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वाइब्रेंट गुजरात व्याख्यानमाला की शुरुआत

देश में प्रशंसित है गुजरात का विकास मॉडल : मुख्यमंत्री

सतत विकास और समृद्घि पोषक की अनुभूति कराता है गुजरात मॉडल: प्रो. भगवती

विश्वविख्यात अर्थशास्त्री प्रो. जगदीश भगवती ने वाइब्रेंट गुजरात व्याख्यानमाला की शुरुआत करते हुए गुजरात मॉडल को सतत विकास और समृद्घि का पोषक करार दिया। उन्होंने कहा कि, विकास वृद्घि के लिए संपत्ति का सृजन जितना जरूरी है, सामाजिक दायित्व का उसका दायरा भी उसी हिसाब से विस्तारित होना चाहिए। जनता की बढ़ रही आकांक्षाओं को जल्द साकार करने के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की सेवाओं की पूर्ति भी होनी चाहिए। इस दिशा में गुजरात मॉडल को प्रभावी बताते हुए उन्होंने कहा कि, यदि इसे और भी गति प्रदान की जाए तो निर्धारित लक्ष्य को शीघ्र हासिल किया जा सकता है।
गौरतलब है कि, मूल गुजराती प्रो. जगदीश भगवती कोलंबिया यूनिवर्सिटी में सीनियर प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। प्रो. जगदीश और उनके भाई शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश श्री प्रफुल्लभाई को पद्मविभूषण तथा प्रो. जगदीश की पत्नी श्रीमती पद्माबेन को पद्मभूषण की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने समग्र भगवती परिवार की प्रतिभा संपन्नता और आजादी की लड़ाई में उनके योगदान से लेकर न्यायतंत्र और शिक्षा के क्षेत्र में यशस्वी योगदान का जिक्र करते हुए प्रो. भगवती जैसे गुजरात प्रेमी और विख्यात अर्थशास्त्री के चिंतन से वाइब्रेंट गुजरात लेक्चर सीरिज के प्रारंभ को ऐतिहासिक करार दिया।
प्रो. जगदीश भगवती ने समृद्घि की उपलब्धियों को लेकर लोकरंजक मान्यताओं की विषय वस्तु के साथ गुजरात के प्रयोगों में से और गुजरात के लिए बोधपाठ पर व्याख्यानमाला का प्रथम चिन्तन प्रस्तुत किया।
आर्थिक संपन्नता को सामाजिक दायित्व की भावना में रुपांतरित करने में गुजरात के अनुभव को केन्द्रवर्ती करार देते हुए प्रो. जगदीश भगवती ने कहा कि, आर्थिक समृद्घि और सामाजिक श्रेय का एजेंडा भिन्न नहीं है। उन्होंने कहा कि, वैश्विकरण का 1991 का मॉडल सिर्फ संपन्न वर्ग के लिए नहीं बल्कि यह वंचितों के विकास और जीवनस्तर में सुधार को भी ध्यान पर ले, यह आवश्यक है।
वैश्विकरण के लाभ को निरक्षरता, गरीबी और बीमारी जैसी समस्याओं के लिए उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए प्रो. भगवती ने कहा कि, गुजरात सिर्फ विकास दर का ही मॉडल नहीं है, बल्कि विकास की प्रक्रिया में गुणात्मक सुधार कर प्रगति की दौड़ में पीछे रह गए लोगों को जोडऩे में सफल रहा है।
उन्होंने कहा कि, विकास ऐसा हो जो गरीबों की जिन्दगी की प्रगति में बदलाव लाए। गरीबों की समस्या का सातत्यपूर्ण हल निकलना चाहिए। हालांकि गरीबी निवारण के लिए आर्थिक विकास जरूरी है, लेकिन वह तो साधन है, हमारा लक्ष्य तो गरीबी का खात्मा है।
प्रो. जगदीश भगवती ने कहा कि, यह जरूरी है कि विकास की नीति से आय में बढ़ोतरी हो। भारत की आर्थिक नीतियों और सुधारों का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि, समृद्घि और संपत्ति के वितरण की व्यूहरचना में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का महत्व होना चाहिए। स्वास्थ्य सेवा, न्यूनतम रोजगार, शिक्षा, आवास और जीवनोपयोगी ढांचागत सुविधाओं में परिवर्तन का अहसास होना चाहिए। राजनीतिक नीतियों और उसके असर को इसी आधार पर तौला जाना चाहिए। इस सन्दर्भ की दुनिया की श्रेष्ठ व्यूहरचना को स्थानीय वातावरण में परिवर्तित करने की बात भी उन्होंने कही।
प्रो. भगवती ने कहा कि, गुजरात की सार्वजनिक छवि और पहचान विकास की है और विकास महज व्यापार का ही नहीं, सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के सुधार का भी है, गुजरात एक्सपीरियन्स इसी की प्रतीति कराता है।
उन्होंने कहा कि, देश में आर्थिक सुधार की गति मंद पड़ रही है, इसे गतिशील बनाना होगा। भूतकाल में लाइसेंस राज की नीतियों ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया था। इसके चलते अनेक भ्रष्ट रीति-नीतियों का जन्म हुआ और राजनीति हो या प्रशासनतंत्र, कोई भी इससे अछूता नहीं रहा। भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए पारदर्शी सुधार की पद्घति को अपनाने पर बल देते हुए प्रो. भगवती ने कहा कि, गुजरात और बिहार इस दिशा में दृष्टांत प्रस्तुत कर रहे हैं।
गुजरात अनुभव की भूमिका को विकासव्यूह के सन्दर्भ में दर्शाते हुए प्रो. जगदीश ने कहा कि, प्रगति के साथ जन आकांक्षाएं भी बढ़ जाती हैं लिहाजा विकास का सातत्य और सार्वदेशिक वातावरण स्थापित होने पर सामाजिक तनाव की स्थिति नहीं बनती, यह बताता है कि गुजरात जिस मार्ग पर चल रहा है वह योग्य है। गुजरात ने आर्थिक सुधारों को मानवीय स्पर्श प्रदान किया है साथ ही इसे और भी व्यापक बनाने के प्रयास हो रहे हैं, जिसका श्रेय उन्होंने मुख्यमंत्री को दिया।
मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि, जब देश में गुजरात मॉडल की चर्चा होती है तब महज विकास पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय बतौर मॉडल इसकी प्रशंसा होती है, यह नतीजा हमें और भी बेहतर करने की प्रतिबद्घता के लिए प्रेरित करता है।
विश्व के समसामयिक प्रवाहों के अनुरुप गुजरात की विकासयात्रा के प्रोत्साहक नीति निर्धारण के लिए चिन्तन प्रक्रिया खड़ी करने के लिए वाइब्रेंट गुजरात व्याख्यानमाला की भूमिका दर्शाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, समूचा भगवती परिवार गुजरात की गौरवपूर्ण अमानत है। गुजरात के मूल्यांकन और तारीफ के जरिए गुजरात को सही दिशा में अग्रसर बताने वाले प्रो. जगदीश भगवती के मंतव्यों को श्री मोदी ने बेहद प्रेरणादायी करार दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि, विकास के व्यूह में सिर्फ भौतिक प्रगति और बुनियादी सुविधाएं ही पर्याप्त नहीं है बल्कि विकास के साथ पर्यावरण को सुसंगत तरीके से जोडऩा होगा।
वाइब्रेंट डेमोक्रेसी टैलेन्ट और यूथ पावर भारत की ताकत है और गुजरात के इसमें अग्रिम योगदान देने की मंशा व्यक्त करते हुए श्री मोदी ने नारी शक्ति को विकास में निर्णायक बनाने पर जोर दिया
इस व्याख्यानमाला में विविध सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र के अग्रणी, प्रबुद्घ नागरिक, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव एवं वरिष्ठ सचिवों सहित सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।
सूचना आयुक्त श्री वी. थिरुपुगल ने स्वागत भाषण में प्रो. जगदीश भगवती का परिचय और व्याख्यानमाला की भूमिका पेश की।

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PM salutes the people of Turtuk in Ladakh for their passion and vision towards Swachh India
October 03, 2022
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The Prime Minister, Shri Narendra Modi has saluted the people of Turtuk in Ladakh for their passion and vision towards Swachh India.

Sharing a news from ANI news services, the Prime Minister tweeted;

"I salute the people of Turtuk in Ladakh for the passion and vision with which they have come together to keep India Swachh."