PM's address at the release of a book titled "Maru Bharat Saru Bharat"

Published By : Admin | January 10, 2016 | 15:50 IST
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Prime Minister Narendra Modi releases a book titled "Maru Bharat Saru Bharat"
These books resonate Maharaj Saheb's “Divya Vani” which reflects the urge to give back to the society: PM
Maharaj Saheb always says that Rashtra Dharma is above every Dharma: PM Modi
It is our heritage that India has given many Saints, Munis who have led the society towards Nation building: PM Modi
India has never talked about communalism but always preached spirituality for the benefit of mankind: PM Modi
We believe that every problem can be solved through Spirituality: PM

वहां उपस्थित सभी आचार्य भगवंत, सभी साध्वी महाराज साहिब, सभी श्रावतजन,

कुछ समय पहले मैंने कोशिश की थी कि मेरी बात आप तक पहुंचे। लेकिन शायद टेक्‍नोलॉजी की कुछ सीमाएं होती हैं। बीच में व्‍यवधान आ गया और जैसे दूरदर्शन वाले कहते हैं, मैं भी कहता हूं रूकावट के लिए खेद है। मैं जब पुस्‍तकों का लोकार्पण कर रहा था। तब तक तो शायद आप मुझे देख पा रहे थे। सबसे पहले मुझे आप सबकसे क्षमा मांगनी है, क्‍योंकि मैं वहां स्‍वयं उपस्थित नहीं रह पाया, लेकिन यह मेरे लिए बहुत सौभाग्‍य का विषय होता कि सभी आचार्य भगवंतों के चरणों में बैठने का मुझे आज संभव हुआ होता। लेकिन कभी-कभार समय की ऐसी सीमाएं रहती हैं। कुछ जिम्‍मेवारियां भी ऐसी रहती हैं कि कुछ कामों को अत्‍यंत महत्‍वूर्ण होने के बावजूद भी करने का सौभाग्‍य प्राप्‍त नहीं होता। मैं भले भौगोलिक दृष्टि से आप सबसे काफी दूर बैठा हूं। लेकिन हृदय से मैं पूरी तरह आपके साथ हूं और आचार्य भगवंत के चरणों में हूं।

आज मुझे यह 300वें ग्रंथ के लोकार्पण का अवसर मिला। लेकिन कहीं पर लिखा गया है यह साहित्‍य की रचनाएं हैं। मेरा उसमें थोड़ा मतभेद हैं, यह साहित्‍य की रचनाएं नहीं है। एक संत का अभी यह तपस्‍या, आत्‍मानुभूति, दिव्‍यता का साक्षात्‍कार और उस पर से गंगा की तरह पवित्र जो मनोभाव है, उसे शब्द-देह मिला हुआ है। और इसलिए एक प्रकार से यह वो रचना नहीं है, जो साहित्यकारों की तपस्‍या का परिणाम होती है, एक यह वाणी का संपुट है, जिसमें सामाज के साक्षात्‍कार से निकली हुई पीड़ा का, संभावनाओं का और सामाज जीवन को कुछ देने की अदम्‍य इच्‍छा शक्ति का यह परिणाम है।

50 साल मुनी की तरह एक अविरत भ्रमण और सामान्‍य रूप से पूज्‍य महाराज साहब को सुनने के लिए हजारों लोगों की भीड़ लगी रहती हैं। उनके एक-एक शब्‍द को सुनने के लिए हम जैसे सभी लोग ललायित रहते हैं। लेकिन यह भी विशेषता है कि वे एक उत्‍तम श्रोता भी हैं। श्रावकों के साथ बात करना, यात्रा के दरमियान छोटे-छोटे लोगों से बातें सुनना, एक प्रकार से पूरे हिंदुस्‍तान के जीवन को अपनी इस यात्रा के दमियान अपने भीतर समा लेने का उन्‍होंने एक अविरत प्रयास किया है। और उसी का परिणाम है कि उत्‍तम एक दिव्‍यता का अंश हम सबको प्राप्‍त हुआ है।

सामान्‍य रूप से संतों महंतों के लिए, आचार्य भगवंतों के लिए धार्मिक परंपराओं की बातें करना, ईश्‍वर के साक्षात्‍कार की बातें करना वक्‍त समूह को अच्‍छा लगता है, लेकिन पूज्‍य महाराज साहब ने इससे हट करके सिर्फ अपने श्रावकों को पसंद आ जाए, अपने भक्‍तजनों को पसंद आ जाए उसी बातों को कहने की बजाय, उन्‍होंने सामाज की जो कमियां हैं, व्‍यक्ति के जीवन के जो दोष है, पारिवारिक जीवन के सामने जो खरे हैं, उसके खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते रहे हैं। कभी-कभी उनकी वाणी में चांदनी की शीतलता अनुभव होती है। तो कभी-कभी तेजाब का भी अनुभव होता है। उनके शब्दों की ताकत, कभी हमें दुविधापूर्ण मन हो, निराशा छाई हुई हो तो एक शीतलता का अनुभव कराती है, लेकिन कभी-कभी समाज में ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, एक संत का मन विचलित हो जाता है। आक्रोश में उठता है, भीतर ज्‍वाला धधकती है और वाणी के रूप में वो बहने लगती है और समाज को जगाने के लिए वो अपने आप को आंदोलित कर देते हैं। यह मैंने अनुभव किया है, और इसलिए जितनी उन्‍होंने साम्‍प्रदायिक परंपराओं की सेवा की है, उससे ज्‍यादा समाज में सुधार की अनुभूति कराई है। और उससे भी ज्‍यादा उन्‍होंने समाज को इस बात के लिए प्रेरित किया कि हर धर्म से ऊपर अगर कोई धर्म है तो वो राष्‍ट्र धर्म है। वे लगातार है राष्‍ट्र धर्म जगाना, राष्‍ट्र की भावना जगाना यह करते रहे हैं। और कभी भी उनके प्रति आस्‍था में कमी नहीं आई हैं। हम गर्व के साथ कह सकते हैं हिंदुस्‍तान के पास ऐसी महान परंपरा है, ऐसे महान संत-मुनि हैं, ऋषि-मुनि हैं जिन्‍होंने अपनी तपस्‍या, अपने ज्ञान का उपयोग राष्‍ट्र के भाग्‍य को बदलने के लिए, राष्‍ट्र का भावी निर्माण करने के लिए अपने आप को खपाया है।

हम वो लोग हैं, जिनको शायद दुनिया जिस रूप में समझना चाहिए अभी तक समझ नहीं पाई हैं। भारत एक ऐसा देश है जिसने विश्‍व को किसी साम्‍प्रदायिक में बांधने का प्रयास नहीं किया है। भारत ने विश्‍व को न साम्‍प्रदाय दिया है, न साम्‍प्रदायिकता दी है। हमारे ऋषियों ने, मुनियों ने, परंपराओं ने विश्‍व को साम्‍प्रदायिकता नहीं, अध्‍यात्मिकता दी है। कभी-कभी साम्‍प्र,दाय समस्‍याओं का सृजक बन जाता है, आध्‍यात्‍म समस्‍याओं का समाधान बन जाता है। हमारे पूर्व राष्‍ट्रपति ए. पी. जे. अब्‍दुल कलाम हमेशा कहते थे कि समस्‍याआं को समाधान करने के लिए मानवजात का अध्‍यात्मिकरण होना चाहिए, spiritualism होना चाहिए। जो राष्‍ट्र धर्म के आलेख पूज्‍य महाराज साहब ने अविरत रूप से जगाई है, वो आलेख उस बात से परिचित कराती है।

300 ग्रंथ यह छोटी बात नहीं है। अनेक विषय व्‍यक्ति से ले करके परिवार, परिवार से ले करके समाज, समाज से ले करके राज्‍य, राज्‍य से ले करके राष्‍ट्र, राष्‍ट्र से ले करके पूरी समष्टि, पूरा ब्रह्माण कोई विषय ऐसा नहीं है, जिस पर महाराज साहब ने अपने विचार न रखें हों। उन्‍होंने लिखना प्रारंभ किया, तब से ले करके आज देखें तो लगता है शायद महीने में.. हर महीने शायद उनकी एक किताब निकली है, तब जा करके आज 300 किताबें हुई हैं। यह बहुत बड़ा समाज को तोहफा है।

समाज में सामान्‍य रूप से साहित्‍य की रचनाएं जो होती है, वो समाज को जानने-समझने के लिए, समस्‍याओं को जानने-समझाने के लिए काम आती हैं। लेकिन महाराज साहब ने हमें जो दिया है, वो हमें जीने का तरीका भी सिखाया है, परिवार में संकट हो तो महाराज साहब की किताब हाथ लग गई हो, तो परिवार को संकट से बाहर निकालने का रास्‍ता परिवार के लोग निकालने लगते हैं। बेटा घर में कुछ गलत रास्‍ते पर चलने लगा हो, मां-बाप के लिए कुछ अलग ढंग से सोचने लगा हो और कहीं महाराज साहब का एक वाक्‍य पढ़ने को मिल गया तो उसने अपने जीवन की राह बदल दी हो और फिर से मां-बाप के पास जाकर समर्पित हो गया हो। बहुत सारा धन कमाया हो, लेकिन महाराज साहब की एक बात सुनी हो तो उसका मन बदल जाता है और उसको लगता है मैं अब आगे अपना धन समाज सेवा में समर्पित करूंगा। कोई न कोई समाज सेवा का काम करूंगा, किसी दुखियारे की मदद करने का प्रयास करूंगा। यह एक प्रकार से सामाजिक क्रांति का प्रयास है और यह प्रयास आने वाले दिनों में हम सबका प्रेरणा देता रहेगा।

मैं आज आचार्य भगवंत, रत्‍नसुंदरसुरिस्वर जी महाराज साहब के चरणों में प्रणाम करता हूं। जिन गुरूजनों के साथ बैठ करके एक सच्‍चे शिष्‍य के रूप में अपने जीवन को उन्‍होंने ढाला, वे उत्‍तम गुरू-शिष्‍य परंपरा का भी उदाहरण है। अब खुद गुरू पद पर बैठने के बाद उत्‍तम शिष्‍य परंपरा को आगे बढ़ाने का काम करके उन्‍होंने वो भी अपनी भूमिका निभाई है। मेरा सौभाग्‍य रहा है उनके आशीर्वाद प्राप्‍त करने का, उनके विचारों को सुनने का, उनके सुझावों को समझने का। आज मेरा सौभाग्‍य है कि उनके यह 300वें ग्रंथ के लोकार्पण का मुझे अवसर मिला है और यह भी भारत भक्ति का ही उनका एक प्रयास है।

मां भारती के लिए हम कैसे कुछ करें। हमारा देश गरीबी से मुक्‍त कैसे हो, सवा सौ करोड़ देशवासी स्‍वच्‍छ भारत के सपने को कैसे पूर्ण करें। 35 साल से कम उम्र के करोड़ों-करोड़ों लोग, ऐसे हमारे नौजवान भारत के भाग्‍य को बदलने के लिए बहुत बड़ी शक्ति कैसे बनें। इन सपनों को साकार करने के लिए हम सब मिल करके एक अविरत प्रयास करते रहें।

मैं आज के इस शुभ अवसर पर, इस भव्‍य आयोजन के लिए समिति को बधाई देता हूं, पूज्‍य महाराज साहब को प्रणाम करता हूं और भगवान महावीर के चरणों में प्रार्थना करता हूं कि ऐसे आचार्य भगवंतों को ऐसी आचार्य शक्ति दें, ऐसी दिव्‍यता दें कि आने वाली सदियों तक मानवजाति के कल्‍याण के लिए उनका रास्‍ता हमें काम आए। मैं फिर एक बार आप सबको प्रणाम करता हूं, पूज्‍य महाराज साहब को प्रणाम करता हूं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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“Today we feel proud when we see the youth of India excelling in the world of startups. We feel proud when we see that the youth of India are innovating and taking the country forward”
“This is New India, which does not hold back from innovating. Courage and determination are the hallmark of India today”
“Children of India have shown their modern and scientific temperament in the vaccination program and since January 3, in just 20 days, more than 40 million children have taken the corona vaccine”

कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के हमारे साथी स्मृति ईरानी जी, डॉक्टर महेंद्रभाई, सभी अधिकारीगण, सभी अभिभावक एवं शिक्षकगण, और भारत के भविष्य, ऐसे मेरे सभी युवा साथियों!

आप सबसे बातचीत करके बहुत अच्छा लगा। आपसे आपके अनुभवों के बारे में जानने को भी मिला। कला-संस्कृति से लेकर वीरता, शिक्षा से लेकर इनोवेशन, समाजसेवा और खेल, जैसे अनेकविध क्षेत्रों में आपकी असाधारण उपलब्धियों के लिए आपको अवार्ड मिले हैं। और ये अवार्ड एक बहुत बड़ी स्‍पर्धा के बाद आपको मिले हैं। देश के हर कोने से बच्‍चे आगे आए हैं। उसमें से आपका नंबर लगा है। मतलब कि अवार्ड पाने वालों की संख्‍या भले कम है, लेकिन इस प्रकार से होनहार बालकों की संख्‍या हमारे देश में अपरम्‍पार है। आप सबको एक बार फिर इन पुरस्कारों के लिए बहुत बहुत बधाई। आज National Girl Child Day भी है। मैं देश की सभी बेटियों को भी बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों

आपके साथ-साथ मैं आपके माता-पिता और टीचर्स को भी विशेष रूप से बधाई देना चाहता हूँ। आज आप इस मुकाम पर पहुंचे हैं, इसके पीछे उनका भी बहुत बड़ा योगदान है। इसीलिए, आपकी हर सफलता आपके अपनों की भी सफलता है। उसमें आपके अपनों का प्रयास और उनकी भावनाएं शामिल हैं।

मेरे नौजवान साथियों,

आपको आज ये जो अवार्ड मिला है, ये एक और वजह से बहुत खास है। ये वजह है- इन पुरस्कारों का अवसर! देश इस समय अपनी आज़ादी के 75 साल का पर्व मना रहा है। आपको ये अवार्ड इस महत्वपूर्ण कालखंड में मिला है। आप जीवन भर, गर्व से कहेंगे कि जब मेरा देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा था, तब मुझे ये अवार्ड मिला था। इस अवार्ड के साथ आपको बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी भी मिली है। अब दोस्तों की, परिवार की, समाज की, हर किसी की आपसे अपेक्षाएँ भी बढ़ गई हैं। इन अपेक्षाओं का आपको दबाव नहीं लेना है, इनसे प्रेरणा लेनी है।

युवा साथियों, हमारे देश के छोटे छोटे बच्चों ने, बेटे-बेटियों ने हर युग में इतिहास लिखा है। हमारी आज़ादी की लड़ाई में वीरबाला कनकलता बरुआ, खुदीराम बोस, रानी गाइडिनिल्यू जैसे वीरों का ऐसा इतिहास है जो हमें गर्व से भर देता है। इन सेनानियों ने छोटी सी उम्र में ही देश की आज़ादी को अपने जीवन का मिशन बना लिया था, उसके लिए खुद को समर्पित कर दिया था।

आपने टीवी देखा होगा, मैं पिछले साल दीवाली पर जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में गया था। वहां मेरी मुलाकात श्रीमान बलदेव सिंह और श्रीमान बसंत सिंह नाम के ऐसे वीरों से हुई जिन्होंने आज़ादी के तुरंत बाद जो युद्ध हुआ था कश्‍मीर की धरती पर, अभी तो इनकी उम्र बहुत बड़ी है, तब वो बहुत छोटी उम्र के थे और उन्‍होंने उस युद्ध में बाल सैनिक की भूमिका निभाई थी। और हमारी सेना में पहली बार बाल-सैनिक के रूप में उनकी पहचान की गई थी। उन्होंने अपने जीवन की परवाह न करते हुए उतनी कम उम्र में अपनी सेना की मदद की थी।

इसी तरह, हमारे भारत का एक और उदाहरण है- गुरु गोविन्द सिंह जी के बेटों का शौर्य और बलिदान! साहिबज़ादों ने जब असीम वीरता के साथ, धैर्य के साथ, साहस के साथ पूर्ण समर्पण भाव से बलिदान दिया था तब उनकी उम्र बहुत कम थी। भारत की सभ्यता, संस्कृति, आस्था और धर्म के लिए उनका बलिदान अतुलनीय है। साहिबज़ादों के बलिदान की स्मृति में देश ने 26 दिसम्बर को 'वीर बाल दिवस' की भी शुरुआत की है। मैं चाहूँगा कि आप सब, और देश के सभी युवा वीर साहिबज़ादों के बारे में जरूर पढ़ें।

आपने ये भी जरूर देखा होगा, कल दिल्ली में इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाषचंद्र बोस की डिजिटल प्रतिमा भी स्थापित की गई है। नेताजी से हमें सबसे बड़ी प्रेरणा मिलती है- कर्तव्य की, राष्ट्रप्रथम की! नेताजी से प्रेरणा लेकर हम सबको, और युवा पीढ़ी को विशेष रूप से देश के लिए अपने कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ना है।

साथियों,

हमारी आजादी के 75 साल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आज हमारे सामने अपने अतीत पर गर्व करने का, उससे ऊर्जा लेने का समय है। ये समय वर्तमान के संकल्पों को पूरा करने का है। ये समय भविष्य के लिए नए सपने देखने का है, नए लक्ष्य निर्धारित करके उन पर बढ़ने का है। ये लक्ष्य अगले 25 सालों के लिए हैं, जब देश अपनी आज़ादी के सौ साल पूरे करेगा।

अब आप कल्‍पना कीजिए, आज आप में से ज्‍यादातर लोग 10 और 20 के बीच की उम्र के हैं। जब आजादी के सौ साल होंगे तब आप जीवन के उस पड़ाव पर होंगे, तब ये देश कितना भव्‍य, दिव्‍य, प्रगतिशील, ऊंचाइयों पर पहुंचा हुआ, आपका जीवन कितना सुख-शांति से भरा हुआ होगा। यानी, ये लक्ष्य हमारे युवाओं के लिए हैं, आपकी पीढ़ी और आपके लिए हैं। अगले 25 सालों में देश जिस ऊंचाई पर होगा, देश का जो सामर्थ्य बढ़ेगा, उसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारी युवा पीढ़ी की है।

साथियों,

हमारे पूर्वजों ने जो बोया, उन्‍होंने जो तप किया, त्‍याग किया, उसके फल हम सबको नसीब हुए हैं। लेकिन आप वो लोग हैं, आप एक ऐसे कालखंड में पहुंचे हैं, देश आज उस जगह पर पहुंचा हुआ है कि आप जो बोऐंगे उसके फल आपको खाने को मिलेंगे, इतना जल्‍दी से बदलाव होने वाला है। इसीलिए, आप देखते होंगे, आज देश में जो नीतियाँ बन रही हैं, जो प्रयास हो रहे हैं, उन सबके केंद्र में हमारी युवा पीढ़ी है, आप लोग हैं।

आप किसी सेक्टर को सामने रखिए, आज देश के सामने स्टार्टअप इंडिया जैसे मिशन हैं, स्टैंडअप इंडिया जैसे प्रोग्राम चल रहे हैं, डिजिटल इंडिया का इतना बड़ा अभियान हमारे सामने है, मेक इन इंडिया को गति दी जा रही है, आत्मनिर्भर भारत का जनआंदोलन देश ने शुरू किया है, देश के हर कोने में तेजी से आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर विस्तार ले रहा है, हाइवेज़ बन रहे हैं, हाइस्पीड एक्सप्रेसवेज़ बन रहे हैं, ये प्रगति, ये गति किसकी स्पीड से मैच करती है? आप लोग ही हैं जो इन सब बदलावों से खुद को जोड़कर देखते हैं, इन सबके लिए इतना excited रहते हैं। आपकी ही जेनेरेशन, भारत ही नहीं, बल्कि भारत के बाहर भी इस नए दौर को लीड कर रही है।

आज हमें गर्व होता है जब देखते हैं कि दुनिया की तमाम बड़ी कंपनियों के CEO, हर कोई उसकी चर्चा कर रहा है, ये CEO कौन हैं, हमारे ही देश की संतान हैं। इसी देश की युवा पीढ़ी है जो आज विश्‍व में छाई हुई है। आज हमें गर्व होता है जब देखते हैं कि भारत के युवा स्टार्ट अप की दुनिया में अपना परचम फहरा रहे हैं। आज हमें गर्व होता है, जब हम देखते हैं कि भारत के युवा नए-नए इनोवेशन कर रहे हैं, देश को आगे बढ़ा रहे हैं। अब से कुछ समय बाद, भारत अपने दमखम पर, पहली बार अंतरिक्ष में भारतीयों को भेजने वाला है। इस गगनयान मिशन का दारोमदार भी हमारे युवाओं के पर ही है। जो युवा इस मिशन के लिए चुने गए हैं, वो इस समय कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

साथियों,

आज आपको मिले ये अवार्ड भी हमारी युवा पीढ़ी के साहस और वीरता को भी celebrate करते हैं। ये साहस और वीरता ही आज नए भारत की पहचान है। कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई हमने देखी है, हमारे वैज्ञानिकों ने, हमारे वैक्सीन Manufacturers ने दुनिया में लीड लेते हुये देश को वैक्सीन्स दीं। हमारे हेल्थकेयर वर्कर्स ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी बिना डरे, बिना रुके देशवासियों की सेवा की, हमारी नर्सेस गाँव गाँव, मुश्किल से मुश्किल जगहों पर जाकर लोगों को वैक्सीन लगा रही हैं, ये एक देश के रूप में साहस और हिम्मत की बड़ी मिसाल है।

इसी तरह, सीमाओं पर डटे हमारे सैनिकों की वीरता को देखिए। देश की रक्षा के लिए उनकी जांबाजी हमारी पहचान बन गई है। हमारे खिलाड़ी भी आज वो मुकाम हासिल कर रहे हैं, जो भारत के लिए कभी संभव नहीं माने जाते थे। इसी तरह, जिन क्षेत्रों में बेटियों को पहले इजाजत भी नहीं होती थी, बेटियाँ आज उनमें कमाल कर रही हैं। यही तो वो नया भारत है, जो नया करने से पीछे नहीं रहता, हिम्मत और हौसला आज भारत की पहचान है।

साथियों,

आज भारत, अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को मजबूत करने के लिए निरंतर कदम उठा रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। इससे आपको पढ़ने में, सीखने में और आसानी होगी। आप अपनी पसंद के विषय पढ़ पाएं, इसके लिए भी शिक्षा नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश भर के हजारों स्कूलों में बन रही अटल टिंकरिंग लैब्स, पढ़ाई के शुरुआती दिनों से ही बच्चों में इनोवेशन का सामर्थ्य बढ़ा रही हैं।

साथियों,

भारत के बच्चों ने, युवा पीढ़ी ने हमेशा साबित किया है कि वो 21वीं सदी में भारत को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए कितने सामर्थ्य से भरे हुए हैं। मुझे याद है, चंद्रयान के समय, मैंने देशभर के बच्चों को बुलाया था। उनका उत्साह, उनका जोश मैं कभी भूल नहीं सकता। भारत के बच्चों ने, अभी वैक्सीनेशन प्रोग्राम में भी अपनी आधुनिक और वैज्ञानिक सोच का परिचय दिया है। 3 जनवरी के बाद से सिर्फ 20 दिनों में ही चार करोड़ से ज्यादा बच्चों ने कोरोना वैक्सीन लगवाई है। ये दिखाता है कि हमारे देश के बच्चे कितने जागरूक हैं, उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का कितना एहसास है।

साथियों,

स्वच्छ भारत अभियान की सफलता का बहुत बड़ा श्रेय भी मैं भारत के बच्चों को देता हूं। आप लोगों ने घर-घर में बाल सैनिक बनकर, स्‍वच्‍छाग्रही बनकर अपने परिवार को स्वच्छता अभियान के लिए प्रेरित किया। घर के लोग, स्वच्छता रखें, घर के भीतर और बाहर गंदगी ना हो, इसका बीड़ा बच्चों ने खुद उठा लिया था। आज मैं देश के बच्चों से एक और बात के लिए सहयोग मांग रहा हूं। और बच्‍चे मेरा साथ देंगे तो हर परिवार में परिवर्तन आएगा। और मुझे विश्‍वास है ये मेरे नन्‍हें-मुन्‍हें साथी, यही मेरी बाल सेना मुझे इस काम में बहुत मदद करेगी।

जैसे आप स्वच्छता अभियान के लिए आगे आए, वैसे ही आप वोकल फॉर लोकल अभियान के लिए भी आगे आइए। आप घर में बैठ करके, सब भाई-बहन बैठ करके एक लिस्‍ट बनाइए, गिनती करिए, कागज ले करके देखिए, सुबह से रात देर तक आप जो चीजों का उपयोग करते हैं, घर में जो सामान है, ऐसे कितने Products हैं, जो भारत में नहीं बने हैं, विदेशी हैं। इसके बाद घर के लोगों से आग्रह करें कि भविष्य में जब वैसा ही कोई Product खरीदा जाए तो वो भारत में बना हो। उसमें भारत की मिट्टी की सुगंध हो, जिसमें भारत के युवाओं के पसीने की सुगंध हो। जब आप भारत में बनी चीजें खरीदेंगे तो क्‍या होने वाला है। एकदम से हमारा उत्‍पादन बढ़ने लग जाएगा। हर चीज में उत्पादन बढ़ेगा। और जब उत्पादन बढ़ेगा, तो रोजगार के भी नए अवसर बनेंगे। जब रोजगार बढ़ेंगे तो आपका जीवन भी आत्मनिर्भर बनेगा। इसलिए आत्मनिर्भर भारत का अभियान, हमारी युवा पीढ़ी, आप सभी से भी जुड़ा हुआ है।

साथियों,

आज से दो दिन बाद देश अपना गणतन्त्र दिवस भी मनाएगा। हमें गणतन्त्र दिवस पर अपने देश के लिए कुछ नए संकल्प लेने हैं। हमारे ये संकल्प समाज के लिए, देश के लिए, और पूरे विश्व के भविष्य के लिए हो सकते हैं। जैसे कि पर्यावरण का उदाहरण हमारे सामने है। भारत पर्यावरण की दिशा में आज इतना कुछ कर रहा है, और इसका लाभ पूरे विश्व को मिलेगा।

मैं चाहूँगा कि आप उन संकल्पों के बारे में सोचें जो भारत की पहचान से जुड़े हों, जो भारत को आधुनिक और विकसित बनाने में मदद करें। मुझे पूरा भरोसा है, आपके सपने देश के संकल्पों से जुड़ेंगे, और आप आने वाले समय में देश के लिए अनगिनत कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

इसी विश्वास के साथ आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत बधाई,

सभी मेरे बाल मित्रों को बहुत-बहुत प्‍यार, बहुत-बहुत बधाई, बहुत बहुत धन्यवाद !