শেয়ার
 
Comments
কংগ্রেস সরকার মণিপুরের ভাগ্য হিসাবে ‘বন্ধ এবং অবরোধ’ দিয়েছে: প্রধানমন্ত্রী মোদী
পূর্ব এশিয়ার বাকি অংশের সঙ্গে ব্যবসা-বাণিজ্যের প্রবেশদ্বার হল মণিপুর: মণিপুরকে বিশ্বের সাথে সংযুক্ত করার বিষয়ে বলেছেন প্রধানমন্ত্রী মোদী
বিজেপি মণিপুরের মহিলাদের কল্যাণ ও উন্নয়নের জন্য দিনরাত কাজ করেছে: প্রধানমন্ত্রী মোদী

पुम्न-मक्पू नोल्लुक्ना खुरुम्जरी इमा मनीपुर-बू खुरुम्जरी राजर्षी भाग्य चंद्र और पु खोतिनथांग सितल्हो की इस खूससूरत धरती और इस धरती पर आने का आनंद कुछ और होता है। 

स्वतंत्रता संग्राम से हम सब वाकिफ है, स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला मोइरांग यहां से बहुत दूर नहीं है। इस पराक्रमी धरती के आप सभी लोगों का मैं हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। यहां बड़ी संख्या में हमारी  माताएं-बहनें-बेटियां भी हमें आशीर्वाद देने आई हैं। मैं एयरपोर्ट से यहां तक आया, करीब 11-12 किलोमीटर का रास्ता, मुझे ताज्जुब है11-12 किलोमीटर रास्ते के दोनों तरफ ह्यूमन चेन नहीं ह्यूमन वॉल था। इतने लोग आशीर्वाद दे रहे थे मैं सचमुच में आप लोगों के इस प्यार से आप लोगों के आशीर्वाद से बहुत ही ऊर्जा का अनुभव करता हूं, एक नई ताकत का अनुभव करता हू। इतना आशीर्वाद देने के लिए इतना स्नेह बरसाने के लिए मणिपुर की मातृशक्ति को भी मैं विशेष रूप से प्रणाम करता हूं। आपका ये उत्साह बता रहा है कि मणिपुर में फिर एक बार डबल इंजन की सरकार बनने जा रही है।

भाइयों और बहनों, 

पिछले महीने ही मणिपुर ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे किए हैं। बीते दशकों में आपने अनेक सरकारों को देखा है, उनका कामकाज भी देखा है और कारनामे भी देखे हैं। दशकों के कांग्रेस शासन में मणिपुर को असमानता और असंतुलित विकास ही मिला है। लेकिन बीते पांच वर्षों में बीजेपी की डबल इंजन की सरकार ने मणिपुर के विकास का पूरी ईमानदारी से प्रयास किया है। आपने बीजेपी की गुड गवर्नेंस को भी देखा है और गुड इंटेन्शन को भी देखा है। बीते पांच साल में हमने जो मेहनत की है, उसने आने वाले 25 सालों की एक ठोस, मजबूत नींव बनाई है। मैं विशेष रूप से यहां के युवा बेटे-बेटियों से, खासकर के फर्स्ट टाइम वोटर्स से कहूंगा, जो पहली बार इस बार वोट डालने के लिए जाने वाले हैं उनके मन में कितना उत्साह होगा कितना उमंग होगा, वोट देने के लिए जाने का मतलब यह नहीं है कि पोलिंग बूथ पर गए, बटन दबाया इतना ही नहीं है… जब आप वोटिंग मशीन पर बटन दबाते हैं इसका मतलब आप सरकार के सक्रिय भागीदार बन जाते हैं, आप सरकार चलाने के महत्वपूर्ण निर्णय के हिस्सेदार बन जाते हैं। और ये सौभाग्य जिन नवजवान बेटे-बेटियों को पहली बार मिल रहा है, मैं सबसे पहले तो उन्हें बहुत-बहुत बधाई देता हूं, और उनसे आग्रह करता हूं कि आपके जीवन में जो महत्वपूर्ण पल होते हैं, जब पहली बार आप स्कूल गए होंगे, जब पहली बार आप अपने गांव से बड़े शहर में कही बाहर गए होंगे, वो चीजें याद रहती हैं। वैसे ही ये पहली बार वोट डालना, पोलिंग स्टेशन पर जाना, बूथ के अंदर जाना, बटन दबाना और अंदर से विजय ध्वनि निकले एक नया विश्वास लेकर के निकलना, ये अवसर कभी जाने मत देना। मेरे नौजवान साथियों… ये चुनाव मणिपुर के आने वाले 25 साल को निर्धारित करने वाले हैं। स्टेबिलिटी और पीस का जो प्रोसेस इन 5 सालों में शुरू हुआ है, उसको अब हमें परमानेंट बनाना है। इसलिए मणिपुर में बीजेपी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बननी बहुत आवश्यक है। 

साथियों, 

मणिपुर की माताएं बहनें, यहां के युवा, यहां के होनहार खिलाड़ी जानते हैं कि जब इच्छाशक्ति हो, जब दिन-रात मेहनत की जाए तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता है। भाजपा सरकार ने मणिपुर में असंभव को भी संभव बनाया है। बंद और ब्लॉकेड से मणिपुर का शहर हो या गांव, हर क्षेत्र को राहत मिली है। वरना कांग्रेस सरकार ने तो बंद और ब्लॉकेड को ही मणिपुर का भाग्य बना दिया था। इससे रोजगार और कारोबार तो ठप होते ही थे, ज़रूरी सामान की कमी भी आप लोगों को भुगतनी पड़ती थी। 

साथियों, 

बीरेन सिंह जी और उनकी सरकार ने सभी को साथ लेकर चलते हुए मणिपुर में बदलाव का नया अध्याय लिखा है। अनेक युवा अब हिंसा का रास्ता छोड़कर, 

मणिपुर के विकास में सहयोग करने के लिए बढ़-चढ़ कर के भाग ले रहे हैं। एक समय था जब मणिपुर के लोगों के लिए सरकार तक पहुंचना, सरकारी दफ्तर तक पहुंचना बहुत मुश्किल था। जबकि बीरेन जी ने अपनी सरकार की पहचान पीपुल्स गवर्नमेंट के तौर पर बनाई है।

साथियों, 

भाजपा सरकार मणिपुर में क्या बदलाव लाई है, मैं इसका एक और उदाहरण आपको दूंगा। आप जानते हैं कोरोना की इतनी भयंकर वैश्विक महामारी से दो साल में मानव जाति को, दुनिया भर की मानव जाति को, इतना बड़ा संकट कभी आया नहीं। ये वैश्विक महामारी हर किसी को कुछ न कुछ परेशानी करती रही है इतने बड़े संकट में हमारी सरकार ने मणिपुर का पूरा ध्यान रखा है। आज बड़ी संख्या में मणिपुर के हर गरीब, हर ट्राइबल परिवार को मुफ्त वैक्सीन्स लगाई जा रही है। आपको वैक्सीन लगी कि नहीं लगी, वैक्सीन लगी, जरा हाथ ऊपर करके बताइए वैक्सीन लगी, सबको लगी। आपको कोई पैसा खर्च करना पड़ा क्या? आपको कोई पैसा खर्च करना पड़ा क्या?  भाई हमारी तो सोच यही है कि हिल हो या फिर वैली, सभी जगह समान रूप से वैक्सीन लगना चाहिए। आप कल्पना कीजिए, 2017 से पहले के बंद और ब्लॉकेड के दौर में ऐसी महामारी आती तो मणिपुर का क्या हाल होता?

साथियों, 

कांग्रेस पार्टी, नॉर्थ ईस्ट के लोगों की भावनाओं को, यहां के लोगों की तकलीफों को कभी समझ ही नहीं पाई। ये एनडीए की सरकार है जो नॉर्थ ईस्ट को अष्ट-लक्ष्मी मानते हुए, भारत के विकास का ग्रोथ इंजन मानते हुए, काम कर रही है। आप सभी की सेवा, आप सभी का विकास ही हमारी प्राथमिकता है। आप भूले नहीं होंगे कि 2017 से पहले राशन को लेकर कितनी दिक्कतें होती थीं। ये भाजपा की सरकार है जिसने यहां राशन व्यवस्था में चल रही लूट को समाप्त कर दिया। कोरोना के इस संकट काल में भी मणिपुर के 22 लाख लोगों को भाजपा सरकार मुफ्त राशन, करीब-करीब दो साल से मुफ्त राशन  सुनिश्चित करा रही है। इसका मतलब ये हुआ कि मणिपुर के हर 10 नागरिकों में से 7 नागरिकों को Seven out of Ten  लोगों को मुफ्त राशन की सुविधा का लाभ मिल रहा है। मेरी माताएं और बहनें तालियां बजाकर के मुझे आशीर्वाद दे रही हैं, माताएं-बहने मैं आपका बहुत आभारी हूं। मणिपुर वो धरती है जहां की महिलाओं ने विदेशी ताकतों के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाइयों का नेतृत्व किया है। ये दुर्भाग्य है कि दशकों तक यहां जो सरकारें रहीं उन्होंने मणिपुर की महिलाओं का जीवन आसान बनाने के लिए कुछ नहीं किया। ये भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार है, जिसने मणिपुर की महिलाओं, यहां की बहनों-बेटियों की आशाओं-आकांक्षाओं को समझा और उनके लिए दिन रात मेहनत की। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मणिपुर में 60 हजार से ज्यादा घर बनाए जा रहे हैं। इसमें से ज्यादातर पर मालिकाना हक महिलाओं का है। महिला उद्यमियों की सहायता के लिए हमारी सरकार ने सात जिला मुख्यालयों पर इमा केईथेल का भी निर्माण किया है। इसका लाभ हजारों महिला दुकानदारों को हो रहा है। घर में बिजली कनेक्शन ना होने का सबसे ज्यादा नुकसान भी हमारी मणिपुर की माताओं-बहनों को ही उठाना पड़ता था। हमारी सरकार ने राज्य के सवा लाख से ज्यादा घरों को बिजली के कनेक्शन से जोड़ा है, उनके जीवन से अंधेरा दूर किया है। घर में गैस कनेक्शन ना होना भी मणिपुर की महिलाओं का जीवन मुश्किल बना रहा था, उन्हें बीमार कर रहा था। ये हमारी ही सरकार है जिसने मणिपुर की माताओं-बहनों को उज्ज्वला योजना के डेढ़ लाख कनेक्शन दिए हैं, मुफ्त में दिए है। मणिपुर के गांवों में रहने वाली हमारी बहनों को पीने के पानी के लिए जो दिक्कत उठानी पड़ती थी, तकलीफें झेलनी पड़ती थी, इसका भी हमें ऐहसास है। महिलाओं की इस समस्या को दूर करने के लिए डबल इंजन की सरकार ने हर घर जल अभियान चलाया। ये अभियान शुरू होने से पहले मणिपुर में सिर्फ, ये आंकड़ा याद रखेंगे आप, ये जो आंकड़ा कह रहा हूं उसे याद रखेंगे? जवाब तो दीजिए याद रखेंगे? मणिपुर में सिर्फ 25 हजार घर ऐसे थे जहां पाइप से पानी आता था। कितने? 25 हजार। कितने? कितने? कितने?  Twentyfive Thousand , 25 हजार। आज भाजपा सरकार बनने के बाद मणिपुर के करीब-करीब 3 लाख घरों में पाइप से पानी पहुंचा है। अब मुझे बताइये, इतने सालों में इतनी सरकारें आईं, इतने मुख्यमंत्री आए, बहुत बड़ी बातें कीं, लेकिन पानी पहुंचा 25 हजार घर में। और हमने पांच साल के भीतर-भीतर 3 लाख घरों में पानी पहुंचाया। ये मेरी माताएं-बहनें मुझे आशीर्वाद देंगी कि नहीं देंगी। सभी माताओं-बहनों से प्रार्थना करता हूं हाथ उठाकर मुझे आशीर्वाद दीजिए। अब हमारी सरकार इस लक्ष्य को लेकर चल रही है कि सरकार की योजनाओं से कोई भी व्यक्ति छूटे नहीं। जो इसका हकदार है, उसको उसका हक मिलना चाहिए। गरीब के लिए ऐसे काम तभी हो सकते हैं, जब डबल इंजन की सरकार हो, जब ईमानदारी हो और सेवा भाव से काम करने वाली सरकार हो। वरना कांग्रेस ने कभी आपके सामर्थ्य पर विश्वास नहीं किया, आपसे स्नेह नहीं किया। आज भी कांग्रेस के नेता यहां आकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। लेकिन दूसरे राज्यों में जाते हैं, पहुंचते ही हमारे नॉर्थ ईस्ट के यहां की संस्कृति, हमारी मणिपुर की संस्कृति, हमारे नॉर्थ ईस्ट के पहनावे, हमारे मणिपुर के पहनावे इसके मजाक उड़ाते हैं, मखौल उड़ाते हैं, बेइज्जती करते हैं। यहां मणिपुर में भी कांग्रेस ने हिल और वैली के बीच ऐसा विभाजन ऐसा विभाजन कर दिया, ऐसी खाई पैदा कर दी और अपने सत्ता का खेल खेलते रहे भाइयों-बहनों। कांग्रेस ने मणिपुर की कनेक्टिविटी पर, मणिपुर के हर क्षेत्र के विकास पर कभी काम नहीं किया। 

साथियों,

हमारे लिए मणिपुर सहित ये पूरा क्षेत्र ईस्ट एशिया के साथ भारत के व्यापार-कारोबार का गेटवे है। इसलिए बीजेपी सरकार, मणिपुर को देश के रेल मैप पर लाई है। जीरीबाम को रेल से जुड़े हुए 5-6 साल हो चुके हैं। कुछ दिन पहले जब रानी गाइदिन्ल्यू स्टेशन पर पहली गुड्स ट्रेन पहुंची थी, तो जैसे आप लोग खुशियों से भर गए थे वैसे ही मुझे भी यह काम करने का बहुत आनंद और संतोष मिला था। वो दिन दूर नहीं है जब इंफाल तक भी रेल आएगी, और ये मोदी है तो पक्का आएगी। आप रेल के जरिए, पूरे देश के साथ सीधे कनेक्ट हो जाएंगे। ये कनेक्टिविटी यहां के टूरिज्म सेक्टर को भी कई गुना अधिक बढ़ाने वाली है। देश-विदेश के टूरिस्ट जब यहां ज्यादा संख्या में आएंगे तो यहां के युवाओं को कमाई के ज्यादा अवसर भी मिलेंगे।

साथियों,

रेल के साथ-साथ मणिपुर में नेशनल हाईवे कनेक्टिविटी पर भी अभूतपूर्व काम हुआ है। पहले की सरकार में मणिपुर में सिर्फ एक नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट पर काम हो रहा था। आज हमारी सरकार करीब 40 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। म्यांमार और थाइलैंड को जोड़ने वाला हाईवे जब बनकर तैयार हो जाएगा तो मणिपुर, ईस्ट एशिया से कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण सेंटर बन जाएग, ट्रेड हब बनेगा। इस बार के बजट में हमने पहाड़ी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए पर्वतमाला योजना और वाइब्रेंट विलेज योजना की भी घोषणा की है।

साथियों,

बीते 5 साल में बीजेपी ने मणिपुर में Sports Culture, Sports के कल्चर को और अधिक समृद्ध किया ही है, इसके साथ-साथ startups को भी बढ़ावा दिया है। बीरेन सिंह जी के भीतर जो sportsperson है, उससे भी इसमें बहुत मदद मिल रही है। मणिपुर तो मैरीकॉम और  मीराबाई चानू जैसे करिश्माई खिलाड़ियों की धरती है। मणिपुर में जो देश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बनाई गई है, वो इस क्षेत्र को स्पोर्ट्स का इंटरनेशनल हब बनाएगी। बीजेपी सरकार पूरे नॉर्थ ईस्ट में स्पोर्ट्स टैलेंट को प्रोत्साहित कर रही है, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर इन्वेस्ट कर रही है। और आपने देखा होगा, ऐसे ही माहौल के कारण ओलंपिक्स में भारत ने इतिहास का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

भाइयों और बहनों, 

हमारे जनजातीय समाज का आज़ादी की लड़ाई में अहम योगदान रहा है। बीजेपी सरकार ने इस योगदान को भी सम्मान दिया है। हमारी सरकार ने 

हर साल 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया है। इसमें मणिपुर की हर जनजाति का भी गौरव है, उसकी पहचान का गौरव है। हमारी सरकार, मणिपुर में रानी गाइदिन्ल्यू, इनके नाम पर आजादी के जंग का एक म्यूज़ियम भी बनवा रही है। मणिपुर में इनर लाइन परमिट की लंबे समय से चल रही मांग को भी बीजेपी सरकार ने पूरा किया है।

साथियों, 

बीजेपी सरकार की नीति है- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास ! इसलिए हम हर व्यक्ति, हर वर्ग, हर क्षेत्र को विकास से जोड़ते हैं। मणिपुर के सामर्थ्य को और बढ़ाने के लिए मणिपुर भाजपा ने बहुत ही अच्छा, दूरगामी, मणिपुर का उत्कर्ष करने वाला घोषणापत्र भी बनाया है। इसमें शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक, उद्योगों से लेकर डिजिटल कनेक्टिविटी तक, अनेक महत्वपूर्ण वायदे किए गए हैं। और आपको ये पता है कि बीजेपी जो कहती है, वो करके दिखाती है। आज मणिपुर के 6 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। मणिपुर में ऑर्गेनिक फार्मिंग की जो ताकत है, बीजेपी सरकार इसको भी प्रोत्साहित कर रही है। यहां की ताकत बैंबू जैसे पारंपरिक उद्योग भी हैं। बीजेपी बैंबू किसानों को, बैंबू इंडस्ट्री को, यहां के MSMEs को प्रमोट कर रही है। और आपको याद होगा, बैंबू से जुड़े कानून में बदलाव भी हमारी ही सरकार ने किया है। हमारी सरकार ने जो मिशन ऑयल पाम शुरू किया है, पाम ऑयल के लिए उसका भी लाभ मणिपुर के किसानों को होगा।

साथियों,

विकास के इसी मॉडल के लिए आपको पूर्ण बहुमत की बीजेपी सरकार यहां बनानी है। आज भी मैं आपकी सेवा ज्यादा कर सकता हूं उसका कारण आपने दिल्ली में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है। मणिपुर में भी पूर्ण बहुमत की सरकार बहुत जरूरी है। बंद और ब्लॉकेड के, डर और हिंसा के, उन पुराने दिनों को अब हमें वापस नहीं लौटने देना है।

भाइयों-बहनों, 

आपके बीच में अनेक बार आया हूं मैं तो शायद गिनती करूंगा तो भी गलत हो जाएगा, इतनी बार आया हूं। संगठन का काम करता था, तब भी आता था, गुजरात में मुख्यमंत्री था तब भी आता था, आपने मुझे प्रधानमंत्री बना दिया तब भी आता हूं। शायद हिंदुस्तान में जितने प्रधानमंत्री हो गए, वे सब जितने बार आए होंगे उन सबसे ज्यादा मैं अकेला आया हूं। अब मुझे बताइये आपका ये स्नेह, आपका ये प्यार मुझे बार-बार आपकी सेवा करने के लिए यहां खींचकर के ले आता है। और मैं ये सेवा करता रहूंगा, लेकिन सेवा को बल देने के लिए मुझे यहां भी डबल इंजन की सरकार चाहिए भाइयों और इसलिए मैं आपके पास आया हूं। आपको बीजेपी को वोट देना है, एनडीए की सरकार बनानी है।

भारत इमा ना, यई-फरे, मनीपुर इमा ना, यई-फरे पुम ना मक्पू अमुक्क हन्ना खुरुम्जरी। भारत माता की… भारत माता की… भारत माता की… बहुत-बहुत धन्यवाद

Explore More
৭৬তম স্বাধীনতা দিবস উপলক্ষে লালকেল্লার প্রাকার থেকে প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদীর জাতির উদ্দেশে ভাষণের বঙ্গানুবাদ

জনপ্রিয় ভাষণ

৭৬তম স্বাধীনতা দিবস উপলক্ষে লালকেল্লার প্রাকার থেকে প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদীর জাতির উদ্দেশে ভাষণের বঙ্গানুবাদ
The Bharat Budget: Why this budget marks the transition from India to Bharat

Media Coverage

The Bharat Budget: Why this budget marks the transition from India to Bharat
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s address at the Krishnaguru Eknaam Akhand Kirtan for World Peace
February 03, 2023
শেয়ার
 
Comments
“Krishnaguru ji propagated ancient Indian traditions of knowledge, service and humanity”
“Eknaam Akhanda Kirtan is making the world familiar with the heritage and spiritual consciousness of the Northeast”
“There has been an ancient tradition of organizing such events on a period of 12 years”
“Priority for the deprived is key guiding force for us today”
“50 tourist destination will be developed through special campaign”
“Gamosa’s attraction and demand have increased in the country in last 8-9 years”
“In order to make the income of women a means of their empowerment, ‘Mahila Samman Saving Certificate’ scheme has also been started”
“The life force of the country's welfare schemes are social energy and public participation”
“Coarse grains have now been given a new identity - Shri Anna”

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय जयते परम कृष्णगुरु ईश्वर !.

कृष्णगुरू सेवाश्रम में जुटे आप सभी संतों-मनीषियों और भक्तों को मेरा सादर प्रणाम। कृष्णगुरू एकनाम अखंड कीर्तन का ये आयोजन पिछले एक महीने से चल रहा है। मुझे खुशी है कि ज्ञान, सेवा और मानवता की जिस प्राचीन भारतीय परंपरा को कृष्णगुरु जी ने आगे बढ़ाया, वो आज भी निरंतर गतिमान है। गुरूकृष्ण प्रेमानंद प्रभु जी और उनके सहयोग के आशीर्वाद से और कृष्णगुरू के भक्तों के प्रयास से इस आयोजन में वो दिव्यता साफ दिखाई दे रही है। मेरी इच्छा थी कि मैं इस अवसर पर असम आकर आप सबके साथ इस कार्यक्रम में शामिल होऊं! मैंने कृष्णगुरु जी की पावन तपोस्थली पर आने का पहले भी कई बार प्रयास किया है। लेकिन शायद मेरे प्रयासों में कोई कमी रह गई कि चाहकर के भी मैं अब तक वहां नहीं आ पाया। मेरी कामना है कि कृष्णगुरु का आशीर्वाद मुझे ये अवसर दे कि मैं आने वाले समय में वहाँ आकर आप सभी को नमन करूँ, आपके दर्शन करूं।

साथियों,

कृष्णगुरु जी ने विश्व शांति के लिए हर 12 वर्ष में 1 मास के अखंड नामजप और कीर्तन का अनुष्ठान शुरू किया था। हमारे देश में तो 12 वर्ष की अवधि पर इस तरह के आयोजनों की प्राचीन परंपरा रही है। और इन आयोजनों का मुख्य भाव रहा है- कर्तव्य I ये समारोह, व्यक्ति में, समाज में, कर्तव्य बोध को पुनर्जीवित करते थे। इन आयोजनों में पूरे देश के लोग एक साथ एकत्रित होते थे। पिछले 12 वर्षों में जो कुछ भी बीते समय में हुआ है, उसकी समीक्षा होती थी, वर्तमान का मूल्यांकन होता था, और भविष्य की रूपरेखा तय की जाती थी। हर 12 वर्ष पर कुम्भ की परंपरा भी इसका एक सशक्त उदाहरण रहा है। 2019 में ही असम के लोगों ने ब्रह्मपुत्र नदी में पुष्करम समारोह का सफल आयोजन किया था। अब फिर से ब्रह्मपुत्र नदी पर ये आयोजन 12वें साल में ही होगा। तमिलनाडु के कुंभकोणम में महामाहम पर्व भी 12 वर्ष में मनाया जाता है। भगवान बाहुबली का महा-मस्तकाभिषेक ये भी 12 साल पर ही होता है। ये भी संयोग है कि नीलगिरी की पहाड़ियों पर खिलने वाला नील कुरुंजी पुष्प भी हर 12 साल में ही उगता है। 12 वर्ष पर हो रहा कृष्णगुरु एकनाम अखंड कीर्तन भी ऐसी ही सशक्त परंपरा का सृजन कर रहा है। ये कीर्तन, पूर्वोत्तर की विरासत से, यहाँ की आध्यात्मिक चेतना से विश्व को परिचित करा रहा है। मैं आप सभी को इस आयोजन के लिए अनेकों-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ।

साथियों,

कृष्णगुरु जी की विलक्षण प्रतिभा, उनका आध्यात्मिक बोध, उनसे जुड़ी हैरान कर देने वाली घटनाएं, हम सभी को निरंतर प्रेरणा देती हैं। उन्होंने हमें सिखाया है कि कोई भी काम, कोई भी व्यक्ति ना छोटा होता है ना बड़ा होता है। बीते 8-9 वर्षों में देश ने इसी भावना से, सबके साथ से सबके विकास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया है। आज विकास की दौड़ में जो जितना पीछे है, देश के लिए वो उतनी ही पहली प्राथमिकता है। यानि जो वंचित है, उसे देश आज वरीयता दे रहा है, वंचितों को वरीयता। असम हो, हमारा नॉर्थ ईस्ट हो, वो भी दशकों तक विकास के कनेक्टिविटी से वंचित रहा था। आज देश असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को वरीयता दे रहा है, प्राथमिकता दे रहा है।

इस बार के बजट में भी देश के इन प्रयासों की, और हमारे भविष्य की मजबूत झलक दिखाई दी है। पूर्वोत्तर की इकॉनमी और प्रगति में पर्यटन की एक बड़ी भूमिका है। इस बार के बजट में पर्यटन से जुड़े अवसरों को बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को विशेष अभियान चलाकर विकसित किया जाएगा। इनके लिए आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा, वर्चुअल connectivity को बेहतर किया जाएगा, टूरिस्ट सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा। पूर्वोत्तर और असम को इन विकास कार्यों का बड़ा लाभ मिलेगा। वैसे आज इस आयोजन में जुटे आप सभी संतों-विद्वानों को मैं एक और जानकारी देना चाहता हूं। आप सबने भी गंगा विलास क्रूज़ के बारे में सुना होगा। गंगा विलास क्रूज़ दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज़ है। इस पर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी सफर कर रहे हैं। बनारस से बिहार में पटना, बक्सर, मुंगेर होते हुये ये क्रूज़ बंगाल में कोलकाता से आगे तक की यात्रा करते हुए बांग्लादेश पहुंच चुका है। कुछ समय बाद ये क्रूज असम पहुँचने वाला है। इसमें सवार पर्यटक इन जगहों को नदियों के जरिए विस्तार से जान रहे हैं, वहाँ की संस्कृति को जी रहे हैं। और हम तो जानते है भारत की सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी अहमियत, सबसे बड़ा मूल्यवान खजाना हमारे नदी, तटों पर ही है क्योंकि हमारी पूरी संस्कृति की विकास यात्रा नदी, तटों से जुड़ी हुई है। मुझे विश्वास है, असमिया संस्कृति और खूबसूरती भी गंगा विलास के जरिए दुनिया तक एक नए तरीके से पहुंचेगी।

साथियों,

कृष्णगुरु सेवाश्रम, विभिन्न संस्थाओं के जरिए पारंपरिक शिल्प और कौशल से जुड़े लोगों के कल्याण के लिए भी काम करता है। बीते वर्षों में पूर्वोत्तर के पारंपरिक कौशल को नई पहचान देकर ग्लोबल मार्केट में जोड़ने की दिशा में देश ने ऐतिहासिक काम किए हैं। आज असम की आर्ट, असम के लोगों के स्किल, यहाँ के बैम्बू प्रॉडक्ट्स के बारे में पूरे देश और दुनिया में लोग जान रहे हैं, उन्हें पसंद कर रहे हैं। आपको ये भी याद होगा कि पहले बैम्बू को पेड़ों की कैटेगरी में रखकर इसके काटने पर कानूनी रोक लग गई थी। हमने इस कानून को बदला, गुलामी के कालखंड का कानून था। बैम्बू को घास की कैटेगरी में रखकर पारंपरिक रोजगार के लिए सभी रास्ते खोल दिये। अब इस तरह के पारंपरिक कौशल विकास के लिए, इन प्रॉडक्ट्स की क्वालिटी और पहुँच बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। इस तरह के उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए बजट में हर राज्य में यूनिटी मॉल-एकता मॉल बनाने की भी घोषणा इस बजट में की गई है। यानी, असम के किसान, असम के कारीगर, असम के युवा जो प्रॉडक्ट्स बनाएँगे, यूनिटी मॉल-एकता मॉल में उनका विशेष डिस्प्ले होगा ताकि उसकी ज्यादा बिक्री हो सके। यही नहीं, दूसरे राज्यों की राजधानी या बड़े पर्यटन स्थलों में भी जो यूनिटी मॉल बनेंगे, उसमें भी असम के प्रॉडक्ट्स रखे जाएंगे। पर्यटक जब यूनिटी मॉल जाएंगे, तो असम के उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा।

साथियों,

जब असम के शिल्प की बात होती है तो यहाँ के ये 'गोमोशा' का भी ये ‘गोमोशा’ इसका भी ज़िक्र अपने आप हो जाता है। मुझे खुद 'गोमोशा' पहनना बहुत अच्छा लगता है। हर खूबसूरत गोमोशा के पीछे असम की महिलाओं, हमारी माताओं-बहनों की मेहनत होती है। बीते 8-9 वर्षों में देश में गोमोशा को लेकर आकर्षण बढ़ा है, तो उसकी मांग भी बढ़ी है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स सामने आए हैं। इन ग्रुप्स में हजारों-लाखों महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। अब ये ग्रुप्स और आगे बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था की ताकत बनेंगे। इसके लिए इस साल के बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं की आय उनके सशक्तिकरण का माध्यम बने, इसके लिए 'महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट' योजना भी शुरू की गई है। महिलाओं को सेविंग पर विशेष रूप से ज्यादा ब्याज का फायदा मिलेगा। साथ ही, पीएम आवास योजना का बजट भी बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है, ताकि हर परिवार को जो गरीब है, जिसके पास पक्का घर नहीं है, उसका पक्का घर मिल सके। ये घर भी अधिकांश महिलाओं के ही नाम पर बनाए जाते हैं। उसका मालिकी हक महिलाओं का होता है। इस बजट में ऐसे अनेक प्रावधान हैं, जिनसे असम, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों की महिलाओं को व्यापक लाभ होगा, उनके लिए नए अवसर बनेंगे।

साथियों,

कृष्णगुरू कहा करते थे- नित्य भक्ति के कार्यों में विश्वास के साथ अपनी आत्मा की सेवा करें। अपनी आत्मा की सेवा में, समाज की सेवा, समाज के विकास के इस मंत्र में बड़ी शक्ति समाई हुई है। मुझे खुशी है कि कृष्णगुरु सेवाश्रम समाज से जुड़े लगभग हर आयाम में इस मंत्र के साथ काम कर रहा है। आपके द्वारा चलाये जा रहे ये सेवायज्ञ देश की बड़ी ताकत बन रहे हैं। देश के विकास के लिए सरकार अनेकों योजनाएं चलाती है। लेकिन देश की कल्याणकारी योजनाओं की प्राणवायु, समाज की शक्ति और जन भागीदारी ही है। हमने देखा है कि कैसे देश ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और फिर जनभागीदारी ने उसे सफल बना दिया। डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता के पीछे भी सबसे बड़ी वजह जनभागीदारी ही है। देश को सशक्त करने वाली इस तरह की अनेकों योजनाओं को आगे बढ़ाने में कृष्णगुरु सेवाश्रम की भूमिका बहुत अहम है। जैसे कि सेवाश्रम महिलाओं और युवाओं के लिए कई सामाजिक कार्य करता है। आप बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ और पोषण जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने की भी ज़िम्मेदारी ले सकते हैं। 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' जैसे अभियानों से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने से सेवाश्रम की प्रेरणा बहुत अहम है। योग हो, आयुर्वेद हो, इनके प्रचार-प्रसार में आपकी और ज्यादा सहभागिता, समाज शक्ति को मजबूत करेगी।

साथियों,

आप जानते हैं कि हमारे यहां पारंपरिक तौर पर हाथ से, किसी औजार की मदद से काम करने वाले कारीगरों को, हुनरमंदों को विश्वकर्मा कहा जाता है। देश ने अब पहली बार इन पारंपरिक कारीगरों के कौशल को बढ़ाने का संकल्प लिया है। इनके लिए पीएम-विश्वकर्मा कौशल सम्मान यानि पीएम विकास योजना शुरू की जा रही है और इस बजट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। कृष्णगुरु सेवाश्रम, विश्वकर्मा साथियों में इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाकर भी उनका हित कर सकता है।

साथियों,

2023 में भारत की पहल पर पूरा विश्व मिलेट ईयर भी मना रहा है। मिलेट यानी, मोटे अनाजों को, जिसको हम आमतौर पर मोटा अनाज कहते है नाम अलग-अलग होते है लेकिन मोटा अनाज कहते हैं। मोटे अनाजों को अब एक नई पहचान दी गई है। ये पहचान है- श्री अन्न। यानि अन्न में जो सर्वश्रेष्ठ है, वो हुआ श्री अन्न। कृष्णगुरु सेवाश्रम और सभी धार्मिक संस्थाएं श्री-अन्न के प्रसार में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। आश्रम में जो प्रसाद बँटता है, मेरा आग्रह है कि वो प्रसाद श्री अन्न से बनाया जाए। ऐसे ही, आज़ादी के अमृत महोत्सव में हमारे स्वाधीनता सेनानियों के इतिहास को युवापीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अभियान चल रहा है। इस दिशा में सेवाश्रम प्रकाशन द्वारा, असम और पूर्वोत्तर के क्रांतिकारियों के बारे में बहुत कुछ किया जा सकता है। मुझे विश्वास है, 12 वर्षों बाद जब ये अखंड कीर्तन होगा, तो आपके और देश के इन साझा प्रयासों से हम और अधिक सशक्त भारत के दर्शन कर रहे होंगे। और इसी कामना के साथ सभी संतों को प्रणाम करता हूं, सभी पुण्य आत्माओं को प्रणाम करता हूं और आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!