শেয়ার
 
Comments
PM Narendra Modi attends Foundation Stone Laying ceremony for Delhi-Dasna-Meerut Expressway
Vajpayee ji worked to connect India through Golden Quadrilateral Project & Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana: PM Modi
We are not merely constructing a road; this is a highway to development: PM Modi
Delhi-Dasna-Meerut Expressway will spur development in western Uttar Pradesh: PM Narendra Modi
Good roads are one of the first pre-requisites for development: PM Modi
With expansion of roadways and infrastructure, prospects for employment also rise: PM Modi
Through Pradhanmantri Krishi Sinchai Yojana, we are reviewing all our agricultural schemes: PM
Our Government is dedicated for uplifting the poor: PM Narendra Modi
I urge all political parties that the people of India have elected us to discuss, debate, deliberate in Parliament. It is our duty: PM

प्‍यारे भाइयों और बहनों,

1857 के स्‍वतंत्र संग्राम में मेरठ को विशेष रूप से याद किया जाता है। 1857 के स्‍वतंत्र संग्राम में मेरठ ने गुलामी से मुक्ति का मार्ग दिखाया था और आज दिल्‍ली से मेरठ का ये Express Highway प्रदूषण से मुक्ति का मार्ग दिखा रहा है। बदलते हुए वक्‍त में रफ्तार रुकने वाली नहीं है और रफ्तार की गति भी रुकने वाली नहीं है। जब ये निश्चित है कि रफ्तार तेज होने वाली है तो Infrastructure भी उसी रफ्तार के अनुकूल बनाना आवश्‍यक हो जाता है। आज से 20 साल, 30 साल पहले अगर गांव में किसी किसान से बात होती थी तो गांव के लोग क्‍या कहते थे? वो कहते थे साहब इस बार अगर सूखे का कोई काम निकलता है तो हमारी तरफ काम शुरू करवाइये। और कम से कम हमारे यहां मिट्टी का काम करवा दीजिए ताकि आने-जाने के लिए रास्‍ते के नाते उपयोग में आ जाए।

25-30 साल पहले हमारे देश का गांव का व्‍यक्ति सिर्फ दो गांव के बीच मिट्टी का काम करवाने के लिए मांग करता था ताकि आने-जाने की सुविधा हो मिट्टी लग जाए तो काम चल जाए। लेकिन आज 25-30 साल के भीतर-भीतर गांव का व्‍यक्ति भी आता है तो कहता है साहब, पक्‍की सड़क नहीं कह रहा है वो कह रहा है हमारे यहां Pebble Road लगाइए, Pebble Road लगाइए। उसको पक्‍की सड़क से भी संतोष नहीं है। उसे Single Line सड़क से भी संतोष नहीं है। उसे double lane चाहिए, four lane चाहिए, Swer Road चाहिए। गांव का इन्‍सान भी इस बात को भली-भांति समझता है कि अगर विकास की यात्रा के साथ जुड़ना है तो मुझे सबसे पहले मेरे गांव को सड़क से जोड़ना है, अच्‍छी सड़क से जोड़ना है। तेज गति से दौड़ने वाला रास्‍ता चाहिए मुझे। जो बात गांव के सामान्‍य व्‍यक्ति को भी समझ आती है, जो सपना देश के गांव का इन्‍सान भी देखता है, उस सपने को पूरा करने की दिशा में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने दो महत्‍वपूर्ण बातों की शुरूआत की थी। 

Infrastructure की दुनिया में भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए जब श्रीमान अटल बिहारी वाजपेयी जी देश के प्रधानमंत्री थे उन्‍होंने दो महत्‍वपूर्ण चीजों को आरंभ किया था। एक, भारत को वैश्विक स्‍तर पर दुनिया के मुकाबले में ला करके खड़े करने के लिए एक योजना आरंभ की और दूसरी हिन्‍दुस्‍तान के गांवों के जीवन में बदलाव लाने के लिए गांवों को connectivity देने के लिए उन्‍होंने योजना का आरंभ किया। और दोनों योजनाएं एक थी स्‍वर्णिम चतुर्भुज Express Highway पूर्व से पश्चिम, उत्‍तर से दक्षिण हिन्‍दुस्‍तान को एक ही ताकत वाला, एक ही quality वाला तेज गति से ले जाने वाला रास्‍ता बनाने का अभियान चलाया और आज हिन्‍दुस्‍तान गर्व से कह सकता है कि भारत के पूर्व से पश्चिम को जोड़ने का काम, उत्‍तर से दक्षिण को जोड़ने का काम वाजपेयी जी की स्‍वर्णिम चतुर्भुज योजना के कारण हिन्‍दुस्‍तान की पहचान दुनिया के समृद्ध देशों की बराबरी में ला करके रख दिया।

दूसरी तरफ, एक तरफ वाजपेयी जी हिन्‍दुस्‍तान को वैश्विक स्‍तर पर देखना चाहते थे तो दूसरी तरफ हिन्‍दुस्‍तान के गांव की भी चिन्‍ता करना चाहते थे। और इसलिए उन्‍होंने दूसरी बड़ी योजना बनाई। वो दूसरी बड़ी योजना थी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना। उस प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से हिन्‍दुस्‍तान के उन गावों को पक्‍की सड़क से जोड़ा जाए ताकि गांव भी गति से आगे बढ़ें और स्‍वर्णिम चतुर्भुज के कारण विश्‍व की बराबरी करने की क्षमता पाएं।

Infrastructure की दुनिया में वाजपेयी जी की सरकार ने ये जो दो अहम् बातें हमारे सामने रखीं, आज बीच में दस साल का अंतराल चला गया, क्‍या हुआ, क्‍या नहीं हुआ, कैसे हुआ, इसकी चर्चा करने के लिए मैं नहीं आया हूं, लेकिन जो गति वाजपेयी जी ने दी थी उस गति को आगे बढ़ाना, देश को Infrastructure की नई उंचाइयों पर ले जाना, उस दिशा में एक बहुत बड़ा अभियान इस सरकार ने उठाया है। एक तरफ Express Highway की भारत के भिन्‍न-भिन्‍न भागों में श्रृंखला बढ़े, जब एक शहर को 100 किलोमीटर की radius में अन्‍य छोटे- छोटे शहरों के साथ जोड़ा जाता है तो सिर्फ रास्‍ते नहीं बनते लेकिन वो 100 किलोमीटर की radius में आने वाले हर छोटा-मोटा गांव, हर छोटा-मोटा शहर उसी ताकत के साथ विकास की नई उंचाइयों को प्राप्‍त करता है।

दिल्‍ली के साथ सट करके ये जो road network बनाने का हमने अभियान उठाया है वो पूरा अभियान दिल्‍ली के 100-150 किलोमीटर की radius के सारे क्षेत्र के विकास का एक बहुत बड़ा कारण बनने वाला है। Satellite township develop होने वाली है। जब मेरठ और दिल्‍ली तेज गति से जुड़ जाते हैं तो मेरठ, दिल्‍ली से भी तेज गति से आगे बढ़ जाता है। देहरादून बढ़ जाता है और इसलिए ये सिर्फ रास्‍ता नहीं बन रहा है, ये विकास का राजमार्ग बन रहा है।

पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के विकास में ये योजनाएं बहुत बड़ी ताकत के रूप में उभर करके आने वाली हैं। अभी नीतीश जी बता रहे थे जो केदारनाथ में भयंकर आपत्ति आई, देश और विदेश के यात्री बेमौत मर गए, संकट बहुत बड़ा था, लेकिन क्‍या संकट को अवसर में भी पलटा जा सकता है? मेरी सरकार का स्‍वभाव है हर संकट को भी अवसर में पलट देना। और इसलिए हमने जो केदारनाथ का हादसा हुआ था, आने वाले दिनों में हिन्‍दुस्‍तान और दुनिया से चार धाम की यात्रा करने वाले लोगों के लिए भविष्‍य में कोई संकट न आए ऐसी व्‍यवस्‍था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। और इसलिए हरि‍द्वार हो, ऋषि‍केश हो, गंगोत्री-यमुनोत्री हो, बदरीनाथ-केदारनाथ हो, इसको आधुनि‍क मार्ग से और all weather road के हि‍साब से तैयार करने की दि‍शा में हमने बीड़ा उठाया है और उसके कारण उत्‍तराखंड का वि‍कास भी उत्‍तराखंड के जन्‍म से अब तक नहीं हुआ उससे तेज गति‍ से बढ़ने वाला है और देशभर के यात्रि‍यों के लि‍ए वो एक नई सुवि‍धा का कारण बनने वाला है।

आज हमारे देश में जो मध्‍यम वर्ग और उच्‍च मध्‍यम वर्ग के नागरि‍क है, उन परि‍वारों में weekend के कार्यक्रम बनते हैं। weekend में outing करने का कार्यक्रम बनता है या vacant में यार दोस्‍तों को घर पर बुलाने का कार्यक्रम बनता है। धीरे-धीरे बड़े शहरों में मध्‍यम वर्ग और उच्‍च मध्‍यम वर्ग में weekend में दो दि‍न के लि‍ए परि‍वार के साथ कहीं न कहीं जाना, ये धीरे-धीरे एक पारि‍वारि‍क जीवन का हि‍स्‍सा बनता जा रहा है। लेकि‍न वो कहां दूर तो नहीं जा सकते। अगर एक बार दि‍ल्‍ली के बाहर 100-150 कि‍लोमीटर जाने के लि‍ए अगर अच्‍छे से अच्‍छा नेटवर्क मि‍ल जाता है, अच्‍छे से अच्‍छे रास्‍ते मि‍ल जाते हैं तो दि‍ल्‍ली से जो मध्‍यम वर्ग के, उच्‍च मध्‍यम वर्ग के करोड़ों नागरि‍क हैं, जि‍नको बाहर जाने का मन करता है। ये जो छोटे-छोटे शहर है, उनके नागरि‍क है, उनको बाहर जाने का मन करता है। ये व्‍यवस्‍था उनके काम आएगी और उसके कारण weekend tourism एक नया व्‍यवसाय वि‍कसि‍त होगा इस इलाके में। नौजवानों के रोजगार के लि‍ए एक नया अवसर प्रदान करेगा। एक रात के लि‍ए, दो रात के लि‍ए बाहर जाएं, अच्‍छी सुवि‍धा मि‍ल जाए परि‍वार के लोग जाना पसंद करेंगे और ये रास्‍ते जब बनते हैं तो ये सुवि‍धाएं काम आती हैं।

आने वाले दि‍नों में अब जब road ways infrastructure बनता है तो रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। अब करीब-करीब 6,000 करोड़ का ये प्रोजेक्‍ट बजट बनेगा, 8,000 करोड़, 7,500 करोड़। अब यह 7,500 करोड़ का जो प्रोजेक्‍ट लगता है तो इसमें कि‍तने हजारों लोगों को काम मि‍लता है। उन हजारों लोगों के लि‍ए कोई चाय की दुकान चलेगी, कोई भोजन का ठेका चलेगा। कि‍तने लोगों को रोजगार मि‍लता है। जब ये road बनता है तो 7,500 करोड़ में से अधि‍कतम पैसा रोजगारी में जाता है जो उत्‍तर प्रदेश के गरीब लोगों को ये रोजगार का अवसर प्रदान करता है। मशीन में या material में उतना रुपया नहीं लगता है जि‍तना कि‍ मजदूरी में लगता है और इसलि‍ए जब infrastructure के काम नि‍कलते हैं वो रोजगार के अवसर पैदा करते हैं। जब रोजगार के अवसर पैदा करते हैं तो गांव के गरीब की खरीद शक्‍ति‍ को बढ़ावा देते हैं, उसकी purchasing power को बढ़ावा देते हैं और जब purchasing power गांव के व्‍यक्‍ति‍ का बढ़ता है, गरीब का purchasing power बढ़ता है तो हि‍न्‍दुस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था नई ऊंचाइयों को पार करती है, नई ताकत को पार करती है और इसलि‍ए हमारी सरकार जो भी योजनाएं लेकर के चल रही है वो योजनाएं आखि‍र में गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति‍ के काम आए, उसको रोजगार दे, उस पर ध्‍यान केन्‍द्रि‍त करती है।

एक तरफ जैसे हमने ये रास्‍तों के नेटवर्क पर काम तेज गति‍ से आगे बढ़ाया है, वैसा ही दूसरा बड़ा काम उठाया है प्रधानमंत्री कृषि‍ सिंचाई योजना। हमारी जि‍तनी कृषि‍ की योजनाएं हैं उन सबको एक बार review कि‍या जाए। 100% potential का use कैसे हो, जि‍तने कि‍लोमीटर पानी पहुंचाने का योजना में वि‍चार हुआ था, अगर वो नहीं पहुंचता है तो कैसे पहुंचाया जाए। आखि‍री खेत तक जि‍तने quantum में पानी मि‍लना चाहि‍ए, वो कैसे मि‍ले और नई योजनाएं नदि‍यों को जोड़कर के पूरे देश में पानी का एक ऐसा नेटवर्क खड़ा करने का सपना है ताकि‍ हमारे देश के कि‍सान को कभी बरसात का इंतजार न करना पड़े और बारि‍श न आए तो आत्‍महत्‍या करने के लि‍ए उसको मजबूर न होना पड़े उस दि‍शा में हम काम करेंगे।

भाइयों-बहनों ये हमारा पश्‍चि‍मी उत्‍तर प्रदेश गन्‍ना कि‍सानों का प्रदेश है। हि‍न्‍दुस्‍तान का मुंह मीठा करने का काम ये मेरे पश्‍चि‍मोत्‍तर प्रदेश के गन्‍ना कि‍सान करते हैं। लेकि‍न हमने देखा है जब दुनि‍या के बाजार में चीनी का दाम टूट जाता है तो मेरे गन्‍ना के कि‍सानों की कमर टूट जाती है और फि‍र सरकारें क्‍या करती? चलो इस बार इतना ले लो यार और काम नि‍काल दो और गन्‍ना कि‍सानों के पैसे बाकी के बाकी रह जाते हैं। क्‍या उसके रास्‍ते नहीं खोजे जा सकते, क्‍या चीनी का दाम गि‍र जाएगा तो मेरे कि‍सान की हालत भी गि‍र जाएगी क्‍या? हमने एक बड़ा बीड़ा उठाया है। हमने कहा, दुनि‍या के बाजार में अगर चीनी का दाम गि‍र भी जाए तो भी कि‍सान को खड़ा रखा जा सकता है और इसलि‍ए हमने एक काम कि‍या है। अब जैसे गन्‍ने में से चीनी बनती है, उसके साथ-साथ हम अगर चीनी ज्‍यादा बन गई तो चीनी का production कम करो भई। चीनी के दाम टि‍काए रखो लेकि‍न बीच में इथनॉल बना लो, चीनी मत बनने दो। अब इथनॉल बनाएगा लेकि‍न मार्कि‍ट नहीं होगा तो क्‍या करेगा और इसलि‍ए सरकार ने कानून बनाया कि‍ हमारी जो बस चलती है, पेट्रोलि‍यम से चलने वाली गाड़ि‍यां हैं उसमें पांच प्रति‍शत इथनॉल को मि‍क्‍स कि‍या जाए। इससे प्रदूषण की भी मुक्‍ति‍ होगी और हमारा गन्‍ने का कि‍सान जो गन्‍ना पैदा करता है उससे हमारी गाड़ि‍यां दौड़ेगी, एक्‍सप्रेस हाइवे भी बनेगा और इथनॉल से गाड़ि‍यां भी दौड़ेगी तो मेरे गन्‍ना पैदा करने वाले कि‍सान की गाड़ी भी तेज गति‍ से दौड़ेगी, ये हम वि‍कास का मॉडल लेकर के चल रहे हैं और इसलि‍ए मेरे भाइयों-बहनों इस वि‍कास की यात्रा को जन-जन तक पहुंचाए।

आज 31 दि‍सम्‍बर है 2015 का ये आखि‍री दि‍वस है। कल 01 जनवरी, 2016 का प्रारंभ हो रहा है। मेरी तरफ से आपको नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। इस देश के नौजवानों को नव वर्ष में एक अद्भुत तोहफा हम देने जा रहे हैं। एक अद्भुत सौगात देने जा रहे हैं। वो ऐसी सौगात है जो मेरे नौजवान को भ्रष्‍टाचार से मुक्‍ति‍ दि‍लाती है। वो ऐसी सौगात है जो मेरे देश के नौजवान को कि‍सी के आश्रि‍त बनने के लि‍ए मजबूर करने से मुक्‍ति‍ दि‍लाती है।

सरकार ने एक फैसला कि‍या है, जो फैसला कल लागू हो जाएगा। वो फैसला यह है कि‍ तीसरे और चौथी श्रेणी में सरकारी नौकरी के लि‍ए इंटरव्‍यू लि‍ए जाते हैं और हम जानते हैं इंटरव्‍यू का मतलब ही है सि‍फारि‍श। इंटरव्‍यू का मतलब यही निकाला जाता है कि‍ कि‍सी बड़े व्‍यक्‍ति‍ का कुर्ता पकड़कर के पहुंचना और जो हकदार है वो बेचारा हक से वंचि‍त रह जाता है। और इसलि‍ए सरकार का फैसला है – कल 01 जनवरी, 2016, आपको नव वर्ष कि‍ सौगात है कि‍ अब श्रेणी तीन और चार में इंटरव्‍यू नहीं लि‍या जाएगा। Technology के द्वारा merit के आधार पर वि‍धवा मां का बेटा होगा, अगर उसका हक बनता है, उसके घर में नौकरी का ऑर्डर आ जाएगा। भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई का एक बहुत अहम कदम हमने उठाया है। नौजवानों को रोजगार में ये जो दि‍क्‍कतें आती हैं उससे मुक्‍ति‍ दि‍लाने का हमारा प्रयास है। मैं देश के सभी मुख्‍यमंत्रि‍यों से आग्रह करता हूं, देश के सभी राज्‍य सरकारों से आग्रह करता हूं कि‍ भारत सरकार ने सरकारी नौकरी के लि‍ए श्रेणी तीन और चार के लि‍ए इंटरव्‍यू समाप्‍त कि‍ए हैं, आप भी सभी राज्‍य सरकारें ये इंटरव्‍यू की परंपरा खत्‍म कीजि‍ए और merit के आधार पर नौजवानों को रोजगार दीजि‍ए।

नोएडा के मेरे प्‍यारे भाइयों-बहनों, कभी नोएडा वालों को याद नहीं रहता है कि‍ वो उत्‍तर प्रदेश के नागरि‍क है। उनको तो कभी-कभी लगता है कि‍ वो दि‍ल्‍ली वाले है। वो भूल जाते हैं। भाइयों-बहनों मैं नहीं भूलता हूं। आपको पता रहना चाहि‍ए मैं उत्‍तर प्रदेश का MP हूं, मैं भी उत्‍तर प्रदेश का हूं और इस प्रदेश ने मुझे जो प्‍यार दि‍या है, वो प्‍यार मुझे काम करने की प्रेरणा भी देता है। एक नई ऊर्जा देता है, नई ताकत देता है और उत्‍तर प्रदेश के MP के नाते भी मैं उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी को वि‍शेष आग्रह करता हूं कि‍ आप भी श्रेणी तीन और चार में जो इंटरव्‍यू की परंपरा है वो उत्‍तर प्रदेश में समाप्‍त कर दीजि‍ए। उत्‍तर प्रदेश के नौजवानों को merit के आधार पर रोजगार का अवसर उपलब्‍ध कराने के लि‍ए आप व्‍यवस्‍था कीजि‍ए।

भाइयों-बहनों हमारी सरकार गरीबों के लि‍ए एक के बाद एक अनेक कदम उठाने के लि‍ए कोशि‍श कर रही है। कुछ पुराने कानून है जो गरीबों की भलाई के लि‍ए, देश के आर्थि‍क वि‍कास के लि‍ए अब बहुत पुराने हो गए हैं। कई बाबतों में नए कानून बनाना जरूरी हो गया है। लेकि‍न ये देश का दुर्भाग्‍य है कि‍ भारत की संसद, जहां कानून बनते हैं, अब उस वो संसद को चलने नहीं दिया जाता है। जिनको जनता ने ठुकरा दिया, उन्‍होंने अब संसद को मान में लिया हुआ है। वे संसद को चलने नहीं देते। मैं खास करके सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं, लोकसभा में तो हमें बोलने का अवसर नहीं मिल रहा है लेकिन मैं जनसभा में से आग्रह कर रहा हूं कि देश की जनता ने हमें संसद में चर्चा करने के लिए भेजा है, विचार-विमर्श करने के लिए भेजा है, debate करने के लिए भेजा है, मिल-बांट करके निर्णय करने के लिए भेजा है। हमारी जिम्‍मेवारी है जनता ने हमें जिस काम के‍िलिए भेजा है, उसको प्राथमिकता देना, उसको पूरा करना। विशेष करके उनकी जिम्‍मेवारी ज्‍यादा है, जिन्‍होंने 50-60 साल तक इस देश पर राज किया है। सरकार क्‍या होती है, संसद क्‍या होती है, संसद में काम होना कितना जरूरी होता है, ये हमसे भी ज्‍यादा उनको पता है, जिन्‍होंने 50-60 साल तक देश में सरकारें चलाई हैं, दर्जनों प्रधानमंत्री दिए हैं, उनकी विशेष जिम्‍मेवारी है कि अपने राजनीतिक कारणों को देश को आगे बढ़ने में बीच में न लाएं। संसद को चलने की जिम्‍मेवारी उनकी भी उतनी ही ज्‍यादा है क्‍योंकि 60 साल तक इस देश ने उनको सरकार बनाने का अवसर दिया है। जिनको अभी तक अवसर नहीं मिला है उसका गुस्‍सा हम समझ सकते हैं। जिनको मौका नहीं मिला है उसकी नाराजगी हम समझ सकते हैं। लेकिन जिन्‍होंने 60 साल तक देश में हर प्रकार की सत्‍ता का उपभोग किया है उनको संसद को बर्बाद करने का अधिकार नहीं है, संसद को रोकने का अधिकार नहीं है।

आज 2015 समाप्‍त हो रही है, मैं विशेषकर उनसे आग्रह करता हूं कि कल 1 जनवरी नई साल है, आज जब नया वर्ष मना रहे हों तो एक संकल्‍प ये भी कर लो कि आज 2016 से अब ससंद में रुकावटें नहीं डालोगे, संसद को चलने दोगे। देश को आगे बढ़ने दोगे। देश के गरीबों की भलाई के निर्णय करने दोगे। देश के नौजवानों को रोजगार के अवसर के लिए काम करने दोगे। ये अगर हम संकल्‍प करेंगे तो देश नई उंचाइयों को प्राप्‍त करेगा। मैं फिर एक बार आप सबका दृदय से अभिनंदन करता हूं और ये road पश्चिम उत्‍तर प्रदेश के विकास की एक नई गाथा को आरंभ कर रहा है, मैं उत्‍तर प्रदेश के नागरिकों को भी शुभकामनाएं देता हूं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

'মন কি বাত' অনুষ্ঠানের জন্য আপনার আইডিয়া ও পরামর্শ শেয়ার করুন এখনই!
প্রধানমন্ত্রী ২০২২ সালের ‘পরীক্ষা পে চর্চা’ অনুষ্ঠানে অংশগ্রহণের জন্য আহ্বান জানিয়েছেন
Explore More
উত্তরপ্রদেশের বারাণসীতে কাশী বিশ্বনাথ ধাম উদ্বোধনী অনুষ্ঠানে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ

জনপ্রিয় ভাষণ

উত্তরপ্রদেশের বারাণসীতে কাশী বিশ্বনাথ ধাম উদ্বোধনী অনুষ্ঠানে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ
Undoing efforts of past to obliterate many heroes: PM Modi

Media Coverage

Undoing efforts of past to obliterate many heroes: PM Modi
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
We have a goal to fulfil the dreams of independent India: PM Modi
January 23, 2022
শেয়ার
 
Comments
Also confers Subhas Chandra Bose Aapda Prabandhan Puraskars
Gujarat was the first state to enact disaster related law in 2003
“In disaster management, emphasis is on Reform along with stress on Relief, Rescue and Rehabilitation”
“Disaster management is no longer just a government job but it has become a model of 'Sabka Prayas'”
“We have a goal to fulfil the dreams of independent India. We have the goal of building a new India before the hundredth year of independence”
“It is unfortunate that after Independence, along with the culture and traditions of the country, the contribution of many great personalities was also tried to be erased”
“The freedom struggle involved ‘tapasya’ of lakhs of countrymen, but attempts were made to confine their history as well. But today the country is boldly correcting those mistakes”
“We have to move ahead taking inspiration from Netaji Subhash's 'Can Do, Will Do' spirit”

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के मेरे साथी श्री अमित शाह, श्री हरदीप पूरी जी, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, INA के सभी ट्रस्टी, NDMA के सभी सदस्यगण, jury मेम्बर्स, NDRF, कोस्ट गॉर्ड्स और IMD के डाइरेक्टर जनरल्स, आपदा प्रबंधन पुरस्कारों के सभी विजेता साथी, अन्य सभी महानुभाव, भाइयों एवं बहनों!

भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से मैं आज कोटि-कोटि नमन करता हूं। ये दिन ऐतिहासिक है, ये कालखंड भी ऐतिहासिक है और ये स्थान, जहां हम सभी एकत्रित हैं, वो भी ऐतिहासिक है। भारत के लोकतंत्र की प्रतीक हमारी संसद पास में है, हमारी क्रियाशीलता और लोकनिष्ठा के प्रतीक अनेक भवन भी हमारे साथ पास में नजर आ रहे हैं, हमारे वीर शहीदों को समर्पित नेशनल वॉर मेमोरियल भी पास है। इन सबके आलोक में आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- “मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा"। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी। ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है। नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।

साथियों,

पिछले साल से देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। आज पराक्रम दिवस के अवसर पर सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं। नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर ही इन पुरस्कारों को देने की घोषणा की गई थी। साल 2019 से 2022 तक, उस समय के सभी विजेताओं, सभी व्यक्तियों, सभी संस्थाओं को जिने आज सम्मान का अवसर मिला है। उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारे देश में आपदा प्रबंधन को लेकर जिस तरह का रवैया रहा था, उस पर एक कहावत बहुत सटीक बैठती है- जब प्यास लगी तो कुआं खोदना। और जिस मैं काशी क्षेत्र से आता हूं वहां तो एक और भी कहावत है। वो कहते हैं - भोज घड़ी कोहड़ा रोपे। यानि जब भोज का समय आ गया तो कोहड़े की सब्जी उगाने लगना। यानि जब आपदा सिर पर आ जाती थी तो उससे बचने के उपाय खोजे जाते थे। इतना ही नहीं, एक और हैरान करने वाली व्यवस्था थी जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है। हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था। इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, ऐसी जो स्थितियों पैदा होती थी। उससे निपटने का जिम्मा, उसका संबंध कृषि मंत्रालय से आता था। देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चलता रहता था। लेकिन 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, देश को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया। अब उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए। हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया। उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में Gujarat State Disaster Management Act बनाया गया। आपदा से निपटने के लिए गुजरात इस तरह का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। बाद में केंद्र सरकार ने, गुजरात के कानून से सबक लेते हुए, 2005 में पूरे देश के लिए ऐसा ही Disaster Management Act बनाया। इस कानून के बाद ही National Disaster Management Authority उसके गठन का रास्ता साफ हुआ। इसी कानून ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी देश की बहुत मदद की।

साथियों,

डिजास्टर मैनैजमेंट को प्रभावी बनाने के लिए 2014 के बाद से हमारी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा काम किया है। हमने Relief, Rescue, Rehabilitation उस पर जोर देने के साथ-साथ ही Reform पर भी बल दिया है। हमने NDRF को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया। स्पेस टेक्नालजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया। हमारे NDRF के साथी, सभी राज्यों के SDRFs, और सुरक्षा बलों के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर, एक-एक जीवन को बचाते हैं। इसलिए, आज ये पल इस प्रकार से जान की बाजी लगाने वाले, औरों की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जिंदगी का दांव लगाने वाले चाहे वो NDRF के लोग हों, चाहे SDRF के लोग हों, हमारे सुरक्षाबलों के साथी हों, ये सब के सब उनके प्रति आज आभार व्यक्त करने का, उनको salute करने का ये वक्त है।

साथियों,

अगर हम अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करते चलें, तो आपदा से निपटने की क्षमता दिनों-दिन बढ़ती चली जाती है। मैं इसी कोरोना काल के एक-दो वर्षों की बात करूं तो इस महामारी के बीच भी देश के सामने नई आपदाएँ आकर खड़ी हो गईं। एक तरफ कोरोना से तो लड़ाई लड़ ही रहे थे। अनेक जगहों पर भूकंप आए, कितने ही क्षेत्रों में बाढ़ आई। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी तटों पर cyclones आए, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिमी तटों पर cyclones आए, पहले, एक-एक साइक्लोन में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। देश ने हर चुनौती का जवाब एक नई ताकत से दिया। इसी वजह से इन आपदाओं में हम ज्यादा से ज्यादा जीवन बचाने में सफल रहे। आज बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, भारत के इस सामर्थ्य, भारत में आए इस बदलाव की सराहना कर रही हैं। आज देश में एक ऐसा end-to-end cyclone response system है जिसमें केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर के काम करती हैं। बाढ़, सूखा, cyclone, इन सभी आपदाओं के लिए वार्निंग सिस्टम में सुधार किया गया है। Disaster risk analysis के लिए एडवांस्ड टूल्स बनाए गए हैं, राज्यों की मदद से अलग अलग क्षेत्रों के लिए Disaster risk maps बनाए गए हैं। इसका लाभ सभी राज्यों को, सभी स्टेक होल्डर्स को मिल रहा है। और सबसे महत्वपूर्ण, डिजास्टर मैनेजमेंट - आपदा प्रबंधन, आज देश में जनभागीदारी और जन-विश्वास का विषय बन गया है। मुझे बताया गया है कि NDMA की ‘आपदा मित्र’ जैसी स्कीम्स से युवा आगे आ रहे हैं। आपदा मित्र के रूप में जिम्मेवारियां उठा रहे हैं। यानी जन भागीदारी बढ़ रही है। कहीं कोई आपदा आती है तो लोग विक्टिम्स नहीं रहते, वो वॉलंटियर्स बनकर आपदा का मुकाबला करते हैं। यानी, आपदा प्रबंधन अब एक सरकारी काम भर नहीं है, बल्कि ये ‘सबका प्रयास’ का एक मॉडल बन गया है।

और साथियों,

जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूँ, तो इसमें हर क्षेत्र में हो रहा प्रयास, एक holistic approach भी शामिल है। आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए, हमने अपने एजुकेशन सिस्टम में भी कई सारे बदलाव किए हैं। जो सिविल इंजीनियरिंग के कोर्सेस होते हैं, आर्किटेक्चर से जुड़े कोर्सेस होते हैं, उसके पाठ्यक्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट से जोड़ा, इन्फ्रासट्रक्चर की रचना कैसी हो उसपर विषयों को जोड़ना, ये सारे काम प्रयासरत हैं। सरकार ने Dam Failure की स्थिति से निपटने के लिए, डैम सेफ्टी कानून भी बनाया है।

साथियों,

दुनिया में जब भी कोई आपदा आती है तो उसमें लोगों की दुखद मृत्यु की चर्चा होती है, कि इतने लोगों की मृत्यु हो गई, इतना ये हो गया, इतने लोगों को हटाया गया, आर्थिक नुकसान भी बहुत होता है। उसकी भी चर्चा की जाती है। लेकिन आपदा में जो इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान होता है, वो कल्पना से परे होता है। इसलिए ये बहुत आवश्यक है कि आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ऐसा हो जो आपदा में भी टिक सके, उसका सामना कर सके। भारत आज इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। जिन क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़ या साइक्लोन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां पर पीएम आवास योजना के तहत बन रहे घरों में भी इसका ध्यान रखा जाता है। उत्तराखंड में जो चार धाम महा-परियोजना का काम चल रहा है, उसमें भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है। उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है। आपात स्थिति में ये एक्सप्रेसवे, विमान उतारने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है। यही नए भारत का विज़न है, नए भारत के सोचने का तरीका है।

साथियों,

Disaster Resilient Infrastructure की इसी सोच के साथ भारत ने दुनिया को भी एक बहुत बड़ी संस्था का विचार दिया है, उपहार दिया है। ये संस्था है- CDRI - Coalition for Disaster Resilient Infrastructure. भारत की इस पहल में ब्रिटेन हमारा प्रमुख साथी बना है और आज दुनिया के 35 देश इससे जुड़ चुके हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने Joint Military Exercise बहुत देखी है। पुरानी परंपरा है उसकी चर्चा भी होती है। लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए Joint ड्रिल की परंपरा शुरू की है। कई देशों में मुश्किल समय में हमारी डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी सेवाएँ दी हैं, मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है। जब नेपाल में भूकंप आया, इतनी बड़ी तबाही मची, तो भारत एक मित्र देश के रूप में उस दुख को बाटने के लिए जरा भी देरी नहीं की थी। हमारे NDRF के जवान वहां तुरंत पहुंच गए थे। डिजास्टर मैनेजमेंट का भारत का अनुभव सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पुरी मानवता के लिए आप सभी को याद होगा 2017 में भारत ने साउथ एशिया जियो-स्टेशनरी communication satellite को लान्च किया। weather और communication के क्षेत्र में उसका लाभ हमारे दक्षिण एशिया के मित्र देश को मिल रहा है।

साथियों,

परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हममे हौंसला है तो हम आपदा को भी अवसर में बदल सकते हैं। यही संदेश नेताजी ने हमे आजादी की लड़ाई के दौरान दिया था। नेताजी कहते थे कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना। दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके"। आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले, 2047 के पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है। और नेताजी को देश पर जो विश्वास था, जो भाव नेताजी के दिल में उभरते थे। और उनके ही इन भावों के कारण मैं कह सकता हूँ कि, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोक सके। हमारी सफलताएँ हमारी संकल्पशक्ति का सबूत हैं। लेकिन, ये यात्रा अभी लंबी है। हमें अभी कई शिखर और पार करने हैं। इसके लिए जरूरी है, हमें देश के इतिहास का, हजारों सालों की यात्रा में इसे आकार देने वाले तप, त्याग और बलिदानों का बोध रहे।

भाइयों और बहनों,

आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा। ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं। लेकिन आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है। आप देखिए, बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों को देश उनकी गरिमा के अनुरूप विकसित कर रहा है। स्टेचू ऑफ यूनिटी आज पूरी दुनिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल के यशगान की तीर्थ बन गई है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत भी हम सबने कर दी है। आदिवासी समाज के योगदान और इतिहास को सामने लाने के लिए अलग-अलग राज्यों में आदिवासी म्यूज़ियम्स बनाए जा रहे हैं। और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन से जुड़ी हर विरासत को भी देश पूरे गौरव से संजो रहा है। नेताजी द्वारा अंडमान में तिरंगा लहराने की 75वीं वर्षगांठ पर अंडमान के एक द्वीप का नाम उनके नाम पर रखा गया है। अभी दिसम्बर में ही, अंडमान में एक विशेष ‘संकल्प स्मारक’ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लिए समर्पित की गई है। ये स्मारक नेताजी के साथ साथ इंडियन नेशनल आर्मी के उन जवानों के लिए भी एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था। जिस प्रकार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है।

साथियों,

मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे। लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था। वो पल अद्भुत है, वो पल अविस्मरणीय है। मुझे खुशी है कि लाल किले में ही आजाद हिंद फौज से जुड़े एक स्मारक पर भी काम किया जा रहा है। 2019 में, 26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिकों को देखकर मन जितना प्रफुल्लित हुआ, वो भी मेरी अनमोल स्मृति है। और इसे भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि हमारी सरकार को नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का अवसर मिला।

साथियों,

नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं सकती थी। हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है। वो ये जानते थे तभी ये बात हमेशा कहते थे भारत में राष्ट्रवाद ने ऐसी सृजनात्मक शक्ति का संचार किया है जो सदियों से लोगों के अंदर सोई पड़ी थी। हमें राष्ट्रवाद भी जिंदा रखना है। हमें सृजन भी करना है। और राष्ट्र चेतना को जागृत भी रखना है। मुझे विश्वास है कि, हम मिलकर, भारत को नेताजी सुभाष के सपनों का भारत बनाने में सफल होंगे। आप सभी को एक बार फिर पराक्रम दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूं और मैं आज एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के लोगों को भी विशेष रूप से बधाई देता हूं। क्योंकि बहुत छोटे कालखंड में उन्होंने अपनी पहचान बना दी है। आज कहीं पर भी आपदा हो या आपदा के संबंधित संभावनाओं की खबरें हों, साईक्लोन जैसी। और जब एनडीआरएफ के जवान यूनिफार्म में दिखते हैं। सामान्य मानवीय को एक भरोसा हो जाता है। कि अब मदद पहुंच गई। इतने कम समय में किसी संस्था और इसकी यूनिफार्म की पहचान बनना, यानि जैसे हमारे देश में कोई तकलीफ हो और सेना के जवान आ जाएं तो सामान्य मानवीय को संतोष हो जाता है, भई बस अब ये लोग आ गये। वैसा ही आज एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने अपने पराक्रम से ये करके दिखाया है। मै पराक्रम दिवस पर नेताजी का स्मरण करते हुए, मैं एनडीआरएफ के जवानों को, एसडीआरएफ के जवानों को, उन्होंने जिस काम को जिस करुणा और संवेदनशीलता के साथ उठाया है। बहुत – बहुत बधाई देता हूं। उनका अभिनंदन करता हूं। मैं जानता हूं इस आपदा प्रबंधन के काम में, इस क्षेत्र में काम करने वाले कईयों ने अपने जीवन भी बलिदान दिए हैं। मैं आज ऐसे जवानों को भी श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने किसी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी। ऐसे सबको में आदरपूवर्क नमन करते हुए मैं आप सबको भी आज पराक्रम दिवस की अनेक – अनेक शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद !