If the BJP forms the Govt, there will be a different Bundelkhand Vikas Board directly monitored by the Chief Minister's Office: PM Modi
SP and BSP are sworn enemies. When one says something, the other party says the opposite: PM
In Uttar Pradesh law and order situation is a disaster. This must change: PM
BJP Government would make sure that the youth of Uttar Pradesh get jobs in the state itself: PM

भारत माता की जय। भारत माता की जय। मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश के महामंत्री श्रीमान विजय बहादुर पाठक जी, श्रीमान स्वतंत्र देव सिंह, श्रीमान मानवेंद्र सिंह जी, श्रीमान नरोत्म मिश्र जी, संसद में मेरे साथी श्री भानू प्रताप वर्मा जी, प्रदेश के उपाध्यक्ष श्रीमान बाबूराम निषाद जी, जालौन जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल जी, श्रीमान आनंद राजपाल जी, श्रीमान नागेंद्र गुप्ता जी, श्रीमान हर्द्वार दुबे जी, श्रीमान चंद्रभान राय जी, श्रीमान अनिल बहुगुणा जी और इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार माधवगढ़ से श्रीमान मूलचंद निरंजन जी, राठ से श्रीमती मनीषा अनुरागी जी, ओरई से श्रीमान गौरीशंकर वर्मा जी, काल्पी से श्रीमान नरेंद्र सिंह जादोन जी और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

सब जनन को राम-राम।...कायो कैसे हो ...। सपा, बसपा, कांग्रेस की सरकार ने, बुंदेलखंड में सब कुछ तबाह हो गयो। ...का मैं सही कह रयो हो कि नहीं कह रयो हो ...। तो मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय। भारत माता की जय।

भाइयों-बहनों।

बहुत वर्षों के बाद मुझे आपके बीच आने का सौभाग्य मिला है। 1992 में जब कन्याकुमारी से कश्मीर की एकता यात्रा लेकर के चला था, तब मुझे इस क्षेत्र में आने का सौभाग्य मिला था। बीच में बुंदेलखंड के अलग-अलग इलाकों में जाने का मौका मिला, लेकिन ओरई में आने का बहुत दिनों बाद सौभाग्य मिला है।

भाइयों-बहनों।

आप इतनी बड़ी तादाद में आकर के भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों को, भारतीय जनता पार्टी को और मुझे आशीर्वाद देने के लिए आए हैं। मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

भाइयों-बहनों।

ये चुनाव किसकी सरकार बने या किसकी न बने, इतना सीमित उद्देश्य के लिए ये चुनाव नहीं है। ये चुनाव कौन मंत्री बने, कौन मुख्यमंत्री बने, कौन विधायक बने और कौन न बने, सिर्फ उसका फैसला करने के लिए नहीं है। बुंदेलखंड के लिए ये चुनाव एक बहुत बड़ा फैसला है। बुंदेलखंड को तय करना है कि ये सपा, बसपा के चक्कर से निकलना है कि नहीं निकलना है। ये सपा-बसपा ने जो मुसीबतें डाली हुई हैं, उस मुसीबतों से बाहर आना है कि नहीं आना है। पूरे हिंदुस्तान में उत्तर प्रदेश की हालत खराब है। उत्तप्रदेश में भी सबसे बुरा हाल अगर किसी का है तो ये बुंदेलखंड का है भाइयों। ...और ये इसलिए नहीं है कि बुंदेलखंड के लोगों में दम नहीं है। ये इसलिए नहीं है कि बुंदेलखंड की मिट्टी में ताकत नहीं है। ये इसलिए नहीं है कि बुंदेलखंड के पानी में ऊर्जा नहीं है।

 

भाइयों-बहनों।

परमात्मा ने सब कुछ दिया है, लेकिन दुर्भाग्य से आपने उत्तर प्रदेश में ऐसी सरकारें बनाई हैं जिन सरकारों ने, उन नेताओं ने, उन मंत्रियों ने, उन मुख्यमंत्रियों ने, उन विधायकों ने आपको तबाह करके रखा हुआ है भाइयों। ...और इसलिए सपा हो, बसपा हो, कांग्रेस हो ये सभी एक ही सिक्के के अलग-अलह पहलु हैं। एक ही चट्टे-बट्टे के लोग हैं। ...और इसलिए भाइयों और बहनों। अब बुंदेलखंड को किसी की बात मानने की जरूरत नहीं है। मेरी भी मत मानिए, आप अपने आत्मा से पूछो कि क्या आपके साथ अन्याय हुआ है कि नहीं हुआ है। आपको उपेक्षित रखा गया कि नहीं रखा गया। आपके हकों को छीना गया है कि नहीं छीना गया। क्या भाइयों-बहनों। आपके साथ हर पांच साल, जो भी आया, आपको लूटता रहा, आपकी गिनती ही नहीं, उनको तो लगता है कहीं और से सीटें ले आएंगे, यहां के लोग कहां जाएंगे, उनको तो दबोच के रख देंगे।

भाइयो-बहनों।

भारतीय जनता पार्टी आपको वादा करती है, भारतीय जनता पार्टी आपको वादा करती है कि अब उत्तर प्रदेश में जो सरकार बनेगी, उसमें बुंदेलखंड की आवाज को सुनने की व्यवस्था होगी भाइयों। उनकी समस्याओं की समाधान के लिए, योजनाओं को लागू करने के लिए विशेष प्रावधान किया जाएगा। ...और इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद एक स्वतंत्र बुंदेलखंड विकास बोर्ड बनाया जाएगा और मुख्यमंत्री के दफ्तर में ही उसकी निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। वीकली उसका हिसाब मांगा जाएगा, साप्ताहिक रूप से हिसाब मांगा जाएगा।

भाइयों-बहनों।

ये बसपा पार्टी, आप मुझे बताइए। आज ये बसपा पार्टी कहां से कहां पहुंच गई। आपको मालूम है जब 8 नवंबर रात को 8 बजे टीवी पर आकर के मैंने कहा कि बड़े-बड़े लोगों ने जो गरीबों को लूटा है, वो हजार की नोट हो या पांच सौ की, उनको गरीबों को लौटानी पड़ेगी। ये सपा और बसपा, एक-दूसरे की जानी-दुश्मन है कि नहीं है ...। सपा एक कहे तो बसपा दूसरा कहे कि न कहे ...। सपा कहे सुबह है तो बसपा कहे रात है। ऐसा है कि नहीं है ...। सपा कहे पूरब जाएंगे तो बसपा कहे पश्चिम जाएंगे। ऐसा है कि नहीं है ...। एक-दूसरे के घोर विरोधी हैं कि नही हैं ...। लेकिन मैं हैरान था जब मैंने, जब मैंने नोटबंदी की, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई छेड़ी, कालेधन वालों का हिसाब मांगा तो सपा, बसपा, कांग्रेस सब इकट्ठे हो गए। ...और सबके सब एक ही भाषा बोलने लग गए, और इन नेताओं ने तो क्या कहा। बहनजी ने तो कहा, कि पूरी तैयारी नहीं की थी, सरकार ने नहीं की थी कि आपने नहीं की थी ...। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह दे देते तो फिर हमारा बहुत विरोध नहीं था। ये सप्ताह किसके लिए भाई। ये बीच में सप्ताह की क्या जरूरत थी ...। मुलायम सिंह ने भी यही कहा, अरे भाई पहले घोषणा करनी चाहिए थी, लोगों को तैयारी का मौका देना चाहिए था, और उसके बाद लागू करना चाहिए था। अगर उसके बाद लागू करता, तो ये नोटें बैंक में आती क्या ...। आती क्या ...। पूरा खेल खत्म हो जाता कि नहीं हो जाता ...। लूटने वाले लूटकर चले जाते कि नहीं चले जाते ...। उनको नोटबंदी से ज्यादा परेशानी इस बात की है कि तैयारी करने का मौका नहीं मिला।

भाइयों-बहनों।

...और रातों-रात बैंकों में दनादन पैसे जमा होने लगे, और फिर चिल्लाने लगे कि चुनाव आता है, तभी मेरे भाई का हिसाब क्यों खोला जाता है, चुनाव आता है। तभी बीएसपी ने सौ करोड़ रुपया जमा किया तो उसकी चर्चा क्यों हो रही है। अरे बहनजी ...। चुनाव आया इसलिए चर्चा नहीं हो रही है, आपने नोटबंदी के बाद अभी-अभी जमा किया, इसीलिए चर्चा हो रही है। भाइयों-बहनों। अब तो बीएसपी का नाम ही बदल गया है, अब वो बहुजन समाज पार्टी नहीं रही है, बहुजन तो सिर्फ बहनजी में सिमट गया, अक्षर वही है जगह बदल गई। अब वो बहुजन, बहनजी बन गया, और पूरी पार्टी बहनजी संपत्ति पार्टी बन गई। आप मुझे बताइए। जो अपने लिए धन जमा करते हैं, वो कभी आपका भला करेंगे क्या ...। आपकी समास्याओं का समाधान करेंगे क्या ...।

...और इसलिए भाइयो-बहनों।

सपा हो, बसपा हो, कांग्रेस हो, इनको आपने देख लिया है, परख लिया है। 70 साल के बाद भी पीने का पानी तक नहीं दे पाए, क्या उनके भरोसे आगे भी आपकी गाड़ी चलेगी क्या ...। हिम्मत के साथ सपा, बसपा कांग्रेस को पूरे बुंदेलखंड में से चुन-चुन के साफ कर दीजिए भाइयों और बहनों। उनको ऐसी सजा दीजिए, ऐसी सजा दीजिए कि दोबारा, ये बुंदेलखंड को टेकेन फॉर ग्रांटेड मानते हैं ना, ये तो हमारी जेब में है जाएगा कहां। ये जो सोच करके बैठे हैं ना, वो ठिकाने पर आ जाएंगे, लाइन में लग जाएंगे भाइयों।

...और इसलिए भाइयों-बहनों।

मैं आज बुंदेलखंडवासियों से यह आग्रह करने आया हूं। 70 साल में बुंदेलखंड की जो बर्बादी हुई है, वो पांच साल में अगर ठीक करना है, यहां इतना बड़ा गड्ढा है, इतना बड़ा गड्ढा है कि बुंदेलखंड को उस गड्ढे में से बाहर निकालना है, न तो अकेले लखनऊ का इंजन काम नहीं आएगा। अकेले दिल्ली का इंजन भी काम नहीं आएगा, बुंदेलखंड को इन मुसीबतों के गड्ढे से बाहर निकालना है तो उत्तरप्रदेश में लखनऊ में भी बीजेपी का इंजन लगाना पड़ेगा और दिल्ली में भाजपा के प्रधानमंत्री का भी इंजन लगाना पड़ेगा, तब जाके बाहर आएगा भाइयों।

...और इसलिए भाइयों-बहनों।

मैं आपको विश्वास दिलाने आया हूं, मैं आपको विश्वास दिलाने आया हूं जिस भूमि पर इतनी नदियां हो, इतना नीर हो, इतने मेहनतकश लोग हों, यहां का भाग्य, यहां की एक-एक इंच धरती में अमूल्य खनिज पैदा होती है। इतनी ताकत पड़ी है साहब। ...लेकिन भाइयों-बहनों। यहां यदि सबसे बड़ा उद्योग पनपा है तो वो क्या उद्योग पनपा है ...। अवैध खनन, यही उद्योग, लखनऊ से नेता यहां आते क्यों हैं? सिर्फ अवैध खनन के ठेकेदारों को तकलीफ न हो इसीलिए आते हैं। ये अवैध खनन रूकना चाहिए कि नहीं रूकना चाहिए ...। ये आपकी संपत्ति लूटी जा रही है वो बंद होनी चाहिए कि नहीं चाहिए ...। भाइयों-बहनों। कितना मूल्यवान खनन की संपत्ति को लूटा जा रहा है और इसलिए भाइयों-बहनों हम एक स्पेशल स्क्वॉड बनाना चाहते हैं जिसकी निगरानी में ये अवैध खनन के कारोबार को नेस्तानाबूद कर दिया जाएगा। हम टेक्नोलोजी का उपयोग करना चाहते हैं, अब ये आपने देखा होगा हिन्दुस्तान के वैज्ञानिकों ने 104 सैटेलाइट एकसाथ आसमान में छोड़कर के दुनिया को चकित कर दिया।

भाइयों-बहनों।

ये सैटेलाइट, इसका उपयोग बुंदेलखंड के लिए हो सकता है कि नहीं हो सकता है ...। हो सकता है। ये जो सैटेलाइट है उसके द्वारा, कौन सी खदान कहां पर है, उसकी बाउंडरी कितनी है, सीमा कितनी है। हर दिन उसमें से क्या बदलाव हुआ, कितनी खुदाई हुई, ये सारा सैटेलाइट से नापा जा सकता है। भाइयों-बहनों। बुंदेलखंड के ये भू-संपदा को बचाने के लिए हम सैटेलाइट टेक्नोलोजी का उपयोग करेंगे। चौबीसों घंटा पर उस पर निरीक्षण सैटेलाइट से होगा और अवैध रूप से कोई खनन करेगा तो समझ लीजिए उसका ठेका भी गया और वो भी गया। ये बुंदेलखंड के लोग उनको पूछो, किसी भी बुंदेलखंड वाले को पूछो, क्या करते हो भई तो चार में से एक तो ऐसा ही कहेगा, मैं ठेकेदार हूं। न उद्योग है, न धंधा है, न कारोबार है, फिर भी वो ठेकेदार है किसका ...। वो जनता-जनार्दन या अपने पसीने से काम करने की ठेकेदारी नहीं कर रहा है, लखनऊ में बैठे हुए लोगों का ठेकेदार बनके उनके इरादों को पूरा करने का पाप करता है।

...और इसलिए भाइयों-बहनों।

ये बुंदेलखंड को इन संकटों से बाहर निकालना है। आप मुझे बताइए भाइयों-बहनों। आज हमारा यूपी गरीब से गरीब मां-बाप भी, गरीब से गरीब मां-बाप को भी पूछोगे कि आपकी क्या इच्छा है? गरीब से गरीब मां-बाप कहेगा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी है। गरीब से गरीब मां-बाप, उसकी यही इच्छा है कि चलो हमारी जिंदगी तो गई, अब बुढ़ापा गुजार लेंगे लेकिन बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल जाए ताकि उनकी जिंदगी बदल जाए। मैं उत्तर प्रदेश की सरकार को पूछना चाहता हूं। क्या कारण है कि प्राथमिक शिक्षा में हिंदुस्तान के पहले बीस राज्यों में उत्तर प्रदेश का नाम नहीं है? मेरे भाइयों-बहनों। तो इन बच्चों के भविष्य का क्या होगा और बुंदेलखंड में तो इससे भी बुरे हाल इन्होंने कर के रखा है। अगर बच्चों की पढ़ाई, ये उनकी चिंता का विषय नहीं है तो आने वाला उत्तर प्रदेश कैसा होगा? आने वाला मेरा बुंदेलखंड कैसा होगा? हर गरीब परिवार का हाल क्या होगा? ये भाइयों-बहनों, हमें इस चुनाव में गंभीरता से सोचना पड़ेगा।

भाइयों-बहनों।

हमारे देश में प्रति व्यक्ति आय ऐवरेज, औसत कितनी कमाई करता है एक व्यक्ति। आज मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि हिंदुस्तान का सबसे बड़ा राज्य, ये प्रति व्यक्ति आय में भी पहले बीस राज्यों में उसका नामो-निशान नहीं है। गरीबी घर-घर अपने पैर जमा करके बैठ गई है भाइयों। ...और उसका कारण यहां पर भ्रष्टाचार, कुशाषण इन्हीं लोगों की ऐसी जुगलबंदी है कि जिसने हर घर में गरीबी की जड़ें जमा करके रखी हुई हैं। उन गरीबी से हर परिवार को बाहर लाना है।

...और इसलिए भाइयों-बहनों।

सपा, बसपा, कांग्रेस के चक्कर से निकलना पड़ेगा मेरे भाइयों-बहनों। मैंने एक सभा में कहा था कि भाजपा की लड़ाई स्कैम के खिलाफ है, स्कैम के खिलाफ। तूफान मच गया तूफान। मैंने कहा, स्कैम के खिलाफ लड़ाई है, स्कैम मतलब घोटाले। अंग्रेजी में स्कैम बोलते हैं और स्कैम में चार अक्षर होते हैं एस सी ए एम। और इसलिए मैंने कहा स्कैम का मतलब है एस-समाजवादी, सी-कांग्रेस, ए-अखिलेश, एम-मायावती। इस देश में घोटालों में भी ईमानदारी देखने वाले, घोटालों में भी सेवा का भाव देखने वाले एक नेता को ये भी समझ नहीं आया कि मोदी का जवाब कैसे देना चाहिए। उन्होंने हड़बड़ी में कह दिया कि स्कैम मतलब हमारे यहां तो एस का सेवा होता है। बताओ, अब जिनके लिए स्कैम अगर ये सेवा है तो आपको ऐसी सेवा चाहिए क्या ...। ऐसी सेवा चाहिए क्या ...। ऐसा स्कैम जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए ...।

भाइयों-बहनों।

ये चुनाव में आपको मौका है। स्कैम को उत्तरप्रदेश से पूरी तरह निकालने का, बुंदेलखंड से पूरी तरह से निकालने का, आपको एक मौका है और इसलिए भाइयों-बहनों। आज अगर उत्तरप्रदेश में तीन चरण के चुनाव पूरे हो गए। मैं इन तीन चरण के लिए उत्तर प्रदेश की जनता को बधाई देता हूं, इलेक्शन को भी बधाई देता हूं कि शांतिपूर्ण रूप से उन्होंने मतदान करवाया है। लोगों ने भी बढ़-चढ़ के, बड़े उत्साह के साथ मतदान किया है और भाइयों-बहनों तीन चरण के मतदान से साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी की उत्तरप्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाना तय हो गया है ...। आने वाले जो दौर बाकी हैं, उनको तो तय करना है कि अब सरकार बन ही जा रही है तो हम पीछे क्यों रह जाएं, बस इतना ही फैसला कर लेना है, जुड़ जाना है, मजबूती के साथ सरकार बनाना है और अपने सपनों का उत्तर प्रदेश निर्णाण करके रहना है, बुंदेलखंड को समस्याओं से मुक्त करके रहना है।

...और इसलिए भाइयों-बहनों।

यह चुनाव विकास के लिए चुनाव है। आप मुझे बताइए भाइयों-बहनों। यहां कानून-व्यवस्था ठीक है क्या ...। पूरी ताकत से बोलिए। ठीक है क्या ...। आप के साथ कोई जबर्दस्ती हो जाए, अन्याय हो जाए तो थाने में आपको न्याय मिलने की आशा है क्या ...। थाने में आपकी शिकायत सुनी जाएगी क्या ...। सरकार में कोई आपकी बात सुनेगा क्या ...।

भाइयों-बहनों। न्याय होना वो तो बाद का विषय है, अरे पहले कम से कम गरीब की, पीड़ित की, दुखी की सुनवाई तो होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए ...। आखिर सरकार किसके लिए होती है ...। क्या सरकार अमीरों के लिए होती है ...। सरकार बाहुबलियों के लिए होती है ...। सरकार मुट्ठीभर नेताओं के लिए होती है ...। सरकार लोगों को लूटने वालों के लिए होती है ...। अगर सरकार होती है तो गरीबों के लिए होती है, सरकार का काम गरीबों की भलाई करना होता है। लेकिन भाइयों-बहनों। बुंदेलखंड में, उत्तरप्रदेश में सरकार मुट्ठीभर लोगों ने दबोच करके रखा है और यहां के थाने, जब सपा की सरकार का कार्यालय बन जाता है। बसपा की सरकार हो थाना बसपा का कार्यालय बन जाता है। अरे थाने को थाना रहना चाहिए कि नहीं रहना चाहिए ...। थाने में सुनवाई होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए ...। गुनहगारों को पकड़ना कि नहीं पकड़ना चाहिए ...। उनके ऊपर केस दर्ज होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए ...। मां-बहनों की सुरक्षा होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए ...।

आप मुझे बताइए भाइयों-बहनों।

यहां पर गांव के जो गरीब लोग हैं, निर्दोष लोग हैं, उनकी जमीनों को ये बाहुबली लोग गैर-कानूनी कब्जा कर लेते हैं कि नहीं कर लेते ...। हड़प कर लेते हैं कि नहीं कर लेते ...। आप मुझे बताइए हड़प कर लेते हैं कि नहीं कर लेते हैं ...। भाइयों-बहनों जो आपकी जमीन हड़प करते हैं, जो आपके मकानों पर कब्जा कर लेते हैं, मैं बुंदेलखंडवासियों को वादा करने आया हूं कि उत्तप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद ये गैर-कानूनी कब्जा करने वाले लोग हैं, उनके खिलाफ एक बहुत बड़ी मुहिम चलाई जाएगी। एक स्पेशल सेल बनाया जाएगा। जो मालिक है उसको, वो लौटाया जाएगा और हड़प करने वालों को, सलाखों के पीछे जगह बना दी जाएगी भाइयों-बहनों। ये सब संभव है। भाइयों कुछ लोग तो मान के बैठे हैं कि भई बुंदेलखंड का तो हाल ऐसा है कि यहां कुछ हो ही नहीं सकता। क्या ये सच्चाई है क्या ...। ये सच्चाई है क्या ...। मैं आपको उदाहरण देता हूं भाइयों। और आप विश्वास कीजिए। पूरे उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड को नंबर एक बनाया जा सकता है। एक नंबर बनाया जा सकता है।  आपको मैं मेरा अनुभव बताता हूं, मैं गुजरात में मुख्यमंत्री था, कई वर्षों तक मुझे मुख्यमंत्री के नाते सेवा करने का मौका मिला। गुजरात में एक जिला है कच्छ और वहां भी एक बहुत बड़ा रेगिस्तान है, और रेगिस्तान के उस पार पाकिस्तान है, ऐसा वो जिला है, आज से बीस साल पहले अगर किसी सरकारी मुलाजिम की कच्छ में ट्रांसफर होती थी तो वो ये मानता था कि मेरी काले पानी की सजा हुई है। ...और कच्छ में, हिंदुस्तान में सब जगह पे जनसंख्या वृद्धि होती थी लेकिन कच्छ जिला ऐसा था कि जहां जनसंख्या कम होती जा रही थी। क्योंकि वहां पानी नहीं था, खेती नहीं थी, रेगिस्तान था, उद्योग नहीं था। सब लोग छोड़-छोड़के चले जाते थे। 2001 में भूकंप आया भूकंप के बाद हमने काम शुरू किया।

भाइयों-बहनों।

जो जिला हिंदुस्तान के सबसे पिछड़े जिलों में जिसका नाम था आज हिंदुस्तान के, सिर्फ गुजरात के नहीं, हिंदुस्तान के सबसे तेज गति से आगे जाने वाले जिलों में उसका नाम दर्ज हो गया है भाइयों-बहनों। ये मेरे बुंदेलखंड के भी कई नौजवान कच्छ के अंदर रोजी-रोटी कमा रहे हैं, कच्छ तक गए हैं वो, भाइयों-बहनों अगर इरादा नेक हो, विकास करने की विजन साफ हो और करके रहने के लिए संकल्प शक्ति हो, तो ये मेरा बुंदेलखंड भी आगे बढ़ सकता है। भाइयों-बहनों। आज पूरे उत्तर प्रदेश में अगर किसानों का सबसे ज्यादा बुरा हाल हो तो कहां पर है ...। कहां पर है ...। बुंदेलखंड में है कि नहीं है ...। है कि नहीं है ...।

भाइयों-बहनों।

मैं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को अभिनंदन करता हूं कि बीजेपी के नेताओं ने, उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की इकाई ने एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण फैसला किया है और ये महत्वपूर्ण फैसला है किसानों की कर्ज माफी का ...। भाइयों-बहनों। मैं उत्तर प्रदेश का सांसद हूं, उत्तर प्रदेश ने मुझे सांसद बनने का सौभाग्य दिया है और उत्तर प्रदेश ने मुझे इतना भारी बहुमत दिया। बुंदेलखंड ने भी इतनी मदद कर दी कि भाइयों-बहनों। मुझे प्रधानमंत्री बनने का भी सौभाग्य आपने दिया। मैं आज उत्तर प्रदेश के सांसद के नाते बुंदेलखंड के किसान भाइयों को विश्वास दिलाना चाहता हूं। 11 मार्च को चुनाव के नतीजे आएंगे, दो-चार दिन में सरकार गठित हो जाएगी। सरकार की पहली कैबिनेट की मीटिंग होगी। यूपी के सांसद के नाते मैं जिम्मेवारी लेता हूं कि पहली ही मीटिंग में ही किसानों की कर्ज माफी का फैसला हो जाएगा।

भाइयों-बहनों

हमारे किसान, यहां पर सबसे बड़ी मुसीबत है अन्नप्रथा की, किसान परेशान है अन्नप्रथा के कारण, है कि नहीं है ...। क्या उसका कोई उपाय नहीं है ...। उपाय है ...। भाइयों-बहनों। मैंने ऐसे-ऐसे एनजीओ के साथ काम किया हुआ है, जो गाय दूध नहीं देती है। उस गाय को भी उस प्रकार से रखरखाव किया जा सकता है कि हर साल चालीस हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई दे सकती है गाय। चालीस हजार रुपये की कमाई। भाइयों-बहनों। भारतीय जनता पार्टी की सरकार विशेषकर बुंदेलखंड में ये जो अन्नप्रथा के कारण मेरे किसान परेशान है, उन पशुओं से भी किस प्रकार से खाद मिले, उन खाद की कैसे बिक्री हो, उसमें से कमाई कैसे हो, उसमें से उन पशुओं का पालन कैसे हो, और उसमें से किसान को भी मुनाफा कैसे हो, उसकी एक पूरी व्यवस्था बना दी जाएगी। मेरा किसान भी बच जाएगा, मेरा पशु भी बच जाएगा, ऊपर से किसान के घर में पशु पालक के घर में, कमाई में भी बढ़ोत्तरी हो जाएगी। ये सब संभव है भाइयों, ये मुश्किल नहीं है। ...लेकिन भाइयों-बहनों। उनको इन कामों को करना नहीं है। ...और इसलिए भाइयों-बहनों। आप मुझे बताइए बुंदेलखंड में हमलोगों ने एक अटल जी का सपना था, रिवर ग्रीड का, नदियों को जोड़ने का, केन-बेतवा को जोड़ने का हमने बीड़ा उठाया है। इस केन-बेतबा के द्वारा कुछ लोगों को लगता है कि मेरे यहां पानी पहुंचेगा कि नहीं पहुंचेगा। लेकिन भाइयों-बहनों विज्ञान कहता है कि अगर केन-बेतबा जोड़ दी गई और पानी जमीन में जाना शुरू हो गया तो पूरे बुंदेलखंड में जब पानी बहुत नीचे गया है, तो पानी ऊपर आना शुरू हो जाएगा। हर कोने में किसान को इसका लाभ होगा, इतना बड़ा फायदा होगा और इसलिए भाइयों-बहनों पूरे बुंदेलखंड को इस जमीन को सजल बनाना, ये जमीन पानी की ताकत लाना, ये बड़ा फैसला हम बुंदेलखंड में करके दिखाना चाहते हैं भाइयों-बहनों।

भाइयों-बहनों।

बुंदेलखंड में आप मुझे बताइए। हमारे देश में खाद के दाम, फर्टीलाइजर के दाम, यूरिया की स्थिति, भाइयों-बहनों दो साल पहले किसान को, पहले समय पर यूरिया मिलता था क्या ...। जितना चाहिए उतना यूरिया मिलता था क्या ...। जब चाहे उतना यूरिया मिलता था क्या ...। जहां से चाहे वहां से यूरिया मिलता था क्या ...। यूरिया के लिए लाइन, कतार लगानी पड़ती थी कि नहीं पड़ती थी ...। कभी-कभी पुलिस वाले आकर के डंडे मारते थे कि नहीं मारते थे ...। यूरिया ब्लैक में खरीदना पड़ता था कि नहीं ...। कालेबाजारी में लाना पड़ता था कि नहीं, भाइयों-बहनों दो साल हो गए, दो साल में हिंदुस्तान में कहीं पर भी एक भी किसान ने, एक भी सरकार ने यूरिया के लिए शिकायत नहीं की है। ये कैसे कैसे हुआ ...। कैसे हुआ ...। कैसे हुआ भाइयों ...। भाइयों-बहनों इसलिए हुआ कि हमने जहां-जहां चोरी होती थी न वहां स्क्रू टाइट कर दिए हैं। ऐसे स्क्रू टाइट कर दिए, ऐसे स्क्रू टाइट कर दिए कि चोरी के रास्ते ही बंद हो गए। पहले यूरिया की क्यों चोरी होती थी ...। यूरिया कारखाने से निकलता था और कारखाने से निकलने के बाद खेत में जाना चाहिए ...। खेत में नहीं जाता था वो केमिकल वालों की फैक्ट्री में चोरी-छिपे चला जाता था और केमिकल फैक्ट्री वालों के लिए वो रॉ मैटेरियल के नाते उपयोग आता था। वो उसका उपयोग करके और चीजें बनाकरके बड़े दामों में दुनिया के बाजारों में बेचते थे। किसान के नसीब में नहीं आता था। हमने एक महत्वपूर्ण काम किया, हमने क्या किया? यूरिया का नीम कोटिंग कर दिया। ये नीम कोटिंग बहुत बड़ा विज्ञान नहीं है भई। किसी को लगता होगा नीम कोटिंग शब्द, पता नहीं मोदी ने क्या किया होगा? बड़ा सिंपल है, गांवों में गरीब माताओं-बहनों को कहा कि जो नीम का पेड़ है, उसकी जो फली है वो जरा इकट्ठी कीजिए, हम आपको पैसे देंगे। लोगों ने नीम की फली इकट्ठी करने लगी माताएं-बहनें, हमने उस नीम की फली का तेल निकाला? ...और उस तेल को यूरिया में मिक्स कर दिया। और उसके कारण अब वो यूरिया, मुट्ठीभर यूरिया भी खेत के सिवाय कहीं काम नहीं आ सकता है और इसलिए जितना यूरिया होता था वो अब खेत में जाने लगा और फायदा ये हुआ कि पहले यूरिया से जो आय होती थी, पैदावार होती थी, नीम कोटिंग यूरिया के कारण धान में पांच पर्सेंट से पंद्रह पर्सेंट वृद्धि हो गई। किसान का मुनाफा हो गया ये काम हमने करके दिखाया है।

भाइयों-बहनों।

हमारे देश में एक बार दाम बढ़ते हैं। उसके बाद कभी कम नहीं होते। डीएपी, भाइयों-बहनों एक बार जब चौधरी चरण सिंह जी प्रधानमंत्री थे। एक बार खाद की कीमत कम हुई थी, बाकी इतनी सरकारें आई, इतने प्रधानमंत्री आए कभी कम नहीं हुई। हमने आकर के पहली बार भाइयों-बहनों। डीएपी, डीएपी में तीन हजार आठ सौ रुपया, उसका प्रति टन मूल्य हमने कम कर दिया। इसके कारण किसान को पचास किलो ग्राम के बोरे में दो सौ रुपये का फायदा हो गया, दो सौ रुपये का। एमओपी, किसान को पचास किलो के बोरे में ढाई सौ रुपये का फायदा हो गया। मिश्रित खाद एनपीए भाइयों-बहनों। हर टन पे एक हजार रुपये का फायदा हो गया। ये किसानों के लिए काम करने वाली आपने दिल्ली में सरकार बिठाई है, उत्तर प्रदेश में भी बिठाइए। आप देखिए कि किसानों के जीवन में हम बदलाव लाते हैं कि नहीं लाते हैं।

भाइयों-बहनों।

जैसे मैंने कहा हम विकास के चार मंत्र लेकर के चल रहे हैं, किसान को सिंचाई मिले, बालकों को पढ़ाई मिले, युवकों को कमाई मिले और बुजुर्गों को दवाई मिले। किसान को सिंचाई, बालक को पढ़ाई, युवा को कमाई, बुजुर्गों को दवाई, लेकिन भाइयों-बहनों आप मुझे बताइए। ये दवाई, बीमार पड़ना महंगा हो गया कि नहीं हो गया ...। गरीब के घर में कोई एक बीमार हो जाए तो उसकी जिंदगी भर की कमाई तबाह हो जाती है। दवाई महंगी है कि नहीं है ...। आपने मुझे प्रधानमंत्री बनाया, मैंने तय किया कि गरीब को ये महंगी दवाई से मुक्ति दिलानी चाहिए। सात सौ दवाइयां हमने ऐसी निकाली जो कैंसर में काम आती हो, डायबिटिज में काम आती है, हार्ट अटैक में काम आती हो, और जो दवाई तीस-तीस हजार रुपये में बिकती थी, उसकी कीमत ढाई हजार-तीन हजार कर दी भाइयों। जो दवाई अस्सी रुपये में बेचती उस दवाई को मैंने बारह रुपये में लाकर खड़ा कर दिया। मुझे बताइए। गरीब को सस्ते में दवाई मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए ...। ये हमने करके दिखाया है।

भाइयों-बहनों।

आज मेहनतकश आदमी के जीवन में भी हृदय रोग की बीमारी आ जाती है, अचानक दिल का दौड़ा पड़ जाता है। बेचारे भागे-भागे परिवार के लोग डॉक्टर के पास जाते हैं, और डॉक्टर भी, हमलोगों को मालूम तो है नहीं अंदर क्या बिगड़ा है, दिखता तो है नहीं, वो कहता है स्टेंट लगाना पड़ेगा, स्टेंट। उत्तरप्रदेश के लोग कहते हैं छल्ला लगाना पड़ेगा छल्ला, हार्ट की जो नली है, नली के अंदर एक और पाइप रखकर के उसको खोलना पड़ेगा, और फिर वो अंदर ले जाते और कहते हैं, देखो ये छल्ला लगवाओगे तो पैतालीस हजार रुपया होगा, लेकिन पांच-दस साल से ज्यादा जिंदा नहीं रहेगा। ये छल्ला लगवाओगे तो ये विदेश का है डेढ़ लाख रुपये का खर्चा होगा, लेकिन जिंदगी में दोबारा तकलीफ नहीं होगी। तो गरीब आदमी को भी लगता है कि भाई जिंदा तो रहना है और इसलिए वो डेढ़ लाख का छल्ला लगवाने के लिए हां बोल रहा है। बेचारा मकान गिरवी रख देता है, जमीन गिरवी रख देता है, कर्ज कर देता है, बेटे की, बहू की, मां की तबीयत बचाने के लिए छल्ला लगवाने के लिए लाख-डेढ़ लाख खर्च कर देता है। मेरे मन में आया कि गरीब कैसे लाएगा डेढ़ लाख रुपया। मैंने छल्ला वालों को बुलाया, मैंने कहा इधर आओ, मैंने कहा बताओ तुम्हारा छल्ला बनाने में खर्च कितना होता है। पाई-पाई का मुझे खर्च बताओ, हिसाब बताओ, पूरी डीटेल बताओ, कहां से लाते हो, कैसे करते हो, मजदूरी कितनी लगती है, माल का खर्चा कितना लगता है, फैक्ट्री है। सब बताओ। दो साल से लगा हुआ था भाइयों-बहनों। दो साल से, आखिरकार कार मैंने उनको मजबूर कर दिया और जो पैतालीस हजार छल्ले के पैसे लूटते थे, सात हजार रुपये पर लाकर के रख दिया। जो डेढ़ लाख रुपये का छल्ला लगाते थे, उनको पच्चीस-सत्ताई हजार रुपये पर लाकर के रख दिया। बताइए भाइयों-बहनों। एक गरीब के लिए काम हुआ कि नहीं हुआ ...। गरीब की बीमारी में मदद करने का काम है कि नहीं है ...। छल्ला बनाने वाले क्या करेंगे ...। वो मोदी-मोदी करेंगे क्या ...। ये छल्ला बनाने वाले मोदी-मोदी करेंगे क्या ...। अब जिनके सारे दुकान पे ताले लग गए, उनके पैसे भी जो वो बेईमानी से लूटते थे बंद हो गया, अब वो मोदी के खिलाफ षड़यंत्र करेंगे कि नहीं करेंगे ...। करेंगे कि नहीं करेंगे ...। अरे भाइयों-बहनों जिन्होंने आपको लूटा है, कितने ही षड्यंत्र करें लेकिन आपकी रक्षा करने का मेरा रास्ता मैं कभी छोड़ने वाला नहीं हूं। क्योंकि आपने मुझे आशीर्वाद दिया है। आपने मुझे आशीर्वाद दिया है। गरीबों के लिए ही तो मुझे बिठाया है भाइयों।

भाइयों-बहनों।

गरीबी क्या होती है, ये देखने के लिए मुझे किसी झुग्गी-झोपड़ी में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। मैं गरीबी में पैदा हुआ हूं, मैं गरीबी पला हूं, मैं गरीबी में जीया हूं। गरीबी क्या होती है ये मेरे जेहन में पड़ा हुआ है। इसीलिए भाइयों-बहनों। ईश्वर ने जनता-जनार्दन ने मुझे, गरीबों के काम करने के लिए भेजा है, और इसीलिए मुझे गरीबों के लिए मुझे कुछ न कुछ करके रहना है भाइयों। भाइयों-बहनों। ये बुंदेलखंड नौजवानों को अपने ही जनपद में, बुंदेलखंड के नौजवानों को अपने ही जनपद में रोजी-रोटी मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए ...। पलायन बंद होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए ...। यहीं पर रोजगार के अवसर पैदा होने चाहिए कि नहीं होने चाहिए ...।

भाइयों-बहनों।

हमारा जालौन इलाका, काल्पी का उद्योग हो, सब बंद पड़ा है, हमीरपुर, जूतियों का कुटीर उद्योग, चांदी की मछली का काम, ये बंद पड़ा है, चित्रकूट में ग्लास की फैक्ट्री, भाइयों-बहनों ग्लास की फैक्ट्री देखी क्या आपने ...। उसमें से कोई ग्लास निकला क्या ...। किसी को रोजगार मिला क्या ...। आपके मालूम है ये ग्लास की नींव किसने डाली थी ...। मालूम है ...। भूल गए न ...। ये आप भूल जाते हैं न इसी का फायदा ये लोग उठाते हैं ...। आप भूल जाते हो, बताइए भूलोगे नहीं न ...। याद रखोगे ...। आपको मालूम है ...। ये कांग्रेस के नेता हैं न उनके पिताजी, हमारे देश के प्रधानमंत्री थे। उनका नाम था श्रीमान राजीव गांधी। 1988 में चित्रकूट में आकर के ग्लास की फैक्ट्री का शिलान्यास किया था। तीस साल होने आए।

भाइयों-बहनों।

न फैक्ट्री लगी, न ग्लास बना, न नौजवानों को रोजगार मिला। ऐसे लोगों पे भरोसा करोगे क्या ...। ऐसे लोगों पे भरोसा करोगे क्या ...। मैं सोच रहा था कि कांग्रेस-समाजवादी पार्टी की दोस्ती हुई कैसे ? भाइयों-बहनों। कारण बड़ा साफ-साफ है, कि ग्लास की फैक्ट्री लगने वाली नहीं तो भी शिलान्यास अगर राजीव गांधी कर सकते हैं, और अखिलेश जी मेट्रो नहीं है तो भी मेट्रो का उद्घाटन कर सकते हैं तो ऐसे लोगों की दोस्ती होना बड़ा स्वभाविक है। कौन-कौन मौसेरे भाई वाला खेल है भैया।

...और इसलिए भाइयों-बहनों।

बुंदेलखंड के सामने एक अवसर आया है। ऐसा मौका गवांइए मत। भाइयों-बहनों। इस चुनाव में बुंदेलखंड में एक भी सपा-बसपा-कांग्रेस का नमूना लखनऊ नहीं पहुंचना चाहिए। एक नमूने के तौर पर भी नहीं पहुंचना चाहिए। पूर्ण रूप से भारतीय जनता पार्टी को जीताइए। भाइयों-बहनों। बुंदेलखंड का एक हिस्सा मध्यप्रदेश में भी है। बुंदेलखंड का एक हिस्सा मध्यप्रदेश में भी है। भारत सरकार उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड को भी पैसे देती है। भारत सरकार मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड को भी पैसा देती है। उत्तरप्रदेश की सरकार बुंदेलखंड में पूरे पैसे भी खर्च नहीं कर पाती है, भारत सरकार के दिए हुए पैसे पड़े रहते हैं। मध्यप्रदेश बुंदेलखंड के लिए भारत सरकार ने जो पैसे दिए उसने अपने राज्य की तरफ से और जोड़के ज्यादा खर्च करके दिखाता है भाइयों-बहनों। उत्तरप्रदेश बुंदेलखंड का किसान पानी के लिए मरता है। मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड ने पानी का काम पूरा किया, गेहूं की बुआई बढ़ा दी। उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड में बुआई कम हो गई भाइयों। सरकार अच्छी हो तो पैसों का सदुपयोग कैसे होता है वो भारतीय जनता पार्टी की मध्यप्रदेश की सरकार ने मध्यप्रदेश वाले बुंदेलखंड में करके दिखाया है। अगर मध्यप्रदेश में हो सकता है तो उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड में हो सकता है कि नहीं हो सकता है ...। हो सकता है कि नहीं हो सकता है ...। हमें करना है भाइयों। हमें ये करके दिखाना है और आपकी आंखों के सामने पांच साल के भीतर-भीतर करके दिखाना है, और इसलिए हमें आपके आशीर्वाद चाहिए।

भाइयों-बहनों।

मैंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो लड़ाई छेड़ी है, कालेधन के खिलाफ जो लड़ाई छेड़ी है, पांच सौ और हजार की नोट पर पाबंदी लगाकर के अच्छों-अच्छों के रुपये बैंकों में जमा करने के लिए मजबूर कर दिया है। आपका आशीर्वाद है मुझपे ...। दोनों मुट्ठी बंद करके हाथ ऊपर करके मुझे बताइए। आपका आशीर्वाद है ...। आपका आशीर्वाद है ...। आपका आशीर्वाद है ...। ये लड़ाई आगे बढ़ाऊं ...। भ्रष्टाचार को खत्म करने में आगे बढ़ूं ...। कालेधन के खिलाफ लड़ाई चलाऊं ...। जिन्होंने गरीबों का लूटा है उसे लौटा करके वापस लाऊं ...। अरे इतने जनता-जनार्दन का आशीर्वाद है, ये होकर रहेगा भाइयों-बहनों। दोनों मुट्ठी बंद करके मेरे साथ बोलिए। भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय। बहुत-बहुत धन्यवाद भाइयों।

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Text of of PM Modi’s speech at public rally in Guwahati, Assam
February 14, 2026
This year’s Budget places strong emphasis on making the North East economically self-reliant: PM Modi in Assam
Assam will continue to move ahead on the path of peace, security and rapid development: PM Modi
The Congress, frustrated after being out of power for ten years, wants to push Assam back into instability: PM’s strong jibe at the opposition
In 70 years of Congress rule, only 3 bridges were built over the Brahmaputra; in the last 10 to 11 years, BJP NDA has completed 5 major bridges: PM in Assam rally

होकोलुके नमोस्कार जोनाइशु….

की खोबोर आपुनलुकोर?…

भाले आसे?…

जॉय आई अहोम..

जॉय आई अहोम…

जॉय आई अहोम !

मैं असम भारतीय जनता पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का हृदय से बहुत-बहुत अभिवादन करता हूं अभिनंदन करता हूं। बड़ी-बड़ी आमसभाएं करने का तो बहुत अवसर मिलता है, जनता-जनार्दन का दर्शन करना उन्हें संबोधित करना, ये लगातार चलता रहता है। लेकिन असम के बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं का दर्शन करना, ये मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है। आज भारतीय जनता पार्टी जहां पहुंची है उसका श्रेय उसकी क्रेडिट अगर किसी को मिलती है तो वो सिर्फ और सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं को मिलती है। हमारा विश्वास संगठन में है। हम राष्ट्र जीवन में परिवर्तन का आधार संगठन की शक्ति मानते हैं और इसलिए इतनी बड़ी तादाद में जमीन की जड़ों से जुड़े हुए कार्यकर्ताओं का दर्शन करना ये अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है। साथियों हमलोग एक ही मंत्र लेकर जीए हैं। हमलोग एक मंत्र को साकार करने के लिए अपने आप को खपा रहे हैं। और वो मंत्र है भारत माता की जय.. दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से मेरे साथ बोलिए भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की... वंदे...वंदे ... वंदे...

यहां इस विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में आए हुए भाजपा के हरेक कार्यकर्ता का हृदय से मैं स्वागत करता हूं अभिनंदन करता हूं। भाजपा में रहते हुए आपने मां भारती की सेवा को...जनता की सेवा को अपना धर्म बनाया है। आप सभी भाजपा कार्यकर्ता ही भाजपा की प्राणवायु है ऑक्सीजन है। भाजपा का कार्यकर्ता...परिश्रम की पराकाष्ठा करता है, और उसके कारण भारतीय जनता पार्टी आगे बढ़ती है। साथियों मैं गर्व से कहता हूं अगर मेरा सबसे बड़ा क्वालिफिकेशन है, मेरी सबसे बड़ी गौरवपूर्ण जीवन की बात है वो यही है कि नरेंद्र मोदी भाजपा का कार्यकर्ता है। और एक भाजपा कार्यकर्ता के तौर पर...मैं असम के अपने सभी कार्यकर्ता और भाइयों और बहनों को और संगठन की शक्ति को सर झुकाकर का नमन करता हूं।

साथियों,

मैं मां आदिशक्ति मां कामाख्या को भी कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं। मां कामाख्या की असम पर, असम वासियों पर बहुत कृपा रही है। उनके आशीर्वाद से असम ने, राष्ट्ररक्षा और देश की स्वतंत्रता, देश की संस्कृति को आगे बढ़ाने वाली अनेक संतानें दी हैं। ऐसी ही एक महान संतान, कविन्द्र पुरकायस्थ जी को मैं आज प्रणाम करता हूं। उन्होंने अपना पूरा जीवन असम और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। इसी योगदान को नमन करते हुए...बीजेपी-NDA सरकार को उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने का सौभाग्य मिला है। वर्ष 2014 के बाद, नॉर्थ ईस्ट के सवा सौ से अधिक महान व्यक्तित्वों को पदम् पुरस्कार मिले हैं। सवा सौ से अधिक... ये दिखाता है कि असम की धरती का, नॉर्थ ईस्ट की धरती का सामर्थ्य कितना बड़ा है। नॉर्थ ईस्ट का यही सामर्थ्य अब विकसित भारत का बहुत बड़ा आधार है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, देश का बजट आया है। बजट के बाद, असम का, नॉर्थ ईस्ट का मेरा ये पहला दौरा है। जिस नॉर्थ ईस्ट को कांग्रेस ने हमेशा नजरअंदाज किया...हम उस नॉर्थ ईस्ट की भक्ति भाव से सेवा कर रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए अष्टलक्ष्मी है। इस वर्ष का बजट... अष्टलक्ष्मी के लिए बीजेपी-NDA के विजन को और मजबूती देने वाला है। बजट में बहुत अधिक फोकस... नॉर्थ ईस्ट को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है। इस साल असम को टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में... लगभग पचास हज़ार करोड़ रुपए मिलने वाले हैं।

साथियों,

कांग्रेस सरकार के समय असम को कैसे पाई-पाई के लिए तरसा कर रखा जाता था... वो भी आपको याद रखना है। कांग्रेस के समय असम को टैक्स के हिस्से के रूप में सिर्फ 10 हजार करोड़ रुपए मिलते थे। अब भाजपा सरकार में असम को कांग्रेस सरकार के मुकाबले 5 गुना ज्यादा रुपए मिल रहे हैं। अगर मैं पिछले 11 वर्ष की बात करूं..तो असम को तमाम विकास परियोजनाओं के लिए....केंद्र सरकार से साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए से अधिक मिले हैं। ये आंकड़ा आपको याद रहेगा… मैं जो आंकड़ा बोल रहा हूं वो आपको याद रहेगा आपको… केंद्र सरकार से साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए से अधिक मिले हैं। कितने… कितने.. पीछे से आवाज आनी चाहिए कितने… आप मुझे बताइए...जो कांग्रेस, असम के विकास के लिए पैसे देने से भी बचती हो...वो कांग्रेस क्या असम का विकास कर सकती है? असम का विकास कर सकती है, असम का विकास कर सकती है। आपका भला कर सकती है। … यहां के युवाओं का भला कर सकती है… यहां के किसानों का भला कर सकती है? यहां के गांवों का भला कर सकती है?

साथियों,

इस साल के बजट में...नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूती देने का काम किया गया है। कनेक्टिविटी बढ़ती है, तो रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। इसलिए असम में हाइवे और अन्य रोड प्रोजेक्ट्स के लिए...करीब हज़ारों करोड़ रुपए देना तय हुआ है। बजट में जो घोषणा हुई है, उससे असम में टूरिज्म का भी विस्तार होगा। अभी आपने देखा होगा...परीक्षा पे चर्चा का कार्यक्रम गुवाहाटी में हुआ था। हमने ब्रह्मपुत्र नदी में क्रूज पर विद्यार्थियों से चर्चा की थी। आने वाले समय में ब्रह्मपुत्र पर ऐसे ही रिवर टूरिज्म को और बढ़ाया जाएगा। मैं ऐसे ही वहां नहीं गया था। मैं देश को बताना चाहता था कि टूरिज्म के लिए इससे बेहतर जगह नहीं है। आओ ये मेरा आसाम है, ये मेरी ब्रह्मपुत्र है, आइए.. इस बार के बजट में, इसके लिए भी व्यवस्था की गई है।

साथियों,

आज के दिन देश की नज़रें असम पर हैं... सबने देखा कि असम का, नॉर्थ ईस्ट का सामर्थ्य क्या है। थोड़ी देर पहले जब मैं वायुसेना के विमान से मोरान के हाईवे पर उतरा... रनवे पर नहीं, हाईवे पर विमान से उतरा, तो एक नया इतिहास बन गया। कभी नॉर्थ ईस्ट का नाम आते ही लोग सोचते थे… अरे यार छोड़ो.. टूटी फूटी सड़कें, कोई ठिकाना नहीं, निकलें तो पता नहीं कब पहुंचेंगे वो भी एक वक्त था, ये भी एक वक्त है। और आज यहां ऐसे हाईवे बनकर तैयार हो रहे हैं.. जहां सिर्फ गाड़ियां ही नहीं चलतीं… बल्कि हवाई जहाज भी लैंड करते हैं।

साथियों,

आप मुझे बता दीजिए आपके हाईवे पर विमान लैंड हो, ये आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ… गर्व हुआ कि नहीं हुआ… तो अब अपना मोबाइल निकालिए और अपना फ्लैश लाइट ऑन कीजिए आपको गर्व हुआ है ना....? मोबाइल फोन निकालिए और फ्लैश लाइट ऑन कीजिए सबके सब दूर-दूर तक ये गर्व का पल है ये असम का बदलता हुआ मिजाज है हाथ बढ़ाकर ऊपर कर के दिखाइए। आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ… गर्व से मन भर गया कि नहीं भर गया बोलिए भारत माता की…

साथियों,

असम का इतना विकास इसलिए हो रहा है... क्योंकि यहां आप सभी की मेहनत से बीजेपी सरकार बनी है... यहां के नागरिकों ने भाजपा पर भरोसा किया है। आपने मेरा बूथ-सबसे मजबूत … मेरा बूथ- सबसे मजबूत, मेरा बूथ- सबसे मजबूत, की भावना से बूथ बूथ जाकर, एक-एक परिवार को मिलकर, एक-एक मतदाता को मिलकर बीजेपी के हर समर्थक को अपने साथ जोड़ा उन्हें उनके वोट की ताकत का परिचय करवाया । और इस प्रयास से ही, असम में बीजेपी की सरकार बनी। असम के इसी आशीर्वाद के कारण, असम के नागरिकों के वोट के कारण.. यहां लाखों गरीबों के घर बने लाखों परिवारों में शौचालय की व्यवस्था हुई। पीने का साफ पानी उनके घर तक पहुंचा। आप मुझे बताइए… गरीबों को घर मिलता है तो पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है। गरीब के घर टॉयलेट बनता है तो पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है… गरीब के घर में पीने का पानी पहुंचता है तो पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है। इस पुण्य का हकदार कौन है…इस पुण्य का हकदार कौन है… इस पुण्य का हकदार कौन है… इस पुण्य का अधिकार भारतीय जनता पार्टी के बूथ का कार्यकर्ता है। गरीबों को आय़ुष्मान योजना का लाभ मिला, उन्हें सुरक्षा और आत्मविश्वास मिला... इसलिए... इस बार भी आपको ऐसे ही अपने बूथ पर एक-एक वोट पर ध्यान रखना है...रखोगे… अब और कुछ मत करो बस पूरी ताकत बूथ पर लगा दो.. आपका बूथ विजयी होगा...तो बीजेपी विजयी होगी कि नहीं होगी। आपको विजय पाना है तो कहां पाना है, बूथ में विजय पाना है।

साथियों,

आज देश को सिर्फ एक और इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप नहीं मिली है... ये इस बात का भी प्रमाण है कि नया भारत, अपनी सुरक्षा के लिए हर तरह से तैयार हो रहा है। आज का भारत ना सिर्फ अपनी सीमाओं को सशक्त कर रहा है, बल्कि देश के दुश्मनों को उनके घर में घुसकर जवाब भी देता है। साथियों, आज ही पुलवामा हमले की बरसी है। मैं इस हमले में जान गंवाने वाले मां भारती के वीर सपूतों को नमन करता हूं। इस आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह आतंकियों को सजा दी, वो पूरी दुनिया ने देखा है। और कुछ लोग तो आज भी कांप रहे हैं। अभी आपने भारत की ये शक्ति ऑपरेशन सिंदूर में भी देखी है। लेकिन साथियों, मैं आपसे जानना चाहता हूं... क्या कभी कांग्रेस से हम देशहित के लिए इतनी हिम्मत के साथ फैसले करने की ताकत थी क्या ? वो कर सकते थे क्या। वो ज्यादा से ज्यादा बयान दे सकते हैं। कुछ नहीं कर सकते। जो कांग्रेस भारत को राष्ट्र मानने से भी इनकार करती हो... जो सवाल करते हैं कि मां भारती क्या होती है, जो मां भारती के नाम तक से परहेज करती हो, जो मां भारती के प्रति जरा सा सम्मान तक नहीं दिखाते, वो कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती। इसलिए कांग्रेस ने कभी देश की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी। कांग्रेस की सरकारों के इसी नकारेपन से.... पूरा नॉर्थ ईस्ट, डर और असुरक्षा में जीता था। कांग्रेस ने हमेशा देश को खतरे में डा के रखा। कांग्रेस के समय में जब भी सेना के लिए हथियार खरीदे गए... उसका मतलब होता था- हजारों करोड़ का घोटाला।

साथियों,

आज देश अपनी सेनाओं को मजबूत कर रहा है... भारत अपनी सीमाओं पर शानदार हाईवे, शानदार टनल्स, ऊंचे-ऊंचे ब्रिज, आधुनिक एयरफील्ड्स... ये सब बना रहा है... देश की सुरक्षा बढ़ा रहा है... और इसलिए कांग्रेस बौखलाई हुई है। उनको यही हो रहा है कि मोदी सब कैसे कर लेता है उन बेचारों को नींद नहीं आती… नींद नहीं आती । और जब नींद नहीं आती दो दिन में कुछ भी बोलते रहते हैं। साथियों, आज की कांग्रेस हर उस विचार.. हर उस आतंकी को कंधे पर बिठाती है... जो देश का बुरा सोचता है। जो लोग देश के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देखते हैं... जो लोग, नॉर्थ ईस्ट को भारत से अलग करने के नारे लगाते हैं... वो कांग्रेस के लिए पूजनीय बन चुके हैं। आजादी के समय मुस्लिम लीग ने देश का बंटवारा कराया... अब आज की कांग्रेस... मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस बनकर फिर देश बांटने में जुट गई है। ये एमएमसी है- माओवादी मुस्लिमलीगी कांग्रेस इसलिए आपको कांग्रेस से सावधान रहना है... और असम की जनता को भी सावधान करना है।

साथियों,

यहां जो नौजवान हैं, जो अभी 20-25 वर्ष के हैं... उन्हें कांग्रेस का कुशासन शायद पता नहीं होगा… याद नहीं होगा... कांग्रेस की सरकारें चाहे असम में रही हों या फिर दिल्ली में... उन्होंने असम को अपने हाल पर छोड़ दिया था। आज जब मैं यहाँ ब्रह्मपुत्र के तट पर खड़ा हूं... तो इस महान नदी का ही उदाहरण देता हूं। असम के विकास में... असम के लोगों के जीवन को आसान बनाने में... ब्रह्मपुत्र की बहुत बड़ी भूमिका है। लेकिन कांग्रेस के सत्तर साल के शासन में ब्रह्मपुत्र को पार करना हमेशा बड़ी चुनौती रहा। आज़ादी के बाद से लेकर 2014 तक… और उनके तो प्रधानमंत्री यहां से चुनकर गए थे यानी लगभग सात दशक में कांग्रेस सरकारों ने ब्रह्मपुत्र पर सिर्फ़ तीन पुल बनवाए थे। इतने दशकों में कितने पुल… कितने… आप कल्पना कर सकते हैं कि इतनी विशाल नदी पर, असम की इतनी बड़ी जनसंख्या को जीवन देने वाली नदी पर, सिर्फ तीन पुल बने थे। क्या ऐसी हालत में असम का तेज विकास संभव था ?

मेरे कार्यकर्ता साथियों,

2014 में आपकी मेहनत का परिणाम था कि मुझे भारत सरकार में देश की सेवा का अवसर मिला। उसके 2-3 साल बाद, आप सभी भाजपा कार्यकर्ताओं ने यहां डबल इंजन सरकार बनाई। और इसका नतीजा क्या हुआ? बीते 10-11 वर्षों में... बीजेपी-NDA सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी पर 5 बड़े पुल पूरे कर लिए हैं। ये आंकड़े याद रहेंगे ना? कांग्रेस की 70 साल की सत्ता में, सिर्फ तीन पुल बने थे... लेकिन हमने सिर्फ 10 वर्षों में 5 पुल बनाए हैं... यानि कांग्रेस ने असम को सिर्फ समस्याएं दीं... जबकि बीजेपी ने असम को समाधान दिए हैं।

साथियों,

आज गुवाहाटी के दो हिस्सों को जोड़ने वाले शानदार पुल का भी लोकार्पण हो गया है। इस सेतु का नाम, प्राचीन कामरूप के महाप्रतापी सम्राट... कुमार भास्कर वर्मन जी के नाम पर रखा गया है। ये लोग होते तो अपने परिवार के नाम पर ही चढ़ा देते। यानि ये भास्कर सेतु, असम के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और असम के समृद्ध इतिहास का संगम है। ये इस बात का प्रमाण है... कि बीजेपी तेज़ विकास करती है, और विरासत को भी आगे बढ़ाती है।

साथियों,

इस नए सेतु के बनने से... गुवाहाटी देश का एक बड़ा ग्रोथ सेंटर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा... सिक्स लेन के इस ब्रिज से... नौजवान हो या बुजुर्ग... किसान हो या उद्यमी... सबको फायदा होगा। और मैं आपको एक और बात बता दूं... यहां अभी ऐसे कई सारे पुलों पर काम चल रहा है। जब ये सभी तैयार हो जाएंगे, तो असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को बहुत तेज गति मिलने वाली है।

भाइयों और बहनों,

कांग्रेस के दशकों के कुशासन की सबसे बड़ी वजह रही है- कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति...वोट बैंक पॉलिटिक्स। कांग्रेस ने असम को हमेशा वोट के चश्मे से ही देखा... कांग्रेस ने हर वो काम किया, जिससे तुष्टिकरण को बढ़ावा मिले… और हर वो काम रोका, जिससे असम का विकास हो। कांग्रेस के समय..केंद्र सरकार की योजनाओं को असम तक पहुंचने में भी बरसों लग जाते थे। लेकिन साथियों, बीजेपी ने असम के विकास को, नॉर्थ ईस्ट के विकास को...हमेशा प्राथमिकता दी है। बीते 11 वर्षों में देखिए... जब भी कोई नई शुरुआत देश में हुई, तो तुरंत उसका लाभ नॉर्थ ईस्ट को भी मिला। कोई भी विलंब के बिना मिला। देश में सेमी-हाईस्पीड वंदेभारत ट्रेनें लॉन्च हुई... तो असम और नॉर्थ ईस्ट भी इससे शुरुआत में ही कनेक्ट हो गया। अभी कुछ समय पहले देश की पहली स्लीपर वंदेभारत ट्रेन असम से ही शुरू हुई है। जब देश ने तय किया... कि अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से काम करना है। और असम इस सेक्टर में भी ग्रोथ इंजन बन रहा है... और वो दिन दूर नहीं जब असम की चाय की तरह ही... असम की चाय की तरह ही...असम में बनी चिप्स की भी पूरी दुनिया में चर्चा होगी। चाय से लेकर के चिप्स तक असम की विकास यात्रा दिखाई देती है।

साथियों,

असम का ये प्यार मैं कैसे भूल सकता हूं। लेकिन मैं असम से वादा करता हूं कि आपने जो मुझे प्यार दिया है, उसे ब्याज समेत लौटाउंगा और विकास करके लौटाउंगा। मैं आपको डिजिटल कनेक्टिविटी का भी उदाहरण दूंगा। आप देखिए... कांग्रेस के समय में 3G और 4G टेक्नोलॉजी आई.. .ये टूजी के घोटाले भी आए लेकिन नॉर्थ ईस्ट तक, असम तक उसे तेजी से पहुंचाने के लिए कांग्रेस ने मेहनत ही नहीं की... और जब भाजपा सरकार में 5G टेक्नॉलॉजी आई तो हमने क्या किया? हमने इस टेक्नॉलजी को पूरे असम में, पूरे नॉर्थ ईस्ट में... गांव गांव तक पहुंचाने के लिए काम किया। इस सैचुरेशन अप्रोच के कारण, आज गुवाहाटी के युवाओं को हाई-स्पीड इंटरनेट का लाभ मिल रहा है। और अब असम में NIC डेटा सेंटर की भी शुरुआत हुई है, ये डेटा सेंटर, यहां के नौजवानों को बहुत बड़ा लाभ देने वाला है।

साथियों,

एक और उदाहरण स्वास्थ्य सेवाओं का भी है। कांग्रेस ने दशकों तक AIIMS के विस्तार पर ध्यान नहीं दिया। जब अटल जी की सरकार बनी तो एम्स की संख्या बढ़ाई गई। इसके बावजूद हालत ये थी कि 2014 में देश में सिर्फ 6 एम्स थे। आपने 2014 में मोदी को देश की सेवा का अवसर दिया... और आज देश में एम्स की संख्या बढ़कर 20 से ज्यादा हो चुकी है। बीजेपी सरकार ने एम्स गुवाहाटी का भी निर्माण किया है। इसके अलावा असम में कई मेडिकल कॉलेज और कैंसर हॉस्पिटल भी खोले गए हैं। और कल ही, हमने पीएम राहत स्कीम को भी मंजूरी दी है... देश के किसी भी हिस्से में, अगर कोई भी व्यक्ति किसी दुर्घटना में घायल होता है... तो केंद्र की सरकार की ओर से, उसका डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में कराया जाएगा। एक्सीडेंट के बाद तुरंत मदद मिलने से जान बच जाती है।

साथियों,

यहां आए भाजपा कार्यकर्ताओं में बड़ी संख्या में मेरे युवा बेटे-बेटियों की है...आप याद रखिए...देश में जब मैनेजमेंट और उच्च शिक्षा की बात होती थी...तो असम और नॉर्थ ईस्ट के युवाओं के पास सिर्फ पलायन का ही विकल्प होता था। लेकिन आज देखिए...IIM पालसबारी का नया कैंपस शुरू हो चुका है। IIT गुवाहाटी का भी आधुनिकीकरण हो रहा है। इसके अलावा असम में IARI की भी स्थापना की गई है। ये संस्थान, असम में नए टेक्नॉलजी लीडर्स को तैयार करेगी।

साथियों,

आज केंद्र की बीजेपी-NDA सरकार...देश के छोटे-छोटे शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का जाल बिछा रही है। आज ही, मुझे गुवाहाटी में हंड्रेड, सौ इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाने का अवसर मिला है। इस वर्ष के बजट में भी पूर्वोदय स्कीम के तहत चार हज़ार इलेक्ट्रिक बसों की घोषणा की गई है। इससे आने वाले समय में बहुत बड़ी संख्या में असम को भी इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं।

साथियों,

कांग्रेस ने असम के साथ एक और बहुत बड़ा अन्याय किया है। कांग्रेस ने असम को अशांत रखा...हिंसा और अलगाव में रखा। आज़ादी के बाद से ही असम, बम-बंदूक, बंद-ब्लॉकेड और कर्फ्यू की चपेट में रहा। और इसकी गुनहगार कांग्रेस ही थी। मुझे याद है जब मैं यहां संगठन का काम करता था तो मैं वापस जाने का भी कार्यक्रम बना के आता था। लेकिन यहा मैं कार्यक्रम नहीं कर पाता था क्यों, क्योंकि कहीं ब्लॉकेड है, कहीं जा नहीं सकते, रास्ते बंद हैं। तो मुझे तो कभी -कभी तो तीन दिन के लिए आया था सात दिन तक वापस नहीं जा पाता था। काम ही नहीं कर पाता था, ये हालत करके रखी थी। लेकिन साथियों भाजपा-एनडीए सरकार, असम में शांति बहाली और तेज विकास का संकल्प लेकर चल रही है। इसलिए जो असम कभी बम धमाकों से गूंजता था...उसी असम में अब शांति की स्थापना हो रही है। जिस असम में हर साल औसतन एक हज़ार से ज़्यादा लोग हिंसा में मारे जाते थे...आज वहां हिंसा की घटनाएं बंद हो रही हैं। पहली बार असम में बोडो, कार्बी, आदिवासी, DNLA, उल्फा ऐसे हर सगंठन से जुड़े साथियों ने बंदूक छोड़कर...देश के संविधान का रास्ता चुना है...शांति और विकास की राह पकड़ी है। लेकिन मेरे कार्यकर्ता साथियों, आपको भूलना नहीं है...10 वर्ष सत्ता से बाहर रहने की वजह से कांग्रेस और ज्यादा जहरीली हो गई है। उनके टॉप लीडर से नीचे तक उनकी जुबान से जहर ही निकलता है। कांग्रेस असम को फिर से अशांति और अराजकता में झोंकना चाहती है। कांग्रेस...असम को घुसपैठियों के हवाले करना चाहती है। आप इनके दिल्ली के नेताओं को देखिए...यहां जो इनके नेता हैं, उनको देखिए...ये सब घुसपैठियों को बचाने में ही लगे हुए हैं। कांग्रेस, असम की असल पहचान को मिटाना चाहती है।

साथियों,

आने वाले पांच साल असम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान ऐसे अनेक प्रोजेक्ट पूरे होने वाले हैं...जो असम की ग्रोथ को नए पंख लगाएंगे...इसलिए यहां डबल इंजन की बीजेपी सरकार बहुत जरूरी है। इसलिए बीजेपी के हर कार्यकर्ता को याद रखना है... असम के तेज विकास के लिए... आको एबार, बीजेपी सोरकार। असम के युवाओं को रोजगार के लिए... आको एबार,बीजेपी सोरकार। असम की बेटियों को नए अवसरों के लिए... आको एबार,बीजेपी सोरकार। असम की पहचान बचाने के लिए... आको एबार, बीजेपी सोरकार।

साथियों,

आज यहां आप सब का ये जोश देखकर, असम की महाविजय का मेरा विश्वास और मजबूत हो गया है। मुझे पूरा भरोसा है, कि इस बार और बड़े बहुमत से…असम में हमारी सरकार की वापसी होने वाली है। लेकिन साथियों, याद रखिएगा... हमें सिर्फ चुनाव ही नहीं जीतना है, हमें निरंतर असम के लोगों का मन भी जीतना है...उनका दिल भी जीतना है। और इसके लिए असम के एक-एक भाजपा कार्यकर्ता को... एक एक पदाधिकारी को, सभी पदाधिकारी को पूरे परिश्रम से काम करना है। जब तक असम में वोटिंग का काम नहीं होता है। जब तक काउंटिंग नहीं होता है, जब तक भाजपा की नई सरकार की शपथ नहीं होती है तब तक, हमें हर दिन अपने क्षेत्र के हर घर में जाना है।.हर घर में, लोगों को मिलकर उनकी आकांक्षा अपेक्षा सुननी है। लोगों को अपने काम बताने हैं, उनके काम आना है। एक एक पन्ना प्रमुख, एक एक बूथ वर्कर को अगले 2 महीने खूब मेहनत करनी है। अगले 2 महीने एक एक घर में, एक-एक असमिया भाई बहन तक...अपनी सरकार के विजन को पहुंचाना है...

साथियों,

असम में तीसरी बार बीजेपी-एनडीए सरकार...असम के तीन गुना विकास का रास्ता बनाएगी। इसलिए हर एक कार्यकर्ता का एक ही मंत्र होना चाहिए- मेरा बूथ...मेरा बूथ... मेरा बूथ.. सबसे मजबूत...मोर बूथ.. मोर बूथ... मोर बूथ

साथियों,

आप मेरा एक और काम करेंगे...? पक्का करेंगे ?... ये सारी बातें याद रखेंगे? पूरी तरह लागू करेंगे ? एक-एक मतदाता तक पहुंचेंगे? उनको बताना मोदी जी आपके लिए ही जी रहे हैं... बताएंगे? बताएंगे? बोलिए भारत माता की... भारत माता की...भारत माता की... बहुत-बहुत धन्यवाद...