ अनेकों नौजवानों को प्रेरणा देती है।

ये भूमि उन महापुरुषों की है जिन्होंने आजादी के आंदोलन में एक नई ताकत दी। 1930 में गांधीजी की दांडी यात्रा हिन्दुस्तान की आजादी के आंदोलन महत्वपूर्ण मानी जाती है लेकिन जब नमक सत्याग्रह की बात आती है तो इसी धरती के महापुरुष श्री बाबू की याद आती है। उस महापुरुष ने कितना कष्ट झेला था। आईए, आज हम बेगूसराय में लोकनायक जयप्रकाश नारायण, राष्ट्रकवि दिनकर जैसे सभी महापुरुषों को याद करें हम लोगों के लिए जीने-मरने वाले श्री बाबू को याद करें और बिहार में विकासराज लाने का संकल्प करें।

एक तरफ़ जंगलराज लाने की कोशिश और दूसरी तरफ़ विकासराज लाने की कोशिश; ये चुनाव जंगलराज और विकासराज के बीच की लड़ाई है। आप मुझे बताईये कि बिहार को विकासराज चाहिए कि नहीं? बिहार को सड़क, रेल, उद्योग चाहिए कि नहीं? नौजवानों को रोजगार चाहिए कि नहीं? उनका पलायन रूकना चाहिए कि नहीं? अगर ये करना है तो बिहार में अब जंगलराज को मौका नहीं देना है। अब बिहार में सिर्फ़ विकासराज चाहिए। विकास का रास्ता ही हमारी समस्याओं का समाधान करेगा इसलिए आज मैं आपके पास विकास का संदेश लेकर आया हूँ।

मैं हैरान हूँ। आप लालू जी 1990 के डायलॉग निकाल लीजिए और 2015 के डायलॉग निकाल लीजिए; वही बात, न नया विचार है, न नई सोच है इतना जरुर है कि अब ख़ुद के बजाय बेटों को लेकर आये हैं, बाकि कोई फ़र्क नहीं आया है। मैं गुजरात की धरती से आता हूँ। मेरा जन्म वहां हुआ है और वो द्वारकाधीश की धरती है। श्री कृष्ण की द्वारका नगरी... उन्होंने गौ-प्रेम सिखाया था और आज भी गुजरात के लोग गौ-भक्ति में इतने लीन हैं कि वहां श्वेत क्रांति हुई, दूध का कारोबार इतना बढ़ा कि आज अमूल पूरी दुनिया में पहचाना जा रहा है। सच्चा यदुवंशी श्री कृष्ण की परंपरा का निर्वाह करने का संकल्प लेता है और यहाँ नेता यदुवंशियों का कितना अपमान कर रहे हैं।

मैं तो हैरान हूँ। आपको कैसी-कैसी गालियां दी जा रही हैं। लालू जी, आप जो कुछ भी बने, इन्हीं यदुवंशियों के आशीर्वाद से बने थे और आज आप उनको इतनी भयंकर गाली दे रहे हो; वो क्या खाते हैं, ऐसे गंभीर आरोप लगा रहे हो। मुझे शर्म आती है कभी मेरे देशवासियों, मेरे यदुवंशियों का ऐसा अपमान मत करो। मैं कृष्ण की धरती से आया हूँ, आपकी इन बातों से मुझे पीड़ा जरा ज्यादा हो रही है। और बोलते क्या हैं, जब मीडिया वालों ने पकड़ लिया, यदुवंशी समाज के लोग आगे आ गए तो क्या कहने लगे; वो कहते हैं – मेरे अन्दर शैतान प्रवेश कर गया। मैं बहुत हैरान हूँ कि क्या शैतान को भी यही ठिकाना मिला क्या, उसे क्या इसी शरीर में प्रवेश करने का मन कर गया क्या, बिहार में उनको और कोई नहीं मिला, हिन्दुस्तान में उनको और कोई नहीं मिला, पूरे विश्व में कोई और नहीं मिला, मिला तो सिर्फ़ लालू जी का शरीर मिला। देखिये, वो शैतान की मेहमाननवाजी भी कैसी कर रहे हैं, जैसे उनका कोई पुराना साथी आया हो, वैसी खातिरदारी कर रहे हैं वो।

भाईयों-बहनों, हमें तो जंगलराज से इस बिहार को बचाना है, रोजगार के लिए बल देना है और इसलिए मैं आज आपके पास आया हूँ। ये इलाक़ा औद्योगिक विकास के लिए एक बहुत बड़ा केंद्र बन सकता है। यहाँ के नौजवानों को रोजगार मिलेगा, सिर्फ़ ऐसा नहीं है बल्कि ये बेगूसराय की ताकत इतनी है कि ये बिहार के और नौजवानों को भी रोजगार देने वाला केंद्र बन सकता है लेकिन कोई यहाँ यहाँ आने की हिम्मत नहीं करता है क्योंकि वो कहता है कि जितना पैसा वो लगाएगा, उससे ज्यादा पैसा तो फ़िरौती में देना पड़ेगा। यहाँ तो एक ही उद्योग लगाया जंगलराज ने – अपहरण का उद्योग। किडनैप करो, फ़िरौती लो और अपना मौज-मस्ती करो, यही कारोबार चलता रहा तो कौन बेगूसराय आएगा।

आप देखिये, बरौनी का फ़र्टिलाइज़र का कारखाना, वो चालू होना चाहिए कि नहीं? उसका विकास होना चाहिए कि नहीं? यह आपका हक़ है कि नहीं? अगर आपका हक़ है तो मुझे वो हक़ पूरा करना चाहिए कि नहीं? इसलिए मेरी सरकार ने निर्णय किया कि उस फ़र्टिलाइज़र के लिए 1500 करोड़ लगाकर के फिर से यहाँ के नौजवानों को रोजगार दें और उनका विकास करें।

गंगा तट पर जो लोग रहते हैं, वो परेशान हैं कि बालू चोरों ने उनका जीना हराम करके रखा है, उनकी जमीन नहीं बच पा रही है, उनकी खेती नहीं बच पा रही है। जो लोग इस प्रकार के खेल खेलते हैं, उसका कारण ये है कि बिहार की सरकारों ने बिहार की दो ताक़तों को नज़रअंदाज़ किया है; एक ताक़त है, पानी और दूसरी यहाँ की जवानी। बिहार के कुछ इलाक़ों में इतना पानी है लेकिन उस पानी के कारण यहाँ तबाही हो रही है और बिहार में इतनी जवानी है कि उन्हें रोजी-रोटी के लिए बाहर जाना पड़ता है। ये दोनों बिहार का भाग्य बदल देंगे, ये हमारा विश्वास है इसलिए मेरे नौजवानों, हमें विकास के रास्ते पर चलना है।

अहंकार कहाँ से कहाँ पहुंचा देता है, ये आपने देखा है कांग्रेस पार्टी का अहंकार सातवें आसमान पर रहा और उसका परिणाम ये रहा कि कभी 440 सांसदों के साथ बैठते थे, पर आज 40 पर सिमट गए। जनता-जनार्दन गलतियों को माफ़ कर सकती है, अहंकार को नहीं। यहाँ के एक अहंकारी नेता अपने अहंकार के लिए उन्होंने बिहार के भाग्य को दांव पर लगा दिया है। इस चुनाव में ऐसे अहंकार को चकनाचूर करना हर बिहार प्रेमी का दायित्व है।

ये इलाक़ा है जहाँ परंपरागत रूप से किसान दलहन की खेती करते हैं। पहली बार दिल्ली में बैठी सरकार ने दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में इज़ाफ़ा किया और उसका नतीज़ा ये हुआ कि देश में दलहन की खेती करने वालों को प्रोत्साहन मिला। इस बार पहले से अधिक संख्या में दलहन की खेती के लिए हमारे किसान भाई आगे आये। भारत को दलहन की ज़रुरत है। मैं यहाँ दलहन की खेती करने वाले किसानों को और अधिक प्रोत्साहन देने का पक्षधर हूँ ताकि देश को विदेशों से दलहन न खरीदना न पड़े, हमारे किसानों द्वारा पैदा की गई दलहन से इस देश का पेट भरे और इसके लिए भारत सरकार आगे बढ़ रही है।

हमने 1 लाख 25 हज़ार करोड़ रुपये का पैकेज दिया एवं 40 हज़ार करोड़ और, कुल मिलाकर 1.65 लाख करोड़ रुपये का पैकेज बिहार के कल्याण के लिए है। अब आप मुझे बताईये कि ये पैकेज गाँव-गाँव पहुंचना चाहिए कि नहीं? नए रास्ते बनने चाहिए कि नहीं? बिजली आनी चाहिए कि नहीं? दावाखाने बनने चाहिए कि नहीं? गरीब के लिए स्कूल बनना चाहिए कि नहीं? लेकिन जो लोग ये कहते हैं कि ये 1.65 लाख करोड़ रुपये आने ही नहीं देंगे, ऐसे लोगों की सरकार बनेगी तो आएगा क्या? बिहार का भला होगा क्या? इस रास्ते में रोड़े अटकने वाले जो लोग हैं, उन्हें हटाना चाहिए कि नहीं? ये चुनाव विकास के रास्ते रोकने वाले लोगों को रोकने का चुनाव है।

ये जो ‘महास्वार्थबंधन’ है... इस चुनाव में इन तीनों ने अपने काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? चाहे नीतीश जी हों, लालू जी हों, सोनिया जी हों, उन्होंने अपने 60 साल की सरकार का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? वो दे रहे हैं हिसाब क्या? बिहार बर्बाद क्यों हुआ, विकास क्यों नहीं हुआ, जवाब दे रहे हैं क्या? जो काम उनको करना चाहिए, वो कर रहे हैं क्या? मैं बिहार की जनता से आग्रह करता हूँ कि ये जो ‘महास्वार्थबंधन’ बना है, उनके नेताओं से हिसाब मांगो। हर गाँव, गली, घर से जवाब मांगो आप उनसे जवाब मांगिये, आपको खुद पता लग जाएगा कि कौन सा बटन दबाना है, मुझे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं।

ये जो 1.65 लाख करोड़ रुपये का पैकेज हमने दिया है और पूरा बारीकी से हिसाब दिया है। मैं उसमें बेगूसराय इलाक़े का बताना चाहता हूँ- एनएच – 82 पर 55 किमी, बिहारशरीफ, बरबीघा, मोकामा सेक्शन, एनएचबी फेज़ – 4 के निर्माण के लिए करीब-करीब 400 करोड़ रुपये का पैकेज; एनएच – 31 के बख्तियार-मोकामा सेक्शन को चार लेन का बनाने के लिए करीब-करीब 1000 करोड़ रुपये का पैकेज; एनएच – 31 पर पटना में गंगा नदी पर नया चार लेन के पुल का प्रावधान है जिसके लिए करीब-करीब 520 करोड़ रुपये; एनएच – 31 एनएचबी फेज़ – 3 सिमरिया-खगड़िया को चार लेन करने के लिए 1062 करोड़ रुपये; उसी प्रकार एनएच – 31 मोकामा-खगड़िया सेक्शन को को चार लेन करने के लिए 810 करोड़ रुपये राशि का प्रावधान है। बरौनी रिफाइनरी, उसमें 6 मिलियन क्षमता वाली 6 टंकियों को 9 मिलियन क्षमता वाली बनाने के लिए करीब 12,000 करोड़ रुपये लगाने का निर्णय किया गया है। बरौनी रिफाइनरी में बीएस4 फ्यूल के उत्पादन के कार्यान्वयन के लिए, मैंने 1500 करोड़ रुपये लगाना तय किया।

बिहार की किसी सरकार ने 60 साल में कभी सोचा नहीं कि बिहार को कैसे बदला जा सकता है। किन बातों पर बल दिया जाना चाहिए, वो नहीं किया। जातिवाद, संप्रदायवाद, यही राजनीति करते रहे यही बिहार की बर्बादी का कारण रहा है। ये ‘महास्वार्थबंधन’ बिग बॉस का घर है जिसमें एक बिग बॉस है जो कहता है कि मैं जैसे कहूँगा, लोग वैसे नाचेंगे; मैं जो कहूँगा, वैसा ये लोग करेंगे। इस बिग बॉस के घर में जितने भी लोग हैं, वे एक-दूसरे के साये से भी डरते हैं, कतराते हैं; एक-दूसरे का खात्मा करने के लिए खेल खेलते रहते हैं और बिग बॉस रिंग लीडर की तरह उन्हें नचाने में लगे हुए हैं।

भाईयों-बहनों, क्या बिहार में ये खेल चलने देना है क्या? बिहार को इस बिग बॉस से बचाना है कि नहीं? और इसलिए आज मैं बेगूसराय की धरती पर आपसे आशीर्वाद लेने आया हूँ। भाजपा हो, राम विलास जी की पार्टी हो, कुशवाहा जी की पार्टी हो, मांझी जी की पार्टी हो, हम सब मिलकर बिहार का भाग्य बदलना चाहते हैं, आपका जीवन बदलना चाहते हैं। मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए। मेरे साथ बोलिये और पूरी ताकत से बताईये, सारे हिन्दुस्तान को पता चले कि बेगूसराय से कैसी आवाज उठती है। ऐसी भयंकर धूप में कोई कल्पना नहीं कर सकता है कि कितना बड़ा जन-सैलाब आया है।

भाईयों-बहनों, मैं आपका ये प्रेम और विश्वास आपको ब्याज समेत लौटाउंगा। इस भयंकर ताप में आप जो तपस्या कर रहे हो, मैं उसे कभी बेकार नहीं जाने दूंगा। आपको एक अपना साथी मिला है जो कंधे से कंधा मिलाकर के आपके सुख-दुःख बांटना चाहता है। बिहार को बदलना मेरा स्वार्थ है, राजनीतिक स्वार्थ नहीं बल्कि मेरा स्वार्थ है कि जिस दिन बिहार बदलेगा, हिन्दुस्तान दुनिया में नंबर एक पर पहुँच जाएगा; ये ताकत है बिहार की। पूरा हिन्दुस्तान स्वार्थ से चाहता है कि मेरा बिहार आगे बढ़े; बिहार विकास की ऊंचाईयों पर पहुंचे; बिहार का नौजवान, उसकी ताकत देश का भाग्य बदलने के काम आए, इसलिए मैं आपसे वोट मांगने आया हूँ। मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये -  

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

                   

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हमारी सरकार भारत में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध: पीएम मोदी
August 27, 2026
खेलो इंडिया देशभर में खेल प्रतिभाओं को निखारने का एक शानदार मंच बन गया है; यह युवा खिलाड़ियों को अपने सपनों को साकार करने के अवसर और समर्थन प्रदान कर रहा है: प्रधानमंत्री
जब मैं खेलों की बात करता हूं, तो यह सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है; यह विकसित भारत के निर्माण में, भारत की खेलशक्ति और युवाशक्ति को एक साथ जोड़ने का अभियान है: प्रधानमंत्री
अन्य देश उन खेलों में पदक जीत रहे हैं जिनमें भारत भाग भी नहीं लेता; हमें इन खेलों में भी महारत हासिल करनी होगी: प्रधानमंत्री
खेल हमें केवल चैंपियन बनना ही नहीं सिखाता, बल्कि खेल हमें एक बेहतर प्रतिस्पर्धी बनना भी सिखाता है; उठना, गिरना और गिरकर फिर से उठने जज्बा हमारे भीतर लाता हैः प्रधानमंत्री
स्क्रीन से ज्यादा खेल केंद्रों की अहमियत है, प्लेस्टेशन से ज्यादा खेल के मैदानों की अहमियत है: प्रधानमंत्री

नमस्कार।

आप सभी ने इतने शानदार तरीके से खेलो इंडिया संवाद का ये कार्यक्रम आयोजित किया है। मैं आप सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं टेक्नोलॉजी के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी, सभी मुख्यमंत्री, राज्य सरकार के अनेक मंत्री, संसद में मेरे सहयोगी, My Bharat के लाखों-लाख वॉलिंटियर्स का भी बहुत हृदय से अभिनंदन करता हूं। आज इस कार्यक्रम में देशभर के एथलीट्स और स्पोर्ट्स जगत के महानुभाव भी हम सबके साथ शामिल हुए हैं।

आप सबको पता है साथियों,

दो दिन बाद, 29 अगस्त को नेशनल स्पोर्ट्स डे भी है। मैं आप सभी को, देशभर के युवाओं को और खेल जगत से जुड़े सभी साथियों को खेल दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं। ये दिन माँ भारती की एक महान संतान, मेजर ध्यानचंद जी को, उनको याद करने का भी अवसर होता है। 100 वर्ष पहले भारतीय सेना की हॉकी टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर टूर पर गई थी और उस टीम में ध्यानचंद जी भी थे। वो टूर भारत और न्यूजीलैंड के, स्पोर्ट्स रिलेशंस के 100 वर्ष पूरे होने का आधार है। कुछ दिन पहले मैं न्यूजीलैंड की यात्रा पर गया था। तब भी मैंने न्यूजीलैंड में उन्हें याद किया था। मेजर ध्यानचंद जी ने जिन रिश्तों की नींव रखी थी, आज भारत उन रिश्तों की समृद्धि के लिए निरंतर काम कर रहा है।

साथियों,

मैंने इस 15 अगस्त को लाल किले से भारत का स्पोर्ट्स विजन देश के सामने रखा है। जब मैं स्पोर्ट्स की बात करता हूं, तो ये केवल मेडल जीतने तक सीमित नहीं है, ये विकसित भारत के निर्माण में भारत की खेलशक्ति और भारत की युवाशक्ति को एक साथ जोड़ने का अभियान है। मैं हमेशा कहता आया हूं - जो खेले, वो खिले। और खेल में खिलना सिर्फ मैदान पर जीतना नहीं है, खेल में खिलना मतलब व्यक्तित्व का खिलना, परिवार का खिलना और देश का गौरव बढ़ाना।

साथियों,

जब कोई खिलाड़ी सफल होता है, तो वो सफलता केवल उसकी नहीं होती, उसकी सफलता से उसके परिवार की पहचान बनती है, प्रतिष्ठा बढ़ती है। जिस स्कूल और कॉलेज में वो पढ़ा, उसकी प्रतिष्ठा बढ़ती है। उसके जिले और राज्य की पहचान और मजबूत होती है। यानि दुनिया उस खिलाड़ी के नाम से उस शहर या राज्य को पहचानने लगती है। और जब ऐसी अनेक सफलताओं को लेकर कोई क्षेत्र Global Sports Map पर चमकता है, तो दुनिया का उस शहर को देखने का नजरिया भी बदल जाता है। आज के इस कार्यक्रम में देश के जिन सैकड़ों जिलों के खिलाड़ी जुड़े हुए हैं, हर जिले में दुनिया के Sports Map पर चमकने की ताकत है। इस ताकत को समझते हुए ही हमें इस संवाद कार्यक्रम को आगे बढ़ाना है।

साथियों,

इस बार लाल किले से मैंने खेलों से जुड़ी एक बहुत बड़ी चुनौती की तरफ भी देश का ध्यान दिलाया है। ये चुनौती ओलंपिक्स से जुड़ी है। एक कड़वी सच्चाई ये है कि ओलंपिक्स में जितने अलग-अलग स्पोर्ट्स होते हैं, भारत की टीमें उसमें से आधे स्पोर्ट्स में हिस्सा ही नहीं लेती हैं। यानि मेडल टैली के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए तो हम कंपीट ही नहीं करते और दशकों से ऐसा ही चला आ रहा है। 2012 के ओलंपिक्स में, उस समय भारत ने सिर्फ, 2012 में सिर्फ 13 खेलों में हिस्सा लिया था। 20 से ज्यादा खेलों में तो भारत की भागीदारी ही नहीं थी। और इन 20 से ज्यादा खेलों में कई सारे खेल ऐसे हैं, जिनका नाम तक देश में लोगों ने शायद ही सुना हो। दुनिया के दूसरे देश उन खेलों में मेडल जीतते हैं और हम उनमें हिस्सा ही नहीं लेते। हमें मेडल टैली बढ़ाने के लिए इन खेलों में भी महारथ हासिल करनी ही होगी। अब जैसे, सर्फिंग और स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग, हमारे पास इतनी बड़ी कोस्टलाइन है, इतना बड़ा पहाड़ी क्षेत्र है, जहां इस प्रकार के स्पोर्ट्स के लिए एक स्वाभाविक रूचि हो सकती है। हमारे पास वॉटर स्पोर्ट्स से लेकर विंटर स्पोर्ट्स तक के लिए डेमोग्राफी भी है और जियोग्राफी भी है। लेकिन फिर भी हम ऐसे खेलों में दुनिया में कहीं दिखते ही नहीं हैं। इसलिए, हमें अलग-अलग जिलों में ऐसी संभावनाओं को तलाशना होगा जहां किसी एक खास स्पोर्ट्स का इकोसिस्टम विकसित हो सके, और इसमें आज के इस कार्यक्रम की बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

जब हम 2036 ओलंपिक्स की तैयारी की बात करते हैं, तो हमारा फोकस ये होना चाहिए कि हमें आज से ही वो खिलाड़ी तैयार करने हैं जो 2036 में अलग-अलग स्पोर्ट्स के लिए क्वालीफाई और कंपीट करेंगे। और इसलिए, लाल किले से मैंने 5 साल की उम्र से 15 साल की उम्र के खिलाड़ियों की पहचान करने के लिए एक बड़े टैलेंट हंट अभियान का ऐलान किया है। और इसमें भी हमें केवल ये नहीं देखना है कि किस बच्चे की किस खेल में रुचि है, बल्कि ये भी देखना है कि कौन सा बच्चा किस खेल के लिए फिट है। हमें उस हिसाब से ही उस बच्चे को ट्रेनिंग देनी होगी। और मैं आप सभी को भरोसा देता हूं, इसके लिए सरकार की तरफ से जो भी सपोर्ट चाहिए, सरकार उसमें आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी।

साथियों,

हमारी सरकार भारत में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आज स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटीज से लेकर आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर्स तक देश में एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसमें प्रतिभा को पहचानने से लेकर उसे दुनिया के मंच तक पहुंचाने तक हर स्तर पर सहयोग मिले। हम दुनिया के दूसरे देशों के साथ भी Sports Science, Training, Coaching और अनुभव साझा करने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं।

साथियों,

Sports को लेकर सरकार कितनी गंभीर है, ये आयोजन भी इसका उदाहरण है। खेलो इंडिया संवाद सिर्फ खेल की बात करने का कार्यक्रम नहीं है। ये एक ऐसे संवाद का मंच है जिसका एक-एक विचार देश के स्पोर्ट्स विजन को एक नई दिशा दे सकता है। और इसके साथ जो युवा संवाद हो रहा है, वो कार्यक्रम आपके Ideas और Aspirations को देश के सपनों से जोड़ने का बहुत बड़ा माध्यम है। इस कार्यक्रम में स्पोर्ट्स इकोसिस्टम, टैलेंट डेवलपमेंट, गवर्नेंस और विकसित भारत को लेकर युवा क्या सोचते हैं, उनके सुझाव क्या हैं, इन बातों को सुना जाएगा और policy process में शामिल किया जाएगा। इसलिए, आप सबसे कहूंगा कि जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके, इस मंच का सार्थक उपयोग कीजिए, नए Ideas आने दीजिए, युवा शक्ति के ये नए Ideas ही विकसित भारत की सिद्धि की ताकत बनेंगे।

साथियों,

हम अक्सर सुनते हैं, एक स्वस्थ समाज के लिए, एक अच्छी पारिवारिक व्यवस्था के लिए, एक बेहतर कार्यसंस्कृति के लिए स्पोर्ट्स-पर्सन स्पिरिट बहुत जरूरी होती है और ये स्पोर्ट्स-पर्सन स्पिरिट खेल के मैदान में गए बिना सीखनी बहुत मुश्किल होती है। खेल हमें केवल चैंपियन बनना ही नहीं सिखाता, बल्कि खेल हमें एक बेहतर कंपीटिटर बनना भी सिखाता है। उठना, गिरना, गिरकर फिर से उठना, स्पोर्ट्स ये ज़ज्बा हमारे भीतर लाता है।

साथियों,

खेलों से जीवन कैसे बदलता है, इसका एक बड़ा उदाहरण हमारे पैरा एथलीट्स हैं। पैरा एथलीट्स को जब कोई मैदान में देखता है, तो जीवन के बारे में सोचने का नज़रिया बदल ही जाता है। और जब वो कुछ अचीव करता है, तो उस एथलीट के साथ ही उसके पूरे परिवार को नई ज़िंदगी मिल जाती है। वो मां-बाप, भाई-बहन, जो अपने उस बच्चे को शुरुआती दिनों में संघर्ष करते देखते हैं, उनके लिए उस दिव्यांग खिलाड़ी की सफलता, उनके सपनों को, उनके हौसलों को भी एक नई ऊंचाई दे देती है।

साथियों,

मैं खुद ऐसे प्लेयर्स से हमेशा इंस्पायर होता रहा हूं, अब जैसे आपने सबने नाम जो सुने हैं, आर्चरी में हमारी एक बेटी, एक कमाल की खिलाड़ी हैं, नाम जानते हो आप?, शीतल। जब पैरालंपिक में उन्होंने मेडल जीता, तो पूरा जम्मू-कश्मीर, पूरा हिन्दुस्तान गर्व से भर उठा। ऐसे ही हमारी एक और बेटी अवनि लेखरा हैं, जिन्होंने दो-दो बार पैरालंपिक के मेडल जीते। मैं जब भी बेटी अवनि से मिलता हूं, बहुत गर्व महसूस करता हूं। सुमित अंतिल हो, नितेश कुमार हो और अभी-अभी तो आपने नाम सुना होगा, हमारे झंडू कुमार। ऐसे हमारे पैरा-एथलीट्स हैं, ऐसे हर साथी, हमें भी प्रेरित करते हैं।

साथियों,

स्पोर्ट्स, एक बेहतर जीवन की गारंटी है। स्पोर्ट्स हमें बेहतर जीवन जीने के लिए फिट बनाता है, हमारी क्वालिटी ऑफ लाइफ को बेहतर करता है। हम सभी फौजा सिंह जी के बारे में जानते हैं। पिछले वर्ष 100 वर्ष से ज्यादा की आयु में फौजा सिंह जी का निधन हुआ है। खेल के प्रति प्यार हो, फिटनेस हो, ये कैसे जीवन पर्यंत चलता है, फौजा सिंह जी इसकी मिसाल थे। उनका जीवन इस बात की बहुत बड़ी प्रेरणा है कि कैसे स्पोर्ट्स और क्वालिटी ऑफ लाइफ आपस में जुड़े हुए हैं।

साथियों,

स्पोर्ट्स का एक और बहुत बड़ा फायदा होता है, जो असली खिलाड़ी होते हैं, उनमें ड्रग्स, नशे से दूर रहने की इच्छाशक्ति भी पैदा हो जाती है। आज जब नशे की इतनी बड़ी चुनौती युवाओं के सामने है, तो स्पोर्ट्स इसमें भी बहुत सार्थक भूमिका निभाता है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि आज भारत में स्पोर्ट्स एक बेहतरीन प्रोफेशन के तौर पर उभरा है। समाज में Sports को लेकर नज़रिया बदला है। आज आप देखिए, हमारे देश में लोग ट्रायाथलोन में हिस्सा ले रहे हैं, 5K और 10K Races दौड़ रहे हैं। यार-दोस्त मिलकर हाय-रॉक्स जैसे चैलेंजेस को पूरा कर रहे हैं। कोई पहली बार शीर्षासन करने की खुशी मना रहा है, तो कोई दोस्तों और फैमिली के साथ मिलकर पिकलबॉल और बैडमिंटन खेल रहा है। ये छोटी-छोटी चीजें हैं, लेकिन अगर इसको एक बड़े नजरिए से देखें, तो इसमें बहुत बड़ा चेंज नज़र आएगा। चेंज ये कि स्पोर्ट्स अब हमारी जिंदगी का हिस्सा बन रहा है। अगर पढ़ाई और करियर का टाइमटेबल बन रहा है, तो दिन भर के रूटीन में स्पोर्ट्स को भी जगह मिल रही है। और यही चेंज है, यही परिवर्तन है, जिसके कारण भारत के स्पोर्ट्स फ्यूचर पर भरोसा भी बढ़ रहा है।

साथियों,

देश में स्पोर्ट्स कल्चर तभी बनता है, जब सामान्य मानवी इससे जुड़े। जब स्कूल्स, स्पोर्ट्स के पीरियड को, को-करिकुलर नहीं, जीवन का हिस्सा मानें। जब ऐसा होता है, तो इससे टैलेंट पूल भी बढ़ता है और स्पोर्ट्स को करियर मानने वाले बच्चों को, उनकी फैमिली का सपोर्ट भी मिलता है। और इसलिए ही मैं कहता हूं, स्क्रीन से ज्यादा, स्पोर्ट्स सेंटर्स की अहमियत है। प्ले-स्टेशन से ज्यादा, प्लेग्राउंड की अहमियत है। और ये तभी होगा, जब आप सब युवा साथी इस अप्रोच को आगे बढ़ाएंगे।

साथियों,

मुझे भारत की युवाशक्ति के सामर्थ्य औऱ उसकी सफलता पर बहुत भरोसा है। मैं देश के हर युवा से कहना चाहता हूं, खेल के मैदान में हो या समाज के बीच, आपकी भागीदारी ही भारत की शक्ति है। आपको खेल से प्यार है, तो इससे जुड़ने के अनेक माध्यम बन रहे हैं। अब नए- नए स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स आ गए हैं, नई टेक्नोलॉजी आ गई है। ट्रेनिंग और कोचिंग के तरीके बदल गए हैं। खेलों के आयोजन की, उसकी प्रतिस्पर्धा की, उसकी विधाओं की जरूरतें बदल गई हैं। इक्विपमेंट डिजाइन है, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी है, Sports Medicine है, Nutrition है, Psychology, Analytics, ऐसे अनेक क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर बन रहे हैं। आपको ये अवसर छोड़ना नहीं है। इसलिए, इस संवाद में खुलकर अपने ideas सामने रखिए। युवा शक्ति की ये भागीदारी विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है। एक बार फिर आप सभी युवा साथियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।

वंदे मातरम्।