While the BJP is committed to the empowerment of women, Congress has repeatedly been involved in scandals: PM in Nanded
Vote for a developed and united Maharashtra: PM Modi encouraged in Nanded rally

उणकेश्वर महादेव // विष्णुपुरीतील काळेश्वर// यांच्या चरणी //नतमस्तक होतो.// महात्मा बसवेश्वर //यांना मी // कोटी कोटी वंदन करतो.// सर्व नांदेडकरांना // माझा नमस्कार//

मैं मराठवाड़ा की धरती से स्वामी रामानंद तीर्थ और श्री नामदेव जैसे संतों को, इस धरती में जन्मे स्वतन्त्रता सेनानियों को भी प्रणाम करता हूं।

साथियों,

आज पूरे महाराष्ट्र में बीजेपी और महायुति के समर्थन में एक लहर चल रही है। आज हर किसी की जुबान पर एक ही नारा है- भाजपा-महायुति //आहे// तर गति आहे// महाराष्ट्राची //प्रगति आहे।
(ये सज्जन कुछ फोटो लेकर आए हैं। ये फोटो ले लीजिए भई। मुझे देने के लिए लाए हैं या दिखाने के लिए लाए हैं। देने के लिए लाए हैं, जरा सिक्योरिटी के लोग वो फोटो ले लीजिए। मुझे पहुंच जाएगा। मैं आपका आभारी हूं। हां, दे दीजिए इनको। बहुत-बहुत धन्यवाद आपका।)


साथियों,

आज देश विकसित भारत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। और देश की जनता जानती है कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भाजपा और उसके सहयोगी दल ही गंभीरता से काम कर रहे हैं। इसलिए भाजपा और एनडीए सरकारों को देश के लोग बार-बार चुन रहे हैं। केंद्र में देश ने लगातार तीसरी बार एनडीए को सेवा का मौका दिया है। लेकिन इस बार उसमें नांदेड़ का फूल नहीं था भाई। क्या इस बार नांदेड़ का फूल पहुंचेगा दिल्ली? पक्का पहुंचेगा? देखिए, आज मैं डबल ड्यूटी कर रहा हूं। एक तो मैं मोदी के लिए भी मदद मांग रहा हूं और दूसरा महाराष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी आपसे आशीर्वाद मांगता हूं। जो नांदेड़ लोकसभा क्षेत्र के भाई-बहन हैं, आपको दो वोट डालने हैं, याद है ना। हां, वर्ना लोग कुछ उल्टा ही पढ़ाएंगे आपको।

 साथियों,

अभी हरियाणा के चुनावों में बीजेपी को पहले से भी ज्यादा सीटें मिलीं। पहले से क्या इतिहास में सबसे ज्यादा सीटें मिलीं। अब यही इतिहास महाराष्ट्र की जनता भी दोहराने जा रही है। साथियों, पिछले दो दिन से मैं महाराष्ट्र में जहां-जहां गया, हरेक के मन में ये कसक है कि लोकसभा में जो कमी रह गई इस बार विधानसभा में जमकर के इसको पूरा कर देना है। लोग कह रहे हैं- विकसित महाराष्ट्र के लिए महायुति की सरकार चाहिए… महायुतीचीच सरकार पाहिजे।

साथियों,

महाराष्ट्र ने कांग्रेस के प्रकोप को लंबे समय तक झेला है। खासकर मराठवाड़ा के किसान, आपकी परेशानियों की तो जड़ ही कांग्रेस पार्टी है। कांग्रेस सरकारों ने कभी यहां के किसानों के सुख-दुःख की परवाह नहीं की। साथियों, पिछले 10 वर्षों में मराठवाड़ा को सूखे की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। महायुति सरकार ने पश्चिमी वैतरणा और उल्हास सब-बेसिन से पानी लाने का फैसला किया है। दमनगंगा-वैतरणा-गोदावरी रिवर लिंक योजना से भी मराठवाड़ा को लाभ होगा। मराठवाड़ा में 11 सिंचाई योजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। इस क्षेत्र की सिंचाई की समस्या दूर करने के लिए मराठवाड़ा वाटर ग्रिड परियोजना शुरू की गई थी। लेकिन जब महा-अघाड़ी की सरकार आई तो उसने इस पर रोक लगा दी। अब महायुति की सरकार ने इसे दोबारा गति दी है।

साथियों,

किसानों की हित हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। महाराष्ट्र के सवा करोड़ से ज्यादा किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का फायदा मिला है। नांदेड़ में 5 लाख से ज्यादा किसानों के खाते में (मैं सिर्फ नांदेड़ के किसानों की बात कर रहा हूं।) लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपए भेजे हैं। (ये नौजवान कुछ लेकर आया है बड़ा प्यार से, कब से हाथ ऊपर करके खड़ा है, उसका हाथ थक जाएगा, जरा ले लीजिए। धन्यवाद भैया, आपके प्यार के लिए। ये आपका प्यार ही मेरी ताकत है भाई।) साथियों, यहां के सोयाबीन किसानों को संकट से उबारने के लिए भी आर्थिक सहायता दी गई है।

साथियों,

पिछले ढाई वर्षों में मराठवाड़ा क्षेत्र में 80 हजार करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। इससे रोजगार के हजारों नए अवसर तैयार हुए हैं। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर इस क्षेत्र को नई पहचान दे रहा है। रेल कोच फैक्ट्री और लॉजिस्टिक पार्क ने यहां विकास के नए द्वार खोले हैं। समृद्धि महामार्ग से इस क्षेत्र की प्रगति को नई रफ्तार मिली है। नांदेड़ से गुजरने वाले शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे से पूरे मराठवाड़ा की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई मिलेगी। नांदेड़ से दिल्ली और आदमपुर के लिए विमान सेवाएं शुरू हो गई हैं। जल्द ही हमारे सिख भाइयों को यहां से अमृतसर तक की यात्रा विमान से करने की सुविधा भी मिलेगी।

 

साथियों,

पिछले 10 वर्षों में हमारी सरकार की ज्यादातर योजनाओं के केंद्र में नारीशक्ति रही है। जिस परिवार को पीएम आवास योजना के तहत घर मिल रहा है, जिस घर में नया शौचालय बन रहा है, जहां पहली बार बिजली और पानी का कनेक्शन पहुंच रहा है, जिस रसोई में पहली बार गैस सिलेंडर पर खाना बन रहा है, वहां घर की महिला सदस्य को ही सबसे ज्यादा सुविधा हो रही है। मैं जरा माताओं-बहनों को पूछता हूं, मैं सही बोल रहा हूं। हो रहा है कि नहीं हो रहा है? देखिए, माताएं-बहनें उत्साह से आशीर्वाद दे रही हैं। आज हमारी गांव की बहनें ड्रोन दीदी बनकर एक सीजन में लाखों रुपए कमा रही हैं। हम 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के मिशन में जुटे हैं। इस देश में ऐसी बातें कभी सुनने में आई नहीं। लेकिन मोदी है, बड़ा सोचता है, बड़ा चाहता है, बड़ा करता है। दीदी मेरी लखपति बनेगी, गांव की मेरी दीदी लखपति बनेगी। मुझे खुशी है कि महायुति सरकार भी महाराष्ट्र की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। हमारे शिंदे जी के नेतृत्व में आज महाराष्ट्र की माताएं-बहनें बढ़-चढ़कर आगे आई हैं। माझी लाडकी बहिन योजना को यहां की महिलाओं ने जिस तरह अपनाया है, वो अभूतपूर्व है।

साथियों,

कांग्रेस ने हमारे देश में एक से बढ़कर एक घोटाले किए हैं। लेकिन, अब तो इन्होंने हद ही पार कर दी। कांग्रेस ने फर्जीवाड़े में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। आपने टीवी और मोबाइल पर देखा होगा, कांग्रेस के लोग संविधान के नाम पर अपनी एक अलग लाल किताब बंटवा रहे हैं। कांग्रेस की लाल किताब पर ऊपर तो लिखा है- भारत का संविधान! लेकिन, लोगों ने जब भीतर से खोला तो पता चला कि लाल किताब कोरी है! सारे पन्ने कोरे। उसमें बाबासाहेब के संविधान का एक शब्द भी नहीं लिखा है! ये उनकी बाबासाहेब के प्रति जो नफरत है न, उसका ये नमूना है। ये देख पूरा देश हैरान है! कि चुनाव में इतना झूठा करने की इनकी इतनी हिम्मत। संविधान के नाम पर लाल किताब छपवाना, उसमें से संविधान के शब्दों को हटाना, ये संविधान को खत्म करने की कांग्रेस की पुरानी सोच है। ये कांग्रेस वाले देश में बाबासाहेब का नहीं, अपना अलग ही संविधान चलाना चाहते हैं। यही कोशिश इन लोगों ने आपातकाल के दौरान की थी। अब अपनी अलग किताब छपवाकर ये संविधान का मजाक उड़ा रहे हैं। सच्चाई ये है कि कांग्रेस और उसके साथियों को बाबासाहेब के संविधान से नफरत है।

साथियों,

आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी ने बाबासाहेब के संविधान के साथ सबसे पहला विश्वासघात कश्मीर में किया था। पूरे देश ने बाबासाहेब के संविधान को स्वीकार किया। लेकिन, कांग्रेस पार्टी ने आर्टिकल-370 के जरिए कश्मीर में अलग विधान चलाया। कश्मीर में हमारे तिरंगे की जगह अलग झण्डा चलाया। कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के दलितों को उनके अधिकार नहीं मिलने दिये। कश्मीर इतने दशकों तक आतंकवाद की आग में जलता रहा। कश्मीर में अलगाववाद फलता-फूलता रहा। देश को पता भी नहीं चलने दिया कि देश में 75 साल तक दो संविधान चले। और बाबासाहेब के संविधान की बातें करते हैं। क्या बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान जम्मू-कश्मीर में लागू होना चाहिए था कि नहीं होना चाहिए था? उन्होंने नहीं लागू होने दिया। 370 की दीवार बना दी। और जब मोदी आया, दशकों के इंतजार के बाद हमने कश्मीर को आर्टिकल-370 की जकड़ से आज़ाद करवाया। 370 की दीवार को हमेशा-हमेशा के लिए जमीन में गाड़ दिया है।

मैं नांदेड़ के मेरे देशभक्तों से पूछना चाहता हूं। आप बताइए, 370 खत्म होने से आप खुश हैं? अब 370 मरनी चाहिए कि नहीं मरनी चाहिए? क्या 370 को कभी जिंदा होने देंगे क्या? लेकिन देखिए, मेरे नांदेड़ के भाई-बहन, कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ है। अभी जम्मू-कश्मीर में चुनाव हुये थे। वहां कांग्रेस गठबंधन को सरकार बनाने का मौका मिला। सरकार बनाते ही, जैसे ही ये लोग विधानसभा में गए, इन्होंने 370 को फिर से लागू करने का प्रस्ताव पास करा दिया। जरा कांग्रेस वालों से पूछिए, ये 370 से इतना प्यार क्यों है इनको? हमें जम्मू-कश्मीर से प्यार है, उन्हें 370 से प्यार है। आप मुझे बताइये, जब से जम्मू-कश्मीर से 370 हटा, वहां आतंकवाद की कमर टूटी या नहीं टूटी? लाल चौक में तिरंगा फहराया कि नहीं फहराया? लाल चौक में लोगों ने दिवाली मनाई की नहीं मनाई? वहां अलगवादी अलग-थलग पड़े या नहीं पड़े? इतना ही नहीं, कश्मीर में विकास को नई गति मिली। वहां लोकतन्त्र मजबूत हुआ। वहां दलितों को पहली बार, आजादी के 75 साल बाद पहली बार दलितों को उनके अधिकार मिले। लेकिन, इससे परेशान कौन हुआ? सबसे ज्यादा परेशान हुआ पाकिस्तान! और दूसरा, कांग्रेस और उसके साथी! अब तक पाकिस्तान पूरी दुनिया में घूम-घूमकर 370 बहाल करने की मांग कर रहा था। कोई उसकी सुनने वाला नहीं था। लेकिन, अब कांग्रेस ने पाकिस्तान का एजेंडा जम्मू-कश्मीर विधानसभा के भीतर चला दिया है। क्या कोई भी देशभक्त, कोई भी मेरा मराठी मानुष, ऐसी कांग्रेस को माफ कर सकता है क्या? मुझे पूरी ताकत से हाथ ऊपर करके जवाब दीजिए, ऐसी कांग्रेस को माफ कर सकते हैं क्या? ऐसी कांग्रेस को सजा दोगे कि नहीं दोगे? इस चुनाव में उनको पराजित करोगे कि नहीं करोगे? उनको सबक सिखाओगे कि नहीं सिखाओगे? कांग्रेस वाले जरा देख लो, ये महाराष्ट्र के स्वाभिमानियों की धरती है महाराष्ट्र। ये देश पर मर मिटने वालों की धरती है। जो लोग राजनीति के लिए इस स्वाभिमान से समझौता कर रहे हैं, जो लोग बाला साहब की विरासत के साथ धोखा कर रहे है, उन्हें महाराष्ट्र के लोग जरूर सबक सिखाएंगे।

साथियों,

बीते कुछ दशकों से देश में कांग्रेस का जनाधार लगातार तार-तार हो रहा है, कम हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है- SC समाज की एकजुटता, दलित समाज की एकजुटता, ST समाज की एकजुटता, आदिवासी समाज की एकजुटता, OBC समाज की एकजुटता। आजादी के बाद, जब तक भारत में SC-ST-OBC अलग-अलग जातियों में बंटे रहे, कांग्रेस मजबूत रही। केंद्र में सरकार बनाती रही। कांग्रेस की राजनीति को सूट करता है कि OBC समाज की जातियां आपस में लड़ती रहें। कांग्रेस को ये बर्दाश्त नहीं हो रहा कि पिछले 10 वर्षों से देश में एक OBC प्रधानमंत्री है, वो सबको साथ लेकर चल रहा है। इसलिए वो OBC की पहचान खतम करके, अलग-अलग जातियों में बांटने का खेल खेल रही है। कांग्रेस, बड़े समूह वाले OBC से, OBC की पहचान छीनकर उसे छोटे समूहों वाली अलग-अलग दर्जनों जातियों में बांट देना चाहती है। इसीलिए, यहां नांदेड़ में कांग्रेस माली को वाणी से लड़ाना चाहती है, तांबोली को कुंभार से लड़ाना चाहती है। कांग्रेस सुतार को सुनार से लड़ाना चाहती है। कांग्रेस, निहाली को निराली से, कासार को मणेरी से, तेली को पांचाल से भिड़ाना चाहती है। कांग्रेस, OBC को छोटे-छोटे समूहों में तोड़कर आपस में लड़ाकर, आपसे बड़े समूह वाली आपकी जो पहचान बनी है, आपकी जो एक ताकत खड़ी हुई है, उसे बर्बाद करना चाहती है, छीनना चाहती है, तोड़ना चाहती है। आप याद रखिए, जब आप अलग-अलग जाति में बंटेंगे, तो आपकी संख्या कम होगी। फिर कांग्रेस वाले आपका आरक्षण आपसे छीनेंगे। यही कोशिश नेहरू जी से लेकर राजीव गांधी तक सबने की थी। अब वही काम वही चालबाजी करके कांग्रेस के शहजादे देश की जनता की आंख में धूल झोंक रहे हैं। उनका मकसद यही है और इसलिए मैं देशवासियों को कहता हूं समाज को तोड़ने वाली इनकी प्रवृत्तियों से सावधान रहना है। हम एक रहेंगे, तो सेफ रहेंगे। हम एक रहेंगे, तो... हम एक रहेंगे, तो... हम एक रहेंगे, तो...।

साथियों,

विकसित भारत तभी संभव है, जब महाराष्ट्र विकसित होगा, महाराष्ट्र का हर परिवार समृद्ध होगा। केंद्र और महायुति की सरकार आपके सपनों को पूरा करने में जुटी है। महायुति के उम्मीदवारों को भारी बहुमत से जिताकर आप अपने भविष्य को सुरक्षित करेंगे। आपने आज हम सब पर इतनी बड़ी तादाद में आकर जो आशीर्वाद बरसाया है, मैं नांदेड़ की धरती का, नांदेड़ के लोगों का, इस पूरे क्षेत्र के लोगों का सर झुकाकर आभार व्यक्त करता हूं।

मेरे साथ बोलिए,
भारत माता की जय,
भारत माता की जय,
दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए...
भारत माता की जय,
भारत माता की जय,
भारत माता की जय।
बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Text of PM’s address during inauguration of the Swami Vivekananda Cultural Youth Centre-Viveka Smaraka in Mysuru
August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।