भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...
मैं मेरा भाषण शुरू करूं...उससे पहले मैं देख रहा हूं बहुत सारे मेरे बाल कलाकार मित्र पेंटिंग बनाकर के ले आए हैं। आगे की तरफ उसको भेज दीजिए... मेरे एसपीजी के साथी उसको कलेक्ट कर लेंगे अगर पीछे आपका एड्रेस होगा तो मैं आपको चिट्ठी जरूर भेजूंगा। माइक वाला जरा देखें बीच-बीच में व्हिसलिंग हो रहा है। भारत माता की... जो भी चित्र हैं आगे भेज दीजिए, बाद में किसी को परेशान मत कीजिए... अपना हाथ भी नीचे कर लीजिए... वहां दूर-दूर तक है जरा एसपीजी वेट करना सबसे ले लेना... उन बच्चों को आगे मत लाइए चित्र भेज दीजिए... बच्चों को परेशान मत कीजिए... ये महात्मा एक माला ले के आए है वो भी ले लो भाई प्रसाद। इस तरफ भी बहुत लोग कुछ ना कुछ लेकर आए हैं... अब मैं अपनी बात शुरू करूं... ये जो चित्र लेकर आए हैं वे अपना हाथ नीचे करें ताकि पीछे वालों को कोई परेशानी ना हो।
भारत माता की... भारत माता की...
ना प्रियमैना तेलंगाना प्रजालारा….
मी अंदरिकी हृदयपूर्वक शुभकांक्षालु
साथियों,
कल मैं बंगाल में था...वहां पहली बार बीजेपी के सीएम ने शपथ ली है... पहली बार बंगाल में, प्रचंड बहुमत से बीजेपी सरकार बनी है। और मैं देख रहा हूं...कि बीजेपी की जो ये ऐतिहासिक विजय है...उसका उत्साह यहां तेलंगाना में भी दिख रहा है... यहां बीजेपी का हर कार्यकर्ता, जोश से भरा हुआ है।
साथियों,
आज देश के कोने-कोने में... बीजेपी पर जनता का आशीर्वाद निरंतर बढ़ रहा है। देश के लोग बार-बार बीजेपी के विकास मॉडल पर...गुड गवर्नेंस के मॉडल पर...अपनी मुहर लगा रहे हैं। आजादी के 75 साल बाद...असम में भाजपा सरकार की हैट्रिक लगी है...और पुडुचेरी में भी बीजेपी-एनडीए सरकार की वापसी हुई है। भाजपा की ऐसी जीत के बाद.. मैं तेलंगाना के लोगों की भावनाएं भी देख रहा हूं....हर कोई एक ही बात कह रहा है- अबकी बार... अब की बार... अब की बार... अब की बार...तेलंगाना में भी बीजेपी सरकार।
साथियों,
भारत में हर साल किसी न किसी राज्य में चुनाव होता है। कोई हारता है, कोई जीतता है.. और ये लोकतंत्र में बहुत स्वाभाविक है.. ये लोकतंत्र का अनिवार्य हिस्सा है। लेकिन साथियों, बंगाल में बीजेपी की विजय का जितना उत्सव देश में है...जितनी चर्चा दुनियाभर में हो रही है...वैसी चर्चा पहले किसी जीत पर नहीं हुई है। इसका कारण ये है...कि बंगाल में सिर्फ राजनीतिक दलों की हार-जीत नहीं हुई है...वहां एक ऐसी राजनीति को लोगों ने पराजित किया है...जिसने एक तरह से बंगाल की जनता को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखा था।
साथियों,
इस देश में कांग्रेस ने करप्शन को बढ़ाया...परिवारवाद को बढ़ाया... और संवैधानिक संस्थाओं का गला घोटने का काम किया। जब TMC बनी तो उसने कांग्रेस से ये सारी बुराइयां सीख लीं। साथ ही, लेफ्ट की भी जितनी बुरी आदतें थीं...वो भी TMC ने अपना लीं। और फिर TMC ने भारत की राजनीति का सबसे तिरस्कृत और खतरनाक मॉडल डवलप किया। TMC ने अपने इस तानाशाही मॉडल में बंगाल को बेड़ियों से जकड़ दिया था। अभी बंगाल की जनता ने राजनीति के ऐसे भयावह तानाशाही मॉडल को पराजित किया है। इसलिए, पूरे देश में उत्सव है, ऐसा लग रहा है जैसे बंगाल के लोग बरसों के बाद अब खुले में सांस ले रहे हैं।

साथियों,
एक समय था…जब दक्षिण से लेकर पूर्वोत्तर तक...बीजेपी को हाशिये की पार्टी माना जाता था। लेकिन आज भारत का जनमानस बता रहा है—विचार अगर राष्ट्र के लिए हो, तो उसकी हुंकार को कोई सीमा रोक नहीं पाती। साथियों, देखिए आगे कोई जगह नहीं है। आप तय कीजिए कि आप वहां खड़े रहके शांति से सुन सकेंगे कि नहीं सुन सकेंगे। आप आगे आने की कोशिश मत कीजिए... आप वहां पर रुकिए कृपा कर के और ये जो चित्र वाले हैं उनसे मेरी हाथ जोड़कर के प्रार्थना है, या तो आप अपना चित्र नीचे रख दीजिए, बाद में मुझे डाक से भेज दीजिए... या किसी के हाथों उसे आगे कर दीजिए... इसको पकड़ के मत खड़े रहिए... जरा पार्टी के कोई वॉलंटियर वहां हैं तो मेरी बात का कुछ करवाइए भाई... क्योंकि पिछे किसी को कुछ दिखता नहीं और उसके कारण लोग आवाज कर रहे हैं। तेलंगाना के मेरे भाइयों-बहनों मेरे नौजवान साथियों... ये आपका प्यार मेरे सर आंखों पर। ये मेरा सौभाग्य है कि आप इतना प्यार बरसा रहे हैं, लेकिन अकर आप थोड़ी शांति रखेंगे तो मैं अपनी बात बता पाऊंगा। जगह छोटी पड़ गई है आपको तकलीफ होती होगी.. बोलिए भारत माता की... भारत माता की...
साथियों,
हिंदुस्तान के हर कोने में असम से ओडिशा…और बंगाल से पुडुचेरी तक… ये सिर्फ चुनावी विस्तार नहीं है। ये भारत के राजनीतिक मानस में आए उस परिवर्तन का संकेत है… जहां जनता अब वंशवाद नहीं, परिवारवाद नहीं, विश्वासवाद चुन रही है। आप सोचिए...10 साल पहले असम में बीजेपी के कुछ ही विधायक थे। आज वहां तीसरी बार बीजेपी-NDA की सरकार बनी है...10 वर्ष पहले बंगाल में बीजेपी के सिर्फ तीन एमएलए थे। आज बंगाल में बीजेपी, 200 पार पहुंच चुकी है। जहां कभी बीजेपी का झंडा उठाने को कोई तैयार नहीं होता था...वहां आज हमारी सरकारें बन रही हैं।

साथियों,
तेलंगाना तो वो धरती है...जिसने तब बीजेपी को पहला सांसद दिया था, जब हमारे केवल दो ही सांसद थे। दो में से एक तेलंगाना का था जब बाकी देश में बीजेपी के प्रति उतना समर्थन नहीं था... तब भी बीजेपी को तेलंगाना का साथ मिलता था। आज तो यहां से करीब आधे सांसद बीजेपी के चुने हुए हैं। यहां हमारे अनेक विधायक हैं। मुझे तेलंगाना की जनता और यहां के बीजेपी कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा है...अगली बार यहां भी प्रचंड बहुमत से.. अगली बार.. अगली बार...अगली बार.. अगली बार.. तेलंगाना के लोग...कांग्रेस और BRS की वादाखिलाफी...और इनकी परिवारवादी राजनीति से तंग आ चुके हैं। इसलिए भी तेलंगाना की जनता बदलाव चाहती है।
साथियों,
बीजेपी का हमेशा से मंत्र रहा है- राज्य के विकास से देश का विकास। आज जब भारत, विकसित होने के लक्ष्य की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है..तो तेलंगाना की भूमिका भी बहुत बड़ी है। हमारा तेलंगाना, हमारा हैदराबाद... विकसित भारत की यात्रा को गति दे... ये केंद्र की बीजेपी-NDA सरकार का निरंतर प्रयास है। इसी मकसद के साथ... थोड़ी देर पहले मुझे हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास करने का अवसर मिला है।
साथियों,
अभी देशभर में 14 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स पर काम चल रहा है। उसमें से एक यहां तेलंगाना में बनने जा रहा है। जहीराबाद इंडस्ट्रियल एरिया में...व्हीकल मैन्युफेक्चरिंग से लेकर फूड प्रोसेसिंग तक, इंडस्ट्री का एक आधुनिक इकोसिस्टम बन रहा है। ये लाखों युवाओं को रोजगार देने वाला काम है। ये इंडस्ट्रियल एरिया... यहां के किसानों, यहां के मिडिल क्लास के लिए एक नया वरदान बनकर आएगा। साथियों, एक और उदाहरण, टेक्सटाइल पार्क का भी है। पूरे देश के लिए, 7 पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क स्वीकृत हुए हैं। उनमें से भी एक, यहां तेलंगाना में, हमारे वारंगल में बन रहा है। ये तेलंगाना के कपड़ा उद्योग को नई बुलंदी देगा। यहां जो कॉटन फार्मर हैं, ये टेक्सटाइल पार्क उनके भाग्य को बदलने का काम करेगा। और इसमें भी रोजगार के लाखों अवसर बनेंगे। साथियों, तेलंगाना के कॉटन किसानों के लिए एक और खुशखबरी है। हाल में ही कॉटन की प्रोडक्शन और क्वालिटी बढ़ाने के लिए...केंद्र सरकार ने एक नए मिशन को स्वीकृति दी है। हज़ारों करोड़ रुपए के इस मिशन से... यहां के लाखों कपास किसानों को मदद मिलेगी। किसानों की आय बढ़ेगी... और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए कपास के इंपोर्ट पर भारत की निर्भरता भी कम होगी।
साथियों,
बीजेपी का फोकस विकास पर, रोजगार निर्माण पर है। लेकिन कांग्रेस यहां क्या कर रही है, ये आप अच्छे से देख रहे हैं। देश के सिर्फ 3 राज्यों में ही अभी कांग्रेस के मुख्यमंत्री बचे हैं। सिर्फ तीन राज्य। कांग्रेस कहीं भी हो, इनका एक ही मॉडल है...पहले झूठ बोलो और फिर भूल जाओ। चुनाव जीतने के लिए आसमान से तारे तोड़ कर के लाने का वादा करते हैं। और सरकार बनने के बाद ये बहाने करने लगते हैं। साथियों, हिमाचल और कर्नाटक में, कांग्रेस अपने वादों को भूल गई है। वहां की जनता कांग्रेस सरकार से बहुत परेशान है। यहां तेलंगाना में भी यही सब चल रहा है।

साथियों,
कांग्रेस की प्राथमिकता जनता की सेवा करना नहीं है। कांग्रेस अब देश बांटने वाली नफरती राजनीति का मुख्य आधार हो गई है। कांग्रेस लेफ्ट पार्टियों से भी ज्यादा लेफ्ट यानि पक्की और विकृत माओवादी हो गई है...और मुस्लिम लीग से ज्यादा कट्टर वो मुस्लिमलिगी बन गई है। इसलिए, लोग कांग्रेस को MMC यानि मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस कह रहे हैं। ये मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस है।
साथियों,
देश को माओवादी आतंक के कारण इतना नुकसान हुआ है...तेलंगाना को भी बीते दशकों में माओवादी आतंक के कारण, बहुत कुछ भुगतना पड़ा। माओवादी आतंक इतने वर्षों तक इसलिए देश में चलता रहा...क्योंकि कांग्रेस और लेफ्ट जैसे कुछ राजनीतिक दलों ने इसको लगातार वैचारिक हवा दी है। लेकिन दुर्भाग्य देखिए...आज जब माओवादी आतंक अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है... तब भी ये लोग माओवाद को..नक्सलवाद को बचाने में लगे हैं। बीते 11-12 सालों में, कांग्रेस के शाही परिवार ने लगातार कोशिश की है, कि माओवादी आतंक के खिलाफ एक्शन न हो।
साथियों,
मैं जानता हूं कि तेलंगाना की जो पुलिस है... उसको अगर खुली छूट मिलती... तो मुझे पक्का विश्वास है ये पुलिस अपनी ताकत से केंद्र की नीतियों के साथ कदम मिलाकर अगर वो चलती तो बहुत पहले ही माओवादी आतंकवाद का खात्मा हो चुका होता। लेकिन इन लोगों ने साथ नहीं दिया... इसलिए देश को माओवादी आतंक को पूरी तरह कुचलने में इतना वक्त लग गया।
साथियों,
बीजेपी-NDA के प्रयासों से अब तेलंगाना माओवादी आतंक से मुक्त हो रहा है। और इसलिए...तेलंगाना में बीजेपी की सरकार बननी और भी जरूरी हो गई है। बीजेपी की सरकार यहां नई सोच, नए विजन और नए कमिटमेंट के साथ सरकार चलाएगी... जिसका लक्ष्य होगा- विकसित तेलंगाना। साथियों, आज भारत तेजी से विकसित होने के लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस समय भारत कई विराट चुनौतियों का मुकाबला भी कर रहा है।
साथियों,
कोरोना काल के दौरान ही दुनिया सप्लाई चेन के बहुत बड़े संकट से घिर गई थी। कोविड के बाद, यूक्रेन में युद्ध शुरू हो गया...उसने दुनिया की परेशानियां और बढ़ा दीं। फूड, फ्यूल, फर्टिलाइजर, इन तीनों चीजों पर गंभीर प्रभाव पड़ा। बीते 5-6 वर्षों में बने इन संकटों से निपटने के लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। आपको याद होगा... उस समय और आज भी फर्टिलाइजर की एक-एक बोरी दुनिया में तीन-तीन हजार रुपए में बिक रही थी। एक बोरी का तीन हजार रुपया... कितना... आप बताएंगे एक बोरी का कितना... आंकड़ा नहीं बोलिए मुंह से.. तीन हजार रुपया एक बोरी का कितना... एक बोरी का कितना... एक बोरी का कितना... और भारत के किसानों को खाद की वही बोरी 300 रुपए से कम में दी जा रही है। तीन हजार के सामने तीन सौ रुपये में... सप्लाई चेन की इन मुश्किलों के बीच...पिछले दो महीने से हमारे पड़ोस में ही इतना बड़ा युद्ध चल रहा है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ा है...और भारत पर तो और भी गंभीर असर हुआ है।

साथियों,
भारत के पास बड़े-बड़े तेल के कुएं नहीं हैं...हमें अपनी ज़रूरत का पेट्रोल-डीज़ल-गैस, ये सब बहुत बड़ी मात्रा में दुनिया के दूसरे देशों से, बाहर से मंगाना पड़ता है। युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर के दाम बहुत अधिक बढ़ चुके हैं। आसमान को भी पार गए, अड़ोस-पड़ोस के देशों में क्या हाल है वो तो अखबारों में आता है। भारत सरकार, इस युद्ध के पिछले दो महीनों से देशवासियों को इस संकट से बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नागरिकों पर बोझ न पड़े, इसके लिए सरकार सारा बोझ सरकार खुद अपने कंधे पर उठा रही है। लेकिन साथियों, जब सप्लाई चेन पर संकट लगातार बना रहे...तो हम कितने भी उपाय कर लें, मुश्किलें बढ़ती ही जाती हैं।
इसलिए,
अब देश को सर्वोपरि रखते हुए, मां भारती को सर्वोपरि रखते हुए हमें एकजुट हो करके लड़ना होगा। हमें याद रखना है...देश के लिए मरना ही सिर्फ देशभक्ति नहीं होती है...देश के लिए जीना और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना...वो भी देशभक्ति होती है। इसलिए वैश्विक संकट के इस समय में हमें कर्तव्यों को सर्वोपरि रखते हुए कुछ संकल्प लेने होंगे और उन संकल्पों को पूरे समर्पण भाव से पूरा करना होगा। जैसे एक बड़ा संकल्प है... पेट्रोल डीजल का संयम से इस्तेमाल करना। साथियों, हमें पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करना होगा। शहरों में जहां मेट्रो हैं, वहां हम तय करें कि मेट्रो का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करेंगे। ज्यादा से ज्यादा मेट्रो में ही जाएंगे। अगर कार में ही जाना जरूरी है, तो फिर कार-पूल करने का प्रयास करें। और भी लोगों को साथ बिठा ले.. अगर हमें कहीं सामान भेजना हो, तो कोशिश करनी है कि वह ज़्यादा से ज़्यादा रेलवे, गुड्स की जो ट्रेन होती है, रेलवे की सर्विसेस से भेजें। ताकि इलेक्ट्रिक रेलवे होने के कारण पेट्रोल-डीजल की जरूरत नहीं पड़ती है। जिन लोगों के पास इलेक्ट्रिक व्हीकल हैं... वो भी कोशिश करें कि इलेक्ट्रिकल व्हीकल का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें।
साथियों,
हमने कोरोना के समय में वर्क फ्रॉम होम की, ऑनलाइन मीटिंग्स की...वीडियो कॉन्फ्रेंस की... ऐसी अनेक व्यवस्थाएं विकसित की और हमें आदत भी हो गई थी। आज समय की मांग ऐसी है कि उन व्यवस्थाओं को हम फिर से शुरू करें तो वो देशहित में होगा। वर्क फॉर्म होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंसेज़, वर्चुअल मीटींग्स...इनको हमें फिर से प्राथमिकता देनी है।
साथियों,
आज जो संकट है, उसमें हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर बहुत जोर देना होगा। क्योंकि दुनिया में पेट्रोल डीज़ल इतना ज़्यादा महंगा हो गया है... पहले से कई गुणा ज़्यादा क़ीमतें बढ़ गई हैं... तो हम सबका दायित्व है कि पेट्रोल-डीजल की खरीद पर जो विदेशी मुद्रा खर्च होती है, पेट्रोल-डीजल बचाकर हमें वो मुद्रा भी बचानी है। इसके लिए हमारे छोटे-छोटे प्रयास भी देश की बहुत मदद कर सकते हैं। जैसे आजकल जो विदेशों में शादियों का...विदेशों में घूमने का, विदेशों में वेकेशन पर जाने का मिडिल क्लास में कल्चर बढ़ता जा रहा है। हमें तय करना होगा कि जब ये संकट का काल है और हमारी देशभक्ति हमें ललकार रही है तो कम से कम एक साल के लिए हमें विदेशों में जाने की बातों को टालना चाहिए। भारत में बहुत सारी जगह है, वहां हम जा सकते हैं, बहुत कुछ भारत में किया जा सकता है। इस बेटी को नीचे बैठाइए, वो थक जाएगी। इस बेटी को बिठाइए, थैंक्यू बेटा थैंक्यू बैठिए आप...नीचे बैठिए... मैंने देख लिया बेटा उसको देख लिया अब आप बैठ जाइए...इस छोटी बच्ची को क्यों परेशान करते हो भाई... इन बच्चों को बैठने दीजिए.. प्लीज बच्चों को परेशान मत कीजिए जी... साथियों, हमें विदेशी मुद्रा बचाने के लिए जो भी रास्ते हम अपना सकते हैं, हमें बचाना होगा...

साथियों,
गोल्ड...यानि सोने की खरीद एक और पहलु है, जिसमें विदेशी मुद्रा बहुत अधिक खर्च होती है। एक ज़माना था जब संकट आता था...कोई युद्ध होता था तो लोग देश हित में सोना दान दे देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है... लेकिन देश हित में हमको ये तय करना पड़ेगा कि साल भर तक घर में कोई भी फंक्शन हो, कोई भी कार्यक्रम हो...हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे, सोना नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें इस चुनौती को स्वीकार करते हुए विदेशी मुद्रा को बचाना होगा।
साथियों,
ये समय एक और बड़े सबक का भी है। एक समय था जब हम कॉपर एक्सपोर्ट करते थे। लेकिन आज भारत के सामने स्थिति ऐसी बन गई कि अब हमें कॉपर को भी इम्पोर्ट करना पड़ता है। हमारे देश में हड़तालें करवा कर कॉपर प्लांट्स को ठप्प करवा दिया गया और अब हालत ये हो गई है कि हमें कॉपर बाहर से मंगाना पड़ता है। और उसमें विदेशी मुद्रा खर्च होती है। इसलिए मैं ऐसे सभी मजदूर संगठनों से भी कहूंगा कि हमें ऐसी बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए। भारत को आत्मनिर्भर बनने से जो भी कदम रोकते हैं, उनसे हमें दूरी बनानी होगी और जो लोग ऐसी साजिशों में जुटे हैं, उन पर भी कड़ी नज़र रखनी होगी। मैं देश की अदालतों से भी आग्रह करूंगा...कि ऐसी स्थिति आने पर देश हित में हमें कोई ना कोई रास्ता निकालने की तरफ बढ़ना चाहिए।
साथियों,
ऐसे ही खाने का तेल का भी है। इसके आयात के लिए भी बहुत बड़ी मात्रा में हमें विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। हर परिवार, अगर खाने के तेल में, खाने का तेल का जो उपयोग करता है, अगर वो कुछ कमी करे... मैंने बार-बार कहा है कि दस प्रतिशत कम करो, अगर हम तेल खाना कम करें ना तो भी वो देशभक्ति का बहुत बड़ा काम है। आप देशसेवा में अपना योगदान दे सकते हैं। इससे देशी सेवा भी होगी और देह सेवा भी होगी... इससे देश के खज़ाने का स्वास्थ्य भी सुधरेगा और परिवार का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।
साथियों,
विदेशी मुद्रा की खपत वाला एक और सेक्टर हमारी खेती है। हम बहुत बड़ी मात्रा में बाहर से केमिकल फर्टिलाइजर इंपोर्ट करते हैं। केमिकल फर्टिलाइजर खेती के कारण हमारी धरती मां को बहुत पीड़ा हो रही है। हमारे खेत बर्बाद हो रहे हैं। अगर आज हम अपने खेत को नहीं बचाएंगे तो भविष्य में फसलों पर भी खतरा आ जाएगा। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम केमिकल फर्टिलाइजर की खपत 25 परसेंट, 30 परसेंट, 40 परसेंट 50 परसेंट घटाए उसको आधी कर दें और हम उसके साथ-साथ नेचुरल फार्मिंग की तरफ बढ़ें। हम फर्टिलाइजर का उपयोग कम करके विदेशी मुद्रा भी बचा सकते हैं.. और साथ-साथ अपने खेत को बचा सकते हैं, हमारी इस धरती मां को बचा सकते हैं... और यह हमें करना ही होगा। आज वैश्विक संकटों से जो चुनौतियां आई हैं हमें उन चुनौतियों को परास्त करना होगा।
साथियों,
भारत सरकार खेतों में डीजल पंप की जगह सोलर पंप की योजना चला रही है। हम खेतों में डीजल पंप की जगह सोलर पंप का उपयोग करने पर जोर देना होगा। मैं कोविड काल में भी आग्रह करता था, कि हम स्थानीय चीजें खरीदें। वोकल फॉर लोकल के मंत्र को लेकर के चलें। हम मेड इन इंडिया चीजें खरीद कर भी विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं। और हमारे देश में स्थानीय उत्पादन की कोई कमी नहीं है। चाहे जूते हो, पर्स हो, बैग हो...हमें स्वदेशी पर बल देना चाहिए। और मैं ये नहीं कह रहा कि जो आपके पास विदेशी चीजें खरीदी हुई हैं, विदेशी ब्रांड्स की हैं, उनको हटा देना है। ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं, लेकिन मेरा आग्रह है कि नए विदेशी प्रॉडक्ट्स नहीं खरीदिने चाहिए। और वाकई...हमें कई बार अंदाज़ा तक नहीं होता कि रोज़मर्रा की कितनी सारी चीज़ें विदेशी हैं...जो हम ऐसे ही यूज़ कर रहे हैं। और साथियों, जब मैं बात स्वदेशी की करता हूं... तो लोगों को लगता है कि दिवाली पर दिए खरीदो मतलब स्वदेशी हो गया। ये तो भ्रम फैलाने वाली बातें हैं। इससे सफलता नहीं मिलती है हमें घर के उपयोग में आने वाले सामान की लिस्ट बनानी है। देखना चाहिए कितनी विदेशी चीजें घुस गई है। पता ही नहीं है। कैंची हो, कंघी हो, छोटी-छोटी चीजें, टूथपिन, टूथब्रश कितना सारा सामान विदेश से हमारे घर में घुस गया है। फिर उस लिस्ट से हमें उन्हें स्वदेशी में बदलना है।
साथियों.
ये बातें सिर्फ एक सरकार, एक दल, एक व्यक्ति की नहीं हैं... ये बीजेपी का भी मुद्दा नहीं है... ये देश का मुद्दा है। और इसके लिए...हर नागरिक, हर राजनीतिक दल, हर सरकार, हर समाज, हर संगठन को संकल्पबद्ध होना होगा। मैं मीडिया के साथियों से बी देश हित में आगे आने के लिए आग्रह करूंगा। आइए देशभक्ति का भाव जगाएं... और देश को जो वैस्विक संकट चल रहे हैं, देश उन संकटों का लाभ लें... परिस्थिति पर सवार हो जाए... ऐसा वातावरण बनाने के लिए हमें योगदान देना होगा। तभी जाकर के देश सफल होगा।
ऐसे संकल्प जब हर नागरिक पूरी ईमानदारी से सिद्ध करेगा...तो भारत हर संकट में जरूर विजयी होगा।
साथियों,
मुझे पूरा विश्वास है कि देश का हर नागरिक...इसी संकल्प के साथ काम करेगा। साथियों इतनी विशाल संख्या में आपका आना ये हवा का रुख दिखा रहा है। ये तेलंगाना का मिजाज दिखा रहा है। मैं एक बार फिर, आप सभी का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।
मेरे साथ बोलिए... भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...
वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे...


