Along with Shraddhanjali, we have to dedicate Karyanjali to Mahatma Gandhi & Swachhagraha is the biggest means to do that: PM 
The dream of Mahatma Gandhi's clean, healthy and prosperous India should be the dream of every Indian: PM 
Mahatma Gandhi attached more importance to cleanliness than freedom. He made Swachhta an integral part of his life: PM Modi 
The aim of Satyagraha was independence and the aim of Swachhagraha is to create a clean India, says PM Modi

आज हम 20वीं सदी के एक महान घटनाक्रम का समारोह का शुभांरभ करने के लिए एकत्र हुए हैं। 100 वर्ष पहले आज का ही दिन था, जब गांधीजी पटना पहुंचे थे, और चंपारण के अपने सफर की शुरूआत की थी। चंपारण की जिस धरती को भगवान बुद्ध के प्रवचन का आशीर्वाद मिला था, जो धरती सीता माता के पिता, जनक के राज्‍य का हिस्‍सा रही थी; वहां के किसान कठोरत्‍तम स्थिति का सामना कर रहे थे। न सिर्फ चंपारण कि किसानों को, शोषितों को, पीडि़तों को गांधीजी ने एक रास्‍ता दिखाया, बल्कि पूरे देश को ये एहसास कराया कि शांतिपूर्ण सत्याग्रह की क्‍या शक्ति होती है।

दोस्‍तों, हमारे देश का इतिहास सिर्फ कुछ व्‍यक्तियों तक सिमटा नहीं रहा, सिर्फ कुछ परिवारों तक सिमटा नहीं रहा। हमारा देश का इतिहास वृहद, व्‍यापक; एक ऐसा इतिहास, जो नये रूप और संदर्भों में बार-बार लौटता है और हमें मजबूर करता है कि हम अपनी आंखें खोलें और अपने राष्‍ट्र की गौरवशाली संस्‍कृतिक परम्‍परा को पहचानें। इतिहास के कुछ पन्‍ने ऐसे होते हैं, कि वे जब भी आपको या आप उनको छूते हैं, खोलते हैं तो आपको कुछ नया बनाकर जाते हैं। इसे पारस स्‍पर्श कहते हैं, इतिहास का पारस स्‍पर्श। चंपारण का सत्‍याग्रह ऐसा ही पारस है। इसलिए बहुत आवश्‍यक है कि हम ऐसे ऐतिहासिक अवसरों को जानें, उनसे जुड़ें, हो सकें तो उन्‍हें जीने का प्रयास करें।

अब यहां एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया, online interactive quiz का आरंभ हुआ है, नृत्‍य-नाटिका भी प्रस्‍तुत की गई है। चंपारण सत्‍याग्रह के 100 साल पूरे होने पर होने वाले ऐसे कार्यक्रम सिर्फ औपचारिकता नहीं हैं। ये हमारे लिए एक पवित्र अवसर है। बापू के आदर्शों से प्रेरित होकर देश-हित के लिए खुद को संकल्पित करने का, समर्पित करने का।

साथियो, हमें अब महात्‍मा गांधी को श्रद्धांजलि के साथ-साथ कार्यांजलि भी अर्पित करनी है। अपने कार्यों को उन्‍हें अर्पित करना है। और उसके सबसे बड़ा माध्‍यम है स्‍वच्‍छाग्रह। सत्‍य के प्रति आग्रह की तरह ही स्‍वच्‍छता के प्रति भी आग्रह।

दोस्‍तों, 1917 में, nineteen seventeen में, जब गांधीजी चंपारण गए तो उनका इरादा वहां बहुत लम्‍बे समय तक रुकने का नहीं था। वे चंपारण की स्थिति के बारे में बहुत जानते भी नहीं थे। लेकिन जब गांधीजी वहां पहुंचे तो कुछ हफ्ते नहीं बल्कि कई महीनों तक वहां रुके। चंपारण ने ही उन्‍हें मोहनदास कर्मचंद गांधी से महात्‍मा गांधी बनाया था। चंपारण पहुंचने से पहले वो सत्‍याग्रह की ताकत से खुद अवगत थे, वो उसे जानते थे। लेकिन उन्‍हें पता था कि सिर्फ उनके सत्‍याग्रही बनने से इच्छित परिणाम प्राप्‍त नहीं होंगे। वो देश के जनमानस को सत्‍याग्रह की ताकत का एहसास कराना चाहते थे।

जब Magistrate ने उन्‍हें चंपारण से जाने का आदेश दिया तो उन्‍होंने कहा था, इस आदेश से इंकार वो अदालत की अवमानना के लिए नहीं कर रहे हैं, बल्कि वो ऐसा अपनी अतंरात्‍मा की आवाज और अपने अस्तित्‍व के सम्‍मान के लिए कर रहे हैं। पूरा अंग्रेजी शासन गांधी के उस निर्णय से back-foot पर चला गया। जब गांधीजी ने कहा था कि मैं जेल जाने के लिए तैयार हूं, अंग्रेजों ने सोचा नहीं था। जनता देख रही थी कि दक्षिण अफ्रीका से लौटा एक बैरिस्‍टर यहां चंपारण में आकर किस तरह जेल जाने के लिए तैयार हो गया। इतनी गर्मी में पूरे इलाके की धूल खा रहा है। तपती धूप में कभी बैलगाड़ी में, कभी इक्‍के और कभी पैदल ही एक जगह से दूसरी जगह गांधी चला जा रहा था।

आप ध्‍यान दीजिए गांधी जी इस वक्‍त लोगों के thought process को जगा रहे थे। नील की खेती करने वाले किसानों से उनके बयान लिए जा रहे थे, जांच की जा रही थी। लेकिन इस प्रक्रिया में गांधीजी खुद को लोगों से जोड़़ करके, खुद को खपा करके, खुद का उदाहरण प्रस्‍तुत करके, जन-जन का- उसकी शक्ति को आपस में जोड़ रहे थे।

गांधीजी कहते थे, ''मेरा जीवन ही मेरा दर्शन है।'' और यही हमने चंपारण में देखा है। गांधीजी ने अपनी आत्‍मकथा में लिखा है कि कैसे लोगों को अपनी शक्ति का एहसास हुआ और ये भी समय आया कि परिवर्तन हो सकता है, बदलाव हो सकता है। उन्‍होंने लिखा है 100 साल से चले आने वाले तीन कठिया कानून के रद्द होने ही नील की खेती करवाने वाले अंग्रेजों का राज अस्‍त हुआ। जनता का जो समुदाय बराबर दबा ही रहता था, उसे अपनी शक्ति का कुछ और भान हुआ। और लोगों का ये वहम हुआ कि नील का दाग होने पर धुल नहीं सकता।

यानि ऐसी स्थिति जब लोग ये मानने लगें कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ परिवर्तन आ ही नहींसकता, उसे गांधी जी ने लोगों का भ्रम कहा है। इस भ्रम को उन्होंने तोड़ा, और लोगों को अपनी शक्ति का एहसास कराया।

भाइयों और बहनों, गांधी जी मूलरूप से स्वच्छाग्रही थे। वो कहते थे- “स्वच्छता आजादी से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है”। वे यह देखकर व्यथित हो जाते थे कि गांवों में लोग अज्ञानता और बेपरवाही के कारण गंदगी और अस्वच्छ स्थितियों में रहते हैं। 1917 में ही एक कार्यक्रम के दरम्‍यान पूज्‍य बापू ने कहा था कहा था, “जब तक हम अपने गांवों और शहरों की स्थितियों को नहीं बदलते, अपने आप को बुरी आदतों से मुक्त नहीं करते और बेहतर शौचालय नहीं बनाते तब तक स्वराज का हमारे लिए कोई महत्व नहीं है।"

एक तरह से कहें तो देश में स्वच्छता आंदोलन का मूल स्थान भी चंपारण को माना जा सकता है। उन्होंने साफ-सफाई और स्वच्छता को गांधीवादी जीवन-शैली का एक अभिन्न हिस्सा बनाया। उनका सपना था सभी के लिए संपूर्ण स्वच्छता।

दोस्तों, चंपारण से वहां जो कुछ भी मंथन हुआ, जो प्रयास हुए, उसमें से हमें पंचामृत मिला। जन-सामान्‍य को जोड़ करके, मंथन करके, कार्य करके, संघर्ष करके इस पंचामृत से देश के स्वतंत्रता आंदोलन को नई धार मिली।

अगर हम बारीकी से देखें तो पांएगे कि चंपारण में गांधीजी ने जो कुछ किया, उससे पांच अलग-अलग अमृत देश के समक्ष प्रस्‍तुत हुए। ये पंचामृत आज भी देश के लिए उतना ही महत्‍वपूर्ण है-

पहला अमृत - सत्‍याग्रह की ताकत से लोग परिचित हुए,

दूसरा अमृत - जनशक्ति की ताकत से लोग परिचित हुए,

तीसरा अमृत - स्‍वच्‍छता और शिक्षा को लेकर भारतीय जनमानस में नई जागृति आई,

चौथा अमृत - महिलाओं की स्थिति सुधारने का प्रयास हुआ,

और पांचवां अमृत - अपने हाथों से काते गए वस्‍त्र पहनने की सोच पैदा हुई। ये पंचामृत चंपारण आंदोलन का सार हैं।

साथियों, जब मैं चपांरण की बात करता हूं, तो मुझे बालमोहन यानी बाल कृष्‍ण की याद आती है। मोहन से मोहन तक कैसी यात्रा चली है; एक सुदर्शन चक्रधानी मोहन और दूसरा चरखाधारी मोहन। हम सबको पता है कि जब माता यशोदा बहुत परेशान थीं कि उनके बालक ने मिट्टी खा ली है। इसी चिंता में जब उन्‍होंने बाल मोहन से मुंह खोलने के लिए कहा, तो उन्‍होंने माता यशोदा को पूरे ब्रह्मांड के दर्शन करा दिए थे। ऐसा करके बाल मोहन ने अपनी माता को चिंता से मुक्ति दिलाई।

जब मैं चंपारण की बात करता हूं तो मुझे किशोर मोहन की भी याद आती है। वो चक्रधारी मोहन जब किशोर था, जिसे हम कृष्‍ण के रूप में जानते हैं; जो रासलीला करता था, बांसुरी बजाता था। किशोर मोहन ने जब घनघोर बारिश से गांववालों की रक्षा के लिए गोवर्धन उठाया तो बाकी गांव वालों से भी कहा कि आप भी अपनी लाठी ले करके खड़े हो जाइए, तब जा करके गोवर्धन उठेगा। जब गोवर्धन पर्वत उठा तो हर एक को लग रहा था कि वो मेरी ताकत से उठा हैृ; मेरी लाठी से उठा है। और ऐसा करके किशोर मोहन ने जन-जन के खुद की ताकत और सामूहिक ताकत से परिचित कराया था।

ठीक इसी तरह हमारे मोहन, महात्‍मा गांधी ने लोगों को गुलामी की चिंता से मुक्‍त किया, उनहें वो रास्‍ता दिखाया जिस पर चलकर आजादी मिल सकती थी। हमारे मोहन ने लोगों की जनशक्ति को जगाया और उन्‍हें सत्‍याग्रह से स्‍वरूछाग्रह की शक्ति से परिचित कराया।

जनशक्ति जागरण के इस अभियान में बापू ने महिलाओं को भी बराबर का सहभागी बनाया। चंपारण में भी महिलाओं की स्थिति को देखकर वो सोचने पर मजबूर हुए कि क्‍यों ना लोग अपने ही हाथ से धागा बुनें और खुद वस्‍त्र बनाएं। वो इसे सशक्तिकरण का भी एक जरिया मानते थे। खादी के विकसित होने के पीछे महात्‍मा गांधीजी का चंपारण प्रवास भी बहुत बड़ी वजह रही है।

सा‍थियों, सत्‍याग्रह ने गांधी जी के नेतृत्‍व में हमें आजादी दिलाई, किंतु स्‍वतंत्रता के बाद गांधी जी का स्‍वच्‍छ भारत का सपना अधूरा ही रह गया था। सात दशक बाद भी हम इस बुराई से मुक्‍त नहीं हो पाए। इसलिए जब 2014 में मैंने लालकिले से हर घर में शौचालय की बात की, तो लोग हैरान थे कि इस तरह बात मैं क्‍यों कर रहा हूं।

दोस्‍तों, स्‍वच्‍छ भारत मिशन बापू के अधूरे सपनों को पूरा करने का अभियान हे। ये सपना लगभग 100 वर्षों से अधूरा है और हमें इसे मिल करके पूरा करना है। मुझे खुशी है कि आज स्‍वच्‍छ भारत मिशन के जरिए देश के लोग बापू के सपने को पूरा करने के लिए उठ खड़़े हुए हैं। स्‍वच्‍छ भारत अभियान सच्‍चे अर्थों में एक जन-आंदोलन बनता चला जा रहा है। समाज का हर वर्ग इस स्‍वच्‍छाग्रह से जुड़ रहा है। जब स्‍वच्‍छ भारत किशन शुरू हुआ था तो उस समय केवल 42 प्रतिशत ग्रामीण आबादी ही शौचालयों का उपयोग करती थी। आज ये बढ़ करके 63 प्रतिशत पर पहुंचे हैं।

पिछले ढ़ाई सालों में एक लाख 80 हजार से ज्यादा गांव और 130 जिले खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर चुके हैं। अब राज्यों में भी एक होड़ सी शुरू हुई है, एक प्रतिस्पर्धा शुरू हुयी है कि कौन पहले खुद को खुले में शौच से मुक्त या Open Defecation Free राज्य घोषित करता है।

आज की स्थिति है कि सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और केरल पूरी तरह ODF उन्होंने घोषित किया हैं। गुजरात, हरियाणा, उत्तराखंड और कुछ अन्य राज्य भी खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने की ओर बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। बहुत जल्द हमें उसके भी समाचार पहुंचेंगे।

गंगा तट के किनारे बने गांवों को प्राथमिकता के आधार पर Open Defecation Free बनाया जा रहा है। मुझे आपको ये बताते हुए खुशी है कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल, जिन पाँच राज्यों से गंगा जी होकर गुजरती हैं, वहां गंगा किनारे के 75 प्रतिशत गांवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया है। गंगा किनारे बसे गांवों में कचरे के प्रबंधन की योजनाएं लागू की जा रही हैं ताकि गांव का कचरा भी नदी में ना बहाया जाए। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही गंगा तट पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा।

भाइयों और बहनें, आज सभी सरकारी स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय हैं। अब बच्चों के syllabus में स्वच्छता से जुड़े chapter शामिल किए जा रहे हैं ताकि उन्हें शुरू से ही इसके फायदों और नुकसान के बारे में पता चले, और वो स्वच्छता को अपनी जिंदगी का, अपनी आदत का हिस्सा बनाएं।

दोस्तों, स्वच्छ भारत मिशन ने ही हमें कार्यांजलि का एक और नया मंत्र दिया है। ये मंत्र है Waste से Wealth. घरों से जो गंदगी निकलती है, बिल्डिंग बनाने के दौरान जो कचरा निकलता है, वो भी कमाई का एक जरिया हो सकता है। इससे बिजली बनाई जा सकती है, खाद बनाई जा सकती है, इसे Recycle करके construction से जुड़े कामों में उन्हें re-use किया जा सकता है। और इसलिए Waste से Wealth पर भी जोर दिया जा रहा है और इसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए।

सरकार के अलग-अलग विभाग भी स्वच्छता को बढ़ाने के लिए, लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए नए-नए initiative ले रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। आपने देखा होगा कि कैसे रेलवे में गंदगी से जुड़ा एक भी ट्वीट होने पर कितनी तेजी से उसको respond किया जाता है। वरना आप लोग याद करिए, पहले कैसे रेल के डिब्बों में, प्लेटफॉर्म पर गंदगी को व्यवस्था का हिस्सा मान लिया गया था।

अभी हाल ही में पेट्रोलियम मंत्रालय ने swachhta @ petrol pump के नाम से एक मोबाइल app लॉन्च किया है। अगर पेट्रोल पंप पर बने शौचालयों में गंदगी है, वो साफ नहीं हैं तो इसकी शिकायत तुरंत इस app के माध्यम से की जा सकती है। देश के लगभग 55 हजार पेट्रोल पंपों पर ये सुविधा उलब्ध होगी।

इसी कड़ी में दिल्ली में एक राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र की भी स्थापना की जा रही है। ये केंद्र स्वच्छता अभियान से जुड़ी सभी जानकारियां, आधुनिक तकनीकें लोगों तक पहुंचाने में मददगार साबित होगा।

दोस्तों, अलग-अलग स्तर पर, गवर्नमेंट से लेकर गांव तक स्वच्छाग्रह का अभियान इस समय देश में छिड़ा हुआ है, वो अभूतपूर्व है। अब लोगों के thought-process में आ रहा है कि गंदगी नहीं फैलानी है, बच्चे बड़ों को टोक रहे हैं, शिकायत कर रहे हैं। और इसलिए स्वच्छता, स्वच्छाग्रह इस अभियान को आगे बढ़ने के लिए शिकायत के साथ ही एक भाव ये भी तो आ रहा है कि हमें गंदगी नहीं करनी है, अपने आसपास घर, दफ्तर, सड़क-शहर को साफ रखना है। स्वच्छता के प्रति ये भाव ही स्वच्छाग्रह है, स्वच्छता के लिए किया गया कार्य ही बापू को कार्यांजलि है।

दोस्तों, गांधी जी सिर्फ व्यवस्था परिवर्तन ही नहीं मूल्य परिवर्तन भी चाहते थे। उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है- “मैं चाहता हूं कि भारत इस बात को पहचान ले कि वह शरीर नहीं बल्कि अमर आत्मा है, जो हर एक शारीरिक कमजोरी के ऊपर उठ सकती है और सारी दुनिया के सम्मिलित शारीरिक बल को चुनौती दे सकती है”।

हमें देश की आत्मा को पहचानना होगा। बदलाव आ सकता है, इस सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। जितनी ये सोच मजबूत होगी, उतना ही NEW INDIA की नीव मजबूत होगी। हमें स्वच्छता से जुड़े अपने लक्ष्य तय करने होंगे और उन्हें प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करना होगा। कोई वजह नहीं कि भारत की पहचान एक अस्वच्छ देश के तौर पर रहे। कोई कारण नहीं कि हमारा देश स्वच्छ नहीं हो पाए। कोई कारण नहीं के हम स्वच्छाग्रह के इस अभियान को पूरा ना कर पाएं। महात्मा गांधी के एक स्वच्छ, स्वस्थ और खुशहाल भारत का सपना प्रत्येक भारतीय का सपना होना चाहिए। इस मिशन की सफलता ही, बापू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, सच्ची कार्यांजलि होगी।

मैं सच में आग्रह करता हूं देशवासियों, 2019 जब गांधी के 150 साल होंगे, 1915 में जब गांधी भारत लौटे थे, दो साल के भीतर-भीतर 1917 में, चंपारण में मोहनदास कर्मचंद गांधी महात्‍मा गांधी बन गए। बारदौली के सत्‍याग्रह में वल्‍लभ भाई पटेल, सरदार पटेल बन गए थे। देश उनके पीछे चल पड़ा था। हमारे लिए चंपारण सत्‍याग्रह आजादी के आंदोलन की एक नई धारा को सशक्‍त बनाने का प्रारंभ बिन्‍दु था। आज उसकी जब शताब्‍दी मना रहे हैं तब स्‍वच्‍छाग्रह का हमारा संकल्‍प भी सत्‍याग्रह से स्‍वच्‍छाग्रह की यात्रा; और ये दोनों चीजें गांधी की देन हैं। उस समय सत्‍याग्रह आजादी के लिए आवश्‍यक था, इस समय स्‍वच्‍छाग्रह देश को गंदगी से मुक्ति के लिए आवश्‍यक है। और गंदगी से मुक्ति मतलब गरीबों का कल्‍याण। अगर सचमुच में गरीबों की सेवा करनी है, उनको बीमारियों से बचाना है, उनको जिंदगी में कोई बदलाव लाना है तो गंदगी से मुक्ति के इस मंत्र को ले करके देशवासियों हम को चलना है।

मैं फिर से एक बार चंपारण की सत्‍याग्रह की शताब्‍दी के प्रारब्‍ध में ही, सालभर चंपारण सत्‍याग्रह की शताब्‍दी हो, साबरमती आश्रम को सौ वर्ष होने जा रहे हैं, जहां महात्‍मा गांधी ने तपस्‍या की मेरे हिसाब से। और 150 गांधी के 2019 में हमारे सामने हैं। ये ऐसा कालखंड है, जो हम 20वीं सदी के गांधी को 21वीं सदी में जीने का, आधुनिक रूप-रंग के साथ जीने का, नई सोच के साथ जीने का, नये संकल्‍प के साथ जीने का, नई उम्‍मीदों को जगाने के लिए जीने का एक नया अवसर के रूप में ले करके चलने का अगर हम करके चलेंगे, मुझे विश्‍वास है कि वही सच्‍चे अर्थ में कार्यांजलि होगी। श्रद्धांजलि हमने बहुत दी है, श्रद्धांजलि देंगे भी, लेकिन अब आवश्‍यकता है कार्यांजलि की। हमारा संकल्‍प, हमारा परिश्रम उन सपनों को साकार करने के लिए है। हमारी नित्‍य-निरंतर कोशिश है उस कार्यांजलि के द्वारा बापू के सपनों के भारत को हम आंखों के सामने देख सकते हैं। इसी एक भावना के साथ, इस महान अवसर को देशवासी जी करके दिखाएं; इसी एक अपेक्षा मैं सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं।

वंदे मातरम। भारत माता की जय।

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PM to Visit Gujarat and Maharashtra on 8th September
September 07, 2026
PM to Lay Foundation Stones, Inaugurate and Dedicate to the Nation Development Projects Worth More Than ₹35,000 Crore in Vadodara
PM to Dedicate Three Key Sections of Western Dedicated Freight Corridor to the Nation, Marking Completion of the Project
PM to Lay Foundation Stone for three Railway Projects and three Highway Projects
PM to Inaugurate Global Fintech Fest 2026 in Mumbai
Theme of GFF 2026: “Potential to Impact: Agentic AI, Tokenisation, Quantum - Trusted, Connected, Global Systems for Inclusive Finance”

Prime Minister Shri Narendra Modi will visit Gujarat and Maharashtra on 8th September 2026. At around 12 noon, Prime Minister will lay the foundation stones, inaugurate and dedicate to the nation various development projects worth more than ₹35,000 crore in Vadodara. He will also address the gathering on the occasion.

At around 5:45 PM, Prime Minister will inaugurate Global Fintech Fest (GFF) 2026 in Mumbai and address the gathering as well.

PM in Vadodara

Prime Minister will dedicate to the nation three important sections of the Western Dedicated Freight Corridor (WDFC), covering 326 route kilometres and developed at a cost of more than ₹20,700 crore. These include the New Sanand (N)- New Makarpura, New Umbergaon-New Saphale and New Saphale- New JNPT sections.

The direct connectivity of Jawaharlal Nehru Port Authority (JNPA) will facilitate faster movement of EXIM cargo, strengthen connectivity between industrial centres and ports, reduce logistics costs and help decongest Mumbai’s railway network.

With the commissioning of these sections, the Dedicated Freight Corridor (DFC) network will stand fully operational across its entire length. The dedicated freight infrastructure will further strengthen the country’s logistics ecosystem by improving multimodal connectivity, reducing transit time and facilitating seamless movement of cargo across different regions.

Prime Minister will also flag off freight train services from New Sanand (North), New Makarpura, New Umbergaon and New JNPT, Mumbai. In addition, he will flag off a new passenger train service between Tanda Road and Vadodara (Pratapnagar).

Prime Minister will dedicate to the nation the Jobat–Tanda Road new rail line, developed as part of the Chhota Udepur–Dhar project. The new rail line will connect remote and tribal areas of Alirajpur with the national rail network.

Prime Minister will lay the foundation stone for three railway projects spanning 329 kilometres and costing more than ₹9,700 crore. These include the Vadodara-Ratlam third and fourth lines, Miyagam Karjan-Choranda–Malsar gauge conversion and the Vishwamitri-Dabhoi doubling project. The projects will enhance passenger and freight capacity, ease congestion and strengthen connectivity between Gujarat and Madhya Pradesh.

Prime Minister will lay the foundation stone for three National Highway projects costing around ₹1,780 crore. These include six-laning of the Kamrej-Chalthan section of NH-48; construction of additional structures, including major bridges over the Tapi and Narmada, on the Vadodara-Surat section of NH-48; and grade-separated structures at Abhava, Mindhola and Khajod junctions on NH-53.

Prime Minister will also lay the foundation stone for and inaugurate various Government of Gujarat projects worth around ₹2,600 crore. Major projects for which the foundation stone will be laid include Vadodara Urban Development Authority Ring Road Phase II and a 110 MW floating solar project at Kadana Dam, construction of new office of Vadodara Municipal Corporation, among others. Projects to be inaugurated include housing projects under the Pradhan Mantri Awas Yojana (PMAY) and a water-supply project for 11 villages in eastern Vadodara, among others.

PM in Mumbai

Prime Minister will inaugurate Global Fintech Fest (GFF) 2026, one of the world’s largest and most influential annual fintech conferences.

The seventh edition of the Global Fintech Fest is being held from 8th to 11th September 2026 in Mumbai. Since 2020, GFF has emerged as an international thought leadership platform bringing together policymakers, regulators, central banks, financial institutions, fintechs, technology companies, investors, academia and other global stakeholders to deliberate on shaping the future of finance.

The theme of GFF 2026 is “Potential to Impact: Agentic AI, Tokenisation, Quantum - Trusted, Connected, Global Systems for Inclusive Finance.”

GFF 2026 has been designed as a convergence point for policy, regulation, technology, capital and industry on a common platform. It seeks to build on India’s leadership in digital payments and financial inclusion and move from potential to impact. The discussions will focus on how Agentic AI, programmable finance, quantum technologies and other critical and emerging technologies can create trusted, inclusive and measurable outcomes for citizens, enterprises and economies globally.