શેર
 
Comments
માત્ર દેશમાં જ નહીં પરંતુ વિશ્વમાં એવું ભાગ્યે જ બન્યું હશે કે જ્યાં કોઈ રાજકીય પક્ષ આટલા વર્ષોથી સેવામાં રહ્યો હોયઃ ગુજરાતમાં ભાજપની બે દાયકા લાંબી સેવા પર પીએમ મોદી
કોંગ્રેસની વિભાજનકારી રાજનીતિએ ગરીબ અને પછાત લોકોને તેમની મૂળભૂત જરૂરિયાતો પૂરી કરવાથી દૂર રાખ્યાઃ કપરાડા ખાતે પીએમ મોદી
છેલ્લા 18-20 વર્ષમાં ગુજરાતમાં જે વિકાસ થયો છે તે આજના યુવાનો માટે આટલો સુંદર સમય લઈને આવ્યો છેઃ પીએમ મોદી

Prime Minister Narendra Modi today, addressed a public meeting at Kaprada, Gujarat. PM Modi started his address by highlighting the rare achievement of the BJP government to remain in service for such a long time and that the people have bestowed their trust in the political party. PM Modi also highlighted how the tribals of the area reaped the benefits from the development that has happened in Gujarat.

Talking about how Gujarat has turned its fate around in under two decades, PM Modi said that when the world thought it would take Gujarat decades to stand again, the people of Gujarat turned the state around and made Gujarat a hub for development.

Hitting out at the opposition, PM Modi said that due to the divisive politics of Congress, poor and backward people never had their basic needs fulfilled. He finally addressed the youth and the first-time voters of Gujarat, PM Modi said that the Gujarat of 20 years ago was impoverished and had a lack of opportunities for the youth, but has completely changed in these two decades. PM Modi further added that Gujarat today is developing at a rapid pace and has ample opportunities for all, and to continue this development, the people have to keep supporting the BJP.

Explore More
પ્રધાનમંત્રીએ 76મા સ્વતંત્રતા દિવસના પ્રસંગે લાલ કિલ્લાની પ્રાચીર પરથી દેશને કરેલાં સંબોધનનો મૂળપાઠ

લોકપ્રિય ભાષણો

પ્રધાનમંત્રીએ 76મા સ્વતંત્રતા દિવસના પ્રસંગે લાલ કિલ્લાની પ્રાચીર પરથી દેશને કરેલાં સંબોધનનો મૂળપાઠ
The Bharat Budget: Why this budget marks the transition from India to Bharat

Media Coverage

The Bharat Budget: Why this budget marks the transition from India to Bharat
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s address at the Krishnaguru Eknaam Akhand Kirtan for World Peace
February 03, 2023
શેર
 
Comments
“Krishnaguru ji propagated ancient Indian traditions of knowledge, service and humanity”
“Eknaam Akhanda Kirtan is making the world familiar with the heritage and spiritual consciousness of the Northeast”
“There has been an ancient tradition of organizing such events on a period of 12 years”
“Priority for the deprived is key guiding force for us today”
“50 tourist destination will be developed through special campaign”
“Gamosa’s attraction and demand have increased in the country in last 8-9 years”
“In order to make the income of women a means of their empowerment, ‘Mahila Samman Saving Certificate’ scheme has also been started”
“The life force of the country's welfare schemes are social energy and public participation”
“Coarse grains have now been given a new identity - Shri Anna”

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय जयते परम कृष्णगुरु ईश्वर !.

कृष्णगुरू सेवाश्रम में जुटे आप सभी संतों-मनीषियों और भक्तों को मेरा सादर प्रणाम। कृष्णगुरू एकनाम अखंड कीर्तन का ये आयोजन पिछले एक महीने से चल रहा है। मुझे खुशी है कि ज्ञान, सेवा और मानवता की जिस प्राचीन भारतीय परंपरा को कृष्णगुरु जी ने आगे बढ़ाया, वो आज भी निरंतर गतिमान है। गुरूकृष्ण प्रेमानंद प्रभु जी और उनके सहयोग के आशीर्वाद से और कृष्णगुरू के भक्तों के प्रयास से इस आयोजन में वो दिव्यता साफ दिखाई दे रही है। मेरी इच्छा थी कि मैं इस अवसर पर असम आकर आप सबके साथ इस कार्यक्रम में शामिल होऊं! मैंने कृष्णगुरु जी की पावन तपोस्थली पर आने का पहले भी कई बार प्रयास किया है। लेकिन शायद मेरे प्रयासों में कोई कमी रह गई कि चाहकर के भी मैं अब तक वहां नहीं आ पाया। मेरी कामना है कि कृष्णगुरु का आशीर्वाद मुझे ये अवसर दे कि मैं आने वाले समय में वहाँ आकर आप सभी को नमन करूँ, आपके दर्शन करूं।

साथियों,

कृष्णगुरु जी ने विश्व शांति के लिए हर 12 वर्ष में 1 मास के अखंड नामजप और कीर्तन का अनुष्ठान शुरू किया था। हमारे देश में तो 12 वर्ष की अवधि पर इस तरह के आयोजनों की प्राचीन परंपरा रही है। और इन आयोजनों का मुख्य भाव रहा है- कर्तव्य I ये समारोह, व्यक्ति में, समाज में, कर्तव्य बोध को पुनर्जीवित करते थे। इन आयोजनों में पूरे देश के लोग एक साथ एकत्रित होते थे। पिछले 12 वर्षों में जो कुछ भी बीते समय में हुआ है, उसकी समीक्षा होती थी, वर्तमान का मूल्यांकन होता था, और भविष्य की रूपरेखा तय की जाती थी। हर 12 वर्ष पर कुम्भ की परंपरा भी इसका एक सशक्त उदाहरण रहा है। 2019 में ही असम के लोगों ने ब्रह्मपुत्र नदी में पुष्करम समारोह का सफल आयोजन किया था। अब फिर से ब्रह्मपुत्र नदी पर ये आयोजन 12वें साल में ही होगा। तमिलनाडु के कुंभकोणम में महामाहम पर्व भी 12 वर्ष में मनाया जाता है। भगवान बाहुबली का महा-मस्तकाभिषेक ये भी 12 साल पर ही होता है। ये भी संयोग है कि नीलगिरी की पहाड़ियों पर खिलने वाला नील कुरुंजी पुष्प भी हर 12 साल में ही उगता है। 12 वर्ष पर हो रहा कृष्णगुरु एकनाम अखंड कीर्तन भी ऐसी ही सशक्त परंपरा का सृजन कर रहा है। ये कीर्तन, पूर्वोत्तर की विरासत से, यहाँ की आध्यात्मिक चेतना से विश्व को परिचित करा रहा है। मैं आप सभी को इस आयोजन के लिए अनेकों-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ।

साथियों,

कृष्णगुरु जी की विलक्षण प्रतिभा, उनका आध्यात्मिक बोध, उनसे जुड़ी हैरान कर देने वाली घटनाएं, हम सभी को निरंतर प्रेरणा देती हैं। उन्होंने हमें सिखाया है कि कोई भी काम, कोई भी व्यक्ति ना छोटा होता है ना बड़ा होता है। बीते 8-9 वर्षों में देश ने इसी भावना से, सबके साथ से सबके विकास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया है। आज विकास की दौड़ में जो जितना पीछे है, देश के लिए वो उतनी ही पहली प्राथमिकता है। यानि जो वंचित है, उसे देश आज वरीयता दे रहा है, वंचितों को वरीयता। असम हो, हमारा नॉर्थ ईस्ट हो, वो भी दशकों तक विकास के कनेक्टिविटी से वंचित रहा था। आज देश असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को वरीयता दे रहा है, प्राथमिकता दे रहा है।

इस बार के बजट में भी देश के इन प्रयासों की, और हमारे भविष्य की मजबूत झलक दिखाई दी है। पूर्वोत्तर की इकॉनमी और प्रगति में पर्यटन की एक बड़ी भूमिका है। इस बार के बजट में पर्यटन से जुड़े अवसरों को बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को विशेष अभियान चलाकर विकसित किया जाएगा। इनके लिए आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा, वर्चुअल connectivity को बेहतर किया जाएगा, टूरिस्ट सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा। पूर्वोत्तर और असम को इन विकास कार्यों का बड़ा लाभ मिलेगा। वैसे आज इस आयोजन में जुटे आप सभी संतों-विद्वानों को मैं एक और जानकारी देना चाहता हूं। आप सबने भी गंगा विलास क्रूज़ के बारे में सुना होगा। गंगा विलास क्रूज़ दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज़ है। इस पर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी सफर कर रहे हैं। बनारस से बिहार में पटना, बक्सर, मुंगेर होते हुये ये क्रूज़ बंगाल में कोलकाता से आगे तक की यात्रा करते हुए बांग्लादेश पहुंच चुका है। कुछ समय बाद ये क्रूज असम पहुँचने वाला है। इसमें सवार पर्यटक इन जगहों को नदियों के जरिए विस्तार से जान रहे हैं, वहाँ की संस्कृति को जी रहे हैं। और हम तो जानते है भारत की सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी अहमियत, सबसे बड़ा मूल्यवान खजाना हमारे नदी, तटों पर ही है क्योंकि हमारी पूरी संस्कृति की विकास यात्रा नदी, तटों से जुड़ी हुई है। मुझे विश्वास है, असमिया संस्कृति और खूबसूरती भी गंगा विलास के जरिए दुनिया तक एक नए तरीके से पहुंचेगी।

साथियों,

कृष्णगुरु सेवाश्रम, विभिन्न संस्थाओं के जरिए पारंपरिक शिल्प और कौशल से जुड़े लोगों के कल्याण के लिए भी काम करता है। बीते वर्षों में पूर्वोत्तर के पारंपरिक कौशल को नई पहचान देकर ग्लोबल मार्केट में जोड़ने की दिशा में देश ने ऐतिहासिक काम किए हैं। आज असम की आर्ट, असम के लोगों के स्किल, यहाँ के बैम्बू प्रॉडक्ट्स के बारे में पूरे देश और दुनिया में लोग जान रहे हैं, उन्हें पसंद कर रहे हैं। आपको ये भी याद होगा कि पहले बैम्बू को पेड़ों की कैटेगरी में रखकर इसके काटने पर कानूनी रोक लग गई थी। हमने इस कानून को बदला, गुलामी के कालखंड का कानून था। बैम्बू को घास की कैटेगरी में रखकर पारंपरिक रोजगार के लिए सभी रास्ते खोल दिये। अब इस तरह के पारंपरिक कौशल विकास के लिए, इन प्रॉडक्ट्स की क्वालिटी और पहुँच बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। इस तरह के उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए बजट में हर राज्य में यूनिटी मॉल-एकता मॉल बनाने की भी घोषणा इस बजट में की गई है। यानी, असम के किसान, असम के कारीगर, असम के युवा जो प्रॉडक्ट्स बनाएँगे, यूनिटी मॉल-एकता मॉल में उनका विशेष डिस्प्ले होगा ताकि उसकी ज्यादा बिक्री हो सके। यही नहीं, दूसरे राज्यों की राजधानी या बड़े पर्यटन स्थलों में भी जो यूनिटी मॉल बनेंगे, उसमें भी असम के प्रॉडक्ट्स रखे जाएंगे। पर्यटक जब यूनिटी मॉल जाएंगे, तो असम के उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा।

साथियों,

जब असम के शिल्प की बात होती है तो यहाँ के ये 'गोमोशा' का भी ये ‘गोमोशा’ इसका भी ज़िक्र अपने आप हो जाता है। मुझे खुद 'गोमोशा' पहनना बहुत अच्छा लगता है। हर खूबसूरत गोमोशा के पीछे असम की महिलाओं, हमारी माताओं-बहनों की मेहनत होती है। बीते 8-9 वर्षों में देश में गोमोशा को लेकर आकर्षण बढ़ा है, तो उसकी मांग भी बढ़ी है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स सामने आए हैं। इन ग्रुप्स में हजारों-लाखों महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। अब ये ग्रुप्स और आगे बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था की ताकत बनेंगे। इसके लिए इस साल के बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं की आय उनके सशक्तिकरण का माध्यम बने, इसके लिए 'महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट' योजना भी शुरू की गई है। महिलाओं को सेविंग पर विशेष रूप से ज्यादा ब्याज का फायदा मिलेगा। साथ ही, पीएम आवास योजना का बजट भी बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है, ताकि हर परिवार को जो गरीब है, जिसके पास पक्का घर नहीं है, उसका पक्का घर मिल सके। ये घर भी अधिकांश महिलाओं के ही नाम पर बनाए जाते हैं। उसका मालिकी हक महिलाओं का होता है। इस बजट में ऐसे अनेक प्रावधान हैं, जिनसे असम, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों की महिलाओं को व्यापक लाभ होगा, उनके लिए नए अवसर बनेंगे।

साथियों,

कृष्णगुरू कहा करते थे- नित्य भक्ति के कार्यों में विश्वास के साथ अपनी आत्मा की सेवा करें। अपनी आत्मा की सेवा में, समाज की सेवा, समाज के विकास के इस मंत्र में बड़ी शक्ति समाई हुई है। मुझे खुशी है कि कृष्णगुरु सेवाश्रम समाज से जुड़े लगभग हर आयाम में इस मंत्र के साथ काम कर रहा है। आपके द्वारा चलाये जा रहे ये सेवायज्ञ देश की बड़ी ताकत बन रहे हैं। देश के विकास के लिए सरकार अनेकों योजनाएं चलाती है। लेकिन देश की कल्याणकारी योजनाओं की प्राणवायु, समाज की शक्ति और जन भागीदारी ही है। हमने देखा है कि कैसे देश ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और फिर जनभागीदारी ने उसे सफल बना दिया। डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता के पीछे भी सबसे बड़ी वजह जनभागीदारी ही है। देश को सशक्त करने वाली इस तरह की अनेकों योजनाओं को आगे बढ़ाने में कृष्णगुरु सेवाश्रम की भूमिका बहुत अहम है। जैसे कि सेवाश्रम महिलाओं और युवाओं के लिए कई सामाजिक कार्य करता है। आप बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ और पोषण जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने की भी ज़िम्मेदारी ले सकते हैं। 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' जैसे अभियानों से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने से सेवाश्रम की प्रेरणा बहुत अहम है। योग हो, आयुर्वेद हो, इनके प्रचार-प्रसार में आपकी और ज्यादा सहभागिता, समाज शक्ति को मजबूत करेगी।

साथियों,

आप जानते हैं कि हमारे यहां पारंपरिक तौर पर हाथ से, किसी औजार की मदद से काम करने वाले कारीगरों को, हुनरमंदों को विश्वकर्मा कहा जाता है। देश ने अब पहली बार इन पारंपरिक कारीगरों के कौशल को बढ़ाने का संकल्प लिया है। इनके लिए पीएम-विश्वकर्मा कौशल सम्मान यानि पीएम विकास योजना शुरू की जा रही है और इस बजट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। कृष्णगुरु सेवाश्रम, विश्वकर्मा साथियों में इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाकर भी उनका हित कर सकता है।

साथियों,

2023 में भारत की पहल पर पूरा विश्व मिलेट ईयर भी मना रहा है। मिलेट यानी, मोटे अनाजों को, जिसको हम आमतौर पर मोटा अनाज कहते है नाम अलग-अलग होते है लेकिन मोटा अनाज कहते हैं। मोटे अनाजों को अब एक नई पहचान दी गई है। ये पहचान है- श्री अन्न। यानि अन्न में जो सर्वश्रेष्ठ है, वो हुआ श्री अन्न। कृष्णगुरु सेवाश्रम और सभी धार्मिक संस्थाएं श्री-अन्न के प्रसार में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। आश्रम में जो प्रसाद बँटता है, मेरा आग्रह है कि वो प्रसाद श्री अन्न से बनाया जाए। ऐसे ही, आज़ादी के अमृत महोत्सव में हमारे स्वाधीनता सेनानियों के इतिहास को युवापीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अभियान चल रहा है। इस दिशा में सेवाश्रम प्रकाशन द्वारा, असम और पूर्वोत्तर के क्रांतिकारियों के बारे में बहुत कुछ किया जा सकता है। मुझे विश्वास है, 12 वर्षों बाद जब ये अखंड कीर्तन होगा, तो आपके और देश के इन साझा प्रयासों से हम और अधिक सशक्त भारत के दर्शन कर रहे होंगे। और इसी कामना के साथ सभी संतों को प्रणाम करता हूं, सभी पुण्य आत्माओं को प्रणाम करता हूं और आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!